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महापत्तन न्यास अधिनियम, 1963 ( Major Port Trusts Act, 1963 )


 

महापत्तन न्यास अधिनियम, 1963

(1963 का अधिनियम संख्यांक 38)

[16 अक्तूबर, 1963]

भारत में कतिपय महापत्तनों के लिए पत्तन प्राधिकरणों के गठन के

लिए और ऐसे पत्तनों का प्रशासन, नियन्त्रण और प्रबन्ध

ऐसे प्राधिकरणों में निहित करने के लिए

तथा उससे संबंधित विषयों के लिए

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के चौदहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ और लागू होना-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम महापत्तन न्यास अधिनियम, 1963 है  

(2) यह उस तारीख  को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे  

(3) यह प्रथमतः कोचीन, कांडला और विशाखापत्तनम के महापत्तनों को लागू है, और केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों को ऐसे अन्य महापत्तनों को, तथा उस तारीख से जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, लागू  कर सकेगी

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो, -

() किसी पतन के सम्बन्ध में नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम उस पत्तन को लागू किया जाए

 [(कक) प्राधिकरण" से धारा 47 के अधीन गठित महापत्तन टैरिफ प्राधिकरण अभिप्रेत है;]

() किसी पत्तन के सम्बन्ध में बोर्ड" से उस पत्तन के लिए इस अधिनियम के अधीन गठित न्यासी बोर्ड अभिप्रेत है;

() अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत धारा 14 के अधीन उसके स्थान पर कार्य करने के लिए नियुक्त किया गया व्यक्ति भी है;

() सीमाशुल्क कलक्टरका वही अर्थ है जो सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में है

() उपाध्यक्ष" से [बोर्ड का, यथास्थिति, उपाध्यक्ष या कोई उपाध्यक्ष] अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत धारा 14 के अधीन उसके स्थान पर कार्य करने के लिए नियुक्त किया गया व्यक्ति भी है

() डाक" के अन्तर्गत सब द्रोणियां, जलबंध, पथमालाएं, प्रवेश मार्ग, ग्रेविंग डॉंक, ग्रेविंग ब्लाक, आनत समतल, पोतनिर्माण स्थल, जलयान संभालने के स्थान, मूरिंगे, अभिवहन शैड, भांडागार, ट्राम मार्ग, रेल मार्ग और किसी डाक से संलग्न अन्य संकर्म और वस्तुएं, तथा समुद्र का वह भाग भी है, जो बंदरगाह की भुजाओं या तटबंधों से परिवेष्टित या संरक्षित है;  

() किसी पतन के सम्बन्ध में अग्रतट" से उस पत्तन सम्बन्धी उच्चतम ज्वार चिह्न और निम्नतम ज्वार चिह्न के बीच का क्षेत्र अभिप्रेत है

() माल" के अन्तर्गत पशुधन और हर प्रकार की जंगम सम्पत्ति भी है

() किसी पत्तन के सम्बन्ध में उच्चतम ज्वार चिह्न" से वह रेखा अभिप्रेत है, जो उस पत्तन के उन उच्चतम स्थलों से होती हुई खींची जाए, जिन तक वर्ष की किसी भी ऋतु में सामान्य बृहत्त ज्वार भाटा पहुंच जाता है

  [(झक) स्थावर सम्पत्ति" के अन्तर्गत माल उतारने-चढ़ाने का अधिकार और किसी भूमि, घाट, डाक या बंगसार पर, उसके ऊपर या उसकी बाबत प्रयोक्तव्य सब अन्य अधिकार भी हैं;]

() भारतीय पत्तन अधिनियम" से भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 (1908 का 15) अभिप्रेत है;  

() भूमि" के अन्तर्गत उच्चतम ज्वार चिह्न के नीचे समुद्र या नदी का तल, और वे चीजें भी हैं, जो भूबद्ध हैं या भूबद्ध किसी चीज से स्थायी रूप से जकड़ी हुई हैं

() किसी पतन के सम्बन्ध में निम्नतम ज्वार चिह्न" से वह रेखा अभिप्रेत है, जो उस पत्तन के उन निम्नतम स्थलों से होती हुई खींची जाए, जिन तक वर्ष की किसी भी ऋतु में सामान्य बृहत् ज्वार भाटा पहुंच जाता है;

() महापत्तन" का वही अर्थ है, जो भारतीय पत्तन अधिनियम में उसका है

() किसी पत्तन का प्रयोग करने वाले किसी जलयान या किसी वायुयान के सम्बन्ध में मास्टर" से पाइलट, बंदरगाह मास्टर, सहायक बंदरगाह मास्टर, डाक मास्टर या पत्तन के बर्थिंग मास्टर के सिवाय, ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसके भारसाधन या नियंत्रण में, यथास्थिति, ऐसा जलयान या वायुयान तत्समय है;

() स्वामी" के अंतर्गत,-

(i) माल के संबंध में, ऐसे माल के विक्रय, अभिरक्षा, लदाई या उतराई के लिए कोई परेषक, परेषिती, माल भेजने वाला या अभिकर्ता भी है; और 

(ii) किसी पत्तन का प्रयोग करने वाले किसी जलयान या किसी वायुयान के सम्बन्ध में, उसका कोई भागिक स्वामी, चार्टरर, परेषिती या कब्जाधारी बंधकदार भी है

() बंगसार" के अन्तर्गत कोई मंच, सीढ़ियां, उतराई स्थान, हार्ड, जेट्टी, तिरता हुआ बजरा  [पोतान्तरक] या पौन्टून और कोई पुल या उनसे सम्बन्धित अन्य संकर्म भी हैं  

2[स्पष्टीकरण-इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए पोतान्तरक" से ऐसा तिरता हुआ यान या जलयान अभिप्रेत है, चाहे वह डंब हो या स्वचालित, जिस पर बजरे या घाट से स्थोरा हटाने और पोत में लादने के लिए, गियरों का उपबन्ध किया गया है;

() पत्तन" से कोई ऐसा महापत्तन अभिप्रेत है, जिसे यह अधिनियम ऐसी परिसीमाओं के भीतर, जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, परिनिश्चित की जाएं, लागू होगा तथा, जब तक ऐसी अधिसूचना जारी नहीं की जाए तब तक, ऐसी परिसीमाओं के भीतर लागू होगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, भारतीय पत्तन अधिनियम के उपबन्धों के अधीन, परिनिश्चित की गई हों

() किसी पत्तन के सम्बन्ध में पत्तन पहुंच मार्ग" से उन नाव्य नदियों और जलसरणियों के, जो पत्तन की ओर जाती हैं, वे भाग अभिप्रेत हैं, जिनमें भारतीय पत्तन अधिनियम प्रवृत्त है

() पत्तन न्यास प्रतिभूति" से बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन लिए गए किसी उधार के सम्बन्ध में उसके द्वारा जारी किए गए या ऐसे उधार के संदाय के लिए, जिसके लिए बोर्ड इस अधिनियम के अधीन दायी है, किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए, डिबेंचर, बन्धपत्र या स्टाक प्रमाणपत्र अभिप्रेत हैं ;

() विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है

() लोक प्रतिभूति" से

(i) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के वचनपत्र, डिबेंचर, स्टाक या अन्य प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैंः

परन्तु ऐसी प्रतिभूतियां जिनके मूल धन की और उस पर ब्याज की किसी ऐसी सरकार द्वारा पूर्ण और बिना शर्त गारन्टी की गई हो, इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए, ऐसी सरकार की प्रतिभूतियां समझी जाएंगी;  

(ii) भारत में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के प्राधिकार के अधीन किसी नगरपालिका निकाय, सुधार न्यास या पत्तन न्यास द्वारा या उसकी ओर से धन के लिए जारी किए गए डिबेंचर या धन के लिए अन्य प्रतिभूतियां (जिसके अन्तर्गत पत्तन न्यास प्रतिभूतियां भी हैं) अभिप्रेत हैं

() रेट" के अन्तर्गत इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीय कोई पथ-कर, शोध्य, भाटक, रेट, फीस या प्रभार भी हैं;

() विनियमों" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं;

() नियमों" से केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम अभिप्रेत हैं

() किसी पत्तन के सम्बन्ध में न्यासी" से पत्तन के लिए गठित बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है

 [() जलयान" के अन्तर्गत मानव या माल के, मुख्यतया जलमार्ग से, प्रवहण के लिए बनाई गई कोई चीज तथा कैसून भी है;]

(यक) घाट" के अन्तर्गत कोई ऐसी दीवाल या मंच और भूमि या अग्रतट का कोई भाग भी है जो माल की लदाई या उतराई के लिए या यात्रियों के चढ़ाने या उतराने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है तथा उसे परिवेष्ठित करने वाली या उससे लगी हुई दीवाल भी है  

अध्याय 2

न्यासी बोर्ड और उसकी समितियां

3. न्यासी बोर्ड का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार ऐसी तारीख से जो राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, किसी भी महापत्तन की बाबत न्यासियों का एक बोर्ड गठित कराएगी जो उस पत्तन का न्यासी बोर्ड कहलाएगा न्यासी बोर्ड में निम्नलिखित न्यासी होंगे, अर्थात्: -

() एक अध्यक्ष जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा;

 [() एक उपाध्यक्ष या अधिक जिन्हें केन्द्रीय सरकार नियुक्त करना ठीक समझे;]

 [() मुम्बई, कलकत्ता और मद्रास के पत्तनों में से प्रत्येक की दशा में, उन्नीस से अनधिक व्यक्ति, और किसी अन्य पत्तन की दशा में, सत्रह से अनधिक व्यक्ति, जिनमें निम्नलिखित सम्मिलित होंगे, अर्थात्: - 

(i) उतने व्यक्ति जितने केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे, जो उन व्यक्तियों में से नियुक्त किए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार की राय में निम्नलिखित हितों में से एक या अधिक ऐसे हितों का, जैसे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, प्रतिनिधित्व करने में समर्थ हैं, अर्थात्: -

(1) पत्तन में नियोजित श्रमिक;

(2) वाणिज्यिक समुद्री विभाग;

(3) सीमाशुल्क  विभाग;

(4) उस राज्य की सरकार जिसमें पत्तन स्थित है;

(5) रक्षा सेवाएं;

(6) भारतीय रेल; और

(7) ऐसे अन्य हित जिनका, केन्द्रीय सरकार की राय में, बोर्ड में प्रतिनिधित्व होना चाहिए :

परन्तु केन्द्रीय सरकार पत्तन में नियोजित श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी व्यक्ति को नियुक्त करने के पूर्व पत्तन में नियोजित व्यक्तियों में से गठित और व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 (1926 का 16) के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यवसाय संघ की, यदि कोई हो, राय अभिप्राप्त करेगी तथा इस प्रकार नियुक्त किए गए व्यक्तियों की संख्या दो से कम नहीं होगी

(ii) उतने व्यक्ति जितने केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट करे जो ऐसे निकायों द्वारा अपने में से निर्वाचित किए जाएंगे और जो निम्नलिखित हितों में से एक या अधिक ऐसे हितों का जैसे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, प्रतिनिधित्व करेंगे, अर्थात्: -

(1) पोत स्वामी;

(2) चलत जलयानों के स्वामी;

(3) माल भेजने वाले (शीपर); और

(4) ऐसे अन्य हित जिनका, केन्द्रीय सरकार की राय में, बोर्ड में प्रतिनिधित्व होना चाहिए:

परन्तु जहां कोई ऐसा निकाय सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन उपक्रम है वहां ऐसे निकाय द्वारा निर्वाचित किए जाने वाला व्यक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा

(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किया गया न्यासी नाम से या पदाभिधान से नियुक्त किया जा सकेगा  

(3) [उपधारा (1) के खण्ड () के उपखण्ड (ii)] के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना में उन न्यासियों की संख्या भी विनिर्दिष्ट की जा सकेगी जिन्हें उस खण्ड में निर्दिष्ट निकायों में से प्रत्येक निकाय निर्वाचित कर सकेगा  

(4) न्यासियों का 1[उपधारा (1) के खण्ड () के उपखण्ड (ii)] के अधीन निर्वाचन उतनी अवधि के भीतर किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट की जाए

(5) प्रत्येक निर्वाचक निकाय का मुख्य कार्यपालक प्राधिकारी उपधारा (4) के अनुसरण में किए गए किसी निर्वाचन का परिणाम तुरन्त केन्द्रीय सरकार को संसूचित करेगा  

(6) न्यासियों के रूप में नियुक्त या निर्वाचित व्यक्तियों के नामों को केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचित करेगी  

4. प्रथम न्यासी बोर्ड-(1) धारा 3 में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी महापत्तन की बाबत प्रथम न्यासी बोर्ड गठित कर सकेगी, जिसमें निम्नलिखित होंगे, अर्थात्-

() एक अध्यक्ष, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा

() एक उपाध्यक्ष, यदि केन्द्रीय सरकार किसी को नियुक्त करना ठीक समझे; और 

() [सत्रह से अनधिक] उतने अन्य न्यासी जितने सरकार ऐसे व्यक्तियों में से नियुक्त करना समीचीन समझे जो उसकी राय में निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने में समर्थ हैं, अर्थात्

(i) पत्तन में नियोजित श्रमिक;

(ii) उस राज्य की सरकार जिस राज्य में पत्तन स्थित है;

(iii) धारा 3 की उपधारा (1) के [खण्ड () के उपखण्ड (i) में] विनिर्दिष्ट सरकारी विभाग; और 

(iv) ऐसे अन्य हित जिनका केन्द्रीय सरकार की राय में बोर्ड में प्रतिनिधित्व होना चाहिए

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किए गए व्यक्ति उपधारा (3) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेंगे  

(3) धारा 3 के अधीन बोर्ड का गठन होने पर प्रथम न्यासी बोर्ड समाप्त हो जाएगा

5. बोर्ड का निगमित निकाय होना-इस अधिनियम के अधीन गठित प्रत्येक बोर्ड शाश्वत अधिकार और सामान्य मुद्रा वाला निगमित निकाय होगा जिसे, इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सम्पत्ति के अर्जन, धारण या व्ययन करने की शक्ति होगी और वह उस नाम से, जिस नाम से वह गठित किया जाए, वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा

6. न्यासी के पद के लिए निरर्हता-कोई व्यक्ति न्यासी के रूप में चुने जाने के लिए निरर्हित होगा यदि

() वह किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया और कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है जिसमें केन्द्रीय सरकार की राय में नैतिक अधमता अन्तर्वलित है; या 

() वह अनुन्मुक्त दिवालिया है; या 

() वह बोर्ड के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है

 [परन्तु यह निरर्हता उस अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या न्यासी को लागू नहीं होगी जो पत्तन में नियोजित श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया है या बोर्ड के कर्मचारियों के किसी वर्ग के हितों या कल्याण के प्रोन्नयन के प्रयोजन के लिए बनाए गए किसी संग्रम के अधिकारी या सदस्य के रूप में, पदाभिधान के आधार पर, नियुक्त किया गया है;]

() बोर्ड के आदेश से किए गए किसी कार्य में, या बोर्ड के साथ उसके द्वारा या उसकी ओर से किसी संविदा या नियोजन में, प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से उसका कोई अंश या हित है :

परंतु किसी व्यक्ति के बारे में केवल इस आधार पर कि उसका-

(i) किसी ऐसी कम्पनी या फर्म में अंश है जो बोर्ड के साथ कोई संविदा कर सकती है या जिसे बोर्ड द्वारा उसकी ओर से नियोजित किया जा सकता है, या 

(ii) ऐसे समाचारपत्र में कोई अंश या हित है जिसमें बोर्ड के कार्यकलापों की बाबत कोई विज्ञापन सम्मिलित किया जा सकता है, या 

(iii) बोर्ड को उधार दिए गए किसी धन में हित है, या 

(iv) स्थावर सम्पत्ति के किसी पट्टे, विक्रय, विनिमय या क्रय में या उसके लिए किए गए किसी करार में अंश या हित है, या 

(v) बोर्ड की किसी अनुज्ञप्ति में अंश या हित है, या बोर्ड के डाकों में किसी रेल साइर्डिग के, या जलयानों के लिए किसी अर्थ के एकमात्र या अधिमानी उपयोग का, बोर्ड के साथ किसी करार द्वारा या अन्यथा, कोई अधिकार है, या 

(vi) किसी ऐसी वस्तु के, जिसका वह व्यवसाय करता है, किसी एक वित्तीय वर्ष में दस हजार रुपए से अनधिक मूल्य तक बोर्ड को यदाकदा विक्रय करने में अंश या हित है,

यह नहीं समझा जाएगा कि उसका ऐसे कार्य, ऐसी संविदा या ऐसे नियोजन में कोई अंश या हित है  

7. न्यासियों की पदावधि-(1) अध्यक्ष और उपाध्यक्ष केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेंगे  

(2) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए

() न्यासी होने के लिए नाम से निर्वाचित या नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति उसके निर्वाचन या नियुक्ति की ठीक आगामी प्रथम अप्रैल को प्रारम्भ होने वाला दो वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा:

परन्तु व्यक्तियों के किसी निकाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित किए गए व्यक्ति की पदावधि उसी दिन समाप्त हो जाएगी जिस दिन वह निकाय का सदस्य नहीं रह जाता;  

() न्यासी होने के लिए पदाभिधान के आधार पर नियुक्त व्यक्ति तब तक न्यासी रहेगा जब तक वह उस पद को धारण करता रहे और केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अन्यथा निर्दिष्ट करे

8. न्यासियों के पद की रिक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार न्यासी को हटा देगी यदि

() वह धारा 6 में उल्लिखित निरर्हताओं में से किसी से ग्रस्त हो जाता है; या

 [(कक) केन्द्रीय सरकार की राय में उसने उस हित का, जिसके आधार पर वह नियुक्त या निर्वाचित किया गया था, प्रतिनिधित्व करना छोड़ दिया है; या

() वह कार्य करने से इंकार करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है; या 

() बोर्ड की पूर्व अनुज्ञा अभिप्राप्त किए बिना बोर्ड के निरन्तर छह साधारण अधिवेशनों से अनुपस्थित है; या 

() निरन्तर छह मास से अधिक की अवधि तक बोर्ड के अधिवेशनों से अनुपस्थित है; या 

() धारा 19 के उपबन्धों के उल्लघंन में कार्य करता है  

(2) न्यासी अध्यक्ष को लिखित सूचना देकर अपना पद त्याग कर सकता है अध्यक्ष त्यागपत्र को केन्द्रीय सरकार को भेजेगा और उस सरकार द्वारा ऐसा त्यागपत्र स्वीकार कर लिए जाने पर न्यासी के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है  

9. न्यासी की पुनर्नियुक्ति या पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता-कोई व्यक्ति जो न्यासी नहीं रहता पुनर्नियुक्ति या पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र होगा यदि वह धारा 6 के अधीन निरर्हित नहीं है  

10. न्यासी के पद में की रिक्तियों का भरा जाना-(1) ऐसी किसी रिक्ति की दशा में, जो नाम से नियुक्त किए गए या निर्वाचित न्यासी के पद में उसकी पदावधि की समाप्ति के कारण हुई हो, उस रिक्ति को भरने के लिए, ऐसी पदावधि की समाप्ति की तारीख से ठीक दो मास के भीतर, नियुक्ति की जाएगी या निर्वाचन किया जाएगा  

(2) ऐसी किसी रिक्ति की दशा में जो केन्द्रीय सरकार द्वारा पद के आधार पर नियुक्त किए गए न्यासी के पद में हुई हो, उसे भरने के लिए नियुक्ति, ऐसी रिक्ति होने के लिए एक मास के भीतर की जाएगी

(3) नाम से नियुक्त, किए गए न्यासी या निर्वाचित न्यासी की मृत्यु के कारण या धारा 8 के उपबन्धों के कारण होने वाली आकस्मिक रिक्ति, रिक्ति होने के एक मास के भीतर, ऐसी रीति में जैसी इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट की गई है, यथास्थिति, नियुक्ति या निर्वाचन द्वारा भरी जाएगी:

परन्तु इस प्रकार नियुक्त या निर्वाचित न्यासी अपने पद को केवल उतने समय के लिए धारण करेगा जितने समय के लिए उसे रिक्त करने वाला न्यासी ऐसे रिक्ति होने की दशा में, उसे धारण करता:

परन्तु यह और कि पद रिक्त करने वाले न्यासी के पद की सामान्य अवधि की समाप्ति की तारीख से तीन मास के भीतर होने वाली कोई आकस्मिक रिक्ति इस उपधारा के अधीन नहीं भरी जाएगी

11. विहित अवधि के पश्चात् केन्द्रीय सरकार द्वारा न्यासी की नियुक्ति के लिए व्यावृत्तिक उपाबन्ध-पूर्वगामी उपबन्धों की कोई बात किसी व्यक्ति को केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त न्यासी के पद में किसी रिक्ति को भरने के लिए, धारा 10 में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् नियुक्त किए जाने से निवारित नहीं करेगी यदि केन्द्रीय सरकार के लिए किसी कारणवश उक्त अवधि के भीतर नियुक्ति करना सम्भव हुआ हो

12. निर्वाचन के लिए समय बढ़ाने या निर्वाचन के व्यतिक्रम की दशा में न्यासियों को नियुक्त करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि कोई निर्वाचक निकाय ऐसे कारणों से जो उसके नियंत्रण से परे हैं, धारा 3 की उपधारा (4) या धारा 10 में निर्वाचन करने के लिए विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर न्यासी निर्वाचित करने में असफल रहा है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निर्दिष्ट कर सकेगी कि निर्वाचन ऐसी तारीख को या उसके पूर्व किया जाएगा जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए

(2) धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन या धारा 10 के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर या उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व किसी न्यासी का निर्वाचन करने में व्यतिक्रम होने की दशा में केन्द्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी व्यक्ति को नियुक्त करे और इस प्रकार नियुक्त किया गया व्यक्ति निर्वाचित न्यासी समझा जाएगा  

13. कतिपय न्यासियों की दशा में पदावधि-जहां किसी न्यासी की नियुक्ति धारा 11 के अधीन या धारा 12 की उपधारा (2) के अधीन की गई है या उसे धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए निदेश के अनुसरण में निर्वाचित किया गया है वहां ऐसे न्यासी की पदावधि उस तारीख को प्रारम्भ होगी जिसको उसकी नियुक्ति या निर्वाचन राजपत्र में अधिसूचित किया जाता है और उस तारीख को समाप्त होगी जिसको उसकी पदावधि उस दशा में समाप्त होती जब उसकी नियुक्ति या निर्वाचन धारा 10 के अधीन या धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर की गई होती या किया गया होता  

14. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति-यदि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष अंगशैथिल्य के कारण या अन्यथा अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो जाए या छुट्टी पर अथवा अन्यथा, ऐसी परिस्थितियों में जिनमें उसकी नियुक्ति की रिक्ति अन्तर्वलित नहीं है, अनुपस्थित हो जाए, या, इस अधिनियम के प्रयोजनों में से किसी के लिए भारत के बाहर प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया जाए, तो केन्द्रीय सरकार उसकी अनुपस्थिति के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को उसके स्थान पर कार्य करने के लिए नियुक्त कर सकेगी:

                परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा ऐसा निदेश करे और ऐसी शर्तों और निबंधनों के अधीन रहते हुए जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, भारत के बाहर प्रतिनियुक्ति के दौरान ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन, जिन्हें वह आवश्यक समझे, कर सकेगा जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदत्त की जाए या उस पर अधिरोपित की जाए तथा ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के दौरान अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, इस अधिनियम में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, न्यासी समझा जाएगा

 [14. कार्यकारी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष-केन्द्रीय सरकार, इस प्रश्न पर विचारण के लम्बित रहने तक कि धारा 3 या धारा 4 के अधीन बोर्ड का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष किसे नियुक्त किया जाए, किसी व्यक्ति को बोर्ड का कार्यकारी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष नियुक्त कर सकेगी और उसका नाम राजपत्र में अधिसूचित कर सकेगी और इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति, जब तक कि केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अन्यथा निदेश दे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए धाराया धारा 4 के अधीन, ऐसे बोर्ड का, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष समझा जाएगा    

15. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की सेवा की शर्तें-अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को उतना वेतन दिया जाएगा और वह सेवा के ऐसे निबंधनों और ऐसी शर्तों से शासित होगा, जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अवधारित करे

16. बोर्ड के अधिवेशन-(1) बोर्ड के अधिवेशन ऐसे समयों और ऐसे स्थानों पर होंगे तथा उपधारा (2), (3) और (4) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, बोर्ड अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के बारे में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुपालन करेगा जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उपबन्धित किए जाएं

(2) अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष और दोनों की अनुपस्थिति में अधिवेशन में उपस्थित न्यासियों द्वारा स्वयं में से चुना गया कोई व्यक्ति बोर्ड के अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा  

(3) बोर्ड के अधिवेशन में सभी प्रश्न उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से विनिश्चित किए जाएंगे और, मतों के बराबर होने की दशा में, सभापतित्व करने वाले व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा  

(4) बोर्ड के किसी अधिवेशन में किसी कारबार का तब तक संव्यवहार नहीं होगा जब तक कम से कम पांच न्यासी ऐसे अधिवेशन में लगातार उपस्थित हों

17. बोर्ड की समितियां-(1) बोर्ड अपने कृत्यों में से ऐसे कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजन के लिए जो किसी समिति या किन्हीं समितियों को बोर्ड द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं, न्यासियों में से एक या अधिक समितियों का समय-समय पर गठन कर सकेगा और उसमें से प्रत्येक में उतने सदस्य होंगे जितने बोर्ड आवश्यक समझे  

 [(1) इस अधिनियम की उपधारा (1) या किसी अन्य उपबन्ध में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड ऐसे व्यक्ति को, जो न्यासी हो उस उपधारा के अधीन गठित किसी समिति का सदस्य, नियुक्त कर सकेगा और इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति ऐसे सदस्य के रूप में अपने कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजनों के लिए न्यासी समझा जाएगा

(2)  इस धारा के अधीन गठित समिति के अधिवेशन ऐसे समयों और ऐसे स्थानों पर होंगे तथा वह अपने अधिवेशन में कारबार के संव्यवहार की बाबत (जिसके अन्तर्गत गणपूर्ति भी है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुपालन करेगा जैसे इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उपबन्धित किए जाएं

18. न्यासियों को देय फीसें और भत्ते- [(1)] बोर्ड या उसकी समितियों में से किसी के अधिवेशन में उपस्थित होने के लिए और बोर्ड का कोई अन्य कार्य करने के लिए बोर्ड न्यासियों को ऐसी फीसें और भत्ते देगा जैसी इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उपबन्धित की जाएं:

परन्तु यदि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कोई अन्य न्यासी सरकारी सेवक है तो उसे कोई फीस देय नहीं होगी

 [(2) धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त समिति के किसी सदस्य को समिति के अधिवेशनों में भाग लेने तथा बोर्ड के किसी अन्य कार्य को करने के लिए वही फीस और भत्ते दिए जाएंगे जो उपधारा (1) के अधीन न्यासी को संदेय है:

परन्तु बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से ऐसे किसी सदस्य को ऐसी दर से उच्चतर दर पर, जो व्यक्तियों के मामले में उपबन्धित की गई है, फीसों और भत्तों का संदाय कर सकेगा

19. कतिपय दशाओं में न्यासियों की मतदान की शक्तियों पर निर्बन्धन- कोई न्यासी बोर्ड या उसकी समितियों में से किसी के अधिवेशन में विचारणीय किसी विषय पर विचार-विमर्श में मतदान नहीं करेगा या भाग नहीं लेगा यदि वह विषय ऐसा है जिसमें उसका, प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं अपना या उसके भागीदार का, आर्थिक हित है या जिसमें वह व्यावसायिक रूप से अपने मुवक्किल की ओर से या सरकार  [अथवा सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी उपक्रमट या किसी स्थानीय प्राधिकारी या  [व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 (1926 का 16)] के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी व्यवसाय संघ से भिन्न किसी व्यक्ति के लिए 5[या बोर्ड के कर्मचारियों के किसी वर्ग के हितों या कल्याण के प्रोन्नयन के प्रयोजन के लिए बनाए गए किसी संगम के अधिकारी या सदस्य के रूप में होकरट किसी अन्य व्यक्ति के लिए अभिकर्ता के रूप में हितबद्ध है  

20.  नियुक्तियों या निर्वाचन में त्रुटियों के कारण कार्यों, आदि का अविधिमान्य होना-बोर्ड या उसकी समितियों में से किसी का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर अविधिमान्य नहीं होगी कि: -

() उसमें कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है, या

() उसके सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति के निर्वाचन या नियुक्ति में कोई त्रुटि है, या 

() किसी न्यासी ने धारा 19 के उल्लंघन में कोई कार्य किया है या किन्हीं कार्यवाहियों में भाग लिया है, या 

() उसकी प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जो मामले के गुणावगुण पर प्रभाव डालती है  

21. शक्तियों का प्रत्यायोजन-बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से

() इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन बोर्ड को प्रदत्त ऐसी शक्तियां या उस पर अधिरोपित ऐसे कर्तव्य विनिर्दिष्ट कर सकेगा जिनका प्रयोग या पालन अध्यक्ष द्वारा भी किया जा सकेगा; और

() इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अध्यक्ष को प्रदत्त ऐसी शक्तियां और उस पर अधिरोपित ऐसे कर्तव्य जिनका प्रयोग या पालन उपाध्यक्ष द्वारा या बोर्ड के किसी अधिकारी द्वारा भी किया जा सकेगा तथा वे शर्तें और निबन्धन भी, यदि कोई हों, जिनके अधीन रहते हुए ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन किया जा सकेगा, विनिर्दिष्ट कर सकेगा:

परन्तु उपाध्यक्ष को या बोर्ड के किसी अधिकारी को खण्ड () के अधीन प्रदत्त किन्हीं शक्तियों और उन पर अधिरोपित किन्हीं कर्तव्यों का उसके द्वारा प्रयोग और पालन अध्यक्ष के अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन रहते हुए किया जाएगा   

22. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के कर्तव्य-(1) अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का यह कर्तव्य होगा कि वह सिवाय तब के जब वह बीमारी से या किसी अन्य उचित कारण से ऐसा कर सके, बोर्ड के प्रत्येक अधिवेशन में उपस्थित हो  

(2) अध्यक्ष बोर्ड के प्रत्येक अधिवेशन के कार्य की एक प्रति, यथासंभवशीघ्र केन्द्रीय सरकार को भेजेगा और उसे ऐसी रिपोर्टें, विवरणियां, दस्तावेज या अन्य जानकारी देगा जैसी समय-समय पर उसके द्वारा मांगी जाए  

(3) अध्यक्ष कार्यपालक प्रशासन के मामलों में और बोर्ड के लेखाओं और अभिलेखों की बाबत मामलों में बोर्ड के सब कर्मचारियों के कृत्यों का अधीक्षण करेगा और उन पर नियंत्रण रखेगा

अध्याय 3

बोर्ड के कर्मचारिवृन्द

23. बोर्ड के कर्मचारिवृन्द की अनुसूची-बोर्ड अपने कर्मचारिवृन्द की एक ऐसी अनुसूची समय-समय पर तैयार करेगा और मंजूर करेगा जैसी वह इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए बनाए रखना आवश्यक और उचित समझता है तथा ऐसी अनुसूची में कर्मचारियों के पदाभिधान और श्रेणियों को तथा ऐसे वेतनों, फीसों और भत्तों को उपदर्शित करेगा जैसे उन्हें दिए जाने के लिए प्रस्थापित हैं

 [परन्तु उक्त अनुसूची में कर्मचारियों में उन पदाभिधानों और श्रेणियों को तथा उन्हें देय ऐसे वेतनों, फीसों और भत्तों को, जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, और जहां ऐसा आदेश किया गया हो वहां ऐसे पदों को (जिनके अन्तर्गत उनसे संलग्न वेतन और भत्ते भी हैं) जिनके केन्द्रीय सरकार द्वारा सृजित किए जाने की अपेक्षा है, या जिनके सृजन के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित है, सम्मिलित करने के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी अभिप्राप्त की जाएगी ]

24. नियुक्तियां करने की शक्ति-(1) धारा 23 के अधीन बोर्ड द्वारा मंजूर की गई तत्समय प्रवृत्त अनुसूची के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी पद पर किसी व्यक्ति को, स्थायी या अस्थायी रूप से, नियुक्त करने की शक्ति

 [() ऐसे किसी पद की दशा में, -

(i) जिसका पदधारी विभागाध्यक्ष माना जाएगा; या 

(ii) जिस पर ऐसे पदधारी की नियुक्ति की जानी है; या

 [(iii) जिसके वेतनमान का अधिकतम (भत्तों को अपवर्जित करते हुए) ऐसी रकम से अधिक है जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, नियत करे,]

                केन्द्रीय सरकार द्वारा अध्यक्ष के परामर्श के पश्चात् प्रयोक्तव्य होगी;]

 [() किसी अन्य पद की दशा में, अध्यक्ष द्वारा या ऐसे प्राधिकारी द्वारा जैसा विनियमों द्वारा विहित किया जाए, प्रयोक्तव्य होंगी:]

परन्तु ऐसे व्यक्ति को किसी पत्तन पर पाइलट के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, भारतीय पत्तन अधिनियम के उपबंधों के अधीन [उस पर या किसी अन्य पत्तन परट जलयानों का मार्गदर्शन करने के लिए तत्समय प्राधिकृत नहीं है

(2) केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, ऐसे पद विनिर्दिष्ट पर सकेगी जिनके पदधारी, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए विभागाध्यक्ष माने जाएंगे  

25. बोर्ड के कर्मचारियों को छुट्टी, आदि मंजूर करने की शक्ति-(1) धारा 28 के अधीन बनाए गए किन्हीं विनियमों के अधीन रहते हुए, बोर्ड के कर्मचारियों की सेवा    का विस्तारण मंजूर करने, उन्हें छुट्टी मंजूर करने, निलम्बित करने, अवनत करने,  [अनिवार्यतः सेवानिवृत्त करने,] हटाने या पदच्युत करने या उनकी सेवाओं से संबंधित किसी अन्य प्रश्न को निपटाने की शक्ति का प्रयोग, जिसके अन्तर्गत किसी ऐसे कर्मचारी को, उसके कदाचार से भिन्न किसी कारण से, अभिमुक्त करने की शक्ति भी है, निम्नलिखित द्वारा किया जाएगा, अर्थात् :-

 [() धारा 24 की उपधारा (1) के खण्ड () में निर्दिष्ट पद धारण करने वाले कर्मचारी के मामले में, अध्यक्ष द्वारा

() किसी अन्य मामले में, अध्यक्ष द्वारा या ऐसे प्राधिकारी द्वारा जो विनियमों द्वारा विहित किया जाए:]

                परन्तु ऐसा कोई आदेश, वहां तक जहां तक उसमें [खण्ड () में निर्दिष्ट कर्मचारी] की सेवा का विस्तार, निलम्बन, श्रेणी से अवनति, [अनिवार्यतः सेवानिवृत्त,] हटाया जाना या पदच्युत करना अन्तर्ग्रस्त है, तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक केन्द्रीय सरकार उसका अनुमोदन नहीं कर देती  

(2) बोर्ड के किसी कर्मचारी को श्रेणी से अवनत करने, 2[अनिवार्यतः सेवानिवृत्त करने], पद से हटाने या पदच्युत करने वाले आदेश से व्यथित कर्मचारी उतने समय के भीतर और ऐसी रीति में जो विनियमों में उपबंधित किया या की जाए

 [() जहां आदेश अध्यक्ष ने पारित किया है वहां केन्द्रीय सरकार को; और

() जहां आदेश उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन विनियमों द्वारा विहित किसी प्राधिकारी ने पारित किया है वहां अध्यक्ष को, अपील कर सकेगा:]

परंतु जहां वह व्यक्ति, जिसने आदेश पारित किया था, तदुपरांत अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति हो जाने के आधार पर, आदेश के विरुद्ध अपील की बाबत अपील प्राधिकारी हो जाता है वहां ऐसा व्यक्ति अपनी [केन्द्रीय सरकार] को भेजेगा और उस अपील के संबंध में, इस धारा के प्रयोजनों के लिए, 6[केन्द्रीय सरकार] ही अपील प्राधिकारी समझी जाएगी  

26. बोर्ड का परामर्शी इंजीनियर-बोर्ड किसी व्यक्ति को मासिक वेतन के संदाय के आधार से भिन्न किसी आधार पर बोर्ड का परामर्शी इंजीनियर नियुक्त कर सकेगा किन्तु ऐसी प्रत्येक नियुक्ति केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन के अधीन होगी   

 [27. पद सृजित करने की शक्ति-धारा 23 में किसी बात के होते हुए भी, कोई अस्थायी या स्थायी पद सृजित करने की शक्ति-

() ऐसे पद के मामले में जिसका धारक विभागाध्यक्ष माना जाएगा या ऐसे पद के मामले में जिसके [वेतनमान का अधिकतम (भत्तों को अपवर्जित करके) ऐसी रकम से अधिक है जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे, उस सरकार द्वारा प्रयोक्तव्य होगी];

() खण्ड () में निर्दिष्ट पद से भिन्न पद के मामले में, जिसके वेतन का अधिकतम उतनी राशि से अधिक है जितनी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर, आदेश द्वारा, इस निमित्त नियत करे, या जहां कोई ऐसी राशि नियत की गई हो वहां एक हजार रुपए से कम है, बोर्ड द्वारा केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से प्रयोक्तव्य होगी

() किसी अन्य पद के मामले में, अध्यक्ष द्वारा प्रयोक्तव्य होगी  

28. विनियम बनाने की शक्ति-बोर्ड निम्नलिखित विषयों में से किसी एक या अधिक विषयों के लिए ऐसे उपबंध बना सकेगा जो इस अधिनियम से असंगत हों, अर्थात्: -

() कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रोन्नति, निलम्बन, [श्रेणी में अवनति, अनिवार्यतः सेवानिवृत्ति,] हटाया जाना और पदच्युति

() उनकी छुट्टी, छुट्टी भत्ते, पेंशन, उपदान, अनुकंपा भत्ते और यात्रा भत्ते तथा उनके कल्याण के लिए भविष्य निधि या किसी अन्य निधि की स्थापना और उसे बनाए रखना

() उन व्यक्तियों की सेवा के निबंधन और शर्तें जो धारा 29 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन बोर्ड के कर्मचारी हो जाते हैं

() धारा 25 की उपधारा (2) के अधीन अपीलें करने की अवधि और रीति और ऐसी अपीलों का विनिश्चय करने के लिए प्रक्रिया

() कोई अन्य विषय जो बोर्ड के कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा की शर्तों को विनियमित करने के प्रयोजन के आनुषंगिक है या उसके लिए आवश्यक है

अध्याय 4

सम्पत्ति और संविदाएं

29. केन्द्रीय सरकार, आदि की आस्तियों और दायित्वों का बोर्ड को अंतरण-(1) किसी पत्तन के संबंध में नियत दिन से ही

() ऐसे दिन के ठीक पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी में पत्तन के प्रयोजनों के लिए निहित सब संपत्ति, आस्तियां और निधियां [तथा रेट उद्गृहीत करने के सब अधिकारट, बोर्ड में निहित हो जाएंगे

() ऐसे दिन के ठीक पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या अन्य प्राधिकारी द्वारा या उसके साथ या उसके लिए, पत्तन के प्रयोजनों के लिए या उनके संबंध में, उपगत सब ऋण, बाध्यताएं और दायित्व, की गई सब संविदाएं और वे सब विषय और चीजें जिनके लिए वचनबंध किया गया हो, बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई और करने के लिए वचनबद्ध किए गए, समझे जाएंगे

() केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा ऐसे दिन तक पत्तन के प्रयोजनों के लिए या उनके संबंध में उपगत सब अनावर्ती व्यय, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा पूंजी व्यय घोषित किया गया हो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा बोर्ड को दी गई पूंजी के रूप में माना जाएगा

() ऐसे दिन के ठीक पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या अन्य प्राधिकारी को, पत्तन के संबंध में, देय सब रेट, फीसें, भाटक और अन्य धनराशियां, बोर्ड को, देय समझी जाएंगी

() ऐसे दिन के ठीक पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या अन्य प्राधिकारी द्वारा या उसके विरुद्ध पत्तन से संबंधित किसी विषय के लिए संस्थित सब वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी;

() ऐसे दिन के ठीक पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या अन्य प्राधिकारी के अधीन एकमात्र या मुख्यतया पत्तन के लिए या उसके विषयों के संबंध में सेवारत प्रत्येक कर्मचारी उसी अवधि के लिए और सेवा के उन्हीं निबंधन और शर्तों पर पद या सेवा धारण करेगा जब तक या जिन पर वह उसे बोर्ड की स्थापना की जाने की दशा में धारण करता और तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक बोर्ड में उसका नियोजन समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसकी पदावधि, पारिश्रमिक या सेवा के निबंधन और शर्तें बोर्ड द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जाती :

                परन्तु किसी ऐसे कर्मचारी की पदावधि, पारिश्रमिक और सेवा के निबंधन और शर्तें केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना उसके अहितकर रूप में परिवर्तित नहीं की जाएंगी

                (2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में, या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में, किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन किसी कर्मचारी की सेवाओं का अन्तरण ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा  

 [(3) उपधारा (1) के खंड () में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड में निहित रेटों को नियत करने का अधिकार प्राधिकरण में उस तारीख से ही निहित हो जाएगा, जिसको उसका गठन धारा 47 की उपधारा (1) के अधीन किया जाता है  

30. विद्यमान रेटों, आदि का तब तक चालू रहना जब तक बोर्ड द्वारा उनमें परिवर्तन नहीं कर दिया जाता-किसी पत्तन के संबंध में सब रेट, फीसें और अन्य प्रभार नियत दिन से तब तक, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार उनमें परिवर्तन नहीं कर दिया जाए, उन्हीं दरों पर उद्गृहीत और संगृहीत किए जाते रहेंगे जिन पर वे ऐसे दिन के ठीक पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा उद्गृहीत या संगृहीत किए जा रहे थे   

31. पूंजी तथा ब्याज का प्रति संदाय-बोर्ड, ऐसे अन्तरालों पर और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जैसे केन्द्रीय सरकार अवधारित करे, धारा 29 की उपधारा (1) के खण्ड () के अधीन उपबंधित पूंजी की रकम, ऐसी दर पर ब्याज सहित जैसी सरकार द्वारा नियत की जाए, प्रतिसंदत्त करेगा तथा पूंजी के ऐसे प्रतिसंदाय या ब्याज के संदाय की बाबत यह समझा जाएगा कि वह बोर्ड के व्यय का भाग है  

32. करार द्वारा स्थावर संपत्ति अर्जित की जा सकने की स्थिति में प्रक्रिया- [जब बोर्ड के प्रयोजनों के लिए कोई स्थावर संपत्ति अपेक्षित हो], तब केन्द्रीय सरकार, बोर्ड की प्रार्थना पर, उसका अर्जन भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1984 का 1) के उपबंधों के अधीन उपाप्त कर सकेगी तथा इस अधिनियम के अधीन अधिर्निर्णीत प्रतिकर और कार्यवाहियों के संबंध में सरकार द्वारा उपगत प्रभारों का बोर्ड द्वारा संदाय किए जाने पर वह भूमि बोर्ड में निहित हो जाएगी  

33. बोर्ड द्वारा संविदाएं-धारा 34 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक कोई संविदा करने और उसका पालन करने के लिए सक्षम होगा   

34. बोर्ड की ओर से संविदाएं निष्पादित करने का ढंग-(1) बोर्ड की ओर से प्रत्येक संविदा अध्यक्ष द्वारा [या बोर्ड के किसी ऐसे अधिकारी द्वारा जो विभागाध्यक्ष की पंक्ति से नीचे का हो और जिसे अध्यक्ष साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत करेट की जाएगी और उस पर बोर्ड की सामान्य मुद्रा अंकित की जाएगी:  

परन्तु केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर इस निमित्त नियत किए गए मूल्य या रकम से अधिक मूल्य या रकम वाली कोई संविदा तब तक नहीं की जाएगी जब तक बोर्ड ने उनका पूर्व अनुमोदन कर दिया हो:

परन्तु यह और कि स्थावर संपत्ति के अर्जन या विक्रय के लिए या किसी ऐसी सम्पत्ति का तीस वर्ष से अधिक के लिए पट्टा करने के लिए कोई संविदा, तथा केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर इस निमित्त नियत किए गए मूल्य या रकम से अधिक मूल्य या रकम की कोई अन्य संविदा तब तक नहीं की जाएगी, जब तक केन्द्रीय सरकार ने उसका पूर्व अनुमोदन कर दिया हो

(2) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अधीन की जाने वाली किसी संविदा का स्वरूप और रीति वह होगी जो इस निमित्त बनाए गए विनियमों द्वारा विहित किया जाए  

(3) ऐसी संविदा बोर्ड पर बाध्यकारी नहीं होगी, जो इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए विनियमों के उपबंधों के अनुसार नहीं की जाती

अध्याय 5

संकर्म और सेवाएं जिनका प्रबन्ध पत्तन पर किया जाएगा

35. संकर्म निष्पादित करने और साधित्रों का प्रबन्ध करने की बोर्ड की शक्ति-(1) बोर्ड पत्तन की सीमाओं के भीतर या बाहर ऐसे संकर्म निष्पादित कर सकेगा और ऐसे साधित्रों का प्रबंध कर सकेगा जैसे वह आवश्यक या समीचीन समझे  

(2) ऐसे संकर्मों और साधित्रों के अन्तर्गत निम्नलिखित हो सकेंगे, अर्थात्: -

() पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों या पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों के अग्रतटों पर घाट, घट्टियों, डाक, मंच (स्टेज), जैटियां, बंगसार और अन्य संकर्म तथा ऐसे सब सुविधापूर्ण मेहराब, नालियां, उतराई स्थान, सीढ़ियां, बाड़े, सड़क, रेल मार्ग, पुल, सुरंगें, और पहुंच मार्ग तथा बोर्ड के कर्मचारियों के निवास स्थान के लिए अपेक्षित भवन, जिन्हें बोर्ड आवश्यक समझे

() यात्रियों और मालों के लिए बसें, रेलें, लोकोमोटिव, चल स्टाक, शैड, होटल, भाण्डागार और अन्य वास सुविधाएं तथा यात्रियों के वहन के लिए और उतारे गए या पोत परिवहनित किए जाने वाले या अन्य माल के प्रवहण, प्राप्ति और भाण्डागारण के लिए अन्य साधित्र

() मूरिगें और क्रेनें, तुलाएं और जलयानों में लदाई और उनसे उतराई के लिए सब अन्य आवश्यक साधन तथा साधित्र;

() इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत, या इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अन्यथा, संकर्मों के निष्पादन के लिए ऐसे पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों के अग्रतटों के किसी भाग को यथा आवश्यक ठीक करना, खुदाई करना, बाड़ लगाना और ऊंचा करना

() ऐसे तरंगरोध और अन्य संकर्म जैसे पत्तन के बचाव के लिए समीचीन हों

() पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों या पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों के अग्रतटों के किसी भाग की सफाई करने, उसे गहरा करने और सुधारने के लिए डेजर और अन्य मशीनें;

() पत्तन और पत्तनों के पहुंच मार्गों में सुरक्षित नौवहन के लिए आवश्यक प्रकाश स्तम्भ (लाईट हाउस), प्रकाश पोत (लाईट शिप), बीकन, बोया, पाइलट नौकाएं और अन्य साधित्र;

() जलयानों के अनुकर्षण या उन्हें सहायता प्रदान करने के प्रयेाजन के लिए, तब जब वे पत्तन में प्रवेश कर रहे हों या उसे छोड़ रहे हों, या किसी अन्य स्थान को जा रहे हों, पत्तन की सीमाओं के भीतर या उन सीमाओं से परे, या राज्यक्षेत्रीय समुद्र में या अन्यत्र जलयानों, टगों या अन्य नौकाओं के प्रयोग के लिए, तथा जीवन या सम्पत्ति के बचाव या संरक्षण के प्रयोजन के लिए और धारा 42 के अधीन यात्रियों या मालों की उतराई, पोत परिवहन या पोतान्तरण के लिए

() नलकूपों की खुदाई और पत्तन पर जल प्रदाय के प्रयोजन के लिए उपस्कर, नौकाओं, बजरों और अन्य साधित्रों का अनुरक्षण और उपयोग

() आग बुझाने के लिए आवश्यक इंजन और अन्य साधित्र

 [() जलीय अध्ययनों को पूरा करने के लिए माडलों और नक्शों का निर्माण;

() जलयानों, टगों, नौकाओं, मशीनों या अन्य साधित्रों की मरम्मत या ओवरहालिंग करने के लिए सूखे डाक, स्लिपवे, नौकाद्रोणियों और कर्मशालाएं ]

 [35. उतराई स्थानों और स्नान घाटों की बाबत शक्ति-धारा 35 के अधीन प्रयोक्तव्य शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कलकत्ता पत्तन का न्यासी बोर्ड, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसा करना यदि आवश्यक समझे तो, -

(i) यथेष्ट ऐसे सार्वजनिक उतराई स्थान उपलब्ध करा सकेगा जहां से और जिन पर जनसाधारण को निःशुल्क पोतारोहण करने और पोतों से उतरने की अनुज्ञा होगी

(ii) पत्तन के भीतर किसी स्नानघाट को कब्जाधीन कर सकेगा, या किसी उतराई स्थान को हटा सकेगा और तत्पश्चात् जनसाधरण को वहां आने-जाने से या उसका उपयोग करने से प्रतिषिद्ध कर सकेगा:

                परन्तु बोर्ड इस धारा के अधीन तब तक किसी शक्ति का प्रयोग नहीं करेगा जब तक वह जनसाधारण के उपयोग के लिए पत्तन के भीतर उतने स्नानघाट, जितने केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, आरक्षित नहीं कर देता, नियत नहीं कर देता, बना नहीं देता और उपलब्ध नहीं करा देता

36. कतिपय संकर्मों को अपने जिम्मे लेने की बोर्ड की शक्ति- [(1)] बोर्ड किसी व्यक्ति की ओर से किन्हीं संकर्मों या सेवाओं को या सकर्मों या सेवाओं के किसी वर्ग को पूरा करने का जिम्मा ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर ले सकेगा जैसे बोर्ड और संबंधित व्यक्ति के बीच करार पाई जाएं

 [(2) यदि बोर्ड लोकहित में ऐसा करना आवश्यक और समीचीन समझे तो वह अपने कोई जलयान या साधित्र या अपने कर्मचारियों में से किन्हीं की सेवाएं किसी व्यक्ति को ऐसी अवधि के लिए, जो तीन मास से अधिक हो, और ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, जैसी बोर्ड और संबंधित व्यक्ति के बीच करार पाई जाएं, उधार दे सकेगा ]

37. समुद्रगामी जलयानों को डाकों, घाटों, आदि का उपयोग करने का आदेश देने की बोर्ड की शक्ति-(1) जब कोई डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट, जो किसी पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्ग पर इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन परिनिर्मित किया गया हो, समुद्रगामी जलयानों से और उन पर, माल या यात्रियों को ग्रहण करने, उतारने या पोत परिवहनित करने के के लिए, यथेष्ट भाण्डागारों, तटों और साधित्रों सहित पूरा तैयार हो जाए, तब बोर्ड, सीमाशुल्क कलक्टर का अनुमोदन अभिप्राप्त करने के पश्चात् और राजपत्र के लगातार तीन अंकों में अधिसूचना प्रकाशित करके, ऐसे डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट की बाबत यह घोषित कर सकेगा कि वह समुद्रगामी जलयानों से और उन पर, मालों और यात्रियों को ग्रहण करने, उतारने और पोत परिवहनित करने के लिए या उतारने के लिए या पोत परिवहनित करने के लिए तैयार है  

(2) ऐसी अधिसूचना के तीसरी बार प्रकाशन की तारीख से बोर्ड के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह, समय-समय पर, जब भी ऐसे डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट में स्थान हो तब, ऐसे डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट के किनारे पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों के भीतर, किसी ऐसे समुद्रगामी जलयान को जिसने माल या यात्रियों का उतारना प्रारंभ नहीं किया है, या जो मालों या यात्रियों को चढ़ाने वाला है किन्तु उसने ऐसा करना प्रारंभ नहीं किया है, यह आदेश दे कि वह मालों और यात्रियों को उतारने और पोत परिवहनित करने के प्रयोजन के लिए अथवा उतारने के लिए अथवा पोत परिवहनित करने के लिए उपयोग करें :

परन्तु बोर्ड ऐसा आदेश करने से पहले, जहां तक संभव हो, ऐसे यानों को और पोत पर माल लादने वालों को, किसी विशेष डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट के प्रयोग की बाबत, सुविधाओं का ध्यान रखेगा:

परन्तु यह और कि यदि बोर्ड पत्तन का संरक्षक नहीं है, तो वह उपर्युक्त आदेश नहीं करेगा किन्तु पत्तन संरक्षक से या पत्तन संरक्षक के अधिकारों, शक्तियों और प्राधिकरों का प्रयोग करने वाले अन्य व्यक्ति से ऐसा आदेश करने की अपेक्षा करेगा

38. यदि स्थान पर्याप्त है तो सब समुद्रगामी जलयानों द्वारा डॉकों, घाटों, आदि का उपयोग करने के लिए बाध्य किया जाना-जब उपर्युक्त के अनुसार किसी पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों पर पर्याप्त संख्या में डाक, बर्थ, घाट, घट्टियां, मंच (स्टेज), जैटियां या पोत-घाट उपलब्ध करा दिए गए हों तब बोर्ड, सीमाशुल्क कलक्टर का अनुमोदन अभिप्राप्त करने के पश्चात् और राजपत्र के लगातार तीन अंकों में अधिसूचना प्रकाशित करके, निदेश दे सकेगा कि पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों के भीतर किसी समुद्रगामी जलयान से या उस पर, कोई माल या यात्री ऐसे डॉकों, बर्थों, घाटों, घट्टियों, मंचों (स्टेजों), जैटियों या पोत-घाटों से भिन्न किसी स्थान पर बोर्ड की मंजूरी के सिवाय, और ऐसी शर्तों के अनुसार के सिवाय जैसी बोर्ड विनिर्दिष्ट करे, तो उतारेगा और पोत परिवहनित करेगा  

39. जलयानों को डॉकों, घाटों, आदि के किनारे लाने या वहां से हटाने का आदेश देने की शक्ति-बोर्ड द्वारा इस निमित्त नियुक्त कोई अधिकारी आपात की दशाओं में या किसी ऐसे कारण से जो उसे पर्याप्त प्रतीत हो, लिखित आदेश द्वारा, किसी समुद्रगामी जलयान के मास्टर या स्वामी या अभिकर्ता को आदेश दे सकेगा कि वह ऐसे जलयान को किसी डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट के, जो बोर्ड का है या उसके नियंत्रणाधीन है, किनारे लाए या ऐसे जलयान को वहां से हटाए, और यदि ऐसी सूचना का अनुपालन नहीं किया जाता तो,  [बोर्ड ऐसे जलयान की बाबत, चौबीस घंटे के प्रत्येक दिन या ऐसे दिन के भाग के लिए, जिसके दौरान ऐसा जलयान, ऐसे डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट में बना रहता है शास्ति के रूप में दस हजार रुपए से अनधिक उतनी राशि प्रभारित कर सकेगा जितनी वह ठीक समझे] :

परन्तु ऐसे जलयान की दशा में जिसे हटाने का आदेश दिया गया हो, ऐसा प्रभार उपर्युक्त सूचना की जलयान के मास्टर या स्वामी या अभिकर्ता पर तामील किए जाने के चौबीस घंटे की समाप्ति के पश्चात् ही प्रारंभ होगा उससे पूर्व नहीं  

40. डॉकों, घाटों, आदि का उपयोग करने की बाध्यता से छूट देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-धारा 37 और धारा 38 में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, यदि उसकी राय में ऐसा करना लोकहित में आवश्यक है तो, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, कतिपय विनिर्दिष्ट जलयानों के वर्गों को, ऐसी रीति में, ऐसी अवधि के दौरान तथा बोर्ड को ऐसे संदाय करने पर और ऐसी शर्तों पर, जैसी केन्द्रीय सरकार ठीक समझे, मालों या कतिपय विनिर्दिष्ट मालों या मालों के वर्गों को, पत्तन में या पत्तन के पहुंच मार्गों के भीतर किसी स्थान में, उतारने की, समय-समय पर, अनुज्ञा दे सकेगी

41. बोर्ड द्वारा यह घोषणा करने की शक्ति कि समुद्रगामी जलयानों से भिन्न जलयान, डॉकों, घाटों, आदि का उपयोग करने के लिए कब बाध्य होंगे-(1) ऐसे जलयानों से, या उन पर जो समुद्रागामी जलयान नहीं हैं, मालों या यात्रियों को ग्रहण करने, उतारने या उनका पोत लदान करने के लिए जब कोई डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट इस निमित्त सब समुचित साधित्रों सहित बना दिया और तैयार कर दिया गया हो, तब बोर्ड, सीमाशुल्क कलक्टर का अनुमोदन अभिप्राप्त करने के पश्चात्, राजपत्र के तीन लगातार अंकों में प्रकाशित आदेश द्वारा

(i) यह घोषणा कर सकेगा कि ऐसे डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट ऐसे जलयानों से या उन पर, जो समुद्रगामी जलयान नहीं हैं, मालों या यात्रियों को ग्रहण करने, उतारने या पोत लदान करने के लिए तैयार हैं; और 

(ii) यह निदेश दे सकेगा कि उन कतिपय परिसीमाओं के भीतर जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट किसी वर्ग के जलयान से, या उसमें, जो समुद्रगामी जलयान नहीं है, किन्हीं मालों या यात्रियों का बोर्ड की प्रत्यक्ष मंजूरी के बिना उतारना या पोत परिवहनित करना विधिपूर्ण नहीं होगा  

(2) उपधारा (1) में उल्लिखित आदेश के तीसरी बार प्रकाशन की तारीख से, ऐसे वर्गों के किसी जलयान के लिए यह विधिपूर्ण नहीं होगा कि वह बोर्ड की सहमति के बिना-

(i) ऐसे डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट के सिवाय किसी ऐसे स्थान पर, जो ऐसी विनिर्दिष्ट परिसीमाओं के भीतर है, किन्हीं मालों या यात्रियों को उतारे या पोत परिवहनित करे; अथवा 

(ii) तब जब वह ऐसी परिसीमाओं के भीतर हो, सामान्य निम्नतम ज्वार चिह्न के पचास गज के भीतर लंगर डाले, फंसाए या खड़ा रहे  

(3) यदि ऐसे आदेश के प्रकाशन के पश्चात् कोई ऐसा जलयान, तब जब वह ऐसी विनिर्दिष्ट परिसीमाओं के भीतर हो, इस प्रकार लंगर डालेगा, फंसाएगा या खड़ा रहेगा तो बोर्ड के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह जलयान के मास्टर या स्वामी या अभिकर्ता के व्यय पर उसे उक्त सीमाओं के बाहर हटवा दे  

42. बोर्ड या अन्य व्यक्ति द्वारा सेवाएं करना-(1) बोर्ड को निम्नलिखित सेवाएं करने की शक्ति होगी, अर्थात्: -

() पत्तन में जलयानों और बोर्ड के या उसके कब्जाधीन घाटों, पोत-घाटों, घट्टियों या डॉकों के बीच यात्रियों और मालों की उतराई, पोत-परिवहन या पोतांतरण

() बोर्ड के परिसरों के भीतर लाए गए मालों को ग्रहण करना, हटाना, स्थानान्तरित करना, परिवहनित करना, भाण्डागारित करना या परिदत्त करना

() ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अधीन रहते हुए जैसे केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों की सीमाओं के भीतर यात्रियों का रेल या अन्य साधनों से वहन करना;   

() पत्तन में जलयानों से निकाले जाने वाले और भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) के अधीन रेल प्रशासन के रूप में पड़ौसी रेलों द्वारा वहन किए जाने के लिए, या विपर्ययेन, आशयित मालों को ग्रहण करना, और परिदत्त करना, परिवहनित करना और बुक करना तथा प्रेषित करना;  

 

 [() जलयानों को पाइलट करना, उनकी खिंचाई करना, मूरिंग करना, फिर से मूरिंग करना, हुक करना या परिमाप करना या जलयानों की बाबत कोई अन्य सेवाएं करना;] [और]

2[() केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के अधीन रहते हुए, पत्तनों के लिए अवसंरचना सुविधाओं का विकास करना और उसकी व्यवस्था करना ]

(2) यदि स्वामी निवेदन करे तो, बोर्ड कोई सेवा या सेवाएं करने के प्रयोजन के लिए मालों को अपने भारसाधन में ले सकेगा और ऐसे प्ररूप में रसीद देगा जैसा बोर्ड विनिर्दिष्ट करे

(3) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, किसी व्यक्ति को उपधारा (1) में उल्लिखित सेवाओं में से कोई सेवा करने के लिए ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर प्राधिकृत कर सकेगा जैसे करार पाए जाएं  

2[(3) उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, इस अधिनियम के अधीन उसे सौंपी गई सेवाओं और कृत्यों में से किसी का पालन करने के लिए किसी निगमित निकाय या किसी अन्य व्यक्ति के साथ, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो तय पाई जाएं, कोई करार या अन्य ठहराव (भागीदारी, सह-उद्यम रूप में या किसी अन्य रीति में) कर सकेगा ]

(4) उपधारा (3) के अधीन प्राधिकृत कोई व्यक्ति ऐसी सेवा करने के लिए [प्राधिकरण द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट] रकम से अधिक कोई राशि प्रभारित नहीं करेगा या वसूल नहीं करेगा  

(5) यदि स्वामी ऐसी अपेक्षा करे तो ऐसा व्यक्ति उक्त सेवाओं में से कोई सेवा मालों की बाबत कर सकेगा और उस प्रयोजन के लिए माल को अपने भारसाधन में ले सकेगा तथा ऐसे प्ररूप में रसीद देगा जैसा बोर्ड विनिर्दिष्ट करे  

(6) ऐसे माल की, जो किसी ऐसे व्यक्ति ने अपने भारसाधन में लिया है, हानि, विनाश या अवक्षयण के लिए उस व्यक्ति का दायित्व, इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, वही होगा जो भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 151, धारा 152 और धारा 161 के अधीन उपनिहिती का है  

(7) किसी माल को इस धारा के अधीन भारसाधन में लेने और उनके लिए रसीद दिए जाने के पश्चात् किसी ऐसी हानि या ऐसे नुकसान के लिए जो उन्हें हो, कोई दायित्व किसी ऐसे व्यक्ति का नहीं होगा जिसे रसीद दी गई है या जो उस जलयान का मास्टर या स्वामी है जिससे मालों को उतारा गया है या पोतांतरित किया गया है  

43. मालों की हानि, आदि के लिए बोर्ड की जिम्मेदारी-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, ऐसे मालों की हानि, विनाश या अवक्षयण के लिए जो बोर्ड ने अपने भारसाधन में लिए हैं, बोर्ड की जिम्मेदारी-

(i) उन मालों के मामले में जो रेल से वहन करने के लिए ग्रहण किए गए हैं, भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9) के उपबन्धों से शासित होगी; और  

(ii) अन्य मामलों में, वह होगी जो भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 151, धारा 152 और और धारा 161 के अधीन, उस अधिनियम की धारा 152 में से विशेष संविदा के अभाव में" शब्दों का लोप करते हुए, किसी उपनिहिती की है

 [परन्तु बोर्ड इस धारा के अधीन-

() तब तक जिम्मेदार नहीं होगा जब तक बोर्ड द्वारा धारा 42 की उपधारा (2) में उल्लिखित रसीद नहीं दे दी जाती है; और 

() ऐसे मालों का भारसाधन ग्रहण करने की तारीख से ऐसी अवधि की समाप्ति के पश्चात्, जैसी विनियमों द्वारा विहित की जाए,

जिम्मेदार नहीं होगा  

(2) [बोर्ड] उस माल की, जो उसने अपने भारसाधन में लिया है, हानि, विनाश या अवक्षयण या नुकसानी के लिए तब तक जिम्मेदार नहीं होगा जब तक ऐसी हानि या नुकसानी की सूचना उसे धारा 42 की उपधारा (2) के अधीन 5[ऐसे माल को भारसाधन में लेने की तारीख से] उतनी अवधि के भीतर नहीं दे दी जाती जो इस निमित्त बनाए गए विनियमों द्वारा विहित की जाए  

44. सीमाशुल्क अधिनियमों के अधीन नियुक्त किए गए सीमाशुल्क अधिकारियों के लिए घाट, आदि में स्थान-सुविधा का प्रबन्ध करना- जहां सीमाशुल्क कलक्टर ने, किसी अधिनियम के उपबन्धों के अधीन, सीमाशुल्क के उद्ग्रहण के लिए, इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन किसी पत्तन पर समुद्रगामी जलयानों के प्रयोग के लिए किसी डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी, पोत-घाट, भाण्डागार या शैड या किसी भाण्डागार या शैड के भाग को, मालों की उतराई, या पोत परिवहन के लिए अनुमोदित स्थान के रूप में, या शुल्क का संदाय किए बिना प्रथम बार आयातित शुल्क मालों के भण्डारण के लिए भाण्डागार के रूप में, किसी अधिनियम के अर्थ में, नियत कर दिया है तो बोर्ड ऐसे डाक, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), शैड या पोत-घाट पर या उससे लगे हुए किसी स्थान को, या ऐसे भाण्डागार या शैड में या उसके किसी भाग में ऐसे स्थान को, जैसा आवश्यक हो, सीमशुल्क अधिकारियों के उपयोग के लिए पृथक् रखेगा और बनाए रखेगा  

45. सीमाशुल्क घाटों, आदि के लिए शुल्क-इस बात के होते हुए भी कि किसी पत्तन पर कोई डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी, पोत-घाट भाण्डागार या शैड या उनका कोई भाग, धारा 44 के उपबन्धों के अधीन, पत्तन पर सीमाशुल्क अधिकारियों के उपयोग के लिए पृथक् रखा गया है, उसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन, या वहां मालों के भाण्डागारण के लिए, देय सब रेट और अन्य प्रभार बोर्ड को या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को देय होंगे जिन्हें बोर्ड द्वारा उन्हें ग्रहण करने के लिए नियुक्त किया जाए   

46. शर्तों के अधीन रहते हुए पत्तन के भीतर प्राइवेट घाट परिनिर्मित करने की अनुज्ञा देने की शक्ति-(1) कोई व्यक्ति किसी पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों की परिसीमाओं के भीतर बोर्ड की लिखित पूर्व अनुज्ञा से, और केवल ऐसी शर्तों पर ही, यदि कोई हों, जो बोर्ड विनिर्दिष्ट करे, कोई डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी, पोत-घाट, परिनिर्माण या मूरिंग बनाएगा या परिनिर्मित करेगा या लगाएगा  [या उक्त सीमाओं के भीतर अग्रतट को ठीक करने का कार्य अपने जिम्मे लेगा] अन्यथा नहीं

(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उल्लंघन में कोई घाट, डाक, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी, पोत-घाट, परिनिर्माण या मूरिंग परिनिर्मित करता है या लगाता है 1[या अग्रत] को ठीक करने का कोई कार्य अपने जिम्मे लेता है] तो बोर्ड, सूचना द्वारा, ऐसे व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसे ऐसी अवधि के भीतर, जैसी सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, हटा दे और यदि वह व्यक्ति उसे हटाने में असफल रहता है तो बोर्ड उस व्यक्ति के व्यय पर उसे हटवा सकेगा  

47. जहां किसी प्राइवेट घाट, आदि का प्रयोग अवैध हो जाए वहां कतिपय दशाओं में प्रतिकर का देय होना-(1) जहां धारा 38 या धारा 41 के अधीन प्रकाशित किसी आदेश के परिणामस्वरूप किसी ऐसे घाट, डाक, बर्थ, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट का उपयोग, जो किसी व्यक्ति द्वारा बनाया गया, लगाया या परिनिर्मित किया गया है, अवैध हो जाता है वहां बोर्ड सम्बन्धित व्यक्ति को सुनने के पश्चात्, आदेश द्वारा, ऐसे घाट, डाक, बर्थ, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट को बन्द कर सकेगा, हटा सकेगा, भर सकेगा या नष्ट कर सकेगा या ऐसे व्यक्ति को उसके उपयोग की अनुज्ञा ऐसे रेटों, और प्रभारों का संदाय करने पर दे सकेगा जैसे बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, अवधारित करे

(2) उपधारा (3) के अधीन अन्यथा उपबंधित के सिवाय, कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन दिए गए किसी आदेश से कारित या कारित अभिकथित किसी क्षति, नुकसानी या हानि के लिए प्रतिकर का दावा करने का हकदार नहीं होगा  

(3) यदि बोर्ड के समाधानप्रद रूप से यह साबित कर दिया जाए कि किसी व्यक्ति ने कोई ऐसा घाट, डाक, बर्थ, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट ऐसे प्राधिकारी की पूर्व अनुज्ञा से, जो ऐसी अनुज्ञा मंजूर करने के लिए सक्षम है, बनाया था या लगाया था या परिनिर्मित किया था तो बोर्ड उसे प्रतिकर संदत्त करेगा ऐसे प्रतिकर की रकम इसमें इसके पश्चात् उपवर्णित रीति में और सिद्धान्तों के अनुसार, अवधारित की जाएगी, अर्थात्: -

() प्रतिकर की संगणना करने में रेट या अन्य प्रभार गणना में नहीं लिए जाएंगे जिन्हें ऐसा व्यक्ति बोर्ड द्वारा उपबंधित किसी घाट, डाक, बर्थ, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट का उपयोग करने के कारण संदत्त करने का दायी हो

() प्रतिकर की रकम ऐसे घाट, डाक, बर्थ, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट के निर्माण की लागत के प्रति निर्देश से संगणित की जाएगी

() जहां प्रतिकर की रकम करार द्वारा नियत की जा सकती है, वहां वह ऐसे करार के अनुसार संदत्त की जाएगी

() जहां ऐसा करार हो पाए वहां केन्द्रीय सरकार माध्यस्थम् के रूप में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करेगी जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है, या रह चुका है, या ऐसा न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के लिए अर्हित है

() केन्द्रीय सरकार, किसी विशिष्ट मामले में, जांच के अधीन किसी मामले से सम्बन्धित किसी विषय का विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्ति को किसी ऐसे प्रश्न पर, जो माध्यस्थम् द्वारा इस धारा के अधीन विनिश्चित किया जाना है, माध्यस्थम् को सहायता देने के लिए नामनिर्देशित कर सकेगी और जहां ऐसा नामनिर्देशन किया जाए वहां वह व्यक्ति भी जिसे प्रतिकर दिया जाना है, उसी प्रयोजन के लिए एक असेसर नामनिर्देशित कर सकेगा

() माध्यस्थम् के समक्ष कार्यवाहियों के प्रारम्भ पर बोर्ड और वह व्यक्ति, जिसे प्रतिकर दिया जाना है, यह कथित करेंगे कि उनकी अपनी-अपनी राय में प्रतिकर की उचित रकम कितनी होगी

() माध्यस्थम् विवाद की सुनवाई के पश्चात् प्रतिकर की वह रकम अवधारित करते हुए, जो उसे उचित प्रतीत हो, पंचाट देगा और उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों को विनिर्दिष्ट करेगा जिसे या जिन्हें ऐसा प्रतिकर दिया जाएगा

() जहां प्रतिकर के हकदार व्यक्ति या व्यक्तियों की बाबत विवाद हो वहां माध्यस्थम् ऐसे विवाद का विनिश्चय करेगा और यदि माध्यस्थम् इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि एक से अधिक व्यक्ति प्रतिकर के हकदार हैं तो वह प्रतिकर की रकम को ऐसे व्यक्तियों के बीच प्रभाजित करेगा

() [माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 (1996 का 26)] की कोई बात इस धारा के अधीन माध्यस्थम् को लागू नहीं होगी;

() इस धारा के अधीन नियुक्त किए गए माध्यस्थम् को, तब जब वह इस अधिनियम के अधीन माध्यस्थम् कार्यवाहियां कर रहा हो, निम्नलिखित विषयों की बाबत वे सभी शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन वाद का अवधारण करने में सिविल न्यायालय को हैं, अर्थात्: -

(i) किसी व्यक्ति को समनित करना और हाजिर कराना तथा उसकी शपथ पर परीक्षा करना

(ii) दस्तावेजों का प्रकटीकरण और पेश किया जाना

(iii) शपथपत्रों पर साक्ष्य लेना

(iv) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना

() प्रत्येक पंचाट में उस खर्चे की, जो इस धारा के अधीन माध्यस्थम् कार्यवाहियों में उपगत किया गया हो, रकम भी अभिकथित की जाएगी और यह भी अभिकथित किया जाएगा कि वह खर्चा किन व्यक्तियों द्वारा और किस अनुपात में संदत्त किया जाना है;

() इस धारा के अधीन माध्यस्थम् के पंचाट से व्यथित कोई व्यक्ति पंचाट की तारीख से तीस दिन के भीतर उस उच्च न्यायालय को अपील कर सकेगा जिसकी अधिकारिता के भीतर पत्तन स्थित है:

परन्तु उच्च न्यायालय उक्त तीस दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात् अपील ग्रहण कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी समुचित कारणों से समय के भीतर अपील दाखिल नहीं कर सका था  

[अध्याय 5

महापत्तन टैरिफ प्राधिकरण

47. महापत्तन टैरिफ प्राधिकरण का गठन और निगमन-(1) ऐसी तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिसे महापत्तन टैरिफ प्राधिकरण कहा जाएगा  

(2) प्राधिकरण पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुद्रा होगी और वह उक्त नाम से वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा  

(3) प्राधिकरण का प्रधान कार्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर विनिश्चित करे  

(4) प्राधिकरण निम्नलिखित सदस्यों से मिलाकर गठित होगा जिनकी नियुक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा की जाएगी, अर्थात्: -

() अध्यक्ष, ऐसे व्यक्तियों में से, जो भारत सरकार के सचिव हैं या जो सचिव रहे हैं या जिन्होंने केन्द्रीय सरकार में कोई समतुल्य पद धारण किया है और जिन्हें पत्तनों के कार्यकरण के प्रबंध में अनुभव और ज्ञान है

() एक सदस्य, ऐसे अर्थशास्त्रियों में से, जिन्हें परिवहन या विदेश व्यापार के क्षेत्र में कम से कम पंद्रह वर्ष का अनुभव है

() एक सदस्य, ऐसे व्यक्तियों में से, जिन्हें वित्त के क्षेत्र में, सरकार में या किसी वित्तीय संस्था या औद्योगिक या सेवा सेक्टर में विनिधान या लागत विश्लेषण के विशेष संदर्भ में, कम से कम पंद्रह वर्ष का अनुभव है  

47. अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की पदावधि, सेवा की शर्तें, आदि-(1) अध्यक्ष या कोई सदस्य उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष की अवधि के लिए या तब तक जब तक वह पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेता, दोनों में से जो भी पहले हो, पद धारण करेगा  

(2) अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा की अन्य शर्तें वे होंगी जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं  

(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष या कोई सदस्य

() केन्द्रीय सरकार को तीन मास से अन्यून की लिखित सूचना देकर अपना पद छोड़ सकेगा; या

() उसे धारा 47 के उपबंधों के अनुसार उसके पद से हटाया जा सकेगा  

(4) यदि अध्यक्ष या किसी सदस्य के पद में कोई आकस्मिक रिक्ति उसकी मृत्यु, पदत्याग या उसके कृत्यों के निर्वहन में असमर्थता के कारण या बीमारी या अन्य असमर्थता के कारण होती है तो ऐसी रिक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा नई नियुक्ति करके भरी जाएगी और इस प्रकार नियुक्त अध्यक्ष या सदस्य उस व्यक्ति के, जिसके स्थान पर उसे इस प्रकार नियुक्त किया जाता है, पदावधि की शेष अवधि के लिए पद धारण करेगा  

47. अध्यक्ष और सदस्य के पद के लिए निरर्हता-कोई व्यक्ति प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में या किसी सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए निरर्हित होगा यदि उसे धारा 6 के अधीन न्यासी के रूप में चुने जाने के लिए निरर्हित कर दिया जाता है

47. अध्यक्ष और सदस्यों का हटाया जाना, आदि-(1) केन्द्रीय सरकार, अध्यक्ष या किसी सदस्य को प्राधिकरण से हटा देगी, यदि वह, -

() धारा 47 के अधीन किसी निरर्हता के अधीन हो जाता है

() कार्य करने से इंकार करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है

() केन्द्रीय सरकार की राय में उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना लोकहित में हानिकारक है; या 

() अध्यक्ष के रूप में या किसी सदस्य के रूप में बने रहना अन्यथा अनुपयुक्त है  

(2) केन्द्रीय सरकार अध्यक्ष या किसी सदस्य को इसके विरुद्ध किसी जांच के लंबित रहने तक निलंबित कर सकेगी  

(3) इस धारा के अधीन हटाए जाने का कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि, यथास्थिति, संबद्ध अध्यक्ष या सदस्य को अपना स्पष्टीकरण केन्द्रीय सरकार को देने का अवसर नहीं दे दिया गया हो और जब ऐसा आदेश पारित किया जाता है तो हटाए गए अध्यक्ष या सदस्य का स्थान रिक्त घोषित किया जाएगा   

(4) ऐसा अध्यक्ष या कोई सदस्य, जिसे इस धारा के अधीन हटा दिया गया है, प्राधिकरण के अधीन अध्यक्ष के रूप में या किसी सदस्य के रूप में या किसी अन्य हैसियत में पुनर्नियुक्ति को पात्र नहीं होगा   

47. अधिवेशन-प्राधिकरण ऐसे समय और स्थानों पर अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रकिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं   

47. प्राधिकरण के सभी आदेशों और विनिश्चयों का अधिप्रमाणीकरण-प्राधिकरण के सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष या प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य सदस्य के हस्ताक्षर द्वारा अधिप्रमाणित किए जाएंगे

47. रिक्ति, आदि से प्राधिकरण की कार्यवाहियों का अविधिमान्य नहीं होना-प्राधिकरण का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि

() प्राधिकरण में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है; या 

() प्राधिकरण के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है; या 

() प्राधिकरण की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जो मामले के गुणावगुण पर प्रभाव नहीं डालती है

47. प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी-(1) प्राधिकरण अधिकारियों और ऐसे अन्य कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा जिन्हें वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझता है  

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा की अन्य शर्तें वे होंगी जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ]

अध्याय 6

पत्तनों पर रेटों का अधिरोपण और वसूली

48. बोर्ड या अन्य व्यक्ति द्वारा की जाने वाली सेवाओं के लिए रेटों का मापमान-(1) [प्राधिकरण, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन दरों का मापमान जिन पर और उन शर्तों का विवरण जिनके अधीन रहते हुए इसके नीचे विनिर्दिष्ट सेवाओं में से कोई सेवा किसी पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों पर या उनके संबंध में बोर्ड द्वारा या धारा 42 के अधीन प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की जाएगी, विरचित करेगा-]

() पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों में जलयानों के बीच यात्रियों और मालों का पोतांतरण;

() ऐसे जलयानों से या उन तक बोर्ड के कब्जाधीन या अधिभोगाधीन किसी घाट, घट्टी, जैटी, पोत-घाट, डाक, बर्थ, मूरिंग, मंच (स्टेज) या परिनिर्माण, भूमि या भवन को या उससे अथवा पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों की परिसीमाओं के भीतर किसी स्थान पर यात्रियों या मालों की उतराई और पोत-परिवहन;  

() किसी ऐसे स्थान पर मालों का क्रेन-भाड़ा या वहन मूल्य;  

() किसी ऐसे स्थान पर मालों का घाट-भाड़ा, भांडागारण-भाड़ा या डेमरेज

() जलयानों, यात्रियों या मालों की बाबत कोई अन्य सेवा  

(2) मालों और जलयानों के विभिन्न वर्गों के लिए विभिन्न मापमान और शर्तें विरचित की जा सकेंगी  

49. बोर्ड की सम्पत्ति का उपयोग करने के लिए रेटों का मापमान और शर्तों का विवरण-(1) [प्राधिकरण, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन दरों का मापमान, जिनका संदाय करने पर और उन शर्तों का विवरण भी विरचित करेगा जिनके अधीन रहते हुए बोर्ड के या उसके कब्जाधीन या अधिभोगाधीन किसी संपत्ति का या पत्तन या पत्तन के पहुंच मार्गों की परिसीमाओं के भीतर किसी स्थान का उपयोग इसके नीचे विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जा सकेगा]: -

() जलयानों का किसी बोय, मूरिंग, घाट, घट्टी, पोत-घाट, डाक, भूमि, भवन या उपर्युक्त स्थान पर या उसके किनारे पहुंचना या खड़ा किया जाना

() यात्रियों या मालों का वहन करने वाले पशुओं या वाहनों का किसी घाट, घट्टी, पोत-घाट, डाक, भूमि, भवन, सड़क, पुल या उपर्युक्त स्थान पर प्रवेश या किराए पर चलाया जाना

() आयातित या निर्यात के लिए आशयित माल के स्वामियों द्वारा या स्टीम अभिकर्ताओं द्वारा भूमि या शेडों का पट्टे पर दिया जाना

() बोर्ड के या उसके द्वारा उपबन्धित किसी भूमि, भवन, संकर्मों, जलयानों या साधित्रों का कोई अन्य उपयोग  

(2) विभिन्न वर्गों के मालों और जलयानों के लिए विभिन्न मापमान और शर्तें विरचित की जा सकेंगी  

 [(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी बोर्ड, किसी ऐसी भूमि या शेड़ को जो उसका हो या उसके कब्जे या अधिभोग में हो, नीलाम द्वारा या निविदाएं आमंत्रित करके, उपधारा (1) में उपबन्धित दर से उच्चतर दर पर पट्टे पर दे सकेगा ]

 [49. पत्तन नयन और कतिपय अन्य सेवाओं के लिए फीस-(1) किसी पत्तन के भीतर जलयानों की पत्तन नयन, उनकी खिंचाई करने, मूरिंग करने, फिर से मूरिंग करने, हुक करने, परिमाप करने तथा जलयानों को प्रदान की गई अन्य सेवाओं के लिए फीस ऐसी दरों से प्रभारित की जा सकेगी जो प्राधिकरण नियत करे  

(2) ऐसी सेवाओं के लिए अब प्रभार्य फीसें तब तक प्रभार्य बनी रहेंगी जब तक वे उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए परिवर्तित नहीं कर दी जातीं  

(3) केन्द्रीय सरकार, विशेष मामलों में, उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन प्रभार्य संपूर्ण फीस या उसके किसी भाग का परिहार कर सकेगी  

49. पत्तन शोध्यों का नियत किया जाना-(1) प्राधिकरण, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, पत्तन में प्रवेश करने वाले जलयानों पर पत्तन शोध्य नियत करेगा  

(2) प्रत्येक पत्तन पर पत्तन नयन और कतिपय अन्य सेवाओं के लिए फीस या पत्तन शोध्यों में वृद्धि करने या उन्हें परिवर्तित करने का कोई आदेश तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक उस तारीख से, जिसको उक्त आदेश राजपत्र में प्रकाशित किया गया था, तीस दिन समाप्त नहीं हो जाते

 [50. मिली-जुली सेवाओं के लिए समेकित दरें-प्राधिकरण, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, धारा 48 में विनिर्दिष्ट सेवाओं के किसी संयोजन के लिए या बोर्ड की या उसके कब्जाधीन या अधिभोगाधीन किसी संपत्ति के, जैसी धारा 49 में विनिर्दिष्ट है, किसी उपयोग या उपयोग की अनुज्ञा सहित ऐसी सेवा या सेवाओं के किसी संयोजन के लिए दरों का जलयानों को या धारा 49 में यथाविनिर्दिष्ट, उनकी पत्तन नयन, उनकी खिंचाई करने, मूरिंग करने, फिर से मूरिंग करने, हुक करने या परिमाप करने तथा जलयानों को प्रदान की गई अन्य सेवाओं के लिए प्रभारित की जाने वाली फीसों या धारा 49 में यथाविनिर्दिष्ट पत्तन में प्रवेश करने वाले जलयानों पर नियत किए जाने वाले पत्तन शोध्यों और ऐेसे शोध्यों की अवधि के लिए फीसों का समेकित मापमान विरचित करेगा ]

50. स्थिरक भार वाले जलयानों पर पत्तन शोध्य-किसी पत्तन में स्थिरक भार वाले प्रवेश करने वाले ऐसे जलयान पर जो यात्रियों को नहीं ले जा रहा है, ऐसी दर से पत्तन शोध्य प्रभारित किया जाएगा जो प्राधिकरण द्वारा अवधारित की जाएगी और जो उस दर के तीन-चौथाई से अधिक नहीं होगी जिससे वह अन्यथा प्रभार्य होता  

50. ऐसे जलयानों पर पत्तन शोध्य जो तो स्थोरा उतार रहे हैं लाद रहे हैं-जब कोई जलयान पत्तन में प्रवेश करता है किन्तु कोई स्थोरा या यात्री तो उतारता है और चढ़ाता है (ऐसे माल उतारने या पुनः लादने के अपवाद के साथ जो मरम्मत के प्रयोजन के लिए आवश्यक है) तो उस पर ऐसी दर से पत्तन शोध्य प्रभारित जाएगा जो प्राधिकरण द्वारा अवधारित की जाएगी और वह इस दर के आधे से अधिक नहीं होगी जिससे वह अन्यथा प्रभार्य होता  

50. प्राधिकरण के आदेशों का प्रकाशन-इस अधिनियम के अनुसरण में जारी की गई प्राधिकरण की प्रत्येक अधिसूचना, घोषणा, आदेश और विनियम, राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और उसकी एक प्रति प्रत्येक ऐसे पत्तन के संरक्षक के कार्यालय में और सीमाशुल्क सदन में, यदि कोई है, रखी जाएगी जिससे घोषणा, आदेश या नियम संबंधित हैं और वहां वह किसी फीस का संदाय किए बिना किसी भी व्यक्ति के निरीक्षण के लिए सभी युक्तियुक्त समय पर उपलब्ध होगी

51. कतिपय दशाओं में छूट दी गई दरों का उद्ग्रहण करने की शक्ति-इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों से किसी के अधीन मापमान विरचित करने में [प्राधिकरण] निम्नलिखित की बाबत निम्नतम दरें विहित कर सकेगा, अर्थात्: -

() तटीय माल, अर्थात्, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में परिभाषित आयातित माल से भिन्न माल, जो किसी एक भारतीय पत्तन से किसी अन्य भारतीय पत्तन को जलयान से वहनित किया जाए:

परन्तु 1[प्राधिकरण] इस धारा के अधीन निम्नतम दर विहित करने में किसी पत्तन और अन्य ऐसे पत्तन के बीच भेदभाव नहीं करेगा

() विशेष दशाओं में, कोई अन्य माल

                                                                                                                                                                                   

53. रेटों या प्रभारों से छूट और उनका परिहार-बोर्ड विशेष दशाओं में, और उन कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, किन्हीं मालों या जलयानों या मालों या जलयानों के किसी वर्ग को इस अधिनियम के अधीन प्रवृत्त किसी मापमान के अनुसार उन पर उद्ग्रहणीय किसी रेट या किसी प्रभार के संदाय से पूर्णतः या अंशतः छूट दे सकेगा या इस प्रकार उद्गृहीत ऐसे रेटों या प्रभारों का पूर्णतः या उसके किसी भाग का, परिहार कर सकेगा  

54. रेटों को उपान्तरित या रद्द करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) जब भी केन्द्रीय सरकार लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझे तब वह कारणों के कथन सहित लिखित आदेश द्वारा [किसी प्राधिकरण को] यह निदेश दे सकेगी कि वह प्रवृत्त मापमानों में से किसी मापमान का, ऐसी अवधि के भीतर, जैसी आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, रद्द कर दे या उपांतरित कर दे  

(2) 3[यदि प्राधिकरण उपधारा (1) के अधीन निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है या उपेक्षा करता है] तो केन्द्रीय सरकार ऐसे मापमानों में से किसी को रद्द कर सकेगी या उसमें ऐसे उपान्तरण कर सकेगी जैसे वह ठीक समझे:

परन्तु किसी मापमान को इस प्रकार रद्द करने या उपान्तरित करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार किसी ऐसे आक्षेप या सुझाव पर विचार करेगी जो 1[प्राधिकरण] द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि के दौरान लाए जाएं  

(3) जब कोई मापमान इस धारा के अनुसरण में रद्द या उपान्तरित कर दिया जाए तब ऐसा रद्दकरण या उपान्तरण केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और तदुपरि वह तदनुसार प्रभावी होगा  

55. प्रभाराधिक्यों का प्रतिदाय-कोई व्यक्ति तब तक बोर्ड द्वारा किए गए किसी प्रभाराधिक्य के प्रतिदाय का हकदार नहीं होगा जब तक प्रतिदाय के लिए उसका दावा, या तो उसके द्वारा या उसकी ओर से, संदाय की तारीख से छह मास के भीतर, सब सुसंगत दस्तावेजों से सम्यक्तया समर्पित रूप में पेश नहीं कर दिया जाता:

परन्तु बोर्ड अपनी ओर से ऐसे प्रभाराधिक्यों का परिहार कर सकेगा जो किसी समय उसके बिलों में प्रभारित किए गए हों  

56. कम उद्गृहीत या गलती से प्रतिदत्त प्रभारों के संदाय की सूचना-(1) जब किसी बोर्ड का यह समाधान हो जाए कि इस अध्याय के अधीन उद्ग्रहणीय कोई प्रभार कम उद्गृहीत किया गया है या गलती से वापस कर दिया गया है तो वह उस व्यक्ति को जो ऐसे प्रभार का संदाय करने के लिए दायी है या जिसे गलती से प्रतिदाय कर दिया गया है, उससे यह हेतुक दर्शित करने की अपेक्षा करते हुए कि उसे सूचना में विनिर्दिष्ट रकम का संदाय क्यों नहीं करना चाहिए, एक सूचना जारी करेगा:

परन्तु

() जब प्रभार कम उद्गृहीत किया गया हो तब प्रभार के संदाय की तारीख से

() जब प्रभार गलती से वापस कर दिया गया हो तब प्रतिदाय की तारीख से,

दो वर्ष के पश्चात् कोई ऐसी सूचना जारी नहीं की जाएगी  

(2) बोर्ड उस अभ्यावेदन पर जो उस व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे उपधारा (1) के अधीन सूचना जारी की गई थी, विचार कर लेने के पश्चात् वह रकम अवधारित करेगा जो ऐसे व्यक्ति से शोध्य है और तदुपरि ऐसा व्यक्ति इस प्रकार अवधारित रकम का संदाय करेगा  

57. मंजूरी के बिना रेटों का [प्राधिकरण] द्वारा पट्टे पर दिया जाना-1[प्राधिकरण] रेटों का उद्ग्रहण करने की इस अधिनियम के अधीन उसमें निहित किसी शक्ति को केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना तो पट्टे पर दे सकेगा, ठेके पर दे सकेगा, विक्रय कर सकेगा और अन्य संक्रांत कर सकेगा  

58. मालों पर रेट के संदाय के लिए समय-उतारे जाने वाले माल की बाबत रेट माल की उतराई होते ही देय होंगे और बोर्ड के परिसरों से हटाए जाने वाले या निर्यात के लिए पोत परिवहनित किए जाने वाले, या यानान्तरित किए जाने वाले माल की बाबत रेट माल को इस प्रकार हटाने या पोत परिवहनित करने या यानान्तरित करने से पूर्व देय होंगे  

59. रेटों के लिए बोर्ड का धारणाधिकार-(1) [इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीयट सब रेटों की रकमों के लिए और ऐसे किन्हीं भवनों, कुर्सियों (प्लिन्थों), भंडारण क्षेत्रों, या अन्य परिसरों के लिए, जिन पर या जिनमें कोई माल रखे गए हों, बोर्ड को देय भाटक के लिए बोर्ड का ऐसे माल पर धारणाधिकार होगा, और वह उसे अभिगृहीत कर सकेगा तथा उसे तब तक निरुद्ध रख सकेगा जब तक ऐसे रेट और भाटक पूर्णतः संदत्त नहीं कर दिए जाते  

(2) ऐसे धारणाधिकार को सब अन्य धारणाधिकारों और दावों पर, सिवाय साधारण और पोत के स्वामी के उक्त माल पर उस धारणाधिकार के जो तब माल भाड़े और अन्य प्रभारों के लिए हो जब ऐसा धारणाधिकार विद्यमान है तथा धारा 60 की उपधारा (1) में उपबंधित रीति में परिरक्षित रखा गया है, तथा सिवाय उस धन के जो [सीमाशुल्क से सम्बन्धित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, किन्तु शास्ति या जुर्माने से भिन्न रूप में], केन्द्रीय सरकार को देय है, पूर्विकता दी जाएगी  

60. माल भाड़ों और अन्य प्रभारों के लिए पोत के स्वामी का धारणाधिकार-(1) यदि किसी जलयान का मास्टर या स्वामी या उसका अभिकर्ता, बोर्ड के या उसके अधिभोगाधीन किसी डाक, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी, बर्थ, मूरिंग या पोत-घाट पर ऐसे जलयान से किन्हीं मालों का उतारते समय या उससे पूर्व बोर्ड को लिखित में सूचना देता है कि ऐसे माल पोत के स्वामी को देय माल भाड़े या अन्य प्रभारों के लिए उतनी रकम के लिए, जितनी ऐसी सूचना में उल्लिखित की जाए, धारणाधिकार के अधीन रहते  हैं तो ऐसे माल उतनी रकम तक ऐसे धारणाधिकार के दायित्वाधीन बने रहेंगे  

(2) बोर्ड को अभिरक्षाधीन कोई माल तब तक स्वामी की जोखिम और व्यय पर रहेगा जब तक ऐसा धारणाधिकार इसमें इसके पश्चात् उल्लिखित रूप में निष्पादित नहीं कर दिया जाए; तथा गोदाम भाटक या भंडारकरण भाटक ऐसे माल के हकदार पक्षकार द्वारा उस अवधि के लिए दिया जाएगा जिसके दौरान उस माल को इस प्रकार से रखा जाए  

(3) बोर्ड, किसी ऐसे अधिकारी के समक्ष, जो उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किया जाए, ऐसे दस्तावेज पेश किए जाने पर जैसे ऐसे धारणाधिकार की रकम के लिए रसीद के रूप में, या उससे निर्मुक्ति के रूप में तात्पर्यित है, जो दस्तावेज उस व्यक्ति द्वारा निष्पादित किया गया है जिसके द्वारा या जिसकी ओर से ऐसी सूचना दी गई है, ऐसे माल के ऐसे धारणाधिकार को ध्यान में लाए बिना हटाए जाने की अनुज्ञा दे सकेगा परन्तु यह तब जब बोर्ड ने ऐसे दस्तावेज की प्रमाणिकता की बाबत समुचित ध्यान दिया हो  

61. यदि रेट या भाटक संदाय नहीं किए जाते या माल भाड़े का धारणाधिकार उन्मोचित नहीं किया जाता तो दो मास के पश्चात् माल का विक्रय-(1) बोर्ड, किसी माल के उसकी अभिरक्षा में आने के समय से दो मास के पश्चात्, अथवा, जीव-जन्तुओं और विनश्वर या परिसंकटमय माल की दशा में, जीव-जन्तुओं या मालों की उतराई के पश्चात् चौबीस घंटे से अन्यून उतनी लघुतर अवधि की समाप्ति के पश्चात्, जो बोर्ड ठीक समझे, ऐसे माल को या उसके उतने भाग को, जितना बोर्ड की राय में आवश्यक हो,-

() यदि ऐसे माल की बाबत बोर्ड को देय कोई रेट संदत्त नहीं किया गया है; अथवा 

() यदि किसी ऐसे स्थान की बाबत जिस पर या जिसमें ऐसे माल का भंडार किया गया हो, बोर्ड को देय कोई भाटक संदत्त नहीं किया गया है, अथवा

() माल भाड़े या अन्य प्रभारों के लिए किसी पोत स्वामी का धारणाधिकार, जिसकी सूचना दी गई हो, उन्मोचित नहीं किया गया है और माल भाड़े या अन्य प्रभारों के लिए धारणाधिकार करने वाले व्यक्ति यदि बोर्ड को उनके विक्रय के लिए आवेदन करता है, लोक नीलाम द्वारा,

 [या ऐसे मामलों में जिनमें बोर्ड ऐसा करना आवश्यक समझता है, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे, संविदा या प्राइवेट करार द्वारा या किसी अन्य रीति में] विक्रय कर सकेगा

                (2) बोर्ड ऐसा विक्रय करने से पूर्व, [पत्तन पत्र में प्रकाशित करके या, जहां कोई पत्तन पत्र हो वहां राजपत्र में], तथा मुख्य स्थानीय दैनिक समाचारपत्रों में से कम से कम एक समाचारपत्र में भी, प्रकाशित करके विक्रय की दस दिन की सूचना देगा:

                परन्तु जीव-जन्तुओं और विनश्वर या परिसंकटमय मालों की दशा में बोर्ड ऐसी लघुतर सूचना और ऐसी रीति में दे सकेगा जैसी बोर्ड की राय में मामले की अत्यावश्यकता को देखते हुए ठीक हो   

                (3) यदि माल के स्वामी का पता माल सूची में या किन्हीं ऐसे दस्तावेजों में, जो बोर्ड के हाथ में आए हों, वर्णित है या अन्यथा ज्ञात है तो ऐसे स्वामी को उसके पते पर पत्र परिदत्त करके, या डाक से भेज कर भी, सूचना दी जाएगी, किन्तु ऐसे माल के सद्भावपूर्वक विक्रेता का हक ऐसी सूचना भेजने में चूक करने के आधार पर अविधिमान्य नहीं होगा और ऐसा विक्रेता इस बात के लिए बाध्य होगा कि वह यह पता लगाए कि ऐसी सूचना भेजी गई है या नहीं  

(4) इस धारा में किसी बात के होते हुए भी, आयुध और गोलाबारूद तथा नियंत्रित माल का केन्द्रीय सरकार द्वारा निर्दिष्ट समय पर और रीति में विक्रय किया जा सकेगा  

स्पष्टीकरण-इस धारा में और धारा 62 में, -

() आयुध और गोलाबारूद" का वही अर्थ है जो आयुध अधिनियम, 1959 (1959 का 54) में है

() नियंत्रित माल" से ऐसा माल अभिप्रेत है जिसका व्ययन तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन विनियमित है  

62. बोर्ड की परिसीमा के भीतर बोर्ड के परिसरों से हटाए गए माल का व्ययन-(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, उतराई के पश्चात् बोर्ड की अभिरक्षा में रखा गया कोई माल, यदि उस माल के स्वामी या उसके हकदार किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे माल को बोर्ड की अभिरक्षा में रखने की तारीख से एक मास के भीतर बोर्ड परिसर से नहीं हटाया जाता तो बोर्ड, यदि ऐसे स्वामी या व्यक्ति का पता ज्ञात है तो ऐसे पते पर परिदत्त करके या डाक से भेजकर उस पर एक सूचना की तामील करा सकेगा, या यदि उस पर सूचना की ऐसे तामील नहीं की जा सकती है या यदि उसका पता ज्ञात नहीं है तो सूचना  [पत्तन पत्र में, या, जहां पत्तन पत्र नहीं है वहां राजपत्र में] तथा मुख्य स्थानीय दैनिक समाचारपत्रों में से कम से कम एक समाचारपत्र में भी प्रकाशित कराएगा उक्त सूचना द्वारा ऐसे स्वामी या व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह माल को तुरन्त हटाए और सूचना में यह भी अधिकथित होगा कि सूचना में अनुपालन में व्यतिक्रम होने पर माल लोक नीलाम द्वारा 2[या निविदा, प्राइवेट करार या किसी अन्य रीति मेंविक्रय के दायित्व के अधीन होगा :

परन्तु जहां किसी ऐसे माल की बाबत इस अधिनियम के अधीन देय सब रेट और प्रभार संदत्त कर दिए गए हों, जहां माल को हटाने के लिए कोई सूचना तब तक इस उपधारा के अधीन तामील या प्रकाशित नहीं की जाएगी जब तक उस तारीख से जिसको माल बोर्ड की अभिरक्षा में रखा गया हो, दो मास समाप्त नहीं हो जाते  

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट सूचना उस जलयान के अभिकर्ता पर भी तामील की जा सकेगी जिससे ऐसा माल उतारा गया है  

(3) यदि ऐसा स्वामी या व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन उस पर तामील की गई या प्रकाशित की गई सूचना में की गई अपेक्षा का अनुपालन नहीं करता तो बोर्ड, उस तारीख से, जिसको ऐसा माल उसकी अभिरक्षा में रखा गया था, दो मास की समाप्ति के पश्चात् किसी भी समय, माल को लोक नीलाम द्वारा 2[या ऐसे मामलों में जिनमें बोर्ड जैसा करना ठीक समझे ऐसे कारणों में जो लेखबद्ध किए जाएंगे निविदा, प्राइवेट करार या किसी अन्य रीति में], धारा 61 की उपधारा (2) में, विनिर्दिष्ट रीति में विक्रय की सूचना देने के पश्चात्, विक्रय कर सकेगा  

(4) उपधारा (1) या (3) में किसी बात के होते हुए भी, -

() बोर्ड, जीव-जन्तुओं और विनश्वर या परिसंकटमय माल की दशा में, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट एक मास या दो मास की अवधि के समाप्त होने पर भी ऐसे माल के हटाने की सूचना दे सकता है या विक्रय को ऐसी लघुतर अवधि की सूचना और ऐसी रीति में दे सकता है जो बोर्ड की राय में माल की अत्यावश्यकता को देखते हुए अपेक्षित हो;

() आयुध और गोलाबारुद, तथा नियंत्रित माल धारा 61 की उपधारा (4) के अनुसार विक्रय किया जा सकेगा   

(5) केन्द्रीय सरकार यदि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक समझती है तो वह किन्हीं मालों या मालों के वर्गों को, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस धारा के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी  

63. विक्रय आगमों का उपयोजन-(1) धारा 61 या 62 के अधीन प्रत्येक विक्रय आगम निम्नलिखित क्रम में उपयोजित किए जाएंगे-

() विक्रय के व्ययों का संदाय करने के लिए

() बोर्ड के धारणाधिकार की पूर्विकता से धारा 59 की उपधारा (2) में वर्णित अपना स्वरूप धारणाधिकारों और दावों का उनकी पूर्विकताओं के अनुसार संदाय करने के लिए

() रेटों और माल को उतारने, हटाने, भण्डारकरण करने या भाण्डागारित करने के व्ययों का तथा उनकी बाबत बोर्ड को देय सभी अन्य प्रभारों का संदाय करने के लिए, [जिसके अन्तर्गत माल की उतराई से चार मास तक की अवधि तक ऐसे माल की बाबत संदेय डेमरेज (दांडिक डेमरेज से भिन्न) भी है]

1[() तत्समय प्रवृत्त सीमाशुल्क संबंधी किसी विधि के अधीन केन्द्रीय सरकार को देय किसी शास्ति या जुर्माने का संदाय करने के लिए

() बोर्ड को देय किसी अन्य राशि का संदाय करने के लिए ]

 [(2) यदि कोई आधिक्य है तो उसका संदाय माल के आयातकर्ता, स्वामी या परेषिती को या उसके अभिकर्ता को माल के विक्रय की तारीख से छह मास के भीतर, उसके द्वारा इस निमित्त आवेदन किए जाने पर कर दिया जाएगा

(3) जहां उपधारा (2) के अधीन कोई आवेदन नहीं किया जाए वहां आधिक्य बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोजित किया जाएगा

64. जलयान का करस्थम् करके रेटों और प्रभारों की वसूली-(1) किसी ऐसे जलयान का मास्टर जिसकी बाबत इस अधिनियम के अधीन या उसके अनुसरण में बनाए गए विनियमों और आदेशों के अधीन, कोई रेट या शास्ति देय है, यदि मांग किए जाने पर उसका या उसके किसी भाग का संदाय करने से इंकार या उपेक्षा करता है तो बोर्ड ऐसे जलयान और उसके नौकोपकरण, पोत-सज्जा और फर्नीचर का करस्थम् कर सकेगा तथा उन्हें बन्दी बना सकेगा तथा उसे तब तक परिरुद्ध रखा सकेगा जब तक बोर्ड को देय रकम, ऐसी और रकम सहित संदत्त नहीं कर दी जाती जो उस अवधि के दौरान उद्भूत हो जिसके दौरान जलयान करस्थम् या बंदी रखा गया है  

(2)  यदि उक्त रेट या शास्तियों, अथवा करस्थम् करने या बंदी रखने, या उसे रखने के खर्चो अथवा उसका कोई भाग ऐसे करस्थम् या बंदी रखे जाने के पश्चात् पांच दिन की अवधि के लिए असंदत्त रहा आता है तो बोर्ड ऐसे करस्थम् किए गए या बंदी किए गए जलयान का या अन्य वस्तु का विक्रय करा सकेगा तथा ऐसे रेटों या शास्तियों और खर्चों को, जिसके अन्तर्गत विक्रय के खर्चे का असंदत्त भाग भी है, ऐसे विक्रय के आगमों में से पूरा करेगा और आधिक्य को (यदि कोई हो) मांग किए जाने पर ऐसे जलयान के मास्टर की सौंप देगा

 [65. रेटों के संदाय और नुकसानी आदि की वसूली के पश्चात् ही पत्तन-निकासी मंजूर करना-यदि बोर्ड केन्द्रीय सरकार के ऐसे अधिकारी को, जिसका कर्तव्य पत्तन पर किसी जलयान को पत्तन-निकासी मंजूर करना है, यह अधिकथित करते हुए सूचना देता है कि

(i) किसी जलयान के स्वामी या मास्टर द्वारा उस जलयान पर या उसकी बाबत या ऐसे जलयान के फलक पर, किसी माल पर या उसकी बाबत ऐसी रकम, जैसी सूचना में विनिर्दिष्ट हो, इस अधिनियम या इसके अनुसरण में बनाए गए किन्हीं विनियमों या आदेशों के अधीन देय हैं, अथवा 

(ii) उस सूचना में विनिर्दिष्ट कोई रकम धारा 116 में निर्दिष्ट किसी नुकसान की बाबत देय है और ऐसी रकम तथा उसकी वसूली के लिए कार्रवाइयों के खर्चे तथा किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष इस धारा के अधीन उनकी वसूली के लिए किन्हीं कार्रवाइयों के खर्चे वसूल नहीं किए गए हैं,

तो ऐसा अधिकारी तब तक ऐसी पत्तन-निकासी की मंजूरी नहीं देगा जब तक इस प्रकार प्रभार्य या देय रकम संदत्त नहीं कर दी जाती या नुकसानी और खर्चे वसूल नहीं कर लिए जाते ]

अध्याय 7

बोर्ड की उधार लेने की शक्ति

66. उधार लेने की शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, और राजपत्र में सम्यक् अधिसूचना के पश्चात्, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उधार ले सकेगा:

                परन्तु ऐसी कोई अधिसूचना आवश्यक नहीं होगी यदि उधार केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार से लिया जाता है

(2) बोर्ड अपने द्वारा पुरोधृत पत्तन न्यास प्रतिभूतियों पर खुले बाजार से उधार ले सकेगा या उधार केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार से अभिप्राप्त किए जा सकेंगे  

(3) उधार के निबन्धन केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन के अधीन होंगे  

67. पत्तन न्यास प्रतिभूतियां-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से वह प्ररूप विहित करेगा जिसमें पत्तन न्यास प्रतिभूति उसके द्वारा पुरोधृत की जाएगी और वह पत्तन जिसमें तथा वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, पत्तन न्यास प्रतिभूति अन्तरित की जाएगी, विहित करेगा  

(2) किसी भी रूप में किसी पत्तन प्रतिभूति का धारक ऐसे निबन्धनों पर, जैसे बोर्ड समय-समय पर अवधारित करे, उनके बदले में विनियमों द्वारा विहित किसी अन्य रूप में कोई पत्तन न्यास प्रतिभूति अधिप्राप्त कर सकेगा  

(3) पत्तन न्यास प्रतिभूतियों द्वारा, प्रतिभूत धनों की बाबत वाद लाने का अधिकार, तत्समय उनके धारकों द्वारा पूर्विकता की तारीख की बाबत अधिमानता के बिना, प्रयोक्तव्य होगा  

68. प्रतिभूतियों के संयुक्त या पृथक्-पृथक् पाने वाले उत्तरजीवियों का अधिकार-(1) भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 45 में किसी बात के होते हुए भी, -

() जब कोई पत्तन न्यास प्रतिभूति दो या अधिक व्यक्तियों को संयुक्ततः संदेय है और वे मर जाते हैं या उनमें से कोई मर जाता है तो पत्तन न्यास प्रतिभूति उन व्यक्तियों के उत्तरजीवी या उत्तरजीवियों को संदेय होगी, और 

() जब कोई ऐसी प्रतिभूति दो या अधिक व्यक्तियों को पृथक्-पृथक् संदेय है और वे मर जाते हैं या उनमें से कोई मर जाता है तो प्रतिभूति उन व्यक्तियों के उत्तरजीवी या उत्तरजीवियों को, या मृतक के प्रतिनिधियों को अथवा उनमें से किसी को संदेय होगी  

(2) यह धारा लागू होगी चाहे ऐसी मृत्यु नियत दिन के पूर्व हो जाती है या उसके पश्चात् होती है  

(3) इसमें की कोई बात किसी ऐेसे दावे पर प्रभाव नहीं डालेगी जो मृतक व्यक्ति के किसी प्रतिनिधि को, किसी ऐसी प्रतिभूति की बाबत या उसके अधीन, जिसे उपधारा (1) लागू होती है, उत्तरजीवी या उत्तरजीवियों के विरुद्ध हो  

(4) इस धारा के प्रयोजनों के लिए कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1912 (1912 का 1) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन चाहे भारत में या भारत के बाहर निगमित या निगमित समझे गए निकाय के बारे में तब जब वह विघटित हो जाए, यह समझा जाएगा कि वह समाप्त हो गया है  

69. एक या दो या दो से अधिक संयुक्त धारकों की रसीदें देने की शक्ति-जब दो या अधिक व्यक्ति किसी पत्तन न्यास प्रतिभूति के संयुक्त धारक हों तब उन व्यक्तियों में से कोई एक ऐसी प्रतिभूति की बाबत देय किसी ब्याज के लिए प्रभावशील रसीद तब तक दे सकता है जब तक ऐसे व्यक्तियों में से अन्य ने बोर्ड को इसके प्रतिकूल सूचना नहीं दी हो  

70. प्रतिभूति पर पृष्ठांकन करना-परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) की धारा 15 में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसी पत्तन न्यास प्रतिभूति का जो पृष्ठांकन द्वारा अन्तरणीय है, कोई पृष्ठांकन तब तक विधिमान्य नहीं होगा जब तक ऐसा पृष्ठांकन प्रतिभूति के पृष्ठ भाग पर ही उसके धारक के हस्ताक्षर द्वारा अन्तरलिखित नहीं किया जाए  

71. प्रतिभूति के पृष्ठांकनकर्ता का उसकी रकम के लिए दायी होना-परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का 26) में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति केवल इस आधार पर कि उसने पत्तन न्यास प्रतिभूति को पृष्ठांकित किया है, प्रतिभूति के अधीन मूल के रूप में या ब्याज के रूप में देय किसी धन के संदाय के लिए दायी नहीं होगा  

72. प्रतिभूतियों पर हस्ताक्षर का छापा-(1) पत्तन न्यास प्रतिभूतियों पर बोर्ड की ओर से हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति का हस्ताक्षर ऐसी प्रतिभूति पर मुद्रित, उत्कीर्ण या शिलामुद्रित किया जा सकता है या ऐसी अन्य यांत्रिक प्रक्रिया से, जैसी बोर्ड निर्दिष्ट करे छापा जा सकता है   

                (2) इस प्रकार मुद्रित, उत्कीर्ण, शिलामुद्रित या अन्यथा छापा गया हस्ताक्षर वैसे ही विधिमान्य होगा मानो वह इस प्रकार प्राधिकृत व्यक्ति के समुचित हस्तलेख से अन्तरलिखित किया गया था  

73. प्रतिभूतियों की दूसरी प्रति जारी करना-(1) जब किसी पत्तन न्यास प्रतिभूति की बाबत यह अभिकथित किया गया हो कि वह खो गई है, चुरा ली गई है या पूर्णतया या भागतः नष्ट हो गई है और कोई व्यक्ति ऐसा दावा करता है कि यदि वह खोई नहीं होती या चुराई नहीं जाती या नष्ट नहीं हो जाती, तो वह उसे देय होती, तो वह व्यक्ति बोर्ड को आवेदन करके और खोने या चुराए जाने या नष्ट हो जाने का और दावे के न्यायोचित्य का बोर्ड के समाधानप्रद रूप से सबूत पेश करने के पश्चात् और उतनी फीस का संदाय करने पर, जितनी विनियमों द्वारा विहित की जाए, बोर्ड से

() उस प्रतिभूति की बाबत, जिसके बारे में यह कहा गया है कि वह खो गई है, चुरा ली गई है या नष्ट हो गई है, तब तक के लिए जब तक प्रतिभूति की दूसरी प्रति जारी की जाए ब्याज के संदाय के लिए; और

() आवेदक को देय प्रतिभूति की दूसरी प्रति जारी करने के लिए आदेश अभिप्राप्त कर सकेगा  

(2) उपधारा (1) के अधीन आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक प्रतिभूति के खोने या चुराए जाने या नष्ट होने की विहित अधिसूचना बोर्ड द्वारा जारी नहीं कर दी जाती  

(3) उपधारा (1) के अधीन जिन प्रतिभूतियों की बाबत आदेश पारित किया जाए उनकी एक सूची ऐसे रीति में प्रकाशित की जाएगी, जैसी बोर्ड विहित करे

(4) कोई ऐसी प्रतिभूति, जिसकी बाबत यह अभिकथित है कि वह पूर्णतः खो गई या चोरी हो गई या नष्ट हो गई है, यदि बोर्ड के दायित्व के इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन उन्मोचित हो जाने के पूर्व मिल जाती तो इस धारा के अधीन उसके संबंध में पारित कोई आदेश रद्द कर दिया जाएगा

74. संपरिवर्तित, आदि प्रतिभूतियां जारी करना-(1) बोर्ड, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जैसी वह विहित करे, ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो बोर्ड पुरोधृत पत्तन न्यास प्रतिभूति का हकदार होने का दावा करता है, आवेदन किए जाने पर दावे के न्यायोचित के बारे में समाधान हो जाने पर, और प्रतिभूति या प्रतिभूतियां परिदत्त किए जाने पर, तथा उन्हें ऐसी रीति में ऐसी फीस का, यदि कोई हो, जैसी विहित की जाए, संदाय किए जाने पर, प्रतिभूति या प्रतिभूतियों को संपरिवर्तित, समेकित या उपविभाजित कर सकेगा, तथा आवेदक को तद्नुसार नई प्रतिभूति या प्रतिभूतियां जारी कर सकेगा  

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट संपरिवर्तन, समेकन या उपविभाजन उसी वर्ग या विभिन्न वर्गों की या उसी उधार की या विभिन्न उधारों की, प्रतिभूति या प्रतिभूतियों में किया जा सकेगा  

 [74. कतिपय दशाओं में पत्तन न्यास प्रतिभूतियों के धारक के रूप में मान्यता-उस व्यक्ति की बाबत, जिसको धारा 73 के अधीन प्रतिभूति की दूसरी प्रति जारी की गई है या धारा 74 के अधीन नई प्रतिभूति या प्रतिभूतियां जारी की गई हैं, धारा 74 के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि उसे बोर्ड ने प्रतिभूति या प्रतिभूतियों के धारक के रूप में मान्यता दी है, और किसी व्यक्ति को इस प्रकार जारी की गई प्रतिभूति की दूसरी प्रति या नई प्रतिभूति के बारे में यह समझा जाएगा कि उससे बोर्ड और ऐसे व्यक्ति तथा उसके माध्यम से तत्पश्चात् हक प्राप्त करने वाले सब व्यक्तियों के बीच एक नई संविदा गठित हो गई है  

74. धारा 74 के अधीन बोर्ड द्वारा मान्यता का विधिक प्रभाव-पत्तन न्यास प्रतिभूति या प्रतिभूतियों के धारक के रूप में किसी व्यक्ति को बोर्ड द्वारा दी गई मान्यता किसी न्यायालय द्वारा वहां तक प्रश्नगत नहीं होगी, जहां तक वह बोर्ड और उसके द्वारा पत्तन न्यास प्रतिभूति या प्रतिभूतियों के रूप में मान्यताप्राप्त व्यक्ति के अथवा किसी ऐसे व्यक्ति के, जो ऐसी प्रतिभूति या प्रतिभूतियों में हित का दावा करता है, संबंधों पर प्रभाव डालती है, और बोर्ड द्वारा किसी व्यक्ति की ऐसी मान्यता उस व्यक्ति का प्रतिभूति या प्रतिभूतियों पर, उनके अधिकारवान स्वामी के लेखा मद्दे विद्यमान या प्राप्त किए गए धन के लिए उक्त स्वामी के प्रति व्यक्तिगत दायित्व के अधीन रहते हुए, हक प्रदान करेगा ]

75. कतिपय दशाओं में उन्मोचन- [परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36)] में किसी बात के होते हुए भी-

(i) किसी पत्तन न्यास प्रतिभूति पर देय रकम का उस तारीख को या उसके पश्चात्, जिसको ऐसा संदाय देय हो जाए, संदाय किए जाने पर, अथवा 

(ii) जब प्रतिभूति की दूसरी प्रति धारा 73 के अधीन जारी कर दी जाए, अथवा 

(iii) जब परिवर्तन, समेकन या उपविभाजन होने पर धारा 74 के अधीन नई प्रतिभूति या प्रतिभूतियां जारी की जाएं या की जा चुकी हों,

तब बोर्ड इस प्रकार संदत्त प्रतिभूति या प्रतिभूतियों की बाबत, या जिन प्रतिभूतियों के बदले में दूसरी प्रति या नई प्रतिभूति या प्रतिभूतियां जारी की गई हैं, उनकी बाबत, सब दायित्वों से निम्नलिखित अवधि बीत जाने के पश्चात् उन्मोचित हो जाएगा, अर्थात्: -

                                () संदाय की दशा में जिस तारीख से संदाय शोध्य था, उससे छह वर्ष बीत जाने के पश्चात्

() प्रतिभूति की दूसरी प्रति की दशा में, धारा 73 की उपधारा (3) के अधीन उस सूची के प्रकाशन की तारीख से, जिस सूची में प्रतिभूति का प्रथम बार उल्लेख किया जाए या उस तारीख से, जिसको मूल प्रतिभूति पर ब्याज का अन्तिम बार संदाय किया गया हो, दोनों में से जो भी तारीख पश्चात्वर्ती हो, उससे छह वर्ष बीत जाने के पश्चात्

() संपरिवर्तन, समेकन या उपविभाजन होने पर नई प्रतिभूति जारी किए जाने की दशा में, उसके जारी किए जाने की तारीख से छह वर्ष बीत जाने के पश्चात्  

76. बोर्ड की विनियम बनाने की शक्ति-बोर्ड निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी विषय के लिए उपबन्ध करने के लिए समय-समय पर विनियम बना सकेगा, अर्थात्: -

() वह व्यक्ति, यदि कोई हो, जो बोर्ड द्वारा पुरोधृत पत्तन न्यास प्रतिभूतियों पर हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत होगा, तथा उक्त प्रतिभूतियों पर निगम मुद्रा अंकित करने और उनकी बाबत दस्तावेजों को सत्यापित करने का ढंग

() वह रीति, जिसमें ऐसी पत्तन न्यास प्रतिभूतियों की बाबत ब्याज का संदाय किया जाएगा, संदाय अभिलिखित किया जाएगा और अभिस्वीकृत किया जाएगा

() वे परिस्थितियां और रीति, जिनमें ऐसी पत्तन न्यास प्रतिभूतियां नवीकृत की जा सकेंगी

() वे परिस्थितियां, जिनमें ऐसी प्रतिभूतियों का, उन पर और आगे ब्याज के संदाय का दावा किए जाने के पूर्व, नवीकरण किया जाना चाहिए;

() वह प्ररूप, जिसमें प्रतिभूतियों को नवीकरण, संपरिवर्तन, समेकन या उपविभाजन के लिए दिए जाने पर उनके लिए रसीद दी जाएगी;

() वे सबूत, जो प्रतिभूतियों की दूसरी प्रतियों के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को पेश करने होंगे

() धारा 73 की उपधारा (2) में उल्लिखित अधिसूचना का प्ररूप और उसके प्रकाशन की रीति तथा उस धारा की उपधारा (3) में उल्लिखित सूची के प्रकाशन की रीति

() ऐसी पत्तन न्यास प्रतिभूतियों पर, जिनकी बाबत यह अभिकथित है कि वे पूर्णतः या भागतः खो गई हैं, चुरा ली गई हैं या नष्ट हो गई हैं, ब्याज के संदाय के लिए, या पत्तन न्यास प्रतिभूतियों की दूसरी प्रति जारी करने के लिए, आवेदन करने वाले व्यक्ति द्वारा दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की प्रकृति और रकम

() वे शर्तें, जिनके अधीन रहते हुए पत्तन न्यास प्रतिभूतियां संपरिवर्तित या समेकित या उपविभाजित की जा सकेंगी

() वे रकमें, जिनके लिए स्टाक प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा

() दूसरी, नवीकृत, संपरिवर्तित, समेकित या उपविभाजित प्रतिभूतियां जारी करने से संबंधित साधारणतः सभी विषय

() वे फीसें, जो प्रतिभूतियों की दूसरी प्रति जारी करने और पत्तन न्यास प्रतिभूतियों के नवीकरण, समेकन और उपविभाजन की बाबत संदेय होंगी

() वे फीसें, जो स्टाक प्रमाणपत्र जारी करने की बाबत उद्ग्रहणीय होंगी  

77. वह स्थान जहां से और वह करेंसी जिसमें बोर्ड द्वारा उधार लिए जाएंगे-बोर्ड इस अधिनियम के अधीन संविदाकृत सभी उधार भारत में लेगा, और तब के सिवाय जब केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अन्यथा निदेश करे, भारतीय करेंसी में लेगा  

78. बोर्ड द्वारा लिए गए उधारों के लिए प्रतिभूति-इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा लिए गए सभी उधार निम्नलिखित निम्नलिखित से भिन्न, अर्थात्: -

() बोर्ड में विहित संपत्ति पर, या जो संपत्ति उधार चालू रहने के दौरान बोर्ड में निहित हो जाए उन पर, [किन्तु पर प्रथम प्रभार होंगे, अर्थात्: -

(i) बोर्ड द्वारा

(1) किसी उधार को चुकाने के प्रयोजन के लिए निक्षेप निधि के रूप में पृथक् रखी गई कोई राशि; या 

(2) अपने कर्मचारियों को पेंशन के संदाय के लिए पृथक् रखी गई कोई राशि; अथवा 

(ii) बोर्ड द्वारा स्थापित भविष्य-निधि या पेंशन निधि; और]  

() बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीय रेटों पर  

79. बोर्ड को दिए गए उधारों की बाबत सरकार के उपचार-केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को उन उधारों की बाबत, जो उसने बोर्ड को दिए हों या उन उधारों की बाबत, जो उसने किसी अन्य प्राधिकारी को दिए हों और जिनके प्रतिदाय के लिए बोर्ड विधिकतः दायी है, उस सरकार को वैसे उपचार प्राप्त होंगे, जो बोर्ड द्वारा पुरोधत पत्तन न्यास प्रतिभूतियों के धारकों को प्राप्त हैं, और ऐसी सरकार की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि उसे ऐसे उधारों की बाबत ऐसी पत्तन न्यास प्रतिभूतियों के धारकों से भिन्न कोई पूर्विक या अधिक अधिकार प्राप्त हैं :

परन्तु जहां नियत दिन से पूर्व लिए गए किसी ऐसे उधार के निबन्धनों में विनिर्दिष्टतः यह उपबन्धित है कि बोर्ड द्वारा प्रतिसंदाय के विषय में ऐसे उधार को अन्य उधारों से पूर्विकता होगी, तो ऐसे उधार को पूर्विकता दी जाएगी  

80. नियत तारीख से पूर्व उधारों के प्रतिसंदाय की बोर्ड की शक्ति-बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, उन धनों में से, जो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसके हाथ में आए, और जिनका उपयोजन पत्तन न्यास प्रतिभूतियों के अन्य धारकों की प्रतिभूति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना किया जा सकता है, सरकार को ऐसी किसी राशि के प्रतिदाय के लिए उपयोजित कर सकेगा, जो किसी उधार के मूलधन की बाबत उस सरकार को देय रहती हो यद्यपि उसके प्रतिसंदाय के लिए नियत समय पूरा नहीं हुआ है:

परन्तु दस हजार रुपए से कम किसी राशि का ऐसा कोई प्रतिसंदाय नहीं किया जाएगा और यदि ऐसा प्रतिसंदाय किया जाता है, तो प्रत्येक उत्तरवर्ती किस्त में उस ब्याज की रकम इस प्रकार से समायोजित की जाएगी, जिससे कि वह बकाया मूलधन पर देय ब्याज को ठीक-ठीक दर्शाए   

81. निक्षेप निधि की स्थापना-(1) बोर्ड इस अधिनियम के अधीन लिए गए प्रत्येक उधार की बाबत, जो उधार लेने की तारीख से एक वर्ष की समाप्ति पूर्व प्रतिसंदेय नहीं हो, अपनी आय में से प्रत्येक छमाही पर निक्षेप निधि के रूप में उतनी राशि पृथक् रखेगा, जितनी उधार को उतनी अवधि के भीतर, जो किसी भी दशा में, सिवाय तब के जबकि केन्द्रीय सरकार से पूर्व सहमति प्राप्त कर ली गई हो तीस वर्ष से अधिक नहीं होगी, समाप्त कर सकेगा; किन्तु अधिकतम अवधि किसी भी दशा में साठ वर्ष से अधिक नहीं होगी :

परन्तु बोर्ड द्वारा केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार से लिए गए उधारों की दशा में निक्षेप निधि की स्थापना तब ही की जानी चाहिए जब इस आशय का कोई अनुबंध हो  

(2) जहां नियत दिन के पूर्व कोई निक्षेप निधि किसी प्राधिकारी द्वारा लिए गए किसी ऐसे उधार की बाबत, जिसके लिए बोर्ड इस अधिनियम के अधीन दायी है, स्थापित कर दी जाए, वहां ऐसे प्राधिकारी द्वारा इस प्रकार स्थापित निक्षेप निधि बोर्ड द्वारा इस धारा के अधीन स्थापित समझी जाएगी

82. निक्षेप निधि का विनिधान और उपयोजन-(1) बोर्ड द्वारा धारा 81 की उपधारा (1) के अधीन इस प्रकार रखी गई राशि का और उस धारा की उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी निक्षेप के भाग स्वरूप किन्हीं राशियों का विनिधान लोक प्रतिभूतियों में या ऐसी अन्य प्रतिभूतियों में किया जाएगा, जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित की जाए और ऐसी राशियां [बोर्ड द्वारा] इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए न्यास के रूप में धारित होंगी  

(2) बोर्ड किसी निक्षेप निधि में निक्षिप्त राशि को पूर्णतः या भागतः उन धनों के उन्मोचन के लिए उपयोजित कर सकेगा, जिनके प्रतिसंदाय के लिए निधि स्थापित की गई है:

परन्तु यह तब जब वह प्रत्येक वर्ष उतने ब्याज के समतुल्य राशि का, जितनी निक्षेप निधि पर या निक्षेप निधि के इस प्रकार उपयोजित भाग पर अर्जित होती, संदाय करे, और तब तक उसे संचित करता जाए जब तक कि उधार लिया गया सम्पूर्ण धन उन्मोचन नहीं हो जाता  

83. निक्षेप निधि की परीक्षा-(1) किसी उधार के समापन के लिए स्थापित निधि की वार्षिक परीक्षा ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाएगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त किया जाए और इस प्रकार नियुक्त किया गया यह व्यक्ति निश्चित करेगा कि निधि के नाम जमाखाते प्रतिभूतियों का चालू बाजार मूल्य वास्तव में उस रकम के बराबर है या नहीं, जो उस दशा में संचित हो जाती, यदि विनिधान नियमित रूप में किए गए होते और यदि उस पर मूल रूप से प्राक्कलित ब्याज की दर अभिप्राप्त की गई होती

(2) तक के सिवाय जब केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्टतः इस बात की मंजूरी दे कि समायोजन धीरे-धीरे किया जाए, बोर्ड निक्षेप निधि में तुरन्त उतनी रकम का संदाय करेगा, जितनी निधि की वार्षिक परीक्षा करने के लिए उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किए गए व्यक्ति द्वारा कमी के रूप में प्रमाणित की जाए

(3) यदि निक्षेप निधि के जमाखाते नकदी और प्रतिभूतियों का चालू बाजार मूल्य उस रकम से अधिक है, जो उसके जमाखाते होनी चाहिए, तो उपधारा (1) के अधीन नियुक्त व्यक्ति इस आधिक्य की रकम को प्रमाणित करेगा, और बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, - 

() प्रमाणित आधिक्य को पूर्णतः या भागतः वापस ले सकेगा और इस दशा में वे न्यासी, जिनके नामों से वहां निक्षेप निधि धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन विनियोजित की गई है, अपेक्षित चालू बाजार मूल्य की प्रतिभूतियां, या नकदी और अपेक्षित चालू बाजार मूल्य की प्रतिभूतियां या नकदी तुरन्त बोर्ड को अन्तरित करेगा, अर्थात्: -

() निक्षेप निधि में किए जाने वाले धारा 81 के अधीन अपेक्षित, अर्ध-वार्षिक अभिदायों को घटा देगा या बन्द कर देगा; अथवा  

() इन उपायों में से कई उपायों को संयोजित रूप से अपना सकेगा  

84.  अल्पकालिक विनिमयपत्रों पर उधार लेने की बोर्ड की शक्ति-इस अधिनियम की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह स्थानीय प्राधिकारी उधार अधिनियम, 1914 (1914 का 9) के अधीन उधार लेने की बोर्ड की शक्ति पर प्रभाव डालती है

85. अस्थायी उधार या ओवरड्राफ्ट लेने की बोर्ड की शक्ति-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड अस्थायी ओवरड्राफ्ट द्वारा या अपनी आरक्षित निधि में स्वयं धारित प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर अन्यथा, या बैंकों में बोर्ड के नियत निक्षेपों की प्रतिभूतियों पर, धन उधार ले सकेगा:

परन्तु ऐसे अस्थायी ओवरड्राफ्ट या अन्य उधार

() किसी अवसर पर छह मास से दीर्घतर अवधि के लिए चालू रहने वाले नहीं होंगे; और

() यदि किसी वर्ष में किसी अवसर पर ऐसे ओवरड्राफ्टों या अन्य उधारों की रकम [उतनी रकम से, जो केन्द्रीय सकरार इस निमित्त नियत करे अधिक हो जाती है, और विभिन्न बोर्डों के संबंध में विभिन्न रकमें नियत की जा सकेंगीट तो केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं लिए जाएंगे:

                परन्तु यह और कि अस्थायी ओवरड्राफ्टों द्वारा या अन्यथा इस प्रकार उधार लिए गए सब धन इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए व्यय किए जाएंगे    

86. इन्टरनेशनल बैंक फार रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमें] या अन्य विदेशी संस्थाओं से धन उधार लेने की बोर्ड की शक्ति-इस अधिनियम में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जैसे उस सरकार द्वारा अनुमोदित किए जाएं, इंटरनेशलन बैंक फार रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमें] से या भारत के बाहर किसी देश में के किसी अन्य बैंक या संस्था से किसी भी करेंसी या करेन्सियों में इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उधार ले सकेगी; और इस अध्याय के कोई उपबंध किसी ऐसे उधार या उसके संबंध में तब तक लागू नहीं होंगे जब तक उधार के निबंधनों और शर्तों में या केन्द्रीय सरकार द्वारा उनके अनुमोदन में उससे अन्यथा उपबंधित नहीं है

अध्याय 8

राजस्व और व्यय

87. पत्तन का साधारण खाता-बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्राप्त किए गए सब धन और पत्तन तथा पत्तन के पहुंच मार्गों के संरक्षक के रूप में या भारतीय पत्तन अधिनियम की धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन नियत किए गए निकाय के रूप में उसके द्वारा प्राप्त किए गए सब धन, एक निधि में जमा किए जाएंगे, जो पत्तन का साधारण खाता कहलाएगी  

88. साधारण खाते के धन का उपयोजन-धारा 87 के अधीन साधारण खाते में जमा किए गए धन, इस अधिनियम की धारा 89 और भारतीय पत्तन अधिनियम की धारा 36 के अधीन रहते हुए, बोर्ड द्वारा निम्नलिखित का संदाय करने के लिए उपयोजित किए जाएंगे, अर्थात्: -

() बोर्ड द्वारा लिए गए या अभिप्राप्त किए गए उधार की बाबत या जिस उधार के प्रतिसंदाय के लिए सरकार दायी है उसकी बाबत, देय मूलधन की ब्याज और किस्तें, और ऐसे उधार के लिए स्थापित किए गए निक्षेप निधि के संदाय;

() निम्नलिखित को देय वेतन, फीसें, भत्ते, पेंशन, उपदान, अनुकम्पा भत्ते या अन्य धन

(i) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य न्यासी

(ii) बोर्ड के कर्मचारी; और 

(iii) ऐसे कर्मचारियों के उत्तरजीवी नातेदार, यदि कोई हों

() केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा बोर्ड को सौंपे गए किसी अधिकारी की पेंशन और छुट्टी भत्ते मद्धें उस सरकार को देय अभिदाय, यदि कोई हों;

() बोर्ड द्वारा स्थापित किसी भविष्य निधि या कल्याण निधि या विशेष निधि के संचालन और प्रशासन के लिए बोर्ड द्वारा उपगत खर्चे और व्यय, यदि कोई हों

() खंड () में निर्दिष्ट किसी निधि के लिए अभिदाय, यदि कोई हों, जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा सम्यक्तः प्राधिकृत किए जाएं

() कोई प्रभार जिनके लिए बोर्ड धारा 108 और धारा 109 के अधीन दायी हो;  

               

 [() ऐसी राशि जैसी, समय-समय पर, बोर्ड और किसी राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी के बीच ऐसे युक्तियुक्त अभिदाय के रूप में करार पाई जाए जैसे उस पुलिस बल या केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल या किसी अन्य बल के, जिसे राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार या अन्य प्राधिकारी पत्तन के और बोर्ड के डॉकों, भाण्डागारों और अन्य संपत्ति के बचाव के लिए स्थापित और अनुरक्षित करें, निगरानी कृत्यों के संबंध में व्ययों मद्दे बोर्ड द्वारा देय हो;]

() बोर्ड की या उसमें निहित सम्पत्ति की मरम्मतों और अनुरक्षण के खर्चे तथा उन पर सब प्रभार और सब कार्यकरण व्यय;

() धारा 35 में विनिर्दिष्ट किसी नए संकर्म या साधित्र को निष्पादित और उसे उपलब्ध कराने का खर्च जो बोर्ड राजस्व पर प्रभारित करने के लिए अवधारित करे;

() धारा 36 के अधीन उपगत कोई व्यय

() कोई अन्य व्यय जो बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए साधाणतः उपगत किया जाए

() कोई अन्य प्रभार जो बोर्ड के आवेदन पर [या अन्यथा] केन्द्रीय सरकार द्वारा विशेष रूप से मंजूर किया जाए, या जिसके लिए बोर्ड विधिक्तः दायी हो  

(2) [ऐसे साधारण या विशेष निदेशों के अधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार, देश में महापत्तनों के अनुरक्षण या विकास के प्रयोजन के लिए या साधारणतया पोत परिवहन और नौपरिवहन के विकास के लिए इस निमित्त दे, बोर्ड के नाम जमा वे सभी धन] जिन्हें उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रीति में या प्रयोजनों के लिए विलम्ब उपयोजित नहीं किया जा सकता

() भारतीय स्टेट बैंक में या [तत्स्थानी नए बैंक या बैंकों] में, या ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर, विनिर्दिष्ट किए जाएं या की जाए जमा किए जाएंगे; अथवा 

() लोक प्रतिभूतियों में या ऐसी अन्य प्रतिभूतियों में, जैसी केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुमोदित करे, विनियोजित किए जाएंगे तथा उक्त प्रतिभूतियां बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए न्यास के रूप में धारित होंगी; [अथवा

 [() किसी अन्य पत्तन के बोर्ड को उस पत्तन के विकास के लिए उधार के रूप में दिए जाएंगे;] 

 [() धारा 42 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी ठहराव में किसी रीति में विनिधान किए जाएंगे

() किसी पत्तन के, जिसके अंतर्गत महापत्तन से भिन्न कोई पत्तन भी है, विकास या प्रबंध में, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएं, किसी रीति में विनिधान किए जाएंगे ]     

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, तत्स्थानी नया बैंक" से बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) या बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) में यथापरिभाषित तत्स्थानी नया बैंक अभिप्रेत है  

6[(3) केन्द्रीय सरकार द्वारा उपधारा (2) के अधीन दिए गए प्रत्येक निदेश का बोर्ड द्वारा अनुपालन किया जाएगा और वह किसी भी न्यायालय में किसी भी आधार पर प्रश्नगत नहीं होगा

(4) उपधारा (2) के अधीन दिए गए किसी निदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुई या संभाव्य किसी हानि या नुकसान के लिए कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, बोर्ड या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत बोर्ड के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध नहीं होगी ]

                                                                                                                                                                                   

90. आरक्षित निधियों की स्थापना-(1) बोर्ड पत्तन पर विद्यमान सुविधाओं का विस्तार करने के लिए, नई सुविधाएं सृजित करने के प्रयोजन के लिए या राजस्व में किसी अस्थायी कमी या अस्थायी कारणों से व्यय में वृद्धि के लिए उपबंध करने के लिए या प्रतिस्थापन के प्रयोजनों के लिए या अग्नि, तूफान, पोतभंग या अन्य दुर्घटना से होने वाली हानि या नुकसानी से उद्भूत व्यय का वहन करने के लिए या इस अधिनियम के अधीन अपने कार्य के सामान्य संचालन में उद्भूत होने वाले किसी अन्य आपात के लिए उपबंध करने के प्रयोजन के लिए, अपनी आधिक्य आय में से एक या अधिक आरक्षित निधि या निधियों के रूप में उतनी राशि, समय-समय पर, पृथक् रख सकता है, जितनी वह ठीक समझे :

परन्तु किसी ऐसी आरक्षित निधि या निधियों की बाबत प्रतिवर्ष पृथक् रखी गई राशियां, या ऐसी आरक्षित निधि या निधियों का किसी समय सकल योग, उतनी रकमों से अधिक नहीं होगा जितनी समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियत की जाएं

(2) कोई ऐसी आरक्षित निधि या निधियां लोक प्रतिभूतियों में या ऐसी अन्य प्रतिभूतियों में, जैसी केन्द्रीय सरकार इस निमित्त, अनुमोदित करे, विनियोजित की जा सकेंगी  

91. बोर्ड अपने विनिधानों के लिए पत्तन न्यास प्रतिभूतियों को आरक्षित रखने की शक्ति-(1) किसी ऐसे विनिधान के प्रयोजनों के लिए जो बोर्ड इस अधिनियम के अधीन करने के लिए प्राधिकृत है, प्रत्येक बोर्ड के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह किसी ऐसे उधार मद्दे जो केन्द्रीय सरकार की सहमति से दिया गया है, बोर्ड द्वारा पुरोधृत किन्हीं प्रतिभूतियों को आरक्षित और पृथक् रखे परन्तु वह तब जब ऐसी प्रतिभूतियों को इस प्रकार आरक्षित और पृथक् रखने का आशय उधार के पुरोधरण की शर्त के रूप में अधिसूचित किया गया हो  

(2) किसी बोर्ड द्वारा बोर्ड को सीधे ही और उसके नाम में किन्हीं ऐसी प्रतिभूतियों के पुरोधरण से ऐसी प्रतिभूतियां निर्वापित या रद्द नहीं हो जाएंगी किन्तु इस प्रकार पुरोधृत प्रत्येक प्रतिभूति सभी प्रकार से वैसे ही विधिमान्य होगी मानो वह किसी अन्य व्यक्ति को और उसके नाम में पुरोधृत की गई है  

(3) बोर्ड द्वारा पुरोधृत किसी प्रतिभूति का बोर्ड द्वारा क्रय, या बोर्ड को अथवा बोर्ड द्वारा स्थापित निधि के न्यासियों को किसी ऐसी प्रतिभूति का अन्तरण, समनुदेशन या पृष्ठांकन किसी ऐसी प्रतिभूति को निर्वापित या रद्द नहीं करेगा किन्तु वह विधिमान्य होगी और उसी रीति में तथा उसी विस्तार तक परक्राम्य होगी मानो वह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा धारित थी या उसको अन्तरित या समनुदेशित या पृष्ठांकित की गई थी  

92. व्यय की पूंजी के प्रति प्रभारित करने के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी-(1) बोर्ड द्वारा कोई व्यय केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना पूंजी के प्रति प्रभारित नहीं किया जाएगा:

परन्तु बोर्ड ऐसी मंजूरी के बिना उतनी परिसीमा से अनधिक, जितनी विनिर्दिष्ट की जाए व्यय ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिरोपित की जाएं, पूंजी मद्दे प्रभारित कर सकेगा   

(2) उपधारा (1) की किसी भी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि ऐसे मामले में जहां पूंजी मद्दे प्रभारित कोई व्यय जो वस्तुतः उपगत किया गया हो, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त मंजूर किए गए व्यय से अधिक है तब के सिवाय जब ऐसा आधिक्य इस प्रकार मंजूर किए गए व्यय के दस प्रतिशत से अधिक है, केन्द्रीय सरकार की और अतिरिक्त मंजूरी अपेक्षित है

93. वे संकर्म जिनके लिए बोर्ड या केन्द्रीय सरकार की मंजूरी अपेक्षित है-(1) बोर्ड कोई ऐसा नया संकर्म या साधित्र प्रारम्भ नहीं करेगा या उसका उपबंध नहीं करेगा जिसका प्राक्कलित खर्च उस रकम से अधिक हो जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त की जाए और किसी ऐसे नए संकर्म या साधित्र की बाबत तब तक कोई संविदा नहीं करेगा जब तक ऐसे संकर्म या साधित्र को योजना और प्राक्कलन बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाए और उसके द्वारा अनुमोदित कर दिया जाए, तथा उस दशा में जहां किसी ऐसे नए संकर्म या साधित्र का प्राक्कलित खर्च उस रकम से अधिक है जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियत की गई हो, तो योजना और प्राक्कलन पर केन्द्रीय सरकार की मंजूरी ऐसे संकर्म को प्रारंभ करने या ऐसे साधित्र का उपबंध करने के पूर्व अभिप्राप्त की जाएगी  

(2) उपधारा (1) की किसी भी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि ऐसे मामले में जहां पूंजी मद्दे भारित कोई व्यय, जो वस्तुतः उपगत किया गया हो, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त मंजूर किए गए व्यय से अधिक है, तब के सिवाय जब ऐसा आधिक्य इस प्रकार मंजूर किए गए व्यय के दस प्रतिशत से अधिक है, केन्द्रीय सरकार की और अतिरिक्त मंजूरी अपेक्षित है  

94. संकर्मों के निष्पादन के बारे में अध्यक्ष की शक्तियां-धारा 93 में किसी बात के होते हुए भी अध्यक्ष किसी ऐसे संकर्मों के निष्पादन का निदेश दे सकेगा जिसका खर्च उस अधिकतम सीमा से अधिक नहीं हो जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियत की जाए और ऐसे संकर्म के निष्पादन के लिए संविदाएं कर सकेगा किन्तु ऐसे प्रत्येक मामले में अध्यक्ष दिए गए ऐसे किन्हीं निदेशों या की गई ऐसी किन्हीं संविदाओं की रिपोर्ट यथासंभव शीघ्रता से बोर्ड को देगा  

95. दावों को प्रशमित करने या उनके संबंध में समझौता करने की बोर्ड की शक्ति-बोर्ड उसके द्वारा या उसके विरुद्ध या उसके विरुद्ध किसी दावे या मांग या किसी कार्रवाई या संस्थित किए गए वाद को उतनी राशि या अन्य प्रतिकर पर जितना वह पर्याप्त समझे प्रशमित कर सकता है या उसके संबंध में समझौता कर सकता है:

परन्तु इस धारा के अधीन कोई समझौता केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा यदि ऐसे समझौते के कारण बोर्ड को उतनी रकम से अधिक राशि का संदाय करना पड़े जितनी केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए

96. हानियों का अपलिखित किया जाना-(1) जहां बोर्ड की यह राय है कि बोर्ड को देय कोई रकम या इसके द्वारा उपगत कोई हानि, चाहे वह धन की है या सम्पत्ति की, अवसूलीय है, तो बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसी रकम या हानि को अंतिम रूप से अपलिखित किए जाने की मंजूरी दे सकेगा

  [परन्तु जहां किसी वर्ष में ऐसी अवसूलीय रकम या हानि किसी विशेष मामले में और योग में उस रकम से अधिक नहीं है, जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, आदेश द्वारा नियत करे, वहां केन्द्रीय सरकार की ऐसी मंजूरी आवश्यक नहीं होगी और विभिन्न बोर्डों के संबंध में विभिन्न रकमें नियत की जा सकेंगी ]

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां अध्यक्ष की राय है कि बोर्ड को देय कोई रकम या उसके द्वारा उपगत कोई हानि, चाहे धन की है या सम्पत्ति की, अवसूलीय है, वहां अध्यक्ष ऐसी रकम या हानि को अंतिम रूप से अपलिखित किए जाने की मंजूरी दे सकेगा;  [परन्तु यह तब जक किसी वर्ष में ऐसी रकम या हानि किसी विशेष मामले में और योग में उस रकम से अधिक नहीं है, जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, आदेश द्वारा नियत करे और विभिन्न बोर्डों के संबंध में विभिन्न रकमें नियत की जा सकेंगी, तथाट अध्यक्ष प्रत्येक ऐसे मामले की रिपोर्ट, ऐसी मंजूरी के कारण बताते हुए बोर्ड को देगा  

 [(3) प्रत्येक मामले में, जहां अध्यक्ष उपधारा (2) के अधीन किसी रकम या हानि को अपलिखित करने की मंजूरी देता है, वहां वह ऐसी मंजूरी के कारण बताते हुए बोर्ड को रिपोर्ट देगा

97. भारतीय पत्तन अधिनियम की धारा 36 के अधीन नियुक्त किए गए संरक्षक या निकाय के रूप में बोर्ड की शक्तियां, आदि-इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत संकर्मों की बाबत इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट सब शक्तियां, प्राधिकार और निर्बंधन उन संकर्मों को लागू होंगी, जिन्हें बोर्ड भारतीय पत्तन अधिनियम की धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किए गए पत्तन संरक्षक के रूप में या निकाय के रूप में निष्पादित करें और  ऐसे संकर्मों को, उनके प्राक्कलनों को, और उनके अधीन व्ययों की मंजूरी को भी लागू होगी  

98. बजट प्राक्कलन-(1) बोर्ड प्रत्येक वर्ष जनवरी के इकतीसवें दिन या उसके पूर्व एक विशेष अधिवेशन आयोजित करेगा, जिसमें बोर्ड का अध्यक्ष आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बोर्ड की आय और व्यय का प्राक्कलन ऐसे प्रारूप में, जैसा केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे, प्रस्तुत करेगा

(2) ऐसे प्राक्कलन की एक प्रति डाक से या अन्यथा प्रत्येक न्यासी को भेजी जाएगी, जिससे कि वह उसके पास उपधारा (1) में निर्दिष्ट विशेष अधिवेशन के लिए नियत की गई तारीख से कम से कम दस पूर्ण दिनों के पूर्व पहुंच जाए  

(3) बोर्ड ऐसे अधिवेशन के प्राक्कलन पर विचार करेगा और उसे उपांतरों सहित या बिना किसी उपांतर के अन्तिम रूप से अनुमोदित कर सकेगा

(4) बोर्ड फरवरी के दसवें दिन या उसके पूर्व उसके द्वारा अनंतिम रूप से अनुमोदित प्राक्कलन की एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भिजवाएगा

(5) केन्द्रीय सरकार प्राक्कलन को मंजूर कर सकेगी या उसे टिप्पणियों सहित वापस कर सकेगी और ऐसी अतिरिक्त जानकारी मांग सकेगी, जैसी वह आवश्यक समझे  

(6) जब कोई प्राक्कलन उपधारा (5) के अधीन वापस कर दिया जाए तब बोर्ड ऐसे प्राक्कलन पर ऐसी टिप्पणियों के प्रति निर्देश से पुनर्विचार के लिए अग्रसर होगा और केन्द्रीय सरकार को ऐसी अतिरिक्त जानकारी देगा जैसी मांगी जाए तथा, यदि आवश्यक हो, तो प्राक्कलन को उपान्तरित या परिवर्तित करेगा और उसे केन्द्रीय सरकार के समक्ष पुनः पेश करेगा  

(7) केन्द्रीय सरकार प्राक्कलन को उपांतरों सहित या उपांतर के बिना मंजूर करेगी  

(8) जहां कोई ऐसा प्राक्कलन उस वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ होने के पूर्व जिससे संबंधित है, केन्द्रीय सरकार द्वारा मंजूर नहीं किया जाता, वहां केन्द्रीय सरकार बोर्ड को उतना व्यय उपगत करने के लिए प्राक्कलित कर सकेगी, जितना केन्द्रीय सरकार की राय में उतनी अवधि तक के लिए आवश्यक है जब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राक्कलन की मंजूरी बोर्ड को संसूचित नहीं की जाती

99. अनुपूरक प्राक्कलनों की तैयारी-बोर्ड किसी ऐसे वर्ष के दौरान, जिसके लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा प्राक्कलन मंजूर किया गया हो, ऐसे वर्ष के शेष भाग के लिए एक या अधिक अनुपूरक प्राक्कलन तैयार कर सकेगी और धारा 98 के उपबंध, वहां तक जहां तक कि संभव है, ऐसे प्राक्कलन को उसी प्रकार लागू होंगे मानो वह मूल वार्षिक प्राक्कलन हो  

100. प्राक्कलन में रकमों का पुनर्विनियोग-ऐसे किन्हीं निदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त दे, केन्द्रीय सरकार द्वारा मंजूर किए गए तत्समय प्रवृत्त किसी प्राक्कलन में प्राधिकृत किए गए व्यय की कोई राशि या उसका कोई भाग, जो व्यय नहीं किया गया हो, बोर्ड द्वारा उक्त प्राक्कलन में प्राधिकृत किसी अन्य व्यय के किसी आधिक्य की पूर्ति करने के लिए किसी समय विनियोजित किया जा सकेगा:

परन्तु केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना, व्यय के एक बृहत्त शीर्ष से किसी ऐसे अन्य शीर्ष में ऐसा पुनर्विनियोग नहीं किया जाएगा

101. आपात की दशा के सिवाय प्राक्कलन की अनुशक्ति-(1) धारा 100 के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से, घोर आपात की दशाओं में के सिवाय, उतनी रकम से, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियत करे, अधिक कोई राशि तब तक व्यय नहीं की जाएगी जब तक ऐसी राशि बोर्ड के तत्समय प्रवृत्त किसी ऐसे प्राक्कलन में, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अंतिम रूप से मंजूर कर दिया गया हो, सम्मिलित नहीं है  

(2) यदि उस परिसीमा से, जो उपधारा (1) के अधीन नियत की गई हो, अधिक कोई राशि किसी बोर्ड द्वारा घोर आपात के कारण इस प्रकार व्यय की जाए, तो अध्यक्ष उन परिस्थितियों की रिपोर्ट, उस उपाय के स्पष्टीकरण के साथ, जिसके द्वारा बोर्ड ऐसे अतिरिक्त व्यय की पूर्ति करना चाहता है, केन्द्रीय सरकार को देगा  

102. लेखे और संपरीक्षा-(1) बोर्ड समुचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और तुलनपत्र सहित लेखाओं का ऐसे प्ररूप में, जैसा केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के परामर्श से विनिर्दिष्ट करे, वार्षिक विवरण तैयार करेगा  

 [(2) बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा

(i) प्रत्येक वर्ष में एक बार; और 

(ii) यदि भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसा अपेक्षित हो, तो ऐसे लेखाओं के संकलन के साथ-साथ,

भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा, या ऐसे अन्य व्यक्तियों द्वारा, जो उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किए जाएं, की जाएगी और ऐसी संपरीक्षा की बाबत बोर्ड द्वारा उसे देय कोई रकम बोर्ड के साधारण खाते के प्रति विकलनीय होगी ]

                (3) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को, या बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा के सम्बन्ध में उसके द्वारा नियुक्त किए गए किसी व्यक्ति को, ऐसी संपरीक्षा के सम्बन्ध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे, जो भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के सम्बन्ध में हैं और उसे विशिष्टतया बोर्ड की लेखाबहियों, सम्बन्धित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों को पेश करने की मांग करने का अधिकार होगा

103. संपरीक्षा रिपोर्ट का प्रकाशन-(1) भारत का नियंत्रक और महालेखापरीक्षक बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा और परीक्षा पूरी कर लेने के पश्चात् चौदह दिन के भीतर संपरीक्षा रिपोर्ट की प्रतियां केन्द्रीय सरकार को और बोर्ड को भेजेगा  

(2) केन्द्रीय सरकार प्रत्येक संपरीक्षा रिपोर्ट को, उसके प्राप्त होने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष तीस दिन से अन्यून के लिए रखवाएगी  

104. संपरीक्षा रिपोर्ट में बताई गई त्रुटियों और अनियमितताओं का बोर्ड द्वारा ठीक किया जाना-बोर्ड की आय और व्यय पर संपरीक्षा रिपोर्ट में भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा बताई गई किन्हीं त्रुटियों या अनियमितताओं पर बोर्ड तुरन्त विचार करेगा और उनकी बाबत ऐसी कार्रवाई करेगा, जैसी वह ठीक समझे और की गई कार्रवाई की एक रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को भी भेजेगा  

105. बोर्ड और संपरीक्षकों के बीच मतभेदों का केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिश्चय-यदि संपरीक्षा रिपोर्ट में सम्मिलित किसी विषय पर किसी बोर्ड या भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के बीच कोई मतभेद है, और बोर्ड उस विषय पर उसके द्वारा की गई सिफारिश को, यदि कोई है, स्वीकार करने और क्रियान्वित करने में असमर्थ है, तो वह विषय तुरन्त केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा, जो उस पर अंतिम आदेश देगी तथा बोर्ड ऐसे आदेशों को कार्यान्वित करने के लिए बाध्य होगा  

अध्याय 9

केन्द्रीय सरकार का पर्यवेक्षण और नियंत्रण

106. प्रशासनिक रिपोर्ट-प्रत्येक वर्ष अप्रैल के प्रथम दिन के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, और उस तारीख के पश्चात्, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियत की जाए, प्रत्येक बोर्ड मार्च के इकतीसवें दिन समाप्त होने वाले पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान पत्तन के प्रशासन की एक ब्यौरेवार रिपोर्ट, ऐसे प्रारूप में, जैसा केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, केन्द्रीय सरकार को भेजेगा  

107. आय और व्यय के विवरणों का केन्द्रीय सरकार को भेजा जाना-(1) प्रत्येक बोर्ड प्रतिवर्ष, या केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसा करने का निदेश दिया गया है, तो बहुधा, अपनी आय और व्यय के विवरण ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जैसे सरकार निर्दिष्ट करे, भेजेगा  

(2) ऐसी सब विवरणियों की एक-एक प्रति बोर्ड के कार्यालय में कार्यालय अवधि के दौरान, ऐसी फीस का संदाय करने पर, जैसी बोर्ड समय-समय पर प्रत्येक निरीक्षण के लिए नियत करे, निरीक्षण के लिए खुली रहेगी  

108. बोर्ड के संकर्मों का सर्वेक्षण या परीक्षण करने आदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, किसी भी समय, बोर्ड के किन्हीं भी संकर्मों या उनके आशयित स्थलों के स्थानीय सर्वेक्षण या परीक्षण का आदेश दे सकेगी ऐसे सर्वेक्षण और परीक्षण का खर्च बोर्ड द्वारा पत्तन के साधारण खाते में जमा धनों में से वहन किया जाएगा और संदत्त किया जाएगा  

109. बोर्ड के खर्चे पर संकर्मों को प्रत्यावर्तित या पूरा करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-यदि कोई बोर्ड किसी समय

() बोर्ड द्वारा निर्मित या उपबंधित किसी संकर्म या साधित्र को बिना मरम्मत के रहने देता है; अथवा 

() बोर्ड द्वारा प्रारम्भ किए गए या केन्द्रीय सरकार द्वारा मंजूर किए गए किसी प्राक्कलन में सम्मिलित किसी संकर्म को उचित समय के भीतर पूरा नहीं करता; अथवा

() लिखित में सम्यक् सूचना के पश्चात्, किसी संकर्म या मरम्मत को प्रभावी रूप से पूरा करने के लिए या किसी ऐसे साधित्र का उपबन्ध करने के लिए, जो केन्द्रीय सरकार की राय में इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक है, अग्रसर नहीं होता,

तो केन्द्रीय सरकार ऐसे संकर्म को प्रत्यावर्तित या पूरा या क्रियान्वित करा सकेगी या ऐसी मरम्मत करा सकेगी या ऐसे साधित्र का उपबन्ध कर सकेगी और ऐसे प्रत्यावर्तन, पूर किए जाने, निर्माण, मरम्मत या व्यवस्था का खर्च बोर्ड द्वारा पत्तन के साधारण खाते में जमा धन में से संदत्त किया जाएगा  

110. बोर्ड को अतिष्ठित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि किसी समय केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि-

() कोई बोर्ड, गंभीर आपात के कारण, इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन उस पर अधिरोपित कर्तव्यों का अनुपालन करने में असमर्थ है, अथवा 

() इस अधिनियम या किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन बोर्ड पर अधिरोपित कर्तव्यों का अनुपालन करने में बोर्ड ने बार-बार व्यतिक्रम किया है और ऐसे व्यतिक्रम के परिणामस्वरूप बोर्ड की वित्तीय स्थिति या पत्तन के प्रशासन में अत्यधिक ह्रास हुआ है,

तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बोर्ड को ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए और जो एक समय में छह मास से अधिक नहीं होगी, अतिष्ठित कर सकेगी

परन्तु केन्द्रीय सरकार, खण्ड () में उल्लिखित कारणों से इस उपधारा के अधीन अधिसूचना जारी करने से पूर्व, बोर्ड को यह हेतुक दर्शित करने का कि उसे अतिष्ठित क्यों कर दिया जाए, तीन मास से अन्यून उचित समय देगी और बोर्ड के स्पष्टीकरणों और आक्षेपों पर, यदि कोई हों, विचार करेगी

(2) उपधारा (1) के अधीन बोर्ड को अतिष्ठित करने की अधिसूचना के प्रकाशन पर, -

() सब न्यासी, अतिष्ठित किए जाने की तारीख से, न्यासियों के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे

() वे सब शक्तियां और कर्तव्य जिनका प्रयोग या अनुपालन बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से इस अधिनियम या किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन किया जा सकता है, तब तक जब तक उपधारा (3) के खण्ड () या खण्ड () के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन नहीं हो जाता, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, जैसे केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, प्रयोग की जाएगी या उनका अनुपालन किया जाएगा

() बोर्ड में निहित सब सम्पत्ति, तब तक जब तक उपधारा (3) के खण्ड () या खण्ड () के अधीन बोर्ड का पुनर्गठन नहीं हो जाता, केन्द्रीय सरकार में निहित रहेगी  

(3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अतिष्ठिता की अवधि की समाप्ति पर, केन्द्रीय सरकार

() अतिष्ठिता की अवधि को ऐसी अतिरिक्त अवधि के लिए, जैसी वह आवश्यक समझे, और जो छह मास से अधिक नहीं होगी, बढा़ सकेगी, अथवा 

() नई नियुक्ति और नए चुनाव करके बोर्ड का पुनर्गठन कर सकेगी, और ऐसी दशा में वे व्यक्ति, जिन्होंने उपधारा (2) के खण्ड () के अधीन अपने पद रिक्त कर दिए थे, यथास्थिति, नियुक्ति या निर्वाचन के लिए निरर्हित नहीं समझे जाएंगे; अथवा 

() उतनी अवधि के लिए, जितनी वह आवश्यक समझे, केवल नियुक्त करके बोर्ड का पुनर्गठन कर सकेगी और ऐसी दशा में वे व्यक्ति, जिन्होंने उपधारा (2) के खण्ड () के अधीन अपने पद रिक्त कर दिए थे, केवल इस आधार पर ऐसी नियुक्ति के लिए निरर्हित नहीं समझे जाएंगे कि वे उस समय बोर्ड के न्यासी थे जब बोर्ड अतिष्ठित किया गया था:

                परन्तु केन्द्रीय सरकार अतिष्ठिता की अवधि की समाप्ति के पूर्व किसी समय, चाहे वह अवधि उपधारा (1) के अधीन मूलतः विनिर्दिष्ट की गई हो या इस उपधारा के अधीन विस्तारित की गई हो, इस उपधारा के खण्ड () या खण्ड () के अधीन कार्रवाई कर सकेगी  

(4) केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना जारी कराएगी और इस धारा के अधीन की गई किसी कार्रवाई की, और उन परिस्थितियों की, जिनके कारण ऐसी कार्रवाई की गई, पूरी रिपोर्ट यथासंभव शीघ्र अवसर पर पर संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगी

 [110. प्राधिकरण को अतिष्ठित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि प्राधिकरण इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उस पर अधिरोपित कर्तव्य का अनुपालन करने में असमर्थ है या उसने पालन करने में बार-बार व्यतिक्रम किया है या अपनी शक्तियों का अतिक्रमण या दुरुपयोग किया है, अथवा वह जानबूझकर या पर्याप्त कारण के बिना केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 111 के अधीन जारी किए गए किसी निदेश का पालन करने में असफल हो गया है, तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, प्राधिकरण को ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अतिष्ठित कर सकेगी :

परन्तु केन्द्रीय सरकार इस उपधारा के अधीन अधिसूचना जारी करने से पूर्व प्राधिकरण को यह हेतुक दर्शित करने का कि उसे अतिष्ठित क्यों कर दिया जाए, युक्तियुक्त अवसर देगी और प्राधिकरण के स्पष्टीकरण और आक्षेपों पर, यदि कोई हों, विचार करेगी

(2) उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण को अतिष्ठित करने वाली अधिसूचना के प्रकाशन पर, -

() प्राधिकरण का अध्यक्ष और सदस्य, इस बात के होते हुए भी कि उनकी पदावधि समाप्त नहीं हुई है, अतिष्ठित किए जाने की तारीख से, यथास्थिति, ऐसे अध्यक्ष या सदस्यों के रूप में अपना पद रिक्त कर देंगे

() वे सभी शक्तियां और कर्तव्य, जिनका प्रयोग या पालन प्राधिकरण द्वारा या उसकी ओर से इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन किया जा सकता है, अतिष्ठिता की अवधि के दौरान, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, जिन्हें केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, प्रयोग की जाएंगी और उनका अनुपालन किया जाएगा  

(3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अतिष्ठिता की अवधि की समाप्ति पर, केन्द्रीय सरकार

() अतिष्ठिता की अवधि को उतनी अतिरिक्त अवधि के लिए, जितनी वह आवश्यक समझे, बढ़ा सकेगी, अथवा

() धारा 47 में उपबन्धित रीति से प्राधिकरण का पुनर्गठन कर सकेगी ]

111. बोर्ड को निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति- [(1) इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना प्राधिकरण और प्रत्येक बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में नीति संबंधी प्रश्नों पर ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर लिखित रूप में दे:

परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई निदेश देने के पूर्व, यथास्थिति, प्राधिकरण या बोर्ड को अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा

(2) कोई प्रश्न नीति का है या नहीं इस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा

अध्याय 10

शास्तियां

 [112. इस अधिनियम के प्राधिकार से नियोजित प्रत्येक व्यक्ति का लोक सेवक होना-प्राधिकरण या किसी बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन नियोजित प्रत्येक व्यक्ति भारतीय दंड संहिता, (1860 का 45) की धारा 166 से धारा 171 (जिनमें दोनों धाराएं सम्मिलित हैं), धारा 184, धारा 185, और धारा 409 के प्रयोजनों के लिए और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49) के प्रयोजनों के लिए उक्त संहिता की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा

113. धारा 37, 38, 40 और 41 का उल्लंघन करने के लिए शास्ति-जो कोई धारा 37 या धारा 38 या धारा 41 के अधीन किए गए किसी आदेश के उपबंधों का उल्लंघन करेगा या धारा 40 के अधीन अधिरोपित किसी शर्त का अनुपालन करने में असमर्थ रहेगा वह जुर्माने से, जो  [दस हजाए रुपए] तक का हो सकेगा, और जहां उल्लंघन या असफलता जारी रहने वाली है वहां अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रथम उल्लंघन या असफलता के पश्चात् जारी रहने वाले ऐसे उल्लंघन या असफलता के दौरान प्रत्येक दिन के लिए  [एक हजार रुपए] तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा  

 

114. अनुज्ञा के बिना घाट, घट्टी, आदि स्थापित करने के लिए शास्ति-जो व्यक्ति धारा 40 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा वह जुर्माने से, जो प्रथम उल्लंघन के लिए [दस हजार रुपए] तक का हो सकेगा, या अतिरिक्त जुर्माने से, जो ऐसे प्रथम उल्लंघन के पश्चात् उल्लंघन जारी रहने के दौरान प्रत्येक दिन के लिए [एक हजार रुपए] तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा

115. रेटों, आदि के अपवंचन के लिए शास्ति-जो व्यक्ति किसी माल या किसी माल का वहन करने वाले जलयान की बाबत बोर्ड को विधिपूर्वक देय दरों के संदाय का अपवंचन करने के आशय से-

() किसी ऐसे दस्तावेज में जो बोर्ड के किसी कर्मचारी के समक्ष उसे ऐसे रेटों का अवधारण करने में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए प्रस्तुत किया गया है, ऐसे माल का या ऐसे जलयान के टन भार का वजन, मात्रा, मूल्य या विवरण कम करके बताता है या ठीक नहीं बताता है; अथवा 

() ऐसे माल या ऐसे जलयान को हटाना है या हटाने का प्रयत्न करता है या हटाने का दुष्प्रेरण करता है,

वह जुर्माने से, जो इस प्रकार देय रेटों की रकम के [दस गुने] तक हो सकेगा किन्तु [पांच सौ रुपए] से कम नहीं होगा, दण्डनीय होगा  

116. बोर्ड की सम्पत्ति की नुकसानी के मूल्य की वसूली-यदि किसी जलयान का मार्गदर्शन या समादेशन करते हुए किसी व्यक्ति की या जहाजियों में से किसी की या ऐसे जलयान पर नियोजित व्यक्तियों में से किसी की उपेक्षा के कारण किसी बोर्ड के कब्जाधीन किसी डाक, घाट, घट्टी, मूरिंग, मंच (स्टेज), जैटी, पोत-घाट, या अन्य संकर्म को  [अथवा बोर्ड की किसी जंगम सम्पत्ति कोट कोई नुकसान हो जाता है तो बोर्ड द्वारा आवेदन किए जाने पर, ऐसे नुकसान की रकम,  [उस रकम की वसूली के खर्चे सहित, वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 1958 (1958 का 44) के भाग 10 के उपबंधों के अनुसार वसूलीय होगीट

117. अन्य अपराध-जो व्यक्ति इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम या आदेश के उपबन्धों में से किसी ऐसे उपबन्ध का उल्लंघन करेगा जिसके उल्लंघन के लिए इसके अधीन कोई शास्ति अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित नहीं है तो वह जुर्माने से, जो [दो हजार रुपए] तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा  

 [117. बोर्ड के साथ संविदाओं, आदि में हितबद्ध व्यक्ति के बारे में यह समझा जाना कि उसने भारतीय दण्ड संहिता की धारा के 168 के अधीन अपराध किया है-जो व्यक्ति बोर्ड का न्यासी या कर्मचारी होते हुए, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी बोर्ड के साथ, उसके द्वारा या उसकी ओर से कोई संविदा या नियोजन अर्जित करेगा, उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता, (1860 का 45) की धारा 168 के अधीन अपराध किया है:

परन्तु इस धारा की कोई बात उस व्यक्ति को लागू नहीं होगी जिसके बारे में धारा 6 के खण्ड () के परन्तुक के अधीन यह समझा जाता है कि किसी संविदा या नियोजन में उसका कोई अंश या हित नहीं है ]

118. अपराधों का संज्ञान- [महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटट से निम्नतर कोई न्यायालय इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा

119. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध किए जाने के समय कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी, उस अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबन्धित किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-

() कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी                 है, तथा 

() फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से फर्म का भागीदार अभिप्रेत है

अध्याय 11

प्रकीर्ण

120. इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात की बाबत कार्यवाहियों के लिए परिसीमाकाल-किसी बोर्ड या उसके किसी सदस्य या कर्मचारी के विरुद्ध इस अधिनियम के अनुसरण में की गई या समझी गई किसी बात के लिए तब तक कोई वाद या अन्य कार्यवाही प्रारम्भ नहीं की जाएगी जब तक बोर्ड को या उसे, वादहेतुक का कथन करते हुए लिखित में सूचना दिए जाने के पश्चात् एक मास समाप्त नहीं हो जाता, और वादहेतुक उद्भूत होने के छह मास के पश्चात् ऐसा कोई वाद या अन्य कार्यवाही प्रारम्भ नहीं की जाएगी  

121. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-ऐसी किसी बात के लिए जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, या बोर्ड में या उसके नियंत्रण के अधीन किन्हीं मूरिंगों, हाजरों, या अन्य वस्तुओं में किसी त्रुटि के परिणामस्वरूप किसी जलयान को हुए किसी नुकसान के लिए, [प्राधिकरण, बोर्ड या उसके किसी सदस्यट या कर्मचारी के विरुद्ध कोई वाद नहीं लाया जा सकेगा या अन्य कार्यवाही नहीं की जा सकेगी  

122. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, निम्नलिखित प्रयोजनों में से सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी, अर्थात्:-

() बोर्ड के अधिवेशनों के समय और स्थान तथा ऐसे अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;

() बोर्ड या उसकी समितियों के सदस्यों को देय फीसें और भत्ते

 [(खक) प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों को संदेय वेतन, भत्ते तथा उनके अन्य निबंधन और शर्तें;]

() कोई अन्य विषय जिसकी बाबत केन्द्रीय सरकार द्वारा नियम बनाए जा सकते हैं  

(2) इस धारा के अधीन नियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अधीन रहते हुए है कि नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाएंगे  

(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलाकर तीस दिन की अवधि केलिए जो एक सत्र में या दो या अधिक क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखा गया हो,  [या ठीक बाद के सत्र] या उपरोक्त क्रमवर्ती सत्रों के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई उपान्तर करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, वह नियम ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई भी प्रभाव होगा, किन्तु इस प्रकार कि ऐसा कोई उपान्तर या बातिलकरण उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा

123. विनियम बनाने की बोर्ड की साधारण शक्ति-इस अधिनियम में अन्यत्र दी गई विनियम बनाने की किसी शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना बोर्ड निम्नलिखित सभी प्रयोजनों या उनमें से किन्हीं के लिए इस अधिनियम से सुसंगत विनियम बना सकेगा, अर्थात्: -

() अपनी समितियों के अधिवेशनों के समय और स्थान तथा ऐसे अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;

() वह प्ररूप और रीति जिसमें बोर्ड द्वारा संविदाएं की जाएंगी;

() धारा 42 की उपधारा (2) के अधीन दी जाने वाली रिपोर्ट का प्ररूप

() वह अवधि जिसके भीतर धारा 43 की उपधारा (2) के अधीन सूचना दी जा सकेगी

() इस अधिनियम के अधीन बोर्ड द्वारा नियोजित व्यक्तियों का मार्गदर्शन

 [() बोर्ड द्वारा निर्मित या अर्जित या बोर्ड में निहित डॉकों, घाटों, घट्टियों, जैटियों, रेलों, ट्रामों, भवनों और अन्य संकर्मों का अथवा बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन अर्जित या उसमें निहित किसी भूमि या अग्रतट का सुरक्षित, दक्षतापूर्ण और सुविधाजनक प्रयोग, प्रबन्ध और नियंत्रण;]

() बोर्ड के परिसरों के भीतर लाए गए मालों का ग्रहण किया जाना, वहन मूल्य, भण्डारकरण और हटाया जाना; बोर्ड द्वारा या बोर्ड द्वारा नियोजित कर्मचारियों द्वारा इन संक्रियाओं का अनन्य रूप से संव्यवहार में और उतराई से पूर्व नुकसान हुए या जिनके बारे में यह अधिकथित है कि उनको ऐसा नुकसान हो चुका है, माल को भारसाधन में लेने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की घोषणा करना

() पत्तन, नदी या नदी की द्रोणी या नदी के तटों तथा बोर्ड के संकर्मों को साफ रखना और उनमें या उन पर गंद या कूड़ाकरकट फैंकने पर रोक लगाना

() बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीय रेटों के संदाय का ढंग;

() बोर्ड में निहित ऐसे डॉकों, घाटों, घट्टियों, जैटियों, मंचों (स्टेजों) और पोत-घाटों का विनियमन करना, उनकी घोषणा करना और उन्हें परिभाषित करना जिन पर जलयानों से मालों को उतारा जाएगा और जिनसे जलयानों के फलक पर पोत लदान किया जाएगा

() उस रीति का और उन शर्तों का विनियमन करना जिनके अधीन रहते हुए पत्तन या पत्तन के पहुंचमार्गों के भीतर सब जलयानों की लदाई या उनसे उतराई, की जाएगी

() पोतों के बीच या पोतों और तट के बीच या तट और पोतों के बीच स्थोरा के नौवहन का विनियमन करना

() बोर्ड के परिसरों से उपद्रवी या अन्य अवांछित व्यक्तियों और अतिचारियों का अपवंचन करना

() पत्तन की सुरक्षा सुनिश्चित करना

() साधारणतया, पत्तन का दक्षतापूर्ण और समुचित प्रशासन करना  

 [123. विनियम बनाने की प्राधिकरण की शक्ति-प्राधिकरण निम्नलिखित प्रयोजनों में से सभी या किन्हीं के लिए इस अधिनियम से संगत विनियम बना सकेगा, अर्थात्: - 

() धारा 47 के अधीन प्राधिकरण के अधिवेशनों के समय और स्थान तथा ऐसे अधिवेशनों में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया

() धारा 47 की उपधारा (2) के अधीन प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा की अन्य शर्तें

124. विनियमों के बारे में उपबन्ध-(1) बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाया गया कोई विनियम, [उस विनियम से भिन्न जो धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन बनाया गया हो,] तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक वह केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं कर दिया जाता और जब तक ऐसा अनुमोदन राजपत्र में प्रकाशित नहीं कर दिया जाता  

(2) ऐसा कोई विनियम, [जो धारा 28 के अधीन बनाए गए विनियम से भिन्न होट तब तक केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं किया जाएगा जब तक बोर्ड ने उसे राजपत्र में लगातार दो सप्ताह तक प्रकाशित किया हो और जब तक उस तारीख से, जिसको उसे प्रथम बार राजपत्र में प्रकाशित किया जाए, चौदह दिन समाप्त नहीं हो जाते  

(3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी विनियम में, उस विनियम से भिन्न जो धारा 28 के अधीन बनाया गया हो, यह उपबन्ध किया जा सकेगा कि उसका कोई भंग जुर्माने से, जो [दो हजार रुपए] तक का हो सकेगा, और जहां भंग जारी रहता है वहां प्रथम भंग के पश्चात् ऐसा भंग जारी रहने के दौरान प्रत्येक दिन के लिए अतिरिक्त जुर्माने से जो [पांच सौ रुपए] तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा   

4[(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ]

125. विनियम बनाने का निदेश देने की या विनियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) जब भी केन्द्रीय सरकार लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझे तब वह ऐसा करने के कारणों के कथन सहित लिखित आदेश द्वारा ऐसी अवधि के भीतर जैसी वह इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, किसी बोर्ड को धारा 28 या धारा 76 या धारा 123 में विनिर्दिष्ट सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए कोई विनियम बनाने का या किन्हीं विनियमों में संशोधन करने का निदेश दे सकेगी:

परन्तु केन्द्रीय सरकार अपने द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि का विस्तार ऐसी अवधि या अवधियों के लिए कर सकती है जैसी वह आवश्यक समझे  

(2) यदि कोई बोर्ड, जिसे केन्द्रीय सरकार ने उपधारा (1) के अधीन निदेश जारी किया है, उस उपधारा के अधीन अनुज्ञात अवधि के भीतर ऐसे निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है या उपेक्षा करता है तो केन्द्रीय सरकार निदेश में विनिर्दिष्ट रूप में या ऐसे उपांतरों सहित जैसे वह ठीक समझे, विनियम बना सकेगी या विनियमों में संशोधन कर सकेगी

परन्तु विनियम बनाने या उनमें संशोधन करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार उक्त अवधि के भीतर बोर्ड द्वारा किए गए किसी आक्षेप या सुझाव पर विचार करेगी

(3) जहां उपधारा (2) के अनुसरण में कोई विनियम बनाए जाएं या उनमें संशोधन किया जाए वहां इस प्रकार बनाए गए या संशोधित विनियम, केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे और तदुपरि वे तदनुसार प्रभावी होंगे  

126. प्रथम विनियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन प्रथम विनियम केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए जाएंगे और वे राजपत्र में प्रकाशित किए जाने पर प्रभावी होंगे  

127. कतिपय विनियमों, आदि का लगाया जाना-धारा 123 के खण्ड () से लेकर खण्ड () तक के अधीन बनाए गए विनियमों का पाठ और अध्याय 5 के अधीन किसी बोर्ड द्वारा बनाया गया रेटों का मापमान, शर्तों के कथन सहित, बोर्ड द्वारा अंग्रेजी, हिन्दी और प्रादेशिक भाषा में, इस प्रयोजन के लिए घाटों, डाकों, पोत-घाटों और बोर्ड के परिसरों में अन्य सुविधाजनक स्थानों पर, इस प्रयोजन के लिए रखे गए विशेष पटलों पर, प्रमुख रूप से लगाया जाएगा  

128. घाटों, आदि का शुल्कों का संग्रहण करने के लिए उपयोग करने के केन्द्रीय सरकार और नगरपालिकाओं के अधिकार की और सीमाशुल्क अधिकारियों की शक्ति की व्यावृत्ति-इस अधिनियम की कोई बात

(1) बोर्ड के कब्जाधीन किसी डाक, बर्थ, घाट, घट्टी, मंच (स्टेज), जैटी या पोत-घाट पर सीमाशुल्क का संग्रहण करने के केन्द्रीय सरकार के अधिकार पर या नगर शुल्क संग्रहण करने के किसी नगरपालिका के अधिकार पर, अथवा 

(2) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन सीमाशुल्क प्राधिकारियों में निहित किसी शक्ति या प्राधिकार पर,

कोई प्रभाव नहीं डालेगी  

129. अधिनियम के कतिपय उपबंधों का वायुयानों को लागू होना-धाराएं 35, 37, 38, 39, 40, 41, 42, 48, 49, 50, 64, 65, 115, 121, 123, और 124 के उपबंध किसी पत्तन का प्रयोग करने वाले सब वायुयानों के सम्बन्ध में, तब जब वे जल पर हों, उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे जलयानों के संबंध में लागू हैं  

130. बोर्ड के परिसरों से कतिपय व्यक्तियों को बेदखल करने की शक्ति-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, यदि बोर्ड इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए परिसर के किसी ऐसे आबंटन को जो बोर्ड के किसी कर्मचारी को किया गया है रद्द करता है, तो वह लिखित में सूचना द्वारा, ऐसे आबंटिती को या किसी अन्य व्यक्ति को जो सम्पूर्ण परिसर का या उसके किसी भाग का अधिभोग करता है, उसका कब्जा बोर्ड को या बोर्ड द्वारा इस निमित्त नियुक्त किए गए किसी व्यक्ति को, ऐसी अवधि के भीतर, जैसी सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अभ्यर्पित या परिदत्त करने का आदेश दे सकेगा  

                स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसर" से कोई भवन या भवन का भाग अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी है: -

(i) ऐसे भवन से संबंधित अथवा भवन के भाग स्वरूप, बगीचे, मैदान और उपग्रह, यदि कोई हों

(ii) ऐसे भवन से संलग्न या भवन के भाग स्वरूप कोई फिटिंगे जो उसके और अधिक फायदाप्रद उपभोग के लिए हों, तथा 

(iii) कोई फर्नीचर, पुस्तकें या अन्य वस्तुएं जो बोर्ड की हों और ऐसे भवन के किसी भाग में पाई जाएं  

(2) यदि कोई आबंटिती या अन्य व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश का अनुपालन करने से इंकार करता है या असफल रहता है तो प्रथम श्रेणी का कोई मजिस्ट्रेट, बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से आवेदन किए जाने पर, किसी पुलिस अधिकारी को समुचित सहायकों सहित परिसर में प्रवेश करने का और किसी व्यक्ति को बेदखल करने तथा परिसर का कब्जा लेने और उसे बोर्ड को या बोर्ड द्वारा इस निमित्त नियुक्त किए गए किसी व्यक्ति को परिदत्त करने का आदेश दे सकेगा तथा पुलिस अधिकारी इस प्रयोजन के लिए ऐसे बल का प्रयोग कर सकेगा जैसा वह आवश्यक समझे

(3) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट सूचना-

() परिसर के आबंटिती को या किसी अन्य व्यक्ति को जो सम्पूर्ण परिसर का या उसके किसी भाग का अधिभोग कर रहा हो, परिदत्त करके या निविदत्त करके तामील की जा सकेगी; अथवा 

() यदि वह इस प्रकार से परिदत्त या निविदत्त नहीं की जा सकती तो उसे परिसर के बाहरी द्वार या किसी अन्य प्रमुख भाग पर चिपकाकर परिदत्त की जा सकेगी; अथवा

() रजिस्ट्री डाक से तामील की जा सकेगी  

131. बोर्ड द्वारा आनुकल्पिक उपचार-बोर्ड, किसी ऐसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जो इस अधिनियम के अधीन की जा सकती है किसी रेट, नुकसानी, व्यय या खर्चे को या विक्रय की दशा में विक्रय के अतिशेष को, तब जब विक्रय के आगम अपर्याप्त हों या इस अधिनियम के अधीन या उसके अनुसरण में बनाए गए किन्हीं विनियमों के अधीन बोर्ड को देय या उसके द्वारा वसूलीय किन्हीं शास्तियों को वाद लाकर वसूल कर सकेगा  

132. अधिसूचनाओं, आदेशों, आदि को राजपत्र में प्रकाशित करने के बारे में अपेक्षाएं-(1) इस अधिनियम के अधीन ऐसी किसी अपेक्षा का कि कोई अधिसूचना, आदेश, नियम या विनियम, जो [बोर्ड या प्राधिकरण या केन्द्रीय सरकार द्वारा] जारी की गई हो या बनाई गई हो, राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी, तब के सिवाय जब इस अधिनियम में विनिर्दिष्टतया अन्यथा उपबंधित है, इस अपेक्षा के रूप में अर्थ लगाया जाएगा कि वह अधिसूचना, आदेश, नियम या विनियम

() वहां जहां वह बोर्ड द्वारा जारी की जाती है या बनाई जाती है उस राज्य के, जिसमें पत्तन स्थित है, राजपत्र में प्रकाशित की जाए, और 

() वहां जहां वह [प्राधिकरण या केन्द्रीय सरकार द्वारा] जारी की जाती है या बनाई जाती है, भारत के राजपत्र में प्रकाशित की जाए  

(2) 2[प्राधिकरण या केन्द्रीय सरकार द्वारा] जारी की गई या बनाई गई कोई अधिसूचना, आदेश, नियम या विनियम, सर्वसाधारण की जानकारी के लिए, उस राज्य के, जिसमें पत्तन स्थित है, राजपत्र में भी पुनः प्रकाशित की जाएगी  

133. निरसन-(1) कांडला पत्तन को इस अधिनियम के लागू होने पर, बाम्बे लेंडिंग एण्ड व्हार्फेज फीस ऐक्ट, 1882 (1882 का मुम्बई अधिनियम संख्यांक 7) उस पत्तन की बाबत लागू नहीं रहेगा  

(2) कोचीन और विशाखापत्तनम के पत्तनों को इस अधिनियम के लागू होने पर, मद्रास आउट पोर्ट्स लेंडिंग एण्ड शिपिंग फीस ऐक्ट, 1885 (1885 का मद्रास अधिनियम संख्यांक 3) उन पत्तनों की बाबत लागू नहीं रहेगा  

 [(2) मुम्बई के पत्तन को इस अधिनियम के लागू होने पर, बाम्बे पोर्ट ट्रस्ट ऐक्ट, 1879 (1879 का मुम्बई अधिनियम संख्यांक 6) उस अधिनियम के उन उपबंधों के सिवाय जो मुम्बई पत्तन की सम्पत्तियों के नगरपालिका निर्धारण से संबंधित हैं तथा उनसे संबद्ध विषयों के सिवाय, उस पत्तन की बाबत लागू नहीं रहेगा  

(2) कलकत्ता के पत्तन पर इस अधिनियम के लागू होने पर, कलकत्ता पोर्ट ऐक्ट, 1890 (1890 का बंगाल अधिनियम संख्यांक 3) उस अधिनियम के उपबन्धों के सिवाय जो कलकत्ता पत्तन की सम्पत्तियों के नगरपालिका निर्धारण से संबंधित हैं, तथा उनसे संबद्ध विषयों के सिवाय, उस पत्तन की बाबत लागू नहीं रहेगा  

(2) मद्रास पत्तन को इस अधिनियम के लागू होने पर, मद्रास पोर्ट ट्रस्ट ऐक्ट, 1905 (1905 का मद्रास अधिनियम संख्यांक 2) उस पत्तन की बाबत लागू नहीं रहेगा  

(2) उपधारा (2), (2) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, -

() मुम्बई या मद्रास के पत्तनों को इस अधिनियम के लागू होने के ठीक पूर्व मुम्बई या मद्रास के पत्तन के न्यासी बोर्ड में न्यासी के रूप में पद धारण करने वाला प्रत्येक न्यासी उस रूप में इस अधिनियम के अधीन नियुक्त या निर्वाचित किया गया समझा जाएगा तथा इस अधिनियम के लागू होने के पश्चात् तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उस पत्तन की बाबत इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन न्यासी बोर्ड का गठन नहीं हो जाता

() कलकत्ता के पत्तन को इस अधिनियम के लागू होने के ठीक पूर्व उस पत्तन के आयुक्त के रूप में पद धारण करने वाला प्रत्येक आयुक्त तब तक इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन न्यासी रूप में नियुक्त या निर्वाचित किया गया समझा जाएगा जब तक कि उस पत्तन की बाबत इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अन्य बोर्ड का गठन नहीं हो जाता;

() उपधारा (2), (2) और (2) में निर्दिष्ट अधिनियमों के अधीन की गई या की गई समझी गई कोई बात या की गई या की गई समझी गई कोई कार्रवाई (जिसके अन्तर्गत बनाया गया या जारी किया गया कोई नियम, विनियम, उपविधि, अधिसूचना, आदेश या सूचना अथवा पारित किया गया कोई  संकल्प या की गई कोई नियुक्ति या घोषणा या मंजूर की गई कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा या छूट या उद्गृहीत किया गया कोई रेट, प्रभार या शुल्क या अधिरोपित की गई कोई शास्ति या जुर्माना भी है), वहां तक जहां तक वह अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी

(2) उपधारा (2), (2) और (2) में निर्दिष्ट अधिनियम के उपबन्धों का प्रवर्तन समाप्त हो जाने पर साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 के उपबन्ध उसी प्रकार लागू होंगे मानो प्रथम उल्लिखित उपबन्ध किसी केन्द्रीय अधिनियम में अन्तर्विष्ट उपबन्ध थे और प्रवर्तन की ऐसी समाप्ति कोई निरसन थी, तथा उपधारा (2) में विशिष्ट विषयों के उल्लेख से यह नहीं समझा जाएगा कि निरसनों के प्रभाव की बाबत उक्त धारा 6 के साधारण रूप से लागू होने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है या कोई प्रभाव पड़ता है ]

(3) यदि किसी अन्य पत्तन को इस अधिनियम को लागू होने के ठीक पूर्व उस पत्तन में कोई ऐसी विधि लागू है जो इस अधिनियम या उसके किसी उपबन्ध की तत्स्थानी विधि, इस अधिनियम के ऐसे लागू होने पर, उस पत्तन की बाबत लागू नहीं रहेगी [और साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 उसी प्रकार लागू होगी मानो ऐसी तत्स्थानी विधि कोई केन्द्रीय अधिनियम था तथा प्रवर्तन की ऐसी समाप्ति निरसन थी]  

134. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में, विशेष रूप से इस अधिनियम द्वारा निरसित अधिनियमितियों से इस अधिनियम के उपबन्धों के संक्रमण के संबंध में, कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा ऐसी कोई भी बात कर सकेगी जो ऐसे उपबन्धों से असंगत हो और जो उसे उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो

 [परन्तु नियत दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् किसी पत्तन के संबंध में ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जाएगा ]

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