डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) (महापत्तनों को लागू न होना) अधिनियम, 1997
(1997 का अधिनियम संख्यांक 31)
[18 अगस्त, 1997]
डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 के
महापत्तन न्यासों के डॉक कर्मकारों को लागू न होने
का और उससे संसक्त या उसके आनुषंगिक
विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के अड़तालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) (महापत्तनों को लागू न होना) अधिनियम, 1997 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हों,-
(क) किसी महापत्तन के संबंध में नियत दिन" से उन महापत्तन के लिए धारा 3 के अधीन विनिर्दिष्ट तारीख अभिप्रेत है ;
(ख) बोर्ड" का वही अर्थ है जो महापत्तन न्यास अधिनियम, 1963 (1963 का 38) में है ;
(ग) डॉक श्रम बोर्ड" से डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 (1948 का 9) की धारा 5क के अधीन स्थापित डॉक श्रम बोर्ड अभिप्रेत है ;
(घ) महापत्तन" का वही अर्थ है जो भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 (1908 का 15) में है ।
3. डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 के उपबंधों का महापत्तनों को लागू न होना-केन्द्रीय सरकार, किसी महापत्तन के डॉक श्रम बोर्ड और उसके कर्मकारों और उस महापत्तन के प्रबंध-मंडल के बीच औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के उपबंधों के अनुसार समझौता हो जाने के पश्चात् राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि डॉक कर्मकार (नियोजन का विनियमन) अधिनियम, 1948 (1948 का 9) के उपबंध उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट तारीख से उस महापत्तन के संबंध में प्रभावहीन हो जाएंगे ।
4. डॉक श्रम बोर्ड आदि की आस्तियां और दायित्वों का बोर्ड को अंतरण-(1) किसी महापत्तन के संबंध में नियत दिन को :-
(क) ऐसे दिन के ठीक पूर्व डॉक श्रम बोर्डं में निहित सभी संपत्ति, आस्तियां और निधियां बोर्ड में निहित हो जाएंगी ;
(ख) डॉक श्रम बोर्ड के लिए या उसके प्रयोजनों के संबंध में ऐसे दिन के ठीक पूर्व डॉक श्रम बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत सभी ऋण, बाध्यताएं और दायित्व, की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी मामले और बातें बोर्ड द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत, की गई या किए जाने के लिए वचनबद्ध समझी जाएंगी ;
(ग) ऐसे दिन के ठीक पूर्व डॉक श्रम बोर्ड को देय सभी धनराशियां बोर्ड को देय समझी जाएंगी ;
(घ) डॉक श्रम बोर्ड के सबंध में किसी मामले के लिए, ऐसे दिन के ठीक पूर्व, डॉक श्रम बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित किए गए सभी वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां बोर्ड द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेंगी ;
(ङ) डॉक श्रम बोर्ड के अधीन सेवारत प्रत्येक कर्मचारी और कर्मकार बोर्ड के अधीन पद या सेवा उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर धारण करेगा, जो किसी भी प्रकार से उनसे कम अनुकूल नहीं हैं, जो उसे ग्राह्य होती यदि उसकी सेवाओं का बोर्ड को अंतरण नहीं होता, और तब तक वह ऐसा करता रहेगा जब तक बोर्ड में उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता है या जब तक उसकी पदावधि, पारिश्रमिक या सेवा के निबंधनों और शर्तों में बोर्ड द्वारा सम्यक् रूम से परिवर्तन नहीं कर दिया जाता है ।
(2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन किसी कर्मचारी की सेवाओं का बोर्ड को अंतरण ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और कोई ऐसा दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।
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