Saturday, 02, May, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

खतरनाक मशीन (विनियमन) अधिनियम, 1983 ( Dangerous Machines (Regulation) Act, 1983 )


 

खतरनाक मशीन (विनियमन) अधिनियम, 1983

(1983 का अधिनियम संख्यांक 35)

[14 दिसम्बर, 1983]

किसी खतरनाक मशीन के प्रचालन में किसी श्रमिक के कल्याण को सुनिश्चित करने

की दृष्टि से खतरनाक मशीनों का उत्पादन करने वाले किसी उद्योग, व्यापार

और वाणिज्य को तथा उसके उत्पादन, प्रदाय, वितरण और उपयोग को

विनियमित करने लिए तथा ऐसी किसी मशीन के प्रचालन के समय

किसी श्रमिक की मृत्यु या उसे हुई शारीरिक क्षति के लिए

प्रतिकर का भुगतान करने और उससे सम्बन्धित

या उसके आनुषंगिक विषयों का

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के चौंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम खतरनाक मशीन (विनियमन) अधिनियम, 1983 है ।

                (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

                (3) यह धारा और धारा 3 का खण्ड (ग) सभी राज्यों में तुरन्त प्रवृत्त होगा और इस अधिनियम के शेष उपबन्ध किसी राज्य में ऐसी तारीख को प्रवृत्त होंगे जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबन्धों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी तथा इस अधिनियम के किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारम्भ के प्रति किसी निर्देश का किसी राज्य के संबंध में इस प्रकार अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में उस उपबन्ध के प्रारम्भ के प्रति निर्देश है ।

2. संघ के नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा-इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि लोकहित में यह समीचीन है कि संघ को पावर थ्रेशरों या किन्हीं ऐसी अन्य मशीनों के विनिर्माण या उत्पादन में कार्यरत उद्योगों का नियंत्रण अपने नियंत्रण के अधीन ले लेना चाहिए, जो कृषि या ग्रामीण सेक्टर में उपयोग किए जाने के लिए आशयित हैं और जो इस प्रकार की हैं कि उनके प्रचालन के अनुक्रम में हुई किसी भी दुर्घटना से उसके प्रचालक की मृत्यु, उसका कोई अंग-भंग या उसको कोई अन्य शारीरिक क्षति हो सकती है ।

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) बालक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने चौदह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है ;

(ख) नियंत्रक" से इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत ऐसा प्रत्येक अपर, उप या सहायक नियंत्रक भी है, जिसे धारा 5 की उपधारा (3) के अधीन इस अधिनियम के अधीन किसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जाए ;

(ग) खतरनाक मशीन" से पावर थ्रेशर अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत कृषक या ग्रामीण सेक्टर में उपयोग के लिए आशयित ऐसी मशीनें भी हैं जिन्हें केन्द्रीय सरकार, अपनी यह राय होने पर कि वे, इस प्रकार की हैं जिनसे उनके प्रचालन के अनुक्रम में उनके प्रचालकों की मृत्यु, अंग-भंग या अन्य शारीरिक क्षति होने की संभावना है, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा खतरनाक मशीनों के रूप में विनिर्दिष्ट करे ; 

(घ) दिन" से मध्यरात्रि से आरम्भ होने वाली चौबीस घंटे की अवधि अभिप्रेत है ;

(ङ) किसी खतरनाक मशीन या उसके किसी पुर्जे के संबंध में व्यौहारी" से अभिप्रेत है, ऐसा कोई व्यक्ति या कोई फर्म या कोई हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब जो किसी खतरनाक मशीन या उसके किसी पुर्जे के क्रय, विक्रय, प्रदाय या वितरण का प्रत्यक्षतः या अन्यथा कारबार चलाता है चाहे वह नकद या आस्थगित संदाय या कमीशन या पारिश्रमिक या अन्य मूल्यवान प्रतिफल के लिए हो और उसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं :-

                (i) कोई कमीशन अभिकर्ता जो मालिक की ओर से ऐसा कारबार चलाता है,

                (ii) कोई आयातकर्ता जो किसी उपयोगकर्ता, विनिर्माता, मरम्मतकर्ता, उपभोक्ता या किसी अन्य व्यक्ति को किसी खतरनाक मशीन का विक्रय, प्रदाय, वितरण या अन्यथा परिदान करता है,

किन्तु इसके अन्तर्गत ऐसा कोई विनिर्माता नहीं आता है जो ऐसी किसी खतरनाक मशीन या उसके किसी पुर्जे का इस खंड में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को विक्रय, प्रदाय, वितरण या अन्यथा परिदान करता है ।

स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि ऐसा कोई विनिर्माता जो खतरनाक मशीन या उसके किसी पुर्जे के व्यौहारी से भिन्न किसी व्यक्ति को विक्रय, प्रदाय, वितरण या अन्यथा परिदान करेगा वह व्यौहारी समझा जाएगा और विनिर्माता से संबंधित इस अधिनियम के उपबंधों का पालन करने के अपने दायित्व के साथ-साथ व्यौहारियों से संबंधित इस अधिनियम के उपबंधों का पालन करने का भी दायी होगा ;

(च) किसी खतरनाक मशीन के प्रचालक के संबंध में नियोजक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके द्वारा ऐसा प्रचालक, चाहे ऐसी मशीन के प्रचालन के लिए पारिश्रमिक पर या अन्यथा, नियोजित किया गया है ;

(छ) किसी प्रचालक के संबंध में कुटुम्ब" से उसकी पत्नी और आश्रित बच्चे तथा उसके आश्रित माता-पिता अभिप्रेत हैं ;

(ज) निरीक्षक" से इस अधिनियम के अधीन नियुक्त निरीक्षक अभिप्रेत है ;

(झ) मशीन" के अन्तर्गत उसका मूल गति उत्पादक, पारेषण मशीनरी और ऐसे सभी अन्य साधित्र हैं, जिनके द्वारा ऐसी खतरनाक मशीन के लिए पावर उत्पादित, अन्तरित, पारेषित या उपयोजित की जाती है ;

(ञ) किसी खतरनाक मशीन या उसके किसी पुर्जे के संबंध में विनिर्माता" से कोई ऐसा व्यक्ति या कोई ऐसी फर्म या कोई ऐसा हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब अभिप्रेत है जो,-

                (i) ऐसी खतरनाक मशीन या उसके पुर्जे बनाता या उसका विनिर्माण करता है ;

                (ii) ऐसी खतरनाक मशीन के एक या उससे अधिक पुर्जे बनाता या उनका विनिर्माण करता है और अन्य पुर्जे अर्जित करता है तथा ऐसे पुर्जों को समंजित करने के पश्चात् अन्ितम उत्पाद के बारे में यह दावा करता है कि वह, यथास्थिति, उस व्यक्ति द्वारा या उस फर्म या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब द्वारा बनाया गया या विनिर्मित उत्पाद है ;

(iii) ऐसी खतरनाक मशीन के पुर्जे नहीं बनाता है या उनका विनिर्माण नहीं करता है किन्तु किन्हीं व्यक्तियों द्वारा बनाए गए या विनिर्मित किए गए पुर्जे समंजित करता है और अन्तिम उत्पाद के बारे में यह दावा करता है कि वह, यथास्थिति, उस व्यक्ति द्वारा या उस फर्म या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब द्वारा बनाया गया या विनिर्मित उत्पाद है ;

(iv) किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बनाई गई या विनिर्मित किसी पूर्ण खतरनाक मशीन पर अपना चिह्न लगाता है या लगवाता है और ऐसे उत्पाद के बारे में यह दावा करता है कि वह उस व्यक्ति द्वारा या उक्त फर्म या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब द्वारा बनाया गया या विनिर्मित उत्पाद है ;

(ट) प्रचालक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे प्रत्यक्षतः या किसी अधिकरण (इसके अन्तर्गत कोई ठेकेदार भी है)   द्वारा या उसकी मार्फत किसी खतरनाक मशीन या उसके किसी पुर्जे के प्रचालन या सफाई के लिए या उससे आनुषंगिक किसी अन्य प्रकार के कार्य के लिए या किसी खतरनाक मशीन या उसके किसी पुर्जे के प्रचालन या सफाई से सम्बन्धित किसी अन्य प्रकार के कार्य के लिए, नियोजित किया गया है चाहे वह नियमित कर्मकार के रूप में हो या आकस्मिक कर्मकार के रूप में हो, चाहे ऐसा नियोजन प्रधान नियोजक की जानकारी से या उसके बिना किया गया हो, चाहे उसके लिए पारिश्रमिक हो या नहीं ;

(ठ) पावर" से विद्युतीय या यांत्रिकीय ऊर्जा या किसी अन्य प्रकार की ऊर्जा अभिप्रेत है जो यांत्रिक रूप से किसी खतरनाक मशीन में पारेषित की जाती है ;

(ड) पावर थ्रेशर" से कोई मशीन अभिप्रेत है जो एक या अधिक प्रकार की कृषि उपज की गहाई के लिए पावर की सहायता से प्रचालित की जाती है ;

(ढ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

(ण) मूल गति उत्पादक" से कोई इंजन, मोटर या कोई अन्य साधित्र अभिप्रेत है जो किसी खतरनाक मशीन के लिए पावर का उत्पादन करता है या उसके लिए पावर की व्यवस्था करता है ;

(त) पारेषण मशीनरी" से शेफ्ट, व्हील, ड्रम, पुली या पुली की प्रणाली, कपलिंग, क्लच, ड्राइविंग बेल्ट या अन्य साधित्र या युक्ति अभिप्रेत है जिसके द्वारा प्राइममूवर की गति किसी खतरनाक मशीन को पारेषित की जाती है या उसके द्वारा प्राप्त की जाती है ।

4. अधिनियम का सभी अन्य अधिनियमितियों पर अध्यारोही होना-इस अधिनियम के उपबन्ध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी संविदा या लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में तद्संगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।

अध्याय 2

अधिनियम का प्रशासन

5. नियंत्रकों की नियुक्ति और कृत्य-(1) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्िवत करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियंत्रक नियुक्त करेगी और उसी या किसी पश्चात्वर्ती अधिसूचना द्वारा उतने अपर, उप या सहायक नियंत्रक भी नियुक्त कर सकेगी, जितने वह उचित समझे ।

                (2) नियंत्रक इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन राज्य सरकार के साधारण नियंत्रण और निदेशों के अधीन रहते हुए करेगा ।

                (3) नियंत्रक इस अधिनियम के अधीन अपने द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों का, जो उपधारा (5) के अधीन शक्ितयों से भिन्न हैं, प्रयोग करने के लिए उतने व्यक्तियों को प्राधिकृत कर सकेगा जितने वह उचित समझे और भिन्न-भिन्न शक्तियों का प्रयोग करने के लिए भिन्न-भिन्न व्यक्तियों को प्राधिकृत कर सकेगा ।

                (4) नियंत्रक द्वारा दिए गए या अधिरोपित किसी साधारण या विशेष निदेश के अधीन रहते हुए नियंत्रक द्वारा शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कोई व्यक्ति उन शक्तियों का उसी रीति से प्रयोग कर सकेगा और उनका वही प्रभाव होगा मानो वे इस अधिनियम के अधीन उस व्यक्ति को प्रत्यक्षतः प्रदत्त की गई थी न कि प्राधिकार के रूप में ।

                (5) नियंत्रक अपने से निम्न रैंक के किसी अधिकारी-

                                (क) के सभी या किन्हीं कृत्यों का भी पालन कर सकेगा, और

                (ख) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश द्वारा प्रदत्त शक्तियों का भी प्रयोग कर सकेगा ।

6. नियंत्रक को आदेश जारी करने की शक्ति-यदि नियंत्रक उचित समझे तो इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए ऐसे आदेश कर सकेगा जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों ।

7. निरीक्षकों की नियुक्ति-(1) राज्य सरकार, खतरनाक मशीनों का निरीक्षण करने, तलाशी लेने, उनका अभिग्रहण करने और ऐसी मशीनों के विनिर्माताओं, व्यौहारियों तथा प्रयोगकर्ताओं से संबंधित अभिलेखों की परीक्षा करने से संबंधित इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उतने निरीक्षकों को नियुक्त कर सकेगी जितने वह उचित समझे ।

                (2) प्रत्येक निरीक्षक, नियंत्रक के साधारण निदेशन और नियंत्रण के अधीन रहते हुए अपने कृत्यों का पालन करेगा ।

8. नियंत्रक, आदि का लोक सेवक होना-नियंत्रक, और उस अधिनियम के अधीन कृत्यों का पालन करने के लिए राज्य सरकार या नियंत्रक द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति तथा प्रत्येक निरीक्षक, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।

अध्याय 3

विनिर्माताओं और व्यौहारियों को अनुज्ञप्ति का जारी, नवीकरण और रद्द किया जाना

9. विनिर्माताओं और व्यौहारियों को अनुज्ञप्ति दिया जाना-(1) इस धारा में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय कोई व्यक्ति किसी खतरनाक मशीन का तब तक विनिर्माण नहीं करेगा या विनिर्माता या व्यौहारी के रूप में उसके किसी कारबार का आरम्भ नहीं करेगा या कारबार नहीं चलाएगा जब तक उसके पास नियंत्रक द्वारा इस निमित्त जारी की गई वैध अनुज्ञप्ति न हो :

                परन्तु ऐसा कोई व्यक्ित, जो नियत दिन से ठीक पूर्व किसी वर्ग की खतरनाक मशीन के विनिर्माण में या उसके विनिर्माण या व्यौहारी के रूप में कारबार में संलग्न था, उस तारीख से एक मास की अवधि तक और यदि वह एक मास की उक्त अवधि के भीतर इस धारा के अधीन ऐसी अनुज्ञप्ति के लिए कोई आवेदन  करता है तो वह नियंत्रक का ऐसे आवेदन का निपटारा करने वाला आदेश उसे संसूचित किए जाने तक ऐसी मशीन का विनिर्माण या ऐसा कारबार ऐसी अनुज्ञप्ति के बिना करता रह सकेगा ।

                स्पष्टीकरण-इस उपबंध के प्रयोजन के लिए नियत दिन से-

                                (i) खतरनाक मशीनों के ऐसे वर्ग के संबंध में जो पावर थ्रेशर हैं, उस अधिनियम के आरम्भ की तारीख,

                (ii) खतरनाक मशीनों के किसी अन्य वर्ग के संबंध में वह तारीख जिससे ऐसी मशीन को केन्द्रीय सरकार ने धारा 3 के खण्ड (ग) के अधीन अधिसूचना द्वारा खतरनाक मशीन विनिर्दिष्ट किया है या ऐसे किसी राज्य की दशा में, जिसमें वह धारा पश्चात्वर्ती तारीख से, प्रवृत्त हुई है, ऐसी पश्चात्वर्ती तारीख,

अभिप्रेत है ।

                (2) इस धारा के अधीन जारी की गई कोई अनुज्ञप्ति- 

                                (क) पांच वर्ष की अवधि के लिए वैध होगी ;

                                (ख) उतनी ही अवधि के लिए समय-समय पर नवीकृत की जा सकेगी ; और

                                (ग) ऐसे प्ररूप तथा ऐसी शर्तों के अधीन होगी जो केन्द्रीय सरकार विहित करे ।

                (3) कोई व्यक्ति, जिसका किसी खतरनाक मशीन का विनिर्माण आरम्भ करने का या विनिर्माता या व्यौहारी के रूप में उसका कारबार चलाने का आशय है ऐसे प्ररूप में और पांच सौ रुपए से अनधिक की ऐसी फीस का संदाय करके, जो विहित की जाए, अनुज्ञप्ति दिए जाने के लिए आवेदन करेगा ।

                (4) किसी खतरनाक मशीन का निर्माण आरम्भ करने या विनिर्माता या व्यौहारी के रूप में उसका कारबार चलाने की अनुज्ञप्ति दिए जाने के लिए नियंत्रक तब तक कोई आवेदन मंजूर नहीं करेगा, जब तक कि ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह उचित समझे, निम्नलिखित की बाबत अपना समाधान नहीं कर लेता है-

(क) किसी ऐसे विनिर्माता की दशा में जो इस अधिनियम के प्रारम्भ पर किसी खतरनाक मशीन का कारबार चलाता या उसका विनिर्माण करता है, ऐसी मशीन धारा 13 के अधीन विहित मानकों का अनुपालन करती है, और

(ख) किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में जिसका किसी खतरनाक मशीन के विनिर्माता के रूप में कारबार ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् आरम्भ करने का आशय है, आवेदक ने यह घोषित कर दिया है कि वह ऐसी मशीन का विनिर्माण इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अधिकथित मानकों के अनुसार ही करेगा ।

                (5) इस धारा के अधीन दी गई किसी अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए आवेदन उसकी वैधता की अवधि की समाप्ति की तारीख से कम से कम पैंतालीस दिन पूर्व किया जाएगा तथा उसके साथ दो सौ रुपए से अनधिक की ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए ।

                (6) किसी खतरनाक मशीन के विनिर्माण या विनिर्माता की हैसियत से उसका कारबार चलाने की अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए कोई अवेदन तब तक नामंजूर नहीं किया जाएगा जब तक कि-

                                (क) ऐसी अनुज्ञप्ति के धारक को अपना मामला पेश करने का युक्तियुक्त अवसर न दिया गया हो ; और

                                (ख) नियंत्रक का यह समाधान नहीं हो जाता है कि-

                                                (i) ऐसे नवीकरण के लिए आवेदन उसके लिए विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् किया गया है :

परन्तु किसी अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए ऐसी विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् किए गए आवेदन को एक सौ रुपए से अनधिक की ऐसी विलम्ब फीस के संदाय पर, जो विहित की जाए, ग्रहण किया   जाएगा ;

(ii) आवेदक द्वारा अनुज्ञप्ति के दिए जाने या नवीकरण के समय किया गया कोई कथन तात्त्विक विशिष्टियों में गलत या मिथ्या था ; या

(iii) आवेदक ने किसी खतरनाक मशीन के विहित मानकों के अनुसार विनिर्माण में लोप किया है या उमसें असफल रहा है ; या

(iv) आवेदक ने किसी अनुज्ञप्ति के किसी निबंधन या शर्त का या इस अधिनियम के अधीन किसी उपबन्ध का या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश का या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि का वहां तक उल्लंघन किया है जहां तक ऐसी विधि किसी खतरनाक मशीन को भारत में लाना या उसका भारत से बाहर ले जाना प्रतिषिद्ध करती है ।

                (7) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसे इस धारा के अधीन कोई अनुज्ञप्ति दी गई है या नवीकृत की गई है, अनुज्ञप्ति में विनिर्दिष्ट निबंधनों और शर्तों का और इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए आदेशों के उपबंधों का पालन करेगा ।

                (8) प्रत्येक व्यक्ति जिसे इस धारा के अधीन कोई अनुज्ञप्ति मंजूर या नवीकृत की गई है यह सुनिश्िचत करेगा कि उसके द्वारा नियोजित प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे नियोजन के अनुक्रम में, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियम या किए गए आदेश के उपबंधों का अनुपालन करता है ।

                (9) इस धारा के अधीन किसी अनुज्ञप्ति के दिए जाने या नवीकरण के लिए किए गए किसी आवेदन को मंजूर या नामंजूर करने वाला प्रत्येक आदेश लिखित रूप में किया जाएगा ।

                (10) प्रत्येक अनुज्ञप्त व्यौहारी और प्रत्येक अनुज्ञप्त विनिर्माता अपनी अनुज्ञप्ति को उस परिसर में जिसमें वह इस प्रकार अनुज्ञप्त व्यौहारी या विनिर्माता के रूप में कारबार चलाता है, किसी सहजदृश्य स्थान पर उपदर्शित करेगा ।

10. अनुप्तियों का निलम्बन और रद्द किया जाना-(1) यदि नियंत्रक के पास यह विश्वास करने का पर्याप्त कारण है कि   धारा 9 के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति के धारक ने अनुज्ञप्ति देने या उसके नवीकरण के लिए किए गए किसी आवेदन में या उसके संबंध में ऐसा कोई कथन किया है जो तात्त्विक विशिष्टियों में गलत या मिथ्या है या जिसने इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश या किसी खतरनाक मशीन को भारत में लाने या भारत के बाहर ले जाने की विनियमित करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि का उल्लंघन किया है तो वह ऐसी अनुज्ञप्ति के धारक के विरुद्ध, यथास्थिति, ऐसे गलत या मिथ्या कथन करने या ऐसे उल्लंघन के लिए ऐसी जांच या परीक्षण के पूरा होने तक, ऐसी अनुज्ञप्ति का निलम्बन कर सकेगा :

                परन्तु ऐसी अनुज्ञप्ति दस दिन से अधिक की अवधि के लिए तब तक निलम्बित नहीं की जाएगी जब तक उसके धारक को प्रस्तावित कार्रवाई के विरुद्ध हेतुक दर्शाने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।

                (2) यदि नियंत्रक का ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे यह समाधान हो जाता है कि इस अधिनियम के अधीन दी गई या नवीकृत किसी अनुज्ञप्ति के धारक ने उपधारा (1) में निर्दिष्ट गलत या मिथ्या कथन किया है या किसी खतरनाक मशीन का विनिर्माण ऐसी विधि, नियम या आदेश, जैसा उस उपधारा में निर्दिष्ट है, के उपबंधों में विहित मानकों के अनुसार करने में असफल रहा है या लोप किया है तो वह ऐसी अनुज्ञप्ति को रद्द कर सकेगा :

                परन्तु ऐसी किसी अनुज्ञप्ति को तब तक रद्द नहीं किया जाएगा जब तक कि उसके धारक को प्रस्तावित कार्रवाई के विरुद्ध हेतुक दर्शाने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।

                (3) प्रत्येक व्यक्ति जिसकी अनुज्ञप्ति निलम्बित या रद्द कर दी गई है, ऐसे निलंबन और रद्द किए जाने के ठीक पश्चात् ऐसे अनुज्ञप्तिधारी के रूप में कृत्य करना रोक देगा और तब तक ऐसे अनुज्ञप्तिधारी के रूप में कारबार शुरू नहीं करेगा जब तक कि ऐसा निलम्बन या रद्दकरण आदेश निष्प्रभाव नहीं हो जाता है ।

                (4) प्रत्येक व्यक्ति जो ऐसी अनुज्ञप्ति धारण करता है, जिसे निलम्बित या रद्द कर दिया गया है, ऐसे निलम्बन या रद्दकरण के ठीक पश्चात् ऐसी अनुज्ञप्ति नियंत्रक को अभ्यर्पित कर देगा ।

11. विनिर्माता या व्यौहारी द्वारा आवेदन किए जाने पर अनुज्ञप्ति का रद्द किया जाना-किसी खतरनाक मशीन के विनिर्माण के लिए या विनिर्माता या व्यौहारी के रूप में उसका कारबार करने के लिए अनुज्ञप्ति कोई व्यक्ति, जो ऐसा विनिर्माण या कारबार बंद कर देता है, या जो ऐसे विनिर्माण या कारबार बंद करने का आशय रखता है वह अपनी अनुज्ञप्ति को रद्द करने के लिए नियंत्रक को आवेदन कर सकेगा और तदुपरि नियंत्रक ऐसी अनुज्ञप्ित को रद्द कर सकेगा ।

12. भागीदारी के परिवर्तन पर किसी फर्म की अनुज्ञप्ति का अविधिमान्य होना-जहां किसी फर्म को इस अधिनियम के अधीन किसी खतरनाक मशीन के विनिर्माण के लिए व्यौहारी या विनिर्माता या उसका कारबार करने के लिए अनुज्ञप्त किया गया है वहां ऐसी अनुज्ञप्ति, इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसी फर्म की भागीदारी में किसी परिवर्तन की तारीख से ही, जब तक कि फर्म की भागीदारी में ऐसा परिवर्तन नियंत्रक द्वारा अनुमोदित नहीं कर दिया जाता है, अविधिमान्य होगी ।

अध्याय 4

खतरनाक मशीन के विनिर्माता या व्यौहारी के कर्तव्य और जिम्मेदारियां

13. विनिर्माता द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना कि खतरनाक मशीन का प्रत्येक पुर्जा विहित मानकों के अनुरूप है-(1) किसी खतरनाक मशीन का प्रत्येक विनिर्माता यह सुनिश्िचत करेगा कि ऐसी मशीन और उसका प्रत्येक पुर्जा, भारतीय मानक संस्थान द्वारा उसके लिए अधिकथित मानकों के अनुरूप ऐसे मानकों को पूरा करता है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।

                (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, खतरनाक मशीन का विनिर्माता यह सुनिश्चित करेगा कि निम्नलिखित पुर्जे किसी पर्याप्त संन्निर्माण रक्षोपायों द्वारा सुरक्षित हैं, अर्थात् :-

                                (क) प्राइम मूवर और उसका प्रत्येक पुर्जा ;

                                (ख) पारेषण मशीनरी और उसका प्रत्येक पुर्जा ;

                                (ग) प्रत्येक अन्य खतरनाक पुर्जे, जैसे रोलर, ब्लोअर, सीव, उत्थादक और ऐसे ही पुर्जे ।

                (3) किसी खतरनाक मशीन का प्रत्येक विनिर्माता यह भी सुनिश्चित करेगा कि ऐसी मशीन में स्पष्ट और सुपाठ्य खतरा सिगनल लगाए गए हैं, जो वह बिन्दु उपदर्शित करते हों जिसके आगे मशीन को भरने या किसी अन्य प्रयोजन के लिए, कोई अंग नहीं डाला जाएगा ।

14. प्रत्येक खतरनाक मशीन पर विनिर्दिष्ट की जाने वाली विशिष्टियां-विनिर्माता यह सुनिश्िचत करेगा कि प्रत्येक खतरनाक मशीन पर निम्नलिखित विशिष्टियां ऐसी पद्धति से अंकित या अन्तर्लिखित की जाएं कि वे सुपाठ्य और सहजदृश्य हों तथा अमिट हों, अर्थात् :-

                                (क) घूर्णन की दिशा और घूर्णनों की प्रति मिनट संख्या ;

                                (ख) उसकी विद्युत आवश्यकता ; और

                (ग) विनिर्माता का नाम और सही पता, उसके विनिर्माण का वर्ष और विनिर्माता की अनुज्ञप्ति की तारीख, संख्यांक और अन्य विशिष्टियां ।

15. प्रत्येक खतरनाक मशीन के साथ प्रचालक-पुस्तिका देने का विनिर्माता का कर्तव्य-प्रत्येक विनिर्माता प्रत्येक खतरनाक मशीन के साथ ऐसी मशीन के प्रचालन संबंधी साधारण अनुदेशों वाली पुस्तिका देगा और उसमें ऐसी चेतावनियां भी होंगी, जो विहित की जाएं ।

16. विनिर्माताओं और व्यौहारियों द्वारा प्रमाणपत्र और गारण्टी का दिया जाना-विक्रय, पट्टे, भाड़े द्वारा या अन्यथा किसी खतरनाक मशीन का कब्जा अन्तरित करने के पूर्व प्रत्येक विनिर्माता और प्रत्येक व्यौहारी ऐसी मशीन का कब्जा लेने वाले व्यक्ति को इस आशय की एक घोषणा देगा कि मशीन इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अधिकथित मानकों के अनुरूप है और इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों और आदेशों के उपबन्धों का सभी प्रकार से अनुपालन करती है ।

17. प्रतिपूर्ति के लिए विनिर्माता का दायित्व-जब कभी खतरनाक मशीन का प्रचालन करने वाले व्यक्ति की मृत्यु या उसका कोई अंग-भंग या कोई अन्य शारीरिक क्षति-

(i) मशीन में किसी ऐसी विनिर्माण संबंधी त्रुटि के कारण, जिससे ऐसी मृत्यु, अंग-भंग या क्षति कारित हुई थी, अथवा

(ii) इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों और आदेशों के उपबन्धों का अनुपालन करने में विनिर्माता की चूक के कारण,

हो जाती है तो ऐसा विनिर्माता उस व्यक्ति की प्रतिपूर्ति करने का दायी होगा जिसे इस अधिनियम के अधीन, उस व्यक्ति के कुटुम्ब के सदस्यों को जिसकी मृत्यु ऐसी मशीन से कारित हुई थी या, यथास्थिति, उस व्यक्ति को जिसका ऐसा अंग-भंग हुआ था या जिसको ऐसी शारीरिक क्षति पहुंची थी, प्रतिकर का संदाय करना पड़ा ।

18. विनिर्माताओं और व्यौहारियों द्वारा अभिलेखों का रखा जाना-प्रत्येक विनिर्माता और प्रत्येक व्यौहारी ऐसे रजिस्टर, अभिलेख और लेखे रखेगा जो विहित किए जाएं ।

अध्याय 5

खतरनाक मशीनों के उपयोगकर्ताओं के कर्तव्य और बाध्यताएं

19. उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रत्येक खतरनाक मशीन का रजिस्ट्रीकरण कराया जाना-(1) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो किसी खतरनाक मशीन का स्वामी है या ऐसी मशीन पर पट्टेदार या भाड़ेदार के रूप में अन्यथा नियंत्रण प्राप्त कर लेता है (जिसे इस अधिनियम में उपयोगकर्ता कहा गया है) ऐसी मशीन को चलाना आरम्भ करने के पूर्व नियंत्रक को, पांच रुपए से अनधिक ऐसी फीस का संदाय करके, जो विहित की जाए, ऐसी मशीन के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करेगा ।

                (2) यदि नियंत्रक का, उपधारा (1) के अधीन किए गए आवेदन की प्राप्ति पर, यह समाधान हो जाता है कि मशीन इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों और आदेशों के उपबन्धों का सभी प्रकार से अनुपालन करती है तो वह उसका रजिस्ट्रीकरण करेगा और आवेदक को ऐसा रजिस्ट्रीकरण दर्शित करने वाला प्रमाणपत्र देगा ।

                (3) नियंत्रक एक रजिस्टर रखेगा जिसमें उसके द्वारा रजिस्ट्रीकृत खतरनाक मशीनों की विशिष्टियां और ऐसे व्यक्तियों के नाम और पते तथा अन्य विशिष्टियां होंगी जिनके आवेदन पर ऐसा रजिस्ट्रीकरण किया गया है ।

                (4) किसी भी खतरनाक मशीन को तब तक प्रचालित नहीं किया जाएगा जब तक इस धारा के उपबन्धों के अनुसार उसे रजिस्ट्रीकृत न कर दिया गया हो ।

20. वे बातें जो उपयोगकर्ताओं द्वारा सुनिश्िचत की जाएंगी-खतरनाक मशीन का प्रत्येक उपयोगकर्ता यह सुनिश्िचत करेगा कि-

(क) ऐसी मशीन इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अधिकथित मानकों के अनुरूप है और इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों और आदेशों के उपबन्धों का सभी प्रकार से अनुपालन भी करती है ;

(ख) ऐसी मशीन के प्रचालन के लिए किसी बालक को नियोजित नहीं किया गया है ; और

(ग) ऐसे व्यक्ति को, जिसे ऐसी किसी मशीन के प्रचालन में कोई क्षति पहुंचे, प्राथमिक उपचार प्रदान करने के लिए यथोचित इंतजाम है ।

21. विद्यमान खतरनाक मशीन का उपान्तरण-(1) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसकी अभिरक्षा या नियंत्रण में, इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व, कोई ऐसी खतरनाक मशीन है जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों और आदेशों के उपबन्धों का सभी प्रकार से अनुपालन नहीं करती है, ऐसे प्रारम्भ से एक सौ अस्सी दिन से अन्यून के इतने समय के भीतर, जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, उस मशीन को ऐसे नियमों के अनुसार जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त बनाए, उपान्तरित करवाएगा । 

                (2) ऐसी किसी मशीन का उपयोग या प्रचालन, उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् तब तक नहीं किया जाएगा जब तक उपधारा (1) में निर्दिष्ट उपांतर नहीं कर दिए जाते हैं ।

22. प्रतिकर के लिए नियोजक का दायित्व-(1) यदि खतरनाक मशीन के प्रचालन के रूप में अपने नियोजन के दौरान ऐसे प्रचालक की मृत्यु या उसका कोई अंग-भंग या कोई अन्य शारीरिक क्षति होती है तो उसका नियोजक-

                                (क) प्रचालक की मृत्यु की दशा में, उसके कुटुम्ब को ; और

                                (ख) किसी अन्य मामले में, प्रचालक को,

प्रतिकर का संदाय करने के लिए दायी होगा :

                परन्तु जहां प्रचालक का कुटुम्ब नहीं है वहां प्रतिकर का संदाय, प्रचालक द्वारा इस निमित्त लिखित रूप में नामनिर्दिष्ट और नियंत्रक को अधिसूचित व्यक्ति या व्यक्तियों को किया जाएगा :

                परन्तु यह और कि नियोजक निम्नलिखित की बाबत इस प्रकार दायी नहीं होगा-

(i) कोई ऐसी क्षति जिससे प्रचालक तीन दिन से अधिक की अवधि के लिए पूर्णतः या भागतः निःशक्त नहीं हो जाता है ; अथवा

(ii) कोई ऐसी क्षति जो मृत्यु में परिणत न हुई हो और जो ऐसी दुर्घटना से हुई है जो प्रत्यक्षत :-

                                                (क) ऐसी दुर्घटना के समय प्रचालक पर किसी मादक द्रव्य या ओषधि का असर होने, या

(ख) कर्मकार द्वारा किसी सुरक्षा या अन्य ऐसी युक्ति के, जिसके बारे में वह यह जानता हो कि मशीन में उसकी व्यवस्था प्रचालक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयोनजार्थ की गई है, जानबूझकर हटाने,

                के फलस्वरूप हुई मानी जा सकती है ।

                (2) उपधारा (1) के अधीन संदेय प्रतिकर की रकम का अवधारण और संदाय कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923(1923 का 8) के उपबन्धों के अनुसार किया जाएगा मानो, प्रचालक उस अधिनियम के अर्थ में कर्मकार हो और इस प्रयोजनार्थ उक्त अधिनियम के उपबन्ध उसे उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस अधिनियम के अर्थ में कर्मकार को लागू होते हैं ।

23. दुर्घटना की सूचना-(1) जहां किसी प्रचालक की मृत्यु या उसका कोई अंग-भंग या कोई अन्य शारीरिक क्षति उसके नियोजन के दौरान होती है वहां ऐसी मृत्यु, अंग-भंग या क्षति की सूचना ऐसी मृत्यु, अंग-भंग या क्षति होने की तारीख से तीन दिन के भीतर नियोजक को दी जाएगी ।

                (2) ऐसी सूचना प्रचालक द्वारा, यदि वह जीवित है, या उसके कुटुम्ब के किसी सदस्य द्वारा या उसमें हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी जाएगी ।

                (3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट सूचना देने में चूक, यथास्थिति, प्रचालक या उसके कुटुम्ब के सदस्यों को इस अधिनियम के अधीन संदेय प्रतिकर प्राप्त करने के हक से वंचित नहीं करेगी ।

24. बीमा पालिसियां लेने के लिए नियोजक का कर्तव्य-(1) प्रत्येक नियोजक इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र बीमा-संविदाओं का उपबन्ध करने वाली एक या अधिक बीमा पालिसियां लेगा, जिनके द्वारा वह खतरनाक मशीन के किसी प्रचालक को प्रतिकर का संदाय करने के लिए धारा 22 की उपधारा (1) से उद्भूत होने वाले किसी दायित्व के विरुद्ध बीमाकृत है और ऐसी बीमा-संविदा में प्रचालक को या उसकी मृत्यु की दशा में, उसके कुटुम्ब के सदस्यों को, या यदि उसका कुटुम्ब नहीं है तो उसके नामनिर्देशिती को वार्षिकियों का संदाय करने का उपबन्ध किया जा सकेगा ।  

                (2) प्रत्येक नियोजक उपधारा (1) में निर्दिष्ट बीमा पालिसी को उसकी विधिमान्यता की अवधि की समाप्ति के पूर्व समय-समय पर नवीकृत करवाता रहेगा ताकि बीमा-पालिसी उस अवधिपर्यन्त प्रवृत्त बनी रहे जिसके दौरान कोई व्यक्ति किसी खतरनाक मशीन के प्रचालन के लिए उसके द्वारा नियोजित किया गया है ।  

25. बीमा पालिसियां लेने में नियोजक की चूक या असफलता-(1) धारा 24 में निर्दिष्ट बीमा-पालिसी लेने में नियोजक की चूक या असफलता की दशा में या ऐसी बीमा-पालिसी को प्रवृत्त रखने में या, यथास्थिति, प्रचालक को या उसके कुटुम्ब के सदस्यों या नामनिर्देशितियों को प्रतिकर के रूप में संदत्त किए जाने के लिए अपेक्षित किसी रकम के बीमाकर्ता से अभिप्राप्त करने में नियोजक की चूक, असफलता या असमर्थता की दशा में, नियोजक, उस तारीख के पश्चात् यथाशीघ्र जिसको प्रचालक की मृत्यु या अंग-भंग या अन्य शारीरिक क्षति होती है किन्तु ऐसी तारीख से तीस दिन के अन्दर, प्रचालक को या उसके कुटुम्ब के सदस्यों या नामनिर्देशितियों को अपनी निधियों में से प्रतिकर का संदाय करेगा और ऐसा संदाय करने पर प्रचालक को या उसके कुटुम्ब के सदस्यों को प्रतिकर का संदाय करने के नियोजक के दायित्व का पूर्णतः निर्वहन हो जाएगा ।

                (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट दायित्व का निर्वहन बीमाकर्ता से ऐसा संदाय प्राप्त करने के, जो नियोजक द्वारा ली गई या नवीकृत कराई गई बीमा पालिसी के अधीन उसे शोध्य है, अधिकार को नहीं छीनेगा या न्यून नहीं करेगा ।

अध्याय 6

निरीक्षण, तलाशी और अभिग्रहण

26. मृत्यु या क्षति कारित करने वाली मशीन का परीक्षण-(1) नियोजक को धारा 23 के अधीन सूचना की प्राप्ति पर या अन्यथा यह ज्ञात हो कि किसी खतरनाक मशीन के प्रचालन के दौरान प्रचालक की मृत्यु, अंग-भंग या अन्य शारीरिक क्षति हुई है, तो वह तुरन्त ऐसी मृत्यु या क्षति की सूचना निरीक्षक को देगा ।

                (2) जब कभी निरीक्षक को उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्ट सूचना की प्राप्ति पर या अन्यथा किसी मृत्यु या क्षति की जानकारी होती है तब वह यथाशक्य शीघ्र उस परिसर में प्रवेश करेगा जिसमें वह खतरनाक मशीन स्थित है जिसके द्वारा ऐसी मृत्यु, अंग-भंग या अन्य शारीरिक क्षति कारित हुई है और यह पता  लगाने के लिए मशीन का परीक्षण करेगा कि मशीन इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अधिकथित मानकों के अनुरूप है या नहीं और उसमें सभी विहित सुरक्षा युक्तियां हैं या नहीं और जहां ऐसे परीक्षण के पश्चात् उसकी यह राय है कि मशीन असुरक्षित है, वहां वह आदेश द्वारा ऐसी मशीन का उपयोग तब तक के लिए प्रतिषिद्ध कर देगा जब तक कि वह उसके द्वारा सुरक्षित प्रमाणित नहीं कर दी जाती है ।

                (3) कोई भी मशीन उपधारा (2) के अधीन किए गए प्रतिषेधात्मक आदेश के प्रवर्तन की अवधि के दौरान प्रचालित नहीं की जाएगी ।

27. अभिलेखों आदि का निरीक्षण-इस अधिनियम के अधीन रखा गया प्रत्येक रजिस्टर, अभिलेख और लेखा और इस अधिनियम के अधीन जारी की गई या नवीकृत प्रत्येक अनुज्ञप्ति निरीक्षक द्वारा निरीक्षण के लिए खुली रहेगी ।

28. प्रवेश करने और तलाशी लेने की शक्ति-यदि नियंत्रक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत निरीक्षक को ऐसा संदेह है कि इस अधिनियम के किसी उपबन्ध का उल्लंघन किया गया है, या किया जा रहा है, या किया जाने वाला है तो वह दिन के किसी उपयुक्त समय पर किसी ऐसे परिसर में जिसमें, कोई खतरनाक मशीन प्रचालित की जाती है, प्रवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा ।

29. अभिग्रहण की शक्ति-जब कभी निरीक्षक का यह समाधान हो जाता है कि कोई खतरनाक मशीन, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या आदेशों के उपबंधों का सभी प्रकार से अनुपालन नहीं करती है, इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन में प्रचालित की जा रही है तो वह ऐसी खतरनाक मशीन और उससे संबंधित अभिलेखों और रजिस्टरों को अभिगृहीत कर सकेगा ।

30. तलाशी और अभिग्रहण का दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अनुसार किया जाना-इस अधिनियम के अधीन की गई प्रत्येक तलाशी और अभिग्रहण दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबन्धों के अनुसार किया जाएगा ।

अध्याय 7

अपराध और उनका विचारण

31. अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन के लिए दंड-जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के उपबन्धों के उल्लंघन में,-

(क) इस अधिनियम के अधीन जारी या नवीकृत की गई किसी विधिमान्य अनुज्ञप्ित के बिना किसी खतरनाक मशीन का विनिर्माण करेगा या विनिर्माता या व्यापारी के रूप में उसका कारबार चलाएगा ;

(ख) किसी खतरनाक मशीन के प्रचालन में किसी बालक को नियोजित करेगा ;

(ग) किसी व्यक्ति से ऐसी खतरनाक मशीन को जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन विनिर्दिष्ट मानकों के अनुरूप नहीं है प्रचालित कराएगा ;

(घ) विहित उपांतर किए बिना किसी व्यक्ति से धारा 21 में निर्दिष्ट कोई खतरनाक मशीन प्रचालित कराएगा ;

(ङ) धारा 24 द्वारा यथा अपेक्षित बीमा पालिसी लेने या नवीकृत कराने में चूक करेगा ;

(च) किसी ऐसी खतरनाक मशीन का, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुरूप नहीं है, विक्रय या अन्यथा अन्तरण करेगा ;

 (छ) धारा 26 की उपधारा (2) के अधीन किए गए प्रतिषेधात्मक आदेश के प्रवर्तन में होने की अवधि के दौरान किसी खतरनाक मशीन को प्रचालित करेगा या किसी व्यक्ति से प्रचालित कराएगा ; या

(ज) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या आदेशों के किसी अन्य उपबन्ध का उल्लंघन करेगा,

वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा और द्वितीय तथा पश्चात्वर्ती अपराध की दशा में, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी और जुर्माने से भी, जो पांच सौ रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु एक हजार रुपए से अधिक का नहीं होगा, दण्डनीय होगा ।

32. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कंपनी द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी । 

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकरी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए- 

(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है, तथा

(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

33. अपराध का संज्ञान और विचारण-(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान नियंत्रक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति के द्वारा लिखित रूप में किए गए परिवाद पर ही करेगा अन्यथा नहीं ।

                (2) इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक अपराध पर किसी मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण किया जा सकेगा ।

अध्याय 8

प्रकीर्ण

34. अपीलें-(1) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति देने वाले या उसे जारी करने या नवीकृत करने से इन्कार करने वाले या खतरनाक मशीन का रजिस्ट्रीकरण करने से इन्कार करने वाले आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उस आदेश के विरुद्ध राज्य सरकार को अपील कर सकेगा ।

                (2) ऐसी प्रत्येक अपील आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर दाखिल की जाएगी:

परन्तु राज्य सरकार उक्त तीस दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगी यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी उक्त अवधि के भीतर अपील दाखिल करने से पर्याप्त हेतुक से निवारित हो गया था ।

35. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही राज्य सरकार, नियंत्रक, किसी निरीक्षक या इस अधिनियम के अधीन किन्हीं शक्तियों का प्रयोग या किन्हीं कृत्यों का निर्वहन करने के लिए नियंत्रक द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी । 

36. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, धारा 9 की उपधारा (2) के उपबंधों और धारा 13 और धारा 21 के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।

(2) धारा 3 के खंड (ग) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई प्रत्येक अधिसूचना और उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा, यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस अधिसूचना या नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह अधिसूचना या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु अधिसूचना या नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

37. नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्ति-(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के ऐसे उपबंधों को जो धारा 36 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट उपबन्धों से भिन्न हैं, कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी विषय के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्: -

                (क) धारा 9 में विनिर्दिष्ट सभी विषय, उन विषयों को छोड़कर जो उसकी उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट हैं;

(ख) धारा 9 के अधीन अनुज्ञप्तियों के दिए जाने और नवीकरण के लिए, उस धारा में विनिर्दिष्ट सीमाओं के भीतर, और धारा 19 में यथा उपबंधित व्यौहारियों के रजिस्ट्रीकरण के लिए फीसें (जिसमें विलम्ब फीसें भी हैं);

(ग) धारा 15 द्वारा यथा अपेक्षित अनुदेशों की पुस्तिका में विनिर्दिष्ट की जाने वाली अन्य चेतावनियां;

(घ) वे रजिस्टर, अभिलेख और लेखे जिनका धारा 18 के अधीन रखा जाना अपेक्षित है;

(ङ) खतरनाक मशीन से क्षतिग्रस्त किसी प्रचालक को प्राथमिक उपचार प्रदान करने के लिए धारा 20 के अधीन किए जाने वाले अपेक्षित इन्तजाम; और

(च) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।

                (3) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान-मंडल के, जहां उसके दो सदन हैं प्रत्येक सदन के समक्ष या जहां विधान-मंडल का एक सदन है वहां उस सदन के, समक्ष रखा जाएगा ।

38. निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार किसी राज्य सरकार को, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के उपबन्धों में से किसी का उस राज्य में निष्पादन कराने के लिए निदेश दे सकेगी ।

----------------

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter