राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962
(1962 का अधिनियम संख्यांक 26)
झ्र्31 दिसम्बर, 1962ट
झ्र्सहकारी सिद्धांतों के आधार पर कृषि उपज, झ्र्खाद्य पदार्थों, औद्योगिक माल, पशुधन,
कतिपय अन्य वस्तुओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, क्रय-विक्रय निर्यात और
आयात और सेवाओं के कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें
संप्रवर्तित करने के प्रयोजन के लिए तथा उनसे
संबद्ध या आनुषंगिकट विषयों के
लिए निगम के निगमन और
विनियमन का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियमट
भारत गणराज्य के तेरहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो : श्न्
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भश्न्(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 है ।
(2) इसका विस्तार ॥। सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएंश्न्इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,श्न्
झ्र्(क) कृषि उपजञ्ज् के अन्तर्गत निम्नलिखित हैं : श्न्
(त्) खाद्य और अखाद्य तिलहन ;
(त्त्) पशु खाद्य, जिसके अन्तर्गत खली और अन्य संघटक हैं ;
(त्त्त्) उद्यान कृषि उपज और पशुपालन ;
(त्ध्) वनोत्पाद ;
(ध्) कुक्कुट-पालन उत्पाद ;
(ध्त्) मत्स्यपालन उत्पाद ; और
(ध्त्त्) अन्य सहबद्ध क्रियाकलापों के उत्पाद चाहे वे कृषि के साथ सहयुक्त रूप से किए जाते हैं अथवा नहीं ; ट
झ्र्(कक) बैंकञ्ज् से राष्ट्रीयकृत बैंक अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत अनुसूचित बैंक भी है ;ट
झ्र्(कख) बोर्डञ्ज् से धारा 10 के अधीन गठित निगम का प्रबन्ध बोर्ड अभिप्रेत है ;ट
झ्र्(कखक) केन्द्रीय वित्तीय संस्थाञ्ज् से भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक या भारतीय औद्योगिक वित्त निगम लिमिटेड जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाई गई और रजिस्ट्रीकृत कंपनी है या भारतीय औद्योगिक प्रत्यय और विनिधान निगम लिमिटेड जो दि इंडियन कंपनीज ऐक्ट, 1913 (1913 का 9) के अधीन बनाई गई और रजिस्ट्रीकृत कंपनी है, अभिप्रेत है;ट
झ्र्(ख) केन्द्रीय भाण्डागारण निगमञ्ज् से भाण्डागारण निगम अधिनियम, 1962 (1962 का 58) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित केन्द्रीय भांडागारण निगम अभिप्रेत है ;
(ग) सहकारी सोसाइटीञ्ज् से ऐसी सोसाइटी अभिप्रेत है जो सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1912 (1912 का 2) के अधीन या बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1984 (1984 का 51) के अधीन या सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी अन्य ऐसी विधि के अधीन, जो किसी राज्य में तत्समय प्रवृत्त है, रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकृत समझी गई है, और जो धारा 9 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट क्रियाकलापों में से किसी में लगी हुई है तथा इसके अन्तर्गत सहकारी भूमि विकास बैंक, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, भी है ;ट
(घ) निगमञ्ज् से झ्र्धारा 3 की उपधारा (1)ट के अधीन स्थापित राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अभिप्रेत है ;
झ्र्(घक) खाद्य पदार्थञ्ज् के अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं, अर्थात् : श्न्
(त्) नारियल और सुपारी ;
(त्त्) अण्डे और अण्डों के उत्पाद ;
(त्त्त्) मछली, चाहे वह ताजी, हिमशीतित, सुखाई हुई या परिरक्षित हो ;
(त्ध्) फल, चाहे वे ताजे, सुखाए हुए या निर्जलित हों ;
(ध्) मधु ;
(ध्त्) मांस, चाहे वह ताजा, हिमशीतित, सुखाया हुआ या परिरक्षित हों ;
(ध्त्त्) दूध और दूध के उत्पाद ;
(ध्त्त्त्) सब्जियां ;
(घख) महापरिषद्ञ्ज् से निगम की धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन गठित महापरिषद् अभिप्रेत है ;ट
झ्र्(घखक) औद्योगिक मालञ्ज् से औद्योगिक सहकारिताओं या कुटीर और ग्रामोद्योग के उत्पाद या ग्रामीण क्षेत्रों में सहबद्ध उद्योगों के उत्पाद अभिप्रेत हैं और इसके अन्तर्गत हस्तशिल्प या ग्रामशिल्प भी है ;
(घखख) पशुधनञ्ज् के अन्तर्गत ऐसे सभी पशु हैं जिनको दुग्ध, मांस, हल्की ऊन, चमड़ा, ऊन और अन्य उपोत्पाद के लिए पाला जाता है ;ट
(घग) प्रबंध निदेशकञ्ज् से निगम का प्रबंध निदेशक अभिप्रेत है ;
झ्र्(घघ) राष्ट्रीयकृत बैंकञ्ज् से बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित तत्स्थानी नया बैंक अभिप्रेत है ;ट
(ङ) अधिसूचित वस्तुञ्ज् से झ्र्(कृषि उपज और खाद्य पदार्थों से भिन्न)ट कोई ऐसी वस्तु अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित वस्तु घोषित करे, और जो ऐसी वस्तु है जिसके बारे में संसद् को संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 3 की प्रविष्टि 33 के आधार पर विधि बनाने की शक्ति प्राप्त है ;
4झ्र्(ङक) अधिसूचित सेवाओंञ्ज् में ऐसी कोई सेवा अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अधिसूचित सेवा घोषित करे ;ट
(च) विहितञ्ज् से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(छ) रिजर्व बैंकञ्ज् से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है ;
2झ्र्(छक) अनुसूचित बैंकञ्ज् से ऐसा बैंक अभिप्रेत है जो तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित है ;ट
झ्र्(ज) स्टेट बैंकञ्ज् से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक या भारतीय स्टेट बैंक का कोई समनुषंगी बैंक अभिप्रेत है ;
(जक) राज्य सहकारी बैंकञ्ज् का वही अर्थ है जो राष्ट्रीय कृषि और विकास बैंक अधिनियम, 1981 (1981 का 61) में है ;ट
(झ) वर्षञ्ज् से वित्तीय वर्ष अभिप्रेत है ।
झ्र्2क. किसी ऐसी विधि के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त नहीं है, या किसी ऐसे कृत्यकारी के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में विद्यमान नहीं है, निर्देशों का अर्थान्वयनश्न्इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त नहीं है, या किसी ऐसे कृत्यकारी के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में विद्यमान नहीं है, किसी निर्देश का, उस राज्य के संबंध में, अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा मानो वह उस राज्य में प्रवृत्त किसी तत्स्थानी विधि के प्रति, या उस राज्य में विद्यमान किसी तत्समान कृत्यकारी के प्रति, निर्देश हो ।ट
3. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की स्थापनाश्न्(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उस तारीख से, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के नाम से एक निगम की स्थापना करेगी । वह शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा, उसे सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और वह उक्त नाम से वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।
(2) निगम का प्रधान कार्यालय नई दिल्ली में होगा ।
झ्र्(3) निगम अपने कृत्य महापरिषद् और बोर्ड के माध्यम से करेगा ।
(4) महापरिषद् के निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् : श्न्
(त्) एक सभापति और एक उपसभापति जो दोनों केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ;
(त्त्) आठ सदस्य, पदेन, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, आर्थिक विषयों का कार्य करने वाले अपने ऐसे मंत्रालयों में से जिन्हें वह ठीक समझे, नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ;
झ्र्(त्त्) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 के अधीन गठित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक का अध्यक्ष, पदेन ;ट
(त्ध्) स्टेट बैंक का प्रबन्ध निदेशक, पदेन ;
(ध्) खाद्य निगम अधिनियम, 1964 (1964 का 37) के अधीन गठित भारतीय खाद्य निगम का प्रबन्ध निदेशक, पदेन ;
(ध्त्) भाण्डागारण निगम अधिनियम, 1962 (1962 का 59) के अधीन गठित केन्द्रीय भाण्डागार निगम का प्रबन्ध निदेशक, पदेन ;
झ्र्(ध्त्त्) केन्द्रीय वित्तीय संस्थाओं के अध्यक्षों में से एक सदस्य जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा, पदेन ;ट
(ध्त्त्त्) बैंकों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा ;
(त्न्) भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ का अध्यक्ष, पदेन ;
(न्) नेशनल ऐग्रीकल्चरल कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन का अध्यक्ष, पदेन ;
(न्त्) नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज का अध्यक्ष, पदेन ;
(न्त्त्) आल इण्डिया फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव स्पिनिंग मिल्स का अध्यक्ष, पदेन ;
(न्त्त्त्) आल इण्डिया स्टेट कोआपरेटिव बैंक्स फेडरेशन का अध्यक्ष, पदेन ;
(न्त्ध्) खण्ड (न्ध्) के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्यों से भिन्न, और राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले ग्यारह सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे : परन्तु प्रत्येक राज्य या संघ राज्यक्षेत्र से एक से अधिक व्यक्ति ऐसे नामनिर्दिष्ट नहीं किए जाएंगे ;
(न्ध्) ग्यारह सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के राज्य स्तर के सहकारी परिसंघों के अध्यक्षों में से नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे : परन्तु प्रत्येक राज्य या संघ राज्यक्षेत्र से एक से अधिक व्यक्ति ऐसे नामनिर्दिष्ट नहीं किए जाएंगे ;
(न्ध्त्) कृषि सहकारी विकास का विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले चार सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ;
(न्ध्त्त्) सहकारी कार्यक्रमों के संप्रवर्तन और विकास में लगे हुए, या उनसे हितबद्ध राष्ट्रीय स्तर के संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले झ्र्चार सदस्यट, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ;
(न्ध्त्त्त्) प्रबन्ध निदेशक ।
(5) निगम की शक्तियों और कृत्यों का, यथास्थिति, प्रयोग या निर्वहन महापरिषद् द्वारा किया जाएगा, तथा इस अधिनियम में अन्यत्र निगम के प्रति निर्देशों का अर्थ, जब तक सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, यह लगाया जाएगा कि वे महापरिषद् के प्रतिनिर्देश हैं ।
(6) अपने पद की विहित अवधि समाप्त हो जाने पर भी, महापरिषद् का प्रत्येक सदस्य उस रूप में तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक कि उस पद में उसके उत्तरवर्ती ने ऐसे पद का भार ग्रहण न कर लिया हो ।
(7) प्रबन्ध निदेशक को छोड़कर, महापरिषद् के सदस्य निगम की महापरिषद्, बोर्ड या किसी समिति की किसी बैठक में हाजिर होने के लिए ऐसी बैठक-फीस पाने के हकदार होंगे जो निगम इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विनिदिष्ट करे :
परन्तु कोई भी शासकीय सदस्य बैठक-फीस पाने का हकदार नहीं होगा ।ट
4. निगम का सदस्य होने के लिए निरर्हताएंश्न्यदि कोई व्यक्ति श्न्
(त्) दिवालिया न्यायनिर्णीत किया जाता है या किसी समय दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है या उसने अपने ऋणों का संदाय निलम्बित कर दिया है, या अपने लेनदारों के साथ प्रशमन कर लिया है ; अथवा
(त्त्) किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष किया जाता है, या किया गया है, जिसमें नैतिक अधमता अन्तर्ग्रस्त है, तथा उस अपराध के लिए छह मास से अन्यून के कारावास से दण्डादिट किया गया है, तो जब तक उस दण्डादेश के अवसान की तारीख से पांच वर्ष की अवधि व्यतीत नहीं हुई है; अथवा
(त्त्त्) झ्र्प्रबन्धक निदेशक के सिवायट निगम का कोई वैतनिक पदधारी है,
तो वह निगम का सदस्य चुने जाने और रहने के लिए निरर्हित होगा ।
5. निगम के सदस्यों की पदावधिश्न्(1) निगम के सदस्यों की पदावधि और सदस्यों में रिक्तियों की पूर्ति करने की रीति वह होगी जो विहित की जाए ।
(2) निगम का पदेन सदस्य से भिन्न कोई भी सदस्य, केन्द्रीय सरकार को लिखित सूचना देकर अपने पद का त्याग कर सकेगा और ऐसे त्यागपत्र के स्वीकार किए जाने पर उसकी बाबत यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है ।
6. सदस्य, आदि का पदसे हटाया जानाश्न्केन्द्रीय सरकार, निगम के पदेन सदस्य से भिन्न किसी सदस्य को उसके प्रस्तावित हटाए जाने के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उसे युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, पद से किसी समय हटा सकेगी ।
7. निगम के अधिवेशन, आदिश्न्(1) झ्र्निगम के अधिवेशन साधारणतया एक वर्ष में दो बार ऐसे समयों और स्थानों पर होंगेट और वह उपधारा (2) और (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए अपने अधिवेशनों में कामकाज के संव्यवहार के बारे में ऐसी प्रक्रिया का (जिसके अन्तर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी आती है) अनुपालन करेगा जो इस अधिनियम के अधीन निगम द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्धित की जाए ।
(2) निगम के अधिवेशन का सभापतित्व झ्र्अध्यक्षट, या उसकी अनुपस्थिति में झ्र्उपाध्यक्षट, या 4झ्र्अध्यक्षट, और 5झ्र्उपाध्यक्षट दोनों की अनुपस्थिति में, उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया कोई सदस्य करेगा ।
(3) निगम के अधिवेशन में सभी प्रश्न, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के मतों की बहुसंख्या से विनिश्चित किए जाएंगे और मत बराबर होने की दशा में, 4झ्र्अध्यक्षट, या उसकी अनुपस्थिति में 5झ्र्उपाध्यक्षट, या 4झ्र्अध्यक्षट और 5झ्र्उपाध्यक्षट दोनों की अनुपस्थिति में, सभापतित्व करने वाले व्यक्ति को दूसरा या निर्णायक मत प्राप्त होगा और वह उसका प्रयोग करेगा ।
8. निगम के अधिकारी और अन्य कर्मचारीश्न्(1) केन्द्रीय सरकार निगम से परामर्श करके किसी व्यक्ति को झ्र्प्रबन्ध निदेशकट नियुक्त करेगी ।
(2) ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाएं, निगम ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जिन्हें वह अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए आवश्यक समझता है ।
(3) निगम के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की पद्धतियां, सेवा की शर्तें और वेतनमान, श्न्
(क) झ्र्प्रबन्ध-निदेशकट के विषय में, वे होंगे जो विहित किए जाएं; और
(ख) अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के विषय में, वे होंगे जो उन विनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं जो इस अधिनियम के अधीन निगम द्वारा बनाए गए हैं ।
झ्र्(4) प्रबन्ध-निदेशक ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो बोर्ड उसे सौंपे या प्रत्यायोजित करे ।ट
9. निगम के कृत्यश्न् झ्र्(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, निगम के कृत्य सहकारी सोसाइटियों के माध्यम से, श्न्
(क) कृषि उपज, खाद्य पदार्थ, कुक्कुट खाद्य और अधिसूचित वस्तुओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, क्रय-विक्रय, भंडारकरण, निर्यात और आयात के लिए ;
(ख) गौण वन उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, क्रय-विक्रय, भंडारकरण और निर्यात के लिए,
झ्र्(ग) अधिसूचित सेवाओं का विकास,ट
झ्र्कार्यक्रमों की योजना बनाना, उन्हें संप्रवर्तित करना और उनका वित्त पोषण करना होगा ।ट
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निगम श्न्
(क) सहकारी सोसाइटियों का वित्तपोषण करने और सहकारी विकास के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए कर्मचारिवृन्द का नियोजन करने के लिए राज्य सरकारों को ऋण दे सकेगा या सहायकी मंजूर कर सकेगा ;
(ख) केन्द्रीय सरकार के निमित्त झ्र्कृषि उपज, खाद्य पदार्थ,ट झ्र्पशुधन, कुक्कुट खाद्य, औद्योगिक माल, अधिसूचित वस्तुओं और अधिसूचित सेवाओंट के क्रय के लिए सहकारी सोसाइटियों का वित्तपोषण करने के लिए राज्य सरकारों को निधियां दे सकेगा ;
(ग) कृषि उपज के विकास के लिए बीज, खाद, उर्वरक, कृषि उपकरण और अन्य वस्तुएं सहकारी सोसाइटियों के माध्यम से प्रदान करने के लिए कार्यक्रमों की योजना बना सकेगा और उन कार्यक्रमों को संप्रवर्तित कर सकेगा ;
झ्र्(घ) राष्ट्रीय स्तर की सहकारी सोसाइटियों और अन्य सहकारी सोसाइटियों को, जिनके उद्देश्यों का विस्तार एक से अधिक राज्यों पर है, सीधे ऋण और अनुदान दे सकेगा ;
(ङ) सहकारी सोसाइटियों को, राज्य सरकारों की प्रत्याभूति पर, अथवा संघ राज्यक्षेत्रों की सहकारी सोसाइटियों की दशा में, केन्द्रीय सरकार की प्रत्याभूति पर, ऋण दे सकेगा :
झ्र्परंतु ऐसी प्रत्याभूति की ऐसी दशाओं में आवश्यकता नहीं होगी जिनमें उधार लेने वाली सहकारी सोसाइटी द्वारा निगम के समाधानप्रद रूप में प्रत्याभूति दे दी जाती है ;ट
(च) राष्ट्रीय स्तर की सहकारी सोसाइटियों और अन्य सोसाइटियों की जिनके उद्देश्यों का विस्तार एक राज्य से परे हो, शेयर पूंजी में सम्मिलित हो सकेगा ।ट
(3) निगम इस धारा के अधीन अपने कृत्यों का ऐसे प्रयोग करेगा कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 61) के अधीन स्थापित खादी और ग्रामोद्योग आयोग के क्रियाकलाप में हस्तक्षेप न हो ।
झ्र्10. निगम का प्रबन्ध बोर्डश्न्(1) निगम का एक प्रबन्ध बोर्ड होगा जिसके निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात : श्न्
(त्) महापरिषद् का उपसभापति, जो अध्यक्ष होगा ;
(त्त्) महापरिषद् के तीन सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, धारा 3 की उपधारा (4) के खण्ड (त्त्) में निर्दिष्ट सदस्यों में से नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ;
(त्त्त्) महापरिषद् का वह सदस्य, जो धारा 3 की उपधारा (4) खण्ड (त्त्त्) में निर्दिष्ट है ;
(त्ध्) महापरिषद् का एक सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, धारा 3 की उपधारा (4) के खण्ड (त्न्), (न्), (न्त्), (न्त्त्) और (न्त्त्त्) में निर्दिष्ट सदस्यों में से नामनिर्दिष्ट किया जाएगा ;
(ध्) महापरिषद् के दो सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 3 की उपधारा (4) के खण्ड (न्त्ध्) में निर्दिष्ट सदस्यों में से नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ;
(ध्त्) महापरिषद् के दो सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, धारा 3 की उपधारा (4) के खण्ड (न्ध्) में निर्दिष्ट सदस्यों में से नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे ;
(ध्त्त्) महापरिषद् का एक सदस्य, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, धारा 3 की उपधारा (4) के खंड (न्ध्त्) और (न्ध्त्त्) में निर्दिष्ट सदस्यों में से नामनिर्दिष्ट किया जाएगा ;
(ध्त्त्त्) प्रबन्ध निदेशक ।
(2) बोर्ड का उपाध्यक्ष केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा ।
(3) महापरिषद् के साधारण नियंत्रण, निदेशन और अधीक्षण के अधीन रहते हुए बोर्ड ऐसी किसी बात के बारे में कार्रवाई करने के लिए सक्षम होगा जो निगम की सक्षमता के अन्तर्गत है ।
(4) बोर्ड के अधिवेशन ऐसे समयों और स्थानों पर होंगे और वह अपने अधिवेशनों में कामकाज के संव्यवहार के बारे में ऐसी प्रक्रिया का (जिसके अन्तर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी आती है) अनुपालन करेगा जो इस अधिनियम के अधीन निगम द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा उपबंधित की जाए ।
(5) बोर्ड के प्रत्येक अधिवेशन का पुष्टीकृत कार्यवृत्त, महापरिषद् के समक्ष उसके ठीक आगामी अधिवेशन में रखा जाएगा ।ट
11. अन्य समितियांश्न्निगम साधारण या विशेष प्रयोजनों के लिए ऐसी अन्य समितियां गठित कर सकेगा जिन्हें वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए आवश्यक समझता है ।
12. केन्द्रीय सरकार द्वारा निगम को अनुदानश्न्केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात् निगम को श्न्
(क) हर वर्ष अनुदान के रूप में ऐसी धनराशि देगी जो राज्य सरकारों को सहायकी देने और निगम के अपने प्रशासनिक व्ययों को पूरा करने के लिए निगम द्वारा अपेक्षित हो, ॥।
(ख) ऋण के रूप में ऐसी धनराशि ऐसे निबंधनों और शर्तों पर देगी जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे; झ्र्औरट
3झ्र्(ग) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसे अतिरिक्त अनुदान, यदि कोई हों, देगी ।ट
झ्र्12क. धनराशि उधार लेने की निगम की शक्तिश्न्(1) निगम, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निष्पादन करने के प्रयोजनों के लिए और केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से तथा उसके निदेशों के अधीन रहते हुए, श्न्
(क) जनता से, ऐसी दरों पर, जो निदेशों में विनिर्दिष्ट की जाएं, ब्याज वाले बन्धपत्रों या डिबेंचरों या दोनों के निर्गम या विक्रय द्वारा ;
(ख) किसी बैंक या अन्य वित्तीय संस्था से ;
(ग) किसी अन्य प्राधिकरण, संगठन या संस्था से, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से अनुमोदित की जाए,
धनराशि उधार ले सकेगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, निगम द्वारा उपधारा (1) के खण्ड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन उधार ली गई धनराशियों के प्रतिसंदाय की तथा उन पर ब्याज और अन्य आनुषंगिक प्रभारों के संदाय की प्रत्याभूति दे सकेगी ।ट
झ्र्12ख. (1) निगम, सरकार से या भारत के अथवा भारत के बाहर के किसी अन्य अभिकरण से दान, अनुदान, संदान या उपकृतियां प्राप्त कर सकेगी ।
(2) निगम किसी विदेशी सरकार या भारत के बाहर के किसी अन्य अभिकरण से कोई दान, अनुदान, संदान या उपकृतियां केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से ही प्राप्त कर सकेगी, अन्यथा नहीं ।ट
13. निगम द्वारा निधि का रखा जानाश्न्(1) निगम राष्ट्रीय सहकारी विकास निधि (जिसे इसमें इसके पश्चात् निधि कहा गया है) के नाम से एक निधि रखेगा, जिसमें निम्निलखित राशियां जमा की जाएंगी : श्न्
(क) निगम को धारा 24 की उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन अन्तरित सभी धनराशियां और अन्य प्रतिभूतियां ;
(ख) धारा 12 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा निगम को दिए गए अनुदान और उधारों के रूप में दी गई अन्य धनराशियां ;
झ्र्(खख) धारा 12ख के अधीन प्राप्त सभी धन ;
(खखख) की गई सेवाओं के लिए प्राप्त सभी धन ;ट
झ्र्(खक) धारा 12क के अधीन उधार ली गई सभी धनराशियां ;ट
(ग) ऐसे अतिरिक्त अनुदान, यदि कोई हों, जो केन्द्रीय सरकार निगम को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए दे; और
(घ) ऐसी धनराशियां जो निधि में से दिए गए उधारों के प्रतिसंदाय में से या उधारों पर ब्याज में से अथवा निधि में से किए गए विनिधानों पर 3झ्र्लाभांशों या अन्य वसूलियोंट में से समय-समय पर वसूल की जाएं ।
(2) निधि की धनराशियों का उपयोजन, श्न्
(क) सहकारी सोसाइटियों की शेयर पूंजी में अभिदाय करने के लिए या सहकारी सोसाइटियों का अन्यथा वित्त पोषण करने के लिए राज्य सरकारों को समर्थ करने के प्रयोजनों के लिए राज्य सरकारों को ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, जो निगम ठीक समझे, ऋण देने और सहायकियां अनुदत्त करने के लिए किया जाएगा ;
(ख) निगम के झ्र्प्रबन्ध-निदेशक, अधिकारियोंट और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्तों और निगम के अन्य प्रशासनिक व्ययों को पूरा करने के लिए किया जाएगा ; तथा
(ग) इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए किया जाएगा ।
झ्र्(3) निधि की सभी राशियां रिजर्व बैंक या स्टेट बैंक या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या किसी अनुसूचित बैंक या राज्य सहकारी बैंक में जमा की जाएंगी ।ट
14. विवरणियां और रिपोर्टेंश्न्(1) निगम केन्द्रीय सरकार को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के विषय में ऐसी विवरणियां और विवरण और ऐसी विशिष्टियां जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे, ऐसे समयों पर और ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए या जैसा केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, देगा ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निगम हर वर्ष की समाप्ति के पश्चात् यथासंभव शीघ्र केन्द्रीय सरकार को ऐसी रिपोर्ट जिसमें पूर्व वर्ष के दौरान के उसके क्रियाकलाप, नीति और कार्यक्रम का सही और पूरा वृत्तांत दिया गया हो, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से और ऐसी तारीख के पूर्व, जो विहित की जाए, देगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त रिपोर्ट की एक प्रति संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएगी ।
15. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेशश्न्नीति संबंधी मामलों सहित सभी मामलों में निगम ऐसे निदेशों से मार्गदर्शित होगा जो उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए जाएं ।
16. क्रियाकलाप के कार्यक्रम और वित्तीय प्राक्कलनों का दिया जानाश्न्(1) निगम हर वर्ष के प्रारम्भ के पूर्व, आगामी वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलाप के कार्यक्रम का विवरण तथा उससे संबंधित वित्तीय प्राक्कलन तैयार करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन तैयार किया गया विवरण हर वर्ष के प्रारम्भ से कम से कम तीन मास पूर्व केन्द्रीय सरकार को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा ।
17. बोर्ड के लेखे और संपरीक्षाश्न्(1) निगम समुचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामर्श करके, लेखाओं का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो विहित किया जाए ।
(2) निगम का लेखा हर वर्ष भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा संपरीक्षित किया जाएगा तथा ऐसी संपरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय निगम द्वारा संदेय होगा ।
(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को और निगम के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को, ऐसी संपरीक्षा के बारे में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में प्राप्त हैं और विशिष्टतया उसे निगम की बहियों, लेखाओं, संबद्ध वाउचरों और अन्य दस्तावेजों और कागजपत्रों के पेश किए जाने की मांग करने और निगम के किसी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा निगम के प्रमाणित लेखे, उनसे संबंधित संपरीक्षा रिपोर्ट सहित हर वर्ष केन्द्रीय सरकार को भेजे जाएंगे तथा वह सरकार उन्हें संसद् के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगी ।
18. रिक्तियों आदि से निगम के कार्यों और कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होनाश्न् झ्र्महापरिषद्, बोर्ड या निगम की किसी समितिट का कोई भी कार्य या कार्यवाही, उसके सदस्यों में कोई रिक्ति होने या उसके गठन में कोई त्रुटि होने के कारण से ही अविधिमान्य नहीं हो जाएगी ।
19. प्रत्यायोजनश्न्निगम इस अधिनियम के अधीन की अपनी ऐसी शक्तियां और कृत्य, जिन्हें वह आवश्यक समझे, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, जो लिखित रूप में होगा, निगम के झ्र्अध्यक्ष या उपाध्यक्षट या किसी अन्य सदस्य या अधिकारी को, ऐसी शर्तों और सीमाओं के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।
20. विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणाश्न्निगम का हर सदस्य, संपरीक्षक, अधिकारी या अन्य कर्मचारी अपने कर्तव्य ग्रहण करने से पूर्व अनुसूची में दिए गए प्ररूप में विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा करेगा ।
21. निगम का विघटनश्न्(1) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि निगम इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने में असफल रहा है या किसी अन्य कारण से निगम को चालू रखना आवश्यक नहीं है तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निगम को ऐसी तारीख से, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, विघटित कर सकेगी ।
(2) जब उपधारा (1) के अधीन निगम का विघटन किया जाता है, तबश्न्
(क) निगम के सभी सदस्य, विघटन की तारीख से, ऐसे सदस्यों के रूप में अपने पदों को रिक्त कर देंगे ;
(ख) निगम की सभी शक्तियां और कर्तव्यों का विघटन की तारीख से, केन्द्रीय सरकार या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, जिन्हें केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे, प्रयोग और पालन किया जाएगा ;
(ग) निगम की सभी धनराशियां और अन्य सम्पत्तियां केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएंगी ।
22. नियम बनाने की शक्तिश्न्(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे : श्न्
। । । ।
(घ) निगम के सदस्यों की पदावधि और उनमें की रिक्तियों की पूर्ति की रीति ;
(ङ) झ्र्प्रबन्ध निदेशकट की नियुक्ति की पद्धतियां, सेवा की शर्तें और वेतनमान ;
। । । ।
(छ) निगम द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के बारे में केन्द्रीय सरकार को दी जाने वाली विवरणियां, विवरण और अन्य विशिष्टियां ;
(ज) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे, और वह समय जिसके अन्दर, निगम केन्द्रीय सरकार को अपने कृत्यों के निर्वहन के बारे में विवरणियां, विवरण और अन्य विशिष्टियां देगा ;
(झ) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे और वह समय जिसके अन्दर, निगम केन्द्रीय सरकार को अपने क्रियाकलाप, नीति और कार्यक्रम की रिपोर्ट देगा ;
(ञ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । झ्र्यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, जिसमें उसे इस प्रकार रखा गया हो या उस सत्र के ठीक बाद के सत्र या सत्रों के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा ।ट यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीनप हले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभावन हीं पडे़गा ।
23. निगम को विनियम बनाने की शक्तिश्न्(1) निगम उन सब बातों का उपबन्ध करने के लिए, जिनके लिए उपबन्ध करना इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन है, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, ऐसे विनियम जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत नहीं हैं, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे : श्न्
(क) वह रीति जिससे झ्र्महापरिषद्, बोर्ड और निगम की अन्य समितियोंट के अधिवेशन बुलाए जाएंगे, ऐसे अधिवेशनों में हाजिर होने के लिए फीस तथा उनमें अपनाई जाने वाली प्रक्रिया ;
(ख) निगम के ( झ्र्प्रबन्ध निदेशकट से भिन्न) अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की पद्धतियां, सेवा की शर्तें और वेतनमान ;
(ग) निगम के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के कर्तव्य और आचरण ; तथा
(घ) कोई अन्य विषय, जिसके बारे में निगम इस अधिनियम के अधीन विनियम बनाने के लिए सशक्त या अपेक्षित है ।
(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी विनियम को, जिसे उसने मंजूर किया है, विखंडित कर सकेगी और तदुपरि ऐसा विनियम प्रभावहीन हो जाएगा ।
24. निरसन और व्यावृत्तिश्न्(1) उस तारीख से, जिसको धारा 3 के अधीन निगम स्थापित किया जाता है, एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस (डेवलपमेंट एण्ड वेयरहाउसिंग) कारपोरेशन ऐक्ट, 1956 (1956 का 28) वहां तक निरसित हो जाएगा जहां तक कि वह राष्ट्रीय सहकारी विकास और भांडागार बोर्ड से संबंधित है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, श्न्
(क) राष्ट्रीय सहकारी विकास निधि की, जो उक्त तारीख से ठीक पूर्व, निरसित अधिनियम के अधीन स्थापित राष्ट्रीय सहकारी विकास और भांडागार बोर्ड द्वारा (जिसे इसमें इसके पश्चात् उक्त बोर्ड कहा गया है) पोषित थी, सभी धनराशियां और अन्य प्रतिभूतियां इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित निगम को अन्तरित हो जाएंगी और उसके द्वारा बनाए रखी जाएंगी ;
(ख) राष्ट्रीय भांडागार विकास निधि की, जो उक्त तारीख से ठीक पूर्व, निरसित अधिनियम के अधीन उक्त बोर्ड द्वारा पोषित थी, सभी धनराशियां और अन्य प्रतिभूतियां केन्द्रीय भांडागारण निगम को अन्तरित हो जाएंगी और उसके द्वारा बनाए रखी जाएंगी ;
(ग) केन्द्रीय भांडागार निगम की पूंजी में उक्त बोर्ड द्वारा धृत सभी शेयर, उन शेयरों लेखे असमादत्त आहवानों की अदायगी संबंधी उन्हीं दायित्व के अधीन रहते हुए, जिनके अधीन उक्त बोर्ड था, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित हो जाएंगे ;
(घ) निरसित अधिनियम के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई (जिसके अन्तर्गत दिया गया कोई ऋण, अनुदत्त सहायकी और की गई नियुक्ति, किया गया प्रत्यायोजन, बनाया गया नियम या विनियम भी है), जहां तक कि वह इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत नहीं है, इस अधिनियम के अधीन की गई समझी जाएंगी ; तथा
(ङ) उक्त बोर्ड के सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं, चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उत्पन्न हों, इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित निगम के क्रमशः अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं हो जाएंगी ।
अनुसूची
(धारा 20 देखिए)
विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा
मैं.........................................घोषणा करता हूं कि मैं उन कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक, सच्चाई से और अपनी सर्वोत्तम विवेक-बुद्धि, कौशल और योग्यता से निष्पादन और पालन करूंगा, जो राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के (यथास्थिति) सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी या संपरीक्षक के रूप में मुझसे अपेक्षित है और जो उक्त निगम में मेरे द्वारा धृत पद या ओहदे से उचित रूप से संबंधित हैं ।
मैं यह घोषणा भी करता हूं कि मैं उक्त निगम के कार्यों से संबंधित कोई जानकारी किन्हीं ऐसे व्यक्तियों को, जो वैध रूप से उनके हकदार न हों, संसूचित नहीं करूंगा और न संसूचित होने दूंगा और न मैं ऐसे किन्हीं व्यक्तियों को, निगम की या उसके कब्जे की तथा निगम के कारबार से सम्बद्ध किन्हीं पुस्तकों या दस्तावेजों का निरीक्षण करने दूंगा और न उनकी उन तक पहुंच होने दूंगा ।
मेरे समक्ष हस्ताक्षर किए
हस्ताक्षरह्लह्लह्लह्लह्ल....
तारीख............... हस्ताक्षर.....................
हस्ताक्षरह्लह्लह्लह्लह्ल....

