भाण्डागारण निगम अधिनियम, 1962
(1962 का अधिनियम संख्यांक 58)
झ्र्19 दिसम्बर, 1962ट
कृषि उपज और कतिपय अन्य वस्तुओं के भाण्डागारण के प्रयोजन
के लिए निगमों के निगमन और विनियमन का तथा
उनसे सम्बन्धित विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तेरहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :श्न्
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भश्न्(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भाण्डागारण निगम अधिनियम, 1962 है ।
(2) इसका विस्तार ॥। संपूर्ण भारत पर है ।
(3) यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएंश्न्इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,श्न्
(क) कृषि उपजञ्ज् से निम्नलिखित वस्तु-वर्गों में से कोई वर्ग अभिप्रेत है, अर्थात् :श्न्
(त्) खाद्य पदार्थ जिसके अन्तर्गत खाद्य तिलहन भी हैं,
(त्त्) पशुओं का चारा जिसके अन्तर्गत खली और अन्य सारकृत चारे भी हैं,
(त्त्त्) कच्ची कपास, चाहे वह ओटी हुई हो या न हो और बिनौला,
(त्ध्) कच्चा पटसन, और
(ध्) वनस्पति तेल ;
(ख) समुचित सरकारञ्ज् से केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के संबंध में केन्द्रीय सरकार और राज्य भाण्डागारण निगम के सम्बन्ध में राज्य सरकार अभिप्रेत है ;
(ग) केन्द्रीय भाण्डागारण निगमञ्ज् से धारा 3 के अधीन स्थापित केन्द्रीय भाण्डागारण निगम अभिप्रेत है ;
(घ) सहकारी सोसाइटीञ्ज् से सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1912 (1912 का 2) के अधीन या सहकारी सोसाइटियों से सम्बन्धित ऐसी किसी अन्य विधि के अधीन, जो किसी राज्य में तत्समय प्रवृत्त हो, रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत समझी जाने वाली ऐसी कोई सोसाइटी अभिप्रेत है, जो कृषि उपज या किसी अधिसूचित वस्तु के प्रसंस्करण, विपणन, भाण्डाकरण, निर्यात या आयात में या बीमा कारबार में लगी हुई है तथा इसके अन्तर्गत सहकारी भूमि बंधक बैंक भी है ;
झ्र्(घघ) राष्ट्रीयकृत बैंकञ्ज् से बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट तत्स्थानी नया बैंक झ्र्या बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई तत्स्थानी नया बैंकट अभिप्रेत है ;ट
(ङ) अधिसूचित वस्तुञ्ज् से (कृषि उपज से भिन्न) ऐसी कोई वस्तु अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित वस्तु घोषित करे और जो ऐसी वस्तु है जिसके बारे में संसद् को संविधान की सप्तम् अनुसूची की सूची 3 की प्रविष्टि 33 के आधार पर विधि बनाने की शक्ति प्राप्त है ;
(च) विहितञ्ज् से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(छ) मान्यताप्राप्त संगमञ्ज् से ऐसा संगम अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा तत्समय अग्रिम संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1952 (1952 का 74) की धारा 6 के अधीन मान्यताप्राप्त है ;
(ज) रिजर्व बैंकञ्ज् से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है ;
(झ) अनुसूचित बैंकञ्ज् से ऐसा बैंक अभिप्रेत है जो तत्समय, भारतीय रिजर्व अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित है झ्र्और इसके अन्तर्गत राष्ट्रीयकृत बैंक भी हैट ;
(ञ) स्टेट बैंकञ्ज् से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक अभिप्रेत है ;
(ट) राज्य भाण्डागारण निगमञ्ज् से ऐसा भाण्डागारण निगम अभिप्रेत है जो राज्य के लिए इस अधिनियम के अधीन स्थापित है या स्थापित समझा गया है ;
(ठ) भाण्डागारण निगमञ्ज् से ऐसा भाण्डागारण निगम अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के अधीन स्थापित है, या स्थापित समझा गया है ;
(ड) वर्षञ्ज् से वित्तीय वर्ष अभिप्रेत है ।
झ्र्2क. किसी राज्य में अप्रवृत्त किसी विधि अथवा वहां अविद्यमान किसी कृत्यकारी के प्रति निर्देशों का अर्थान्वयनश्न्इस अधिनियम में किसी राज्य में अप्रवृत्त किसी विधि अथवा वहां अविद्यमान किसी कृत्यकारी के प्रति निर्देश का उस राज्य के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि अथवा वहां विद्यमानी तत्स्थानी कृत्यकारी के प्रति निर्देश है ।ट
अध्याय 2
केन्द्रीय भाण्डागारण निगम
3. केन्द्रीय भाण्डागारण निगमश्न्(1) केन्द्रीय सरकार, ऐसी तारीख से, जिसे वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के नाम से एक निगम की स्थापना करेगी । वह शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा जिसे सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति प्राप्त होगी और वह उक्त नाम से वाद लाएगा और उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।
(2) केन्द्रीय भाण्डागार निगम का प्रधान कार्यालय नई दिल्ली में झ्र्या ऐसे अन्य स्थान पर होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करेट ।
4. शेयर पूंजी और शेयरधारीश्न्(1) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम की प्राधिकृत शेयर पूंजी बीस करोड़ रुपए होगी जो एक-एक हजार रुपए अंकित मूल्य के प्रति शेयर के दो लाख शेयरों में विभाजित होगी । ऐसे शेयर, जिन्हें निर्गमित करना शेष रह जाता है, समय-समय पर जैसे और जब केन्द्रीय भाण्डागारण निगम उचित समझे, केन्द्रीय सरकार की मंजूरी से निर्गमित किए जा सकेंगे :
झ्र्परन्तु केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय भाण्डागारण निगम की प्राधिकृत शेयर पूंजी को ऐसे विस्तार तक और ऐसी रीतिह से, जो वह सरकार अवधारित करे, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, बढ़ा सकेगी ।ट
(2) झ्र्केन्द्रीय सरकार, विधि द्वारा इस प्रयोजन के लिए संसद् द्वारा किए गए विनियोग के पश्चात्ट किसी समय निर्गमित शेयर पूंजी का चालीस प्रतिशत प्रतिश्रुत करेगी और शेयर पूंजी का साठ प्रतिशत निम्नलिखित संस्थाओं द्वारा ऐसी अवधि के अन्दर और उस अनुपात में प्रतिश्रुत किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे, अर्थात् :श्न्
(क) स्टेट बैंक,
(ख) अन्य अनुसूचित बैंक,
(ग) सहकारी सोसाइटियां,
(घ) बीमा कम्पनियां, विनिधान न्यास और अन्य वित्तीय संस्थाएं,
(ङ) कृषि उपज या किसी अन्य अधिसूचित वस्तु में व्यवहार करने वाले मान्यताप्राप्त संगम और कम्पनियां ।
(3) यदि उपधारा (2) में निर्दिष्ट शेयर पूंजी के साठ प्रतिशत का कोई प्रभाग अनाबंटित रह जाता है, तो वह केन्द्रीय सरकार और स्टेट बैंक द्वारा ऐसे अनुपात में, जो उनमें परस्पर करार पाया गया हो, और ऐसे करार के अभाव में, केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित अनुपात में प्रतिश्रुत किया जा सकेगा ।
(4) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के शेयर केन्द्रीय भाण्डागारण निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसरण में, केन्द्रीय सरकार, झ्र्स्टेट बैंक, किसी अनुसूचित बैंकट बीमा कम्पनी, विनिधान न्यास या अन्य वित्तीय संस्था या किसी सहकारी सोसाइटी को अथवा कृषि उपज या किसी अधिसूचित वस्तु में व्यवहार करने वाले मान्यताप्राप्त किसी संगम या कम्पनी को ही अन्तरित किए जा सकेंगे किसी अन्य को नहीं ।
झ्र्5. कतिपय शेयरों का अनुमोदित प्रतिभूतियां होनाश्न्इस धारा में वर्णित अधिनियमों में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के शेयरों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे,श्न्
(क) उन अन्य प्रतिभूतियों के अंतर्गत हैं जो भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 20 में प्रगणित हैं ; और
(ख) बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) और बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के प्रयोजन के लिए अनुमोदित प्रतिभूतियां हैं ।ट
6. केन्द्रीय भाण्डागारण निगम का प्रबन्धश्न्(1) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के कार्यकलाप और कारबार का साधारण अधीक्षण और प्रबन्ध निदेशक बोर्ड में निहित होगा जो कार्यपालिका समिति और प्रबन्ध निदेशक की सहायता से उन सभी शक्तियों का प्रयोग और सभी कृत्यों का निर्वहन कर सकेगा जिनका प्रयोग या निर्वहन केन्द्रीय भाण्डागारण निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन किया जा सकता है ।
(2) निदेशक बोर्ड लोकहित का ध्यान रखते हुए कारबारी सिद्धान्तों के अनुसार कार्य करेगा और नीति सम्बन्धी प्रश्नों पर वह अपना मार्गदर्शन ऐसे निदेशों से प्राप्त करेगा जो केन्द्रीय सरकार उसे दे ।
(3) यदि इस बारे में कोई शंका उत्पन्न होती है कि कोई प्रश्न नीति सम्बन्धी प्रश्न है या नहीं, तो केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।
7. निदेशकश्न्(1) धारा 6 में निर्दिष्ट निदेशक बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात् :श्न्
(क) छह निदेशक, जिन्हें केन्द्रीय सरकार नामनिर्देशित करेगी,
। । । । । ।
(ग) एक निदेशक, जिसे स्टेट बैंक नामनिर्देशित करेगा,
(घ) एक निदेशक, जिसे अन्य अनुसूचित बैंक निर्वाचित करेंगे,
(ङ) एक निदेशक, जिसे सहकारी सोसाइटियां निर्वाचित करेंगी,
(च) एक निदेशक, जिसे बीमा कम्पनियां विनिधान न्यास और अन्य वित्तीय संस्थाएं, कृषि उपज या अधिसूचित वस्तुओं में व्यवहार करने वाले मान्यताप्राप्त संगम और कम्पनियां निर्वाचित करेंगी ;
झ्र्(चच) तीन निदेशक, जिन्हें केन्द्रीय सरकार नियुक्त करेगी,ट
(छ) एक प्रबन्ध निदेशक, जिसे केन्द्रीय सरकार ने खण्ड (क) से लेकर खण्ड (च) तक के खण्डों में निर्दिष्ट निदेशकों से परामर्श करके नियुक्त किया हो :
परन्तु वे तीन निदेशक, जो खण्ड (घ), (ङ) और (च) के अधीन निर्वाचित किए जाने हैं, बोर्ड के प्रथम गठन के वास्ते केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसी रीति से नामनिर्देशित किए जा सकेंगे जिससे उन खण्डों में निर्दिष्ट संस्थाओं के प्रत्येक वर्ग को (चाहे वे निगम के शेयरधारक बन गए हों या नहीं) प्रतिनिधित्व मिल जाए, किन्तु इस प्रकार नामनिर्दिष्ट निदेशक तब तक पद धारण करेगा जब तक उसको उस खण्ड में उपबन्धित रूप में निर्वाचित निदेशक द्वारा बदल नहीं दिया जाता और इस प्रकार निर्वाचित निदेशक तब तक पद धारण करेगा जब तक बदला गया निदेशक उस दशा में पद धारण करता जिसमें कि उसे ऐसे बदला नहीं गया होता ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (घ), (ङ) और (च) में निर्दिष्ट निदेशकों का निर्वाचन विहित रीति से किया जाएगा ।
(3) यदि इस निमित्त विहित अवधि के अन्दर, या इतनी अतिरिक्त अवधि के अन्दर, जितनी केन्द्रीय सरकार अनुज्ञात करे, उपधारा (1) के खण्ड (घ) या खण्ड (ङ) या खण्ड (च) में निर्दिष्ट संस्थाएं किसी निदेशक का निर्वाचन करने में असफल रहती हैं तो केन्द्रीय सरकार उस रिक्ति को भरने के लिए निदेशक का नामनिर्देशन कर सकेगी ।
(4) निदेशक बोर्ड का एक अध्यक्ष झ्र्होगा, जिसेट केन्द्रीय सरकार निदेशकों में से नियुक्त करेगी ।
झ्र्(4क) उपधारा (1) के खंड (चच) के अधीन नियुक्त निदेशक ऐसा वेतन और ऐसे भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे जिन्हें केन्द्रीय भाण्डागारण निगम, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से, अवधारित करे ।ट
(5) प्रबन्ध निदेशकश्न्
(क) ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जिन्हें निदेशक बोर्ड या केन्द्रीय भाण्डागारण निगम उसे सौंपे या प्रत्यायोजित करे, तथा
(ख) ऐसा वेतन और ऐसे भत्ते पाएगा, जो केन्द्रीय भाण्डागारण निगम केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से नियत करे ।
(6) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के प्रबन्ध निदेशक से भिन्न निदेशक पारिश्रमिक के रूप में ऐसी राशियां प्राप्त करने के हकदार होंगे जो केन्द्रीय भाण्डागारण निगम केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से नियत करे :
परन्तु कोई शासकीय निदेशक उन भत्तों से, यदि कोई हों, जो उसकी सेवा-शर्तों को विनियमित करने वाले नियमों के अधीन अनुज्ञेय हों, भिन्न कोई पारिश्रमिक प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा ।
(7) निदेशकों की पदावधि और निदेशकों की आकस्मिक रिक्तियां भरने की रीति ऐसी होगी जो विहित की जाए ।
8. केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के निदेशक के पद के लिए निरर्हताएंश्न्यदि कोई व्यक्तिश्न्
(त्) पागल पाया जाता है या विकृतचित्त का हो जाता है, अथवा
(त्त्) न्यायनिर्णीत दिवालिया है या किसी समय रहा है या अपने ऋणों का चुकाना निलम्बित कर दिया है या अपने लेनदारों के साथ समझौता कर चुका है, अथवा
(त्त्त्) किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाता है या किया गया है जिसमें नैतिक अधमता अन्तर्ग्रस्त है, तथा उस अपराध के लिए छह मास से अन्यून कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है, किन्तु उक्त दण्डादेश के अवसान की तारीख से पांच वर्ष की अवधि व्यतीत नहीं हुई है, अथवा
(त्ध्) सरकार की या सरकार के स्वामित्वाधीन और नियंत्राणाधीन निगम की सेवा से हटा दिया गया या पदच्युत कर दिया गया है, अथवा
(ध्) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम या किसी राज्य भाण्डागारण निगम के 1झ्र्धारा 7 की उपधारा (1) के खंड (चच) के अधीन नियुक्त निदेशकों और प्रबंध निदेशकट से भिन्न वैतनिक पदधारी है, अथवा
(ध्त्) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के साथ की गई किसी विद्यमान संविदा में या उस निगम के लिए किए जाने वाले किसी काम में वैयक्तिक रूप से कोई ऐसा हित रखता है जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथापरिभाषित पब्लिक कम्पनी के (निदेशक से भिन्न) शेयरधारक के रूप में नहीं है,
तो वह केन्द्रीय भाण्डागारण निगम का निदेशक चुने जाने और होने के लिए निरर्ह होगा :
परन्तु जहां ऐसा व्यक्ति शेयरधारक है, वहां वह केन्द्रीय भाण्डागारण निगम को यह प्रकट करेगा कि वह उस कम्पनी में किस प्रकार के और कितने शेयर धारण किए हुए है ।
9. निदेशकों का पद से हटाया जानाश्न्(1) केन्द्रीय सरकार, केन्द्रीय भाण्डागारण निगम से परामर्श करके, प्रबन्ध निदेशक को उसके पद से किसी भी समय हटा सकेगी किन्तु ऐसा करने के पूर्व वह हटाए जाने के प्रस्ताव के विरुद्ध उसे कारण बताने का उचित अवसर देगी ।
(2) निदेशक बोर्ड ऐसे किसी निदेशक को पद से हटा सकेगा, जोश्न्
(क) धारा 8 में वर्णित निरर्हताओं में से किसी निरर्हता से ग्रस्त है या ग्रस्त हो जाता है, अथवा
(ख) निदेशक बोर्ड की इजाजत के बिना बोर्ड के तीन से अधिक क्रमवर्ती अधिवेशनों से ऐसे कारण के बिना अनुपस्थित रहा है, जो बोर्ड की राय में उसकी ऐसी अनुपस्थिति की माफी के लिए पर्याप्त है ।
10. अधिकारियों आदि की नियुक्ति और उनकी सेवा-शर्तेंश्न्(1) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा जिन्हें वह अपने कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक समझता है ।
(2) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन नियोजित प्रत्येक व्यक्ति ऐसी सेवा-शर्तों के अधीन होगा और ऐसे पारिश्रमिक पाने का हकदार होगा जो इस अधिनियम के अधीन निगम द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा अवधारित हों ।
11. केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के कृत्यश्न्इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, केन्द्रीय भाण्डागारण निगमश्न्
(क) भारत झ्र्या विदेशट में ऐसे उपयुक्त स्थानों पर जिन्हें वह ठीक समझता है, गोदाम और भाण्डागारण अर्जन और निर्माण कर सकेगा,
(ख) व्यष्टियों, सहकारी सोसाइटियों और अन्य संस्थाओं द्वारा आफर की गई या किए गए कृषि उपज, बीजों, खादों, उर्वरकों, कृषि उपकरणों और अधिसूचित वस्तुओं के भण्डारकरण के लिए भाण्डागार चला सकेगा,
(ग) कृषि उपज, बीजों, खादों, उर्वरकों, कृषि उपकरणों और अधिसूचित वस्तुओं को भाण्डागारों तक पहुंचाने और वहां से लाने के लिए परिवहन की सुविधाओं के लिए व्यवस्था कर सकेगा,
(घ) किसी राज्य भाण्डागार निगम की शेयर पूंजी के लिए प्रतिश्रुत कर सकेगा,
(ङ) कृषि उपज, बीजों, खादों, उर्वरकों, कृषि उपकरणों और अधिसूचित वस्तुओं के क्रय, विक्रय, भण्डारकरण और वितरण के प्रयोजनों के लिए सरकार के अभिकर्ता के रूप में कार्य कर सकेगा, ॥।
1झ्र्(ङक) इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, किसी केन्द्रीय अधिनियम या किसी राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम के साथ या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाई गई और रजिस्ट्रीकृत किसी कंपनी जिसके अंतर्गत विदेशी कंपनी भी है, के साथ या उसकी समनुषंगी कंपनियों के माध्यम से संयुक्त उद्यम में प्रवेश कर सकेगा ।
स्पष्टीकरणश्न्इस खंड के प्रयोजन के लिए, विदेशी कंपनीञ्ज् पद का वही अर्थ है जो आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 2 के खंड (23क) में है,
(ङख) आनुषंगिक कंपनियां स्थापित कर सकेगा, औरट
(च) ऐसे अन्य कृत्य कर सकेगा जो विहित किए जाएं ।
12. कार्यपालिका समितिश्न्(1) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम की एक कार्यपालिका समिति होगी जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात् :श्न्
(क) निदेशक बोर्ड का अध्यक्ष ॥।
(ख) प्रबन्ध निदेशक, तथा
(ग) विहित रीति से निगम द्वारा चुने गए दो अन्य निदेशक ।
झ्र्(2) निदेशक बोर्ड का अध्यक्ष, कार्यपालिका समिति का अध्यक्ष होगा ।ट
(3) निदेशक बोर्ड के साधारण नियंत्रण, निदेशन और अधीक्षण के अधीन रहते हुए कार्यपालिका समिति ऐसी किसी बात के बारे में कार्यवाही करने के लिए सक्षम होगी जिसे करने के लिए निगम सक्षम है ।
13. निगम के अधिवेशनश्न्(1) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम का वार्षिक साधारण अधिवेशन (जिसे इसमें इसके पश्चात् वार्षिक साधारण अधिवेशन कहा गया है) प्रत्येक वर्ष वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छह मास के अन्दर या तो निगम के प्रधान कार्यालय में या किसी अन्य कार्यालय में होगा, और निदेशक बोर्ड कोई अन्य साधारण अधिवेशन किसी अन्य समय पर बुला सकेगा ।
(2) वार्षिक साधारण अधिवेशन में उपस्थित शेयरधारक वार्षिक लेखाओं पर, रिपोर्ट वाले वर्ष के दौरान निगम के कामकाज के बारे में निदेशक बोर्ड की रिपोर्ट पर तथा वार्षिक, तुलनपत्र और लेखाओं के बारे में लेखापरीक्षक की रिपोर्ट पर विचार-विमर्श करने के हकदार होंगे ।
(3) केन्द्रीय भाण्डागार निगम का निदेशक बोर्ड, निगम के शेयरधारकों में से एक तिहाई शेयरधारकों की अध्यपेक्षा पर, निगम का विशेष अधिवेशन बुलाएगा ।
(4) उपधारा (3) के अधीन विशेष अधिवेशन के लिए की गई अध्यपेक्षा में यह कथन होगा कि अधिवेशन बुलाने का क्या उद्देश्य है और वह अध्यपेक्षाकर्ताओं द्वारा हस्ताक्षरित होगी और निगम के प्रधान कार्यालय में जमा की जाएंगी और उसमें कई दस्तावेजें एक जैसे प्ररूप में हो सकती हैं जिनमें से प्रत्येक दस्तावेज एक या अधिक अध्यपेक्षाकर्ताओं द्वारा हस्ताक्षरित होगी ।
(5) यदि केन्द्रीय भाण्डागारण निगम का निदेशक बोर्ड विशेष अधिवेशन बुलाने के लिए इस प्रकार जमा की गई अध्यपेक्षा की तारीख से इक्कीस दिन के अन्दर आगे कार्यवाही नहीं करता है, तो अध्यपेक्षाकर्तागण या उनमें से बहुसंख्यक स्वयं अधिवेशन बुला सकेंगे, किन्तु इन दोनों में से किसी दशा में, इस प्रकार बुलाया गया अधिवेशन अध्यपेक्षा जमा करने की तारीख से तीन मास के अंदर किया जाएगा ।
(6) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम अपने अधिवेशनों में कामकाज के बारे में प्रक्रिया के जिसके अन्तर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है, ऐसे नियमों का पालन करेगा जिनका उपबन्ध इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय भाण्डागारण निगम द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा किया जाए ।
14. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और ऋणश्न्(1) केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त बनाई गई विधि द्वारा सम्यक् विनियोग करने के पश्चात् केन्द्रीय भाण्डागारण निगम को उन दोनों निधियों में से, जो केन्द्रीय भाण्डागारण निगम द्वारा बनाई रखी जाती हैं, किसी के भी प्रयोजनों के लिएश्न्
(क) अनुदान के रूप में ऐसी धनराशियां दे सकेगी, जो केन्द्रीय सरकार आवश्यक समझे, तथा
(ख) उधार के रूप में ऐसी धनराशियां ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर दे सकेगी जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे ।
(2) केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन कोई संदाय करते समय उस निधि को विनिर्दिष्ट करेगी जिसके प्रयोजनों के लिए वह संदाय किया जा रहा है ।
15. निगम दो निधियां रखेगाश्न्केन्द्रीय भाण्डागारण निगम दो अलग-अलग निधियां बनाए रखेगा, अर्थात् :श्न्
(क) केन्द्रीय भाण्डागारण निधि (जिसे इसमें इसके पश्चात् भाण्डागारण निधि कहा गया है), तथा
(ख) साधारण निधि ।
16. भाण्डागारण निधिश्न्(1) भाण्डागारण निधि में,श्न्
(क) ऐसी सभी धनराशियां और अन्य प्रतिभूतियां, जो केन्द्रीय भाण्डागारण निगम की धारा 43 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) के अधीन अन्तरित की गई हैं,
(ख) ऐसे अनुदान और उधार, जो केन्द्रीय सरकार भाण्डागारण निधि के प्रयोजनों के लिए दे, तथा
(ग) ऐसी धनराशियां, जो भाण्डागारण निधि में से दिए गए उधारों से या उधारों पर ब्याज से अथवा उस निधि में से किए गए विनिधानों पर लाभांश से प्राप्त हों,
जमा की जाएंगी ।
(2) भाण्डागारण निधि का उपयोजन निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए किया जाएगाश्न्
(क) राज्य भाण्डागारण निगम की शेयर पूंजी की प्रतिश्रुति करने के वास्ते राज्य सरकारों को समर्थ करने के प्रयोजन के लिए राज्य सरकारों को ऐसे निबन्धनों या शर्तों पर उधार देना या जो केन्द्रीय भाण्डागारण निगम ठीक समझे,
(ख) कृषि उपज और अधिसूचित वस्तुओं के, सहकारी सोसाइटियों से भिन्न माध्यम द्वारा, भाण्डागारण और भण्डाकरण की अभिवृद्धि करने के प्रयोजन से, राज्य भाण्डागारण निगमों या राज्य सरकारों को ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर उधार और साहय्यिकियां देना, जो केन्द्रीय भाण्डागारण निगम ठीक समझे,
झ्र्(ग) कृषि उपज और अधिसूचित वस्तुओं के भाण्डागारण और भण्डारकरण की अभिवृद्धि के प्रयोजन के लिए कार्मिकों के प्रशिक्षण या प्रसार और प्रचार के सम्बन्ध में उपगत व्यय की पूर्ति करना,
(घ) भाण्डागारण निधि के प्रशासन के सम्बन्ध में उपगत व्यय की पूर्ति करना, जिसके अन्तर्गत अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक भी हैं ।ट
17. साधारण निधिश्न्(1) साधारण निधि मेंश्न्
(क) धारा 16 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट राशियों से भिन्न ऐसी सभी राशियां, जो केन्द्रीय भाण्डागारण निगम को प्राप्त हों, तथा
(ख) ऐसे अनुदान और उधार, जिन्हें केन्द्रीय सरकार साधारण निधि के प्रयोजनों के लिए दे,
जमा किए जाएंगे ।
(2) साधारण निधि का उपयोजन निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए किया जाएगाश्न्
(क) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक चुकाना, तथा
(ख) निगम के अन्य प्रशासनिक व्यय चुकाना, तथा
(ग) इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करना :
झ्र्परन्तु साधारण निधि का उपयोजन धारा 16 की उपधारा (2) के खण्ड (ग) या खण्ड (घ) में निर्दिष्ट व्यय चुकाने के लिए नहीं किया जाएगा ।ट
अध्याय 3
राज्य भाण्डागारण निगम
18. राज्य भाण्डागारण निगमश्न्(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के अनुमोदन से, राज्य के लिए ऐसे नाम वाला भाण्डागारण निगम स्थापित कर सकेगी, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ।
(2) उपधारा (1) के अधीन स्थापित राज्य भाण्डागारण निगम उस उपधारा के अधीन अधिसूचित नाम वाला तथा शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा, जिसे संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की और संविदा करने की शक्ति प्राप्त होगी और वह उस नाम से वाद लाएगा और उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।
(3) राज्य भाण्डागारण निगम का प्रधान कार्यालय राज्य में उस स्थान पर होगा जिसे, राजपत्र में अधिसूचित किया जाए ।
(4) उपधारा (1), (2) और (3) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निगम की बाबत धारा 43 की उपधारा (2) के खण्ड (छ) के अधीन यह समझा जाता है कि वह इस अधिनियम के अधीन उस राज्य के लिए स्थापित निगम है, वहां उपधारा (1) के अधीन निगम की स्थापना करना राज्य सरकार के लिए, आवश्यक न होगा ।
19. अंश पूंजी और शेयरधारीश्न्(1) राज्य भाण्डागारण निगम की प्राधिकृत पूंजी अधिक से अधिक दो करोड़ रुपए तक की ऐसी राशि होगी, जो विहित की जाए और वह पूंजी एक-एक सौ रुपए के अंकित मूल्य वाले शेयरों में विभाजित होगी, जिनमें से प्रथम बार इतनी संख्या में शेयर निर्गमित किए जाएंगे, जितनी निगम द्वारा राज्य सरकार से परामर्श करके अवधारित की जाए, और शेष शेयर समय-समय पर जैसे और जब निगम केन्द्रीय भाण्डागारण निगम से परामर्श करके ठीक समझे और राज्य सरकार की मंजूरी से निर्गमित किए जा सकेंगे :
झ्र्परन्तु किसी राज्य भाण्डागारण निगम के बारे में केन्द्रीय सरकार सम्बद्ध राज्य सरकार से परामर्श करके उपर्युक्त प्राधिकृत पूंजी की अधिकतम सीमा को ऐसे विस्तार तक और ऐसी रीति से, जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे, समय-समय पर और राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, बढ़ा सकेगी ।ट
(2) ऐसी किसी दशा में जब राज्य सरकार ने प्रथम बार निर्गमित शेयर पूंजी और ऐसी पूंजी के पश्चात्वर्ती निर्गमन में ऐसी पूंजी के पचास प्रतिशत के लिए प्रतिश्रुत किया है तब केन्द्रीय भाण्डागारण निगम उस पूंजी के शेष पचास प्रतिशत के लिए प्रतिश्रुत करेगा ।
20. राज्य भाण्डागारण निगम का प्रबन्धश्न्(1) राज्य भाण्डागारण निगम के कार्यकलापों का साधारण अधीक्षण और प्रबन्ध, निदेशक बोर्ड में निहित होगा, जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात् :श्न्
(क) पांच निदेशक, जिन्हें केन्द्रीय भाण्डागारण निगम नामनिर्देशित करेगा, जिनमें से एक निदेशक स्टेट बैंक से परामर्श करके नामनिर्देशित किया जाएगा और कम से कम एक निदेशक गैर-सरकारी व्यक्ति होगा,
(ख) पांच निदेशक, जिन्हें राज्य सरकार नामनिर्देशित करेगी ; और
(ग) एक प्रबंध निदेशक, जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा खण्ड (क) और खण्ड (ख) में निर्दिष्ट निदेशकों से परामर्श करके और केन्द्रीय भाण्डागारण निगम झ्र्को सूचना देने के बादट की जाएगी ।
(2) निदेशक बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य भाण्डागारण निगम के निदेशकों में से राज्य सरकार द्वारा केन्द्रीय भाण्डागारण निगम 3झ्र्को सूचना देनेके बादट की जाएगी ।
(3) प्रबन्ध निदेशकश्न्
(क) ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो निदेशक बोर्ड या राज्य भाण्डागारण निगम उसको सौंपे या प्रत्यायोजित करे, तथा
(ख) ऐसा वेतन और ऐसे भत्ते पाएगा, जो राज्य भाण्डागारण निगम द्वारा, केन्द्रीय भाण्डागारण निगम से परामर्श करके और राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से नियत किए जाएं ।
(4) निदेशक बोर्ड लोकहित का ध्यान रखते हुए कारबारी सिद्धांतों के अनुसार कार्य करेगा और नीति सम्बन्धी प्रश्नों के बारे में वह अपना मार्गदर्शन ऐसे निदेशों से प्राप्त करेगा, जो राज्य सरकार या केन्द्रीय भाण्डागारण निगम उसे दे ।
(5) यदि इस बारे में कोई शंका उत्पन्न होती है कि कोई प्रश्न नीति सम्बन्धी प्रश्न है या नहीं, या यदि राज्य सरकार और केन्द्रीय भाण्डागारण निगम परस्पर विरोधी निदेश देते हैं, तो वह केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिसका उस पर विनिश्चय अंतिम होगा ।
(6) राज्य भाण्डागारण निगम के प्रबन्ध निदेशक से भिन्न निदेशक पारिश्रमिक के रूप में ऐसी राशियां पाने के हकदार होंगे, जो विहित की जाएं :
परन्तु कोई शासकीय निदेशक ऐसे किन्हीं भत्तों से, जो उसे उसकी सेवा-शर्तों को विनियमित करने वाले नियमों के अधीन अनुज्ञेय हैं, भिन्न पारिश्रमिक पाने का हकदार नहीं होगा ।
(7) निदेशकों की पदावधि और उनमें होने वाली आकस्मिक रिक्तियां भरने की रीति ऐसी होगी, जो विहित की जाए ।
21. निगम के निदेशक के पद के लिए निरर्हताएंश्न्यदि कोई व्यक्तिश्न्
(त्) पागल पाया जाता है या विकृतचित्त का हो जाता है, अथवा
(त्त्) न्यायनिर्णीत दिवालिया है या किसी समय रहा है या अपने ऋणों का चुकाना निलंबित कर दिया है, या अपने लेनदारों के साथ समझौता कर चुका है, अथवा
(त्त्त्) किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाता है या किया गया है, जिसमें नैतिक अधमता अन्तर्ग्रस्त है तथा उस अपराध के लिए छह मास से अन्यून कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है, किन्तु उक्त दण्डादेश के अवसान की तारीख से पांच वर्ष की अवधि व्यतीत नहीं हुई है, अथवा
(त्ध्) सरकार की या सरकार के स्वामित्वाधीन और नियंत्रणाधीन किसी निगम की सेवा से हटा दिया गया या पदच्युत कर दिया गया है, अथवा
(ध्) ॥। किसी राज्य भाण्डागारण निगम के प्रबन्ध निदेशक से भिन्न कोई वैतनिक पदधारी है, अथवा
(ध्त्) राज्य भाण्डागारण निगम के साथ की गई किसी विद्यमान संविदा में या उस निगम के लिए किए जाने वाले किसी काम में वैयक्तिक रूप से कोई ऐसा हित रखता है, जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में यथापरिभाषित पब्लिक कम्पनी के (निदेशक से भिन्न) शेयरधारक के रूप में नहीं है,
तो वह राज्य भाण्डागारण निगम का निदेशक चुने जाने और होने के लिए निरर्ह होगा :
परन्तु जहां ऐसा व्यक्ति शेयरधारक है, वहां वह भाण्डागारण निगम को यह प्रकट करेगा कि वह उस कम्पनी में किसी प्रकार के और कितने शेयर धारण किए हुए है ।
22. निदेशकों का पद से हटाया जानाश्न्(1) राज्य सरकार, केन्द्रीय भाण्डागारण निगम झ्र्को सूचना देने के बादट प्रबन्ध निदेशक को उसके पद से किसी भी समय हटा सकेगी किन्तु ऐसा करने के पूर्व वह हटाए जाने के प्रस्ताव के विरुद्ध उसे कारण बताने का उचित अवसर देगी ।
(2) निदेशक बोर्ड ऐसे किसी निदेशक को पद से हटा सकेगा, जोश्न्
(क) धारा 21 में वर्णित निरर्हताओं में से किसी निरर्हता से ग्रस्त है या ग्रस्त हो जाता है, अथवा
(ख) निदेशक बोर्ड की इजाजत के बिना बोर्ड के तीन से अधिक क्रमवर्ती अधिवेशनों से ऐसे कारण के बिना अनुपस्थित रहा है, जो बोर्ड की राय में उसकी ऐसी अनुपस्थिति की माफी के लिए पर्याप्त है ।
23. अधिकारियों आदि की नियुक्ति और उनकी सेवा-शर्तेंश्न्(1) राज्य भाण्डागारण निगम ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा, जिन्हें वह अपने कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक समझता है ।
(2) राज्य भाण्डागारण निगम द्वारा इस अधिनियम के अधीन नियोजित प्रत्येक व्यक्ति ऐसी सेवा-शर्तों के अधीन होगा और ऐसे पारिश्रमिक पाने का हकदार होगा, जो इस अधिनियम के अधीन निगम द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा अवधारित हों ।
24. राज्य भाण्डागारण निगम के कृत्यश्न्इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, राज्य भण्डागारण निगमश्न्
(क) राज्य के अन्दर ऐसे स्थानों पर, जिन्हें वह केन्द्रीय भाण्डागारण निगम झ्र्से परामर्श के पश्चात्ट अवधारित करे, गोदाम और भाण्डागार का अर्जन और निर्माण कर सकेगा,
(ख) राज्य के अन्दर कृषि उपज, बीजों, खादों, उर्वरकों, कृषि उपकरणों और अधिसूचित वस्तुओं के भण्डारकरण के लिए भाण्डागार चला सकेगा,
(ग) कृषि उपज, बीजों, खादों, उर्वरकों, कृषि उपकरणों और अधिसूचित वस्तुओं का भाण्डागारों तक पहुंचाने और वहां से लाने के लिए परिवहन की सुविधाओं के लिए व्यवस्था कर सकेगा,
(घ) कृषि उपज, बीजों, खादों, उर्वरकों, कृषि उपकरणों और अधिसूचित वस्तुओं के क्रय, विक्रय, भण्डारकरण और वितरण के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय भाण्डागारण निगम या सरकार के अभिकर्ता के रूप में कार्य कर सकेगा, ॥।
झ्र्(घक) राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के साथ संयुक्त उद्यम में प्रवेश कर सकेगा ; औरट
(ङ) ऐसे अन्य कृत्य कर सकेगा, जो विहित किए जाएं ।
25. कार्यपालिका समितिश्न्(1) राज्य भाण्डागारण निगम की एक कार्यपालिका समिति होगी जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात् :श्न्
(क) निदेशक बोर्ड का अध्यक्ष,
(ख) प्रबन्ध निदेशक, तथा
(ग) विहित रीति से चुने गए तीन अन्य निदेशक, जिनमें से एक ऐसा होगा, जो धारा 20 की उपधारा (1) के खण्ड (क) में निर्दिष्ट निदेशक है ।
(2) निदेशक बोर्ड का अध्यक्ष कार्यपालिका समिति का अध्यक्ष होगा ।
(3) निदेशक बोर्ड द्वारा समय-समय पर दिए गए किन्हीं साधारण या विशेष निदेशों के अधीन रहते हुए कार्यपालिका समिति ऐसी किसी बात के बारे में कार्यवाही करने के लिए सक्षम होगी, जिसे करने के लिए राज्य भाण्डागारण निगम सक्षम है ।
अध्याय 4
वित्त, लेखा और संपरीक्षा
26. क्रियाकलापों का कार्यक्रम और वित्तीय प्राक्कलनों का दिया जानाश्न्(1) प्रत्येक वर्ष के प्रारम्भ के पूर्व प्रत्येक भाण्डागारण निगम आगामी वर्ष के दौरान होने वाले अपने क्रियाकलापों के कार्यक्रम का विवरण तथा उससे सम्बन्धित वित्तीय प्राक्कलन तैयार करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन तैयार किया गया विवरण प्रत्येक वर्ष के प्रारम्भ से कम से कम तीन मास पूर्वश्न्
(क) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम की दशा में, केन्द्रीय सरकार के समक्ष,
(ख) राज्य भाण्डागारण निगम की दशा में, केन्द्रीय भाण्डागारण निगम और राज्य सरकार के समक्ष,
उसके अनुमोदन के लिए रखा जाएगा ।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी भाण्डागारण निगम के विवरण और वित्तीय प्राक्कलन का पुनरीक्षण या उस भाण्डागारण निगम द्वारा केन्द्रीय भाण्डागारण निगम की दशा में, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से या राज्य भाण्डागारण निगम की दशा में, केन्द्रीय भाण्डागारण निगम और राज्य सरकार के अनुमोदन से, किया जा सकेगा ।
27. भाण्डागारण निगम की उधार लेने की शक्तियांश्न्(1) भाण्डागारण निगम, निधियां बढ़ाने के वास्ते रिजर्व बैंक से परामर्श करके और समुचित सरकार के पूर्व अनुमोदन से ब्याज बन्धपत्रों और ब्याजू डिबेंचरों का, पुरोधण और विक्रय कर सकेगा :
परन्तु पुरोधृत और परादेय बन्धपत्रों और डिबेंचरों को और निगम के अन्य उधारों की कुल रकम किसी भी समय निगम की समादत्त शेयर पूंजी और रिजर्व निधि की रकम के दस गुने से अधिक नहीं होगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए भाण्डागारण निगमश्न्
(त्) रिजर्व बैंक से, या
(त्त्) स्टेट बैंक से, ऐसी अवधियों के लिए, जिनके लिए और उन प्रतिभूतियों में से किसी प्रतिभूति पर, जिनके आधार पर वह झ्र्भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23)ट के उपबन्धों के अधीन धनराशियां, अग्रिम और उधार के तौर पर देने के लिए प्राधिकृत है, 2झ्र्याट
झ्र्(त्त्त्) किसी झ्र्अनुसूचित बैंकट से, या
(त्ध्) ऐसी बीमा कम्पनी, विनिधान न्यास या अन्य वित्तीय संस्था से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित की जाए,ट
धनराशियां उधार ले सकेगा ।
(3) उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन रहते हुए केन्द्रीय भाण्डागारण निगम केन्द्रीय सरकार से और राज्य भाण्डागारण निगम राज्य सरकार और केन्द्रीय भाण्डागारण निगम से ऐसी प्रतिभूतियों पर और ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, जो प्रत्येक मामले में उधार लेने वाले निगम और उधार देने वाले के बीच में करार पाई जाएं धनराशियां उधार ले सकेगा ।
झ्र्(4) राज्य भाण्डागारण निगम के बंधपत्र और डिबेंचर ऐसे बंधपत्रों या डिबेंचरों के पुरोधरण के समय राज्य भाण्डागारण निगम के निदेशक बोर्ड की सिफारिश पर समुचित सरकार द्वारा प्रत्याभूत किए जाएंगे ।ट
28. निक्षेप खाताश्न्भाण्डागारण निगम की सभी धनराशियां रिजर्व बैंक या स्टेट बैंक झ्र्या किसी राष्ट्रीयकृत बैंकट या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, झ्र्किसी अन्य अनुसूचित बैंकट या सहकारी बैंक में जमा की जाएंगी ।
29. निधियों का विनिधानश्न्भाण्डागारण निगम अपनी निधियों का विनिधान केन्द्रीय या किसी राज्य सरकार की प्रतिभूतियों में या किसी अन्य रीति से कर सकेगा, जो समुचित सरकार विहित करे ।
30. लाभों का व्ययनश्न्(1) प्रत्येक भाण्डागारण निगम अपने वार्षिक शुद्ध लाभों में से एक रिजर्व निधि स्थापित करेगा ।
(2) भाण्डागारण निगम डूबन्त और शंकास्पद ऋणों, आस्तियों के अवक्षयण और ऐसी सभी अन्य बातों के लिए, जिनके लिए प्रायिक रूप से कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन रजिस्ट्रीकृत और निगमित कम्पनियां उपबन्ध करती हैं, उपबन्ध करने के पश्चात् अपने वार्षिक शुद्ध लाभों में से लाभांश घोषित कर सकेगा :
। । । । ।
31. भाण्डागारण निगम के लेखा और लेखापरीक्षाश्न्(1) प्रत्येक भाण्डागारण निगम उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लाभ-हानि सहित वार्षिक लेखा विवरण और तुलनपत्र ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा, जो विहित किया जाए :
परन्तु केन्द्रीय भाण्डागारण निगम की दशा में, भाण्डागारण निधि और साधारण निधि से सम्बन्धित लेखे अलग-अलग रखे जाएंगे ।
(2) भाण्डागारण निगम के लेखाओं की परीक्षा ऐसे लेखापरीक्षक द्वारा की जाएगी, जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 226 के अधीन कम्पनियों के लेखापरीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए सम्यक् रूप से अर्ह है ।
(3) उक्त लेखापरीक्षक की नियुक्ति समुचित सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की सलाह पर की जाएगी ।
(4) लेखापरीक्षक को भाण्डागारण निगम के वार्षिक तुलनपत्र और लाभ-हानि लेखा की एक-एक प्रति दी जाएगी और उनसे सम्बन्धित लेखाओं और वाउचरों सहित उनकी परीक्षा करना उसका कर्तव्य होगा, और उसको निगम द्वारा बनाए रखी गई सभी बहियों की एक सूची परिदत्त की जाएगी और उसकी सभी सुसंगत समय पर निगम की पुस्तकों, लेखाओं और अन्य दस्तावेजों तक पहुंच होगी और वह निगम के किसी अधिकारी से ऐसी जानकारी और ऐसे स्पष्टीकरण मांग सकेगा, जिन्हें वह लेखापरीक्षक के रूप में अपने कर्तव्य के पालन के लिए आवश्यक समझे ।
(5) लेखापरीक्षक अपने द्वारा लेखापरीक्षित लेखाओं और वार्षिक तुलनपत्र और लाभ-हानि लेखा के बारे में शेयरधारकों को रिपोर्ट देगा और ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट मे वह यह कथन करेगा कि क्या उसकी राय में लेखा सेश्न्
(क) तुलनपत्र की दशा में, उसके वित्तीय वर्ष के अन्त में निगम की स्थिति की, तथा
(ख) लाभ-हानि लेखा की दशा में, उसके वित्तीय वर्ष के लाभ या हानि की, सही और ऋजु स्थिति प्रकट होती है तथा यदि उसने अधिकारियों से कोई स्पष्टीकरण या जानकारी मांगी है, तो क्या वह उसे दी जा चुकी है और क्या वह समाधानप्रद है ।
(6) समुचित सरकार, किसी भी समय भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से लेखापरीक्षक को यह अपेक्षा करने वाले निदेश दे सकेगी कि वह उन उपायों की पर्याप्तता के बारे में, जो भाण्डागारण निगम ने अपने शेयरधारकों और लेनदारों के संरक्षण के लिए किए हैं, या निगम के लेखाओं की परीक्षा करने में अपनाई गई प्रक्रिया की पर्याप्तता के बारे में, अपनी रिपोर्ट समुचित सरकार को दे और यदि उसकी राय में लोकहित में यह अपेक्षित है, तो लेखापरीक्षा प्रविषय को व्यापक बना सकेगी या बढ़ा सकेगी या यह निदेश दे सकेगी कि लेखापरीक्षा में कोई भिन्न प्रक्रिया अपनाई जाए या यह निदेश दे सकेगी कि लेखापरीक्षक द्वारा कोई अन्य परीक्षा की जाए ।
(7) भाण्डागारण निगम लेखापरीक्षक की प्रत्येक रिपोर्ट शेयरधारकों के समक्ष रखी जाने से कम से कम एक मास पूर्व उस रिपोर्ट की एक-एक प्रति भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को और केन्द्रीय सरकार को भेजेगा ।
(8) इस धारा में इसके पूर्व किसी बात के होते हुए भी, भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक स्वप्रेरणा पर, या समुचित सरकार से इस निमित्त प्राप्त निवेदन पर, भाण्डागारण निगम के बारे में ऐसी लेखापरीक्षा कर सकेगा और ऐसे समय पर कर सकेगा जब वह आवश्यक समझे :
। । । । ।
(9) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को तथा भाण्डागारण निगम के लेखाओं की परीक्षा करने के लिए उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को, ऐसी लेखापरीक्षा के बारे में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे, जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की परीक्षा के बारे में प्राप्त हैं तथा विशिष्टतया उसे लेखा पुस्तकों, लेखाओं, सम्बद्ध वाउचरों और अन्य दस्तावेजों और कागजपत्रों को पेश किए जाने की मांग करने और निगम के कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(10) भाण्डागारण निगम के वार्षिक लेखे उनकी लेखापरीक्षा रिपोर्ट सहित वित्तीय वर्ष के समाप्त होने से पूर्व छह मास के अन्दर निगम के वार्षिक साधारण अधिवेशन में रखे जाएंगे ।
(11) इस धारा के अधीन प्रत्येक लेखापरीक्षा रिपोर्ट साधारण वार्षिक अधिवेशन में रखे जाने के पश्चात्, एक मास के अन्दर समुचित सरकार को भेजी जाएगी और तत्पश्चात् यथाशक्य शीघ्र वह सरकार उसे , यथास्थिति, संसद् के दोनों सदनों या राज्य के विधान-मण्डल के समक्ष रखवाएगी ।
झ्र्31क. विवरणियां और रिपोर्टेंश्न्भाण्डागारण निगम समुचित सरकार को अपनी सम्पत्ति या कार्यों के बारे में ऐसी विवरिणयां, आंकड़े, लेखे और अन्य जानकारी देगा, जैसी कि वह सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे ।ट
अध्याय 5
प्रकीर्ण
32. रिक्तियों आदि से भाण्डागारण निगमों के कार्यों और कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होनाश्न्भाण्डागारण निगम का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि उसके निदेशकों में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।
33. प्रत्यायोजनश्न्भाण्डागारण निगम लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियां और कृत्य, जो वह अपने कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक समझे, निगम के सचिव या अन्य अधिकारी को ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के, यदि कोई हों, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, अधीन रहते हुए प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
34. शेयरधारकों के मताधिकारश्न्भाण्डागारण निगम के शेयरधारकों के किसी अधिवेशन में प्रत्येक सदस्य को निगम में अपने द्वारा धारित प्रत्येक शेयर की बाबत एक मत प्राप्त होगा ।
35. केन्द्रीय भाण्डागारण निगम और राज्य भाण्डागारण निगम के बीच विवादश्न्यदि केन्द्रीय भाण्डागारण निगम और किसी राज्य भाण्डागारण निगम के बीच कोई मतभेद इस अधिनियम के अधीन अपने-अपने कृत्यों और शक्तियों के बारे में हो, तो ऐसा मतभेद केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिसका उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा ।
36. विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणाश्न्भाण्डागारण निगम का प्रत्येक निदेशक, लेखापरीक्षक, अधिकारी या अन्य कर्मचारी अपने कर्तव्य ग्रहण करने से पूर्व अनुसूची में दिए गए प्ररूप में विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा करेगा ।
37. निदेशकों की क्षतिपूर्तिश्न्(1) भाण्डागारण निगम के प्रत्येक निदेशक की ऐसी सभी हानि और व्यय की, जो उसने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में उपगत किया हो, किन्तु जो उसके स्वयं जानबूझकर किए गए कार्य या व्यतिक्रम से न हुए हों, क्षतिपूर्ति सम्बन्धित निगम द्वारा की जाएगी ।
(2) भाण्डागार निगम का निदेशक, निगम के किसी अन्य निदेशक या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के लिए या किसी ऐसी हानि या व्यय के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, जो निगम की ओर से सद्भावपूर्वक अर्जित या ली गई किसी सम्पत्ति या प्रतिभूति के मूल्य की या उसमें हक की अपर्याप्तता या कमी के या निगम के प्रति बाध्यताधीन किसी व्यक्ति के सदोष कार्य के अथवा अपने पद या उससे सम्बन्धित कर्तव्यों के निष्पादन में सद्भावपूर्वक की गई किसी बात के फलस्वरूप हो ।
38. अपराधश्न्(1) जो कोई किसी भाण्डागारण निगम की लिखित सहमति के बिना, किसी प्रोस्पेक्टस या विज्ञापन में उस निगम के नाम का प्रयोग करेगा, वह कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(2) कोई न्यायालय सम्बन्धित भाण्डागारण निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी के लिखित परिवाद पर ही उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान करेगा, अन्यथा नहीं ।
39. आय-कर और अधिकर के सम्बन्ध में उपबन्धश्न्आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के प्रयोजनों के लिए भाण्डागारण निगम उस अधिनियम के अर्थ में कम्पनी समझा जाएगा और वह अपनी आय, लाभों और अभिलाभों पर तद्नुसार आय-कर और अधिकर देने का दायी होगा :
। । । । ।
40. भाण्डागारण निगमों का परिसमापनश्न्कम्पनियों या निगमों के परिसमापन से सम्बन्धित विधि का कोई भी उपबन्ध किसी भाण्डागारण निगम को लागू नहीं होगा और ऐसे किसी निगम को, समुचित सरकार के आदेश से ही और उस रीति से, जो वह निर्दिष्ट करे, समापनाधीन किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
41. नियम बनाने की शक्तिश्न्(1) समुचित सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगेश्न्
(क) वे अतिरिक्त कृत्य जिनका कोई भाण्डागारण निगम पालन कर सकेगा,
(ख) केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के निदेशकों के नामनिर्देशन और निर्वाचन की रीति तथा वह अवधि जिसके अन्दर ऐसे निदेशकों का नामनिर्देशन या निर्वाचन किया जाएगा,
(ग) किसी भाण्डागारण निगम के निदेशकों की पदावधि और उनमें होने वाली आकस्मिक रिक्तियां भरने की रीति, और उनको देय पारिश्रमिक,
(घ) किसी भाण्डागारण निगम की कार्यपालिका समिति के लिए निदेशकों के चुने जाने की रीति,
(ङ) झ्र्धारा 19 की उपधारा (1) द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट अधिकतम सीमा के अन्दरट किसी राज्य भाण्डागारण निगम की प्राधिकृत पूंजी,
(च) किसी भाण्डागारण निगम द्वारा तैयार किए जाने वाले लेखाओं के वार्षिक विवरण और तुलनपत्र का प्ररूप,
(छ) किसी अनुसूचित या सहकारी बैंक में किसी भाण्डागारण निगम के धन का जमा किया जाना,
(ज) किसी भाण्डागारण निगम के शेयरों के निर्गमन की रीति, उनके बारे में की जाने वाली मांगे और अन्य सब विषय जो शेयरों के निर्गमन के आनुषंगिक हैं,
झ्र्(झ) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे भाण्डागारण निगम द्वारा धारा 31क के अधीन विवरणियां, आंकड़े, लेखे और अन्य जानकारी दी जानी हैं,ट
झ्र्(ञ)ट कोई अन्य बात जो विहित की जानी है या विहित की जाए ।
(3) इस धारा के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उक्त सत्र के, जिसमें वह इस प्रकार रखा गया हो, या पूर्वोक्त बाद के सत्रों के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
42. भाण्डागारण निगमों की विनियम बनाने की शक्तिश्न्(1) भाण्डागारण निगम ऐसी सब बातों के लिए, जिनका इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनार्थ उपबन्ध करना आवश्यक या समीचीन हो, समुचित सरकार की पूर्व मंजूरी से ऐसे विनियम, जो इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे :श्न्
(क) भाण्डागारण निगम के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तें और उनको देय पारिश्रमिक,
(ख) वह रीति, जिससे और वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए केन्द्रीय भाण्डागारण निगम के शेयर अन्तरित किए जा सकेंगे,
(ग) वह रीति, जिससे किसी भाण्डागारण निगम और उसकी कार्यपालिका समिति के अधिवेशन बुलाए जाएंगे, ऐसे अधिवेशनों में हाजिर होने के लिए फीसें और उनमें अपनाई जाने वाली प्रक्रिया,
(घ) भाण्डागारण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के कर्तव्य और आचरण,
(ङ) वे शक्तियां और कर्तव्य, जो किसी भाण्डागारण निगम के प्रबन्ध निदेशक को सौंपे या प्रत्यायोजित किए जाएं,
(च) साधारणतया, भाण्डागारण निगम के कार्यकलाप का दक्ष संचालन ।
(3) समुचित सरकार किसी विनियम को, जिसे उसने मंजूर किया है, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विखण्डित कर सकेगी और तब ऐसा विनियम निष्प्रभाव हो जाएगा ।
43. निरसन और व्यावृत्तियांश्न्(1) धारा 3 के अधीन केन्द्रीय भाण्डागारण निगम स्थापित किए जाने की तारीख से एग्रीकल्चर प्रोड्यूस (डेवलपमेंट एण्ड वेयरहाउसिंग) कारपोरेशन ऐक्ट, 1956 (1956 का 28) वहां तक निरसित हो जाएगा जहां तक कि वह राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 (1962 का 26) द्वारा निरसित नहीं किया गया है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भीश्न्
(क) निरसित अधिनियम के अधीन स्थापित केन्द्रीय भाण्डागारण निगम (जिसे इसमें इसके पश्चात्, उक्त निगम कहा गया है), द्वारा आबंटित शेयरों और निर्गमित शेयर-प्रमाणपत्रों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित निगम द्वारा ऐसे आबंटित और निर्गमित किए गए हैं मानो यह अधिनियम उस दिन को प्रवृत्त था जिसको वे शेयर आबंटित किए गए थे और वे शेयर-प्रमाणपत्र निर्गमित किए गए थे,
(ख) उक्त निगम का प्रत्येक शेयरधारक इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित निगम में उतने शेयरों का धारक हो जाएगा जितने उक्त निगम में उसके द्वारा धृत शेयरों की संख्या और मूल्य के समतुल्य हों,
(ग) राष्ट्रीय भाण्डागारण विकास निधि की, जो उक्त तारीख से ठीक पूर्व उक्त निगम द्वारा बनाई रखी जाती थी, सभी धनराशियां और अन्य प्रतिभूतियां इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित निगम को अन्तरित हो जाएंगी और उसके द्वारा बनाई रखी जाएंगी,
(घ) निरसित अधिनियम के अधीन किए गए किसी कार्य या की गई किसी कार्रवाई को (जिसके अन्तर्गत कोई नियुक्ति, नामनिर्देशन, प्रत्यायोजन या बनाए गए नियम या विनियमन आता है), वहां तक जहां तक कि वह इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत नहीं है, इस अधिनियम के अधीन किया गया या की गई समझी जाएगी,
(ङ) निरसित अधिनियम के अधीन किसी राज्य भाण्डागारण निगम में उक्त निगम द्वारा धृत प्रत्येक शेयर के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित निगम द्वारा तत्स्थानी उस राज्य भाण्डागारण निगम में धृत है, जिसे इस अधिनियम के अधीन स्थापित समझा गया है,
(च) उक्त निगम के सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उत्पन्न होती हैं, इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित निगम के क्रमशः अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं हो जाएंगी,
(छ) निरसित अधिनियम के अधीन किसी राज्य के लिए स्थापित राज्य भाण्डागारण निगम के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के अधीन उस राज्य के लिए स्थापित राज्य भाण्डागारण निगम है ।
अनुसूची
(धारा 36 देखिए)
विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा
मैंश्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्श्न्घोषणा करता हूं कि भाण्डागारण निगम के (यथास्थिति) निदेशक, अधिकारी, कर्मचारी या लेखापरीक्षक के रूप में मुझसे अपेक्षित और उक्त निगम में मेरे द्वारा धारण किए गए, किसी पद या प्रास्थिति से उचित रूप से सम्बन्धित कर्तव्यों का मैं निष्ठापूर्वक, सच्चाई से और अपनी सर्वोत्तम विवेक, बुद्धि, कौशल और योग्यता से निष्पादन और पालन करूंगा ।
मैं यह भी घोषणा करता हूं कि मैं उक्त निगम के कार्यों से सम्बन्धित कोई जानकारी ऐसे किसी व्यक्ति को, जो वैध रूप से हकदार न हो, संसूचित नहीं करूंगा और न संसूचित होने दूंगा और ऐसे किसी व्यक्ति को निगम की या उसके कब्जे की तथा निगम के कारबार से सम्बद्ध किन्हीं पुस्तकों या दस्तावेजों का निरीक्षण नहीं करने दूंगा और न उसकी उन तक पहुंच होने दूंगा ।
हस्ताक्षर ह्लह्लह्लह्लह्लह्लह्लह्ल.
मेरे सामने हस्ताक्षर किए
हस्ताक्षर ह्लह्लह्लह्लह्लह्लह्लह्ल.
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