संघ राज्यक्षेत्र (लोक सभा प्रत्यक्ष निर्वाचन) अधिनियम, 1965
(1965 का अधिनियम संख्यांक 49)
[22 दिसम्बर, 1965]
लोक सभा में कुछ संघ राज्यक्षेत्रों को आबंटित
स्थानों को भरने के लिए उनमें प्रत्यक्ष
निर्वाचन तथा उससे संबंधित विषयों
के लिए उपबन्ध करने हेतु
अधिनियम
भारत गणराज्य के सोलहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम संघ राज्यक्षेत्र (लोक सभा प्रत्यक्ष निर्वाचन) अधिनियम, 1965 है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, -
(क) संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र" का वही अर्थ है, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में है;
(ख) आसीन सदस्य" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व लोक सभा का सदस्य है;
(ग) संघ राज्यक्षेत्र" से अंदमान तथा निकोबार द्वीपसमूह, [लक्षद्वीप] और दादरा और नागर हवेली संघ राज्यक्षेत्रों में से कोई संघ राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है ।
3. लोक सभा में कुल संघ राज्यक्षेत्रों को आबंटित स्थानों को भरने के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन-लोक सभा के आगामी साधारण निर्वाचन पर और तत्पश्चात् लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की धारा 3 के अधीन लोक सभा में संघ राज्यक्षेत्रों को आबंटित स्थान प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरे जाएंगे और उस प्रयोजन के लिए प्रत्येक संघ राज्यक्षेत्र एक संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र होगा ।
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6. आसीन सदस्यों के बारे में उपबन्ध-प्रत्येक संघ राज्यक्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला आसीन सदस्य उस संघ राज्यक्षेत्र का प्रतिनिधित्व तब तक करता रहेगा जब तक वर्तमान लोक सभा का विघटन न किया जाए और यदि ऐसे विघटन के पूर्व लोक सभा में किसी संघ राज्यक्षेत्र को आबंटित स्थान रिक्त हो जाता है तो वह स्थान अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किसी व्यक्ति से भरा जाएगा और वह व्यक्ति वर्तमान लोक सभा में उसके विघटन तक उस संघ राज्यक्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगा ।
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