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राष्ट्रीय तिलहन और वनस्पति तेल विकास बोर्ड अधिनियम, 1983 ( National Oilseeds And Vegetable Oils Development Board Act, 1983 )


 

राष्ट्रीय तिलहन और वनस्पति तेल विकास बोर्ड अधिनियम, 1983

(1983 का अधिनियम संख्यांक 29)

[8 सितम्बर, 1983]

संघ के नियंत्रण के अधीन तिलहन उद्योग और वनस्पति

तेल उद्योग के विकास और उनसे सम्बन्धित

विषयों का उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के चौंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय तिलहन और वनस्पति तेल विकास बोर्ड अधिनियम, 1983 है ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. संघ द्वारा नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा-इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि लोक हित में यह समीचीन है कि तिलहन उद्योग को संघ अपने नियंत्रण में ले ले ।

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

                (क) बोर्ड" से धारा 4 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय तिलहन और वनस्पति तेल विकास बोर्ड अभिप्रेत है;

(ख) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;

(ग) नारियल" का वही अर्थ है जो उसका नारियल विकास बोर्ड अधिनियम, 1979 (1979 का 5) में है;

(घ) कार्यपालक निदेशक" से बोर्ड का कार्यपालक निदेशक अभिप्रेत है;

(ड़) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है;

(च) तिलहन" के अंतर्गत नारियल नहीं आता है;

(छ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ज) वनस्पति तेल" से तिलहन से प्राप्त तेल या पादप मूल के कोई अन्य तेल धारक पदार्थ, जिनमें ग्लिसराइड है, अभिप्रेत हैं किन्तु इनके अंतर्गत ऐसा कोई वनस्पति तेल नहीं आता, जिसका तेल निकालने के पश्चात् कोई प्रसंस्करण किया गया है;

(झ) उपाध्यक्ष" से बोर्ड का उपाध्यक्ष अभिप्रेत है ।

अध्याय 2

राष्ट्रीय तिलहन और वनस्पति तेल विकास बोर्ड

4. बोर्ड की स्थापना और उसका गठन-(1) ऐसी तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बोर्ड स्थापित किया जाएगा जो राष्ट्रीय तिलहन और वनस्पति तेल विकास बोर्ड के नाम से ज्ञात होगा ।

(2) बोर्ड पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे स्थावर और जंगम सम्पत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन करने और संविदा करने की शक्ति होगी तथा उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।

(3) बोर्ड का मुख्यालय दिल्ली में या ऐसे अन्य स्थान पर होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे ।

(4) बोर्ड निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्: -

                (क) कृषि के संबंध में कार्य करने वाले केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय का भारसाधक मंत्री, जो बोर्ड का पदेन अध्यक्ष होगा;

                (ख) कृषि विकास के सम्बन्ध में कार्य करने वाले केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय का भारसाधक सचिव जो बोर्ड का पदेन उपाध्यक्ष होगा;

                (ग) भारत सरकार का कृषि आयुक्त, पदेन;

                (घ) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् का महानिदेशक, पदेन;

                (ङ) संसद् के तीन सदस्य, जिनमें से दो लोक सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे और एक राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किया जाएगा;

                (च) एक सदस्य, जिसे योजना आयोग का प्रतिनिधित्व करने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

                (छ) तीन सदस्य, जो निम्नलिखित से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे, अर्थात्: -

                                (i) वित्त (राजस्व),

                                (ii) वाणिज्य,

                                (iii) नागरिक पूर्ति;

                (ज) कार्यपालक निदेशक, पदेन;

                (झ) कृषि के सम्बन्ध में कार्य करने वाले केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय का वित्तीय सलाहकार, पदेन;

                (ञ) ग्यारह सदस्य, जिन्हें क्रमशः आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश राज्यों की सरकारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा:

                परन्तु इस खण्ड के अधीन प्रत्येक नियुक्ति सम्बद्ध राज्य सरकार की सिफारिश पर की जाएगी ;

                (ट) पांच सदस्य, जिन्हें निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा, अर्थात्: -

                                (i) भारतीय राज्य व्यापार निगम लिमिटेड;

                (ii) राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 (1962 का 26) की धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम;

                                (iii) राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड;

                                (iv) राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन परिसंघ;

                (v) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 (1981 का 61) की धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक;

                (ठ) तीन सदस्य, जिन्हें तिलहन उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

                (ड) एक सदस्य, जिसे तिलहन वनस्पति तेल का तिलहन से प्राप्त अन्य उत्पादों के निर्यातकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

                (ढ) एक सदस्य, जिसे वनस्पति तेल उद्योग का प्रतिनिधित्व करने के लिए, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

                (ण) दो सदस्य, जिन्हें तिलहन उद्योग या वनस्पति तेल उद्योग से सम्बद्ध ऐसे अन्य हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिनका केन्द्रीय सरकार की राय में प्रतिनिधित्व किया जाना चाहिए, प्रतिनिधित्व करने के लिए उस सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।

(5) पदेन सदस्यों से भिन्न सदस्यों की पदावधि और सदस्यों में हुई रिक्तियां भरने की रीति और उनके कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वह होगी, जो विहित की जाए ।

                (6) केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी को, जो बोर्ड का सदस्य नहीं है, जब उसे इस निमित्त उस सरकार द्वारा प्रतिनियुक्त किया जाता है, बोर्ड के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु उसे मत देने का हक नहीं होगा ।

                (7) बोर्ड ऐसी रीति से तथा ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, और ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो विहित किए जाएं, किसी ऐसे व्यक्ति को अपने साथ सहयोजित कर सकेगा जिसकी सहायता या सलाह की, इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों का पालन करने में बोर्ड वांछा करे और इस प्रकार सहयोजित व्यक्ति को बोर्ड के ऐसे विचार-विमर्श में भाग लेने का अधिकार होगा, जो ऐसे प्रयोजनों से जिसके लिए वह सहयुक्त किया गया है, सुसंगत है किन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा और वह ऐसे भत्ते या फीस पाने का हकदार होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत की जाए ।

                (8) बोर्ड या धारा 8 के अधीन उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि-

                                (क) बोर्ड या ऐसी समिति में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है; या

                                (ख) बोर्ड या ऐसी समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है; या

                (ग) बोर्ड या ऐसी समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता हुई है जिससे मामले के गुणागुणों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।

                (9) बोर्ड ऐसे स्थानों और समयों पर अपने अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कार्य करने के बारे में (जिसके अन्तर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों में उपबन्धित किए जाएं ।

5. सदस्यों के भत्ते-बोर्ड के सदस्य ऐसे भत्ते प्राप्त करेंगे जो केन्द्रीय सरकार नियत करे ।

6. बोर्ड के अधिकारी और अन्य कर्मचारिवृन्द-(1) केन्द्रीय सरकार तिलहन विकास के क्षेत्र में ऐसी तकनीकी अर्हताएं और व्यावहारिक अनुभव जो विहित किए जाएं, रखने वाले व्यक्ति को बोर्ड का कार्यपालक निदेशक नियुक्त करेगी ।

(2) कार्यपालक निदेशक, बोर्ड का मुख्य कार्यपालक होगा और वह ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं ।

(3) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड का एक सचिव नियुक्त करेगी जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या जो बोर्ड अथवा कार्यपालक निदेशक द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।

(4) कार्यपालक निदेशक और सचिव ऐसे वेतन और भत्तों के हकदार होंगे और छुट्टी, पेंशन, भविष्य-निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन होंगे जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर नियत करे ।

(5) ऐसे नियंत्रण और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, बोर्ड ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा जो उसके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों और बोर्ड के ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का ढंग, सेवा की शर्तें और वेतनमान और भत्ते वे होंगे जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों में बोर्ड द्वारा उपबन्धित किए जाएं ।

(6) बोर्ड का कार्यपालक निदेशक, सचिव और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा के बिना इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों से असंसक्त किसी काम को अपने हाथ में नहीं लेंगे ।

7. बोर्ड के कर्मचारियों के अंतरण के लिए विशेष उपबन्ध-(1) बोर्ड की स्थापना पर केन्द्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह आदेश द्वारा और उस तारीख या उन तारीखों से (जो ऐसी तारीख से भूतलक्षी हो सकती है जो ऐसी स्थापना की तारीख से पहले की नहीं है या भविष्यलक्षी हो सकती है) जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को, जो बोर्ड की स्थापना की तारीख के ठीक पूर्व तिलहन विकास निदेशालय में उस रूप में पद धारण कर रहा था, बोर्ड को अन्तरित कर दे :

परन्तु जिस पद पर ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी का अंतरण किया जाता है, उसका वेतनमान उस पद के वेतनमान से कम नहीं होगा जिसे वह ऐसे अंतरण के ठीक पूर्व धारण कर रहा था और जिस पद पर उसका अंतरण किया जाता है उस पद की सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें (जिनके अन्तर्गत पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा सुविधाएं भी हैं) उसके द्वारा ऐसे अंतरण के ठीक पूर्व धारित पद से संबंधित सेवा के निबन्धनों और शर्तों से कम लाभप्रद नहीं होंगी:

परन्तु यह और कि यदि उसके अंतरण के ठीक पूर्व कोई ऐसा अधिकारी या अन्य कर्मचारी केन्द्रीय सरकार के अधीन किसी उच्चतर पद पर या तो छुट्टी से हुए रिक्ति में या किसी विनिर्दिष्ट अवधि की किसी रिक्ति में स्थानापन्न रूप में कार्य कर रहा हो तो अंतरण पर उसके वेतन और अन्य भत्तों को, यदि कोई हों, ऐसी रिक्ति की अनवसित अवधि के लिए संरक्षित किया जाएगा और उसके पश्चात् वह केन्द्रीय सरकार के अधीन उस पद को लागू होने वाले वेतनमान का हकदार होगा जिस पर यदि बोर्ड में उसका अंतरण न हुआ होता तो वह पदावनत हो जाता ।

(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश किए जाने के पूर्व तिलहन विकास निदेशालय के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को जो उस उपधारा के अधीन अन्तरित किए जाने के लिए प्रस्थापित हैं ऐसे प्ररूप में, और ऐसे समय के भीतर जो केन्द्रीय सरकार द्वारा उस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, यह विकल्प दिया जाएगा कि वे यह बताएं कि वे बोर्ड का कर्मचारी बनने के लिए रजामन्द हैं या नहीं और एक बार विकल्प का प्रयोग करने पर वह अंतिम होगा:

परन्तु उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश तिलहन विकास निदेशालय के किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी के संबंध में जारी नहीं किया जाएगा, जिसने इस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर बोर्ड का कर्मचारी न होने के अपने आशय की सूचना दे दी है:

परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार द्वारा उक्त निदेशालय में नियोजित उन व्यक्तियों के साथ जो इस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर बोर्ड के कर्मचारी बनने का अपना आशय प्रकट नहीं करते हैं, उसी रीति से और उन्हीं नियमों के अनुसार बरता जाएगा जो केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को उस दशा में लागू होते जब उस विभाग के जिसमें ऐसे व्यक्ति नियोजित किए गए हैं, कर्मचारियों की संख्या में कमी की जाती ।

(3) उपधारा (1) के अधीन आदेश द्वारा अन्तरित कोई अधिकारी या कर्मचारी, अंतरण की तारीख से ही केन्द्रीय सरकार का अधिकारी या कर्मचारी नहीं रह जाएगा और ऐसे पदाभिधान से जो बोर्ड अवधारित करे, बोर्ड का अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा तथा इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों से पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तों (जिनके अन्तर्गत पेंशन, छुट्टी, भविष्य-निधि और चिकित्सा सुविधाएं भी हैं) के बारे में शासित होगा और बोर्ड का अधिकारी या अन्य कर्मचारी तब तक बना रहेगा जब तक उसका नियोजन बोर्ड द्वारा सम्यक्तः समाप्त न कर दिया जाए :

परन्तु जब तक बोर्ड के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तों को शासित करने वाले ऊपर विनिर्दिष्ट विनियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए सुसंगत नियम और आदेश ऐसे अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों को लागू रहेंगे ।

(4) यदि यह प्रश्न उठता है कि क्या बोर्ड द्वारा किसी विषय के बारे में, जिसके अन्तर्गत पारिश्रमिक, पेंशन, छुट्टी, भविष्य-निधि और चिकित्सा प्रसुविधाएं भी हैं, बनाए गए विनियम उन विनियमों से कम लाभप्रद हैं जो ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को, बोर्ड को उसके अंतरण के ठीक पूर्व उसके द्वारा धारित पद पर उसे मिलते थे, तो इस विषय में केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।

8. बोर्ड की प्रबंध समिति और अन्य समितियां-(1) बोर्ड को ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करने के प्रयोजन के लिए, जो विहित किए जाएं या बोर्ड द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं, बोर्ड की एक प्रबंध समिति होगी ।

(2) बोर्ड की प्रबंध समिति बोर्ड के निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात्: -

                (क) उपाध्यक्ष जो प्रबंध समिति का अध्यक्ष होगा;

                (ख) कृषि आयुक्त, भारत सरकार;

                (ग) महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्;

                (घ) एक सदस्य, जिसे धारा 4 की उपधारा (4) के खण्ड (छ) में निर्दिष्ट सदस्यों में से अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा;

                (ङ) कार्यपालक निदेशक;

                (च) कृषि के संबंध में कार्यवाही करने वाले केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय का वित्तीय सलाहकार;

                (छ) एक सदस्य जिसे धारा 4 की उपधारा (4) के खंड (ञ) में निर्दिष्ट सदस्यों में से अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा;

                (ज) एक सदस्य जिसे धारा 4 की उपधारा (4) के खण्ड (ट) में निर्दिष्ट सदस्यों में से अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा;

                (झ) एक सदस्य जिसे धारा 4 की उपधारा (4) के खण्ड (ठ) में निर्दिष्ट सदस्यों में से अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा; और

                (ञ) एक सदस्य जिसे धारा 4 की उपधारा (4) के खण्ड (ड), खण्ड (ढ) और खण्ड (ण) में निर्दिष्ट सदस्यों में से अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा ।

(3) ऐसे नियंत्रण और निर्बन्धनों के जो विहित किए जाएं, अधीन रहते हुए बोर्ड की किसी शक्ति का प्रयोग या उसके किसी कृत्य का पालन करने के लिए या किसी ऐसे विषय की जो बोर्ड उनको निर्देशित करे, जांच करने या उस पर रिपोर्ट देने या उस पर सलाह देने के लिए बोर्ड अन्य स्थायी समितियों या तदर्थ समितियों का गठन कर सकेगा ।

(4) बोर्ड को यह शक्ति होगी कि वह उतनी संख्या में, जितनी वह ठीक समझे, ऐसे अन्य व्यक्तियों को, जो बोर्ड के सदस्य नहीं हैं, प्रबन्ध समिति या उपधारा (3) के अधीन गठित किसी समिति के सदस्यों के रूप में सहयोजित कर ले और इस प्रकार सहयोजित व्यक्तियों को समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

(5) उपधारा (4) के अधीन किसी समिति के सदस्यों के रूप में सहयोजित व्यक्ति समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए ऐसे भत्ते या फीस प्राप्त करने के हकदार होंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत की जाए ।

9. बोर्ड के कृत्य-(1) बोर्ड का यह कर्तव्य होगा कि वह केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन तिलहन उद्योग और वनस्पति तेल उद्योग के विकास की ऐसे उपायों द्वारा वृद्धि करे जो वह ठीक समझे ।

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसमें निर्दिष्ट उपाय निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे-

                (क) तिलहन उद्योग और वनस्पति तेल उद्योग के विकास के लिए ऐसे उपाय करना जो कृषकों, विशेषकर छोटे कृषकों को तिलहन उद्योग और वनस्पति तेल उद्योग के विकास और वृद्धि में भाग लेने के लिए और उसके हिताधिकारी होने के लिए समर्थ बना सकें;

                (ख) भारत में तिलहन, तिलहन उत्पादों और वनस्पति तेल के विपणन में सुधार के लिए और उनकी क्वालिटी नियंत्रण के लिए उपायों की सिफारिश करना;

                (ग) तिलहन की खेती या तिलहन और उसके उत्पादों के प्रसंस्करण या विपणन में लगे हुए किसी व्यक्ति को तकनीकी सलाह देना;

                (घ) तिलहन उद्योग और वनस्पति तेल उद्योग में विकास करने की दृष्टि से पर्याप्त मात्रा में उच्च क्वालिटी के अभिजनक बीजों, आधारिक बीजों और प्रमाणित बीजों के उत्पादन और विकास के लिए, तिलहन उगाने वालों के लिए निवेश के प्रदाय की व्यवस्था करने के लिए, तिलहन की खेती के विकसित तरीकों और तिलहन के प्रसंस्करण के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए, तिलहन की खेती के क्षेत्रों के विस्तार के लिए वित्तीय या अन्य सहायता देना या उसकी सिफारिश करना;

                (ङ) तिलहन उगाने वालों को प्रोत्साहन कीमतें प्राप्त कराने में सहायता करने के लिए ऐसे उपायों की सिफारिश करना जो व्यावहारिक हों, जिनके अंतर्गत जब कभी आवश्यक हो, कृषि मूल्य आयोग से परामर्श करने के पश्चात्, तिलहन और तिलहन तथा वनस्पति तेलों के उत्पादों के लिए न्यूनतम और अधिकतम मूल्यों के लिए सिफारिश करना सम्मिलित है;

                (च) तिलहन, तिलहन उत्पादों और वनस्पति तेलों की बाबत कीमत स्थिति और बाजार की दशा में स्थिरता बनाए रखने के लिए तिलहन बफर स्टाक के संग्रहण, उपापन और बनाए रखने के लिए ऐसे उपायों की सिफारिश करना और उपाय करना जो आवश्यक हों;

                (छ) ऐसे उपायों की सिफारिश करना और उपाय करना जो निम्नलिखित के लिए आवश्यक हों, -

                                (i) भंडारकरण सुविधाओं का संवर्द्धन और विकास;

                (ii) तिलहन की बाबत प्रसंस्करण एककों की स्थापना और ऐसी वित्तीय या अन्य सहायता का दिया जाना जो ऐसे प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझी जाए;

(iii) तिलहन के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में एकीकरण प्राप्त करने की दृष्टि से तिलहन उगाने वालों की सहकारिताओं और अन्य समुचित अभिकरणों का संवर्द्धन;

                (ज) तिलहन या वनस्पति तेलों की एकीकृत नीति और विकास कार्यक्रम के संदर्भ में तिलहन या तिलहन के उत्पादों या वनस्पति तेलों के आयात, निर्यात या वितरण के विनियमन के लिए, उपायों की सिफारिश करना;

                (झ) तिलहन उगाने वालों, तिलहन के व्यवहारियों, तिलहन उत्पादों और वनस्पति तेलों के विनिर्माताओं और ऐसे अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं से, जो आवश्यक हों, तिलहन उद्योग या वनस्पति तेल उद्योग से संबंधित किसी विषय पर आंकड़े संगृहीत करना और इस प्रकार संगृहीत आंकड़ों या उनके किसी भाग या उनसे उद्धरणों को प्रकाशित करना;

                (ञ) तिलहन और उनके उत्पादों और वनस्पति तेलों के लिए ग्रेड मानकों को स्थापित करने और उन्हें अपनाए जाने के लिए सिफारिश करना;

                (ट) केन्द्रीय सरकार और उन राज्यों की सरकारों से, जिनमें बड़े पैमाने पर तिलहन उगाया जाता है, परामर्श करके उचित स्कीमों का वित्तपोषण करना जिससे कि तिलहन के उत्पादन में वृद्धि की जा सके और उसकी क्वालिटी और उपज की उन्नति हो सके और इस प्रयोजन के लिए तिलहन उगाने वालों और तिलहन उत्पादों तथा वनस्पति तेल के विनिर्माताओं को ईनाम या प्रोत्साहन देने तथा तिलहन उत्पादों और वनस्पति तेलों के लिए विपणन सुविधाएं देने के लिए स्कीमें तैयार करना;

                (ठ) तिलहन, उसके उत्पादों और वनस्पति तेलों के संबंध में कृषिक, प्रौद्योगिक, औद्योगिक या आर्थिक अनुसंधान के लिए ऐसी सहायता करना, प्रोत्साहन देना या संवर्द्धन, समन्वयन और वित्तपोषण करना जो बोर्ड उपलब्ध संस्थानों का उपयोग करके ठीक समझे;

                (ड) तिलहन उद्योग और वनस्पति तेल उद्योग के अनुसंधान और विकास के लिए प्रचार करना;

                (ढ) तिलहन और उसके उत्पादों और वनस्पति तेलों के उत्पादन, प्रसंस्करण, श्रेणीकरण और विपणन के संवर्द्धन और विकास के लिए विभिन्न राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में बोर्ड के कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए प्रादेशिक कार्यालयों और अन्य अभिकरणों की स्थापना करना;

                (ण) ऐसे अन्य विषय जो बोर्ड के कृत्यों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक समझे जाएं या जो विहित किए जाएं ।

(3) बोर्ड इस धारा के अधीन अपने कृत्यों का पालन ऐसे नियमों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए करेगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाएं ।

10. बोर्ड का विघटन-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और उसमें विनिर्दिष्ट किए जाने वाले कारणों से, निदेश दे सकेगी कि बोर्ड का उस तारीख से और उतनी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, विघटन कर दिया जाएगा:

परन्तु ऐसी कोई अधिसूचना जारी करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार प्रस्थापित विघटन के विरुद्ध अभ्यावेदन करने के लिए बोर्ड को उचित अवसर प्रदान करेगी और बोर्ड के अभ्यावेदन पर, यदि कोई हो, विचार करेगी ।

(2) जब उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन बोर्ड का विघटन कर दिया जाता है तब-

(क) सभी सदस्य इस बात के होते हुए भी कि उनकी पदावधि समाप्त नहीं हुई है, विघटन की तारीख से ऐसे सदस्यों के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे;

(ख) विघटन की अवधि के दौरान बोर्ड की सभी शक्तियों का प्रयोग और सभी कर्तव्यों का पालन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा जिसे या जिन्हें केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे और उसका या उनका पारिश्रमिक ऐसा होगा जो विहित किया जाए;

(ग) बोर्ड में निहित सभी निधियां और अन्य संपत्ति, विघटन की अवधि के दौरान, केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएंगी; और

                (घ) विघटन की अवधि समाप्त होते ही, बोर्ड का पुनर्गठन इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ।

अध्याय 3

वित्त, लेखा और लेखा परीक्षा

11. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान और उधार-केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् बोर्ड को अनुदानों या उधारों के रूप में ऐसी धनराशि का संदाय कर सकेगी जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने के लिए ठीक समझे ।

12. तिलहन और वनस्पति तेल विकास निधि का गठन-(1) तिलहन और वनस्पति तेल विकास निधि के नाम से ज्ञात होने वाली एक निधि गठित की जाएगी और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे-

                (क) ऐसी कोई फीस, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन उद्गृहीत और संगृहीत की जा सकेगी;

                (ख) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा संदत्त कोई धनराशि या अनुदत्त कोई अनुदान या उधार;

                (ग) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए अनुदान या उधार (जिनके अन्तर्गत धारा 13 के अधीन बोर्ड द्वारा अभिप्राप्त उधार भी हैं);

                (घ) राज्य सरकारों, स्वैच्छिक संगठनों या अन्य संस्थाओं से कोई अनुदान या संदान ।

(2) निधि का उपयोजन निम्नलिखित के लिए किया जाएगा, -

                (क) धारा 9 में निर्दिष्ट उपायों में होने वाले खर्च की पूर्ति,

                (ख) बोर्ड के, यथास्थिति, सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक की पूर्ति,

                (ग) बोर्ड के अन्य प्रशासनिक खर्चों और इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्राधिकृत किन्हीं अन्य खर्चों की पूर्ति,

                (घ) अन्य उधारों का प्रतिसंदाय ।

13. बोर्ड की उधार लेने की शक्तियां-(1) बोर्ड, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के क्रियान्वयन के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से और उसके निदेशों के अधीन रहते हुए-

                (क) ऐसे बंधपत्रों या डिबेंचरों या दोनों का, जिन पर उस दर से ब्याज उद्भूत होगा जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, जनता को पुरोधरण या विक्रय करके,

                (ख) किसी बैंक या अन्य संस्था से,

                (ग) ऐसे किसी अन्य प्राधिकरण, संगठन या संस्था से जो इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित की जाए, धन उधार ले सकेगा ।

                (2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन बोर्ड द्वारा उधार लिए गए धन के प्रतिसंदाय और उस पर ब्याज और अन्य आनुषंगिक प्रभारों के संदाय के लिए प्रत्याभूति दे सकेगी ।

14. लेखा और लेखा-परीक्षा-(1) बोर्ड, उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित करे ।

(2) बोर्ड के लेखाओं की परीक्षा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर, जो वह विनिर्दिष्ट करे, की जाएगी और ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय बोर्ड द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को और बोर्ड के लेखाओं की परीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में, वे ही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की लेखापरीक्षा के संबंध में होते हैं, और विशेषतया उन्हें बहियों, लेखाओं, सम्बद्ध वाऊचरों तथा अन्य दस्तावेजों और कागजपत्रों के पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के किसी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित बोर्ड के लेखे उनकी लेखापरीक्षा की रिपोर्ट सहित केन्द्रीय सरकार को प्रति वर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।

अध्याय 4

केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण

15. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश-बोर्ड ऐसे निदेशों को कार्यान्वित करेगा जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के दक्ष प्रशासन के लिए उसे समय-समय पर दे ।

16. विवरणियां और रिपोर्ट-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर तथा ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, या जो केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, ऐसी विवरणियां और विवरण तथा तिलहन उद्योग और वनस्पति तेल उद्योग के संवर्द्धन और विकास के लिए प्रस्तावित या विद्यमान कार्यक्रम के बारे में ऐसी विशिष्टियां देगा जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे ।

(2) बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अपने क्रियाकलापों का कार्यक्रम केन्द्रीय सरकार को उसकी जानकारी और निदेशों, यदि कोई हों, के लिए देगा ।

(3) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना बोर्ड यथासंभव शीघ्र प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर एक रिपोर्ट ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख से पूर्व जो विहित की जाए, केन्द्रीय सरकार को देगा जिसमें पूर्व वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों, नीति और कार्यक्रमों का सही और पूरा विवरण होगा ।

(4) उपधारा (3) के अधीन प्राप्त रिपोर्ट की प्रति उसके प्राप्त होने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।

 

 

अध्याय 5

प्रकीर्ण

17. सद्भावपूर्ण की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार अथवा बोर्ड के या उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति के अथवा बोर्ड या ऐसी समिति के किसी सदस्य के अथवा केन्द्रीय सरकार या बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी के अथवा केन्द्रीय सरकार या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।

18. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना, द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -

                (क) सदस्यों (पदेन सदस्यों से भिन्न) की पदावधि और उनमें रिक्तियों को भरने की रीति और ऐसे सदस्यों द्वारा धारा 4 की उपधारा (5) के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में उनके द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;

                (ख) वह रीति जिसमें, वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए और वे प्रयोजन जिनके लिए धारा 4 की उपधारा (7) के अधीन बोर्ड द्वारा किसी व्यक्ति को सहयोजित किया जा सकेगा;

                (ग) धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन बोर्ड में कार्यपालक निदेशक के पद पर नियुक्ति के लिए अपेक्षित तिलहन विकास में तकनीकी अर्हताएं और व्यावहारिक अनुभव;

                (घ) वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कृत्य जिनका पालन धारा 6 की उपधारा (2) के अधीन बोर्ड के मुख्य कार्यपालक के रूप में कार्यपालक निदेशक द्वारा किया जा सकेगा;

                (ङ) वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कृत्य जिनका पालन बोर्ड का सचिव धारा 6 की उपधारा (3) के अधीन कर सकेगा;

                (च) वे नियंत्रण और निर्बन्धन जिनके अधीन रहते हुए अन्य अधिकारी और कर्मचारी धारा 6 की उपधारा (5) के अधीन बोर्ड द्वारा नियुक्त किए जा सकेंगे;

                (छ) वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कृत्य जिनका पालन प्रबंध समिति द्वारा धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन किया जा सकेगा;

                (ज) ऐसा नियंत्रण और ऐसे निर्बन्धन जिनके अधीन रहते हुए अन्य स्थायी समितियों या तदर्थ समितियों का गठन, धारा 8 की उपधारा (3) के अधीन, बोर्ड द्वारा किया जा सकेगा ;

                (झ) वे विषय जिनके बारे में बोर्ड द्वारा धारा 9 की उपधारा (2) के खण्ड (ण) के अधीन अपने कृत्यों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए उपाय कर सकेगा;

                (ञ) धारा 10 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्ति या व्यक्तियों को संदेय पारिश्रमिक;

                (ट) वह प्ररूप जिसमें धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन बोर्ड के लेखे और वार्षिक लेखा विवरण तैयार किए और रखे जाएंगे;

                (ठ) वह समय जब और वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे बोर्ड केन्द्रीय सरकार की धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन अपने प्रस्थापित या विद्यमान कार्यक्रमों की बाबत विवरणियां और विवरण और विशिष्टियां प्रस्तुत करेगा;

                (ड) वह प्ररूप जिसमें और वह तारीख जिसके पूर्व बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व वित्तीय वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलापों, नीति और कार्यक्रमों की रिपोर्ट धारा 16 की उपधारा (3) के अधीन प्रस्तुत करेगा;

                (ढ) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित किया जाना है या किया जाए ।

19. विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उन सभी विषयों का उपबंध करने के लिए जिनके लिए इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजनों के लिए उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है, ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -

                (क) बोर्ड के अधिवेशनों का समय और स्थान और ऐसे अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और उन सदस्यों की संख्या जिनसे धारा 4 की उपधारा (9) के अधीन अधिवेशन की गणपूर्ति होगी,

                (ख) धारा 6 की उपधारा (5) के अधीन बोर्ड के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का ढंग, उनकी सेवा की शर्तें और वेतनमान तथा भत्ते,

                (ग) साधारणतया बोर्ड के क्रियाकलापों का दक्ष संचालन ।

(3) केन्द्रीय सरकार अपने द्वारा मंजूर किए गए किसी विनियम को राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उपान्तरित या विखण्डित कर सकेगी और इस प्रकार उपांतरित या विखण्डित विनियम, यथास्थिति, ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी या निष्प्रभाव होगा, किन्तु ऐसे किसी उपांतरण या विखंडन का उस विनियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

20. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

21. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार ऐसे आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी:

परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए प्रत्येक आदेश की प्रति किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष   रखी जाएगी ।

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