गणेश फ्लोर मिल्स कंपनी लिमिटेड (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1984
(1984 का अधिनियम संख्यांक 16)
[30 मार्च, 1984]
स्वास्थ्यप्रद वनस्पति और परिष्कृत खाद्य तेलों, पोषक खाद्यों और अन्य उपभोक्ता-वस्तुओं
का उचित कीमतों पर जनता को प्रदाय करना सुनिश्चित करने के लिए अपेक्षित लोक
स्वामित्व के या नियंत्रित यूनिटों के केन्द्रकों को कायम रखने और उन्हें सुदृढ़ करने
की दृष्टि से, जिससे कि संविधान के अनुच्छेद 39 के खंड (ख) और खंड (ग)
में विनिर्दिष्ट सिद्धांतों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य की
नीति को क्रियान्वित किया जा सके, गणेश फ्लोर मिल्स
कम्पनी लिमिटेड के उपक्रमों के अधिकार, हक
और हित के अर्जन और अंतरण
का उपबंध करने के लिए
अधिनियम
गणेश फ्लोर मिल्स कंपनी लिमिटेड, गणेश फ्लोर मिल्स के माध्यम से कुछ वस्तुओं अर्थात् वनस्पति, परिष्कृत खाद्य तेलों, विभिन्न प्रकार के पोषक खाद्यों और अन्य उपभोक्ता-वस्तुओं के, जो समुदाय की आवश्यकताओं के लिए आवश्यक हैं, उत्पादन और विनिर्माण में मुख्य रूप से लगी हुई है ;
और उक्त गणेश फ्लोर मिल्स के प्रबंध को केन्द्रीय सरकार ने उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951(1951 का 65) के अधीन ग्रहण कर लिया था ;
और गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में गणेश फ्लोर मिल्स कंपनी लिमिटेड के उपक्रमों का, स्वास्थ्यप्रद वनस्पति, परिष्कृत खाद्य तेलों, विभिन्न प्रकार के पोषक खाद्यों और अन्य उपभोक्ता-वस्तुओं का उचित कीमतों पर जनता को प्रदाय सुनिश्चित करने के लिए अपेक्षित लोक स्वामित्व के या नियंत्रित यूनिटों के केन्द्रकों को कायम रखने और उन्हें सुदृढ़ करने की दृष्टि से अर्जन करना आवश्यक है ;
और ऐसा अर्जन, संविधान के अनुच्छेद 39 के खंड (ख) और खंड (ग) में विनिर्दिष्ट सिद्धांतों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य की नीति को क्रियान्वित करने के लिए है ;
भारत गणराज्य के पैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम गणेश फ्लोर मिल्स कंपनी लिमिटेड (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1984 है ।
(2) यह 28 जनवरी, 1984 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) नियत दिन" से 28 जनवरी, 1984 अभिप्रेत है,
(ख) आयुक्त" से धारा 14 के अधीन नियुक्त संदाय आयुक्त अभिप्रेत है ;
(ग) कंपनी" से गणेश फ्लोर मिल्स कंपनी लिमिटेड, दिल्ली अभिप्रेत है, जो कंपनी अधिनियम, 1956(1956 का 1) के अर्थ के भीतर कंपनी है और जिसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय सब्जी मंडी, दिल्ली में है ;
(घ) प्रबंध ग्रहण की तारीख" से वह तारीख अभिप्रेत है, जिसको कंपनी की गणेश फ्लोर मिल्स के प्रबंध को प्रबंध बोर्ड ने उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 18कक की उपधारा (1) के अधीन भारत सरकार के भूतपूर्व औद्योगिक विकास मंत्रालय के सं० का० आ० 695 (ई)/18एए/आई डी आर ए/72, तारीख 3 नवम्बर, 1972 द्वारा किए गए आदेश के आधार पर अपने हाथ में लिया था ;
(ङ) गणेश फ्लोर मिल्स से निम्नलिखित अभिप्रेत है-
(i) दिल्ली वनस्पति फैक्टरी, दिल्ली ;
(ii) हिन्दुस्तान ब्रेकफास्ट फूड मैन्युफैक्चरिंग फैक्टरी, नई दिल्ली, जिसके अन्तर्गत गणेश इलैक्ट्रिकल फैक्टरी, नई दिल्ली है ;
जो अपनी अवस्थिति, सामान्य सेवाओं और अवसंरचना के कारण इससे परस्पर जुड़ी हुई है ;
(iii) कानपुर वनस्पति फैक्टरी, कानपुर ; और
(iv) सोल्वेण्ट एक्सट्रेक्शन प्लांट, मुम्बई ;
(च) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;
(छ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ज) इस अधिनियम के किसी उपबंध के संबंध में विनिर्दिष्ट तारीख" से ऐसी तारीख अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार, उस उपबंध के प्रयोजन के लिए, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट की जा सकेंगी ;
(झ) सरकारी कंपनी" से ऐसी सरकारी कंपनी अभिप्रेत है, जिसमें धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन गणेश फ्लोर मिल्स को निहित होने के लिए निदेश दिया गया है ;
(ञ) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं, किन्तु कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में हैं ।
अध्याय 2
गणेश फ्लोर मिल्स का अर्जन और अंतरण
3. गणेश फ्लोर मिल्स का केन्द्रीय सरकार को अंतरण और उसमें निहित होना-नियत दिन को गणेश फ्लोर मिल्स और गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी के अधिकार, हक और हित इस अधिनियम के आधार पर केन्द्रीय सरकार को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगे ।
4. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) गणेश फ्लोर मिल्स के बारे में यह समझा जाएगा कि उसके अन्तर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सभी स्थावर और जंगम सम्पत्तियां, जिनके अन्तर्गत भूमि, भवन, कर्मशालाएं, स्टोर, उपकरण, मशीनरी और उपस्कर भी हैं, रोकड़ बाकी, हाथ की रोकड़, आरक्षित निधियां, विनिधान, गणेश फ्लोर मिल्स से संबंधित बही-ऋण और ऐसी सम्पत्ति में या उससे उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित, जो नियत दिन के ठीक पूर्व गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में, चाहे भारत में या भारत के बाहर, थे और सभी लेखाबहियां, रजिस्टर और उससे संबंधित अन्य सभी दस्तावेजें भी हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार की हैं ।
(2) यथापूर्वोक्त समस्त संपत्तियां, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित होने के बल पर किसी भी न्यास, बाध्यता, बंधक, भार, धारणाधिकार और उन्हें प्रभावित करने वाले सभी अन्य विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएंगी और किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण की कोई कुर्की, व्यादेश या डिक्री या आदेश की बाबत जो ऐसी संपत्तियों के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बन्धित करता है या जो ऐसी समस्त सम्पत्तियों या उनके किसी भाग की बाबत कोई रिसीवर नियुक्त करता है, यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है ।
(3) किसी ऐसी संपत्ति का, जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, प्रत्येक बंधकदार और किसी ऐसी संपत्ति में या उसके संबंध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, ऐसे बंधक, भार, धारणाधिकार या अन्य हित की सूचना आयुक्त को देगा ।
(4) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी सम्पत्ति का बंधकदार या ऐसी किसी सम्पत्ति में या उसके संबंध में कोई भार, धारणाधिकार या हित रखने वाला कोई अन्य व्यक्ति, धारा 7 में विनिर्दिष्ट रकमों में से, बंधक धन या अन्य शोध्य रकमों के पूर्णतः या भागतः संदाय के लिए, अपने अधिकारों और हितों के अनुसार, दावा करने का हकदार होगा किन्तु ऐसा कोई बंधक, भार, धारणाधिकार या अन्य हित किसी ऐसी संपत्ति के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा, जो केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है ।
(5) गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, कंपनी को कोई अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत, नियत दिन से पूर्व किसी समय अनुदत्त की गई है और वह नियत दिन से ठीक पूर्व प्रवृत्त है तो वह गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में और उसके प्रयोजनों के लिए अपनी अस्तित्वावधि के अनुसार ऐसी तारीख को और उसके पश्चात् प्रवृत्त बनी रहेगी और गणेश फ्लोर मिल्स के धारा 5 के अधीन किसी सरकारी कंपनी में निहित होने की तारीख से ही, उस सरकारी कंपनी के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में उसी प्रकार प्रतिस्थापित हो गई है मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत उस सरकारी कंपनी को अनुदत्त की गई थी और वह सरकारी कंपनी उसे उस शेष अवधि के लिए धारण करेगी जिसके लिए वह कंपनी, जिसे वह अनुदत्त की गई थी, उसके निबंधनों के अनुसार उसे धारण करती ।
(6) यदि नियत दिन को, गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित किया गया कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, चाहे वह किसी भी प्रकार की हो, लम्बित है, तो गणेश फ्लोर मिल्स के अंतरण या इस अधिनियम में किसी बात के कारण, उसका उपशमन नहीं होगा, वह बंद नहीं होगी या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध अथवा जहां गणेश फ्लोर मिल्स, धारा 5 के अधीन किसी सरकारी कंपनी में निहित हो गई है, वहां सरकारी कंपनी द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी, चलाई जा सकेगी या प्रवर्तित की जा सकेगी ।
5. गणेश फ्लोर मिल्स का सरकारी कंपनी में निहित किए जाने का निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) धारा 3 और धारा 4 में किसी बात के होते हुए भी यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि कोई सरकारी कंपनी ऐसे निबंधनों और शर्तों का, जिन्हें अधिरोपित करना वह सरकार ठीक समझे, अनुपालन करने के लिए रजामंद है या उसने उनका अनुपालन कर लिया है तो वह, सूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि गणेश फ्लोर मिल्स और गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी के अधिकार, हक और हित, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, केन्द्रीय सरकार में निहित बने रहने के बजाय, या तो अधिसूचना की तारीख को या ऐसी किसी पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती तारीख को (जो नियत दिन से पहले की तारीख न हो), जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, उस सरकारी कंपनी में निहित हो जाएंगे ।
(2) जहां गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में उसके अधिकार, हक और हित उपधारा (1) के अधीन सरकारी कंपनी में निहित हो जाते हैं वहां वह सरकारी कंपनी ऐसे निहित होने की तारीख से ही, गणेश फ्लोर मिल्स की स्वामी समझी जाएगी और गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में केन्द्रीय सरकार के सभी अधिकार और दायित्व ऐसे निहित होने की तारीख से ही, सरकारी कंपनी के क्रमशः अधिकार और दायित्व समझे जाएंगे ।
6. कंपनी का कतिपय पूर्व दायित्वों के लिए दायी होना-(1) नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के संबंध में उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट दायित्व से भिन्न, गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी का प्रत्येक दायित्व उस कंपनी का दायित्व होगा और उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय होगा न कि केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या जहां गणेश फ्लोर मिल्स किसी सरकारी कम्पनी में निहित होती है, वहां सरकारी कम्पनी के विरुद्ध ।
(2) गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कम्पनी को प्रबंध ग्रहण की तारीख के पश्चात् अग्रिम दी गई रकम की बाबत उस पर शोध्य ब्याज सहित, कोई दायित्व तथा प्रबन्ध ग्रहण की तारीख के पश्चात् की किसी अवधि की बाबत गणेश फ्लोर मिल्स में नियोजित व्यक्तियों की मजदूरी, वेतन तथा अन्य शोध्य रकमें नियत दिन से ही, केन्द्रीय सरकार के दायित्व हो जाएंगे तथा उनका उन्मोचन केन्द्रीय सरकार या उस सरकार के लिए और उसकी ओर से सरकारी कंपनी द्वारा, या जब ऐसी मजदूरी, वेतन और अन्य शोध्य रकमें देय और संदेय हो जाएं, किया जाएगा ।
(3) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि,-
(क) इस धारा या इस अधिनियम की किसी अन्य धारा में अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दायित्व से भिन्न गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी का नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत कोई दायित्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के विरुद्ध, प्रवर्तनीय नहीं होगा ;
(ख) गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण का कोई अधिनिर्णय, डिक्री या आदेश, जो नियत दिन के पश्चात्, किसी ऐसे विषय, दावे या विवाद के संबंध में पारित किया गया है, जो उपधारा (2) में निर्दिष्ट विषय नहीं है और जो उस दिन के पूर्व उत्पन्न हुआ था, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ;
(ग) उस समय प्रवृत्त विधि के किसी उपबंध के, नियत दिन के पूर्व किए गए उल्लंघन के लिए उपगत कंपनी का कोई दायित्व, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ।
अध्याय 3
रकम का संदाय
7. रकम का संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार को धारा 3 के अधीन गणेश फ्लोर मिल्स और गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी के अधिकार, हक तथा हित का अंतरण करने और उन्हें उसमें निहित करने के लिए कंपनी को केन्द्रीय सरकार द्वारा नकद और अध्याय 6 में विनिर्दिष्ट रीति से एक करोड़, सत्तावन लाख और अड़सठ हजार रुपए की राशि के बराबर रकम दी जाएगी ।
(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रकम के अतिरिक्त केन्द्रीय सरकार द्वारा कम्पनी को दस हजार रुपए प्रतिवर्ष की दर से संगणित रकम का संदाय किया जाएगा जो कंपनी को गणेश फ्लोर मिल्स के प्रबंध से वंचित किए जाने के लिए प्रबंध ग्रहण की तारीख से प्रारम्भ होने वाली और नियत दिन को समाप्त होने वाली अवधि के लिए होगा ।
(3) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रकम और उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार संगणित रकम पर चार प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज नियत दिन से प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को समाप्त होने वाली अवधि के लिए दिया जाएगा जिसको ऐसी रकम का संदाय केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को किया जाता है ।
अध्याय 4
गणेश फ्लोर मिल्स का प्रबंध आदि
8. गणेश फ्लोर मिल्स का प्रबंध आदि-(1) नियत दिन को गणेश फ्लोर मिल्स के कार्यकलाप और कारबार का साधारण अधीक्षण, निदेशन, नियंत्रण और प्रबंध,-
(क) जहां केन्द्रीय सरकार ने धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन कोई निदेश दिया है वहां उस निदेश में विनिर्दिष्ट सरकारी कंपनी में निहित हो जाएगा ; या
(ख) जहां केन्द्रीय सरकार ने ऐसा कोई निदेश नहीं दिया है वहां उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त एक या अधिक अभिरक्षकों में निहित हो जाएगा,
और तब, यथास्थिति, इस प्रकार विनिर्दिष्ट सरकारी कंपनी या इस प्रकार नियुक्त अभिरक्षक, सभी अन्य व्यक्तियों का अपवर्जन करते हुए, ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे सभी कार्य करने का हकदार होगा/ के हकदार होंगे जिन शक्तियों का प्रयोग और जिन कार्यों को करने के लिए कंपनी, गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में प्राधिकृत है ।
(2) केन्द्रीय सरकार एक या अधिक व्यक्तियों को या किसी सरकारी कंपनी को, गणेश फ्लोर मिल्स के अभिरक्षक या अभिरक्षकों के रूप में नियुक्त कर सकेगी, जिसके या जिनके संबंध में धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन उसने कोई निदेश नहीं किया है ।
(3) इस प्रकार नियुक्त अभिरक्षक गणेश फ्लोर मिल्स की निधियों में से ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा/करेंगे जो केन्द्रीय सरकार नियत करे और केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा/करेंगे ।
(4) गणेश फ्लोर मिल्स का/के अभिरक्षक, गणेश फ्लोर मिल्स का लेखा ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से तथा ऐसी शर्तों के अधीन रखेगा/रखेंगे जो विहित की जाएं और कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के उपबंध इस प्रकार रखे गए लेखाओं की लेखापरीक्षा को ऐसे लागू होंगे जैसे वे किसी कंपनी के लेखाओं की लेखापरीक्षा को लागू होते हैं ।
9. गणेश फ्लोर मिल्स के प्रबंध के भारसाधक व्यक्तियों का आस्तियों आदि का परिदान करने का कर्तव्य-गणेश फ्लोर मिल्स के केन्द्रीय सरकार या किसी सरकारी कंपनी में निहित होने पर, ऐसे निहित होने की तारीख के ठीक पूर्व गणेश फ्लोर मिल्स के प्रबंध के भारसाधक सभी व्यक्ति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को, जो केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, गणेश फ्लोर मिल्स से संबंधित सभी आस्तियों, लेखाबहियों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को, जो उनकी अभिरक्षा में हैं, परिदत्त करने के लिए आबद्ध होंगे ।
10. आस्तियों आदि का लेखा देने के लिए व्यक्तियों का कर्तव्य-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो नियत दिन को, गणेश फ्लोर मिल्स से, जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी में निहित हो गई है, संबंधित किन्हीं आस्तियों, बहियों, दस्तावेजों या अन्य कागज-पत्रों को अपने कब्जे में या अपने नियंत्रण में रखता है और जो गणेश फ्लोर मिल्स के हैं या उनके होते यदि गणेश फ्लोर मिल्स केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी में निहित न हुई होती उक्त आस्तियों, बहियों, दस्तावेजों और अन्य कागज-पत्रों का लेखा देने के लिए, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के प्रति दायी होगा और उनको केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी या ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को, जो केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, परिदत्त करेगा ।
(2) केन्द्रीय सरकार, धारा 3 के अधीन उसमें निहित गणेश फ्लोर मिल्स का कब्जा प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी या करवाएगी ।
11. विशिष्टियां देने का कंपनी का कर्तव्य-कंपनी ऐसी अवधि के भीतर, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, नियत दिन को, गणेश फ्लोर मिल्स से, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, संबंधित सभी संपत्तियों और आस्तियों की पूर्ण तालिका केन्द्रीय सरकार को देगी और इस प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को सभी समुचित सुविधाएं देगी ।
अध्याय 5
गणेश फ्लोर मिल्स के कर्मचारियों के बारे में उपबंध
12. कर्मचारियों का बने रहना-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी द्वारा नियोजित किया गया है-
(क) नियत दिन से ही, केन्द्रीय सरकार का कर्मचारी हो जाएगा ; और
(ख) जहां गणेश फ्लोर मिल्स धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन किसी सरकारी कंपनी में निहित किए जाने के लिए निदेशित है वहां ऐसे निहित होने की तारीख से ही ऐसी कंपनी का कर्मचारी हो जाएगा, और, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के अधीन पेंशन, उपदान और इसी प्रकार की अन्य बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ पद या सेवा धारण करेगा जो उसे उस दशा में अनुज्ञेय होते यदि ऐसा निधान न हुआ होता और वह तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी में उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता अथवा जब तक उसका पारिश्रमिक या सेवा की अन्य शर्तें, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार अथवा सरकारी कंपनी सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर देती ।
(2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में नियोजित किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की सेवाओं का केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को अंतरण ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा कोई न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण ग्रहण नहीं करेगा ।
13. भविष्य निधि और अन्य निधियां-(1) जहां कंपनी में नियोजित व्यक्तियों के फायदे के लिए कंपनी ने कोई भविष्य निधि, अधिवार्षिकी निधि, कल्याण निधि या अन्य निधि स्थापित की है वहां ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों से, जिनकी सेवाएं, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अंतरित की गई हैं, संबंधित धनराशियां; ऐसी भविष्य निधि, अधिवार्षिकी निधि, कल्याण निधि या अन्य निधि में, नियत दिन को जमा धनराशियों में से, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को अंतरित और उसमें निहित हो जाएंगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को अंतरित हो जाने वाली धनराशियों को केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी ऐसी रीति से बरतेगी, जो विहित की जाए ।
अध्याय 6
संदाय आयुक्त
14. संदाय आयुक्त की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 7 के अधीन कंपनी को संदेय रकमों के संवितरण के प्रयोजन के लिए, अधिसूचना द्वारा, एक संदाय आयुक्त नियुक्त करेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार ऐसे अन्य व्यक्तियों को आयुक्त की सहायता के लिए नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह ठीक समझे, और तब आयुक्त ऐसे व्यक्तियों में से एक या अधिक को इस अधिनियम के अधीन अपने द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए भी प्राधिकृत कर सकेगा और भिन्न-भिन्न व्यक्तियों को भिन्न-भिन्न शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जा सकेगा ।
(3) कोई व्यक्ति, जो आयुक्त द्वारा प्रयोक्तव्य किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आयुक्त द्वारा प्राधिकृत किया गया है, उन शक्तियों का प्रयोग उसी रीति से कर सकेगा और उनका वही प्रभाव होगा मानो वे उस व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा प्रत्यक्षतः प्रदान की गई थीं, प्राधिकार के रूप में नहीं ।
(4) इस धारा के अधीन नियुक्त आयुक्त और अन्य व्यक्तियों के वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि में से चुकाए जाएंगे ।
15. केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार, कंपनी को संदाय करने के लिए आयुक्त को, विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के भीतर, उतनी रकम नकद देगी जो धारा 7 में विनिर्दिष्ट रकमों के बराबर है ।
(2) केन्द्रीय सरकार भारत के लोक खाते में आयुक्त के नाम एक निक्षेप खाता खोलेगी और आयुक्त, इस अधिनियम के अधीन उसे संदत्त प्रत्येक रकम, उक्त खाते में जमा करेगा और उक्त निक्षेप खाते को चलाएगा ।
(3) उपधारा (2) में निर्दिष्ट निक्षेप खाते में जमा रकम पर प्रोद्भूत होने वाला ब्याज कंपनी के फायदे के लिए काम आएगा ।
16. दावों की पूर्विकता-अनुसूची में विनिर्दिष्ट विषयों से उद्भूत होने वाले दावों को निम्नलिखित सिद्धांतों के अनुसार पूर्विकता प्राप्त होगी, अर्थात् :-
(क) प्रवर्ग 1 को अन्य सभी प्रवर्गों पर अग्रता दी जाएगी और प्रवर्ग 2 को प्रवर्ग 3 पर अग्रता दी जाएगी और इसी प्रकार आगे भी ;
(ख) प्रत्येक प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट दावे समान पंक्ति के होंगे और पूर्णतः संदत्त किए जाएंगे किन्तु यदि रकम ऐसे दावों को पूर्णतः चुकाने के लिए अपर्याप्त है तो वे आनुपातिक रूप में कम कर दिए जाएंगे और तदनुसार संदत्त किए जाएंगे ;
(ग) किसी निम्नतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट विषय की बाबत किसी दायित्व के निर्वहन का प्रश्न केवल तक उठेगा जब उसके ठीक उच्चतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट सभी दायित्वों को चुकाने के पश्चात् कोई अधिशेष रह जाए ।
17. आयुक्त के समक्ष दावों का किया जाना-प्रत्येक व्यक्ति, जो अनुसूची में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी की बाबत गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में कंपनी के विरुद्ध कोई दावा रखता है, ऐसा दावा विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के भीतर आयुक्त के समक्ष करेगा :
परन्तु यदि आयुक्त का समाधान हो जाता है कि दावेदार पर्याप्त कारण से तीस दिन की उक्त अवधि के भीतर दावा करने से निवारित रहा था तो वह तीस दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर दावा ग्रहण कर सकेगा, किन्तु उसके पश्चात् नहीं ।
18. दावों का सबूत-(1) आयुक्त कोई तारीख नियत करेगा जिसको या जिसके पूर्व प्रत्येक दावेदार अपने दावे का सबूत फाइल करेगा जिसके न हो सकने पर उसे आयुक्त द्वारा किए जाने वाले संवितरण के फायदे से अपवर्जित कर दिया जाएगा ।
(2) इस प्रकार नियत की गई तारीख के बारे में कम से कम चौदह दिन की सूचना, अंग्रेजी भाषा के ऐसे दैनिक समाचार पत्र के, जो देश के मुख्य भाग में परिचालित हो, एक अंक में और प्रादेशिक भाषा के ऐसे दैनिक समाचार पत्र के, जो आयुक्त उपयुक्त समझे, एक अंक में विज्ञापन द्वारा दी जाएगी, और ऐसी प्रत्येक सूचना में दावेदार से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपने दावे का सबूत विज्ञापन में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर आयुक्त के समक्ष फाइल करे ।
(3) प्रत्येक दावेदार को, जो आयुक्त द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर अपने दावे का सबूत फाइल करने में असफल रहता है, आयुक्त द्वारा किए जाने वाले संवितरणों से अपवर्जित कर दिया जाएगा ।
(4) आयुक्त, ऐसा अन्वेषण करने के पश्चात् जो उसकी राय में आवश्यक है और कंपनी को दावे का खंडन करने का अवसर देने के पश्चात् और दावेदार को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात् लिखित आदेश द्वारा दावे को पूर्णतः या भागतः स्वीकार या अस्वीकार करेगा ।
(5) आयुक्त को अपने कृत्यों के निर्वहन से उद्भूत होने वाले सभी मामलों में, जिनके अन्तर्गत वह या वे स्थान भी हैं जहां वह अपनी बैठकें करेगा, अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी और इस अधिनियम के अधीन कोई अन्वेषण करने के प्रयोजन के लिए उसे वही शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन निम्नलिखित विषयों की बाबत वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात् :-
(क) किसी साक्षी को समन करना और हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना ;
(ख) किसी दस्तावेज या अन्य तात्त्विक पदार्थ का, जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य हो, प्रकटीकरण और पेश किया जाना ;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना ;
(घ) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।
(6) आयुक्त के समक्ष कोई अन्वेषण भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा और आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा ।
(7) कोई दावेदार, जो आयुक्त के विनिश्चय से असंतुष्ट है, उस विनिश्चय के विरुद्ध अपील, आरंभिक अधिकारिता वाले उस प्रधान सिविल न्यायालय में कर सकता है, जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर कंपनी का रजिस्ट्रीकृत कार्यालय स्थित है :
परन्तु जहां कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है, आयुक्त नियुक्त किया जाता है वहां ऐसी अपील दिल्ली उच्च न्यायालय को होगी और वह अपील उस उच्च न्यायालय के कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा सुनी और निपटाई जाएगी ।
19. आयुक्त द्वारा दावेदारों को रकम का संवितरण-(1) इस अधिनियम के अधीन कोई दावा स्वीकार करने के पश्चात्, ऐसे दावे के संबंध में देय रकम आयुक्त द्वारा ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को संदत्त की जाएगी, जिसको या जिनको ऐसी राशि देय है और ऐसा संदाय कर दिए जाने पर, ऐसे दावे के संबंध में कंपनी का दायित्व उन्मोचित हो जाएगा ।
(2) यदि गणेश फ्लोर मिल्स के संबंध में उसको संदत्त धन में से, अनुसूची में यथाविनिर्दिष्ट दायित्वों को पूरा करने के पश्चात् कोई अतिशेष रह जाता है तो आयुक्त ऐसे अतिशेष का कंपनी को संवितरण करेगा ।
20. असंवितरित या अदावाकृत रकम का साधारण राजस्व खाते में जमा किया जाना-आयुक्त को संदत्त कोई धन, जो उस तारीख से ठीक पूर्ववर्ती तारीख को, जिसको आयुक्त के कार्यालय का अंतिम रूप से परिसमापन होता है, असंवितरित या अदावाकृत रहता है, आयुक्त द्वारा अपने कार्यालय के अंतिम रूप से परिसमापन के पूर्व केन्द्रीय सरकार के साधारण राजस्व खाते में संदत्त किया जाएगा किंतु इस प्रकार अंतरित किसी धन के लिए कोई दावा ऐसे संदाय के हकदार व्यक्ति द्वारा केन्द्रीय सरकार को किया जा सकता है और उस संबंध में कार्यवाही इस प्रकार की जाएगी मानो ऐसा अंतरण नहीं किया गया था, और दावे के संदाय के लिए किया गया आदेश, यदि कोई हो, राजस्व के प्रतिदाय के लिए किया गया आदेश माना जाएगा ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
21. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
22. संविदाओं का तब तक प्रभावहीन हो जाना जब तक कि केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी द्वारा उनका अनुसमर्थन नहीं कर दिया जाता-गणेश फ्लोर मिल्स के, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, संबंध में कंपनी द्वारा किसी सेवा, विक्रय या प्रदाय के लिए की गई और नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त प्रत्येक संविदा, नियत दिन से ही तीस दिन की समाप्ति के पश्चात् प्रभावहीन हो जाएगी, जब तक कि ऐसी संविदा का उस अवधि की समाप्ति के पूर्व केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी, लिखित रूप में अनुसमर्थन नहीं कर देती और केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी ऐसी संविदा का अनुसमर्थन करने में उसमें ऐसे परिवर्तन या उपांतरण कर सकेगी जो वह ठीक समझे :
परन्तु केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी किसी संविदा का अनुसमर्थन करने में लोप और उसमें कोई परिवर्तन या उपांतरण तब तक नहीं करेगी जब तक कि-
(क) उसका यह समाधान नहीं हो जाता कि ऐसी संविदा असम्यक् रूप से दुर्भर है या असद्भावपूर्वक की गई है या केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी के लिए अहितकर है ; और
(ख) वह ऐसी संविदा के पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने और संविदा का अनुसमर्थन करने से इंकार करने या उनमें कोई परिवर्तन या उपांतरण करने के अपने कारण अभिलिखित नहीं कर देती ।
23. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति,-
(क) गणेश फ्लोर मिल्स की भागरूप किसी संपत्ति को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी से सदोष विधारित करेगा,
(ख) गणेश फ्लोर मिल्स की भागरूप किसी संपत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या उसे सदोष प्रतिधारित करेगा ; या
(ग) गणेश फ्लोर मिल्स से संबंधित किसी दस्तावेज को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी या, यथास्थिति, उस सरकार या सरकारी कंपनी द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने से जानबूझकर विधारित करेगा या उसे देने में असफल रहेगा ; या
(घ) गणेश फ्लोर मिल्स की भागरूप संपत्ति और आस्तियों की तालिका जानबूझकर केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी को देने में असफल रहेगा ; या
(ङ) गणेश फ्लोर मिल्स से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखाबहियों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में हैं, केन्द्रीय सरकार या सरकारी कंपनी या उस सरकार या सरकारी कंपनी द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने में असफल रहेगा ; या
(च) गणेश फ्लोर मिल्स की भागरूप किसी संपत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा अथवा इस अधिनियम के अधीन ऐसा कोई दावा करेगा जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का उचित कारण है कि वह मिथ्या या बिल्कुल गलत है,
वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
24. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय, उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि वह अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध उस कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति और मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है ; और
(ख) फर्म के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
25. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या उस सरकार या अभिरक्षक या सरकारी कंपनी के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या उस सरकार या सरकारी कंपनी द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या होने के लिए सम्भाव्य किसी नुकसान के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के या उस सरकार या अभिरक्षक या सरकारी कंपनी के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या उस सरकार या अभिरक्षक या सरकारी कंपनी द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के विरुद्ध न होगी ।
26. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य, इस धारा, धारा 27 और धारा 28 द्वारा प्रदत्त शक्तियों से भिन्न, सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(2) जब कभी उपधारा (1) के अधीन शक्ति का कोई प्रत्यायोजन किया जाता है तब वह व्यक्ति, जिसको ऐसी शक्ति का प्रत्यायोजन किया गया है, केन्द्रीय सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा ।
27. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिससे धारा 4 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट कोई सूचना दी जाएगी ;
(ख) वह प्ररूप जिसमें और रीति जिससे और वे शर्तें, जिनके अधीन अभिरक्षक धारा 8 की उपधारा (4) द्वारा यथा अपेक्षित लेखा रखेंगे ;
(ग) वह रीति, जिससे धारा 13 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी भविष्य निधि या अन्य निधि के धन का उपयोग किया जाएगा ;
(घ) कोई अन्य विषय, जो विहित किए जाने के लिए अपेक्षित है या विहित किया जाए ।
(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
28. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी :
परन्तु ऐसा कोई आदेश नियत दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
29. निरसन और व्यावृत्ति-(1) गणेश फ्लोर मिल्स कंपनी लिमिटेड (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अध्यादेश, 1984 इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्समान उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
अनुसूची
[धारा 16, धारा 17 और धारा 19(2) देखिए]
कंपनी के दायित्वों के निर्वहन के लिए पूर्विकताओं का क्रम
प्रवर्ग 1
(क) कम्पनी के कर्मचारियों को संदेय मजदूरी, वेतन और अन्य शोध्य रकमें ।
(ख) भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा निधि, भारतीय जीवन बीमा निगम से संबंधित अभिदाय प्रीमियम या किसी अन्य प्रयोजन के लिए कर्मचारियों के वेतन और मजदूरी से की गई कटौतियां ।
प्रवर्ग 2
प्रतिभूत उधार ।
प्रवर्ग 3
केन्द्रीय सरकार, किसी राज्य सरकार, किसी स्थानीय प्राधिकरण या किसी राज्य विद्युत बोर्ड को शोध्य राजस्व, कर, उपकर, रेट या अन्य शोध्य रकमें ।
प्रवर्ग 4
कोई अन्य उधार या शोध्य रकमें ।
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