भारतीय नर्स परिषद् अधिनियम, 1947
(1947 का अधिनियम संख्यांक 48)1
[31 दिसम्बर, 1947]
भारतीय नर्स परिषद् का गठन करने के लिए
अधिनियम
नर्स, मिडवाइफ और स्वास्थ्य परिदर्शकों के लिए प्रशिक्षण का समान स्तर स्थापित करने के लिए भारतीय नर्स परिषद् का गठन करना समीचीन है;
अतः इसके द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता हैः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय नर्स परिषद् अधिनियम, 1947 है ।
2[(2) इसका विस्तार, जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय, संपूर्ण भारत पर है ।]
(3) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा ।
2. निर्वचन-इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो, -
(क) “परिषद्" से इस अधिनियम के अधीन गठित 3[परिषद्] अभिप्रेत है;
(ख) “विहित" से धारा 16 के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ग) “राज्य परिषद्" से किसी राज्य की विधि के अधीन राज्य में नर्स, मिडवाइफ या स्वास्थ्य परिदर्शकों के रजिस्ट्रीकरण को विनियमित करने के लिए गठित परिषद् (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) अभिप्रेत है;
(घ) “राज्य रजिस्टर" से किसी राज्य की विधि के अधीन रखा गया नर्स, मिडवाइफ या स्वास्थ्य परिदर्शकों का रजिस्टर अभिप्रेत है;
4। । । ।
3. परिषद् का गठन और संरचना-(1) केन्द्रीय सरकार एक परिषद् का, यथाशक्य शीघ्र गठन करेगी जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्ः-
(क) राज्य रजिस्टर में नामांकित एक नर्स, जो प्रत्येक राज्य परिषद् द्वारा निर्वाचित होगी;
5[(ख) इस खण्ड के प्रयोजन के लिए परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त ऐसी संस्थाओं के प्रधानों द्वारा, जिनमें-
(I) परिचर्या में विश्वविद्यालय की उपाधि प्राप्त करने के लिए, प्रशिक्षण दिया जाता है,
(II) परिचर्या-प्रशिक्षण और परिचर्या प्रशासन में प्रमाण-पत्रोत्तर पाठ्यक्रम के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाता है,
अपने में से निर्वाचित दो सदस्य;]
(ग) ऐसी संस्थाओं के प्रधानों द्वारा जिनमें स्वास्थ्य परिदर्शकों को प्रशिक्षण दिया जाता है, अपने में से निर्वाचित एक सदस्य;
(घ) भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा निर्वाचित एक सदस्य;
(ङ) भारतीय आयुर्विज्ञान संगम की केन्द्रीय परिषद् द्वारा निर्वाचित एक सदस्य;
(च) भारतीय प्रशिक्षित नर्स संगम द्वारा निर्वाचित एक सदस्य;
- इस अधिनियम का विस्तार दादरा और नागर हवेली पर 1963 के विनियम सं० 6 की धारा 2 और अनुसूची 1 द्वारा; पाण्डिचेरी पर 1963 के विनियम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 1 द्वारा और गोवा, दमण और दीव पर 1963 के विनियम सं० 11 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा किया गया है ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 2 द्वारा (1-12-1958 से) पूर्ववर्ती उपधारा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 3 द्वारा (1-12-1958 से) इण्डियन कौंसिल आफ नर्सिंग के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 3 द्वारा (1-12-1958 से) खण्ड (ङ) का लोप किया गया ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 4 द्वारा (1-12-1958 से) मूल खण्ड के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
5[(छ) राज्य रजिस्टर में नामांकित एक मिडवाइफ या सहायक नर्स-मिडवाइफ, जो नीचे वर्णित राज्यों के चार समूहों की प्रत्येक राज्य परिषदों द्वारा निर्वाचित होगी और राज्यों का प्रत्येक समूह चक्रानुक्रम में निम्नलिखित क्रम में लिया जाएगा, अर्थात्ः-
(I) केरल, मध्य प्रदेश, 1[उत्तर प्रदेश और हरियाणा;]
(II) आंध्र प्रदेश, बिहार, 2[महाराष्ट्र] और राजस्थान;
(III) 3[कर्नाटक], पंजाब, 4[हिमाचल प्रदेश] और पश्चिमी बंगाल;
(IV)असम, 5[गुजरात, 6[तमिलनाडु] और उड़ीसा;]
(ज) स्वास्थ्य सेवा महानिदेश, पदेन;
(झ) मुख्य प्रधान, मैट्रन, चिकित्सा निदेशालय, मुख्यालय, पदेन;
(ञ) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक के कार्यालय का मुख्य नर्सिंग अधीक्षक, पदेन;
(ट) मातृ और शिशु-कल्याण निदेशक, भारतीय रेडक्रास सोसाइटी, पदेन;
7[(ठ) संघ राज्यक्षेत्र से भिन्न प्रत्येक राज्य का मुख्य प्रशासनिक चिकित्सा अधिकारी (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो), पदेन;]
6[(ड) नीचे वर्णित दो समूहों के प्रत्येक राज्य का नर्सिंग सेवा अधीक्षक (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो), पदेन, राज्यों के प्रत्येक समूह को चक्रानुक्रम में निम्नलिखित क्रम में लिखा जाएगा, अर्थात्ः-
(I) आंध्र प्रदेश, असम, 1[महाराष्ट्र], मध्य प्रदेश, 5[तमिलनाडु] उत्तर प्रदेश, 8[पश्चिमी बंगाल और हरियाणा;]
(II) बिहार, 9[गुजरात], 3[हिमाचल प्रदेश], केरल, 2[कर्नाटक], उड़ीसा, पंजाब और राजस्थान;]
(ढ) केंद्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित चार सदस्य, जिनमें से कम से कम दो किसी राज्य रजिस्टर में नामांकित नर्सें, मिडवाइफ या स्वास्थ्य परिदर्शक होंगे और एक अनुभवी शिक्षा शास्त्री होगा;
6[(ण) संसद् द्वारा निर्वाचित तीन सदस्य, जिनमें से दो सदस्य, लोक सभा द्वारा अपने सदस्यों में से और एक सदस्य राज्य सभा द्वारा अपने सदस्यों में से निर्वाचित किया जाएगा ।]
(2) परिषद् का सभापति परिषद् के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित किया जाएगाः
परन्तु परिषद् के प्रथम गठन से पांच वर्ष तक, सभापति ऐसा व्यक्ति होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा परिषद् के सदस्यों में से नामनिर्देशित किया जाए और वह केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।
(3) परिषद् द्वारा किया गया कोई कार्य केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि परिषद् में कोई रिक्ति थी या उसके गठन में कोई त्रुटि थी ।
4. परिषद् का निगमन-धारा 3 के अधीन भारतीय नर्स परिषद् के नाम से गठित परिषद् शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाली एक निगमित निकाय होगी, जिसे जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा ।
- पंजाब रिआर्गेनाइजेशन एण्ड दिल्ली होई कार्ट (एडाप्टेशन आफ लाज आन यूनियन सबजेक्ट्स) आर्डर, 1968 द्वारा (1-11-1966 से) और उत्तर प्रदेश के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- बाम्बे रिआर्गेनाइजेशन (एडाप्टेशन आफ लाज आन यूनियन सबजेक्ट्स) आर्डर, 1961 द्वारा (1-5-1960 से) बाम्बे के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- मैसूर स्टेट (आल्टरेशन आफ नेम) (एडाप्टेशन आफ लाज आन यूनियन सबजेक्ट्स) आर्डर, 1974 द्वारा (1-11-1973 से) मैसूर के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- स्टेट हिमाचल प्रदेश (एडाप्टेशन आफ लाज आन यूनियन सबजेक्ट्स) आर्डर, 1973 द्वारा (25-1-1971 से) अंतःस्थापित ।
- बाम्बे रिआर्गेनाइजेशन (एडाप्टेशन आफ लाज आन यूनियन सबजेक्ट्स) आर्डर, 1961 द्वारा (1-5-1960 से) मद्रास और उड़ीसा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- मद्रास राज्य (नाम परिवर्तन) संघीय विषयों संबंधी विधियों का अनुकूलन) आदेश, 1970 द्वारा मद्रास के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 4 द्वारा (1-12-1958 से) पूर्ववर्ती खंड के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- पंजाब रिआर्गेनाइजेशन एण्ड दिल्ली होई कार्ट (एडाप्टेशन आफ लाज आन यूनियन सबजेक्ट्स) आर्डर, 1968 द्वारा (1-11-1966 से) और पश्चिमी बंगाल के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- बाम्बे रिआर्गेनाइजेशन (एडाप्टेशन आफ लाज आन यूनियन सबजेक्ट्स) आर्डर, 1961 द्वारा (1-5-1960 से) अंतःस्थापित ।
5. निर्वाचन का ढंग-(1) राज्य परिषदों द्वारा धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन निर्वाचन, ऐसे नियमों के अनुसार, किए जाएंगे जो संबंधित राज्य सरकारों द्वारा, इस निमित्त बनाए जाएं और जहां किसी निर्वाचन के बारे में कोई विवाद उठे वहां वह संबंधित राज्य सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिसका विनिश्चय अंतिम होगा ।
(2) उस उपधारा के अधीन अन्य निर्वाचन विहित रीति से किए जाएंगे और यदि ऐसे किसी निर्वाचन के बारे में कोई विवाद उठे तो वह केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा जिसका विनिश्चय अंतिम होगा ।
6. पदावधि और आकस्मिक रिक्तियां-(1) इस धारा के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, नामनिर्दिष्ट सभापति से भिन्न कोई निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट सदस्य अपने निर्वाचन या नामानिर्देशन की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए या जब तक उसका उत्तराधिकारी सम्यक् रूप से निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट न हो जाए तब तक, इन दोनों में से जो भी अवधि लंबी हो, पद पर बना रहेगा ।
(2) निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट सदस्य सभापति को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा किसी भी समय अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे सकता है, और तब ऐसे सदस्य का स्थान रिक्त हो जाएगा ।
(3) यदि कोई निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट सदस्य परिषद् की राय में पर्याप्त कारण के बिना परिषद् के क्रमवर्ती तीन अधिवेशनों से जहां उक्त प्रथम और तृतीय अधिवेशनों के बीच अन्तराल छह मास से अधिक है, अनुपस्थित रहता है तो यह समझा जाएगा कि उसने अपना स्थान रिक्त कर दिया ।
(4) परिषद में आकस्मिक रिक्ति, यथास्थिति, नए निर्वाचन या नामानिर्देशन द्वारा भरी जाएगी और उस रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट उस अवधि के शेष भाग के लिए ही पद धारण करेगा जिसके लिए वह सदस्य, जिसका स्थान वह ग्रहण करता है, निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट किया गया था ।
(5) परिषद् के सदस्य पुनःनिर्वाचन या पुनःनामनिर्देशन के पात्र होंगे ।
1। । । ।
7. अधिवेशन-(1) परिषद् का प्रथम अधिवेशन ऐसे समय और स्थान पर होगा जो सभापति द्वारा नियत किया जाए और तत्पश्चात् परिषद् का अधिवेशन ऐसे समय और स्थान पर होगा जो परिषद् द्वारा नियत किया जाए ।
(2) जब तक अन्यथा विहित न किया जाए गणपर्ति परिषद् के दस सदस्यों से होगी और परिषद् के सभी कार्यों का विनिश्चय उपस्थिति और मतदान करने वाले सदस्यों की बहुसंख्या द्वारा होगा ।
8. परिषद् के अधिकारी, समिति और सेवक-(1) परिषद् का सचिव (जो यदि परिषद् द्वारा समीचीन समझा जाए, कोषपाल के रूप में भी कार्य कर सकेगा), परिषद् के प्रथम गठन से तीन वर्ष तक, केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति होगा और वह केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।
(2) परिषद्-
(क) अपने सदस्यों में से एक व्यक्ति को उपसभापति निर्वाचित करेगी;
(ख) अपने सदस्यों में से एक कार्यकारिणी समिति तथा साधारण या विशेष प्रयोजन के लिए अन्य ऐसी समितियों का गठन करेगी, जैसी परिषद् इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे;
(ग) उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, एक सचिव की नियुक्ति कर सकेगी, जो यदि समीचीन समझा जाए, कोषपाल के रूप में भी कार्य करेगा;
(घ) ऐसे अन्य अधिकारी और सेवकों को नियुक्त या नामनिर्देशित करेगी, जिन्हें परिषद् इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे;
(ङ) सचिव से या किसी अन्य अधिकारी या सेवक से, उसके कर्तव्यों के सम्यक् रूप से पालन के लिए इतनी प्रतिभूति की अपेक्षा करेगी या लेगी, जितनी परिषद् आवश्यक समझे;
(च) केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, सभापति, उपसभापति और सदस्यों को संदत्त की जाने वाली फीस और भत्ते और परिषद् के अधिकारियों और सेवकों के वेतन और भत्ते नियत करेगी ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 5 द्वारा (1-12-1958 से) उपधारा (6) का लोप किया गया ।
9. कार्यकारिणी समिति-(1) कार्यकारिणी समिति में नौ सदस्य होंगे जिनमें से सात सदस्य परिषद् द्वारा अपने सदस्यों में से निर्वाचित किए जाएंगे ।
(2) परिषद् के सभापति और उपसभापति कार्यकारिणी समिति के पदेन सदस्य होंगे और उस समिति के क्रमशः सभापति और उपसभापति होंगे ।
(3) कार्यकारिणी समिति, इस अधिनियम द्वारा उसको प्रदत्त शक्तियों और अधिरोपित कर्तव्यों के अतिरिक्त, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगी, जो परिषद् इस निमित्त बनाए गए किसी विनियम द्वारा, उसे प्रदत्त या उस पर अधिरोपित करे ।
10. अर्हताओं को मान्यता-(1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अनुसूची 1[के भाग 1] में सम्मिलित अर्हताएं मान्यताप्राप्त अर्हताएं होंगी और अनुसूची के भाग 2 में सम्मिलित अर्हताएं मान्यताप्राप्त उच्चतर अर्हताएं होंगी ।
(2) 2॥। राज्यों में कोई प्राधिकरण, जिसको 2[राज्य परिषद् के, यदि कोई हो, परामर्श से] राज्य सरकार द्वारा अर्हता प्रदान करने के लिए मान्यता दी गई है, और वह साधारण परिचर्या, मिडवाइफरी, 2[सहायक परिचर्या-मिडवाइफरी], स्वास्थ्य परिदर्शन या लोक स्वास्थ्य परिचर्या में ऐसी अर्हता प्रदान करता है जो अनुसूची में सम्मिलित नहीं है तो वह परिषद् से ऐसी अर्हता को मान्यता दिए जाने के लिए आवेदन कर सकेगा और परिषद् यह घोषित कर सकेगी कि ऐसी अर्हता या किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् प्रदान किए जाने पर ही ऐसी अर्हता, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त अर्हता होगी ।
(3) परिषद् 3[ 4[भारत में किसी भी राज्यक्षेत्र के, जिस पर इस अधिनियम का विस्तार नहीं है,] या विदेश] 5॥। के, किसी प्राधिकरण के साथ जिसे 6[उस राज्यक्षेत्र] या देश की विधि द्वारा नर्स, मिडवाइफ या स्वास्थ्य परिदर्शकों का रजिस्टर रखने का कार्य सौंपा गया है अर्हताओं की मान्यता के लिए व्यतिकार की स्कीम तय करने के लिए बातचीत कर सकेगी और ऐसी स्कीम के अनुसरण में परिषद् यह घोषित कर सकेगी कि ऐसे 4[किसी राज्यक्षेत्र] या देश के किसी प्राधिकरण द्वारा प्रदान की गई अर्हता या किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् प्रदान किए जाने पर ही ऐसी अर्हता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त अर्हता होगीः
परन्तु किसी अर्हता की बाबत इस उपधारा के अधीन कोई घोषणा तब तक नहीं की जाएगी जब तक ऐसी 1[विदेशी] विधि और प्रथा के अनुसार जिसमें अर्हता दी गई है, 2[भारत के] 3॥। अधिवासी या उद्भव के तथा इस अधिनियम के अधीन मान्यताप्राप्त अर्हता धारण करने वाले व्यक्तियों को 3[उस देश में] प्रवेश करने और परिचर्या व्यवसाय करने के लिए अनुज्ञा न दी गई हो:
परन्तु यह और कि-
- राज्य परिषद् और भारत के बाहर किसी प्राधिकरण के बीच अर्हताओं की मान्यता के लिए कोई व्यतिकारी ठहराव, जो इस अधिनियम के प्रारंभ पर अस्तित्व में है, जब तक कि परिषद् अन्यथा विनिश्चय न करे, प्रवृत्त रहेगा; और
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 6 द्वारा (1-12-1958 से) अंतःस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा भारत के शब्दों का लोप किया गया ।
- 1950 के अधिनियम सं० 75 की धारा 2 द्वारा कतिपय शब्दों प्रतिस्थापित ।
- विधि के अनुकूलन (सं० 3) आदेश, 1956 द्वारा कतिपय शब्दों प्रतिस्थापित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा भारत के शब्दों का लोप किया गया ।
- विधि अनुकूलन (सं० 3) आदेश, 1956 द्वारा ऐसे राज्य के शब्दों स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1950 के अधिनियम सं० 75 की धारा 2 द्वारा राज्य या देश की शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1950 के अधिनियम सं० 75 की धारा 2 द्वारा किसी राज्य में शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1950 के अधिनियम सं० 75 की धारा 2 द्वारा उस राज्य या देश में शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
4[(II) भारत के उस राज्यक्षेत्र के, जिस पर इस अधिनियम का अपने प्रारंभ पर विस्तार नहीं था, किसी प्राधिकरण द्वारा, प्रदान की गई कोई अर्हता और जो उस राज्य की राज्य परिषद् द्वारा, उक्त तारीख को मान्यताप्राप्त थी जिस पर इस अधिनियम का बाद में विस्तार हुआ, उस राज्य में रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त अर्हता बनी रहेगी ।]
(4) उपधारा (2) और उपधारा (3) और धारा 14 और धारा 15 के उपबंध, आवश्यक परिवर्तनों सहित, परिषद् द्वारा प्रमाणपत्रोत्तर परिचर्या प्रशिक्षण की बाबत अनुदत्त किसी अर्हता को मान्यताप्राप्त उच्चतर अर्हता के रूप में की गई घोषणा को लागू होंगे ।
11. मान्यता का प्रभाव- 5[(1)] किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी-
(क) कोई मान्यताप्राप्त अर्हता किसी राज्य रजिस्टर में नामांकन के लिए पर्याप्त अर्हता होगी;
(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् कोई व्यक्ति किसी राज्य रजिस्टर में नर्स, मिडवाइफ 6[सहायक नर्स-मिडवाइफ], स्वास्थ्य परिदर्शक या लोक स्वास्थ्य नर्स के रूप में नामांकित किए जाने के लिए तब तक हकदार नहीं होगा जब तक कि उसके पास मान्यताप्राप्त अर्हता न होः
परन्तु ऐसा कोई व्यक्ति, जो उक्त तारीख के पहले से ही किसी राज्य रजिस्टर में नामांकित है, इस बात के होते हुए भी कि उसके पास मान्यताप्राप्त अर्हता नहीं है, इस प्रकार नामांकित बना रहेगाः
परन्तु यह और भी कि ऐसा कोई व्यक्ति, जो उक्त तारीख के ठीक पूर्व किसी राज्य के रजिस्टर में नामांकित किए जाने का हकदार था, किन्तु इस प्रकार नामांकित नहीं किया गया था, उक्त तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के पूर्व, इस निमित्त आवेदन करने पर, उस रजिस्टर में नामांकित किए जाने का हकदार होगा;
(ग) मान्यताप्राप्त उच्चतर अर्हता रखने वाला कोई व्यक्ति किसी राज्य के रजिस्टर में, जिसमें वह नामांकित है, अपनी अर्हता को अतिरिक्त अर्हता के रूप में प्रविष्ट कराने का हकदार होगा और उक्त तारीख के पश्चात् कोई व्यक्ति किसी राज्य के रजिस्टर में किसी ऐसी अर्हता को, जो मान्यताप्राप्त उच्चतर अर्हता नहीं है, अतिरिक्त अर्हता के रूप में प्रविष्ट कराने का हकदार नहीं होगा ।
7[(2) उपधारा (1) के खंड (ख) में किसी बात के होते हुए भी-
(क) भारत का कोई नागरिक, जिसके पास ऐसी अर्हता है, जो उसे किसी विदेश में किसी परिचर्या या मिडवाइफरी परिषद् (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) में रजिस्ट्रीकृत होने के लिए हकदार बनाती है, परिषद् के अनुमोदन से किसी राज्य के रजिस्टर में नामांकित किया जा सकता है और जहां किसी एक मामले में ऐसी अर्हता की बाबत परिषद् द्वारा अनुमोदन दे दिया गया है, वहां किसी अन्य ऐसे नागरिक के मामले में, जिसके पास उसी प्रकार की अर्हता है, राज्य के रजिस्टर में नामांकन के लिए, परिषद् के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी;
(ख) ऐसा व्यक्ति, जो भारत का नागरिक नहीं है और वह अध्यापन, अनुसंधान या पूर्त कार्य के लिए किसी राज्य में स्थित किसी अस्पताल या संस्था में नर्स, मिडवाइफ, सहायक नर्स-मिडवाइफ, अध्यापक या प्रशासक के रूप में नियोजित है, परिषद् के सभापति के अनुमोदन से राज्य के रजिस्टर में अस्थायी रूप में ऐसी अवधि के लिए नामांकित किया जा सकेगा जो उक्त सभापति द्वारा इस निमित्त आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएः
परन्तु ऐसे व्यक्ति का व्यवसाय केवल उस अस्पताल या संस्था तक ही सीमित होगा जिससे वह संलग्न है ।
4. 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 6 द्वारा (1-12-1958 से) पूर्ववर्ती खंड शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
5. 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 7 द्वारा (1-12-1958 से) धारा 11 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया ।
6. 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 7 द्वारा (1-12-1958 से) पुनःसंख्यांकित ।
7. 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 7 द्वारा (1-12-1958 से) अंतःस्थापित ।
12. पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण तथा परीक्षाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त करने की शक्ति- 1॥। किसी राज्य का प्रत्येक प्राधिकरण, जो मान्यताप्राप्त अर्हता या मान्यताप्राप्त उच्चतर अर्हता प्रदान करता है ऐसी अर्हता प्राप्त करने के लिए पूरे किए जाने वाले पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षणों और दी जाने वाली परीक्षाओं के बारे में, उस आयु के बारे में, जिसमें ऐसे पाठ्यक्रमों और ऐसी परीक्षाओं को पूरा किया जाना है और ऐसी अर्हता का प्रदान किया जाना अपेक्षित है और साधारणतया ऐसी अर्हता प्राप्त करने के लिए अपेक्षाओं के बारे में, ऐसी जानकारी देगा जिसकी परिषद् समय-समय पर अपेक्षा करे ।
13. निरीक्षण-(1) कार्यकारिणी समिति किसी प्रशिक्षण संस्था के रूप में मान्यताप्राप्त संस्था का निरीक्षण करने के लिए और किसी मान्यताप्राप्त अर्हता या मान्यताप्राप्त उच्चतर अर्हता प्रदान करने के प्रयोजन के लिए ली जाने वाली परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए 2[परिषद् के सदस्यों में से या अन्य] उतनी संख्या में निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी जितनी वह आवश्यक समझे ।
(2) इस धारा के अधीन नियुक्त निरीक्षक कार्यकारिणी समिति को प्रशिक्षण के प्रयोजन के लिए संस्था की उपयुक्तता और उसमें, यथास्थिति, प्रशिक्षण की पर्याप्तता के बारे में या परीक्षाओं की पर्याप्तता के बारे में रिपोर्ट देगा ।
(3) कार्यकारिणी समिति ऐसे रिपोर्ट की एक प्रति संबंधित प्राधिकरण या संस्था को भेजेगी और उस संबंधित प्राधिकरण या संस्था की टिप्पणियों सहित, यदि कोई हो, उसकी प्रतियां केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार को और राज्य की राज्य परिषद् को भी, जिसमें प्राधिकरण या संस्था स्थित हो, भेजेगी ।
14. मान्यता का वापस लिया जाना-(1) जहां, कार्यकारिणी समिति की रिपोर्ट पर, परिषद् को यह प्रतीत होता है कि-
(क) 1॥। किसी राज्य में किसी प्राधिकरण से मान्यताप्राप्त अर्हता प्राप्त करने के लिए पूरे किए जाने वाले पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण और दी जाने वाली परीक्षा या ऐसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश की शर्तें या ऐसी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से अपेक्षित प्रवीणता का स्तर इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम के अनुरूप नहीं हैं या उसके अपेक्षित स्तर से कम हैं, या
(ख) नर्स, मिडवाइफ, 3[सहायक नर्स-मिडवाइफ] या स्वास्थ्य परिदर्शकों के प्रशिक्षण के लिए, राज्य परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त संस्था, परिषद् की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करती है,
वहां परिषद्, उस राज्य की सरकार को, जिसमें, यथास्थिति, प्राधिकरण या संस्था स्थित है, इस प्रभाव का एक कथन भेजेगी और वह राज्य सरकार उसे ऐसी टिप्पणियों सहित, जो वह उचित समझे, संबंधित प्राधिकरण या संस्था को और खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी मामले में, राज्य परिषद् को भी, ऐसी अवधि की प्रज्ञापना सहित भेजेगी, जिसमें प्राधिकरण या संस्था, राज्य सरकार को अपना स्पष्टीकरण दे सकेगी ।
(2) स्पष्टीकरण की प्राप्ति पर या जहां नियत अवधि के भीतर कोई स्पष्टीकरण न दिया जाए वहां उस अवधि के अवसान पर, राज्य सरकार, परिषद् को अपनी सिफारिश भेजेगी ।
(3) परिषद् ऐसी अतिरिक्त जांच करने के पश्चात्, यदि कोई हो, जो वह ठीक समझे और उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी मामले में किसी ऐसी टिप्पणी पर विचार करने के पश्चात् जो राज्य परिषद् उसे भेजे-
(क) उस उपधारा के खण्ड (क) में निर्दिष्ट किसी मामले में यह घोषणा कर सकेगी कि संबंधित प्राधिकरण द्वारा प्रदान की गई अर्हता, मान्यताप्राप्त अर्हता केवल तभी मानी जाएगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व प्रदान की जाए, या
(ख) उक्त खण्ड (ख) में निर्दिष्ट किसी मामले में यह घोषणा कर सकेगी कि घोषणा में विनिर्दिष्ट तारीख से, मान्यताप्राप्त अर्हता रखने वाला कोई व्यक्ति, जिसने प्रशिक्षण और अध्ययन की अवधि, उसे अर्हता प्रदान किए जाने से पूर्व, संबंधित संस्था में व्यतीत की हो, केवल उसी राज्य में रजिस्ट्रीकृत होने के लिए हकदार होगा, जिसमें वह संस्था स्थित है ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा भारत के शब्दों का लोप किया गया ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 8 द्वारा (1-12-1958 से) अंतःस्थापित ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 9 द्वारा (1-12-1958 से) अंतःस्थापित ।
(4) परिषद् यह घोषणा कर सकेगी कि ऐसी कोई मान्यताप्राप्त अर्हता, जो 1॥। राज्यों के बाहर प्रदान की गई हो, केवल तभी मान्ताप्राप्त अर्हता होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व प्रदान की जाए ।
15. घोषणा करने का ढंग- 1[(1)] धारा 10 या धारा 14 के अधीन सभी घोषणाएं उस प्रयोजन के लिए बुलाए गए परिषद् के अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा की जाएंगी, और उन्हें तुरन्त राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा ।
2[(2) केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अनुसूची को इस प्रकार संशोधित करेगी जिससे कि उसे धारा 10 या धारा 14 के अधीन की गई किसी घोषणा के अनुरूप बनाया जा सके ।]
3[15क. भारतीय नर्स रजिस्टर-(1) परिषद्, नर्स, मिडवाइफ, सहायक मिडवाइफ और स्वास्थ्य परिदर्शकों का एक रजिस्टर विहित रीति से रखवाएगी जो भारतीय नर्स रजिस्टर कहलाएगा और उसमें उन सभी व्यक्तियों के नाम होंगे जो उस समय किसी राज्य के रजिस्टर में नामांकित हैं ।
(2) परिषद् के सचिव का यह कर्तव्य होगा कि वह इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार भारतीय नर्स रजिस्टर रखे और समय-समय पर उस रजिस्टर को पुनरीक्षित करे और उसे भारत के राजपत्र में और ऐसी अन्य रीति से, जो विहित की जाए, प्रकाशित करे ।
(3) ऐसा रजिस्टर, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) के अर्थ में लोक दस्तावेज समझा जाएगा और भारत के राजपत्र में प्रकाशित प्रति द्वारा साबित किया जा सकेगा ।
15ख. राज्य-रजिस्टरों की प्रतियों का दिया जाना-प्रत्येक राज्य परिषद्, प्रत्येक वर्ष के अप्रैल के प्रथम दिन के पश्चात्, यथाशक्यशीघ्र परिषद् को राज्य-रजिस्टर की बीस मुद्रित प्रतियां देगी और राज्य-रजिस्टर में समय-समय पर किए गए सभी परिवर्धनों और अन्य संशोधनों की इत्तिला परिषद् को अविलंब देगी ।]
16. विनियम बनाने की शक्ति-(1) परिषद्, साधारणतया, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए ऐसे विनियम 4[राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,] बना सकेगी जो इस अधिनियम से असंगत न हों, और विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगेः-
(क) परिषद् की संपत्ति का प्रबन्ध और उसके लेखाओं का रखा जाना और लेखापरीक्षा;
(ख) वह रीति, जिससे धारा 5 की उपधारा (2) और धारा 8 की उपधारा (2) के खण्ड (क) में निर्दिष्ट निर्वाचन किए जाएंगे;
(ग) परिषद् के अधिवेशन बुलाना और आयोजित करना, वह समय जब और वह स्थान जहां ऐसे अधिवेशन किए जाएंगे और उनमें कार्य संचालन और गणपू्र्ति के लिए आवश्यक सदस्य संख्या;
(घ) कार्यकारिणी समिति के कृत्यों को विहित करना, उसके अधिवेशन बुलाना और आयोजित करना, वे समय, जब और वे स्थान, जहां ऐसे अधिवेशन किए जाएंगे और उनमें कार्य संचालन और गणपूर्ति के लिए आवश्यक सदस्य संख्या;
(ङ) परिषद् के सभापति और उपसभापति की शक्तियां और कर्तव्य विहित करना;
1[(च) परिषद् के सचिव और अन्य अधिकारियों और सेवकों की पदावधि और शक्तियां और कर्तव्य विहित करना;
(चच) निरीक्षकों की शक्तियां और कर्तव्य विहित करना;]
(छ) नर्स, मिडवाइफ और स्वास्थ्य परिदर्शकों के प्रशिक्षण के लिए, नर्स, मिडवाइफ और स्वास्थ्य परिदर्शकों के अध्यापकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रमों के लिए और परिचर्या प्रशासन में प्रशिक्षण के लिए मानक पाठ्यक्रम विहित करना;
(ज) पूर्वोक्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश की शर्तें विहित करना;
(झ) इस अधिनियम के अधीन अर्हता की मान्यता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा स्तर और पूरी की जाने वाली अन्य अपेक्षाओं को विहित करना;
(ञ) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 10 द्वारा (1-12-1958 से) धारा 15 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 10 द्वारा (1-12-1958 से) अंतःस्थापित ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 11 द्वारा (1-12-1958 से) अंतःस्थापित ।
- 1986 के अधिनियम सं० 4 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा (15-5-1986 से) अंतःस्थापित ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 12 द्वारा (1-12-1958 से) मूल खण्ड (च) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
(2) परिषद् का पहली बार गठन करने के लिए, सभापति धारा 5 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट निर्वाचन करने के लिए, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, विनियम बना सकेगा और इस प्रकार बनाया गया कोई विनियम परिषद् द्वारा इस धारा के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए परिवर्तित या विखंडित किया जा सकता है ।
4[(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए समत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभावी हो जाएगा । किंतु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ेगा ।]
17. [1947 के आर्डिनेंस संख्यांक 13 का निरसन]-भारतीय नर्स परिषद् (संशोधन) अधिनियम, 1957 (1957 का 45) की धारा 13 द्वारा (1-12-1958 से) निरसित ।
2[अनुसूची
(धारा 10 और धारा 11 देखिए)
भाग 1
मान्यताप्राप्त अर्हताएं
क-साधारण परिचर्या
निम्नलिखित प्राधिकरणों में से किसी के द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र (जिसमें सीनियर और जूनियर प्रमाणपत्र सम्मिलित हैं), डिप्लोमे या उपाधियां, अर्थात्:
1. 1[तमिलनाडु सरकार] द्वारा नियुक्त परीक्षा बोर्ड ।
2. बाम्बे नर्सेस मिडवाइव्स एण्ड हैल्थ विजिटर्स काउन्सिल ।
3. बाम्बे प्रसिडेंसी नर्सिंग एसोसिएशन (जब 1 जनवरी, 1936 के पहले जारी किया गया हो) ।
4. बंगाल नर्सिंग काउन्सिल (जब 15 अगस्त, 1947 के पहले जारी किया गया हो) ।
5. उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी ।
6. उत्तर प्रदेश नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स काउन्सिल ।
7. स्टेट बोर्ड आफ मेडिकल एक्जामिनेशन्स, उत्तर प्रदेश (जब 1 जनवरी, 1927 के पहले जारी किया गया हो) ।
8. (क) पंजाब नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउन्सिल (जब 15 अगस्त, 1947 के पहले या 26 जनवरी, 1950 के पश्चात् जारी किया गया हो);
(ख) ईस्ट पंजाब नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउन्सिल (जब 26 जनवरी, 1950 के पहले जारी किया गया हो) ।
9. बिहार मेडिकल एक्जामिनेशन बोर्ड (जब 1 जनवरी, 1938 के पहले जारी किया गया हो) ।
10. बिहार नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउन्सिल ।
11. मध्य प्रदेश मेडिकल एक्जामिनेशन बोर्ड (जब 1 अप्रैल, 1950 के पहले जारी किया गया हो) ।
12. असम नर्सेस, मिडवाइव्स एण्ड हैल्थ विजिटर्स काउन्सिल ।
13. उड़ीसा मेडिकल एक्जामिनेशन बोर्ड ।
- 1957 के अधिनियम सं० 45 की धारा 14 द्वारा (1-12-1958 से) मूल अनुसूची के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- मद्रास राज्य (नाम परिवर्तन) (संघीय विषयों से संबंधित विधियों का अनुकूलन) आदेश, 1970 द्वारा (14-1-1969 से) प्रतिस्थापित ।
14. मिड इंडिया (यूनाईटेड) बोर्ड आफ एक्जामिनर्स फार नर्सेस (जब 1 जनवरी, 1947 के पहले जारी किया गया हो) ।
15. ज्वाइंट मिशनरी बोर्ड फार एक्जामिनेशन आफ नर्सेस (मराठी क्षेत्र) जब 1 जनवरी, 1934 के पहले जारी किया गया हो) ।
16. नार्थ इण्डिया यूनाईटेड बोर्ड आफ एक्जामिनर्स फार मिशन एण्ड अदर हास्पिटल (जब 2[1 जनवरी, 1942] के पहले जारी किया गया हो) ।
17. एक्जामिनिंग बोर्ड आफ दि नर्सेस आक्जिलरी आफ दि क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इण्डिया (दक्षिण भारत शाखा) ।
18. सिंध नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स काउन्सिल (जब 15 अगस्त, 1947 के पहले जारी किया गया हो) ।
19. वेस्ट बंगाल नर्सिंग काउन्सिल ।
20. दिल्ली विश्वविद्यालय ।
21. मद्रास विश्वविद्यालय ।
22. बंगाल स्टेट मेडिकल फैकल्टी (जब 1 जनवरी, 1942 के पहले जारी किया गया हो) ।
23. मिड इण्डिया बोर्ड आफ एक्जामिनर्स आफ नर्सेस आक्जिलरी आफ क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इण्डिया ।
24. एक्जामिनेशन बोर्ड आफ मिलिटरी मेडिकल सर्विसेस (जब 18 अगस्त, 1955 के पहले जारी किया गया हो) ।
25. आर्मड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेस एक्जामिनेशन बोर्ड ।
26. मध्य प्रदेश स्टेट नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउन्सिल ।
27. 1[कर्नाटक] सरकार द्वारा नियुक्त परीक्षक बोर्ड ।
28. हैदराबाद सरकार द्वारा नियुक्त परीक्षक बोर्ड (जब 1 नवम्बर, 1956 के पहले जारी किया गया हो) ।
29. आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त परीक्षक बोर्ड (जब 1 नवम्बर, 1956 के पहले जारी किया गया हो) अथवा आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा (जब 1 नवम्बर, 1956 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
30. ट्रावनकोर-कोचीन नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स काउन्सिल ।
31. विदर्भ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउन्सिल (जब 15 फरवरी, 1976 के पहले जारी किया गया हो) ।
2[32. उड़ीसा नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स एक्जामिनेशन बोर्ड ।]
3[33. महाकौशल नर्सेस काउन्सिल ।]
34. बाम्बे नर्सिंग काउन्सिल ।
35. केरल सरकार द्वारा नियुक्त परीक्षक बोर्ड ।
4[36. मेडिकल एण्ड सर्जिकल स्कूल, गोवा (जब 1 जनवरी, 1966 को या उसके पहले अनुदत्त किया गया हो) ।]
5[37. केरल एक्जामिनेशन बोर्ड/केरल नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स काउन्सिल ।
38. महाराष्ट्र नर्सिंग काउन्सिल (जब 15 फरवरी, 1962 को या उसके पश्चात् अनुदत्त किया गया हो) ।
39. गुजरात नर्सिंग काउन्सिल ।
40. (क) ट्रावनकोर सरकार,
(ख) ट्रावनकोर लोक सेवा आयोग,
(ग) कोचीन सरकार,
(घ) कोचीन लोक सेवा आयोग,
(ङ) ट्रावनकोर-कोचीन सरकार,
(च) ट्रावनकोर-कोचीन लोक सेवा आयोग, (जब 31 दिसम्बर, 1953 के पहले अनुदत्त किया गया हो) ।]
- अधिसूचना सं० का०आ० 349, तारीख 22-1-1962, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 333, द्वारा 1940 के जनवरी के प्रथम दिन के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- मैसूर स्टेट (आल्टरेशन आफ नेम) (एडाप्टेशन आफ लाज आन यूनियन सब्जेक्ट्स) आर्डर, 1974 द्वारा (1-11-1973 से) मैसूर के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1446, तारीख 19-6-1959, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1462 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1577, तारीख 6-10-1966, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1827 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 3042, तारीख 6-10-1966, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 2879 द्वारा पूर्वतन प्रविष्टि के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2682, तारीख 10-9-1963, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3417 द्वारा अन्तःस्थापित ।
1[41. उस्मानिया विश्वविद्यालय ।]
2[42 इन्दौर विश्वविद्यालय (जब 1 अप्रैल, 1965 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।]
3[43. एक्जामिनिंग बोर्ड आफ दि नर्सेस लीग आफ दि क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया (साउथ इंडिया ब्रांच) (जब 28 अक्तूबर, 1965 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।]
44. मिड इंडिया बोर्ड आफ एक्जामिनर्स आफ दि नर्सेस लीग आफ दि क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया (जब 1 जनवरी, 1966 का या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
45. मुम्बई विश्वविद्यालय (जब 1 अप्रैल, 1964 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
46. राजस्थान नर्सिंग काउन्सिल (जब 1 अप्रैल, 1964 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।]
4[47. विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (जब वर्ष 1964 में जारी किया गया हो) ।]
5[48. श्रीमती नत्थी बाई दामोदर, थेकरसे विश्वविद्यालय, बम्बई (जब 15 अप्रैल, 1969 को या उसके बाद प्रदान की गई हो) ।]
ख-मिडवाइफरी
निम्नलिखित प्राधिकरणों में से किसी के द्वारा मिडवाइफरी में जारी किए गए प्रमाणपत्र, डिप्लोमे या उपाधियां, अर्थात्:
1. मद संख्यांक 17 में उल्लिखित प्राधिकरण के सिवाय भाग क में उल्लिखित किसी प्राधिकरण द्वारा ।
2. पंजाब सेंट्रल मिडवाइवव्स बोर्ड (जब 15 अगस्त, 1947 के पहले जारी किया गया हो) ।
3. मिड इण्डिया (यूनाइटेड) बोर्ड आफ एक्जामिनर्स फार मिडवाइफरी (जब 1 जनवरी, 1947 के पहले जारी किया गया हो) ।
4. नेशनल एसोशिएशन फार सप्लाइंग फिमेल मेडिकल एड टु दि विमेन आफ इण्डिया (जब 1 अक्तूबर, 1949 के पहले जारी किया गया हो) ।
5. नार्थ-वेस्ट फ्रन्टियर प्राविन्स सेंट्रल मिडवाइव्स बोर्ड (जब 15 अगस्त, 1947 के पहले जारी किया गया हो) ।
6. कस्तूरबा गांधी नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट ।
7. स्वास्थ्य विभाग, मद्रास (जब 31दिसम्बर, 1952 के पहले जारी किया गया हो) ।
6[8. उड़ीसा नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स एक्जामिनेशन बोर्ड ।]
7[9. महाकौशल नर्सेस काउन्सिल ।
10. बाम्बे नर्सिंग काउन्सिल ।
11. केरल सरकार द्वारा नियुक्त परीक्षक बोर्ड ।]
1[12. नार्थ इण्डिया यूनाइटेड बोर्ड आफ एक्जामिनर्स फार मिशन एण्ड अदर हास्पिटलस (जब 1 जनवरी, 1946 के पहले जारी किया गया हो) ।]
2[13. मेडिकल एण्ड सर्जिकल स्कूल, गोवा (जब 1 जनवरी, 1966 को या उसके पहले जारी किया गया हो) ।]
3[14. केरल एक्जामिनेशन बोर्ड/केरल नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स काउन्सिल ।
15. महाराष्ट्र नर्सिंग काउन्सिल (जब 15 फरवरी, 1962 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
4[16. (क) ट्रावनकोर सरकार;
- अधिसूचना सं० का०आ० 3042, तारीख 6-10-1966, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 2879 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2186, तारीख 11-6-1968 भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3062 द्वारा प्रतिस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2187, तारीख 11-6-1968, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3063 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1628, तारीख 25-4-1969, भारत का रजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1555 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 4509, तारीख 30-9-1975, भारत का रजपत्र, 1975, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3172 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1446, तारीख 19-6-1959, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1462 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1577, तारीख 9-6-1960, भारत का रजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1827 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 349, तारीख 22-1-1962, भारत का रजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 333 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 3042, तारीख 6-10-1966, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 2879 द्वारा पूर्वतन प्रतिविष्टि के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2682, तारीख 10-9-1963, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3417 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 267, तारीख 13-1-1965, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 289 द्वारा प्रतिस्थापित ।
(ख) ट्रावनकोर लोक सेवा आयोग;
(ग) कोचीन सरकार;
(घ) कोचीन लोक सेवा आयोग;
(ङ) ट्रावनकोर-कोचीन सरकार;
(च) ट्रावनकोर-कोचीन लोक सेवा आयोग (जब 31 दिसम्बर, 1953 को या उसके पहले जारी किया गया हो) ।]]
5[17. गुजरात नर्सिंग काउन्सिल ।]
6[18. एक्जामिनिंग बोर्ड आफ दि नर्सेस लीग आफ दि क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया (साउथ इंडिया ब्रान्च) (जब 28 अक्तूबर, 1965 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
19. मिड इंडिया बोर्ड आफ एक्जामिनर्स आफ दि नर्सेस लीग आफ दि क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया (जब 1 जनवरी, 1966 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
20. राजस्थान नर्सिंग काउन्सिल (जब 1 अप्रैल, 1964 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।]
ग-सहायक परिचर्या-मिडवाइफरी
निम्नलिखित प्राधिकरणों में से किसी के द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र, अर्थात्:
1. मद संख्याक 3, 4, 7, 9, 11, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22, 24 और 25 में उल्लिखित प्राधिकरणों के सिवाय भाग क में उल्लिखित किसी प्राधिकरण द्वारा ।
2. हिमाचल प्रदेश प्रशासन द्वारा नियुक्त परीक्षा बोर्ड ।
7[3. उड़ीसा नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स एक्जामिनेशन बोर्ड ।]
8[4. महाकौशल नर्सेस काउन्सिल ।
5. बाम्बे नर्सिंग काउन्सिल ।
6. केरल सरकार द्वारा नियुक्त परीक्षक बोर्ड ।]
1[7. केरल एक्जामिनेशन बोर्ड/केरल नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स काउन्सिल ।
8. कस्तूरबा गांधी नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट (जब 1 जनवरी, 1955 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
9. महाराष्ट्र नर्सिंग काउन्सिल (जब 15 फरवरी, 1962 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
10. गुजरात नर्सिंग काउन्सिल ।]
2[11. एक्जामिनिंग बोर्ड आफ दि नर्सेस लीग आफ दि क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया (साउथ इंडिया ब्रांच) (जब 28 अक्तूबर, 1965 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
12. मिड इंडिया बोर्ड आफ एक्जामिनर्स आफ दि नर्सेस लीग आफ दि क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया (जब 1 जनवरी, 1966 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
13. राजस्थान नर्सिंग काउन्सिल (जब 1 अप्रैल, 1964 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
घ-स्वास्थ्य परिदर्शक
निम्नलिखित प्राधिकरणों में से किसी के द्वारा जारी किया गया स्वास्थ्य परिदर्शक प्रमाणपत्र या डिप्लोमा, अर्थात्ः
1. गवर्नमेंट ट्रेनिंग स्कूल फार हैल्थ विजिटर्स, मद्रास ।
2. सर जॉन एंडरसन हैल्थ स्कूल, कलकत्ता ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 267, तारीख 13-1-1965, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 289 द्वारा प्रतिस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2187, तारीख 11-6-1968, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3063 द्वारा अंतःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1446, तारीख 19-6-1959, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1462 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1577, तारीख 9-6-1960, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1827 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2682, तारीख 10-9-1963, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3417 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1577, तारीख 9-6-1960, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1827 द्वारा अन्तःस्थापित ।
3. उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी ।
4. उत्तर प्रदेश नर्सेस एंड मिडवाइव्स काउन्सिल ।
5. गवर्नमेंट हैल्थ स्कूल, नागपुर ।
6. असम नर्सेस, मिडवाइव्स एण्ड हैल्थ विजिटर्स काउन्सिल ।
7. लेडी रीडिंग हैल्थ स्कूल, दिल्ली ।
8. बाम्बे नर्सेस, मिडवाइव्स एण्ड हैल्थ विजिटर्स काउन्सिल ।
9. बंगाल नर्सिंग काउन्सिल (जब 15 अगस्त, 1947 के पहले जारी किया गया हो) ।
10. पंजाब हैल्थ स्कूल (जब 15 अगस्त, 1947 के पहले जारी किया गया हो) ।
11. वेस्ट बंगाल नर्सिंग काउन्सिल ।
12. पंजाब स्टेट मेडिकल फैकल्टी ।
13. बंगाल स्टेट मेडिकल फैकल्टी (जब 1 जनवरी, 1942 के पहले जारी किया गया हों) ।
14. बिहार नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउन्सिल ।
2[15. महाकौशल नर्सेस काउन्सिल ।
16. बाम्बे नर्सिंग काउन्सिल ।
17. केरल सरकार द्वारा नियुक्त परीक्षक बोर्ड ।
18. डा० एच०सी० मुखर्जी मेमोरियल हैल्थ स्कूल, सिंगूर, वेस्ट बंगाल ।]
1[19. केरल एक्जामिनेशन बोर्ड/केरल नर्सेस एंड मिडवाइव्स काउन्सिल ।
20. महाराष्ट्र नर्सिंग काउन्सिल (जब 15 फरवरी, 1962 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।
21. गुजरात नर्सिंग काउन्सिल ।]
2[22. राजस्थान नर्सिंग काउन्सिल (जब 1 अप्रैल, 1964 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।]
भाग 2
मान्यताप्राप्त उच्चतर अर्हताएं
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अर्हता जारी करने वाले प्राधिकरण का नाम |
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अर्हता |
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1. |
3[तमिलनाडु सरकार] द्वारा नियुक्त परीक्षा बोर्ड |
1. |
डिप्लोमा इन नर्सिंग सिस्टर ट्यूटर कोर्स । |
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2. |
डिप्लोमा इन नर्सिंगनर्सिंग एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स । |
|
2. |
कालेज आफ नर्सिंग, नई दिल्ली |
1. |
पोस्ट सर्टीफिकेट कोर्स इन पब्लिक हेल्थ नर्सिंग (जब 31 दिसम्बर, 1963 के पहले जारी किया गया हो) ।
|
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|
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2. |
कम्बाइंड पोस्ट सर्टीफिकेट कोर्स इन टीचिंग एण्ड नर्सिंग एडमिनिस्ट्रेशन (जब 31 अगस्त, 1957 के पहले जारी किया गया हो) । |
|
|
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3. |
सर्टीफिकेट आफ एक्जामिनेशन इन वार्ड सिस्टर्स कोर्स । |
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|
|
4. |
सर्टीफिकेट आफ एक्जामिनेशन इन नर्सिंग एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स 4[(जब 30 जून, 1961 को या उसके पहले अनुदत्त किया गया हो)] । |
|
|
|
5. |
सर्टीफिकेट आफ एक्जामिनेशन इन सिर्स्टस ट्यूटर कोर्स 5(जब 30 जून, 1961 को या उसके पहले अनुदत्त किया गया हो)] ।
|
|
|
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6. |
सर्टीफिकेट आफ एक्जामिनेशन इन मिडवाइफ ट्यूटर कोर्स 5(जब 30 जून, 1961 को या उसके पहले अनुदत्त किया गया हो)] । |
|
|
|
57. |
डिप्लोमा इन नर्सिंग एडमिनिस्ट्रेशन । |
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8. |
नर्सिंग ट्यूटर्स डिप्लोमा । |
|
|
|
9. |
मिडवाइफ ट्यूटर्स डिप्लोमा ।] |
|
3. |
(मिशनरी) क्रिश्चियन मेडिकल कालेज स्कूल आफ नर्सिंग, वैलोर |
|
डिप्लोमा इन टीचिंग एण्ड सुपर्विजन (सिर्स्टस ट्यूटर कोर्स) । |
|
|
अर्हता जारी करने वाले प्राधिकरण का नाम |
|
अर्हता |
|
4. |
स्कूल आफ नर्सिंग, क्रिश्चियन मेडिकल कालेज, वैलोर । |
|
डिप्लोमा इन टीचिंग एण्ड सुपर्विजन (सिर्स्टस ट्यूटर कोर्स) |
|
1। |
। |
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। |
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6. |
दि आल इंडिया इन्स्टीटृयूट आफ मैंटल हैल्थ, बंगलौर । |
|
डिप्लोमा इन साइकायाट्रिक नर्सिंग । |
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7. |
आल इंडिया इन्स्टीट्यूट आफ हाईजिन एण्ड पब्लिक हैल्थ, कलकत्ता । |
|
डिप्लोमा इन पब्लिक हैल्थ नर्सिंग । |
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8. |
लोक स्वास्थ्य विभाग, मद्रास । |
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डिप्लोमा इन पब्लिक हैल्थ नर्सिंग । |
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9. |
ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन आफ इंडिया । |
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डिप्लोमा इन ट्यूबरकुलोसिस नर्सिंग । |
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2[10. |
बाम्बे नर्सिंग काउन्सिल । |
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(क) डिप्लोमा इन पेडियाट्रिक नर्सिंग । |
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(ख) डिप्लोमा इन पब्लिक हैल्थ नर्सिंग । |
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11. |
मिड इंडिया बोर्ड ग्रेजुएट फार नर्सेस । |
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(क) डिप्लोमा आफ वार्ड सिस्टर्स कोर्स । |
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(ख) डिप्लोमा आफ सिस्टर ट्यूटर्स कोर्स । |
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(ग) डिप्लोमा इन नर्सिंग एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स । |
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(घ) डिप्लोमा इन पब्लिक हैल्थ नर्सिंग । |
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3[12. |
लेडी रीडिंग हैल्थ स्कूल, दिल्ली । |
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सर्टीफिकेट इन पब्लिक हैल्थ नर्सिंग ।] |
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4[13. |
केरल विश्वविद्यालय । |
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डिप्लोमा इन टीचिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन इन नर्सिंग (जब 1 अक्तूबर, 1964 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) । |
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14. |
उत्तर प्रदेश नर्सेस एण्ड मिडवाइव्स काउन्सिल स्टेट मेडिकल फैकल्टी, उत्तर प्रदेश । |
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सर्टीफिकेट इन वार्ड एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स । |
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15. |
महाराष्ट्र नर्सिंग काउन्सिल । |
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डिप्लोमा इन पब्लिक हैल्थ नर्सिंग ।] |
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5[16. |
महाराष्ट्र नर्सिंग काउन्सिल । |
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डिप्लोमा इन पेडियाट्रिक नर्सिंग । |
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17. |
[कर्नाटक] स्टेट बोर्ड आफ एक्जामिनर्स फार नर्सेस । |
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सर्टीफिकेट इन वार्ड एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स । |
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18. |
केरल विश्वविद्यालय । |
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नर्सिंग में बी०एससी० उपाधि ।] |
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7[19. |
मिड इंडिया बोर्ड आफ एक्जामिनर्स आफ नर्सेस लीग आफ दि क्रिश्चियन मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया । |
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डिप्लोमा इन वार्ड सिस्टर्स कोर्स (जब 1 जनवरी, 1966 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) । |
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डिप्लोमा इन सिस्टर्स ट्यूटर कोर्स । |
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डिप्लोमा इन नर्सिंग एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स । |
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डिप्लोमा इन पब्लिक नर्सिंग । |
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20. |
डाइरेक्टर आफ हैल्थ एण्ड मेडिकल सर्विसेस (हैल्थ), गुजरात । |
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डिप्लोमा इन पब्लिक हैल्थ (नर्सिंग) (जब 18 मई, 1964 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) । |
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21. |
मैसूर स्टेट बोर्ड आफ एक्जामिनेशन फार पोस्ट बाक्स कोर्स इन नर्सिंग एजूकेशन । |
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डिप्लोमा इन नर्सिंग एजुकेशन (जब 1 मई, 1964 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।] |
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8[22. |
होली फैमिली हास्पिटल, नई दिल्ली । |
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वार्ड सिस्टर डिप्लोमा (जब 1 जुलाई, 1965 को या उसके पश्चात् जारी किया गया हो) ।] |
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- अधिसूचना सं० का०आ० 2682, तारीख 10-9-1963, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3417 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2187, तारीख 11-6-1968, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3063 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- मद्रास राज्य (नाम परिवर्तन) (संघीय विषयों संबंधी विधियों का अनुकूलन) आदेश, 1970 द्वारा (14-1-1969 से) मद्रास सरकार के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1391, तारीख 15-4-1964, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1643 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1703, तारीख 12-7-1961, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1652 द्वारा क्रम संख्यांक 5 की प्रविष्टियों का लोप किया गया ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1577, तारीख 9-6-1960, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1827 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 350, तारीख 22-1-1962, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 334 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2682, तारीख 10-9-1963, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3417 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 3042, तारीख 6-10-1966, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 2879 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- मैसूर स्टेट (आल्टरेशन आफ नेम) (एडाप्टेशन आफ लॉज आन यूनियन सबजेक्ट्स) आर्डर, 1974 द्वारा (1-11-1973 से) मैसूरञ्ज् के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 2187, तारीख 11-6-1968, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 3063 द्वारा अन्तःस्थापित ।
- अधिसूचना सं० का०आ० 1628, तारीख 25-4-1969, भारत का राजपत्र, भाग 2, अनुभाग 3 (त्त्), पृष्ठ 1555 द्वारा अन्तःस्थापित ।

