Wednesday, 29, Apr, 2026
 
 
 
Expand O P Jindal Global University
 

कलाक्षेत्र प्रतिष्ठान अधिनियम, 1993 ( Kalakshetra Foundation Act, 1993 )


 

कलाक्षेत्र प्रतिष्ठान अधिनियम, 1993

(1994 का अधिनियम संख्यांक 6)

[4 जनवरी, 1994]

मद्रास के कलाक्षेत्र को राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने के लिए, उसके

प्रशासन के लिए, प्रतिष्ठान की स्थापना और निगमन का उपबंध करने के

लिए, उन लक्ष्यों और उद्देश्यों के, जिनके लिए कलाक्षेत्र प्रतिष्ठापित

किया गया था, अनुसार कलाक्षेत्र के और विकास के लिए उपबंध

करने के लिए तथा उनसे संबंधित या उनके

आनुषंगिक विषयों के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के चवालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कलाक्षेत्र प्रतिष्ठान अधिनियम, 1993 है

                (2) यह 29 सितम्बर, 1993 को प्रवृत्त समझा जाएगा

2. कलाक्षेत्र का राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया जाना-स्वर्गीय श्रीमती रुक्मिणी देवी अरुणडेल द्वारा प्रतिष्ठापित तमिलनाडु राज्य में आड्यार, मद्रास स्थित कलाक्षेत्र नामक संस्था के उद्देश्य ऐसे हैं, जो उसे एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था बनाते हैं, अतः यह घोषित किया जाता है कि कलाक्षेत्र नामक संस्था एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था है

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो, -

                                () विद्या समिति" से धारा 15 के अधीन गठित विद्या समिति अभिप्रेत है ;

                () नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको प्रतिष्ठान की धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन स्थापना की जाती है ;

                () न्यासी बोर्ड" से 1985 की अर्जी सं० 716 में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित स्कीम रिट" के अधीन कलाक्षेत्र के कार्यकलापों का प्रबंध करने वाला न्यासी बोर्ड अभिप्रेत है ;

                () घटक एकक" से पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट कलाक्षेत्र के एकक अभिप्रेत हैं ;

                () निदेशक" से धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त निदेशक अभिप्रेत है ;

                () वित्त समिति" से धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन गठित वित्त समिति अभिप्रेत है ;

                () प्रतिष्ठान" से धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित कलाक्षेत्र प्रतिष्ठान अभिप्रेत है ;

                () निधि" से धारा 22 में निर्दिष्ट प्रतिष्ठान की निधि अभिप्रेत है ;

                () शासी बोर्ड" से धारा 11 के अधीन गठित शासी बोर्ड अभिप्रेत है ;

                () कलाक्षेत्र" से स्वर्गीय श्रीमती रुक्मिणी देवी अरुणडेल द्वारा प्रतिष्ठापित आड्यर, मद्रास स्थित कलाक्षेत्र नामक संस्था अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत उसके घटक एकक हैं ;

                () अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;

                () सदस्य" से शासी बोर्ड का कोई सदस्य अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत उसका अध्यक्ष है ;

                () विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

                () विनियम" से धारा 32 के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ;

                () अनुसूची" से इस अधिनियम से उपाबद्ध कोई अनुसूची अभिप्रेत है ;

                () राज्य सरकार" से तमिलनाडु की सरकार अभिप्रेत है ;

 

अध्याय 2

कलाक्षेत्र की आस्तियों और संपत्तियों का अर्जन और अंतरण

4. कलाक्षेत्र की आस्तियां और संपत्तियों का केन्द्रीय सरकार को अंतरण और उसमें निहित होना-इस अधिनियम के प्रारंभ को कलाक्षेत्र की ऐसी आस्तियों और संपत्तियों के संबंध में, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं और न्यासी बोर्ड या किसी अन्य निकाय में, चाहे वे किसी भी हैसियत में हों, निहित हैं, अधिकार, हक और हित केन्द्रीय सरकार को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगे

5. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित अधिकार, हक और हित के बारे में यह समझा जाएगा कि उनके अंतर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार, अनुज्ञप्तियां और विशेषाधिकार; सभी (जंगम और स्थावर) संपत्ति, जिनके अंतर्गत भूमि और भवन; संगीत उपकरण; अभिनय कला के शिक्षण, प्रशिक्षण और प्रदर्शन में उपयोग किए गए उपस्कर; कला और शिल्प में उपयोग किए गए औजार और सुविधाएं; पोशाक और सजावटी मदें; पुस्तकें; पुस्तकालयों और प्रयोगशालाओं में उपयोग की गई लेखनसामग्री, फर्नीचर और अन्य उपस्कर; कला कृतियां और हस्त कृतियां, स्टोर, मोटरगाड़ियां और अन्य यान; कर्मशालाएं, रोकड़ बाकी, निधियां, जिनके अंतर्गत आरक्षित निधियां हैं, विनिधान और ऐसी आस्तियों और संपत्तियों से उत्पन्न अन्य सभी अधिकार और हित, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने के ठीक पूर्व न्यासी बोर्ड या किसी अन्य निकाय के, चाहे वे किसी भी हैसियत में हों, कब्जे, स्वामित्व, शक्ति या नियंत्रण में थीं, तथा सभी लेखाबहियां, रजिस्टर, नक्शे, लेखांक और उनसे संबंधित सभी अन्य दस्तावेजें हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार के हों

(2) पूर्वोक्त सभी आस्तियां और संपत्तियां, जो धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित होने के आधार पर किसी न्यास, बाध्यता, बंधक, भार, धारणाधिकार और उनको प्रभावित करने वाले सभी अन्य विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएंगी अथवा ऐसी आस्तियों या संपत्तियों के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बंधित करने वाली या ऐसी संपूर्ण आस्तियों और संपत्तियों या उनके किसी भाग की बाबत किसी रिसीवर की नियुक्ति करने वाली किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी की किसी कुर्की, व्यादेश, डिक्री या आदेश के बारे में यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है

(3) कलाक्षेत्र या उसके किसी घटक एकक की आस्तियों और सम्पत्तियों के संबंध में, जो धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, न्यासी बोर्ड या किसी अन्य निकाय को किसी भी हैसियत में, इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व किसी समय अनुदत्त और ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व प्रवृत्त कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा, प्राधिकार, रियायत, सुविधा, विशेषाधिकार, सहबद्धता, या इसी प्रकार की कोई अन्य लिखत, ऐसी आस्तियों और संपत्तियों के संबंध में और उनके प्रयोजनों के लिए ऐसे प्रारम्भ को और उसके पश्चात् अपने प्रकट शब्दानुसार प्रवृत्त बनी रहेगी अथवा जहां धारा 6 के अधीन निदेश दिया गया है वहां प्रतिष्ठान के बारे में यह समझा जाएगा कि प्रतिष्ठान ऐसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा, प्राधिकार, रियायत, सुविधा, विशेषाधिकार, सहबद्धता या अन्य लिखत में उसी प्रकार प्रतिस्थापित हो गया है मानो वह प्रतिष्ठान को अनुदत्त की गई हो और प्रतिष्ठान उसे उस शेष अवधि के लिए धारण करेगा जिसके लिए न्यासी बोर्ड या कोई अन्य निकाय, किसी भी हैसियत में, उसके निबंधनों के अधीन उसे धारण करता

(4) यदि, इस अधिनियम के प्रारम्भ पर, किन्हीं आस्तियों या संपत्तियों के संबंध में, जो धारा 4 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, न्यासी बोर्ड द्वारा संस्थित या लाया गया कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, चाहे वह किसी भी प्रकार की हो, लंबित है तो ऐसे अन्तरण और निहित होने या इस अधिनियम की किसी बात के कारण, उसका उपशमन नहीं होगा, वह बंद नहीं होगी या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार द्वारा या जहां ऐसी आस्तियों और संपत्तियों के संबंध में अधिकार, हक और हित धारा 6 के अधीन प्रतिष्ठान में निहित होने के लिए निदेशित है वहां उस प्रतिष्ठान द्वारा चालू रखी जा सकेगी, चलाई जा सकेगी या प्रवर्तित की जा सकेगी

6. केन्द्रीय सरकार द्वारा आस्तियों और संपत्तियों के प्रतिष्ठान में निहित होने का निदेश दिया जाना-(1) धारा 4 और धारा 5 में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश देगी कि कलाक्षेत्र की ऐसी आस्तियों और संपत्तियों के संबंध में, जो धारा 4 के अधीन उसमें निहित हो गई थी, अधिकार, हक और हित ऐसी तारीख को, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख के पूर्व की हो और जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, प्रतिष्ठान में निहित हो जाएंगे

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रतिष्ठान में कलाक्षेत्र की आस्तियों और संपत्तियों के संबंध में अधिकार, हक और हित निहित होने की तारीख से ही, -

                () प्रतिष्ठान के बारे में यह समझा जाएगा कि वह आस्तियों और संपत्तियों का स्वामी हो गया है ; और

                () ऐसी आस्तियों और संपत्तियों के संबंध में केन्द्रीय सरकार के अधिकारों और दायित्वों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे प्रतिष्ठान के क्रमशः अधिकार और दायित्व हो गए हैं

7. व्यक्तियों का आस्तियों, संपत्तियों, आदि को परिदत्त करने और उनका लेखा जोखा देने का कर्तव्य-(1) कलाक्षेत्र की आस्तियों और संपत्तियों के केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाने पर, ऐसे निहित होने की तारीख के ठीक पूर्व उक्त आस्तियों और संपत्तियों के प्रबंध के भारसाधन सभी व्यक्ति, केन्द्रीय सरकार को या प्रतिष्ठान को या ऐसे व्यक्ति या व्यक्ति निकाय को, जिसे केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, कलाक्षेत्र की आस्तियों और संपत्तियों से संबंधित सभी आस्तियां, संपत्तियां, लेखाबहियां, रजिस्टर या अन्य दस्तावेजें, जो उनकी अभिरक्षा में हों, परिदत्त करने के लिए आबद्ध होंगे

(2) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसके कब्जे या नियंत्रण में कलाक्षेत्र से संबंधित कोई आस्तियां, संपत्ति, बहियां, दस्तावेजें, या अन्य कागजपत्र, जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान में निहित हो गए हैं, और जो कलाक्षेत्र के हैं या उस दशा में उसके होते, यदि कलाक्षेत्र केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान में निहित हुआ होता, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार को या प्रतिष्ठान को उक्त आस्तियों, संपत्तियों, बहियों, दस्तावेजों और अन्य कागजपत्रों का लेखा-जोखा देने के लिए दायी होगा और वह उन्हें केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान को या ऐसे व्यक्ति या व्यक्ति-निकाय को, जिसे केन्द्रीय सरकार या प्रतिष्ठान इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, परिदत्त करेगा

(3) केन्द्रीय सरकार, कलाक्षेत्र की ऐसी आस्तियों और संपत्तियों का, जो धारा 4 के अधीन उसमें निहित हो गई हैं, कब्जा प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी या उठवाएगी

अध्याय 3

कलाक्षेत्र प्रतिष्ठान

8. प्रतिष्ठान की स्थापना और निगमन-(1) ऐसी तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, एक प्रतिष्ठान की स्थापना की जाएगी जिसका नाम कलाक्षेत्र प्रतिष्ठान होगा

(2) प्रतिष्ठान पूर्वोक्त नाम वाला एक निगमित निकाय होगा जिसका शाश्वत उत्तराधिकार होगा और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा

(3)  प्रतिष्ठान का कार्यालय तिरुवनमियूर, मद्रास में स्थित होगा

9. प्रतिष्ठान के उद्देश्य-प्रतिष्ठान के उद्देश्य इस प्रकार होंगे, -

                (i) सभी वास्तविक कलाओं की मर्मभूत एकता पर जोर देना ;

                (ii) ऐसी कलाओं की मान्यता के लिए कार्य करना जो वैयक्तिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं ;

                (iii) कला और संस्कृति की पुरातन शुद्धता और परंपराओं के अनुरूप उच्चतम परम्पराओं को बनाए रखना ;

                (iv) कला और विज्ञान, संगीत, नृत्य-नाटक, ललित कला और भरत-नाट्यम के प्रशिक्षण, अनुसंधान, अध्ययन, शिक्षण और विकास की व्यवस्था करना ; और

                (v) यह सुनिश्चित करना कि भय-मुक्त शिक्षा" और अश्लीलता-मुक्त कला" के सिद्धांतों का प्रतिष्ठान के क्रियाकलापों में पालन किया जाता है और इन उच्च आदर्शों से किसी विचलन की अनुज्ञा देना

10. प्रतिष्ठान के प्राधिकारी-(1) प्रतिष्ठान निम्मलिखित प्राधिकारियों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-

                () शासी बोर्ड ;

                () विद्या समिति ; और

                () वित्त समिति

                (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी इस अधिनियम के अधीन कृत्यों का निर्वहन करने और शक्तियों का प्रयोग करने में धारा 9 में विनिर्दिष्ट उद्देश्यों से मार्गदर्शित होंगे

11. शासी बोर्ड-शासी बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-

() एक अध्यक्ष, जो ऐसा व्यक्ति होगा जिसे सार्वजनिक जीवन में उच्च ख्याति प्राप्त हुई है, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ;

() बारह से अनधिक सदस्य, जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा निम्नलिखित व्यक्तियों में से नामनिर्देशित किया जाएगा, अर्थात् :-

                (i) जिन्होंने कलाक्षेत्र की बहुमूल्य सेवा की है ;

                (ii) जो कला, संस्कृति, लोक कला और शिल्प से संबद्ध रहे हैं ;

                (iii) जो ख्यातिप्राप्त कलाकार हैं ; और

                (iv) जो कला और संस्कृति के आश्रयदाता हैं ;

() दो ऐसे व्यक्ति, जिनके पास खंड () के उपखंड (i) से उपखंड (iv) में निर्दिष्ट एक या अधिक अर्हताए हैं, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा ;

() केन्द्रीय सरकार के ऐसे दो अधिकारी, जो उपसचिव की पंक्ति से नीचे के हों, जिन्हें केन्द्रीय सरकार के संस्कृति मामलों से संबंधित मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए उस सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा, पदेन ;

() राज्य सरकार का एक ऐसा अधिकारी, जो संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का हो, जिसे उस सरकार के शिक्षा विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए उस सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा, पदेन ; और

() निदेशक, पदेन

12. सदस्यों की पदावधि-(1) सदस्यों की पदावधि शासी बोर्ड के गठन की तारीख से पांच वर्ष होगी

(2) यदि धारा 11 के खंड () या खंड () के अधीन नामनिर्देशित किसी सदस्य के पद में, चाहे उसकी मृत्यु या पदत्याग के कारण अथवा बीमारी या अन्य अक्षमता के कारण अपने कृत्यों को निर्वहन करने में असमर्थता के कारण आकस्मिक रिक्ति होती है तो ऐसी रिक्ति को नया नामनिर्देशन करके भरा जाएगा और इस प्रकार नामनिर्देशित सदस्य उस सदस्य की, जिसके स्थान पर उसे इस प्रकार नामनिर्देशित किया गया है, पदावधि के शेष भाग के लिए पद धारण करेगा

(3) पदावरोही सदस्य पुनः नामनिर्देशन का पात्र होगा

(4) कोई सदस्य, केन्द्रीय सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा, किन्तु वह अपने पद पर तब तक बना रहेगा जब तक कि उसका त्यागपत्र उस सरकार द्वारा स्वीकार नहीं कर लिया जाता है

(5) धारा 11 के खंड () और खंड () के अधीन नामनिर्देशित सदस्य ऐसे भत्तों के पात्र होंगे, जो विहित किए जाएं

13. शासी बोर्ड के अधिवेशन-(1) शासी बोर्ड का अधिवेशन एक वर्ष में कम से कम दो बार मद्रास में ऐसे समय पर होगा, जो शासी बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा नियत किया जाए

(2) शासी बोर्ड के अधिवेशन में सभी विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा किए जाएंगे :

परंतु मत बराबर होने की दशा में शासी बोर्ड के अध्यक्ष का निर्णायक मत होगा

(3) शासी बोर्ड अपने अधिवेशनों में अपने कारबार के संव्यवहार के संबंध में (जिसके अंतर्गत उसके अधिवेशनों में गणपूर्ति है) ऐसी प्रक्रिया का पालन करेगा, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए

(4) शासी बोर्ड का कोई कार्य या कार्यवाही, केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि -

                () शासी बोर्ड में कोई रिक्ति है, या उसके गठन में कोई त्रुटि है ;

                () शासी बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के नामनिर्देशन में कोई त्रुटि है ; या

                () शासी बोर्ड की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है, जो मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं डालती है

14. शासी बोर्ड का प्रतिष्ठान का सर्वोच्च प्राधिकारी होना-(1) शासी बोर्ड प्रतिष्ठान का सर्वोच्च प्राधिकारी होगा और प्रतिष्ठान के कार्यकलापों का साधारण, अधीक्षण, निदेशन और प्रबंध शासी बोर्ड में निहित होगा

(2) शासी बोर्ड ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा, जो विहित किए जाएं

15. विद्या समिति-(1) विद्या समिति निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात् :-

                () निदेशक ;

                () घटक एककों के अध्यक्ष ;

                () कला और संस्कृति, जिसके अंतर्गत नृत्य, संगीत, लोक कला और शिल्प है, के क्षेत्र में प्रख्यात तीन ऐसे व्यक्ति, जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा ; और

                () एक ऐसा व्यक्ति, जिसे राज्य सरकार के शिक्षा विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए उस सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा

(2) विद्या समिति के सदस्यों की पदावधि और अन्य निबंधन तथा शर्तें वे होंगी, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं

(3) विद्या समिति अपने अधिवेशनों में अपने कारबार के संव्यवहार के संबंध में (जिसके अन्तर्गत अधिवेशन की गणपूर्ति है) ऐसी प्रक्रिया का पालन करेगी, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए

16. विद्या समिति की शक्तियां और कृत्य-विद्या समिति, शिक्षा, प्रशिक्षण और घटक एककों द्वारा संचालित परीक्षा का स्तर बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होंगी और ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगी तथा ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करेगी, जो उसे शासी बोर्ड द्वारा समय-समय पर सौंपे जाएं

 

17. वित्त समिति-(1) वित्त समिति निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात् :-

() भारत सरकार के वित्त सलाहकार या केन्द्रीय सरकार के संस्कृति मामलों से संबंधित मंत्रालय में उसका नामनिर्देशिती ;

() केन्द्रीय सरकार का कोई ऐसा अधिकारी, जो उपसचिव की पंक्ति से नीचे का हो, जिसे उस सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा ;

() राज्य सरकार के वित्त विभाग का प्रतिनिधित्व करने वाला उस सरकार का कोई ऐसा अधिकारी, जो उपसचिव की पंक्ति से नीचे का हो, जिसे उस सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगा ; और

() निदेशक

                (2) वित्त समिति, अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में ऐसी प्रक्रिया का पालन करेगी, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए

18. वित्त समिति की शक्तियां और कृत्य-वित्त समिति,-

                (i) निदेशक द्वारा तैयार किए गए प्रतिष्ठान के लेखाओं और बजट प्राक्कलनों के वार्षिक विवरण की जांच करेगी और शासी बोर्ड को सिफारिशें करेगी ;

                (ii) प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए प्रतिष्ठान के आवर्ती और अनावर्ती व्ययों की सीमाएं विहित करेगी ;

                (iii) प्रतिष्ठान की वित्तीय स्थिति का समय-समय पर पुनर्विलोकन करेगी और आन्तरिक संपरीक्षा कराएगी ; और

                (iv) ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करेगी, जो विहित किए जाएं

19. निदेशक की नियुक्ति और कर्तव्य-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, एक निदेशक की नियुक्ति करेगी जो प्रतिष्ठान का प्रधान कार्यपालक अधिकारी होगा और प्रतिष्ठान के कार्यकलापों के उचित प्रशासन और दिन-प्रतिदिन के प्रबन्ध के लिए उत्तरदायी होगा तथा ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा और अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा, जो उसे शासी निकाय द्वारा सौंपे जाए

(2) निदेशक, वित्तीय समिति द्वारा जांच के लिए प्रतिष्ठान के लेखाओं और बजट प्राक्कलनों का वार्षिक विवरण तैयार करेगा

(3) निदेशक, प्रतिष्ठान का पूर्णकालिक कर्मचारी होगा और निधि में से ऐसे वेतन और भत्तों का हकदार होगा तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि और अन्य विषयों के संबंध में ऐसी सेवा-शर्तों के अधीन होगा, जो विहित की जाएं

20. वर्तमान कर्मचारियों की सेवा का अन्तरण-कलाक्षेत्र के कार्यकलापों के संबंध में नियत दिन के ठीक पूर्व नियोजित प्रत्येक अधिकारी या अन्य कर्मचारी, नियत दिन से ही प्रतिष्ठान का अधिकारी या अन्य कर्मचारी हो जाएगा तथा उसी अवधि तक और उसी पारिश्रमिक पर तथा पेंशन, उपदान और अन्य विषयों के संबंध में उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर पद धारण करेगा जो वह न्यासी बोर्ड के या किसी अन्य निकाय के अधीन किसी भी हैसियत में धारित करता, यदि यह अधिनियम पारित किया गया होता और तब तक ऐसा करता रहेगा, जब तक प्रतिष्ठान में उसका नियोजन समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसकी पदावधि, पारिश्रमिक तथा अन्य निबंधन और शर्तें प्रतिष्ठान द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जातीं :

परन्तु किसी ऐसे अधिकारी या कर्मचारी की पदावधि, पारिश्रमिक तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तों में, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना, उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा

अध्याय 4

वित्त, लेखा और संपरीक्षा

21. केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रतिष्ठान को अनुदान-केन्द्रीय सरकार, प्रतिष्ठान को, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का दक्षतापूर्वक निर्वहन करने में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए, संसद् की विधि द्वारा इस निमित्त किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रतिष्ठान को अनुदान, उधार के रूप में या अन्यथा ऐसी धनराशि का ऐसे निबंधनों और शर्तों पर संदाय करेगी जो वह सरकार अवधारित करे

22. प्रतिष्ठान की निधि-(1) प्रतिष्ठान की अपनी निधि होगी ; और ऐसी सभी राशियां जो उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा   समय-समय पर संदत्त की जाएं और प्रतिष्ठान की सभी प्राप्तियां (जिनके अन्तर्गत कोई ऐसी राशि है, जो राज्य सरकार या कोई अन्य प्राधिकारी या व्यक्ति प्रतिष्ठान को संदत्त करे) उस निधि में जमा की जाएंगी और सभी संदाय प्रतिष्ठान द्वारा उसमें से किए जाएंगे

(2) निधि की सभी धनराशियां ऐसे बैंक में जमा की जाएंगी या उनका ऐसी रीति से विनिधान किया जाएगा, जो शासी बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन के अधीन रहते हुए विनिश्चित करे

(3) प्रतिष्ठान इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए ऐसी राशियां खर्च कर सकेगा जो वह ठीक समझे और ऐसी राशियों को प्रतिष्ठान की निधि में से संदेय व्यय समझा जाएगा

23. बजट-प्रतिष्ठान, प्रत्येक वर्ष, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, आगामी वित्तीय वर्ष के संबंध में बजट तैयार करेगा, जिसमें प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शित किया जाएगा और उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार को भेजी जाएंगी

24. प्रतिष्ठान के लेखे और संपरीक्षा-(1) प्रतिष्ठान, उचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, जिसके अंतर्गत तुलनपत्र भी है, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा अनुमोदित किया जाए

(2) प्रतिष्ठान के लेखाओं की वार्षिक संपरीक्षा, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा की जाएंगी और ऐसी संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा उपगत कोई व्यय प्रतिष्ठान द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा

(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और प्रतिष्ठान के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति को उस संपरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में हैं और विशिष्टतया, उसे बहियां, लेखा, संबंधित वाउचर तथा अन्य दस्तावेजों और कागज-पत्र पेश किए जाने की मांग करने और प्रतिष्ठान के कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा

(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा प्रमाणित प्रतिष्ठान के लेखे, उन पर संपरीक्षा की रिपोर्ट के साथ, प्रतिवर्ष केन्द्रीय सरकार को भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी

25. विवरणियां, वार्षिक रिपोर्टें, आदि प्रस्तुत करने का कर्तव्य-(1) प्रतिष्ठान, केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर और ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, या जो केन्द्रीय सरकार निदिष्ट करे, प्रतिष्ठान के उद्देश्यों के संवर्धन और विकास के लिए किसी प्रस्तावित या विद्यमान कार्यक्रम के संबंध में ऐसी विवरणियां और विवरण तथा ऐसी विशिष्टियां, जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, निदिष्ट करे, प्रस्तुत करेगा

(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रतिष्ठान, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत के पश्चात् यथासंभव शीघ्र एक वार्षिक रिपोर्ट, ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख से पूर्व, जो विहित की जाए, पूर्व वर्ष के दौरान, अपने क्रियाकलापों और कार्यक्रमों का सही और पूर्ण विवरण देते हुए, केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा

(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त रिपोर्ट की एक प्रति उसके प्राप्त होने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी

अध्याय 5

प्रकीर्ण

26. संपत्ति के अन्य-संक्रामण के लिए केन्द्रीय सरकार का पूर्व अनुमोदन-प्रतिष्ठान, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के सिवाय, प्रतिष्ठान में निहित किसी संपत्ति का तो विक्रय करेगा और ही अन्यथा व्ययन करेगा

27. प्रतिष्ठान को निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध और प्रतिष्ठान को संसूचित किए जाएंगे, ऐसे निदेश जारी कर सकेगी जो वह ठीक समझे

(2) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे निदेशों में प्रतिष्ठान से-

                () ऐसी अवधि के भीतर, जो निदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, कोई विनियम बनाने या उसका संशोधन करने ; और

                () प्रतिष्ठान द्वारा जिम्मा लिए गए या जिम्मा लिए जाने वाले कार्य को ऐसी रीति से, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करना ठीक समझे, पूर्विकता देने,

की अपेक्षा करने वाले निदेश सम्मिलित हो सकेंगे

                (3) इस धारा के अधीन जारी किए गए किसी निदेश का तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या कलाक्षेत्र के ज्ञापन या विनियमों में किसी बात के होते हुए भी, प्रभाव होगा

28. प्रतिष्ठान का विघटन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, और उसमें विनिर्दिष्ट किए जाने वाले कारणों से, प्रतिष्ठान का ऐसी तारीख से और उतनी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, विघटन कर सकेगी :

परन्तु ऐसी कोई अधिसूचना जारी करने के पूर्व, केन्द्रीय सरकार प्रस्थापित विघटन के विरुद्ध अभ्यावेदन करने के लिए प्रतिष्ठान को उचित अवसर देगी

(2) जब उपधारा (1) के अधीन प्रतिष्ठान विघटित कर दिया जाता है तब,-

() शासी बोर्ड, विद्या समिति और वित्त समिति के सभी सदस्य, इस बात के होते हुए भी कि उनकी पदावधि समाप्त नहीं हुई है, विघटन की तारीख से ऐसे सदस्यों के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे ;

() विघटन की अवधि के दौरान, शासी बोर्ड, विद्या समिति और वित्त समिति की सभी शक्तियों का प्रयोग और उनके कृत्यों का पालन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा जिन्हें केन्द्रीय सरकार इस निमित्त नियुक्त करे ;

() प्रतिष्ठान में निहित सभी संपत्ति और आस्तियां, विघटन की अवधि के दौरान, केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएंगी ; और

() विघटन की अवधि समाप्त होते ही, प्रतिष्ठान का पुनर्गठन इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया   जाएगा

29. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या उस सरकार के किसी अधिकारी अथवा प्रतिष्ठान या प्रतिष्ठान के सदस्य या निदेशक या किसी अधिकारी के विरुद्ध नहीं होगी

30. क्षतिपूर्ति-प्रतिष्ठान, शासी बोर्ड, विद्या समिति और वित्त समिति के प्रत्येक सदस्य और प्रतिष्ठान के निदेशक की, ऐसी हानियों और व्ययों के सिवाय, जो उनके द्वारा जानबूझकर किए गए कार्य या व्यतिक्रम के कारण हुए हों, ऐसी सभी हानियों और व्ययों के लिए क्षतिपूर्ति करेगा जो उनके द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन के संबंध में उपगत किए जाते हैं

31. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

                () धारा 12 की उपधारा (5) के अधीन सदस्यों को भत्ते ;

                () वे शक्तियां, जिनका प्रयोग और वे कृत्य, जिनका निर्वहन शासी बोर्ड धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन करेगा;

                () धारा 18 के खंड (iv) के अधीन वित्त समिति द्वारा किए जाने वाले कृत्य ;

                () धारा 19 की उपधारा (3) के अधीन निदेशक का वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें ;

                () वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे शासी बोर्ड द्वारा धारा 23 के अधीन बजट तैयार किया जाना है ;

                () वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे और वह समय जब धारा 25 के अधीन विवरणियां, विवरण और वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी ;

                () कोई अन्य विषय जिसे विहित किया जाना है या जो विहित किया जाए

32. विनियम बनाने की शक्ति-(1) प्रतिष्ठान, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में स्वयं को समर्थ बनाने के लिए, ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत हों

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-

                () प्रतिष्ठान की संपत्ति और निधियों, कार्यों और संकमों का प्रबन्ध ;

                () शासी बोर्ड और विद्या समिति के कारबार के संव्यवहार (जिसके अन्तर्गत उनके अधिवेशनों में गणपूर्ति है) और धारा 13 की उपधारा (3), धारा 15 की उपधारा (3) तथा धारा 17 की उपधारा (2) के अधीन वित्त समिति के कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रक्रिया ;

                () पदों का सृजन या समाप्ति तथा वृत्तिक, प्रशासनिक और अनुसचिवीय कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया ;

                () धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन विद्या समिति के सदस्यों की पदावधि तथा अन्य निर्बन्धन और शर्तें ; और

                () प्रतिष्ठान के लेखे, रजिस्टर और अन्य अभिलेख बनाए रखना

(3) प्रतिष्ठान द्वारा बनाए गए किसी विनियम का तब तक प्रभाव नहीं होगा जब तक उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित और राजपत्र में प्रकाशित नहीं कर दिया जाता, और केन्द्रीय सरकार, विनियम को अनुमोदित करते समय, उसमें ऐसे परिवर्तन कर सकेगी जो उसे आवश्यक प्रतीत हों

33. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

34. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, ऐसे आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी :

परंतु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा   जाएगा

35. निरसन और व्यावृत्ति-(1) कलाक्षेत्र प्रतिष्ठान अध्यादेश, 1993 (1993 का अध्यादेश संख्यांक 31) इसके द्वारा निरसित किया जाता है

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी

पहली अनुसूची

[धारा 3 का खंड () देखिए]

1. कलाक्षेत्र ललित कला महाविद्यालय

2. शिल्प शिक्षा और अनुसंधान केन्द्र, जिसमें निम्नलिखित हैं :-

                (i) बुनाई विभाग, और

                (ii) कलाकारी एकक

3. बेसेंट अरुण्डेल थियोसोफिकल सीनियर सेकेंडरी स्कूल

4. बेसेंट थियोसोफिकल हाई स्कूल

5. बेसेंट सांस्कृतिक केन्द्र होस्टल

दूसरी अनुसूची

(धारा 4 देखिए)

भाग

क्रम सं०

दस्तावेज सं०

तारीख

ग्राम

ताल्लुक

जिला

सर्वेक्षण सं०

पैमाइश सं०

विस्तार

1.

1541

16-8-49

तिरूवनमियूर

सैदापैट

चिंगलेपेट

-

1225/

0-3-8

1228

1-8-4

 

1-11-12 कौनी

2.

1542

16-8-49

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1227/

0-9-0 कौनी

0-75 सेन्टिआर

3.

1543

16-8-49

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

-

0-3-12

0-6-2

4.

768

12-5-54

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1219

0-3-12

(क्र० सं० 3 की परिशुद्धि में)

1224

0-6-2

5.

1544

16-8-49

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

947-सी

0-11-0

1226-सी

0-6-0

1226-डी

0-12-0

1-13-0

6.

1605

25-8-49

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1228 बी

0-6-10 कौनी

1226

 

1226 सी/1

0-55 सेन्टिआर

7.

1960

13-10-49

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1227 डी

0-3-12 कौनी

8.

1984

15-10-49

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1227 एफ

0-5-8 कौनी

9.

1324

26-11-49

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

ओ०एस०सं० 327 आर० एस० सं० 528

मकान और ग्राउं० सं० 18, एनडी-अप्पा ग्रमानी स्ट्रीट योया पुरम-13

1491 वर्ग फुट

10.

1324

26-11-49

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1229/सी

0-10-0 कौनी -1 एकड़ 14 सेन्टिआर

 

क्रम सं०

दस्तावेज सं०

तारीख

ग्राम

ताल्लुक

जिला

सर्वेक्षण सं०

पैमाइश सं०

विस्तार

11.

2752

11-12-50

तिरुवनमियर

सैदापेट

चिंगलेपेट

-

1219/-3

0-3-12 कौनी

1224/डी

55 सेन्टिआर

12.

2759

21-12-50

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1219

0-3-12 कौनी

 

-50 सेन्टिआर

13.

1865

2-9-52

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1228

0-3-8

1-8-4

1-11-12

-1 एकड़ 98 सेन्टिआर

14.

621

27-3-59

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

973-बी

0-7-0

972

5-7-0

961-सी/1

0-3-4

961-एल

0-9-10

964

2-5-2

 

9-0-0 कौनी-12 एकड़

15.

769

12-5-54  

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1219

1224

50 सेन्टिआर

16.

2068

24-8-56

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

979-सी

1-11-14 कौनी

17.

2151

3-9-56

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

974-

2-0-0 कौनी-2 एकड़ 66 सेन्टिआर

18.

863

अप्रैल, 1960

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

158/1

882-बी

 

882-डी

886-डी

957-

958-

963-

964

886-सी

964-भाग

                                                                                                                                               

क्रम सं०

दस्तावेज सं०

तारीख

ग्राम

ताल्लुक

जिला

सर्वेक्षण सं०

पैमाइश सं०

विस्तार

 

 

 

 

 

 

171/1

964

 

964-सी भाग -21 एकड़ 6 सेन्टिआर

 

 

 

 

 

 

170/3

975 जे

 

973

 

973 1

 

973 2

 

975-सी भाग

 

975 जी

 

795 एच

 

975 आई

975 एम

975 जी

975 एच 2

975 के

 

 

 

19.

291

6-2-63

तिरुवनमियर

सैदापेट

चिंगलेपेट

166/2

957-बी

962

963-बी

966

968-सी

22 एकड़ लगभग

20.

754

22-3-63

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

161/2

857

882-सी (भाग)

877

940

941

942-

955

965

961-एच

27 एकड़ 74 सेन्टिआर

लगभग

 

 

21.

1481

अप्रैल, 1968

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

178/3 (भाग)

178/8

1212

1214

1184

1185

1220

4 ग्राउंड

1988 वर्ग फुट

 

22.

1482

अप्रैल, 1968

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

178/3

178/8

यथोक्त

8 ग्राउंड

96 वर्ग फुट

 

उपरोक्त भूमियों पर सभी भवन, संस्थाएं, किसी भी प्रकार की सभी आस्तियां, जिनके अंतर्गत कलाक्षेत्र के बैंक अतिशेष और नकदी है

भाग

क्रम सं०

दस्तावेज सं०

वर्ष

ग्राम

ताल्लुक

जिला

सर्वेक्षण सं०

पैमाइश सं०

विस्तार

1.

448

1881

तिरूवनमियूर

सैदापैट

चिंगलेपेट

-

977, 1212

15-7-4 कौनी

1213, 1214

1215, 1216

1217, 1218

1219 और

1221

2.

1224

1908

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

968-सी

2-0-8 कौनी

3.

2382

1913

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

967, 968-सी

2-0-8 कौनी

4.

2559

1913

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

967, 968

2-0-8 कौनी

5.

4544

1919

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

532-डी533, 534               

3-7-8 कौनी

6.

2642

1920

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

967, 968 968-सी

4-1-0 कौनी

7.

1325

1927

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

533, 534 532

3-7-8 कौनी

8.

1966

1940

यथोक्त   

यथोक्त

यथोक्त

-

976-971-बी

2-2-0 कौनी

9.

2056

1941

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

984

0-4-6 कौनी

10.

2194

1941

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

984

0-4-6 कौनी

11.

532

1943

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

976-

971-बी

2-2-0 कौनी

12.

1471

1943

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

976-,

971-बी

6-2-0 कौनी

13.

1380

1937

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

191

1-4-0 कौनी

14.

1381

1937

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

191

1-4-0 कौनी

15.

1032

1945

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

532, 534

3-7-8 कौनी

16.

1744

1929

 

 

 

-

 

 

(मद 15 का मूल दस्तावेज)

17.

1134

1945

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

984, 984

0-4-6 कौनी

0-4-6 कौनी

 

18.

1224

1945

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

971-बी, 976-

6-2-0 कौनी

19.

1268

1945

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

970-बी, 970-डी

2-8-0 कौनी

20.

1598

1945

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

967, 968, 968-सी

4-1-0 कौनी

 

क्रम सं०

दस्तावेज सं०

वर्ष

ग्राम

ताल्लुक

जिला

सर्वेक्षण सं०

पैमाइश सं०

विस्तार

21.

1941

1945

तिरूवनमियूर

सैदापैट

चिंगलेपेट

-

1226-/1

1226-बी/1

0-5-15 कौनी

22.

1942

1945

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1226-बी/2

0-15-13 कौनी

23.

1988

1945

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

976-बी,979-

2-6-0 कौनी

24.

353

1947

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

976-/1

3-0-0 कौनी

25.

2275

1947

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

ओ०एस०सं०

267

0-5-12

268

 

0-15-6

269

 

3-10-2

270

0-0-12

0-0-12

270-

 

2-4-0 1-4-0

271

 

1-4-0 1-4-0

278

 

1-0-0 4-15-0

279

 

1-0-0 0-3-0

 

 

 

 

 

 

 

1226

0-1-12

1226-,

 

1226-बी,

0-5-13 2-1-10

967

 

26.

3776

1947

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1214-

3-9-6 कौनी

1217-   

 

1218-

6-6-10 कौनी

1218-बी

 

1212, 1213

 

1215, 1216

 

1221

 

27.

3777

1947

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

1212, 1213, 1215, 6-6-10 कौनी

 

 

 

 

 

 

 

1216, 1214-, 3-9-6 कौनी

1217, 1218ए, 1219बी

 

क्रम सं०

दस्तावेज सं०

वर्ष

ग्राम

ताल्लुक

जिला

सर्वेक्षण सं०

पैमाइश सं०

विस्तार

28.

 

 

साकार्पेट, मद्रास

रजिस्ट्रीकरण जिला,

चिंगलेपेट

(ओ०एस०सं०

695, 742)

10168/2

और 10170

मकान सं०

2/500

मियट स्ट्रीट

पी० टी०

एम० एस०

1,397 वर्ग फुट

 

 

 

उत्तरी मद्रास

मद्रास

यथोक्त

(ओ०एस०सं० 2506) आर०एस०सं० 3376

मकान सं०

117, लिंगी चैटी स्ट्रीट जी० टी० एम० एस०

1,331 वर्ग फुट

29.

1606

1950

तिरूवनमियूर

सैदापैट

यथोक्त

-

1214, 1217, 2-9-0 कौनी

 

 

 

 

 

 

 

1218, 1219बी

30.

909

1961

यथोक्त

यथोक्त

यथोक्त

-

500

0-8-0 कौनी

 

 

 

 

 

 

 

500

3 ग्रांउड

 

 

 

 

 

 

 

 

1,270 वर्ग फुट

उपरोक्त भूमियों पर सभी भवन, संस्थाएं और किसी भी प्रकार की सभी आस्तियां, जिनके अंतर्गत मद्रास नगर में कलाक्षेत्र और बेसेंट सेंटेनरी ट्रस्ट/होस्टल के बैंक अतिशेष और नकदी हैं

__________________________

Download the LatestLaws.com Mobile App
 
 
Latestlaws Newsletter
 

Publish Your Article

 

Campus Ambassador

 

Media Partner

 

Campus Buzz

 

LatestLaws Guest Court Correspondent

LatestLaws Guest Court Correspondent Apply Now!
 

LatestLaws.com presents: Lexidem Offline Internship Program, 2026

 

LatestLaws.com presents 'Lexidem Online Internship, 2026', Apply Now!

 
 
 

LatestLaws Partner Event : IJJ

 

LatestLaws Partner Event : Smt. Nirmala Devi Bam Memorial International Moot Court Competition

 
 
Latestlaws Newsletter