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डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 ( Dock Workers (Regulation of Employment) Act, 1948 )


 

डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948

(1948 का अधिनियम संख्यांक 9)1

[4 मार्च, 1948]

डॉक कर्मकारों के नियोजन के विनियमन का उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

                यतः डॉक कर्मकारों के नियोजन के विनियमन का उपबन्ध करना समीचीन है ;

                अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है-

                1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) यह अधिनियम डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 कहा सकेगा ।

                (2) इसका विस्तार  [जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय] सम्पूर्ण भारत पर है ।

                2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या सन्दर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो,-

                                  [(क) “बोर्ड” से धारा 5क के अधीन स्थापित डॉक श्रम बोर्ड अभिप्रेत है ;]

  [(कक) “स्थोरा” के अन्तर्गत कोई भी वस्तु आती है जो पोत या अन्य जलयान में ले जाई गई है या ले जाई जानी है ;]

(ख) “डाक कर्मकार” से वह व्यक्ति है जो स्थोराओं के लादे जाने, उतारे जाने, संचलन या भंडारकरण से संसक्त काम पर अथवा स्थोराओं को प्राप्त करने या उन्मोचित करने या पत्तन छोड़ने के लिए पोतों या अन्य जलयानों को तैयार करने से संसक्त काम पर किसी पत्तन में या उसके आसपास नियोजित है या नियोजित होने को है;

(ग) “नियोजक” से डॉक कर्मकार के सम्बन्ध में वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके द्वारा वह यथापूर्वोक्त नियोजित किया गया है या नियोजित किया जाना है;

(घ) “सरकार” से महापत्तन के सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार और किसी अन्य पत्तन के सम्बन्ध में राज्य सरकार अभिप्रेत है;

(ङ) “स्कीम” से इस अधिनियम के अधीन बनाई गई स्कीम अभिप्रेत है ।

3. कर्मकारों का नियमित नियोजन सुनिश्चित करने के लिए स्कीम-(1) नियोजन में अधिकतर नियमितता सुनिश्चित करने की दृष्टि से डॉक कर्मकारों  [और नियोजकों] के रजिस्ट्रीकरण के लिए तथा डॉक कर्मकारों का, चाहे वे रजिस्ट्रीकृत हों या नहीं, पत्तन में नियोजन विनियमित करने के लिए उपबन्ध स्कीम द्वारा किया जा सकेगा ।

(2) विशिष्टतः, स्कीम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेगी-

(क) डॉक कर्मकारों और नियोजकों के ऐसे वर्गों को स्कीम लागू करना जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं ;

(ख) डॉक कर्मकारों और नियोजकों की उन बाध्यताओं को, जिनके पूरे किए जाने के अध्यधीन रहते हुए स्कीम उन्हें लागू हो सकेगी, तथा उन परिस्थितियों को, जिनमें स्कीम डॉक कर्मकारों और नियोजकों को लागू न रह जाएगी, परिभाषित करना ;

(ग) डॉक कर्मकारों की भर्ती और स्कीम में उनके प्रवेश का  [और डॉक कर्मकारों और नियोजकों के रजिस्ट्रीकरण] का, जिसके अन्तर्गत रजिस्टरों का रखा जाना, रजिस्टरों से अस्थायी तौर पर या स्थायी तौर पर नाम हटाए जाना और रजिस्ट्रीकरण के लिए फीसों का अधिरोपित किया जाना आता है, विनियमन करना ;

(घ) डॉक कर्मकारों का, चाहे वे रजिस्ट्रीकृत हों या नहीं, नियोजन और ऐसे नियोजन के निबन्धनों और शर्तों का, जिनके अन्तर्गत पारिश्रमिक की दरें, काम के घंटे, और अवकाश-दिनों की बाबत शर्तें और उनके बारे में वेतन आता है, विनियमन करना ;

(ङ) यह सुनिश्चित करना कि उन कालावधियों के  बारे में, जिनके दौरान उन डॉक कर्मकारों के लिए, जिन्हें स्कीम लागू होती है और जो काम के लिए उपलभ्य हैं, नियोजन या पूर्ण नियोजन उपलभ्य नहीं हैं, ऐसे कर्मकार स्कीमों की शर्तों के अध्यधीन रहते हुए एक न्यूनतम वेतन पाएंगे ;

(च) उन डॉक कर्मकारों के, जिन्हें स्कीम लागू नहीं होती है, नियोजन को, और उन नियोजकों द्वारा जिन्हें स्कीम लागू नहीं होती डॉक कर्मकारों के नियोजन को, प्रतिषिद्ध, निर्बन्धित या अन्यथा नियंत्रित करना ;

 2[(चच) ऐसी निधि या निधियों का सृजन करना जो स्कीम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक या समीचीन हों और ऐसी निधि या निधियों के प्रशासन के लिए उपबंध करना ;]

(छ) डॉक कर्मकारों का प्रशिक्षण  3*** वहां तक जहां तक कि उसके लिए समाधानप्रद उपबंध स्कीम से अलग विद्यमान नहीं है ;

 [(छछ) बोर्ड के अधिकारियों और अन्य कर्मचारिवृन्द का कल्याण ;]

 ।                                                       ।                                                  ।                                                 ।   

(झ) वह रीति जिससे और वे व्यक्ति जिनके द्वारा स्कीम चलाने का खर्च पूरा किया जाना है ;     

                                 [(ञ) ऐसे प्राधिकारी का  *** गठन करना जो स्कीम के प्रशासन के लिए उत्तरदायी होगा ;

                                (ट) ऐसी आनुषंगिक और अनुपूरक बातें जो स्कीम के प्रयोजनों के लिए आवश्यक या समीचीन हों ।

(3) स्कीम इस बात का भी उपबंध कर सकेगी कि उसके किसी उपबंध का उल्लंघन ऐसी अवधि के कारवास से, जो विनिर्दिष्ट की जाए, किन्तु किसी भी दशा में जो प्रथम उल्लंघन के लिए तीन मास से, और किसी पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए छह मास से अधिक की नहीं होगी, अथवा जुर्माने से, जो उतना तक हो सकेगा जितना विनिर्दिष्ट किया जाए, किन्तु किसी भी दशा में जो प्रथम उल्लंघन के लिए पांच सौ रुपए से और किसी पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए एक हजार रुपए से अधिक का नहीं होगा, अथवा यथापूर्वोक्त कारावास और जुर्माना दोनों से दंडनीय होगा ।

                4. स्कीमें बनाना, उनमें फेरफार करना या उनका प्रतिसंहरण-(1) सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन रहते हुए, किसी पत्तन या पत्तन-समूह के लिए एक या अधिक स्कीमें बना सकेगी और अपने द्वारा बनाई गई स्कीम में परिवर्धन, संशोधन या फेरफार या उसका प्रतिसंहरण वैसी ही रीति से और वैसी ही शर्त के अध्यधीन रहते हुए                       कर सकेगी ।

                (2) साधारण खण्ड अधिनियम, 1897(1897 का 10) की धारा 23 के उपबंध उपधारा (1) द्वारा दी गई शक्ति के प्रयोग को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे केन्द्रीय अधिनियम द्वारा दी गई पूर्व प्रकाशन की शर्तों के अध्यधीन रहते हुए नियम बनाने की शक्ति को लागू होते हैं ।

                (3) सरकार किसी पत्तन के पत्तन प्राधिकारी को निदेश दे सकेगी कि वह ऐसे अनुदेशों के अनुसार, जो उसे समय-समय पर दिए जाएं, एक या अधिक प्रारूप-स्कीमें पत्तन के लिए तैयार करे और पत्तन प्राधिकारी ऐसे निदेश का अनुपालन करेगा ।

                5. सलाहकार समितिश्न्-(1) सरकार इस अधिनियम या तद्धीन बनाई गई किसी स्कीम के प्रशासन से उद्भूत होने वाले ऐसे विषयों पर सलाह देने के लिए, जिन्हें सरकार सलाह के लिए उसे निर्देशित करे, एक सलाहकार समिति गठित कर सकेगी, अथवा, उस दशा में जिसमें वह धारा 4 के अधीन कोई स्कीम बनाने का विनिश्चय करे, गठित करेगी ।

                 [(2) सलाहकार समिति के सदस्य सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे और उस संख्या में होंगे और उस रीति से चुने जाएंगे जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए :

परन्तु सलाहकार समिति में

(i) सरकार का,

(ii) डॉक कर्मकार का, तथा

(iii) डॉक कर्मकारों के नियोजकों और पोत-परिवहन कम्पनियों का,

प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या बराबर-बराबर होगी ।]

                (3) सलाहकार समिति का अध्यक्ष सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किए गए सदस्यों में से एक ऐसा सदस्य होगा जो सरकार द्वारा इस निमित्त नामनिर्दिष्ट किया गया हो ।

                (4) सलाहकार समिति के सब सदस्यों के नाम सरकार शासकीय राजपत्र में प्रकाशित करेगी ।

 ।                                                          ।                                                             ।                                                   ।   

                 [5क. डॉक श्रम बोर्ड-(1) सरकार किसी पत्तन या पत्तन-समूह के लिए एक डॉक श्रम बोर्ड शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा स्थापित कर सकेगी और वह बोर्ड उस नाम से ज्ञात होगा जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ।

                (2) हर ऐसा बोर्ड शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा और उसे सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उस नाम से वह वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।

                (3) हर ऐसे बोर्ड में एक अध्यक्ष और उतनी संख्या में अन्य सदस्य होंगे जितने सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएं :

                परन्तु हर ऐसे बोर्ड में-

                                (i) सरकार का,

                                (ii) डॉक कर्मकार का, तथा

                (iii) डॉक कर्मकारों के नियोजकों और पोत-परिवहन कम्पनियों का,

प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या बराबर-बराबर होगी ।

                (4) बोर्ड का अध्यक्ष सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किए गए सदस्यों में से एक ऐसा सदस्य होगा जो सरकार द्वारा इस निमित्त नामनिर्दिष्ट किया गया हो ।

                5ख. बोर्ड के कृत्य-(1) बोर्ड उस पत्तन या पत्तन-समूह के लिए, जिसके लिए वह स्थापित किया गया हो, स्कीम के प्रशासन के लिए उत्तरदायी होगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा जो उसे स्कीम द्वारा प्रदत्त किए जाएं ।

                (2) बोर्ड अपनी शक्तियों के प्रयोग में और अपने कृत्यों के निर्वहन में ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा जो सरकार, ऐसे कारणों से जो लेखन द्वारा कथित किए जाएंगे, उसे समय-समय पर दे ।

                5ग. लेखा और संपरीक्षा-(1) हर बोर्ड उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा एक वार्षिक लेखा-विवरण, जिसके अंतर्गत तुलनपत्र आता है, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित किया जाए ।

                (2) बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा प्रतिवर्ष भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा या अन्य ऐसे संपरीक्षकों द्वारा की जाएगी जो कम्पनी सम्बन्धी तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन कम्पनियों के संपरीक्षकों के रूप में कार्य करने के लिए अर्हित हों और जिन्हें सरकार नियुक्त करे ।

                (3) बोर्ड की लेखा-बहियों और अन्य दस्तावेजों तक सब युक्तियुक्त समयों पर संपरीक्षकों की पहुंच होगी और संपरीक्षक संपरीक्षा के प्रयोजनों के लिए ऐसा स्पष्टीकरण और जानकारी मांग सकेंगे जिसकी उन्हें अपेक्षा हो और बोर्ड के किसी सदस्य या आफिसर की परीक्षा कर सकेंगे ।

                (4) संपरीक्षक अपनी रिपोर्ट की एक प्रति बोर्ड के संपरीक्षित लेखाओं की एक प्रति के सहित सरकार को भेजेंगे ।

                (5) संपरीक्षा का सरकार द्वारा यथा अवधारित खर्च बोर्ड की निधि में से चुकाया जाएगा ।]

                 [5घ. वार्षिक रिपोर्ट-हर बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, पूर्व वित्तीय वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलापों का पूरा लेखा देते हुए अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसकी एक प्रति सरकार को भेजेगा ।

5ङ. वार्षिक रिपोर्ट और संपरीक्षित लेखाओं का संसद् या विधान-मंडल के समक्ष रखा जाना-वार्षिक रिपोर्ट और बोर्ड के संपरीक्षित लेखे तथा उन पर संपरीक्षक की रिपोर्ट और बोर्ड के कार्यकरण के बारे में सरकार का पुनर्विलोकन, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के नौ मास की कालावधि के भीतर, यदि ऐसी रिपोर्ट और लेखे केंद्रीय सरकार को भेजे गए हैं तो संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष और यदि ऐसी रिपोर्ट और लेखे राज्य सरकार को भेजे गए हैं, तो राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखे जाएंगे :

परंतु यदि ऐसी रिपोर्ट, लेखे और पुनर्विलोकन उक्त कालावधि के भीतर, यथास्थिति, संसद् या विधान-मंडल के समक्ष नहीं रखे जाते हैं तो उनको, विलंब के कारणों सहित, तत्पश्चात् इस प्रकार रखा जाएगा ।

6. निरीक्षक-(1) सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें वह ठीक समझे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसे पत्तनों पर जो अधिसूचना में निर्दिष्ट किए जाएं निरीक्षक नियुक्त कर सकेगी ।

(2) हर निरीक्षक भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अर्थ के अंदर लोक सेवक समझा जाएगा ।

(3) निरीक्षक किसी पत्तन पर, जिसके लिए वह नियुक्त किया गया हो,

(क) ऐसी सहायता के साथ (यदि कोई हो), जो वह ठीक समझे, किसी ऐसे परिसर या जलयान में जहां डॉक कर्मकार नियोजित हैं, प्रवेश कर सकेगा ;

(ख) डॉक कर्मकारों से सम्बद्ध कोई रजिस्टर, मास्टर-रोल या अन्य दस्तावेज पेश करने की अपेक्षा किसी प्राधिकारी या व्यक्ति से कर सकेगा और ऐसी दस्तावेज की परीक्षा कर सकेगा ;

(ग) स्थल पर ही या अन्यथा किसी व्यक्ति का साक्ष्य यह अभिनिश्चित करने के प्रयोजन से ले सकेगा कि क्या पत्तन के लिए बनाई गई स्कीम के उपबंधों का अनुपालन किया जाता है या किया गया है ।

(4) सरकार, शासकीय रापजत्र में अधिसूचना द्वारा, वह रीति जिससे, और वे व्यक्ति, जिनके द्वारा स्कीम के किसी उपबंध के उल्लंघन के बारे में परिवाद निरीक्षक से किए जा सकेंगे, तथा वे कर्तव्य, जो ऐसे परिवादों के सम्बन्ध में निरीक्षक के होंगे, विहित कर सकेगी ।

 [6क. जांच का आदेश देने की शक्ति-(1) सरकार किसी भी समय किसी भी व्यक्ति को किसी बोर्ड के कार्यकरण के बारे में अन्वेषण या जांच करने और सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए नियुक्त कर सकेगी ।

(2) बोर्ड ऐसे नियुक्त किए गए व्यक्ति को अन्वेषण या जांच के उचित संचालन के लिए सब सुविधाएं देगा और बोर्ड के कब्जे में की ऐसी दस्तावेजें, लेखे या जानकारी उसे देगा जिनकी वह अपेक्षा करे ।

6ख. बोर्ड को अतिष्ठित करने की शक्ति-(1) यदि धारा 6क के अधीन की रिपोर्ट पर विचार करने पर या अन्यथा सरकार की यह राय हो कि

(क) गम्भीर आपात के कारण बोर्ड अपने कृत्यों का पालन करने में असमर्थ है, अथवा

(ख) बोर्ड ने अपने कृत्यों के निर्वहन में बार-बार व्यतिक्रम किया है, या अपनी शक्तियों के बाहर कार्य किया है या अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है,

तो सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बोर्ड को, ऐसी कालावधि के लिए जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अतिष्ठित कर सकेगी :

परन्तु खंड (ख) में वर्णित आधारों में से किसी पर इस उपधारा के अधीन अधिसूचना निकालने के पूर्व सरकर बोर्ड को इस बात का हेतुक दर्शित करने के लिए युक्तियुक्त अवसर देगी कि उसे अतिष्ठित क्यों न कर दिया जाए और सरकार बोर्ड के स्पष्टीकरणों और आक्षेपों पर, यदि कोई हों, विचार करेगी ।]

(2) उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना के प्रकाशन पर

                (क) बोर्ड के सब सदस्य ऐसे प्रकाशन की तारीख से अपने सदस्य-पद रिक्त कर देंगे ;

                (ख) उन सब शक्तियों और कृत्यों का प्रयोग या पालन, जिनका प्रयोग या पालन बोर्ड द्वारा किया जा सकता है, अतिष्ठिति-कालावधि के दौरान ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाएगा जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ;

                (ग) बोर्ड में निहित सब निधियां और अन्य सम्पत्ति अतिष्ठिति-कालावधि के दौरान सरकार में निहित रहेंगी ।

(3) उपधारा (1) के अधीन निकाली गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अतिष्ठिति-कालावधि का अवसान हो जाने पर सरकार

(क) अतिष्ठिति-कालावधि को ऐसी अतिरिक्त कालावधि के लिए, जैसी वह आवश्यक समझे, विस्तारित                          कर सकेगी ; अथवा

                (ख) धारा 5क में उपबंधित रीति से बोर्ड को पुनःस्थापित कर सकेगी ।

6ग. बोर्ड और सलाहकार समिति के कार्यों या कार्यवाही का अविधिमान्य होना-बोर्ड या सलाहकार समिति का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण से अविधिमान्य न होगी कि-

                (क) बोर्ड या सलाहकार समिति में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि है ; अथवा

                (ख) बोर्ड या सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई                        त्रुटि है; अथवा

(ग) बोर्ड की या सलाहकार समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता ।]

7. अपराधों का संज्ञान-(1) कोई भी न्यायालय स्कीम द्वारा दण्डनीय बनाए गए किसी भी अपराध का या उसके दुष्प्रेरण का संज्ञान ऐसा अपराध या दुष्प्रेरण गठित करने वाले तथ्यों की निरीक्षक की, या सरकार द्वारा इस निमित्त विशेषतः प्राधिकृत व्यक्ति की लिखित रिपोर्ट पर करने के सिवाय न करेगा ।

(2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1898  (1898 का 5) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी यह है कि स्कीम द्वारा दंडनीय बनाया गया अपराध या उसका दुष्प्रेरण केवल प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा ही विचारणीय होगा ।

 [7क. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि किसी स्कीम द्वारा दंडनीय बनाया गया कोई अपराध या उसका दुष्प्रेरण करने वाला व्यक्ति कम्पनी हो तो हर व्यक्ति, जो ऐसे अपराध या दुष्प्रेरण के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध या दुष्प्रेरण के दोषी समझे जाएंगे तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध या दुष्प्रेरण उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध या दुष्प्रेरण का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी स्कीम द्वारा दंडनीय बनाया गया कोई अपराध या उसका दुष्प्रेरण कम्पनी द्वारा किया गया हो तथा यह साबित हो कि वह अपराध या दुष्प्रेरण कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध या दुष्प्रेरण का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,

(क) “कम्पनी” से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य                                  संगम भी है; तथा

(ख) फर्म के संबंध में “निदेशक” से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।]

                 [8. नियम बनाने की शक्ति-(1) सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावशाली करने के लिए नियम शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।

                (2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे-

(क) सलाहकार समिति और बोर्डों की संरचना और वह रीति जिससे सलाहकार समिति और बोर्डों के सदस्य           चुने जाएंगे ;

(ख) बोर्ड या सलाहकार समिति के सदस्यों की पदावधि और उनमें की आकस्मिक रिक्तियों को  भरने की रीति ;

(ग) बोर्ड और सलाहकार समिति के अधिवेशन, ऐसे अधिवेशनों के लिए गणपूर्ति और उनमें कारबार का संचालन ;

(घ) वे शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए और वह ढंग जिससे बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से संविदाएं की जा सकेंगी ;

(ङ) बोर्ड या सलाहकार समिति के सदस्यों को संदेय भत्ते, यदि कोई हों ;

(च) बोर्ड की सदस्यता के लिए निरर्हताएं ;

(छ) वह प्ररूप जिसमें बोर्ड अपना वार्षिक लेखा-विवरण और तुलनपत्र तैयार करेगा ।

 ।                                                           ।                                                    ।                                                      ।   

 [8क. स्कीमों और नियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाई गई प्रत्येक स्कीम और बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस स्कीम या नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह स्कीम या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु स्कीम या नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात को विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

9. व्यावृत्ति-धारा 4 के अधीन बनाई गई स्कीम के अधीन किसी पत्तन या पत्तन-समूह के लिए डॉक कर्मकार                           (नियोजन का विनियमन) संशोधन अधिनियम, 1962 (1962 का 8) के प्रारम्भ के पूर्व स्थापित और ऐसे प्रारम्भ के अव्यवहित पूर्व इस रूप में कृत्य करता हुआ हर डॉक श्रम बोर्ड धारा 5क के अधीन स्थापित बोर्ड समझा जाएगा और तदनुसार इस अधिनियम के सब उपबंध ऐसे हर बोर्ड को लागू होंगे ।

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