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आंध्र राज्य अधिनियम, 1953 ( Andhra State Act, 1953(Andhra Pradesh) )


 

आंध्र राज्य अधिनियम, 1953

(1953 का अधिनियम संख्यांक 30)

[14 सितम्बर, 1953]

आंध्र राज्य बनाने, मैसूर राज्य के क्षेत्र में वृद्धि करने और

मद्रास राज्य के क्षेत्र को कम करने तथा

तत्संबद्ध विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

भाग 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम आंध्र राज्य अधिनियम, 1953 है ।

(2) यह भाग और धारा 43, 54, 58, 61, 62, 63, 64, 66 और 69 तुरन्त प्रवृत्त होंगे और इस अधिनियम के अन्य सभी उपबंध अक्तूबर, 1953 के प्रथम दिन को प्रवृत्त होंगे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) नियत दिन" से अक्तूबर, 1953 का प्रथम दिन अभिप्रेत है;

(ख) अनुच्छेद" से संविधान का अनुच्छेद अभिप्रेत है;

(ग) सभा निर्वाचन-क्षेत्र", परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र" और संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र" के वे ही अर्थ हैं जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में हैं;

 (घ) विधि" के अन्तर्गत, नियत दिन के ठीक पहले यथा गठित संपूर्ण मद्रास या मैसूर राज्य में या उसके किसी भाग में विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत भी आती है;

(ङ) आदेश" से राजपत्र में प्रकाशित आदेश अभिप्रेत है;

(च) आसीन सदस्य" से, संसद् के या राज्य के विधान-मंडल के दोनों सदनों में से किसी के संबंध में, ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो नियत दिन के ठीक पहले उस सदन का सदस्य है;

(छ) अन्तरित राज्यक्षेत्र" से धारा 4 की उपधारा (1) द्वारा मैसूर राज्य में जोड़ा गया राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है ।

भाग 2

आंध्र राज्य का बनाया जाना और मद्रास से मैसूर को राज्यक्षेत्र का अन्तरण

3. आंध्र राज्य का बनाया जाना-(1) नियत दिन से, एक भाग क राज्य बनाया जाएगा जो आंध्र राज्य कहलाएगा और जिसमें वे राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे जो उस दिन के ठीक पहले मद्रास राज्य के श्रीकाकुलम, विशाखापट्नम, पूर्व गोदावरी, पश्चिम गोदावरी, कृष्णा, गुन्टूर, नेल्लूर, करनूल, अनन्तपुर, कुड्डप्पा और चित्तूर जिलों तथा बल्लारी जिले के आलूर, आदोनी और रायदुर्ग ताल्लुकों में समाविष्ट थे, और तब उक्त राज्यक्षेत्र मद्रास राज्य के भाग नहीं रह जाएंगे ।

(2) इसके पश्चात् जिलों का विस्तार, सीमाएं और नाम परिवर्तित करने की राज्य सरकार की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आलूर और आदोनी के उक्त ताल्लुकों को करनूल जिले में सम्मिलित किया जाएगा और वे उसका भाग बन जाएंगे, और रायदुर्ग के उक्त ताल्लुक को अनंतपुर जिले में सम्मिलित किया जाएगा और वह उसका भाग बन जाएगा ।

4. मद्रास से मैसूर को राज्यक्षेत्र का अन्तरण-(1) नियत दिन से, मैसूर राज्य में वह राज्यक्षेत्र जोड़ा जाएगा जो उस दिन के ठीक पहले मद्रास राज्य में बल्लारी जिले के आलूर, आदोनी और रायदुर्ग से भिन्न ताल्लुकों में समाविष्ट था, और तब उक्त राज्यक्षेत्र मद्रास राज्य का भाग नहीं रह जाएगा ।

(2) इसके पश्चात् जिलों का विस्तार, सीमाएं और नाम परिवर्तित करने की राज्य सरकार की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अन्तरित राज्यक्षेत्र से एक पृथक् जिला बनेगा जो बल्लारी जिला कहलाएगा ।

5. संविधान की प्रथम अनुसूची का संशोधन-संविधान की प्रथम अनुसूची में,-

(क) भाग क में, 1 से 9 तक की प्रविष्टियां क्रमशः 2 से 10 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित की जाएंगी और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित प्रविष्टि 2 के पहले प्रविष्टि 1. आंध्र" अन्तःस्थापित की जाएगी;

(ख) भाग क में, राज्यों के राज्यक्षेत्र के वर्णन में,-

(i) आसाम राज्य के राज्यक्षेत्र से संबंधित पैरा के पहले निम्नलिखित पैरा अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-

आंध्र राज्य के राज्यक्षेत्र में आंध्र राज्य अधिनियम, 1953 की धारा 3 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे ।"; और

(ii) अंतिम पैरा के अन्त में निम्नलिखित जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-

किन्तु मद्रास राज्य की दशा में, आंध्र राज्य अधिनियम, 1953 की धारा 3 की उपधारा (1) और धारा 4 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र सम्मिलित नहीं होंगे ।"; और

(ग) भाग ख में, राज्यों के राज्यक्षेत्रों का वर्णन अन्तर्विष्ट करने वाले पैरा के अन्त में निम्नलिखित जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-

और मैसूर राज्य की दशा में, आंध्र राज्य अधिनियम, 1953 की धारा 4 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र भी समाविष्ट होगा ।" ।

भाग 3

विधान-मंडलों में प्रतिनिधित्व

राज्य सभा

6. राज्य-सभा में प्रतिनिधित्व-राज्य-सभा में मद्रास राज्य को आबंटित स्थानों की संख्या 27 से घटा कर 18 कर दी जाएगी और उक्त सभा में आंध्र राज्य को 12 स्थान आबंटित किए जाएंगे ।

7. संविधान की चतुर्थ अनुसूची का संशोधन-संविधान की चतुर्थ अनुसूची में-

                (क) प्रथम अनुसूची के भाग क में विनिर्दिष्ट राज्यों से संबंधित स्थानों की सारणी में-

(i) 1 से 9 तक की प्रविष्टियां क्रमशः 2 से 10 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित की जाएंगी;

(ii) इस प्रकार पुनःसंख्यांकित प्रविष्टि 2 के पहले प्रविष्टि 1. आंध्र.........12" अन्तःस्थापित की जाएगी;

(iii) स्तम्भ 2 में, 27" और 145" अंकों के स्थान पर क्रमशः 18" और 148" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

                                (ख) स्थानों की सारणी के अंत में, 204" अंकों के स्थान पर 207" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।

8. आसीन सदस्यों का आबंटन-मद्रास राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य सभा के वे नौ आसीन सदस्य जिनके नाम प्रथम अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट हैं, राज्य सभा में आंध्र राज्य को आबंटित स्थानों में से नौ स्थानों को भरने के लिए आंध्र विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए गए समझे जाएंगे, तथा शेष 18 आसीन सदस्य जिनके नाम उस अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट हैं, मद्रास राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यसभा के सदस्य बने रहेंगे ।

9. रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन-नियत दिन के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, आंध्र राज्य को राज्य सभा में आबंटित स्थानों में नियत दिन को विद्यमान रिक्तियों को भरने के लिए एक उप-निर्वाचन कराया जाएगा ।

10. पदावधि-(1) उपधारा (2) में यथा-उपबंधित के सिवाय, प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट सदस्यों की पदावधियां अपरिवर्तित, अर्थात् उस अनुसूची में यथा-उपदर्शित, बनी रहेंगी ।

(2) (क) प्रथम अनुसूची के भाग 1 में क्रम संख्या 4 और 5 के सामने विनिर्दिष्ट दो सदस्यों में से एक की पदावधि इस प्रकार बढ़ा दी जाएगी कि वह अप्रैल, 1958 के दूसरे दिन समाप्त हो;

(ख) उस अनुसूची के भाग 2 में क्रम संख्या 7 से 13 तक के सामने विनिर्दिष्ट सात सदस्यों में से एक की पदावधि इस प्रकार घटा दी जाएगी कि वह 2 अप्रैल, 1954 को समाप्त हो ।

(3) वह सदस्य जिसकी पदावधि उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन बढ़ाई जानी है और वह सदस्य जिसकी पदावधि उस उपधारा के खंड (ख) के अधीन घटाई जानी है, नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, ऐसी रीति से लाट निकालकर अवधारित किए जाएंगे, जैसी राज्य सभा का सभापति विनिर्दिष्ट करे ।

(4) आंध्र विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा धारा 9 के अधीन निर्वाचित किए जाने वाले तीन सदस्यों में से प्रत्येक की पदावधि अप्रैल, 1956 के दूसरे दिन समाप्त होगी ।

लोक सभा

11. लोक सभा में प्रतिनिधित्व-(1) लोक सभा में मद्रास राज्य को आबंटित स्थानों की संख्या 75 से घटा कर 46 कर दी जाएगी, मैसूर राज्य को आबंटित स्थानों की संख्या 11 से बढ़ाकर 12 कर दी जाएगी और उस सभा में आंध्र राज्य को 28 स्थान आबंटित किए जाएंगे ।

(2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की प्रथम अनुसूची में, -

                (क) भाग क राज्यों से संबंधित भाग में,-

(i) 1 से 9 तक की प्रविष्टियों को क्रमशः 2 से 10 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनः संख्यांकित प्रविष्टि 2 के पहले निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्: -

1. आंध्र...........28"; और

(ii) स्तंभ 2 में मद्रास के सामने की प्रविष्टि के स्थान पर प्रविष्टि 46" प्रतिस्थापित की जाएगी; और

(ख) भाग ख राज्यों से संबंधित भाग में, स्तंभ 2 में मैसूर के सामने की प्रविष्टि के स्थान पर प्रविष्टि 12" प्रतिस्थापित की जाएगी ।

12. निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन-संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मद्रास) आदेश, 1951 तथा संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मैसूर) आदेश, 1951 तब तक जब तक कि विधि द्वारा अन्य उपबंध नहीं किया जाता, द्वितीय अनुसूची द्वारा निर्दिष्ट उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे ।

13. आसीन सदस्यों के बारे में उपबंध-ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र का, जो धारा 12 के उपबंधों के आधार पर नियत दिन को, सीमाओं के परिवर्तन सहित या उसके बिना, आंध्र राज्य को या मैसूर राज्य को अन्तरित हो गया है, प्रतिनिधित्व करने वाला लोक सभा का प्रत्येक आसीन सदस्य, इस प्रकार अन्तरित उस निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा लोक सभा के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा ।

14. उपांतरित संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों की निर्वाचक-नामावलियां-जहां धारा 12 के उपबंधों के आधार पर किसी संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र की सीमा परिवर्तित हो गई है, वहां इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक-नामावली, नियत दिन से और जब तक कि वह विधि के अनुसार पुनरीक्षित नहीं की जाती, किसी संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र या निर्वाचन-क्षेत्रों की निर्वाचक-नामावली या नामावलियों के उतने भाग से मिलकर बनी समझी जाएगी जो इस प्रकार परिवर्तित निर्वाचन-क्षेत्र के अन्दर समाविष्ट क्षेत्रों से संबद्ध है ।

विधान सभाएं

15. विधान सभाओं की सदस्य संख्या-(1) प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या-

                (क) आंध्र विधान-सभा में 140 होगी;

                (ख) मद्रास विधान-सभा में 375 से घटा कर 230 कर दी जाएगी, और

(ग) मैसूर विधान-सभा में 99 से बढ़ा कर 104 कर दी जाएगी ।

(2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की द्वितीय अनुसूची में,-

                (क) भाग क राज्यों से संबंधित भाग में,-

(i) 1 से 9 तक की प्रविष्टियां क्रमशः 2 से 10 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित की जाएंगी और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित प्रविष्टि 2 के पहले निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-

1 आंध्र……………….140"; और

(ii) स्तम्भ 2 में मद्रास के सामने वाली प्रविष्टि के स्थान पर प्रविष्टि 230" प्रतिस्थापित की जाएगी; और

(ख) भाग ख राजयों से संबंधित भाग में, स्तंभ 2 में मैसूर के सामने वाली प्रविष्टि के स्थान पर प्रविष्टि 104" प्रतिस्थापित की जाएगी ।

16. सदस्यों का आबंटन-(1) मद्रास विधान-सभा का प्रत्येक आसीन सदस्य जो उस निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है जो धारा 12 के उपबंधों के आधार पर, नियत दिन को, सीमाओं के परिवर्तन सहित या उसके बिना, आंध्र राज्य को या मैसूर राज्य को अंतरित हो गया है, नियत दिन से मद्रास विधान सभा का सदस्य नहीं रह जाएगा, और इस प्रकार अंतरित उस निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा, यथास्थिति, आंध्र या मैसूर विधान-सभा के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा ।

(2) आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए अनुच्छेद 333 के अधीन मद्रास विधान-सभा के लिए नामनिर्देशित किया गया उस विधान-सभा का आसीन सदस्य, उस राज्य के क्षेत्र में ह्रास के हो जाने पर भी, उस अनुच्छेद के अधीन उस सभा में उक्त समुदाय का प्रतिनिधित्व करता रहेगा ।

17. विधान-सभाओं की अस्तित्वावधि-(1) अनुच्छेद 172 के खंड (1) में निर्दिष्ट 5 वर्ष की अवधि, आन्ध्र विधान-सभा की दशा में, उस तारीख को प्रारंभ हुई समझी जाएगी जिस तारीख को वह मद्रास विधान-सभा की दशा में वास्तव में प्रारम्भ हुई थी ।

(2) मद्रास और मैसूर विधान-सभाओं की संरचना में हुए परिवर्तन उन दोनों विधान सभाओं में से किसी की अस्तित्वावधि को प्रभावित नहीं करेंगे, जैसा कि अनुच्छेद 172 के खंड (1) के अधीन उपबंधित है ।

18. उपान्तरित सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के लिए निर्वाचक नामावलियां-जहां धारा 12 के उपबंधों के आधार पर किसी सभा निर्वाचन-क्षेत्र की सीमा परिवर्तित हो गई है, वहां इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावली, नियत दिन से और जब तक कि वह विधि के अनुसार पुनरीक्षित नहीं की जाती, किसी सभा निर्वाचन-क्षेत्र या निर्वाचन-क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली या नामावलियों के उतने भाग से मिलकर बनी समझी जाएगी जो इस प्रकार परिवर्तित निर्वाचन-क्षेत्र के अन्तर समाविष्ट क्षेत्रों से सम्बद्ध है ।

विधान-परिषदें

19. मद्रास विधान-परिषद्-(1) मद्रास विधान-परिषद् में 51 स्थान होंगे जिनमें से,-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (क), (ख) और (ग) में निर्दिष्ट निर्वाचक-मण्डलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्याएं क्रमशः 14, 4 और 4 होंगी;

(ख) उक्त खंड के उपखंड (घ) के उपबंधों के अनुसार, मद्रास विधान-सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 8 होगी; और

(ग) मद्रास के राज्यपाल द्वारा, उक्त खंड के उपखंड (ङ) के उपबंधों के अनुसार नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी जाने वाली संख्या 11 होगी :

                परन्तु अप्रैल, 1954 के 21वें दिन से,-

(क) अनुच्छेद 171 के खंड (3) के उपखंड (ख) में निर्दिष्ट निर्वाचक-मण्डलों द्वारा निर्वाचित व्यक्तियों से भरे जाने वाले स्थानों की संख्या बढ़ा कर 6 कर दी जाएगी;

(ख) इस उपधारा के खंड (ग) में निर्दिष्ट व्यक्तियों से भरे जाने वाले स्थानों की संख्या घटा कर 9 कर दी जाएगी ।

(2) उपधारा (1) के परन्तुक के खंड (क) के अधीन आबंटित दो अतिरिक्त स्थानों को, उनके प्रथम बार भरे जाने के प्रयोजन के लिए, ऐसे स्थान समझा जाएगा जो अप्रैल, 1954 के बीसवें दिन, अपनी पदावधियों के अवसान पर निवृत्त होने वाले मद्रास विधान-परिषद् के सदस्यों द्वारा रिक्त कर दिए गए हैं ।

(3) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की तृतीय अनुसूची,-

(क) नियत दिन से और अप्रैल, 1954 के 21वें दिन तक के लिए निम्न प्रकार संशोधित की जाएगी :-

मद्रास से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, प्रविष्टि-

3. मद्रास 51  14  4  4  18  11" प्रतिस्थापित की जाएगी; तथा

                                (ख) अप्रैल, 1954 के 21वें दिन से निम्न प्रकार संशोधित की जाएगी :-

                                मद्रास से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, प्रविष्टि-

3. मद्रास 51  14  6  4  18  9" प्रतिस्थापित की जाएगी ।

20. मद्रास परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र-परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मद्रास) आदेश, 1951  तब तक जब तक कि विधि द्वारा अन्य उपबन्ध नहीं किया जाता, तृतीय अनुसूची द्वारा निदिष्ट उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा :

परन्तु अप्रैल, 1954 के 21वें दिन से, उस आदेश के पैरा 2 से अनुलग्न सारणी इस अतिरिक्त उपान्तर के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी कि उसके स्तम्भ 3 में मद्रास (स्नातक)" निर्वाचन-क्षेत्र के सामने की प्रविष्टि के स्थान पर प्रविष्टि 6" प्रतिस्थापित की जाएगी ।

21. मद्रास विधान-परिषद् के सदस्य और उनकी पदावधियां-(1) मद्रास विधान-परिषद् के वे आसीन सदस्य जिनके नाम चतुर्थ अनुसूची में विनिर्दिष्ट नहीं हैं, नियत दिन को उस परिषद् के सदस्य नहीं रह जाएंगे ।

(2) मद्रास दक्षिण (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र और मद्रास दक्षिण (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधान-परिषद् के आसीन सदस्य, नियत दिन से, क्रमशः मद्रास (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र और मद्रास (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा मद्रास की विधान-परिषद् के लिए निर्वाचित किए गए समझे जाएंगे ।

(3) उन आसीन सदस्यों की पदावधियां, जो नियत दिन को विधान-परिषद् के सदस्य बने रहते हैं, चतुर्थ अनुसूची में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार अवधारित की जाएंगी ।

22. मैसूर विधान-परिषद्-(1) परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मैसूर) आदेश, 1951  तब तक जब तक कि विधि द्वारा अन्य उपबन्ध नहीं किया जाता, पंचम अनुसूची द्वारा निदिष्ट उपान्तर के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा ।

(2) उक्त आदेश में मैसूर राज्य के प्रति किसी निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत, धारा 4 की उपधारा (1) द्वारा उस राज्य में सम्मिलित किया गया राज्यक्षेत्र भी आता है ।

(3) चितलदुर्ग (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मैसूर विधान-परिषद् के आसीन सदस्य, नियत दिन से, चितलदुर्ग-एवं-बल्लारी (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा उस परिषद् के लिए निर्वाचित किए गए समझे जाएंगे ।

(4) मैसूर (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र या मैसूर (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्र का, जिनकी सीमाएं उपधारा (2) के उपबंधों के आधार पर परिवर्तित हो गई हैं, प्रतिनिधित्व करने वाला मैसूर विधान-परिषद् का प्रत्येक आसीन सदस्य, नियत दिन से, इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा उक्त परिषद् के लिए निर्वाचित किया गया समझा जाएगा ।

23. उपान्तरित परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियां-नियत दिन के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, मैसूर (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र तथा मैसूर (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक-नामावलियां पुनरीक्षित की जाएंगी और मैसूर विधान-परिषद् का चितलदुर्ग-एवं-बल्लारी (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) के उपबंधों के अनुसार एक निर्वाचक नामावली तैयार की जाएगी और इस प्रकार पुनरीक्षित या तैयार की गई नामावलियां, उस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार अपने अंतिम प्रकाशन पर तुरन्त प्रवृत्त हो जाएंगी ।

प्रकीर्ण

24. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेशों का पुनरीक्षण-संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 और संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950, छठी अनुसूची द्वारा निदिष्ट उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे ।

25. आंध्र विधान सभा के प्रक्रिया नियम-मद्रास राज्य की विधान-सभा के बारे में नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त प्रक्रिया और कामकाज के संचालन के बारे में नियम, जब तक कि अनुच्छेद 208 के खण्ड (1) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते, आन्ध्र राज्य की विधान सभा के सम्बन्ध में ऐसे उपान्तरों और अनुकूलनों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे जो उसके अध्यक्ष द्वारा उनमें किए जाएं ।

26. 1950 के अधिनियम 43 की धारा 2 का संशोधन-लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की धारा 2 को, धारा 2 की उपधारा (1) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित उक्त धारा में निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्: -

(2) इस अधिनियम में धारा 6, धारा 9 या धारा 11 के अधीन किए गए किसी आदेश के प्रति किसी निर्देश का, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत, आन्ध्र राज्य अधिनियम, 1953 की, यथास्थिति, धारा 12, धारा 20 या धारा 22 के अधीन यथा उपान्तरित ऐसे किसी आदेश के प्रति निर्देश आता है ।" ।

27. 1952 के अधिनियम 81 की धारा 9 का संशोधन- परिसीमन आयोग अधिनियम, 1952 (1952 का 81) की धारा 9 की उपधारा (3) में, और उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन किए गए आदेश" शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -

आन्ध्र राज्य अधिनियम, 1953 और उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन किए गए आदेश" ।

भाग 4

उच्च न्यायालय

28. आन्ध्र के लिए उच्च न्यायालय-(1) जनवरी, 1956 के प्रथम दिन से या ऐसी पूर्वतर तारीख से जो उपधारा (2) के अधीन नियत की जाए, आन्ध्र राज्य के लिए एक पृथक् उच्च न्यायालय (जिसे इसमें आगे आन्ध्र उच्च न्यायालय" कहा गया है) होगा ।

(2) यदि आंध्र राज्य के लिए पृथक् उच्च न्यायालय की स्थापना की सिफारिश करने वाला संकल्प, उस राज्य की विधान-सभा द्वारा स्वीकृत कर लिए जाने के पश्चात्, राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया गया हो, तो, राष्ट्रपति राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए जनवरी, 1956 के प्रथम दिन से पूर्वतर कोई तारीख नियत कर सकेगा ।

(3) उपधारा (1) में वर्णित तारीख, या यदि उपधारा (2) के अधीन कोई पूर्वतर तारीख नियत की जाती है तो ऐसे नियत की गई तारीख, इसमें इसके पश्चात् विहित दिन" के रूप में निर्दिष्ट की गई है ।

(4) आन्ध्र उच्च न्यायालय का मुख्य स्थान ऐसे स्थान पर होगा जिसे आन्ध्र का राज्यपाल विहित दिन के पहले आदेश द्वारा नियत करे:

परन्तु यदि ऐसे मुख्य स्थान के लिए किसी स्थान की सिफारिश करने वाला संकल्प, आन्ध्र विधान-सभा द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है तो ऐसा स्थान राज्यपाल द्वारा मुख्य स्थान के रूप में नियत किया जाएगा ।

29. आन्ध्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश-(1) विहित दिन के ठीक पहले पद धारण करने वाले मद्रास स्थित उच्च न्यायालय के वे न्यायाधीश, जो राष्ट्रपति द्वारा अवधारित किए जाएं, उस दिन को मद्रास स्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नहीं रह जाएंगे और आन्ध्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बन जाएंगे ।

(2) जो व्यक्ति उपधारा (1) के आधार पर आन्ध्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बन जाते हैं, वे उस दशा के सिवाय जिसमें ऐसा कोई व्यक्ति उस उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति नियुक्त किया जाता है, उस न्यायालय में, मद्रास स्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में अपनी-अपनी नियुक्ति की पूर्विकता के अनुसार स्थान पाएंगे ।

(3) कोई व्यक्ति जो उपधारा (1) के आधार पर आन्ध्र उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बन जाता है, उस दशा के सिवाय, जिसमें कि मद्रास स्थित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति से भिन्न कोई न्यायाधीश आन्ध्र उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति नियुक्त किया जाता है, उस समय की बाबत जो आन्ध्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में वास्तविक सेवा में व्यतीत किया गया है, वह विशेष वेतन प्राप्त करने का हकदार बना रहेगा जो वह विहित दिन के ठीक पहले संविधान की द्वितीय अनुसूची के पैरा 10 के उपपैरा (2) के अधीन ले रहा था ।

30. आन्ध्र उच्च न्यायालय की अधिकारिता-आन्ध्र उच्च न्यायालय को, तत्समय आन्ध्र राज्य में सम्मिलित राज्यक्षेत्रों की बाबत वह सब आरम्भिक, अपीली और अन्य अधिकारिता होगी जो विहित दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि के अधीन उक्त राज्यक्षेत्रों या उनके किसी भाग की बाबत मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य है ।

31. अधिवक्ताओं के अभ्यावेशन की शक्ति, आदि-(1) आन्ध्र उच्च न्यायालय की अधिवक्ताओं और अटर्नियों को अनुमोदित करने, स्वीकृत करने, अभ्यावेशित करने, हटाने और निलम्बित करने, तथा उनके बारे में नियम बनाने की वैसी ही शक्ति होगी जो विहित दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि के अधीन, मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य है ।

(2) आन्ध्र उच्च न्यायालय में सुनवाई का अधिकार वैसे ही सिद्धांतों के अनुसार विनियमित किया जाएगा जो विहित दिन के ठीक पहले मद्रास स्थित उच्च न्यायालय में सुनवाई के अधिकार के बारे में प्रवृत्त है :

परन्तु इस धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में आन्ध्र उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए किसी नियम या दिए गए किसी निदेश के अधीन रहते हुए, कोई ऐसा व्यक्ति जो विहित दिन के ठीक पहले, मद्रास स्थित उच्च न्यायालय में विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार अधिवक्ता है या कार्य करने के लिए हकदार अटर्नी है, आन्ध्र उच्च न्यायालय में, यथास्थिति, विधि व्यवसाय करने या कार्य करने के लिए हकदार अधिवक्ता या अटर्नी के रूप में मान्य किया जाएगा ।

32. आन्ध्र उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया-इस भाग के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मद्रास स्थित उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत विहित दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपान्तरों के साथ, आन्ध्र उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी, और तदनुसार उस उच्च न्यायालय को पद्धति और प्रक्रिया के बारे में नियम बनाने और आदेश करने की ऐसी सब शक्तियां होंगी जो विहित दिन के ठीक पहले मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य हैं:

परन्तु पद्धति और प्रक्रिया के बारे में कोई नियम या आदेश, जो विहित दिन के ठीक पहले मद्रास स्थित उच्च न्यायालय में प्रवृत्त हैं, जब तक कि आन्ध्र उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए नियमों या किए गए आदेशों द्वारा परिवर्तित या प्रतिसंहृत नहीं किए जाते, आन्ध्र उच्च न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक उपान्तरों के साथ ऐसे लागू होंगे, मानो वे उस न्यायालय द्वारा बनाए गए या किए गए हों ।

33. आन्ध्र उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा-मद्रास स्थित उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा की बाबत विहित दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपान्तरों के साथ, आन्ध्र उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा की बाबत लागू होगी ।

34. रिटों और अन्य आदेशिकाओं का प्ररूप-मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने, जारी की जाने या दी जाने वाली रिटों और अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप की बाबत विहित दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपान्तरों के साथ, आन्ध्र उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने, जारी की जाने या दी जाने वाली रिटों और अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप की बाबत लागू होगी ।

35. न्यायाधीशों की शक्तियां-मद्रास स्थित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति, एकल न्यायाधीशों और खण्ड न्यायालयों की शक्तियों के संबंध में और उन शक्तियों के प्रयोग से आनुषंगिक सभी विषयों के संबंध में विहित दिन के ठीक पहले प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपान्तरों के साथ, आन्ध्र उच्च न्यायालय की बाबत लागू होगी ।

36. उच्च न्यायालय की बैठक का स्थान-आन्ध्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और खण्ड न्यायालयों की बैठकें, आन्ध्र राज्य में उसके मुख्य स्थान से भिन्न ऐसे स्थान या स्थानों पर हो सकेंगी जो मुख्य न्यायाधिपति, आन्ध्र के राज्यपाल के अनुमोदन से, नियत करे ।

37. उच्चतम न्यायालय को अपीलों के विषय में प्रक्रिया-मद्रास स्थित उच्च न्यायालय और उसके न्यायाधीशों और खण्ड न्यायालयों से उच्चतम न्यायालय को अपीलों से संबंधित जो विधि विहित दिन के ठीक पहले प्रवृत्त थी, वह आवश्यक उपान्तरों के साथ, आन्ध्र उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।

38. कार्यवाहियों का मद्रास उच्च न्यायालय से आन्ध्र उच्च न्यायालय को अन्तरण-(1) इसमें इसके पश्चात् यथा उपबन्धित के सिवाय, मद्रास स्थित उच्च न्यायालय को विहित दिन से आन्ध्र राज्य के बारे में कोई अधिकारिता नहीं होगी ।

(2) मद्रास स्थित उच्च न्यायालय में विहित दिन के ठीक पहले लम्बित ऐसी कार्यवाहियां, जिन्हें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति द्वारा, वाद हेतुक के प्रोद्भूत होने के स्थान और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, उस दिन के पहले या पश्चात्, ऐसी कार्यवाहियों के रूप में प्रमाणित किया जाता है जो कि आन्ध उच्च न्यायालय द्वारा सुनी और विनिश्चित की जानी चाहिए, ऐसे प्रमाणन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र आन्ध्र उच्च न्यायालय को अन्तरित हो जाएंगी ।

(3) इस धारा की उपधारा (1) और (2) में या धारा 30 में किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी, किन्तु इसमें इसके पश्चात् यथा उपबन्धित के सिवाय, मद्रास स्थित उच्च न्यायालय को अपीलें, अपील करने की इज़ाजत के लिए आवेदन जिनके अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय को अपील करने की इज़ाजत भी आती है, पुनर्विलोकन के लिए आवेदन और अन्य कार्यवाहियां, जहां ऐसी कोई कार्यवाहियां विहित दिन के पहले मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश की बाबत किसी अनुतोष की याचना करती हैं, ग्रहण करने, उनकी सुनवाई करने  या उनका निपटारा करने की अधिकारिता होगी तथा आन्ध्र उच्च न्यायालय को ऐसी अधिकारिता नहीं होगी :

परन्तु यदि मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा ऐसी कोई कार्यवाहियां ग्रहण कर ली जाने के पश्चात्, उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को यह प्रतीत हो कि वे आन्ध्र उच्च न्यायालय को अन्तरित की जानी चाहिएं तो वह आदेश देगा कि वे ऐसे अन्तरित की जाएं और तब ऐसी कार्यवाहियां तद्नुसार अन्तरित की जाएंगी ।

(4) मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा, -

(क) आन्ध्र उच्च न्यायालय को उपधारा (2) के आधार पर अन्तरित किन्हीं कार्यवाहियों में, विहित दिन के पहले, अथवा

(ख) किन्हीं ऐसी कार्यवाहियों में, जिनकी बाबत मद्रास स्थित उच्च न्यायालय उपधारा (3) के आधार पर अधिकारिता प्रतिधारित करता है,

किया गया कोई आदेश, सभी प्रयोजनों के लिए, न केवल मद्रास स्थित उच्च न्यायालय के आदेश के रूप में, अपितु आन्ध्र उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के रूप में भी प्रभावी होगा ।

39. व्यावृत्तियां-इस भाग की कोई भी बात, संविधान के किन्हीं उपबंधों के आन्ध्र उच्च न्यायालय को लागू होने पर प्रभाव नहीं डालेगी, तथा यह भाग किसी ऐसे उपबंध के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा जो ऐसा उपबन्ध बनाने की शक्ति रखने वाले किसी विधान-मण्डल या अन्य प्राधिकरण द्वारा विहित दिन को या उसके पश्चात् उस उच्च न्यायालय की बाबत बनाया जाए ।

40. अन्तःकालीन उपबन्ध-(1) इस धारा के उपबन्ध नियत दिन को आरम्भ होने वाली और विहित दिन के ठीक पहले समाप्त होने वाली अवधि की बाबत प्रभावी होंगे ।

(2) मद्रास स्थित उच्च न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार आन्ध्र राज्य पर होगा, और उक्त उच्च न्यायालय को, उस राज्य के राज्यक्षेत्रों के संबंध में, ऐसी अधिकारिता बनी रहेगी जो उसे नियत दिन के ठीक पहले प्राप्त थी ।

41. मैसूर के परिवर्धित क्षेत्रों के लिए उच्च न्यायालय-(1) इसमें इसके पश्चात् यथा उपबन्धित के सिवाय-

(क) मैसूर उच्च न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार, नियत दिन से, सम्पूर्ण अन्तरित राज्यक्षेत्र पर होगा, तथा

(ख) मद्रास स्थित उच्च न्यायालय को, उस दिन से, अन्तरित राज्यक्षेत्र की बाबत कोई अधिकारिता नहीं होगी ।

                (2) मद्रास स्थित उच्च न्यायालय में नियत दिन के ठीक पहले लम्बित ऐसी कार्यवाहियां, जिन्हें उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति द्वारा, वाद-हेतुक के प्रोद्भूत होने के स्थान और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी कार्यवाहियों के रूप में प्रमाणित किया जाता है जो कि मैसूर उच्च न्यायालय द्वारा सुनी और विनिश्चित की जानी चाहिए, ऐसे प्रमाणन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र मैसूर उच्च न्यायालय को अन्तरित की जाएंगी ।

(3) उपधारा (1) और (2) में किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी, किन्तु इसमें इसके पश्चात् यथा उपबंधित के सिवाय, मद्रास स्थित उच्च न्यायालय को अपीलें, अपील करने की इजाजत के लिए आवेदन जिनके अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय को अपील करने की इजाजत भी आती है, पुनिर्वलोकन के लिए आवेदन और अन्य कार्यवाहियां, जहां ऐसी कोई कार्यवाहियां नियत दिन के पहले मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश की बाबत किसी अनुतोष की याचना करती हैं, ग्रहण करने, उनकी सुनवाई करने या उनका निपटारा करने की अधिकारिता होगी तथा मैसूर उच्च न्यायालय को ऐसी अधिकारिता नहीं होगी :

परन्तु यदि मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा ऐसी कोई कार्यवाहियां ग्रहण कर ली जाने के पश्चात्, उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को यह प्रतीत हो कि वे मैसूर उच्च न्यायालय को अन्तरित की जानी चाहिएं तो वह आदेश देगा कि वे ऐसे अन्तरित की जाएं, तथा तब ऐसी कार्यवाहियां तदनुसार अन्तरित की जाएंगी ।

(4) मद्रास स्थित उच्च न्यायालय द्वारा, -

(क) मैसूर उच्च न्यायालय को उपधारा (2) के आधार पर अन्तरित किन्हीं कार्यवाहियों में, नियत दिन के पहले, अथवा

(ख) किन्हीं ऐसी कार्यवाहियों में, जिनकी बाबत मद्रास स्थित उच्च न्यायालय उपधारा (3) के आधार पर अधिकारिता प्रतिधारित करता है,

किया गया कोई आदेश, सभी प्रयोजनों के लिए, न केवल मद्रास स्थित उच्च न्यायालय के आदेश के रूप में, अपितु मैसूर उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के रूप में भी, प्रभावी होगा ।

(5) किसी ऐसे व्यक्ति को, जो नियत दिन के ठीक पहले मद्रास स्थित उच्च न्यायालय में विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार अधिवक्ता अथवा कार्य करने के लिए हकदार अटर्नी है, और उस उच्च न्यायालय से उपधारा (2) के या उपधारा (3) के परन्तुक के अधीन मैसूर उच्च न्यायालय को अन्तरित किन्हीं कार्यवाहियों में हाजिर होने या कार्य करने के लिए प्राधिकृत था, कार्यवाहियों के ऐसे अन्तरण पर, उन कार्यवाहियों के संबंध में, मैसूर उच्च न्यायालय में विधि व्यवसाय करने के लिए हकदार अधिवक्ता या कार्य करने के लिए हकदार अटर्नी के रूप में, मैसूर उच्च न्यायालय में, यथास्थिति, हाजिर होने या कार्य करने का अधिकार होगा ।

42. निर्वचन-धारा 38 और 41 के प्रयोजनों के लिए, -

(क) कार्यवाहियां न्यायालय में तब तक लम्बित समझी जाएंगी जब तक उस न्यायालय ने पक्षकारों के बीच के सभी विवाद्यकों को, जिसके अंतर्गत कार्यवाहियों के खर्चों के विनिर्धारण की बाबत विवाद्यक भी आते हैं, निपटा न दिया हो, तथा उनके अन्तर्गत अपीलें, अपील करने की इजाजत के लिए आवेदन, जिनके अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय को अपील करने की इजाजत भी आती है, पुनर्विलोकन के लिए आवेदन, पुनरीक्षण के लिए अर्जियां और रिटों के लिए अर्जियां भी आएंगी;

(ख) उच्च न्यायालय के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उनके अन्तर्गत उसके न्यायाधीश या खण्ड न्यायालय के प्रति निर्देश भी आते हैं, तथा किसी न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा दिए गए आदेश के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उनके अन्तर्गत उस न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा पारित दण्डादेश, निर्णय या दी गई डिक्री के प्रति निर्देश भी आते हैं ।

भाग 5

वित्तीय उपबन्ध

43. विधान-मण्डल द्वारा व्यय की मंजूरी दी जाने तक उसका प्राधिकरण-(1) मद्रास का राज्यपाल नियत दिन के पहले किसी समय, आन्ध्र राज्य की संचित निधि और मद्रास राज्य की संचित निधि में से ऐसा व्यय, जिसे वह नियत दिन से आरंभ होने वाली चार मास से अनधिक की अवधि के लिए आवश्यक समझता है, यथास्थिति, आन्ध्र राज्य या मद्रास राज्य के विधान-मण्डल द्वारा ऐसे व्यय की मंजूरी दी जाने तक, प्राधिकृत कर सकेगा:

परन्तु आन्ध्र का राज्यपाल नियत दिन के पश्चात्, आन्ध्र राज्य की संचित निधि में से किसी ऐसी अवधि के लिए, जिसका विस्तार चार मास की उक्त अवधि के परे न हो, ऐसा अतिरिक्त व्यय, जो वह आवश्यक समझता है, प्राधिकृत कर सकेगा ।

(2) मैसूर का राजप्रमुख भी, नियत दिन के पहले किसी समय, मैसूर राज्य की संचित निधि में से ऐसा व्यय जिसे वह अन्तरित राज्यक्षेत्र की बाबत, नियत दिन से आरंभ होने वाली चार मास से अनधिक की अवधि के लिए अतिरिक्त व्यय की पूर्ति के लिए आवश्यक समझता है, राज्य के विधान-मण्डल द्वारा ऐसे व्यय की मंजूरी न दी जाने तक, प्राधिकृत कर सकेगा ।

44. मद्रास विधान-सभा द्वारा लेखानुदान-मद्रास विधान-सभा द्वारा अनुच्छेद 206 के खण्ड (1) के उपखण्ड (क) के अधीन, वित्तीय वर्ष 1953-54 के किसी भाग के लिए प्राक्कलित व्यय की बाबत किया गया कोई अनुदान तथा उस राज्य के विधान-मण्डल द्वारा बनाई गई वह विधि, जो उन प्रयोजनों के लिए जिनके लिए कि उक्त अनुदान किया गया है, राज्य की संचित निधि में से धनों का प्रत्याहरण प्राधिकृत करती है, इस बात के होते हुए भी कि ऐसे लेखानुदान के लिए अनुच्छेद 203 में विहित प्रक्रिया की पूर्ति नहीं की गई है और ऐसे व्यय के संबंध में अनुच्छेद 204 के उपबन्धों के अनुसार विधि नियत दिन के पहले पारित नहीं की गई है, उन प्रयोजनों के लिए जिनके लिए उक्त अनुदान किया गया है, उस दिन के पहले उपगत सब व्यय के लिए और ऐसे व्यय के संबंध में राज्य की संचित निधि में से उस दिन के पहले धनों के प्रत्याहरण के लिए, पर्याप्त प्राधिकारी समझे जाएंगे ।

45. मद्रास विनियोग अधिनियम के अधीन प्राधिकरण का रहना-नियत दिन से, कोई ऐसा अधिनियम जो मद्रास विधान-मण्डल द्वारा, वित्तीय वर्ष 1953-54 के किसी भाग की बाबत, राज्य की संचित निधि में से किसी व्यय की पूर्ति करने के लिए किसी धन के विनियोजन के लिए उस दिन के पहले पारित किया गया हो, प्रभावी न रह जाएगा ।

46. मद्रास राज्य के लेखाओं से संबंधित रिपोर्टें-नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत मद्रास राज्य के लेखाओं से संबंधित, भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक की रिपोर्टें, जो अनुच्छेद 151 के खण्ड (2) में निर्दिष्ट हैं, आन्ध्र और मद्रास राज्यों में से प्रत्येक के राज्यपाल को प्रस्तुत की जाएंगी जो उन्हें राज्य के विधान-मण्डल के समक्ष रखवाएगा ।

47. आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन-(1) इस भाग के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, नियत दिन के ठीक पहले मद्रास राज्य की आस्तियां और दायित्व, उस राज्य तथा आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच, सप्तम् अनुसूची में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अनुसार प्रभाजित किए जाएंगे ।

(2) ऐसे प्रभाजन से संबंधित या उससे उद्भूत होने वाला कोई विवाद राष्ट्रपति को निर्देशित किया जाएगा जिसका विनिश्चय अंतिम होगा ।

48. संविदाएं-(1) जहां नियत दिन के पहले मद्रास राज्य ने उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में, राज्य के किन्हीं प्रयोजनों के लिए कोई संविदा की हो, वहां वह संविदा, -

                (क) यदि ऐसे प्रयोजन, उस दिन से-

                                (i) अनन्यतः आन्ध्र राज्य के प्रयोजन हैं, अथवा

(ii) भागतः आन्ध्र राज्य के प्रयोजन और भागतः मैसूर राज्य के प्रयोजन हैं और नियत दिन को यथागठित मद्रास राज्य के प्रयोजन नहीं हैं, तो,

                मद्रास राज्य के बजाय आन्ध्र राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में की गई समझी जाएगी;

(ख) यदि ऐसे प्रयोजन, उस दिन से अनन्यतः मैसूर राज्य के प्रयोजन हैं तो मद्रास राज्य के बजाय उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में की गई समझी जाएगी; और

(ग) किसी अन्य दशा में, इस रूप में प्रभावी बनी रहेगी कि वह मद्रास राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में की गई है,

तथा वे सब अधिकार और दायित्व जो ऐसी किसी संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हैं या प्रोद्भूत हों, उस सीमा तक, यथास्थिति, आन्ध्र राज्य, मैसूर राज्य या मद्रास राज्य के अधिकार या दायित्व होंगे, जहां तक कि वे नियत दिन के ठीक पहले यथागठित मद्रास राज्य के अधिकार या दायित्व होते ।

(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उन दायित्वों में, जो संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हैं या प्रोदभूत हों, -

(क) संविदा से संबंधित कार्यवाहियों में से किसी न्यायालय या अन्य अधिकरण द्वारा दिए गए आदेश या अधिनिर्णय की तुष्टि करने का कोई दायित्व, और

(ख) ऐसी किन्हीं कार्यवाहियों में या उनके संबंध में उपगत व्ययों की बाबत कोई दायित्व,

सम्मिलित समझा जाएगा ।

(3) यह धारा सप्तम् अनुसूची में अन्तर्विष्ट उधारों, प्रत्याभूतियों और अन्य वित्तीय बाध्यताओं की बाबत दायित्वों के प्रभाजन से संबंधित उपबन्धों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी; और बैंक अतिशेषों तथा प्रतिभूतियों की बाबत कार्यवाही, इस बात के होते हुए भी कि वे संविदात्मक अधिकारों की प्रकृति की हैं, उक्त उपबन्धों के अधीन की जाएगी ।

49. अनुयोज्य दोष की बाबत दायित्व-जहां नियत दिन के ठीक पहले, मद्रास राज्य पर संविदा भंग से भिन्न किसी अनुयोज्य दोष की बाबत कोई दायित्व हो, वहां वह दायित्व, -

                (क) जहां कि वाद-हेतुक-

(i) पूर्णतया उन राज्यक्षेत्रों के भीतर पैदा हुआ हो जो उस दिन से आन्ध्र राज्य के राज्यक्षेत्र हैं, अथवा

(ii) भागतः राज्यक्षेत्रों के भीतर जो उस दिन से आंध्र राज्य के राज्यक्षेत्र हैं और भागतः अन्तरित उन राज्यक्षेत्र के भीतर पैदा हुआ हो, किन्तु उन राज्यक्षेत्रों के किसी ऐसे भाग के भीतर पैदा नहीं हुआ हो जो उस दिन से मद्रास राज्य के राज्यक्षेत्र हैं,

आंध्र राज्य का दायित्व होगा;

                (ख) जहां कि वाद-हेतुक पूर्णतया अन्तरित राज्यक्षेत्र के भीतर पैदा हुआ हो, मैसूर राज्य का दायित्व होगा; और

(ग) किसी अन्य दशा में, मद्रास राज्य का दायित्व बना रहेगा ।

50. प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्व-यदि नियत दिन के ठीक पहले, मद्रास राज्य पर ऐसी सहकारी सोसाइटी के, जो मद्रास सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1932 (1932 का मद्रास अधिनियम 6) के अधीन रजिस्ट्रीकृत है और जिसका क्रियाक्षेत्र उन सम्पूर्ण राज्यक्षेत्रों या उनके किसी भाग तक सीमित है जो नियत दिन को आन्ध्र राज्य के राज्यक्षेत्र बन गए हैं, किसी दायित्व की बाबत मद्रास राज्य का प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्व है तब उस दिन से ऐसी प्रत्याभूति की बाबत मद्रास राज्य का उक्त दायित्व आंध्र राज्य का दायित्व होगा ।

51. राष्ट्रपति की कुछ मामलों में आबंटन या समायोजन के लिए आदेश देने की शक्ति-जहां धारा 47 से 50 तक के या सप्तम् अनुसूची के उपबंधों में से किसी के आधार पर मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों में से कोई किसी सम्पत्ति का हकदार हो जाए या कोई अन्य फायदे प्राप्त करे या किसी दायित्व के अधीन हो जाए, और नियत दिन से तीन वर्ष की अवधि के भीतर किसी संबंधित राज्य द्वारा निर्देश किए जाने पर राष्ट्रपति की राय हो कि वह न्यायसंगत तथा साम्यापूर्ण है कि वह सम्पत्ति या वे फायदे अन्य राज्यों में से एक अथवा दोनों को अन्तरित किए जाने चाहिएं अथवा उसमें से उसे या उन्हें अंश मिलना चाहिए, अथवा उस दायित्व के मद्धे अन्य राज्यों में से एक या दोनों द्वारा अभिदाय किया जाना चाहिए, वहां उक्त सम्पत्ति या फायदों का आबंटन ऐसी रीति से किया जाएगा, या अन्य राज्य उस राज्य को जो मुख्यतया दायित्व के अधीन है, उसके बारे में ऐसा अभिदाय करेगा या करेंगे जो राष्ट्रपति सम्बद्ध राज्य सरकारों से परामर्श के पश्चात्, आदेश द्वारा, अवधारित करे ।

52. कुछ व्यय का राज्य की संचित निधि पर भारित किया जाना-मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों में से किसी के द्वारा अन्य दो राज्यों में से किसी एक को अथवा केन्द्रीय सरकार को, सप्तम् अनुसूची के पैरा 12 या पैरा 17 के उपबंधों के आधार पर संदेय सब राशियां उस राज्य की संचित निधि पर, जिसके द्वारा ऐसी राशियां संदेय हैं, भारित की जाएंगी ।

भाग 6

विधिक उपबन्ध

53. विधियों का राज्यक्षेत्रीय विस्तार-भाग 2 के उपबंधों की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि उनसे उन राज्यक्षेत्रों में कोई परिवर्तन किया गया है जिन पर नियत दिन के ठीक पहले प्रवृत्त किसी विधि का विस्तार है या वह लागू है, तथा ऐसी किसी विधि में मद्रास या मैसूर राज्य के प्रति राज्यक्षेत्र संबंधी निर्देशों का, जब तक कि सक्षम विधान-मण्डल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा अन्यथा उपबंध न किया जाए, वही अर्थ बना रहेगा ।

54. विधियों के अनुकूलन की शक्ति-नियत दिन के पहले बनाई गई किसी विधि के आन्ध्र, मद्रास या मैसूर राज्य के संबंध में लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए, समुचित सरकार अप्रैल, 1954 के प्रथम दिन के पहले आदेश द्वारा, निरसन या संशोधन के रूप में विधि के ऐसे अनुकूलन तथा उपान्तर, जैसे आवश्यक या समीचीन हों, कर सकेगी,

और तब ऐसी हर विधि, जब तक वह सक्षम विधान-मण्डल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा परिवर्तित, निरसित या संशोधित न कर दी जाए, इस प्रकार किए गए अनुकूलनों और उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभाव होगी ।

स्पष्टीकरण-इस धारा में समुचित सरकार" पद से, जहां तक कि संविधान की सप्तम् अनुसूची की प्रथम सूची में प्रगणित किसी विषय से संबंधित किसी विधि का सम्बन्ध है, केन्द्रीय सरकार, और जहां तक कि किसी अन्य विधि का सम्बन्ध है, यथास्थिति, आन्ध्र, मद्रास या मैसूर की राज्य सरकार अभिप्रेत है ।

55. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-इस बात के होते हुए भी कि नियत दिन के पहले बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन के लिए धारा 54 के अधीन कोई उपबंध नहीं किया गया है, या अपर्याप्त उपबन्ध किया गया है ऐसी विधि को प्रवर्तित करने के लिए अपेक्षित या सशक्त किया गया कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण, आन्ध्र, मद्रास या मैसूर राज्य के संबंध में उसके लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए, उस विधि का अर्थान्वयन, सार पर प्रभाव डाले बिना, ऐसे परिवर्तनों के साथ कर सकेगा जो उसे, यथास्थिति, उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष के मामले के प्रति अनुकूलित करने के लिए आवश्यक या उचित हों ।

56. कानूनी कृत्यों का प्रयोग करने वाले प्राधिकारियों, आदि को नामित करने की शक्ति-राज्यपाल, जहां तक कि आन्ध्र राज्य का सम्बन्ध है, और राजप्रमुख, जहां तक कि अन्तरित राज्यक्षेत्र का सम्बन्ध है, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, वह प्राधिकारी, अधिकारी या व्यक्ति विनिर्दिष्ट कर सकेंगे जो नियत दिन से, उस दिन प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्रयोक्तव्य ऐसे कृत्यों का प्रयोग करने के लिए, जो उस अधिसूचना में वर्णित किए जाएं, सक्षम होगा, तथा ऐसी विधि तद्नुसार प्रभावी होगी ।

57. मद्रास राज्य से संबंधित विधिक कार्यवाहियां-जहां नियत दिन के ठीक पहले मद्रास राज्य, इस अधिनियम के अधीन मद्रास राज्य और आन्ध्र तथा मैसूर राज्यों के बीच प्रभाजनाधीन किसी सम्पत्ति, अधिकारों या दायित्वों की बाबत किन्हीं विधिक कार्यवाहियों में पक्षकार हो, वहां वह राज्य जो इस अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर उस सम्पत्ति या उन अधिकारों या दायित्वों का उत्तराधिकार पाता हो या उनमें कोई अंश अर्जित करता हो, यथास्थिति, उन कार्यवाहियों में मद्रास राज्य के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया या उन कार्यवाहियों में पक्षकार के रूप में सम्मिलित किया गया समझा जाएगा और कार्यवाहियां तद्नुसार चालू रह सकेंगी ।

58. कतिपय लम्बित कार्यवाहियों के बारे में उपबन्ध-(1) नियत दिन के ठीक पहले (उच्च न्यायालय से भिन्न) किसी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण या अधिकारी के समक्ष लम्बित प्रत्येक कार्यवाही, -

(क) किसी ऐसे क्षेत्र में, जो उस दिन को मद्रास राज्य या अन्तरित राज्यक्षेत्र के अन्तर्गत आता है, यदि वह उन राज्यक्षेत्रों के जो उस दिन से आन्ध्र राज्य के राज्यक्षेत्र हैं, अनन्यतः किसी भाग से संबंधित कार्यवाही है तो आन्ध्र राज्य के तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण या अधिकारी को अन्तरित हो जाएगी, अथवा

(ख) किसी ऐसे क्षेत्र में, जो उस दिन को मद्रास राज्य या आन्ध्र राज्य के अन्तर्गत आता है, यदि वह अन्तरित राज्यक्षेत्र के अनन्यतः किसी भाग से संबंधित कार्यवाही है तो मैसूर के तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण या अधिकारी को अन्तरित हो जाएगी ।

(2) यदि ऐसा कोई प्रश्न उठे कि क्या उपधारा (1) के अधीन कोई कार्यवाही अन्तरित हो जानी चाहिए तो उसे मद्रास स्थित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति के विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा और उसका विनिश्चय अन्तिम होगा ।

(3) इस धारा में,-

                (क) कार्यवाही" के अन्तर्गत कोई वाद, मामला या अपील आती है, और

                (ख) राज्य के संबंध में तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण या अधिकारी" से-

(i) वह न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण या अधिकारी अभिप्रेत है जिसको वह कार्यवाही, यदि वह नियत दिन के पश्चात् संस्थित की जाती तो प्रस्तुत की जाती; या

(ii) शंका की दशा में, राज्य का ऐसा न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण या अधिकारी अभिप्रेत है जो नियत दिन के पहले मद्रास के राज्यपाल द्वारा तथा नियत दिन के पश्चात् उस राज्य के राज्यपाल या राजप्रमुख द्वारा तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकरण या अधिकारी के रूप में अवधारित किया जाए ।

भाग 7

प्रशासनिक और प्रकीर्ण उपबंध

59. कतिपय जेलों और अन्य संस्थाओं में निरोध, तथा उनको सुपुर्द करने की शक्ति, के लिए उपबंध-(1) मद्रास सरकार और मैसूर सरकार नियत दिन से पांच वर्ष की अवधि के लिए, आन्ध्र सरकार को, अष्टम् अनुसूची के क्रमशः भाग 1 और भाग 2 में विनिर्दिष्ट जेलें और अन्य संस्थाएं, उन व्यक्तियों के जिन्हें ऐसी जेलों या संस्थाओं में आंध्र राज्य के किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा सुपुर्द किया गया हो या उनमें निरुद्ध किए जाने का आदेश दिया गया हो, ग्रहण किए जाने और निरोध के लिए उपलब्ध करेगी ।

(2) आन्ध्र राज्य का कोई न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण इस बात के लिए सक्षम होगा कि वह अष्टम् अनुसूची में विनिर्दिष्ट जेलों और अन्य संस्थाओं में से किसी को, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि के दौरान, उन व्यक्तियों की जो ऐसे न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा सिद्धदोष ठहराए गए हैं और दण्डादिष्ट किए गए हैं या उनमें निरुद्ध किए जाने के लिए आदिष्ट हैं, इस बात के होते हुए भी कि ऐसी जेल या संस्था राज्य के बाहर है, सुपुर्दगी या उसमें निरोध का आदेश दे ।

(3) वे निबंधन और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए अष्टम् अनुसूची में विनिर्दिष्ट जेलें और अन्य संस्थाएं, आन्ध्र सरकार द्वारा उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाई जाएंगी, वे होंगी जो जनवरी, 1954 के प्रथम दिन तक सम्बन्धित सरकारों के बीच करार पाई जाएं, या यदि उक्त तारीख तक कोई करार नहीं हो पाता है तो जो राष्ट्रपति के आदेश द्वारा नियत की जाएं ।

60. कतिपय राज्य संस्थाओं में सुविधाओं का बना रहना-मद्रास सरकार और मैसूर सरकार, नवम् अनुसूची के क्रमशः भाग 1 और भाग 2 में विनिर्दिष्ट संस्थाओं के बारे में, आन्ध्र राज्य की सरकार और जनता के लिए, इतनी अवधि के लिए और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर ऐसी सुविधाओं का उपबंध करेंगी, जो जनवरी, 1954 के प्रथम दिन तक सम्बन्धित सरकारों के बीच करार पाई जाएं, या यदि उक्त तारीख तक कोई करार नहीं हो पाता है तो जो राष्ट्रपति के आदेश द्वारा नियत की जाएं ।

61. भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा से सम्बन्धित उपबंध-(1) नियत दिन के ठीक पहले मद्रास राज्य में विद्यमान भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के काडरों के स्थान पर, उस दिन से, इन सेवाओं में से प्रत्येक की बाबत दो पृथक् काडर, एक आन्ध्र राज्य के लिए और दूसरा मद्रास राज्य के लिए, होंगे ।

(2) राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, आन्ध्र और मद्रास राज्यों में से प्रत्येक के लिए उक्त काडरों का संख्या-बल और संरचना और अलग-अलग अधिकारियों के उनमें आबंटन का अवधारण करेगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन आन्ध्र राज्य के काडर को आबंटित प्रत्येक अधिकारी जो नियत दिन के ठीक पहले मद्रास राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा कर रहा है, -

(क) यदि नियत दिन के ठीक पहले वह किसी ऐसे क्षेत्र में जो उस दिन को आन्ध्र राज्य के अन्तर्गत आता है, कोई पद धारण कर रहा है तो उस दिन से, आन्ध्र सरकार द्वारा उस पद पर सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया समझा जाएगा; और

(ख) यदि नियत दिन के ठीक पहले वह ऐसे किसी क्षेत्र में कोई पद धारण नहीं कर रहा है, तो आन्ध्र सरकार द्वारा उस राज्य के कार्यकलाप के संबंध में किसी पद पर नियुक्त किया जाएगा ।

62. भारतीय सिविल सेवा, भारतीय पुलिस, भारतीय इंजीनियर सेवा और भारतीय वन सेवा से सम्बन्धित उपबंध-(1) उन सदस्यों के संबंध में, जो भारतीय सिविल सेवा, भारतीय पुलिस, भारतीय इंजीनियर सेवा और भारतीय वन सेवा के नाम से ज्ञात सेवाओं के मद्रास काडर में हैं, राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, आन्ध्र और मद्रास राज्य के लिए अलग-अलग अधिकारियों का आबंटन अवधारित करेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन आन्ध्र राज्य को आबंटित प्रत्येक अधिकारी, जो नियत दिन के ठीक पहले मद्रास राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा कर रहा है, -

(क) यदि नियत दिन के ठीक पहले वह किसी ऐसे क्षेत्र में जो उस दिन को आन्ध्र राज्य के अंतर्गत आता है, कोई पद धारण कर रहा है तो उस दिन से आन्ध्र सरकार द्वारा उस पद पर सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया समझा जाएगा; और

(ख) यदि नियत दिन के ठीक पहले वह ऐसे किसी क्षेत्र में कोई पद धारण नहीं कर रहा है, तो आन्ध्र सरकार द्वारा उस राज्य के कार्यकलाप के संबंध में किसी पद पर नियुक्त किया जाएगा ।

63. अन्य सेवाओं से सम्बन्धित उपबंध-(1) राष्ट्रपति, साधारण आदेश द्वारा, उन सब व्यक्तियों से, जो नियत दिन के ठीक पहले, धारा 3 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्रों में या अन्तरित राज्यक्षेत्र में मद्रास राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा कर रहे हैं और जो अपनी नियुक्तियों के निबंधनों या अपनी सेवा की शर्तों के अधीन प्रसामान्यतः उक्त राज्यक्षेत्रों या राज्यक्षेत्र के, जिनमें या जिसमें वे सेवा कर रहे हैं, बाहर अन्तरित किए जाने के दायित्वाधीन नहीं हैं, अपेक्षा कर सकेगा कि वे नियत दिन से, यथास्थिति, आन्ध्र राज्य या मैसूर राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करें और राष्ट्रपति द्वारा इस प्रकार किए गए सभी आबंटन अन्तिम होंगे ।

(2) राष्ट्रपति, विशेष आदेश द्वारा, किसी व्यक्ति से, जो नियत दिन के ठीक पहले मद्रास राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा कर रहा है और जिसको उपधारा (1) के उपबंध लागू नहीं हैं, आन्ध्र राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने की अपेक्षा कर सकेगा ।

(3) प्रत्येक व्यक्ति जिससे उपधारा (1) या (2) के अधीन, आन्ध्र राज्य या मैसूर राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने की अपेक्षा की जाती है, -

(क) यदि नियत दिन के ठीक पहले वह किसी ऐसे क्षेत्र में, जो उस दिन को उस राज्य के अन्तर्गत आता है जिसमें उससे सेवा करने की इस प्रकार अपेक्षा की गई है, मद्रास राज्य के कार्यकलाप के संबंध में कोई पद धारण कर रहा है, तो उस दिन से, उस पद पर सम्बन्धित राज्य की सरकार द्वारा या उसके अन्य समुचित प्राधिकारी द्वारा उस राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सम्यक् रूप से नियुक्त किया गया समझा जाएगा; और

(ख) यदि नियत दिन के ठीक पहले वह ऐसे किसी क्षेत्र में पद धारण नहीं कर रहा है, तो सम्बन्धित राज्य की सरकार द्वारा या उसके अन्य समुचित प्राधिकारी द्वारा उस राज्य के कार्यकलाप के संबंध में किसी पद पर नियुक्त किया जाएगा ।

(4) वे सभी व्यक्ति जिनसे राष्ट्रपति द्वारा उपधारा (2) के अधीन आन्ध्र राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने की अपेक्षा की जाती है, उसके द्वारा निम्नलिखित दो प्रवर्गों में वर्गीकृत किए जाएंगे, अर्थात्: -

(i) वे अधिकारी जिनका आन्ध्र राज्य के लिए आबंटन अन्तिम है (जिन्हें इस धारा में इसके पश्चात् आबंटित अधिकारी" कहा गया है); और

(ii) वे अधिकारी जिनसे राष्ट्रपति द्वारा आन्ध्र राज्य के कार्यकलाप के संबंध में किसी सीमित अवधि के लिए, जैसा कि उपधारा (5) में उपबंधित है, सेवा करने की अपेक्षा की गई है, (जिन्हें इस धारा में इसके पश्चात् अन्तरित अधिकारी" कहा गया है) ।

(5) वह अवधि जिसके लिए किसी अन्तरित अधिकारी से आन्ध्र राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने की अपेक्षा की जा सकेगी, दो वर्ष होगी:

परन्तु आन्ध्र सरकार, ऐसे किसी अधिकारी को उक्त अवधि की समाप्ति के पहले किसी समय, उसे और मद्रास सरकार को तीन मास की सूचना देने के पश्चात्, मद्रास राज्य को लौटा सकेगी ।

(6) किसी अधिकारी को, उपधारा (4) के अधीन, आबंटित अधिकारी या अन्तरित अधिकारी के रूप में इस बात के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा कि वह राष्ट्रपति की राय में, आन्ध्र राज्य को अन्तिम आबंटन के लिए उपयुक्त है अथवा उपयुक्त नहीं है ।

(7) अन्तरित अधिकारी, उस अवधि के दौरान जिसमें उससे आन्ध्र राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने की अपेक्षा की गई है, -

                (क) मद्रास राज्य की सेवा में बना रहेगा और उसे आन्ध्र राज्य में प्रतिनियुक्ति पर समझा जाएगा, और

(ख) उस पारिश्रमिक के अतिरिक्त, जो वह लेता है यदि वह उस अवधि के दौरान मद्रास राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करता रहता, ऐसे भत्तों का हकदार होगा जो राष्ट्रपति साधारण या विशेष आदेश द्वारा अवधारित करे ।

                (8) कोई अन्तरित अधिकारी, मद्रास सरकार की पूर्व सहमति के सिवाय, पदच्युत नहीं किया जाएगा, हटाया नहीं जाएगा अथवा पंक्ति में अवनत नहीं किया जाएगा, तथा यदि मद्रास सरकार आन्ध्र सरकार की ऐसी किसी प्रस्थापना पर सहमत नहीं होती है तो आन्ध्र सरकार, उपधारा (5) में किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी, सम्बन्धित अधिकारी को मद्रास राज्य को लौटा देगी ।

(9) उपधारा (7) और (8) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी अन्तरित अधिकारी की सेवा की शर्तें वही होंगी जो तब होतीं यदि वह उस अवधि के दौरान, जिसमें उससे आन्ध्र राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने की अपेक्षा की गई है, मद्रास राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करता रहता ।

(10) इस धारा के पूर्वगामी उपबंध किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में लागू नहीं होंगे जिसको धारा 61 या धारा 62 के उपबंध लागू हैं ।

64. राष्ट्रपति की निदेश देने की शक्ति-राष्ट्रपति धारा 61, 62 और 63 के उपबंधों को प्रभावी करने तथा मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच सेवाओं के उचित विभाजन को सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए उन राज्यों को ऐसे निदेश दे सकेगा जो उसे आवश्यक प्रतीत हों ।

65. मद्रास लोक सेवा आयोग की रिपोर्ट-नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के बारे में मद्रास लोक सेवा आयोग द्वारा किए गए कार्य की बाबत आयोग की रिपोर्ट, अनुच्छेद 323 के खण्ड (2) के अधीन आन्ध्र और मद्रास के राज्यपालों को प्रस्तुत की जाएगी,  तथा मद्रास का राज्यपाल ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर, उसकी एक प्रति, उन मामलों की बाबत, यदि कोई हों, जिनमें आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई हो, यावत्संभव, स्पष्टीकरण करने वाले ज्ञापन के साथ, ऐसे अस्वीकरण के कारणों को मद्रास राज्य के विधान-मण्डल के समक्ष रखवाएगा, तथा ऐसी रिपोर्ट या ऐसे किसी ज्ञापन को आन्ध्र राज्य की विधान-सभा के समक्ष रखवाना आवश्यक नहीं होगा ।

66. तुंगभद्रा परियोजना के बारे में विशेष उपबंध-(1) इस अधिनियम में किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी, किन्तु सप्तम् अनुसूची के पैरा 12 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, तुंगभद्रा परियोजना अथवा उसके प्रशासन के संबंध में मद्रास राज्य के सब अधिकार और दायित्व, नियत दिन को, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के अधिकार और दायित्व, ऐसे समायोजनों के अधीन रहते हुए, हो जाएंगे जो उक्त राज्यों द्वारा राष्ट्रपति से परामर्श के पश्चात् किए गए करार द्वारा किए जाएं, अथवा यदि नियत दिन से दो वर्ष के भीतर ऐसा कोई करार नहीं किया जाता है तो जैसा राष्ट्रपति, परियोजना के प्रयोजनों को सम्यक् रूप से ध्यान में रखते हुए, आदेश द्वारा अवधारित करे, तथा ऐसा कोई आदेश, परियोजना का प्रबंध उक्त राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से अथवा अन्यथा किए जाने का उपबंध कर सकेगा :

परन्तु राष्ट्रपति द्वारा इस प्रकर दिए गए आदेश में आन्ध्र और मैसूर राज्यों द्वारा किए गए किसी पश्चात्वर्ती करार द्वारा फेरफार किया जा सकेगा ।

(2) यदि नियत दिन के पश्चात् परियोजना का विस्तारण या अतिरिक्त विकास हुआ है, तो उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार या आदेश ऐसे विस्तारण अथवा अतिरिक्त विकास के संबंध में आन्ध्र और मैसूर राज्यों के अधिकारों और दायित्वों के लिए भी उपबंध करेगा ।

(3) उपधारा (1) और (2) में निर्दिष्ट अधिकारों और दायित्वों के अंतर्गत-

(क) उस जल को, जो परियोजना के फलस्वरूप वितरण के लिए उपलभ्य हो, प्राप्त करने और उसका उपयोग करने के अधिकार,

(ख) परियोजना के फलस्वरूप उत्पादित बिजली को प्राप्त करने और उसका उपयोग करने के अधिकार,

(ग) परियोजना के प्रशासन तथा उसके सन्निर्माण, बनाए रखने और प्रचालन के बारे में अधिकार और दायित्व,

आएंगे, किन्तु किसी ऐसी संविदा के अधीन अधिकार और दायित्व उनके अन्तर्गत नहीं आएंगे जो मद्रास सरकार द्वारा सरकार से भिन्न किसी व्यक्ति के साथ, नियत दिन के पहले की गई हो ।

(4) राष्ट्रपति, साधारणतया, इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी के बारे में और विशिष्टतया, परियोजना को पूरा करने और तत्पश्चात् उसके प्रचालन तथा बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे निदेश जो उसे आवश्यक प्रतीत हों, दे सकेगा:

परन्तु उपधारा (1) के अधीन आन्ध्र और मैसूर राज्यों द्वारा कोई करार कर लिए जाने अथवा उस उपधारा के अधीन राष्ट्रपति द्वारा कोई आदेश दे दिए जाने, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, उसके पश्चात् ऐसा कोई निदेश नहीं दिया जाएगा या प्रभावी नहीं होगा ।

(5) इस धारा में, तुंगभ्रदा परियोजना" या परियोजना" पद से वह परियोजना अभिप्रेत है जो नियत दिन के पहले मद्रास सरकार और हैदराबाद सरकार के बीच करार पाई गई थी, तथा जहां तक कि मद्रास राज्य का संबंध है, उससे तुंगभ्रदा नदी से उच्चतल और निम्नतल नहरों द्वारा बल्लारी, अन्नतपुर, कुड्डप्पा और करनूल जिलों को जल के प्रदाय और वितरण के लिए, तथा जल-विद्युत् और ऊष्मीय दोनों प्रकार की विद्युत् ऊर्जा के उत्पादन के लिए और उक्त जिलों को उसके पारेषण और वितरण के लिए आशयित है, तथा इसके अन्तर्गत, उक्त प्रयोजनों के लिए उस दिन के पश्चात् इस परियोजना का कोई विस्तारण या अतिरिक्त विकास भी आता है ।

67. आन्ध्र के राज्यपाल के भत्ते और विशेषाधिकार-आन्ध्र के राज्यपाल के भत्ते और विशेषाधिकार, जब तक कि संसद् द्वारा अनुच्छेद 158 के खण्ड (3) के अधीन विधि द्वारा, उस निमित्त उपबंध नहीं किया जाता, वे होंगे जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे ।

68. अधिनियम के अन्य विधियों से असंगत उपबंधों का प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध, किसी अन्य विधि में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।

69. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई पैदा होती है, तो राष्ट्रपति आदेश द्वारा, कोई ऐसा कार्य कर सकेगा जो ऐसे उपबंधों से असंगत न हो, तथा जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो ।

प्रथम अनुसूची

(धारा 8 और 10 देखिए)

भाग 1

राज्य सभा के आन्ध्र के सदस्य

सदस्य जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1958 को समाप्त होती है ।

1. श्री पुच्चलापल्ली सुन्दरय्या ।

2. श्री पायदा बैंकटनारायणा ।

3. श्री जी० रंगानायकुलु उर्फ़ एन० जी० रंगा ।

सदस्य जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1956 को समाप्त होती है ।

4. श्री कोम्मोरेड्डी सूर्यनारायणा ।

5. श्री एस० शंभु प्रसाद ।

सदस्य जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1954 को समाप्त होती है ।

6. श्री कोटमराजू रामा राव ।

7. श्री मक्कीनैनी बासवपुन्नय्या ।

8. श्री नीलम संजीव रेड्डी ।

9. श्री के० एन० रहिमतुल्लाह ।

भाग 2

राज्य सभा के मद्रास के सदस्य

सदस्य जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1958 को समाप्त होती है ।

1. श्री टी० भास्कर राव ।

2. श्री एम० मुहम्मद इस्माइल ।

3. श्री के० एल० नरसिंम्हम् ।

4. श्री जी० राजगोपालन ।

5. श्री एच० डी० राजा ।

6. श्री बी० एम० सुरेन्द्र राम ।

सदस्य जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1956 को समाप्त होती है ।

7. श्री वी० बी० कक्किलय ।

8. श्री वी० के० कृष्णा मैनन ।

9. श्रीमति मोना हैंसमैन ।

10. श्री वी० एम० ओबैदुल्लाह साहिब ।

11. श्री टी० एस० पट्टाभिरामन ।

12. श्री ए० रामास्वामी मुदलियार ।

13. श्री एस० वैंकटारमन ।

सदस्य जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1954 को समाप्त होती है ।

14. श्री एजुकुट्टिक्कल इम्बीची बावा ।

15. श्री एस० गुरूस्वामी ।

16. श्री पी० एस० राजगोपाल नायडू ।

17. श्री के० सदानन्द हेगड़े ।

18. श्री टी० वी० कमलस्वामी ।

द्वितीय अनुसूची

(धारा 12 देखिए)

ख्र्. संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मद्रास) आदेश, 1951 में उपान्तर-

                1. पैरा 1 में, मद्रास" के स्थान पर आन्ध्र और मद्रास" प्रतिस्थापित करें ।

2. पैरा 2 में, मद्रास राज्य" के स्थान पर आन्ध्र और मद्रास राज्यों में से प्रत्येक" प्रतिस्थापित करें ।

3. सारणी क में, -

(क) पातपट्नम् निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के ऊपर, भाग 1-आंध्र" उपशीर्षकअन्तःस्थापित करें;

(ख) स्तंभ 2 में नन्द्याल निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, करनूल जिले के नन्द्याल, नन्दिकोटकूर, मरकापुर, कम्बम्, सिरिबेल और कोयलकुन्तला ताल्लुके" प्रतिस्थापित करें;

(ग) स्तंभ 2 में करनूल निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, करनूल जिले के करनूल, दोने, पत्तिकोंडा, आलूर और आदोनी ताल्लुके और बनगानपल्ली उप-ताल्लुके" प्रतिस्थापित करें;

(घ) बल्लारी निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि को लुप्त करें;

(ङ) स्तंभ 2 में अनन्तपुर निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, अनन्तपुर जिले के गूटी, कल्याण दुर्ग, ताड़पत्रि, रायदुर्ग और अनन्तपुर ताल्लुके (अनन्तपुर ताल्लुक के बुक्कचेरला फिरके को छोड़ कर)" प्रतिस्थापित करें;

(च) स्तंभ 2 में पेनुकोंडा निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, अनन्तपुर ताल्लुक का बुक्कचेरला फिरका और अनन्तपुर जिले के धर्मवरम, पेनुकोंडा, मदकासिरा, हिन्दुपुर और कदिरी ताल्लुके" प्रतिस्थापित करें; और

(छ) मद्रास निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के ऊपर भाग 2-मद्रास" उपशीर्षक अन्तःस्थापित करें ।

4. सारणी ख में, -

                (क) श्रीकाकुलम जिला" उपशीर्षक के ऊपर भाग 1-आन्ध्र" उपशीर्षक अन्तःस्थापित करें;

(ख) करनूल निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित करें, अर्थात्: -

आदोनी आलूर और आदोनी ताल्लुके              2              1 ..............";

(ग) अनन्तपुर निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित          करें, अर्थात्: -

रायदुर्ग रायदुर्ग ताल्लुक     1 ह्ल";

(घ) बल्लारी जिला" उपशीर्षक और उसके नीचे आदोनी, सिरुगुप्पा, बल्लारी, रायदुर्ग, होस्पेट, कुदलीगी और हरपनहल्ली निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित सभी प्रविष्टियों का लोप करें;

(ङ) मद्रास नगर" उपशीर्षक के ऊपर भाग 2-मद्रास" उपशीर्षक अन्तःस्थापित करें ।

5. परिशिष्ट में पूरी मद (14) कर लोप करें ।

ख्र्ख्र् संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मैसूर) आदेश, 1951 में उपान्तर-

1. सारणी क में, अन्त में, निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ें, अर्थात्: -

बल्लारी बल्लारी जिला       1 -" ।

2. सारणी ख में, अन्त में, निम्नलिखित प्रविष्टियां जोड़ें, अर्थात्: -

“बल्लारी जिला

 

 

 

बल्लारी

बल्लारी तालुक

1

-

सिरुगुप्पा

सिरुगुप्पा तालुक

1

-

होस्पेट

होस्पेट और संदूर ताल्लुके

1

-

कुदलीगी

कुदलीगी ताल्लुक, हरपनहल्ली ताल्लुक का चिगतरी फिरका और हदगल्ली ताल्लुक का इट्टिगी फिरका (हम्पसागर, येनिगी, बन्निकल, येनिगी बासापुर, जी० कोडिहल्ली, कोडलाबाल, बियासीगिदिरी, हगारीवोम्मनहल्ली और चिन्त्रापल्ली गांवों को छोड़कर) ।

1

-

हरपनहल्ली

हरपनहल्ली, हरपनहल्ली ताल्लुक के अरसीकेरी और तेलिगी फिरके, तथा हीरेहदगल्ली, हदगल्ली और तम्बरहल्ली फिरके, तथा हदगल्ली ताल्लुक के इट्टिगी फिरके के हम्पसागर, येनिगी, बन्निकल, येनिगी, बासापुर, जी. कोडिहल्ली, कोडिलाबाल, बियासीगिदिरी, हगारी-बोम्मनहल्ली और चिन्त्रापल्ली गांव

1

- ।"

तृतीय अनुसूची

(धारा 20 देखिए)

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मद्रास) आदेश, 1951 में उपान्तर

सारणी में-

(क) स्नातक निर्वाचन-क्षेत्रों" उपशीर्षक के स्थान पर, स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र" प्रतिस्थापित करें;

(ख) मद्रास उत्तर (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि का लोप करें;

(ग) स्तंभ 1 में, मद्रास दक्षिण (स्नातक)" के स्थान पर, मद्रास (स्नातक)" प्रतिस्थापित करें;

(घ) शिक्षक निर्वाचन-क्षेत्रों" उपशीर्षक के स्थान पर, शिक्षक निर्वाचन-क्षेत्र" प्रतिस्थापित करें;

(ङ) मद्रास उत्तर (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि का लोप करें;

(च) स्तंभ 1 में, मद्रास दक्षिण शिक्षक" के स्थान पर मद्रास (शिक्षक)" प्रतिस्थापित करें; और

(छ) निम्नलिखित स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्रों से संबंधित प्रविष्टियों का लोप करें: -

(i) श्रीकाकुलम-एवं-विशाखापटनम-एवं-पूर्व गोदावरी (स्थानीय प्राधिकारी);

(ii) पश्चिम गोदावारी-एवं-कृष्णा-एवं-गुन्टूर (स्थानीय प्राधिकारी);

 (iii) नेल्लूर-एवं-चित्तूर (स्थानीय प्राधिकारी); तथा

(iv) सत्तान्तरित जिले (स्थानीय प्राधिकारी) ।

चतुर्थ अनुसूची

(धारा 21 देखिए)

मद्रास विधान परिषद् के सदस्यों की सूची

  • स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन-क्षेत्रों द्वारा निर्वाचित: -

1

श्री रंगास्वामी नायडु

20 अप्रैल, 1958

2

श्री के० एन० पलनिस्वामी गोंडार

20 अप्रैल, 1958

3

श्री पी० बी० के० त्यागराज रेड्डियार

20 अप्रैल, 1958

4

श्री ए० सोमसुन्दरम्

20 अप्रैल, 1958

5

श्री सी० मरुदवनम पिल्लै

20 अप्रैल, 1956

6

श्री अब्दुल सलाम

20 अप्रैल, 1956

7

श्री एस० ओ० एस-पी० औडयप्पा

20 अप्रैल, 1956

8

श्री पी० शिवसुब्रमण्य नाडार

20 अप्रैल, 1956

9

श्री टी० एस. शंकरनारायणा पिल्लै

20 अप्रैल, 1956

10

श्री सी० पेरूमालस्वामी रेड्डी

20 अप्रैल, 1954

11

श्री नाथमणि नायडु

20 अप्रैल, 1954

12

श्री पुरुषोत्तमन

20 अप्रैल, 1954

13

श्री एस० नरसप्पय्या

20 अप्रैल, 1954

14

श्री तुरुत्तीलकत तोट्टिनकरा पुत्तिय पुरयिल कुन्निहिपोकर

20 अप्रैल, 1954

(ख) मद्रास (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्रों द्वारा निर्वाचित: -

15

श्री ए० लक्षमणस्वामी मुदलियार

20 अप्रैल, 1958

16

श्री पी० वी० चेरियन

20 अप्रैल, 1958

17

श्री के० बालसुब्रमण्य अय्यर

20 अप्रैल, 1956

18

श्री के० भाष्यम्

20 अप्रैल, 1956

(ग) मद्रास (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्रों द्वारा निर्वाचित: -

19

श्री वी० आर० रंगनाथन

20 अप्रैल, 1956

20

श्री एलैग्जैंडर ज्ञानमुत्तु

20 अप्रैल, 1956

21

श्री जी० कृष्णमूर्ति

20 अप्रैल, 1954

22

श्री ई० एच० परमेश्वरन

20 अप्रैल, 1954

(घ) मद्रास विधान-सभा द्वारा निर्वाचित: -

23

श्री टी० एम० नारायणस्वामी पिल्लै

20 अप्रैल, 1958

24

श्री बी० वी० सुब्रमण्यम्

20 अप्रैल, 1958

25

श्री एम० भक्तवत्सलम्

20 अप्रैल, 1958

26

श्री वी० चक्कराय चेट्टी

20 अप्रैल, 1958

27

श्री वी० जी० राव

20 अप्रैल, 1958

28

श्री एस० बी० आदित्यन

20 अप्रैल, 1956

29

श्री एम० पी० गोविंद मैनन

20 अप्रैल, 1956

30

श्री एस० श्रीनिवास राव

20 अप्रैल, 1956

31

श्री आरकाट गजपति नायगार

20 अप्रैल, 1956

32

श्री एन० नल्लसेनापति सरकाराय मनराडियार

20 अप्रैल, 1956

33

श्री मुहम्मद रजा खान

20 अप्रैल, 1956

34

श्री ए० एम० अल्ला पिल्चै

20 अप्रैल, 1956

35

श्री एम० एतिराजुलु

20 अप्रैल, 1956

36

श्री एन० अन्नामलै पिल्लै

20 अप्रैल, 1954

37

श्रीमती मंजुभाषिनी

20 अप्रैल, 1954

38

श्री वी० के० जॉन

20 अप्रैल, 1954

39

श्री टी० जी० कृष्णमूर्ति

20 अप्रैल, 1954

40

श्री एम० पी० शिवज्ञान ग्रामणि

20 अप्रैल, 1954

(ङ) राज्यपाल द्वारा नामनिर्देशित: -

41

श्री वी० भाष्यम् अय्यंगार

20 अप्रैल, 1958

42

श्री ओ० पी० रामस्वामी रेडि्डयार

20 अप्रैल, 1958

43

श्रीमती आर० एस० सुब्बुलक्ष्मी अम्माल

20 अप्रैल, 1958

44

श्री चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

20 अप्रैल, 1956

45

श्री टी० एम० दैवशिखामणि आचार्यार

20 अप्रैल, 1956

46

श्री जी० वैंकटाचलम्

20 अप्रैल, 1956

47

श्री एम० सत्यनारायण

20 अप्रैल, 1956

48

श्री मुहम्मद उस्मान

20 अप्रैल, 1954

49

डा० एस० मुत्तुलक्ष्मी रेड्डी

20 अप्रैल, 1954

50

श्री पी० एम० मार्तण्डम् पिल्लै

20 अप्रैल, 1954

51

श्रीमती एम० एन० क्लबवाला

20 अप्रैल, 1954

सदस्यों की पदावधियां अवधारित करने के लिए उपबंध

1. उत्तरवर्ती पैराओं में यथा उपबंधित के सिवाय, प्रत्येक सदस्य की पदावधि उपर्युक्त सूची में उसके नाम के सामने विनिर्दिष्ट तारीख को समाप्त हो जाएगी ।

2. (क) क्रम संख्या 4 से 9 तक के सामने विनिर्दिष्ट छह सदस्यों में से एक की,

(ख) क्रम संख्या 19 और 20 के सामने विनिर्दिष्ट दो सदस्यों में से एक की, तथा

(ग) क्रम संख्या 28 से 35 तक के सामने विनिर्दिष्ट आठ सदस्यों में से दो की,

पदावधि में इस प्रकार वृद्धि की जाएगी कि वह 20 अप्रैल, 1958 को समाप्त हो ।

3. क्रम संख्या 44 से 47 तक के सामने विनिर्दिष्ट चार सदस्यों में से एक की पदावधि में इस प्रकार कमी की जाएगी कि वह 20 अप्रैल, 1954 को समाप्त हो ।

4. वे सदस्य जिनकी पदावधियों में पैरा 2 के अधीन वृद्धि की जानी है और वह सदस्य जिसकी पदावधि में पैरा 3 के अधीन कमी की जानी है, नियत दिन के पश्चात्, ऐसी रीति से लाट निकाल कर यथाशक्य शीघ्र अवधारित किए जाएंगे, जैसा कि मद्रास विधान परिषद् का सभापति निदेश करे ।

पंचम अनुसूची

(धारा 22 देखिए)

परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मैसूर) आदेश, 1951 में उपान्तर

सारणी में, चित्रदुर्ग (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें: -

                                चितलदुर्ग-एवं-बल्लारी                      चितदुर्ग जिला                      2" ।

                                (स्थानीय प्राधिकारी)                          (दावणगिरी नगर सहित) तथा

                                                                                                बल्लारी जिला ।

षष्ठ अनुसूची

(धारा 24 देखिए)

ख्र्. संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 में उपान्तर

1. पैरा 4 के स्थान परनिम्नलिखित प्रतिस्थापित करें: -

                4. इस आदेश की अनुसूची में, -

(क) मद्रास, आन्ध्र या मैसूर राज्य के प्रति या इन राज्यों में से किसी के किसी जिले या आन्ध्र प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह अक्तूबर, 1953 के प्रथम दिन को यथागठित उस राज्य के प्रति या उस जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है; और

(ख) किसी अन्य राज्य के प्रति या उसके किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह जनवरी, 1950 के 26वें दिन को यथागठित उस राज्य के प्रति या उस जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है ।"

                2. अनुसूची में, -

(क) भाग 5-मद्रास" उपशीर्षक के स्थान पर तथा उसके नीचे समस्त राज्य में" शब्दों के स्थान पर क्रमशः भाग 5-मद्रास और आन्ध्र" तथा राज्यों में से प्रत्येक समस्त राज्य में" प्रतिस्थापित करें;

(ख) भाग 12-मैसूर" उपशीर्षक के नीचे वाली प्रविष्टि के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें: -

1. बल्लारी जिले के सिवाय समस्त राज्य में: -

1

आदि द्राविड

4

भोवी

2

आदि कर्नाटक

5

कोरचा

3

बंजारा या लम्बानी

6

कोरमा ।

2. बल्लारी जिले में: -

1

आदि आन्ध्र

7

बकुडा

2

आदि द्राविड

8

बंडी

3

आदि कर्नाटक

9

बारिकी

4

अजिला

10

बावुरी

5

अरुन्थथियार

11

बेलारा

6

बयरा

12

ब्यागरी

 

13

चचाति

46

मालादासु

14

चक्किलियान

47

मालासर

15

चलवादि

48

मातंगी

16

चमार

49

माविलन

17

चंडाल

50

मोगर

18

चुरुमन

51

मुची

19

दंडासि

52

मुंडाल

20

देवेन्द्रकुलतन

53

नालकेयवा

21

डोम या डोम्बर, पैडी, पानो

54

नायडी

22

घासी या हड्डी, रेल्ली सचन्डि

55

पगडई

23

गोडगली

56

पैंडा

24

गोडारि

57

पक्य

25

गोड्डा

58

पल्लन

26

गोसंगी

59

पम्बड

27

हसला

60

पमिदि

28

होलेय

61

पनन

29

जग्गलि

62

पंचमा

30

जाम्बुवुलु

63

पन्नियांडी

31

कदन

64

परययान

32

कलडी

65

परवन

33

कनक्कन

66

पुलयन

34

करीमपलन

67

पुथिराय वन्नन

35

कोडालो

68

रनयार

36

कूसा

69

समागारा

37

कोरगा

70

सम्बन

38

कुडुबी

71

सपारी

39

कुडुम्बन

72

सेम्मन

40

कुरबन

73

तोट्टि

41

कुरिच्चन

74

तिरुवल्लुवर

42

मदारी

75

बल्लुवन

43

मादिगा

76

वाल्मीकि

44

मैला

77

वेट्टुवन" ।

45

माला

ऐजन्सी माला सहित

 

 

II. संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 में उपान्तर

1. पैरा 3 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें: -

                                3. इस आदेश की अनुसूची में, -

(क) मद्रास, आन्ध्र या मैसूर राज्य के प्रति या इन राज्यों में से किसी के किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह अक्तबूर, 1953 के प्रथम दिन को यथागठित उस राज्य के प्रति या उस जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है; तथा

(ख) किसी अन्य राज्य के प्रति या उसके किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह जनवरी, 1950 के 26वें दिन को यथागठित उस राज्य के प्रति या उस जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है ।" ।

2. अनुसूची में, -

(क) भाग 5-मद्रास" उपशीर्षक के स्थान पर तथा उसके नीचे समस्त राज्य में" शब्दों के स्थान पर क्रमशः भाग 5-मद्रास और आन्ध्र" तथा राज्यों में से प्रत्येक समस्त राज्य में" प्रतिस्थापित करें;

(ख) भाग 11-मैसूर" उपशीर्षक के नीचे वाली प्रविष्टि के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें: -

1. बल्लारी जिले के सिवाय समस्त राज्य में: -

1

हसलारु

4

कडु-कुरुबा

2

इरुलिगा

5

मलेरु

3

जैनू कुरुबा

6

सोलिगरु।

2. बल्लारी जिले में: -

1.            अरनाडन

2.            बगला

3.            भोट्टदास-बोडो भोट्टडा, मुरिय भोट्टडा और सनो भोट्टडा

4.            भूमिया-भुरी भूमिया और बोडो भूमिया

5.            चेंचु

6.            गडबा-बोड गडबा, सरलम गडबा, फ्रानिज गडबा, जोडिया गडबा, ओलरो गडबा, पंगि गडबा और प्रांग गडबा

7.            गोंडि-मोडया गोंड और राजो गोंड     

8.            गौडु-बाटो, भृत्य डुढ़कौरिया, हाटो, जटाको और जोरिया

9.            कौशल्या गौडु-बोसोतोरिया गौडु, चिट्टी गौडु, डंगायथ गोडु डोड कमरिया, डुडू कमारो, लदिय गौडु और पुल्लोसोरिया गौडु

10.          मगथा गोडु-बरनिया गोडु, बूडो मगथा, डोंगायाथ गोडु, लडया गोडु, पौन्ना मगथा और सन मगथा

11.          होल्वा

12.          जडापु

13.          जटापु

14.          कम्मरा

15.          कट्टुनायकन

16.          खट्टीस-खट्टी, कोम्मराव और लोहारा

17.          कोडु

18.          कोम्मार

19.          कोंड ढोरा

20.          कोंड कापु

21.          कोंड रेड्डी

22.          कोंढ-देस्य कोंढ, डोंगरिया कोंढ, कुट्टिया                 कोंढ, टिकिरिया कोंढ और येनिटी कोंढ

23.          कोटा

24.          कोटिया-बर्तिका बेनथो उड़िया, ढूलिया या दूलिया, होल्वा पैको, पुट्टिया, सन्रोना और सीधो पैको

25.          कोया या गौड, उसके सब-सैक्टों-राजा या राश कोया, लिंगधारी कोया (साधारण) और कोट्टु कोया सहित

26.          कुडिया

27.          कुरुमन

28.          मन्न ढोरा

29.          मौने

30.          मुख ढोरा-नूका ढोरा

31.          मुरिया

32.          पैगारपु

33.          पलासी

34.          पनियन

35.          पोरजा-बोडो बोंडा, दरुवा, दिदुआ, जोडिया, मुंडिलि, पेंगु, पैदी और सलिया

36.          रेड्डी-ढोरा

37.          सवरा-कावु सवरा, खुट्टो सवरा और                 मलिया सवरा

38.          शोलगा

39.          तोडा

40.          लक्कादीव, मिनिकोय और अमीनदीवी                 द्वीपों के निवासी जिनका और जिनके                 माता और पिता दोनों का इन द्वीपों में                 जन्म हुआ था ।" ।

 

 

सप्तम अनुसूची

[धारा 47(1), 48(3), 51, 52 और 66(1) देखिए]

आस्तियों और दायित्वों के मद्रास, आन्ध्र और मैसूर के बीच प्रभाजन के बारे में उपबन्ध

                1. (1) इस अनुसूची के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सब भूमि और सभी भण्डार, वस्तुएं और अन्य माल, यथास्थिति, उस राज्य की, जिसमें वे स्थित हैं, सम्पत्ति बने रहेंगे अथवा उसको संक्रान्त हो जाएंगे ।

                (2) इस पैरा में भूमि" पद के अन्तर्गत हर किस्म की स्थावर सम्पत्ति और ऐसी सम्पत्ति में या उस पर कोई अधिकार आते हैं, तथा माल" पद के अन्तर्गत सिक्के, बैंक नोट और करेंसी नोट नहीं आते हैं ।

2. (1) मद्रास सरकार द्वारा जुलाई, 1953 के प्रथम दिन और नियत दिन के बीच लिए गए किसी लोक ऋण के आगमों के समतुल्य कोई राशि अथवा उसका ऐसा भाग, जो राष्ट्रपति अवधारित करे, मद्रास और आन्ध्र राज्यों के बीच ऐसे अनुपात में आबंटित किया जाएगा जो राष्ट्रपति द्वारा उन निबंधनों को ध्यान में रखते हुए, जिन पर ऋण लिया गया था, नियत किया जाए । 

(2) इस पैरा के उपपैरा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मद्रास राज्य के सभी खजानों में कुल रोकड़ बाकी और नियत दिन के ठीक पहले भारतीय रिजर्व बैंक में जमा अति शेष मद्रास, आंध्र और मैसूर राज्यों के बीच 622/3: 36: 1⅓के अनुपात में विभाजित किए जाएंगे:

परन्तु ऐसे विभाजन के प्रयोजनों के लिए किसी खजाने से किसी अन्य खजाने को रोकड़ बाकी का कोई अन्तरण नहीं किया जाएगा और प्रभाजन भारतीय रिजर्व बैंक की बहियों में नियत दिन को तीनों राज्यों के जमा अतिशेषों का समायोजन करके किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस पैरा में, खजाना" के अन्तर्गत उप-खजाना आता है ।

3. किसी वर्ग के जारी न किए भण्डारों का मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच विभाजन, उस वर्ग के भण्डारों के लिए उन कुल मांग-पत्रों के अनुपात में, जो अप्रैल, 1953 के प्रथम दिन के ठीक पूर्ववर्ती तीन वर्षों में उन क्षेत्रों के लिए दिए गए थे जो मद्रास और आन्ध्र राज्यों तथा अन्तरित राज्यक्षेत्र में समाविष्ट हैं, किया जाएगा, जिनमें वे मांग-पत्र सम्मिलित नहीं होंगे, जो मद्रास नगर में स्थित सचिवालय और विभागों के अध्यक्षों के कार्यालयों से संबंधित हैं:

परन्तु इस पैरा की कोई भी बात विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए, जैसे कि विशिष्ट संस्थाओं, कर्मशालाओं तथा विद्युत उपक्रमों में अथवा सन्निर्माणाधीन विनिर्दिष्ट संकर्मों पर, उपयोग या उपयोजन के लिए धारित भण्डारों को लागू नहीं होगी ।

4. आन्ध्र राज्य मद्रास स्थित सहकारी मुद्रणालय की मुद्रण मशीनरी के 36/100वें अंश का हकदार होगा । यह अंश उस राज्य को यावत्साध्य ऐसी मशीनरी के रूप में दिया जाएगा जो उसके द्वारा ले जाई जा सके और उपयोग में लाई जा सके, तथा उस मात्रा तक जहां तक कि ऐसा करना साध्य न हो, मशीनरी के पुस्तकांकित मूल्य के आधार पर, जो कि अवक्षयण को, जहां ऐसे अवक्षयण का मुद्रणालय के लेखाओं में समायोजन किया जाता है, घटा कर आए, उसका नकद समायोजन किया जाएगा ।

5. करों की बकाया वसूल करने का अधिकार जिसके अन्तर्गत भू-राजस्व भी आता है, उस राज्य का होगा जिसमें विनिर्धारित सम्पत्ति स्थित है अथवा विनिर्धारित संव्यवहार हुए हैं ।

6. (1) मद्रास राज्य द्वारा किसी स्थानीय निकाय (बल्लारी के जिला बोर्ड से भिन्न), सोसाइटी, कृषक या अन्य व्यक्ति को राज्य में के किसी क्षेत्र में, नियत दिन के पहले दिए गए कोई ऋण या उधार वसूल करने का अधिकार उस राज्य का होगा जिसमें नियत दिन को वह क्षेत्र सम्मिलित किया गया है ।

(2) यदि नियत दिन के ठीक पहले, बल्लारी के जिला बोर्ड द्वारा मद्रास राज्य को कोई रकमें, उस दिन के पहले दिए गए ऋणों या उधारों मद्धे शोध्य हैं, तो उनका उतना भाग जो किसी ऐसे ऋण और उधार मद्धे शोध्य है, जो कि आलूर और आदोनी ताल्लुकों में या उनके फायदे के लिए, अथवा रायदुर्ग ताल्लुक में या उसके फायदे के लिए उपयोग किया गया है, यथास्थिति, करनूल या अनन्तपुर के जिला बोर्ड द्वारा आन्ध्र राज्य को शोध्य ऋण होगा, तथा विशिष्ट भाग बल्लारी के जिला बोर्ड द्वारा मैसूर राज्य को शोध्य ऋण होगा । 

(3) मद्रास राज्य द्वारा उस राज्य के बाहर किसी व्यक्ति, फर्म या संस्था को नियत दिन के पहले दिए गए कोई ऋण या उधार वसूल करने का अधिकार मद्रास राज्य को होगा:

परन्तु ऐसे किसी ऋण या उधार की बाबत वसूल की गई कोई राशि मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच 622/3 : 36 : 11/3 के अनुपात में विभाजित की जाएगी ।

7. (1) आय पर करों का तथा संघ उत्पाद-शुल्कों का राज्यों के अंश का अतिशेष जो वित्तीय वर्ष 1953-54 की बाबत मद्रास राज्य को संदेय हैं, मद्रास, आंध्र और मैसूर राज्यों के बीच 622/3: 36: 11/3 के अनुपात में बांट लिया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस उपपैरा में निर्दिष्ट अतिशेष को उस रकम का, जो केन्द्रीय सरकार के वित्तीय वर्ष 1953-54 की बाबत बजट प्राक्कलनों के अनुसार, यथास्थिति, आय पर करों के या संघ उत्पाद-शुल्कों के राज्यों के अंश में से, नियत दिन के ठीक पहले यथागठित मद्रास राज्य को संदेय है, आधा माना जाएगा ।

(2) नियत दिन के ठीक पहले यथागठित मद्रास राज्य को अप्रैल, 1954 के प्रथम दिन को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्षों में से प्रत्येक की बाबत संदेय, आय पर करों या संघ उत्पाद-शुल्कों का राज्य का अंश भी, जब तक कि विधि द्वारा अन्य उपबन्ध नहीं किया जाता, मद्रास, आंध्र और मैसूर राज्यों के बीच 622/3: 36: 11/3 के अनुपात में बांट लिया जाएगा ।

8. केन्द्रीय सड़क निधि के जमा खाते की रकमें, जो नियत दिन के ठीक पहले मद्रास को शोध्य हैं, मद्रास, आंध्र और मैसूर राज्यों के बीच 622/3: 36: 11/3 के अनुपात में आबंटित की जाएंगी ।

9. ट्रावणकोर फर्टिलाइजर्स एण्ड केमिकल्स लिमिटेड, मद्रास रेडियो एण्ड इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड तथा मद्रास इण्डस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन में मद्रास राज्य द्वारा नियत दिन के ठीक पहले धारित शेयर मद्रास, आंध्र और मैसूर राज्यों के बीच 622/3: 36:11/3 के अनुपात में विभाजित किए जाएंगे ।

10. किसी अवक्षय आरक्षित निधि में से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियां उस राज्य को प्रोद्भूत होंगी जिसके क्षेत्र में वह उपक्रम स्थित है जिसके लिए वह अवक्षय आरक्षित निधि रखी गई है ।

11. पैरा 12 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रमों से संबंधित आस्तियां और दायित्व, उस दशा में जिसमें कि उपक्रम अन्तरित राज्यक्षेत्र में स्थित हैं, मैसूर राज्य को संक्रान्त होंगे और अन्य दशाओं में, उस राज्य को संक्रान्त होंगे जिसमें वे उपक्रम स्थित हैं ।

12. (1) मद्रास राज्य का वह लोक ऋण जो सरकारी प्रतिभूतियों को जारी करके लिए गए उन ऋणों के फलस्वरूप हुआ माना जा सकता है, जो कि नियत दिन के ठीक पहले जनता से बकाया है, ऐसे दिन से मद्रास राज्य का ऋण होगा; तथा आन्ध्र और मैसूर राज्य ऋण की सेवाई और प्रतिसंदाय के लिए समय-समय पर शोध्य रकम के अपने-अपने अंश मद्रास राज्य को देने के दायित्वाधीन  होंगे । उक्त अंशों के अवधारण के प्रयोजन के लिए, ऋण को मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच ऐसे प्रभाजित किया गया समझा जाएगा मानो वह इस पैरा के उपपैरा (2) में निर्दिष्ट ऋण हो, तथा आंध्र और मैसूर राज्यों के अंश तद्नुसार अवधारित किए जाएंगे :

परन्तु पैरा 2 के उपपैरा (1) में निर्दिष्ट किसी लोक ऋण या उसके प्रभाग के लिए दायित्व, इस उपपैरा के प्रयोजनों के लिए, आन्ध्र और मद्रास राज्यों के बीच उसी अनुपात में प्रभाजित किया गया समझा जाएगा जो ऐसे ऋण के आगमों या उनके प्रभाग के आबंटन के बारे में, पैरा 2 के उपपैरा (1) के अधीन नियत किया जाए ।

स्पष्टीकरण-इस उपपैरा में, सरकारी प्रतिभूतियां" पद का वही अर्थ है जो भारतीय प्रतिभूति अधिनियम, 1920 (1920 का 10) की धारा 2 के खण्ड (क) में किया गया है ।

(2) मद्रास राज्य का अवशिष्ट लोक ऋण, अर्थात् वह ऋण जो केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य बैंक से नियत दिन के पहले लिए गए ऋणों के फलस्वरूप हुआ माना जा सकता है, मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच, सभी पूंजी संकम्रों और अन्य पूंजी लागतों पर उस कुल व्यय के अनुपात में, जो मद्रास और आन्ध्र राज्यों के राज्यक्षेत्रों और अन्तरित राज्यक्षेत्र में नियत दिन के प्रारंभ तक उपगत किया गया है, प्रभाजित किया जाएगा जिसके अन्तर्गत इस अनुसूची के पैरा 9 में चर्चित मदें भी आती हैं :

परन्तु आन्ध्र राज्य की अस्थायी राजधानी के लिए अथवा उससे आनुषंगिक प्रयोजनों के लिए भवनों, सड़कों या अन्य संकर्मों के सन्निर्माण के संबंध में नियत दिन के पहले केन्द्रीय सरकार से लिया गया कोई ऋण, उस दिन तक ऐसे उपगत किए गए व्यय की सीमा तक पूर्णतया आन्ध्र राज्य का दायित्व होगा ।

(3) इस पैरा के उपपैरा (2) के अधीन आबंटन के प्रयोजनों के लिए, केवल उन आस्तियों पर व्यय को ही जिनके लिए पूंजी खाते रखे गए हैं (बकिंघम नहर और किन्हीं ऐसे भवनों को छोड़कर जिनके लिए ऐसे खाते रखे गए हैं), हिसाब में लिए जाएगा:

परन्तु धारा 66 में निर्दिष्ट तुंगभद्रा परियोजना पर खर्च मद्धे लोक ऋण की रकम ऐसे आधार पर पुनः आबंटित की जाएगी जो सम्पृक्त राज्यों के बीच करार पाया जाए, अथवा यदि नियत दिन से दो वर्ष के भीतर कोई करार नहीं किया जाता है तो जो राष्ट्रपति के आदेश द्वारा नियत किया जाए ।

(4) नियत दिन के पहले मद्रास सरकार द्वारा लिए गए ऋणों की सभी निक्षेप निधियां मद्रास राज्य के पास रहेंगी और ऐसी निधियों की शुद्ध रकम पर मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच ऐसे ऋणों मद्धे शोध्यों का आबंटन करने में विचार किया जाएगा ।

(5) आंध्र राज्य को अन्ततः भवनों के उसके अपेक्षाकृत अल्पतर अंश के लिए प्रतिकारित करने की दृष्टि से, इस पैरा के उपपैरा (2) के अधीन आन्ध्र और मद्रास राज्यों के बीच प्रभाजित किए जाने वाले ऋण मद्धे दायित्व में उसके अंश में से 230.4 लाख रुपए कम कर दिए जाएंगे तथा ऐसे दायित्व में मद्रास राज्य का अंश तदनुरूप बढ़ा दिया जाएगा ।

13. सिविल निक्षेप और स्थानीय निजी निक्षेप उस राज्य को संक्रान्त होंगे जिसके क्षेत्र में निक्षेप किए गए हैं, और उनका संदाय करने का दायित्व भी उसी राज्य का होगा ।

14. जमींदारी उत्सादन निधि में धृत प्रतिभूतियां मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच उस प्रतिकर की प्राक्कलित रकम के अनुपात में आबंटित की जाएंगी जो नियत दिन को यथागठित मद्रास राज्य में समाविष्ट राज्यक्षेत्रों में, आन्ध्र राज्य का निर्माण करने वाले राज्यक्षेत्रों और अन्तरित राज्यक्षेत्र में संदेय है ।

15. नियत दिन के ठीक पहले मद्रास सड़क निधि की जो असंवितरित रकमें हैं, उनकी बाबत दायित्व उस राज्य द्वारा ग्रहण किया जाएगा, जिसमें वे स्थानीय निकाय, जिनको कि वे संदेय हैं, विद्यमान हैं ।

16. हर एक राज्य अपने को स्थायी रूप से आबंटित सरकारी सेवकों के भविष्य निधि लेखाओं के बारे में दायित्वों को ग्रहण करेगा ।

17. (1) इस पैरा के उपपैरा (3) में वर्णित समायोजन के अधीन रहते हुए, प्रत्येक राज्य, उन पेंशनों के बारे में जो नियत दिन के पहले मद्रास राज्य द्वारा दी गई हैं, पेशनों का संदाय अपने खज़ानों और उप-खजानों में संगृहीत करके करेगा ।

(2) उक्त समायोजन के अधीन रहते हुए, मद्रास राज्य के कार्यकलाप के संबंध में सेवा करने वाले उन अधिकारियों को, जो नियत दिन के पहले सेवानिवृत्त हो जाते हैं या निवृत्ति पूर्व छुट्टी पर अग्रसर हो जाते हैं, किन्तु जिनके पेंशनों के दावे उस दिन के ठीक पहले बकाया हैं, पेंशनों की बाबत दायित्व मद्रास राज्य का दायित्व होगा ।

(3) वित्तीय वर्ष 1953-54 के नियत दिन को प्रारंभ होने वाले भाग की बाबत तथा प्रत्येक पश्चात्वर्ती वित्तीय वर्ष की बाबत वे कुल संदाय संगणित किए जाएंगे जो इस पैरा के उपपैरा (1) और (2) में निर्दिष्ट पेंशनों की बाबत प्रत्येक राज्य में किए गए हैं; तथा आंध्र और मैसूर राज्यों में से प्रत्येक, मद्रास राज्य से उतनी रकम प्राप्त करेगा या मद्रास राज्य को उतनी रकम का संदाय करेगा जितनी से वर्ष के उस भाग के लिए या उस वर्ष के लिए, यथास्थिति, आन्ध्र राज्य या मैसूर राज्य में के कुल संदाय, उन कुल संदायों के, जो आन्ध्र, मैसूर और मद्रास राज्यों में वर्ष के उस भाग के लिए या उस वर्ष के लिए किए गए हैं, आन्ध्र राज्य की दशा में, 36 प्रतिशत से तथा मैसूर राज्य की दशा में, 11/3 प्रतिशत, से, यथास्थिति अधिक हैं या कम पड़ते हैं ।

(4) नियत दिन को या उसके पश्चात् सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों की पेशनों की बाबत दायित्व पेंशन देने वाले राज्य का दायित्व होगा । पेंशन का वह प्रभाग जो ऐसे किसी अधिकारी की नियत दिन के पहले की सेवा के फलस्वरूप माना जा सकता है, मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच 622/3 : 36 : 11/3 के अनुपात में आबंटित किया जाएगा, तथा वह राज्य जिसने पेंशन दी है, अन्य दो राज्यों से इस दायित्व के उनके अंश प्राप्त करने का हकदार होगा । किसी ऐसे अधिकारी की बाबत, जिसकी सेवाएं नियत दिन के पश्चात् भागतः मद्रास, आन्ध्र और मैसूर राज्यों में से उस राज्य में थीं जिसने पेंशन दी और भागतः अन्य दो राज्यों में से एक या दोनों में थीं, यथास्थिति, ऐसे अन्य राज्य या ऐसे अन्य राज्यों में से प्रत्येक, उस राज्य की जिसने पेंशन दी है, उतनी रकम से प्रतिपूर्ति करेगा, जिसका ऐसे अधिकारी की पेंशन के उस प्रभाग से, जो नियत दिन के पश्चात् उस  जो नियत दिन के पश्चात् उसकी सेवा के फलस्वरूप माना जा सकता है, वही अनुपात है जो अनुपात उस अधिकारी की नियत दिन के पश्चात् उस राज्य के अधीन अर्हकारी सेवा की अवधि का ऐसे अधिकारी की नियत दिन के पश्चात् उस कुल अर्हकारी सेवा से है जिसकी गणना पेंशन के प्रयोजनों के लिए की गई है ।  

स्पष्टीकरण-इस पैरा में पेंशनों को प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत ऐसी पेंशनों के संराशिकृत मूल्यों के प्रति निर्देश भी आता है ।

18. यदि और जहां तक कि किसी उचंती मद के बारे में अन्ततोगत्वा यह पाया जाता है कि वह उस प्रकृति की, जो पूर्वगामी पैराओं में निर्दिष्ट है, किसी आस्ति या दायित्व को प्रभावित करती है, तो उससे सुसंगत पैरा के उपबन्धों के अनुसार बरता जाएगा । 

19. पूर्वगामी पैराओं में या धारा 48 या धारा 49 या धारा 50 या धारा 66 में चर्चित न की गई किन्हीं आस्तियों या दायित्वों का फायदा या भार मद्रास राज्य और आन्ध्र और मैसूर राज्यों के बीच ऐसी रीति से प्रभाजित किया जाएगा जैसा कि राष्ट्रपति, आदेश द्वारा निदिष्ट करें:

परन्तु इस पैरा की किसी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह ऐसे फायदे या भार के किसी अन्य रीति से प्रभाजन को, यदि सम्बन्धित राज्यों में ऐसी सहमति हो जाती है, प्रतिषिद्ध करती है ।

अष्टम अनुसूची

(धारा 59 देखिए)

भाग 1

मद्रास राज्य में की जेलें और अन्य संस्थाएं: -

(1) प्रेसिडेंसी जेल फार वीमैन, वेल्लूर ।                                            (2) सीनियर सर्टिफाइड स्कूल, चिंगलेपट ।

भाग 2

अन्तरित राज्यक्षेत्र में की जेलें और अन्य संस्थाएं: -

(1) जूनियर सर्टिफाइड स्कूल, बल्लारी ।                                         (3) अलीपुरम जेल, बल्लारी ।

(2) सैंट्रल जेल, बल्लारी ।                                                   (4) बोर्स्टल स्कूल, बल्लारी ।

नवम अनुसूची

(धारा 60 देखिए)

भाग 1

मद्रास राज्य में की संस्थाएं: -

(1) किंग इंस्टीट्यूट, गिंडी ।

(2) इरीगेशन रिसर्च स्टेशन, पूंडी ।

(3) पुलिस ट्रेनिंग कालेज, वेल्लूर ।

(4) फिंगर प्रिंट ब्यूरो, वेल्लूर ।

(5) गवर्नमेंट प्रेस, मद्रास ।

(6) गवर्नमेंट टेक्स्टाइल इंस्टीट्यूट, मद्रास ।

(7) गवर्नमेंट कालेज आफ इन्डीजीनस मेडिसिन, मद्रास ।

(8) मद्रास फायर सर्विसेज स्टेट ट्रेनिंग स्कूल, मद्रास ।

(9) वैटेरिनरी कालेज, मद्रास ।

(10) सीरम इंस्टीट्यूट, रानीपेट ।

(11) बनार्ड इन्स्टीटयूट आफ रेडियोलॉजी, मद्रास ।

(12) कैमिकल एग्जामिनर्स डिपार्टमेंट, मद्रास ।

(13) सैंट्रल सर्वे आफिस, मद्रास ।

(14) गवर्नमेंट लेडी विलिंग्डन लेप्रोसी सेनेटोरियम, तिरुमनी ।

भाग 2

                अन्तरित राज्यक्षेत्र में की संस्थाएं: -

(1) रायलसीमा पॉलिटेकनिक, बल्लारी । 

(2) गवर्नमेंट वेलेज्ली ट्यूबरकलोसिस सेनेटोरियम, बल्लारी ।

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