अधिमानी शेयर (लाभांशों का विनियमन) अधिनियम, 1960
(1960 का अधिनियम संख्यांक 63)
[28 दिसम्बर, 1960]
कतिपय कम्पनियों के अधिमानी शेयरों
पर लाभांशों का विनियमन
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के ग्यारहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम अधिमानी शेयर (लाभांशों का विनियमन) अधिनियम, 1960 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है :
परन्तु यह जम्मू-कश्मीर राज्य को केवल उस विस्तार तक लागू होगा जिस तक इस अधिनियम के उपबन्धों का सम्बन्ध बैंककारी और बीमा कम्पनियों और वित्तीय निगमों के अधिमानी शेयरों पर लाभाशों के विनियमन से है ।
[(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के उपबन्ध पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र को लागू करने में, अनुसूची में विनिर्दिष्ट उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे ।]
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “कम्पनी अधिनियम" से कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) अभिप्रेत है ;
(ख) “कम्पनी" से [आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43)ट की धारा 2 के खंड (26) में यथापरिभाषित भारतीय कम्पनी अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत उक्त धारा के खंड (17) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट कम्पनी है] जिसने उक्त अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार भारत के भीतर लाभांशों को घोषित करने और देने का इन्तजाम किया है ;
(ग) “अधिमानी शेयर" से ऐसा शेयर अभिप्रेत है जिसे *** लाभांशों की बाबत नियत रकम अथवा नियत दर पर परिकलित रकम संदत्त किए जाने का अधिमानी अधिकार है ;
(घ) “पूर्व वर्ष" का वही अर्थ है जो उसका [आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43)] में है ;
(ङ) किसी अधिमानी शेयर के संबंध में, अनुबद्ध लाभांश" से, नियत रकम या नियत दर पर परिकलित रकम अभिप्रेत है जिसका लाभांश के रूप में दिए जाने का ऐसे शेयर के धारक को अधिमानी अधिकार है ;
(च) ऐसे अन्य सब शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं,और कम्पनी अधिनियम में परिभाषित हैं, क्रमशः वही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।
3. कतिपय मामलों में अधिमानी शेयरों पर लाभांशों का विनियमन-(1) जहां [1 अप्रैल, 1960 के पूर्व निर्गमित और प्रतिश्रुत] किए गए किसी कम्पनी के अधिमानी शेयर की बाबत अनुबद्ध लाभांश-
(क) आय-कर से मुक्त होना विनिर्दिष्ट है और उस कम्पनी द्वारा संदेय आय-कर के कारण उसमें से कोई कटौती नहीं की गई है, या
(ख) 1 अप्रैल, 1960 के पूर्व, ऐसे किसी विनिर्देशन के अभाव में भी कि लांभाश आय-कर से मुक्त होगा, कम्पनी द्वारा संदेय आय-कर के कारण उसमें से कोई कटौती किए बिना दिया जाता था, वह इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् घोषित लाभांशों की बाबत, ऐसे प्रत्येक शेयर के बारे में यह अधिमानी अधिकार होगा कि पूर्वोक्त कटौती किए बिना, उसका संदाय ऐसी रकम द्वारा किया जाए जो अनुबद्ध लाभांश से उसके तीस प्रतिशत से अधिक होगी ।
(2) जहां 31 मार्च, 1959 के पश्चात् 5[और 1 अप्रैल, 1960 से पूर्व निर्गमित और प्रतिश्रुत] किए गए किसी कम्पनी के अधिमानी शेयर की बाबत अनुबद्ध लाभांश आय-कर से मुक्त हैं और कम्पनी ऐसे शेयर के धारक को अनुबद्ध लाभांश देने के अतिरिक्त उसकी ओर से अधिमानी शेयर पर संदेय आय-कर के कारण किसी राशि का संदाय सरकार को करती है, वहां इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् घोषित लाभांशों के बारे में ऐसे प्रत्येक शेयर की बाबत यह अधिमानी अधिकार होगा कि आय-कर से मुक्त ऐसी रकम का संदाय किया जाए जो पूर्वोक्त राशि सहित अनुबद्ध लाभांशों से उसके तीस प्रतिशत से अधिक होगी ।
(3) जहां [1 अप्रैल, 1960 से पूर्व निर्गमित और प्रतिश्रुत] किए गए किसी कम्पनी के अधिमानी शेयर की बाबत अनुबद्ध लाभांश के विषय में जहां-
(क) यह विनिर्दिष्ट है कि वह आय-कर काट दिया जाएगा और कम्पनी द्वारा संदेय आय-कर की उसमें से कटौती की गई है, या
(ख) ऐसे किसी विनिर्देशन के अभाव में भी कि लाभांश आय-कर काट कर दिया जाएगा, 1 अप्रैल, 1960 से पूर्व लाभांश कम्पनी द्वारा संदेय आय-कर की कटौती करके दिया जा रहा था,
वहां इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् घोषित लाभांशों की बाबत, ऐसे प्रत्येक शेयर के बारे में, यह अधिमानी अधिकार होगा कि पूर्वोक्त कटौती करके ऐसी रकम का संदाय किया जाए जो उसके अनुबद्ध लाभांश से ग्यारह प्रतिशत अधिक होगी ।
(4) जहां किसी कम्पनी ने 1[1 अप्रैल, 1960 के पूर्व निर्गमित और प्रतिश्रुत] किए गए किसी अधिमानी शेयर के संबंध में,-
(क) 1960-61 के निर्धारण वर्ष या पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से संबंधित पूर्ववर्ष की बाबत लाभांश 31 मार्च, 1959 के पश्चात् और 1 जुलाई, 1960 के पूर्व घोषित किया है, या
(ख) किसी भी पूर्ववर्ष की बाबत लाभांश 30 जून, 1960 के पश्चात् और इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व घोषित किया है,-
वहां वह उक्त पूर्व वर्ष की बाबत ऐसी रकम का अतिरिक्त लाभांश घोषित करेगी जो पहले से ही घोषित लांभाश सहित अनुबद्ध लाभांश से-
(i) उपधारा (1) में निर्दिष्ट दशाओं में, उस लाभांश का तीस प्रतिशत अधिक होगी, या
(ii) उपधारा (3) में निर्दिष्ट दशाओं में, उस लाभांश का ग्यारह प्रतिशत अधिक होगी ।
(5) उपधारा (1), उपधारा (3) और उपधारा (4) के प्रयोजनों के लिए उनमें अनुबद्ध लाभांश के प्रति किसी निर्देश का 31 मार्च, 1959 को या उसके पूर्व निर्गमित और प्रतिश्रुत किए गए किसी अधिमानी शेयर के संबंध में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह निर्देश उस अनुबद्ध लाभांश के प्रति है जो उस दिन को है ।
(6) शंकाओं के निराकरण के लिए एतद्द्वारा घोषित किया जाता है कि इस धारा 1[और धारा 4कट में कम्पनी द्वारा संदेय आय-कर के कारण" किसी लाभांश में से की गई कटौती के प्रतिनिर्देश के अन्तर्गत उस लाभांश में से उस कम्पनी द्वारा [आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 194] के अधीन काट ली गई कोई रकम नहीं आती है ।
4. उन कंपनियों के संबंध में विशेष उपबंध जहां कि उनकी आय का कोई भाग आय-कर से प्रभार्य नहीं है-2[जहां किसी कम्पनी का कोई अधिमानी शेयर, 1 अप्रैल, 1960 के पूर्व निर्गमित और प्रतिश्रुत किया गया है और सुसंगत अवधि की बाबत कंपनी के लाभों और अभिलाभों के किसी भाग को,] [आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43)ट के अधीन आय-कर से इस कारण छूट दी गई है कि वह कृषि आय का भाग है, वहां ऐसे किसी अधिमानी शेयर के संबंध में धारा 3 के उपबंधों के अधीन की जाने वाली लांभाश में वृद्धि के प्रयोजन के लिए उसमें निर्दिष्ट तीस प्रतिशत या ग्यारह प्रतिशत की वृद्धि को, यथास्थिति, उक्त तीस प्रतिशत या ग्यारह प्रतिशत का ऐसा अनुपात माना जाएगा जो अनुपात कंपनी के लाभों और अभिलाभों की रकम का सुसंगत अवधि के संबंध में इस प्रकार छूट प्राप्त लाभों और अभिलाभों के भाग को अपवर्जित करके उस अवधि की बाबत उसके लाभों और अभिलाभों की कुल रकम से है ।
स्पष्टीकरण-किसी कंपनी के लाभों और अभिलाभों के संबंध में तत्संबंधी अवधि" से इस धारा के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित अभिप्रेत है-
(क) वे पूर्ववर्ष, जो ऐसे तीन निर्धारण वर्षों से संबंधित है, जो धारा 31 मार्च, 1961 को समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष से ठीक पूर्ववर्ती हैं और जिनमें से प्रत्येक में कंपनी के लाभों और अभिलाभों की संगणना का अन्तिम फल हानि नहीं है या जहां केवल ऐसे दो वर्ष हैं, वहां ऐसे दो वर्ष, या जहां केवल ऐसा एक वर्ष है, वहां ऐसा एक वर्ष, या
(ख) किसी भी दशा में, जहां खंड (क) लागू नहीं है, वह पूर्व वर्ष, जो 31 मार्च, 1961 को समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष से या उसके ठीक बाद के पश्चात्वर्ती उस निर्धारण वर्ष से जिसमें लाभों और अभिलाभों की संगणना का अन्तिम फल हानि नहीं हैं, संबंधित है ।
[4क. आय-कर कटौती-जहां किसी कंपनी के अधिमानी शेयर की बाबत अनुबद्ध लाभांश-
(क) के विषय में यह विनिर्दिष्ट है कि वह आय-कर काट कर दिया जाना है और कंपनी द्वारा संदेय आय-कर की उसमें से कटौती की गई है, या
(ख) ऐसे किसी विनिर्देश के अभाव में भी कि लाभांश आय-कर काट कर दिया जाएगा, कम्पनी द्वारा संदेय आय-कर की उसमें से कटौती करके दिया जा रहा है,
[वहां 1966 की फरवरी के अठाईसवें दिन के पश्चात् घोषित किए गए किसी लाभांश से कंपनी द्वारा की गई ऐसी कटौती, किसी भी दशा में-
(1) अनुबद्ध लाभांश, और
(2) धारा 3 की उपधारा (3) में यथा विनिर्दिष्ट अनुबद्ध लाभांश के ग्यारह प्रतिशत के बराबर रकम,
के योग के साढे़ सत्ताईस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ।]
5. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-(1) इस अधिनियम के उपबंध, किसी तत्समय प्रवृत्त विधि में या कंपनी के ज्ञापन या अनुच्छेद में या कंपनी और उसके शेयरधारियों के बीच किसी करार में या कंपनी द्वारा किसी साधारण अधिवेशन में या उसके निदेशक बोर्ड द्वारा पारित संकल्प में उनके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
(2) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, कोई भी कंपनी, किसी अधिमानी शेयर की बाबत लाभांश की रकम में इस अधिनियम की धारा 3 या धारा 4 में विनिर्दिष्ट परिमाण से अधिक वृद्धि कंपनी अधिनियम की धारा 106 में उपबंधित रीति से कर सकेगी ।
6. भाग लेने वाले अधिमानी लाभांशों को अधिनियम का लागू न होना- [धारा 3 या धारा 4] की कोई भी बात, अधिमानी शेयरों पर किसी लाभांश के ऐसे भाग को लागू नहीं होगी जो कंपनी अधिनियम की धारा 85 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के खंड (i) में निर्दिष्ट है ।
7. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।
(2) इस धारा के अधीन बनाया गया हर नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के हर सदन के समक्ष, उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलाकर तीस दिन की कालावधि के लिए, जो एकसत्र में या दो क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखा गया हो, या ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई उपान्तर करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन सहमत हो जाएंकि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, वह नियम, ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई भी प्रभाव न होगा, किन्तु इस प्रकार कि ऐसा कोई उपान्तर या बातिलकरण उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा ।
[अनुसूची]
[धारा 1(3) देखिए]
पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र को लागू होने में अधिनियम में उपान्तरण
1. धारा 3 और धारा 4 का लोप किया जाएगा ।
2. धारा 4क में धारा 3 की उपधारा (3) में यथाविनिर्दिष्ट (i) नियत लाभांश, और (ii) नियत लाभांश के ग्यारह प्रतिशत के बराबर किसी रकम के योग के साढ़े सत्ताईस प्रतिशत" शब्दों, कोष्ठकों और अक्षरों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
नियत लाभांश के साढ़े सत्ताईस प्रतिशत :
परन्तु ऐसी दशा में, जिसमें वे अधिमानी शेयर, जिनकी बाबत लाभांश घोषित या संदत्त किया जाता है, किसी ऐसी कंपनी की अधिमानी शेयर पूंजी के भागरूप हैं, जो अपनी कुल आय के अधिकांश भाग की बाबत, आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अधीन उससे प्रभार्य कर से उस अधिनियम की धारा 294क के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अधीन कटौती की हकदार है, नियत लाभांश के साढ़े सत्ताईस प्रतिशत के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह निम्नलिखित के प्रति निर्देश है-
(i) वहां ऐसे अधिमानी शेयर की बाबत नियत लाभांश 1 अप्रैल, 1965 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्व वर्ष की बाबत घोषित या संदत्त किया गया है वहां, उक्त साढ़े सत्ताईस प्रतिशत को उसके पैंतालीस प्रतिशत तक कम कर दिया जाएगा ;
(ii) जहां ऐसा लाभांश, 1 अप्रैल, 1966 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की बाबत घोषित या संदत्त किया गया है, वहां उक्त साढ़े सत्ताईस प्रतिशत को उसके पच्चीस प्रतिशत तक कर दिया जाएगा ;
(iii) जहां ऐसा लाभांश 1 अप्रैल, 1967 या 1 अप्रैल, 1968 या 1 अप्रैल, 1969 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्व वर्ष की बाबत घोषित या संदत्त किया गया है, वहां उक्त साढ़े-सत्ताईस प्रतिशत को उसके दस प्रतिशत तक कम कर दिया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस धारा में कंपनी द्वारा संदेय आय-कर मद्दे लाभांश से की गई कटौती के प्रति किसी निर्देश के अंतर्गत ऐसी कोई रकम नहीं है जो कंपनी द्वारा आय-अर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 194 के अधीन उस लाभांश से कटौती की गई है ।"
3. धारा 5 में उपधारा (2) का लोप किया जाएगा ।
4. धारा 6 का लोप किया जाएगा ।]
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