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संघ लेखा विभागीकरण (कार्मिक अन्तरण) अधिनियम, 1976 ( Departmentalisation of Union Accounts (Transfer of Personnel) Act, 1976 )


 

संघ लेखा विभागीकरण (कार्मिक अन्तरण) अधिनियम, 1976

(1976 का अधिनियम संख्यांक 59)

[8 अप्रैल, 1976]

केन्द्रीय सरकार के किसी मंत्रालय, विभाग या कार्यालय के लेखाओं

के संकलन से सम्बन्धित जिम्मेदारी का ऐसे मंत्रालय, विभाग या

कार्यालय द्वारा  दक्षतापूर्ण निर्वहन को सुकर बनाने के लिए,

भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग में सेवारत

अधिकारियों का ऐसे किसी मंत्रालय, विभाग

या कार्यालय को अन्तरण का

उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के सत्ताईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम संघ लेखा विभागीकरण (कार्मिक अन्तरण) अधिनियम, 1976 है ।

(2) यह 1 मार्च, 1976 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।  

2. भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का अन्तरण-(1) यदि राष्ट्रपति ने, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां तथा सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 (1971 का 56) की धारा 10 की उपधारा (1) के प्रथम परन्तुक के अधीन आदेश द्वारा, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संघ के अथवा संघ की ऐसी किन्हीं सेवाओं या विभागों के किन्हीं ऐसे लेखाओं के, जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, संकलन की जिम्मेदारी से, किसी ऐसी तारीख से (जिसे इसमें इसके पश्चात् विहित तारीख कहा गया है) अवमुक्त करने के लिए उपबन्ध किया है, तो केन्द्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, उपधारा (2) के अधीन स्थापित समिति की सलाह पर, आदेश द्वारा और ऐसी तारीख या तारीखों से (जो या तो किसी ऐसी तारीख से, जो विहित तारीख से पहले की न हो, भूतलक्षी हो सकती है या भविष्यलक्षी), जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए या की जाएं, केन्द्रीय सरकार के किसी मंत्रालय, विभाग या उसके किसी सम्बद्ध अथवा अधीनस्थ कार्यालय द्वारा ऐसे लेखाओं के संकलन की जिम्मेदारी के दक्षतापूर्ण निर्वहन को सुकर बनाने के प्रयोजनार्थ, ऐसे मंत्रालय, विभाग या कार्यालय को भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग में सेवारत किसी अधिकारी या कर्मचारी का अन्तरण करे :

परन्तु भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग में सेवारत किसी ऐसे अधिकारी या कर्मचारी के संबंध में, जिसने इस उपधारा के अधीन अपने ऐसे अन्तरण के लिए समिति की सलाह पर की गई प्रस्थापना के संबंध में, ऐसे समय के भीतर, जो इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, इस प्रकार अन्तरित किए जाने से अपनी अनिच्छा सूचित कर दी हो, इस उपधारा के अधीन कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि केन्द्रीय सरकार की यह राय न हो कि ऐसे अधिकारी या कर्मचारी का यथापूर्वोक्त अंतरण लोक हित में आवश्यक है :

परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे अधिकारी या कर्मचारी के, भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग में उसको लागू नियमों के अनुसार, पदत्याग करने अथवा सेवा से निवृत्त होने के अधिकार पर प्रभाव नहीं डालेगी । 

(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन अधिकारियों और कर्मचारियों के अंतरण की बाबत उसकी सहायता करने के प्रयोजनार्थ आदेश द्वारा, एक या अधिक सलाहकार समितियां स्थापित कर सकती है, जिसमें इतने सदस्य होंगे जितने वह ठीक समझे । 

(3) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश द्वारा केन्द्रीय सरकार के किसी मंत्रालय, विभाग या कार्यालय को अंतरित अधिकारी या अन्य कर्मचारी, अंतरण की तारीख से भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग में अधिकारी या कर्मचारी नहीं रह जाएगा और उपधारा (4) के उपबंधों और संविधान के भाग 14 के अध्याय 1 के अधीन बनाई गई किसी विधि या बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, ऐसे मंत्रालय, विभाग या कार्यालय में, ऐसे पदनाम से, जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे, पद धारण करेगा । 

(4) उपधारा (1) के अधीन अंतरित प्रत्येक अधिकारी या कर्मचारी ऐसे वेतनमान वाले पद पर, जो ऐसे अंतरण की तारीख से ठीक पूर्व उसके द्वारा धारित पद के वेतनमान से कम अनुकूल न हो, और उसी हसियत में (चाहे अधिष्ठायी हो या स्थानापन्न) जिसमें वह अंतरण की तारीख से ठीक पूर्व पद धारण कर रहा था, नियुक्त किए जाने का हकदार होगा :

परन्तु यदि ऐसे अंतरण की तारीख से ठीक पूर्व कोई ऐसा अधिकारी या कर्मचारी भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग में या तो छुट्टी के कारण हुई रिक्ति में या विनिर्दिष्ट अवधि की किसी अन्य रिक्ति में, किसी उच्चतर पद पर स्थानापन्न रूप में कार्य कर रहा है तो अंतरण पर उसका वेतन, ऐसी रिक्ति की अनवसित अवधि तक के लिए संरक्षित किया जाएगा ।

3. निरसन और व्यावृत्ति-(1) संघ लेखा विभागीकरण (कार्मिक स्थानांतरण) अध्यादेश, 1976 (1976 का 2) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।  

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कोई कार्यवाही इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी ।

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