दन्त-चिकित्सक अधिनियम, 1948
(1948 का अधिनियम संख्यांक 16)1
[29 मार्च, 1948]
दन्त-चिकित्सा वृत्ति का विनियमन
करने के लिए
अधिनियम
दन्त-चिकित्सा वृत्ति का विनियमन करने और उस प्रयोजन के लिए दन्त-परिषदों का गठन करने के लिए उपबन्ध करना समीचीन है;
इसके द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है: -
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दन्त-चिकित्सक अधिनियम, 1948 है ।
(2) इसका विस्तार 2[ 3*** सम्पूर्ण भारत पर है ।]
2. निर्वचन-इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो, -
(क) “परिषद्" से धारा 3 के अधीन गठित भारतीय दन्त-परिषद् अभिप्रेत है;
(ख) “दन्त स्वास्थ्य विज्ञानी" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो दन्त-चिकित्सक या चिकित्सा-व्यवसायी न होते हुए दांतों से परत उतारता है, उन्हें साफ करता है या चमकाता है या दंत स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी शिक्षा देता है;
(ग) “दन्त यांत्रिक" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो नकली दांत और दंत साधित्र बनाता है या उनकी मरम्मत करता है;
(घ) दन्त-चिकित्सा" में निम्नलिखित आते हैं: -
(i) मनुष्य के दांतों या जबड़ों की शल्यक्रिया और उनके किसी रोग, उनमें कमी या विक्षप्ति की चिकित्सा और मनुष्य के दांतों या जबड़ों या मुख कोटर के संबंध में रेडियोग्राफ लेने का कार्य करना;
(ii) किसी ऐसी शल्यक्रिया या चिकित्सा के संबंध में किसी निश्चेतक का दिया जाना;
(iii) नकली दांतों या पुनः स्थापक दंत साधित्रों का यांत्रिक निर्माण या नवीकरण;
(iv) नकली दांतों या पुनःस्थापक दंत साधित्रों को लगाने, उन्हें अन्तःस्थापित करने, उनको बैठाने, उनका निर्माण करने, उनकी मरम्मत या उनके नवीकरण के पूर्व, या उस प्रयोजन के लिए, या उसके संबंध में किसी व्यक्ति की शल्यक्रिया करना या उस व्यक्ति की ऐसी चिकित्सा करना, उसे सलाह देना या उसकी परिचर्या करना, और ऐसी शल्यक्रिया करना और कोई ऐसी चिकित्सा करना, सलाह देना या परिचर्या करना जैसी कि प्रायः दंत-चिकित्सकों द्वारा दी या की जाती है;
(ङ) “दंत-चिकित्सक" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो दन्त-चिकित्सा का व्यवसाय करता है;
(च) “चिकित्सा-व्यवसायी" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है, जो भारतीय चिकित्सा उपाधि अधिनियम, 1916 (1916 का 7) की धारा 3 के अधीन विनिर्दिष्ट या अधिसूचित या [भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् अधिनियम, 1956 (1956 का 102) को अनुसूचियों में विनिर्दिष्ट [या किसी राज्य में उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में विनिर्दिष्ट] किसी प्राधिकारी द्वारा अनुदत्त अर्हता धारण करता है, या जो चिकित्सा की किसी पद्धति में व्यवसाय करता है और जो किसी [राज्य] के चिकित्सा रजिस्टर में, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, रजिस्ट्रीकृत किए जाने का हकदार है ;
(छ) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ज) “[राज्य] परिषद्" से धारा 21 के अधीन गठित 1[राज्य] दंत-परिषद् अभिप्रेत है और उसके अंतर्गत धारा 22 के अधीन करार के अनुसार गठित संयुक्त 1[राज्य] परिषद् भी है ;
(झ) “रजिस्टर" से इस अधिनियम के अधीन रखा गया रजिस्टर अभिप्रेत है ;
[(ञ) “मान्यताप्रापत दंड अर्हता" से अनुसूची में सम्मिलित अर्हताओं में से कोई अर्हता अभिप्रेत है ;]
(ट) “मान्यताप्राप्त दंत स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी अर्हता" से धारा 11 के अधीन परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त अर्हता अभिप्रेत है ;
(ठ) “रजिस्ट्रीकृत दन्त-चिकित्सक", रजिस्ट्रीकृत दंत स्वास्थ्य-विज्ञानी" और रजिस्ट्रीकृत दन्त यांत्रिक", से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसका नाम दंत-चिकित्सकों के रजिस्टर, दंत स्वास्थ्य-विज्ञानियों के रजिस्टर और दंत यांत्रिकों के रजिस्टर में उस समय दर्ज है ।
। । । ।
[2क. उन विधियों के प्रति निर्देशों का अर्थान्वयन जो जम्मू-कश्मीर में प्रवृत्त नहीं हैं-इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति निर्देश का, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त नहीं है, उस राज्य के संबंध में इस प्रकार अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि, यदि कोई हो, के प्रति निर्देश है ।]
अध्याय 2
भारतीय दन्त-परिषद्
3. परिषद् का गठन और उसकी संरचना-केन्द्रीय सरकार, एक परिषद् का यथाशक्य शीघ्र गठन करेगी, जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात् :-
(क) मान्यताप्राप्त दंत अर्हता धारण करने वाला एक रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सक जो प्रत्येक 1[राज्य] रजिस्टर के भाग क में रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सकों द्वारा निर्वाचित होगा ;
(ख) भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित एक सदस्य ;
[ [(ग) निम्नलिखित द्वारा अपने में से निर्वाचित अधिक से अधिक चार सदस्य,
(क) मान्यताप्राप्त दंत अर्हताओं के लिए छात्रों को प्रशिक्षण देने वाले राज्यों के दंत महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य, संकायाध्यक्ष, निदेशक और उप-प्रधानार्चा या :
परन्तु एक ही दंत महाविद्यालय से एक से अधिक सदस्य निर्वाचित नहीं किया जाएगा ;
(ख) मान्यताप्राप्त दंत अर्हताओं के लिए छात्रों को प्रशिक्षण देने वाले राज्यों के चिकित्सा आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों के दंत स्कंधों के अध्यक्ष ;]
(घ) राज्यों के विधि द्वारा स्थापित प्रत्येक ऐसे विश्वविद्यालय से जो मान्यताप्राप्त दंत अर्हता प्रदान करता है एक सदस्य, जिसे विश्वविद्यालय के सिनेट के सदस्यों द्वारा निर्वाचित किया जाएगा या यदि विश्वविद्यालय की कोई सिनेट न हो तो सभा के सदस्यों द्वारा विश्वविद्यालय के दंत संकाय के सदस्यों में से या यदि, विश्वविद्यालय का कोई दंत संकाय न हो तो उसके चिकित्सा संकाय के सदस्यों में से, निर्वाचित किया जाएगा ;
(ङ) [ ***प्रत्येक राज्य] का प्रतिनिधित्व करने वाला एक सदस्य जो या तो राज्य के चिकित्सा रजिस्टर में या दंत-चिकित्सक रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों में से, ऐसे प्रत्येक राज्य की सरकार द्वारा नामनिर्देशित होगा ;]
[स्पष्टीकर-णइस खण्ड में राज्य" के अन्तर्गत संघ राज्यक्षेत्र नहीं है ;]
(च) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित छह सदस्य जिनमें से एक सदस्य ऐसा रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सक होगा जिनके पास मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा की अर्हता हो और जो दंत-चिकित्सा व्यवसाय कर रहा हो या किसी [संघ राज्यक्षेत्रट में दंत-चिकित्सकों के प्रशिक्षण की किसी संस्था में नियुक्त हो और कम से कम दो सदस्य [राज्य] रजिस्टर के भाग ख में दर्ज दंत-चिकित्सक होंगे ;
[(छ) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, पदेन :]
परन्तु रजिस्टर के तैयार किए जाने तक, ऐसे व्यक्तियों में से जो संबंधित रजिस्टरों में रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र हैं, 2[राज्य] सरकार, भाग क और भाग ङ में निर्दिष्ट सदस्यों को और केन्द्रीय सरकार भाग च में निर्दिष्ट सदस्य को प्रथम परिषद् में नामनिर्दिष्ट कर सकेगी और ऐसे सदस्य ऐसी अवधि के लिए जो 2[राज्य] या केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, पद धारण करेंगे ।
4. परिषद् का निगमन-परिषद् शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाली भारतीय दंत-परिषद् नामक एक निगमित निकाय होगी जिसे जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की सम्पत्ति का अर्जन और धारण करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह लाएगी उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।
5. निर्वाचन का ढंग-इस अध्याय के अधीन निर्वाचन विहित रीति से किए जाएंगे और यदि ऐसे किसी निर्वाचन के बारे में कोई विवाद उठता है तो उसे केन्द्रीय सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा जिसका विनिश्चय अंतिम होगा ।
6. पदावधि और आकस्मिक रिक्तियां-(1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट सदस्य अपने निर्वाचन या नामनिर्देशन की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए या उस अवधि तक के लिए जब तक उसका उत्तरवर्ती सम्यक् रूप से निर्वाचित या नामनिर्देशित नहीं कर लिया जाता है, इन दोनों में से जो अवधि अधिक लम्बी हो, पद धारण किए रहेगा :
[परन्तु धारा 3 के खण्ड (ङ) या खण्ड (च) के अधीन नामनिर्देशित सदस्य अपने नामनिर्देशित करने वाले प्राधिकारी के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।]
(2) निर्वाचित या नामनिर्देशित सदस्य, सभापति को सम्बोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा किसी भी समय अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे सकता है और तब ऐसे सदस्य का स्थान रिक्त हो जाएगा ।
(3) यदि कोई निर्वाचित या नामनिर्देशित सदस्य परिषद् की राय में पर्याप्त कारण के बिना उसके तीन क्रमवर्ती साधारण अधिवेशनों में अनुपस्थित रहता है अथवा उस दशा में जिसमें किसी सदस्य का नाम 2[राज्य] रजिस्टर में सम्मिलित किया जाना अपेक्षित है यदि उसका नाम ऐसे रजिस्टर से हटा दिया गया है, या उस दशा में जिसमें वह धारा 3 के खण्ड (ग) के अधीन निर्वाचित हो गया है [यदि वह दंत महाविद्यालय के [प्रधानाचार्य, संकायाध्यक्ष, निदेशक या उप-प्रधानाचार्य] के रूप में या चिकित्सा महाविद्यालय के [दंत स्कंध के अध्यक्ष] के रूप में नही रह जाता हैट या उस दशा में जिसमें वह धारा 3 के खण्ड (ख) या खण्ड (घ) के अधीन निर्वाचित हो गया है, यदि वह, यथास्थिति, भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् का या विश्वविद्यालय की [दंत या चिकित्सा संकाय] का सदस्य नहीं रह जाता है, तो यह समझा जाएगा कि उसने अपना स्थान रिक्त कर दिया है ।
(4) परिषद् में आकस्मिक रिक्ति, यथास्थिति, नए निर्वाचन या नामनिर्देशन द्वारा भरी जाएगी और उस रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित या नामनिर्देशित व्यक्ति उस अवधि के शेष भाग के लिए ही पद पर रहेगा, जिसके लिए वह सदस्य जिनका स्थान वह ग्रहण करता है, निर्वाचित या नामनिर्देशित किया गया था ।
(5) परिषद् के सदस्य पुनः निर्वाचन या पुनः नामनिर्देशन के पात्र होंगे ।
(6) परिषद् द्वारा किया गया कोई कार्य केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि परिषद् में कोई रिक्ति थी या उसके गठन में कोई त्रुटि थी ।
7. परिषद् का सभापति और उपसभापति-(1) परिषद् के सभापति और उपसभापति उक्त परिषद् के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित किए जाएंगे:
परन्तु परिषद् के प्रथम गठन पर और सभापति के निर्वाचित होने तक केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नामनिर्देशित परिषद् का कोई सदस्य, सभापति के कृत्यों का निर्वहन करेगा:
परन्तु यह और कि परिषद् के प्रथम गठन से पांच वर्ष के लिए सभापति, यदि केन्द्रीय सरकार विनिश्चय करती है तो, केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित ऐसा व्यक्ति होगा जो केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और यदि वह पहले से ही सदस्य नहीं है तो धारा 3 में निर्दिष्ट सदस्यों के अतिरिक्त परिषद् का सदस्य होगा ।
(2) निर्वाचित सभापति या उपसभापति इस रूप में अपना पद पांच वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए, जो परिषद् के सदस्य के रूप में उसकी अवधि की समाप्ति के बाद तक नहीं रहेगी, धारण करेगा, किन्तु परिषद् का सदस्य रहने पर वह पुनर्निर्वाचन का पात्र होगा ।
8. कर्मचारिवृन्द, पारिश्रमिक तथा भत्ते-(1) परिषद्-
(क) एक सचिव नियुक्त करेगी जो यदि परिषद् विनिश्चय करती है तो उसके कोषपाल के रूप में भी कार्य कर सकेगा :
(ख) ऐसे अन्य अधिकारियों और सेवकों को नियुक्त करेगी जिन्हें परिषद् इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए अपने को समर्थ बनाने में आवश्यक समझे ;
(ग) सचिव से या किसी अन्य अधिकारी या सेवक से उसके कर्तव्यों के सम्यक् पालन के लिए उतनी प्रतिभूति की अपेक्षा करेगी और ग्रहण करेगी जितनी परिषद् आवश्यक समझे ; और
(घ) केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से परिषद् के सभापति, उप-सभापति और अन्य सदस्यों की फीसें और भत्ते तथा परिषद् के अधिकारियों और सेवकों के वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें, नियत करेगी ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (क) में किसी बात के होते हुए भी, परिषद् के प्रथम गठन से प्रथम चार वर्षों के लिए, परिषद् का सचिव केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति होगा जो केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।
9. कार्यकारिणी समिति-(1) परिषद् अपने सदस्यों में से एक कार्यकारिणी समिति का गठन करेगी और वह ऐसे साधारण या विशेष प्रयोजनों के लिए अन्य समितियों का गठन कर सकेगी, जिन्हें परिषद् इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक समझे ।
(2) कार्यकारिणी समिति में सभापति और उपसभापति, पदेन [और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, पदेनट और परिषद् द्वारा अपने में निर्वाचित पांच अन्य सदस्य होंगे ।
(3) परिषद् के सभापति और उपसभापति कार्यकारिणी समिति के क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होंगे ।
(4) कार्यकारिणी समिति का सदस्य इस रूप में अपने पद पर तब तक बना रहेगा जब तक परिषद् के सदस्य के रूप में उसकी पदावधि समाप्त नहीं हो जाती किन्तु परिषद् का सदस्य रहने पर वह पुनर्निर्वाचन का पात्र होगा ।
(5) इस अधिनियम द्वारा अपने को प्रदत्त शक्तियों और अधिरोपित कर्तव्यों के अतिरिक्त कार्यकारिणी समिति ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगी जो विहित किए जाएं ।
[10. दंत अर्हताओं को मान्यता-(1) भारत में किसी प्राधिकरण या संस्था द्वारा प्रदान की गई ऐसी दन्त-चिकित्सा अर्हताएं जो अनुसूची के भाग 1 में सम्मिलित हैं, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्य अर्हताएं होंगी ।
(2) भारत में कोई ऐसा प्राधिकरण या संस्था, जो ऐसी दन्त-चिकित्सा अर्हता प्रदान करती है जो अनुसूची के भाग 1 में सम्मिलित नहीं है, उक्त अर्हता को मान्यताप्राप्त कराने और उसे भाग 1 में सम्मिलित कराने के लिए केन्द्रीय सरकार से आवेदन कर सकेगी और केन्द्रीय सरकार परिषद् से परामर्श करने के पश्चात् और ऐसी जांच के पश्चात् यदि कोई हो, जो वह इस प्रयोजन के लिए उचित समझे राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अनुसूची के भाग 1 का संशोधन इस प्रकार कर सकेगी कि वह अर्हता उसमें सम्मिलित की जा सके और ऐसी किसी अधिसूचना में यह निदेश भी हो सकेगा कि ऐसी दन्त-चिकित्सा अर्हता के सामने अनुसूची के भाग 1 में ऐसी प्रविष्टि की जाए जिसमें यह घोषित किया गया हो कि वह अर्हता केवल उस दशा में एक मान्यताप्राप्त दन्त-चिकित्सा अर्हता होगी जिसमें वह किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् प्रदान की गई हो ।
(3) (क) भारत के बाहर के किसी प्राधिकरण या संस्था द्वारा प्रदान की गई ऐसी दन्त-चिकित्सा अर्हताएं जो अनुसूची के भाग 2 में सम्मिलित हैं, केवल तभी मान्यताप्राप्त दन्त-चिकित्सा अर्हताएं होंगी जब भारत के नागरिकों के रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजन के लिए इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर प्रथम बार तैयार किया जाता है ।
(ख) जहां भारत के बाहर किसी प्राधिकरण या संस्था द्वारा प्रदान की गई और भारत के किसी नागरिक द्वारा भारित कोई दन्त-चिकित्सा अर्हता को रजिस्टर के प्रथम बार तैयार किए जाने के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त है, वहां दन्त-चिकित्सक (संशोधन) अधिनियम, 1972 के प्रारंभ के पश्चात् उसे केन्द्रीय सरकार परिषद् से परामर्श करने के पश्चात् राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अनुसूची के भाग 2 का संशोधन इस प्रकार कर सकेगी कि इस प्रकार मान्यताप्राप्त दन्त-चिकित्सा अर्हता उसमें सम्मिलित की जा सके ।
(4) (क) भारत के बाहर के किसी प्राधिकरण या संस्था द्वारा दी गई ऐसी दन्त-चिकित्सा अर्हताएं, जो अनुसूची के भाग 3 में सम्मिलित हैं, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त दन्त-चिकित्सा अर्हताएं होगी, किन्तु ऐसी कोई अर्हता धारण करने वाला व्यक्ति रजिस्ट्रीकरण के लिए तब तक हकदार नहीं होगा जब तक वह भारत का नागरिक न हो ।
(ख) जहां भारत के बाहर के किसी प्राधिकरण या संस्था द्वारा दी गई और भारत के किसी नागरिक द्वारा धारित किसी दन्त-चिकित्सा अर्हता को, पारस्पारिक आधार के सिवाय दन्त-चिकित्सक (संशोधन) अधिनियम, 1972 के प्रारंभ के पश्चात् मान्यता दी जाती है, वहां केन्द्रीय सरकार, परिषद् से परामर्श करने के पश्चात् राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अनुसूची के भाग 3 का संशोधन इस प्रकार कर सकेगी कि ऐसी मान्यताप्राप्त दन्त-चिकित्सा अर्हता उसमें सम्मिलित की जा सके ।
(5) परिषद्, भारत के बाहर के किसी राज्य या देश के किसी ऐसे प्राधिकरण या संस्था के साथ, जिसे ऐसे राज्य या देश की विधि द्वारा दन्त-चिकित्सकों का रजिस्टर बनाए रखने का कार्य सौंपा गया हो, दन्त-चिकित्सा की मान्यता के लिए पारस्पारिकता की स्कीम तय करने के लिए, बातचीत कर सकेगी और ऐसी किसी स्कीम के अनुसरण में केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषणा कर सकेगी कि कोई ऐसी अर्हता जो किसी ऐसे राज्य या देश के किसी प्राधिकारण या संस्था द्वारा दी गई हो या ऐसी अर्हता केवल तभी जब किसी निर्दिष्ट तारीख के पश्चात् दी जाए, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त दन्त-चिकित्सा अर्हता होगी और ऐसी किसी अधिसूचना में अनुसूची को संशोधित करने के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा और इसमें यह निदेश भी हो सकेगा कि ऐसी कोई दन्त-चिकित्सा अर्हता, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट है, इस प्रकार संशोधित अनुसूची में प्रविष्ट की जाएगी ।
(6) केन्द्रीय सरकार, परिषद् से परामर्श करने के पश्चात् राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश देते हुए अनुसूची को संशोधित कर सकेगी कि किसी दन्त-चिकित्सा अर्हता की बाबत उसमें कोई प्रविष्टि इस घोषणा के साथ की जाएगी कि यह अर्हता केवल तभी मान्यताप्राप्त दन्त-चिकित्सा अर्हता होगी जब वह किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व दी गई हो ।]
[10क. नए दंत-चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना, नए पाठ्यक्रमों, आदि के लिए अनुज्ञा-(1) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के उपबंधों के अनुसार अभिप्राप्त केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना,
(क) कोई व्यक्ति किसी पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण के लिए (जिसके अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण है) कोई ऐसा प्राधिकरण या संस्था स्थापित नहीं करेगा जो ऐसे पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण के किसी छात्र को मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान किए जाने के लिए उसे अर्हित होने के लिए समर्थ बनाए ; या
(ख) कोई ऐसा प्राधिकरण या संस्था जो मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने के लिए कोई पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण (जिसके अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण है) संचालित करती है-
(i) कोई ऐसा नया या उच्चतर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण (जिसके अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण है) आरंभ नहीं करेगी जो ऐसे पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण के किसी छात्र को कोई मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान किए जाने के लिए उसे अर्हित होने के लिए समर्थ बनाए ; या
(ii) किसी पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण की (जिसके अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण है) अपनी प्रवेश क्षमता में वृद्धि नहीं करेगी ।
स्पष्टीकरण 1-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, व्यक्ति" के अंतर्गत कोई विश्वविद्यालय या न्यास है किंतु इसके अंतर्गत केन्द्रीय सरकार नहीं है ।
स्पष्टीकरण 2-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, मान्यताप्रापत दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने वाले किसी प्राधिकरण या संस्था किसी पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण के संबंध में (जिसके अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण है), “प्रवेश क्षमता" से छात्रों की वह अधिकतम संख्या अभिप्रेत है जो परिषद् द्वारा ऐसे पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण में प्रवेश दिए जाने के लिए समय-समय पर नियत की जाए ।
(2) (क) मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था, उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा अभिप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार को खंड (ख) के उपबंधों के अनुसार एक स्कीम प्रस्तुत करेगी और केन्द्रीय सरकार उक्त स्कीम परिषद् को उसकी सिफारिश के लिए निर्देशित करेगी ।
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट स्कीम ऐसे प्ररूप में होगी और उसमें ऐसी विशिष्टियां होंगी और ऐसी रीति से प्रस्तुत की जाएंगी और उसके साथ ऐसी फीस होगी जो विहित की जाए ।
(3) परिषद्, उपधारा (2) के अधीन स्कीम की प्राप्ति पर, मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने वाले संबंधित व्यक्ति, अधिकरण या संस्था से ऐसी अन्य विशिष्टियां जो वह आवश्यक समझे अभिप्राप्त कर सकेगी और तत्पश्चात् वह,
(क) यदि स्कीम त्रुटिपूर्ण है और उसमें कोई आवश्यक विशिष्टियां नहीं हैं, तो संबंधित व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था को लिखित अभ्यावेदन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर दे सकेगी और ऐसे व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था को परिषद् द्वारा विनिर्दिष्ट त्रुटियों का, यदि कोई हों, परिशोधन करने की छूट होगी ;
(ख) उपधारा (7) में निर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, स्कीम पर विचार कर सकेगी और स्कीम को उस पर अपनी सिफारिशों सहित केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत कर सकेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (3) के अधीन स्कीम पर और परिषद् की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात् और जहां आवश्यक हो वहां, ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो वह आवश्यक समझे संबंधित व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था से अभिप्राप्त करने के पश्चात् तथा उपधारा (7) में निर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, स्कीम का अनुमोदन (ऐसी शर्तों सहित, यदि कोई हों, जो वह आवश्यक समझे) या अननुमोदन कर सकेगी और कोई ऐसा अनुमोदन उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा होगा :
परन्तु कोई स्कीम, मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने वाले संबंधित व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् ही केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएगी, अन्यथा नहीं :
परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोई बात, किसी ऐसे व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था को, जिसकी स्कीम केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं की गई है, कोई नई स्कीम प्रस्तुत करने से निवारित नहीं करेगी और इस धारा के उपबंध ऐसी स्कीम को ऐसे लागू होंगे मानो ऐसी स्कीम उपधारा (2) के अधीन पहली बार प्रस्तुत की गई हो ।
(5) जहां उपधारा (2) के अधीन केन्द्रीय सरकार को स्कीम प्रस्तुत किए जाने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर केन्द्रीय सरकार द्वारा पारित किसी आदेश की, स्कीम प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था को, संसूचना नहीं दी गई है वहां ऐसी स्कीम के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका केन्द्रीय सरकार द्वारा उसी रूप में अनुमोदन कर दिया गया है जिसमें वह प्रस्तुत की गई थी और तद्नुसार उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा के बारे में भी यह समझा जाएगा कि वह दे दी गई है ।
(6) उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट समय-सीमा की संगणना करने में, परिषद् या केन्द्रीय सरकार द्वारा मांगी गई किन्हीं विशिष्टियों को देने में स्कीम प्रस्तुत करने वाले संबंधित व्यक्ति प्राधिकरण या संस्था द्वारा लिया गया समय अपवर्जित कर दिया जाएगा ।
(7) परिषद्, उपधारा (3) के खंड (ख) के अधीन अपनी सिफारिश करते समय और केन्द्रीय सरकार, उपधारा (4) के अधीन स्कीम का अनुमोदन या अननुमोदन करने वाला आदेश पारित करते समय निम्नलिखित बातों का सम्यक् ध्यान रखेगी, अर्थात् :
(क) क्या मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने के लिए प्रस्तावित प्राधिकरण या संस्था अथवा विद्यमान प्राधिकरण या संस्था, जो नया या उच्चतर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण आरंभ करना चाहती है धारा 16क में निर्दिष्ट अपेक्षाओं और धारा 20 की उपधारा (1) के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुरूप दंत-चिकित्सा शिक्षा का न्यूनतम स्तर प्रदान करने की स्थिति में होगी ;
(ख) क्या उस व्यक्ति के पास, जो किसी प्राधिकरण या संस्था की स्थापना करना चाहता है या उस विद्यमान प्राधिकरण या संस्था के पास, जो नया या उच्चतर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण आरंभ करना चाहती है या अपनी प्रवेश क्षमता में वृद्धि करना चाहती है, पर्याप्त साधन हैं ;
(ग) क्या प्राधिकरण या संस्था का उचित कार्यकरण सुनिश्चित करने के लिए या नया पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण संचालित करने के लिए या बढ़ाई गई प्रवेश क्षमता के अनुरूप कर्मचारिवृन्द, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं की बाबत आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था कर दी गई है या स्कीम में विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर कर दी जाएगी ;
(घ) क्या ऐसे छात्रों की, जिनके ऐसे प्राधिकरण या संस्था अथवा पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण में उपस्थित होने की संभावना है, संख्या को ध्यान में रखते हुए, या बढ़ाई गई प्रवेश क्षमता के परिणामस्वरूप पर्याप्त अस्पताल सुविधाओं की व्यवस्था कर दी गई है या स्कीम में विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर कर दी जाएगी ;
(ङ) क्या ऐसे छात्रों को, जिनके ऐसे प्राधिकरण या संस्था अथवा पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण में उपस्थित होने की संभावना है ; ऐसे व्यक्तियों द्वारा, जिनके पास मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हताएं हैं उचित प्रशिक्षण देने के लिए, कोई व्यवस्था की गई है या कोई कार्यक्रम तैयार किया गया है ;
(च) दंत-चिकित्सा व्यवसाय के क्षेत्र में जनशक्ति की अपेक्षा ; और
(छ) कोई अन्य बातें जो विहित की जाएं ।
(8) जहां केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन किसी स्कीम का अनुमोदन या अननुमोदन करने वाला कोई आदेश पारित करती है वहां आदेश की एक प्रति संबंधित व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था को संसूचित की जाएगी ।
10ख. कतिपय दशाओं में दंत-चिकित्सा अर्हताओं की अमान्यता-(1) जहां कोई प्राधिकरण या संस्था, धारा 10क के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना कोई मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने के लिए स्थापित की जाती है वहां ऐसे प्राधिकरण या संस्था के किसी छात्र को प्रदान की गई कोई भी दंत-चिकित्सा अर्हता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता नहीं होगी ।
(2) जहां मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने वाला कोई प्राधिकरण या संस्था, धारा 10क के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना कोई नया या उच्चतर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण (जिसके अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण है) आरंभ करती है वहां ऐसे पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण के आधार पर ऐसे प्राधिकरण या संस्था के किसी छात्र को प्रदान की गई कोई भी दंत-चिकित्सा अर्हता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता नहीं होगी ।
(3) जहां मान्यताप्रापत दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने वाला कोई प्राधिकरण या संस्था, धारा 10क के उपबन्धों के अनुसार केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना किसी पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण में (जिसके अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण है) अपनी प्रवेश क्षमता में वृद्धि करती है वहां अपनी प्रवेश क्षमता में वृद्धि के आधार पर ऐसे प्राधिकरण या संस्था के किसी छात्र को प्रदान की गई कोई भी दंत-चिकित्सा अर्हता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता नहीं होगी ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसे छात्र का, जिसे प्रवेश क्षमता में ऐसी वृद्धि के आधार पर कोई दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान की गई है, पता लगाने के लिए मानदंड वह होगा, जो विहित किया जाए ।
10ग. कतिपय विद्यमान प्राधिकरणों के लिए अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए समय-(1) यदि 1 जून, 1992 के पश्चात् और दंत-चिकित्सक (संशोधन) अधिनियम, 1993 के प्रारम्भ को और उसके पूर्व, किसी व्यक्ति ने मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने के लिए कोई प्राधिकरण या संस्था स्थापित की है अथवा मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने वाले किसी प्राधिकरण या संस्था ने कोई नया या उच्चतर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण (जिसके अंतर्गत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण है) आरंभ किया है, अथवा अपनी प्रवेश क्षमता में वृद्धि की है तो, यथास्थिति, ऐसा व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था, दंत-चिकित्सक (संशोधन) अधिनियम, 1993 के प्रारम्भ से एक वर्ष की अवधि के भीतर धारा 10क के उपबन्धों के अनुसार केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा प्राप्त करेगी ।
(2) यदि, यथास्थिति, कोई व्यक्ति या मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान करने वाला कोई प्राधिकरण या संस्था, उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञा प्राप्त करने में असफल रहती है तो धारा 10ख के उपबंध, जहां तक हो सके, ऐसे लागू होंगे मानो धारा 10क के अधीन केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा नामंजूर कर दी गई है ।]
[10घ. स्नातकपूर्ण और स्नातकोत्तर स्तर के लिए एक समान प्रवेश परीक्षा स्नातकपूर्व स्तर और स्नातकोत्तर स्तर के लिए सभी दन्त-चिकित्सा शैक्षिक संस्थाओं के लिए ऐसे अभिहित प्राधिकरण के माध्यम से हिन्दी, अंग्रेजी और ऐसी अन्य भाषाओं में तथा ऐसी रीति में, जो विहित की जाएं, एक एकसमान प्रवेश परीक्षा संचालित की जाएगी तथा अभिहित प्राधिकरण पूर्वोक्त रीति में एकसमान प्रवेश परीक्षा के संचालन को सुनिश्चित करेगा :
परंतु किसी न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश के होते हुए भी, इस धारा के उपबंध, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसार शैक्षिक वर्ष 2016-17 के लिए संचालित स्नातकपूर्व स्तर पर किसी एकसमान प्रवेश परीक्षा के संबंध में राज्य सरकार के स्थानों के बारे में (चाहे सरकारी दन्त-चिकित्सा महाविद्यालय में हों या प्राइवेट दन्त-चिकित्सा महाविद्यालय में हों), जहां ऐसे राज्य ने ऐसी परीक्षा के लिए विकल्प नहीं दिया है, लागू नहीं होंगे ।
11. दंत स्वास्थ्य-विज्ञानियों की अर्हताएं-किसी [राज्य] *** का कोई प्राधिकरण जो दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानियों के लिए कोई अर्हता प्रदान करता है, ऐसा अर्हता को मान्यता दिए जाने के लिए परिषद् को आवेदन कर सकेगा और परिषद् ऐसी जांच के पश्चात्, यदि कोई हो, जो वह उचित समझे और उस राज्य की सरकार और [राज्य] परिषद् से, जिसके क्षेत्र में आवेदन करने वाला प्राधिकरण स्थित है, परामर्श करने के पश्चात् यह घोषणा कर सकेगी कि ऐसी अर्हता या केवल ऐसी ही अर्हता जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् प्रदान की गई हो, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त दन्त स्वास्थ्य-विज्ञान सम्बन्धी अर्हता होगी ।
12. दंत यांत्रिकों की अर्हताएं-परिषद् ऐसी शिक्षुता या प्रशिक्षण की अवधि और प्रकार जिसे किसी व्यक्ति द्वारा पूरी की जानी होगी और ऐसी अन्य शर्तें भी विहित कर सकेगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन दन्त यांत्रिक के रूप में रजिस्ट्रीकृत होने के लिए हकदार होने से पहले पूरी करनी होगी ।
13. मान्यता का प्रभाव-किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी किन्तु इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए-
(क) कोई मान्यताप्राप्त दन्त या दन्त स्वास्थ्य-विज्ञान सम्बन्धी अर्हता किसी 2[राज्य] के समुचित रजिस्टर में नामांकन के लिए पर्याप्त अर्हता होगी;
(ख) कोई व्यक्ति, इस अधिनियम के अधीन प्रथम रजिस्टर तैयार किए जाने के पश्चात् किसी रजिस्टर में दन्त-चिकित्सक या दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानी के रूप में नामांकित किए जाने का हकदार तब तक नहीं होगा जब तक उसके पास मान्यताप्राप्त दन्त या दन्त स्वास्थ्य विज्ञान संबंधी अर्हता न हो या जब तक दन्त यांत्रिक के रूप में उसने धारा 12 में निर्दिष्ट अपेक्षाओं को पूरा करने वाला प्रशिक्षण प्राप्त न कर लिया हो ।
14. पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण तथा परीक्षाओं के सम्बन्ध में जानकारी की अपेक्षा करने की शक्ति- [राज्य] *** का प्रत्येक ऐसा प्राधिकरण जो कोई मान्यताप्राप्त दन्त या दन्त स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी अर्हता प्रदान करता है, पाठ्यक्रमों के बारे में तथा दिए जाने वाले प्रशिक्षण और उक्त अर्हता प्राप्त करने के लिए, ली जाने वाली परीक्षा के बारे मे, उस आयु के बारे में जिसमें उक्त पाठ्यक्रम पूरे किए जाने हैं और परीक्षा दी जानी है और साधारणतया ऐसी अर्हता को प्राप्त करने की अध्यपेक्षाओं के बारे में, ऐसी जानकारी देगा जिसकी परिषद् समय-समय पर अपेक्षा करे ।
15. निरीक्षण-(1) कार्यकारिणी समिति, [परिषद् द्वारा बनाए विनियमों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, उतने निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकेगी] जितने वह [राज्यों] 2*** में मान्यताप्राप्त दन्त या दन्त स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी अर्हताएं प्रदान करने वाले प्राधिकरणों द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में उपस्थित रहने के लिए और किसी ऐसी संस्था का निरीक्षण करने के लिए जिसे प्रशिक्षण संस्था के रूप में मान्यता दी गई है, आवश्यक समझे ।
(2) इस धारा के अधीन नियुक्त निरीक्षक किसी भी पाठ्यक्रम की परीक्षा में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, किन्तु वे ऐसी प्रत्येक परीक्षा की पर्याप्तता के बारे में जिसमें वे उपस्थित होते हैं और प्रत्येक ऐसे पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण संस्थान के बारे में जिनका वे निरीक्षण करते हैं, कार्यकारिणी समिति को रिपोर्ट करेंगे, तथा किसी ऐसे विषय के बारे में, जिसके बारे में, कार्यकारिणी समिति उनसे रिपोर्ट देने की अपेक्षा करे, कार्यकारिणी समिति को रिपोर्ट करेंगे ।
(3) कार्यकारिणी समिति ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति संबद्ध प्राधिकरण या संस्था को भेजेगी और एक प्रति प्राधिकरण या संस्था की टिप्पणियों सहित, यदि कोई हों, केन्द्रीय सरकार को और उस 1[राज्य] की सरकार को भी भेजेगी जिसके क्षेत्र में वह प्राधिकरण या संस्था स्थित है ।
[15क. परिदर्शकों की नियुक्ति-(1) परिषद्, राज्य में मान्यताप्राप्त दन्त-अर्हताएं प्रदान करने वाले किसी प्राधिकरण या संस्था द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में उपस्थित रहने के लिए और मान्यताप्राप्त दन्त अर्हता के लिए प्रशिक्षण देने वाली किसी संस्था का निरीक्षण करने के लिए उतनी संख्या में परिदर्शक नियुक्त कर सकेगी जितनी वह आवश्यक समझे ।
(2) कोई भी व्यक्ति चाहे वह परिषद् का सदस्य हो या नहीं, इस धारा के अधीन परिदर्शक नियुक्त किया जा सकेगा, किन्तु ऐसा कोई व्यक्ति जो धारा 15 के अधीन किसी निरीक्षण या परीक्षा के लिए निरीक्षक नियुक्त किया जाता है तो उसे उसी निरीक्षण या परीक्षा के लिए परिदर्शक नियुक्त नहीं किया जाएगा ।
(3) परिदर्शक, किसी परीक्षा के पाठ्यक्रम में हस्तक्षेप नहीं करेगा किन्तु वह परिषद् के सभापति को प्रत्येक उस परीक्षा की और पाठ्यक्रमों की, जिसमें वह उपस्थित रहा है और प्रत्येक उस संस्था के प्रशिक्षण की जिसका वह निरीक्षण करता है, पर्याप्तता के बारे में और दंत शिक्षा के मानकों की पर्याप्तता के बारे में जिसमें कर्मचारिवृन्द, उपस्कर, वास-सुविधा और दंत शिक्षा देने के लिए विहित अन्य सुविधाएं भी सम्मिलित हैं, और किन्हीं अन्य ऐसे विषयों पर जिनके संबंध में रिपोर्ट दिए जाने की परिषद् उससे अपेक्षा करे, रिपोर्ट देगा ।
(4) परिदर्शक की रिपोर्ट, तब तक गोपनीय रखी जाएगी जब तक कि किसी विशिष्ट मामले में परिषद् का सभापति अन्यथा निदेश न दे:
परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार किसी परिदर्शक की रिपोर्ट की प्रति की अपेक्षा करे, तो परिषद् उसे उसकी प्रति देगी ।]
16. मान्यता का वापस लिया जाना-(1) जहां कार्यकारिणी समिति की रिपोर्ट पर परिषद् को यह प्रतीत होता है कि-
(क) किसी 1[राज्य] 2*** में किसी प्राधिकरण द्वारा मान्यता प्राप्त *** दंत स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी अर्हता प्राप्त करने के लिए कोई पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण या पूरी की जाने वाली परीक्षाओं का या ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश पाने की शर्तें या ऐसी परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों से अपेक्षित दक्षता के मानक, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुरूप नहीं हैं या उनके द्वारा अपेक्षित मानकों से कम हैं, या
(ख) संस्था परिषद् की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करती है,
वहां परिषद्, उस [राज्य] की सरकार को जिसमें वह प्राधिकरण या संस्था स्थित है, ऐसे प्रभाव का विवरण भेजा सकेगी और 1[राज्य] सरकार उसे ऐसी टिप्पणियों सहित सूचना, जैसी वह ठीक समझे, संबद्ध प्राधिकरण या संस्था को, वह अवधि सूचित करते हुए भेजेगी, जिसके भीतर प्राधिकरण या संस्था अपना स्पष्टीकरण 1[राज्य] सरकार को दे ।
(2) स्पष्टीकरण की प्राप्ति पर या जहां नियत अवधि के भीतर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है वहां उस अवधि की समाप्ति पर, 1[राज्य] सरकार, 1[राज्य] परिषद् से परामर्श करके अपनी और राज्य परिषद् की सिफारिशों को यदि कोई हों, परिषद् को भेजेगी ।
(3) परिषद्, 1[राज्य] सरकार और 1[राज्य] परिषद् की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात् और ऐसी अतिरिक्त जांच के, यदि कोई हो, पश्चात्, जिसे वह ठीक समझे, यह घोषणा कर सकेगी कि प्राधिकरण या संस्था द्वारा प्रदान की गई अर्हता केवल उस दशा में मान्यता प्राप्त *** दंत स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी अर्हता होगी जिसमें वह विनिर्दिष्ट तारीख से पहले प्रदान की गई हो ।
(4) परिषद्, यह घोषणा कर सकेगी कि [राज्यों] *** से बाहर प्रदान की गई कोई मान्यताप्राप्त 2*** दंत स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी अर्हता उस रूप में केवल तभी मान्यताप्राप्त समझी जाएगी यदि उसे किसी विनिर्दिष्ट तारीख से पहले प्रदान किया गया हो ।
[16क. मान्यताप्राप्त दंत अर्हता की मान्यता का वापस लिया जाना-(1) जब परिषद् को, कार्यकारिणी समिति या परिदर्शक की रिपोर्ट पर यह प्रतीत होता है कि-
(क) किसी राज्य में किसी प्राधिकरण या संस्था से मान्यताप्राप्त दंत अर्हता प्राप्त करने के लिए कोई पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण या पूरी की जाने वाली परीक्षाओं का या ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश पाने की शर्त या ऐसी परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों से अपेक्षित दक्षता के मानक, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुरूप नहीं हैं या उनके द्वारा अपेक्षित मानकों से कम हैं, या
(ख) जब कोई संस्था कर्मचारिवृन्द, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के मामलों में, परिषद् की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करती है,
तब परिषद् उस प्रभाव का एक विवरण केन्द्रीय सरकार को भेजेगी ।
(2) ऐसे विवरण पर विचार करने के पश्चात्, केन्द्रीय सरकार उसे उस राज्य सरकार को भेज सकेगी जिसमें प्राधिकरण अपनी शक्ति का प्रयोग करता है या जहा संस्था स्थित है, और राज्य सरकार इसे ऐसी टिप्पणियों सहित, जैसी वह ठीक समझे, संबद्ध प्राधिकरण या संस्था को ऐसी अवधि सूचित करते हुए भेजेगी जिसके भीतर प्राधिकरण या संस्था अपना स्पष्टीकरण राज्य सरकार को प्रस्तुत कर सके ।
(3) स्पष्टीकरण पर विचार करने के पश्चात् या जहां नियत अवधि के भीतर कोई स्पष्टीकरण नहीं किया जाता है वहां उस अवधि की समाप्ति पर राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार से अपनी सिफारिश करेगी ।
(4) केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात्, और ऐसी अतिरिक्त जांच, यदि कोई हो, करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि अनुसूची के भाग 1 में किसी प्राधिकरण या संस्था द्वारा दी जाने वाली अर्हता के सामने यह घोषित करते हुए प्रविष्टि की जाए कि उक्त अर्हता केवल तभी मान्यताप्राप्त दंत अर्हता होगी जब वह किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व प्रदान की गई हो या यदि किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध विनिर्दिष्ट महाविद्यालय या संस्था के विद्यार्थियों को प्रदान की गई उक्त मान्यताप्राप्त दंत अर्हता केवल तभी मान्यताप्राप्त दंत अर्हता होगी जब वह किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व दी गई हो या, यथास्थिति, उक्त मान्यताप्राप्त दंत अर्हता किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध विनिर्दिष्ट महाविद्यालय या संस्था के बारे में केवल तभी मान्यताप्राप्त दंत अर्हता होगी जब वह किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् प्रदान की गई हो ।]
17. घोषणाओं का ढंग- *** धारा 11 या धारा 16 के अधीन सभी घोषणाएं परिषद् के किसी अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा की जाएंगी और तुरन्त राजपत्र में प्रकाशित की जाएंगी ।
[17क. वृत्तिक आचरण-(1) परिषद् दंत-चिकित्सकों के लिए वृत्तिक आचरण के मानक तथा शिष्टाचार के स्तर और आचार संहिता विहित कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन परिषद् द्वारा बनाए गए विनियमों में यह विनिर्दिष्ट किया जा सकेगा कि उसका उल्लंघन वृत्तिक दृष्टि से कुत्सित आचरण अर्थात् वृत्तिक अवचार गठित करेगा और उस समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, ऐसा उपबन्ध प्रभावी होगा ।]
18. भारतीय रजिस्टर-(1) परिषद्, दंत-चिकित्सकों का एक रजिस्टर रखेगी जो भारतीय दंत-चिकित्सक रजिस्टर के नाम से ज्ञात होगा और उसमें दंत-चिकित्सकों के सभी [राज्य] रजिस्टरों में की गई प्रविष्टियां होंगी ।
(2) प्रत्येक वर्ष अप्रैल के प्रथम दिन के पश्चात् प्रत्येक 1[राज्य] परिषद्, परिषद् को राज्य रजिस्टरों की बीस मुद्रित प्रतियां यथाशाक्य शीघ्र देगी और प्रत्येक रजिस्ट्रार, 1[राज्य] रजिस्टर में किए गए सभी परिवर्तनों और अन्य संशोधनों को परिषद् को अविलम्ब सूचित करेगा ।
19. जानकारी का दिया जाना-(1) परिषद्, केन्द्रीय सरकार को अपने कार्यवृत्तों और कार्यकारिणी समिति के कार्यवृत्तों की प्रतियां और अपने क्रियाकलापों की वार्षिक रिपोर्ट अपने लेखाओं की संक्षिप्ति सहित प्रस्तुत करेगी ।
(2) केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन उसे दी गई किसी रिपोर्ट, प्रति या संक्षिप्ति को ऐसी रीति से प्रकाशित कर सकेगी जैसी वह ठीक समझे ।
20. विनियम बनाने की शक्ति-(1) परिषद् इस अध्याय के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से, ऐसे विनियम [राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,] बना सकेगी जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्:
(क) परिषद् की सम्पत्ति का प्रबन्ध करना ***;
(ख) वह रीति विहित करना जिससे इस अध्याय के अधीन निर्वाचन किए जाएंगे;
(ग) परिषद् और कार्यकारिणी समिति के अधिवेशनों का बुलाया जाना और उनका आयोजन, वह समय जब और वह स्थान जहां ऐसे अधिवेशन किए जाएंगे, अधिवेशनों के कारबार के संचालन और गणपूर्ति के लिए आवश्यक सदस्य संख्या के लिए उपबन्ध करना;
(घ) कार्यकारिणी समिति के कृत्य विहित करना;
(ङ) सभापति और उपसभापति की शक्तियां और उनके कर्तव्य विहित करना;
(च) परिषद् के सचिव [और अन्य अधिकारियों और सेवकों तथा परिषद् द्वारा नियुक्त, निरीक्षकों और परिदर्शकों] की पदावधि और शक्तियां और कर्तव्य विहित करना;
[(चक) धारा 10क की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन स्कीम का प्ररूप, ऐसी स्कीम में दी जाने वाली विशिष्टियां, वह रीति जिससे स्कीम प्रस्तुत की जानी है और स्कीम के साथ संदेय फीस विहित करना;
(चख) धारा 10क की उपधारा (7) के खंड (छ) के अधीन कोई अन्य बात विहित करना;
(चग) किसी ऐसे छात्र का पता लगाने के लिए मानदंड विहित करना जिसे धारा 10ख की उपधारा (3) के स्पष्टीकरण में निर्दिष्ट कोई दंत-चिकित्सा अर्हता प्रदान की गई है ।];
(छ) दंत-चिकित्सकों और दंत स्वास्थ्य-विज्ञानियों के प्रशिक्षण के लिए मानक-पाठ्यक्रम और ऐसे प्रशिक्षण के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए शर्तें विहित करना;
(ज) इस अधिनियम के अधीन परीक्षाओं के मानक और अर्हताओं के लिए मान्यताप्राप्त करने के लिए पूरी की जाने वाली अन्य अपेक्षाएं विहित करना;
[(जक) अभिहित प्राधिकरण, अन्य भाषाएं और स्नातकपूर्व स्तर और स्नातकोत्तर स्तर पर सभी दन्त-चिकित्सा शैक्षिक संस्थाओं में एकसमान प्रवेश परीक्षा संचालित करने की रीति;]
(झ) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या विहित किया जाए:
परन्तु खंड (च) और (ज) के अधीन विनियम 1[राज्य] सरकारों से परामार्श के पश्चात् बनाए जाएंगे ।
(3) परिषद् को प्रथम बार गठित करने के लिए, केन्द्रीय सरकार, परिषद् के निर्वाचनों के लिए विनियम बना सकेगी और इस प्रकार बनाया गया कोई विनियम परिषद् द्वारा इस धारा के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए परिवर्तित और विखंडित किया जा सकेगा ।
[(4) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । वह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक अनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने में उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
अध्याय 3
[राज्य] दंत-परिषद्
21. राज्य परिषदों का गठन और उनकी संरचना-उस दशा के सिवाय जिसमें धारा 22 के अधीन किए गए करार के अनुसार संयुक्त 2[राज्य] परिषद् का गठन किया है, 2[राज्य] सरकार, एक परिषद् का गठन करेगी जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्: -
(क) 2[राज्य] रजिस्टर के भाग क में रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सकों द्वारा अपने में निर्वाचित चार सदस्य;
(ख) 2[राज्य] रजिस्टर के भाग ख में रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सकों द्वारा अपने में निर्वाचित चार सदस्य;
[(ग) राज्य के दंत महाविद्यालयों के प्रधान, यदि कोई हों, जो विद्यार्थियों को ऐसी मान्यताप्राप्त दंत अर्हताओं में से किसी का जो अनुसूची के भाग 1 में सम्मिलित है, प्रशिक्षण देते हैं, पदेन;] ***
(घ) यथास्थिति, [राज्य] की चिकित्सा परिषद् या चिकित्सा रजिस्ट्रीकरण परिषद् के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित एक सदस्य; 4***
(ङ) 2[राज्य] सरकार द्वारा नामनिर्देशित तीन सदस्य; [और]
6[(च) राज्य का मुख्य चिकित्सक अधिकारी, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, पदेन:]
[परन्तु सौराष्ट्र राज्य में, [जैसा कि वह 1 नवम्बर, 1956 के पूर्व विद्यमान था], 1949 के सौराष्ट्र आर्डिनेन्स 40 द्वारा यथा संशोधित 1948 का सौराष्ट्र आर्डिनेन्स 25 के अधीन गठित राज्य दंत-परिषद् इस अधिनियम के अधीन गठित राज्य परिषद् समझी जाएगी ।]
22. अंतरराज्यिक करार-(1) दो या अधिक 2[राज्य] सरकारें निम्नलिखित के लिए उपबंध करने के लिए ऐसा करार कर सकती हैं, जो ऐसी अवधि के लिए प्रवर्तन में रहे और जिसका ऐसी अतिरिक्त अवधियों के लिए, यदि कोई हों, नवीकरण किया जा सके जो करार में विनिर्दिष्ट की जाएं, अर्थात्:
(क) भाग लेने वाले सभी [राज्यों] के लिए संयुक्त 2[राज्य] परिषद् के गठन के लिए; या
(ख) एक 2[राज्य] की 2[राज्य] परिषद् का, भाग लेने वाले दूसरे 9[राज्यों] की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ।
(2) ऐसे विषयों के अतिरिक्त जो इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट हैं, इस धारा के अधीन कोई करार
(क) 2[राज्य]परिषद् या संयुक्त 2[राज्य] परिषद् के संबंध में भाग लेने वाले दूसरे 9[राज्यों] के बीच व्यय प्रभाजनों के लिए उपबन्ध कर सकेगा;
(ख) यह अवधारित कर सकेगा कि भाग लेने वाली 2[राज्य] सरकारों में से कौन सी 8[राज्य] सरकार इस अधिनियम के अधीन अधिक से अधिक कृत्यों का प्रयोग करेगी और इस अधिनियम में 2[राज्य] सरकार के प्रति निर्देशों का अर्थ तद्नुसार लगाया जाएगा;
(ग) भाग लेने वाली [राज्य] सरकारों के बीच या तो सामान्यतया या इस अधिनियम के अधीन उत्पन्न होने वाले विशिष्ट विषयों के संदर्भ में परामर्श के लिए उपबंध कर सकेगा;
(घ) ऐसे आनुषंगिक और प्रासंगिक उपबंध कर सकेगा जो करार को प्रभावी करने के लिए आवश्यक या समीचीन समझे जाएं और जो इस अधिनियम से असंगत न हों ।
(3) इस धारा के अधीन किया गया करार भाग लेने वाले [राज्यों] के राजपत्रों में प्रकाशित किया जाएगा ।
23. संयुक्त राज्य परिषदों की संरचना-संयुक्त 1[राज्य] परिषद् निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात्:
(क) भाग लेने वाले 2[राज्यों] में से प्रत्येक राज्य के रजिस्टर के भाग क में रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सकों द्वारा अपने में से निर्वाचित दो सदस्य;
(ख) भाग लेने वाले 2[राज्यों] में से प्रत्येक राज्य के रजिस्टर के भाग ख में रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सकों द्वारा अपने में से निर्वाचित दो सदस्य;
[(ग) सभी भाग लेने वाले राज्यों में, उन दन्त महाविद्यालयों के, यदि कोई हों, प्रधान जो विद्यार्थियों को ऐसी मान्यताप्राप्त दंत अर्हताओं में से किसी के लिए, जो अनुसूची के भाग 1 में सम्मिलित हैं, प्रशिक्षण देते हैं, पदेन;]
(घ) यथास्थिति, प्रत्येक भाग लेने वाले [राज्य] की चिकित्सा परिषद् या चिकित्सक रजिस्ट्रीकरण परिषद् के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित एक सदस्य ;
(ङ) प्रत्येक भाग लेने वाली 1[राज्य] सरकार द्वारा नामनिर्देशित दो सदस्य ;
[(च) प्रत्येक भाग लेने वाले राज्य का मुख्य चिकित्सक अधिकारी चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, पदेन ।]
24. राज्य परिषदों का निगमन-प्रत्येक 1[राज्य] परिषद् शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाली ऐसे नाम से निगमित एक निकाय होगी जिसे 1[राज्य] सरकार राजपत्र में अधिसूचित करे या संयुक्त राज्य परिषद् की दशा में, जिसे करार में अवधारित किया जाए, जंगम और स्थावर, दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन और धारण करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगी और उसके विरुद्ध वाद लाया जाएगा ।
25. राज्य परिषद् के सभापति और उप-सभापति-(1) राज्य परिषद् के सभापति और उपसभापति 1[राज्य] परिषद् के सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित किए जाएंगे :
परन्तु राज्य परिषद् के प्रथम गठन से पांच वर्ष के लिए सभापति, यदि 1[राज्य] सरकार ऐसा विनिश्चय करती है, तो 1[राज्य] सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट ऐसा व्यक्ति होगा जो 1[राज्य] सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और जहां वह पहले से ही सदस्य नहीं है वहां, यथास्थिति, धारा 21 या धारा 23 में निर्दिष्ट सदस्यों के अतिरिक्त 1[राज्य] परिषद् का सदस्य होगा ।
(2) सभापति या उपसभापति इस रूप में अपना पद, पांच वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए, और उस अवधि से परे की अवधि के लिए नहीं जिसकी 1[राज्य] परिषद् के सदस्य के रूप में उसकी अवधि समाप्त होती है, धारण करेगा, किन्तु राज्य परिषद् का सदस्य बने रहने पर वह पुनर्निर्वाचन का पात्र होगा ।
26. निर्वाचनों का ढंग-इस अध्याय के अधीन निर्वाचन विहित रीति से किए जाएंगे और यदि ऐसे किसी निर्वाचन के बारे में कोई विवाद उठता है तो वह 1[राज्य] सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा जिसका विनिश्चय अन्तिम होगा ।
27. पदावधि और आकस्मिक रिक्तियां-(1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट सदस्य अपने निर्वाचन या नामनिर्देशन की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए या जब तक असका उत्तरवर्ती सम्यक् रूप से निर्वाचित या विनिर्दिष्ट नहीं कर लिया जाता है तब तक के लिए, इनमें से जो भी अवधि लंबी हो, पद धारण किए रहेगा :
[परन्तु धारा 21 के खण्ड (ङ) या धारा 23 के खण्ड (ड) के अधीन नामनिर्दिष्ट कोई सदस्य अपने नामनिर्देशित करने वाले प्राधिकारी के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।]
(2) निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट सदस्य सभापति की संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा किसी भी समय अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे सकता है और तब ऐसे सदस्य का स्थान रिक्त हो जाएगा ।
(3) किसी निर्वाचित या नामनिर्देशित सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपना स्थान रिक्त कर दिया है
(क) यदि वह राज्य परिषद् की राय में पर्याप्त कारणों के बिना उसके क्रमवर्ती तीन साधारण अधिवेशनों में अनुपस्थित रहता है; या
(ख) ऐसे सदस्य की दशा में जिसका नाम किसी [राज्य] के रजिस्टर में सम्मिलित करने के लिए अपेक्षित है, यदि उसका नाम रजिस्टर से निकाल दिया है; या
(ग) यदि वह धारा 21 के खण्ड (घ) या धारा 23 के खण्ड (घ) के अधीन निर्वाचित है, तो यथास्थिति, जब वह चिकित्सा परिषद् या [राज्य] की चिकित्सक रजिस्ट्रीकरण परिषद् का सदस्य नहीं रह जाता है ।
(4) 1[राज्य] परिषद् में आकस्मिक रिक्ति, यथास्थिति, नए निर्वाचन या नामनिर्देशन द्वारा भरी जाएगी और उस रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट व्यक्ति उस अवधि के शेष भाग के लिए ही पद पर रहेगा जिसके लिए वह सदस्य जिसका स्थान वह ग्रहण करता है, निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट किया गया था ।
(5) 1[राज्य] परिषद् के सदस्य पुनर्निर्वाचन या पुनःनामनिर्देशन के पात्र होंगे ।
(6) 1[राज्य] परिषद् द्वारा किया गया कोई कार्य केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि 1[राज्य] परिषद् में कोई रिक्ति थी या उसके गठन में कोई त्रुटी थी ।
28. कर्मचारिवृन्द, पारिश्रमिक और भत्ते-(1) 1[राज्य] परिषद् राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से, -
(क) एक रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकेगी जो 1[राज्य] परिषद् के सचिव के रूप में कार्य करेगा और यदि 1[राज्य] परिषद् ऐसा विनिश्चय करे तो वह कोषपाल के रूप में भी कार्य करेगा;
(ख) ऐसे अन्य अधिकारियों और सेवकों की नियुक्ति कर सकेगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का पालन करने के लिए 1[राज्य] परिषद् अपेक्षा करे;
(ग) रजिस्ट्रार या किसी अन्य अधिकारी या सेवक से उसके कर्तव्यों का सम्यक् रूप से पालन किए जाने के लिए ऐसी प्रतिभूति की अपेक्षा कर सकेगी और उससे ले सकेगी जो 1[राज्य] परिषद् आवश्यक समझे;
(घ) रजिस्ट्रार और 1[राज्य] परिषद् के अन्य अधिकारियों और सेवकों के वेतन और भत्ते और उनकी सेवा की अन्य शर्तें नियत कर सकेगी;
(ङ) 1[राज्य] परिषद् के सदस्यों की संदेय भत्ते की दरें नियत कर सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (क) में किसी बात के होते हुए भी, राज्य परिषद् के प्रथम गठन से पहले चार वर्ष तक के लिए 1[राज्य] परिषद् का रजिस्ट्रार, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति होगा जो राज्य सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा ।
29. कार्यकारिणी समिति-(1) 1[राज्य] परिषद् अपने सदस्यों में से एक कार्यकारिणी समिति का गठन करेगी । इसमें सभापति और उपसभापति, पदेन [और सम्बद्ध राज्य या राज्यों का मुख्य चिकित्सक अधिकारी, चाहे वह किसी नाम से ज्ञात हो, पदेन] होंगे तथा राज्य परिषद् द्वारा अपने में से निर्वाचित उतने अन्य सदस्य होंगे, जितने विहित किए जाएं ।
(2) 1[राज्य] परिषद् के सभापति और उपसभापति कार्यकारिणी समिति के क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होंगे ।
(3) कार्यकारिणी समिति का कोई सदस्य इस रूप में अपने पद पर तब तक बना रहेगा जब तक राज्य परिषद् के सदस्य के रूप में उसकी पदावधि समाप्त नहीं हो जाती, किन्तु 1[राज्य] परिषद् का सदस्य बने रहने पर, वह पुनर्निर्वाचन का पात्र होगा ।
(4) कार्यकारिणी समिति ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगी जो विहित किए जाएं ।
30. जानकारी का दिया जाना-(1)) 1[राज्य] परिषद् ऐसी रिपोर्ट, अपने कार्यवृत्त की प्रतियां तथा कार्यकारिणी समिति के कार्यवृत्त तथा अपने लेखाओं की संक्षिप्तियां जिनकी 1[राज्य] सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे, 1[राज्य] सरकार को देगी और 1[राज्य] सरकार द्वारा इस प्रकार प्राप्त की गई सभी सामग्री की प्रतियां, परिषद् को भेजी जाएंगी ।
(2) ) 1[राज्य] सरकार इस धारा के अधीन उसे दी गई किसी रिपोर्ट, प्रतिलिपि या संक्षिप्ति को, ऐसी रीति से प्रकाशित कर सकेगी, जैसी वह ठीक समझे ।
अध्याय 4
रजिस्ट्रीकरण
31. रजिस्टर का तैयार किया जाना और रखा जाना-1[राज्य] सरकार, यथाशक्यशीघ्र 1[राज्य]के दंत-चिकित्सकों का एक रजिस्टर इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से तैयार कराएगी ।
(2) 1[राज्य] परिषद् अपने गठन के पश्चात् इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार रजिस्टर बनाए रखने की जिम्मेदारी लेगी ।
(3) दंत चिकित्सकों का रजिस्टर दो भागों में रखा जाएगा अर्थात् भाग क और भाग ख । मान्यताप्राप्त दंत अर्हताएं रखने वाले व्यक्ति भाग क में रजिस्ट्रीकृत होंगे और ऐसी अर्हताएं न रखने वाले व्यक्ति भाग ख में रजिस्ट्रीकृत होंगे ।
(4) रजिस्टर में निम्नलिखित विशिष्टियां होंगी, अर्थात्: -
(क) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति का पूरा नाम, उसकी राष्ट्रिकता और उसके निवास का पता ;
(ख) रजिस्टर में उसके प्रथम प्रवेश की तारीख;
(ग) रजिस्ट्रीकरण के लिए उसकी अर्हता और वह तारीख जिसको उसने दंत-चिकित्सा में उपाधि या डिप्लोमा, यदि कोई हो, प्राप्त किया तथा वह प्राधिकारी जिसने उसे प्रदान किया था;
(घ) उसका वृत्तिक पता; और
(ङ) ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं ।
32. रजिस्टर का प्रथम बार तैयार किया जाना-(1) दंत-चिकित्सकों के प्रथम रजिस्टर तैयार करने के प्रयोजन के लिए, 1[राज्य] सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा एक रजिस्ट्रीकृत अधिकरण का गठन करेगी जिसमें तीन व्यक्ति होंगे और एक रजिस्ट्रार को भी नियुक्त करेगी जो अधिकरण के सचिव के रूप में कार्य करेगा ।
(2) 1[राज्य] सरकार उसी या उसी प्रकार की किसी अधिसूचना द्वारा ऐसी तारीख नियत करेगी जिसको या उसके पूर्व रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन, विहित फीस सहित, रजिस्ट्रीकरण अधिकरण को किए जाएंगे ।
(3) रजिस्ट्रीकरण अधिकरण नियत तारीख को या उसके पूर्व प्राप्त प्रत्येक आवेदन की परीक्षा करेगा और यदि उसका सामाधन हो जाता है कि आवेदक धारा 33 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए अर्हित है, तो वह यह निदेश देगा कि आवेदक का नाम रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाए ।
(4) इस प्रकार तैयार किया गया रजिस्टर तत्पश्चात् ऐसी रीति से प्रकाशित किया जाएगा जैसी 1[राज्य] सरकार निदेश दे और इस प्रकार प्रकाशित रजिस्टर में रजिस्ट्रीकरण अधिकरण के किसी अभिव्यक्त या विवक्षित विनिश्चय से व्यथित कोई व्यक्ति, [राज्य] सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त प्राधिकारी को, ऐसे प्रकाशन की तारीख से तीस दिन के भीतर, अपील कर सकेगा ।
(5) रजिस्ट्रार उपधारा (4) के अधीन नियुक्त प्राधिकारी के विनिश्चयों के अनुसार रजिस्टर में संशोधन करेगा और तब ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को, जिसका नाम उस रजिस्टर में दर्ज है, विहित प्ररूप में एक रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा ।
(6) 1[राज्य] परिषद् के गठन हो जाने पर रजिस्टर उसकी अभिरक्षा में दे दिया जाएगा और 1[राज्य] सरकार यह निदेश दे सकेगी कि प्रथम रजिस्टर में रजिस्ट्रीकरण के लिए प्राप्त समस्त आवेदन-फीस या उसका कोई विनिर्दिष्ट भाग 1[राज्य] परिषद् के नाम जमा किया जाए ।
33. रजिस्टर के प्रथम बार तैयार हो जाने पर उसमें दर्ज कराने के लिए अर्हताएं-(1) कोई भी व्यक्ति, विहित फीस संदाय कर देने पर रजिस्टर में, जब यह प्रथम बार तैयार किया गया हो, अपना नाम दर्ज कराने के लिए तब हकदार होगा जब वह [राज्य] में निवास करता है या दंत-चिकित्सा की वृत्ति करता है और यदि,
(क) उसके पास मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता है, या
(ख) उसके पास ऐसी कोई अर्हता नहीं है, किन्तु वह [भारत का नागरिक] होते हुए, [धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन नियत की गई तारीख से] पूर्व कम से कम पांच वर्ष की अवधि तक अपनी आजीविका के मुख्य साधन के रूप में दंत-चिकित्सक का व्यवसाय करता रहा है ;
परन्तु 3[भारत के नागरिक] से भिन्न कोई व्यक्ति ऐसी अर्हता के आधार पर-
(क) जो अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट है रजिस्ट्रीकरण के लिए तब तक हकदार नही होगा जब तक उस राज्य या देश की विधि और प्रथा द्वारा जिसका वह व्यक्ति हो, भारतीय उद्भव के ऐसे व्यक्तियों को जिनके पास ऐसी दंत-चिकित्सा अर्हताएं हैं जो उस राज्य या देश में रजिस्टर किए जाने योग्य हों और ऐसे राज्य या देश में दंत-चिकित्सा वृत्ति में प्रवेश पाने और व्यवसाय करने के लिए अनुज्ञात न किया गया हो, या
[(ख) जिसे धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन पारिस्पारिकता स्कीम के अनुसरण में मान्यताप्राप्त हो:]
परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति अनुसूची के [भाग 2] में विनिर्दिष्ट अर्हता के आधार पर रजिस्ट्रीकरण के लिए हकदार तभी होगा जब वह [भारत का नागरिक] हो, अन्यथा नहीं :]
[परन्तु यह और कि इस अधिनियम के अधीन दंत-चिकित्सकों के रजिस्टर के प्रथम बार तैयार किए जाने के प्रयोजन के लिए कोई व्यक्ति, कोई रजिस्ट्रीकरण फीस का संदाय किए बिना रजिस्टर के समुचित भाग में अपना नाम दर्ज कराने के लिए हकदार तभी होगा जब वह
(क) सौराष्ट्र राज्य में, [जैसा कि वह 1 नवम्बर, 1956 के पूर्व विद्यमान था,] 1948 के सौराष्ट्र आर्डिनेन्स संख्यांक 40 द्वारा यथा संशोधित 1948 के सौराष्ट्र आर्डिनेस 25 के अधीन रखे गए दंत-चिकित्सा व्यवसायियों के रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति है, या
(ख) ट्रावनकोर कोचीन राज्य में, 5[जैसा कि वह 1 नवम्बर, 1956 के पूर्व विद्यमान था,] ट्रावनकोर मेडिकल प्रैक्टिशनर ऐक्ट, 1119 के अधीन रखे गए दंत-चिकित्सा व्यवसायियों के रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति है, ] [या]
6[(ग) जम्मू-कश्मीर राज्य में, जम्मू एण्ड कश्मीर डेंटिस्ट्स ऐक्ट, 1958 (1958 का जम्मू एण्ड कश्मीर ऐक्ट 9) के अधीन रखे गए दंत-चिकित्सा व्यवसायियों के रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति है । ]
(2) किसी [राज्य] *** में अधिवसित कोई व्यक्ति विहित फीस संदाय कर देने पर [दंत-चिकित्सक के रूप में अस्थायी रजिस्ट्रीकरण के लिए पांच वर्ष की अवधि] के लिए हकदार होगा यदि वह [धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन नियत तारीख] से पूर्व पांच वर्ष की अवधि के दौरान कम से कम दो वर्ष की अवधि के लिए अपनी अजीविका के मुख्य साधन के रूप में दंत-चिकित्सक का व्यवसाय करता रहा है और इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति स्थायी रजिस्ट्रीकरण के लिए हकदार तभी होगा जब वह अपने अस्थायी रजिस्ट्रीकरण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए दंत-चिकित्सक का व्यवसाय करता रहा है ।
34. पश्चात्वर्ती रजिस्ट्रीकरण के लिए अर्हता- [(1)] धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन नियत तारीख के पश्चात् विहित फीस देने पर कोई व्यक्ति अपना नाम दंत-चिकित्सकों के रजिस्टर में दर्ज कराने के लिए हकदार तभी होगा जब वह उस 7[राज्य] में निवास करता है या दंत-चिकित्सक की वृत्ति करता है और यदि-
(i) उसके पास मान्यताप्राप्त दंत-चिकित्सा अर्हता है, या
(ii) उसके पास ऐसी कोई अर्हता नहीं है किन्तु वह 3[भारत का नागरिक] होते हुए [धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन नियत की गई तारीख से पूर्व] कम से कम दो वर्ष की अवधि तक अपनी आजीविका के मुख्य साधन के रूप में दंत-चिकित्सक का व्यवसाय करता रहा है और [उक्त तारीख के पश्चात् दस वर्ष] की अवधि के भीतर उसने ऐसी परीक्षा पास कर ली है जो [केन्द्रीय सरकार] द्वारा इस प्रयोजन के लिए मान्यताप्राप्त है:
परन्तु 3[भारत के नागरिक] से भिन्न कोई व्यक्ति ऐसी अर्हता के आधार पर-
(क) जो अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट है रजिस्ट्रीकरण के लिए तब तक हकदार नहीं होगा जब तक उस राज्य या देश की विधि और प्रथा द्वारा जिसका वह व्यक्ति हो, भारतीय उद्भव के ऐसे व्यक्तियों को जिनके पास ऐसी दंत-चिकित्सा अर्हताएं हैं, जो उस राज्य या देश में रजिस्टर किए जाने योग्य हो और ऐसे राज्य या देश में दंत-चिकित्सा वृत्ति में प्रवेश पाने और व्यवसाय करने के लिए अनुज्ञात न किया गया हो, या
[(ख) जिसे धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन पारस्परिकता स्कीम के अनुसरण में मान्यताप्राप्त हो:]
परन्तु यह और कि रजिस्टर के भाग 'ख' में रजिस्ट्रीकृत कोई व्यक्ति उसके भाग ‘क’ में रजिस्ट्रीकृत होने का हकदार तभी होगा जब वह [भाग 'ख' में उसके रजिस्ट्रीकरण की तारीख के पश्चात् दस वर्ष] की अवधि के भीतर ऐसी परीक्षा पास कर ली है जिसे [केन्द्रीय सरकार] द्वारा इस प्रयोजन के लिए मान्यताप्राप्त है ।
[(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी-
(क) [राज्य परिषद्] दन्त चिकित्सक (संशोधन) अधिनियम, [1955] के प्रारम्भ के ठीक पश्चात् दो वर्ष की अवधि के दौरान किसी ऐसे विस्थापित व्यक्ति को, पर्याप्त कारणों से राज्य रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत किए जाने के लिए अनुज्ञात कर सकेगी, जिसके पास मान्यताप्राप्त दन्त चिकित्सा अर्हता नहीं है किन्तु वह 29 मार्च, 1948 के पूर्व की तारीख से अपनी आजीविका के मुख्य साधन के रूप में दन्त-चिकित्सा की वृत्ति वस्तुतः कर रहा है ।]
स्पष्टीकरण-इस खंड में “विस्थापित व्यक्ति" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो भारत और पाकिस्तान के डेमिनियमों की स्थापना के कारण या ऐसे किसी क्षेत्र में, जो अब पाकिस्तान का भाग है, सिविल उपद्रवों या ऐसे उपद्रवों के डर से 1 मार्च, 1947 को या उसके पश्चात् उस क्षेत्र को छोड़ चुका है या उस क्षेत्र में अपने निवास-स्थान से विस्थापित हो गया है और जो उस समय से भारत में निवास कर रहा है;
[(कक) राज्य परिषद् दन्त चिकित्सक (संशोधन) अधिनियम, 1972 के प्रारम्भ के ठीक पश्चात् दो वर्ष की अवधि के दौरान किसी ऐसे विस्थापित व्यक्ति या संप्रत्यावर्तित को, पर्याप्त कारणों से, राज्य रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत किए जाने के लिए अनुज्ञात कर सकेगी, जिसके पास कोई मान्यताप्राप्त दन्त चिकित्सा अर्हता नहीं है किन्तु वह 29 मार्च, 1948 से पूर्व की तारीख से अपनी आजीविका के मुख्य साधन के रूप में दन्त चिकित्सा की वृत्ति वस्तुतः कर रहा है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड में, -
(i) “विस्थापित व्यक्ति" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो 14 अप्रैल, 1957 के पश्चात्, किन्तु 25 मार्च, 1971 से पूर्व सिविल उपद्रवों या किसी ऐसे क्षेत्र में जो अब बंगला देश का भाग है, ऐसे उपद्रव के डर से ऐसे क्षेत्र में अपने निवास स्थान को छोड़ चुका है या वहां से विस्थापित हो गया है और जो उस समय से भारत में निवास कर रहा है;
(ii) “संप्रत्यावर्तित" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो 14 मार्च, 1957 के पश्चात् सिविल उपद्रवों या किसी ऐसे क्षेत्र में जो अब बर्मा या श्रीलंका का भाग है, ऐसे उपद्रवों के डर से ऐसे क्षेत्र में अपने निवास स्थान को छोड़ चुका है या वहां से विस्थापित हो गया है और उस समय से भारत में निवास कर रहा है;]
(ख) भारत के नागरिक से भिन्न, विख्यात दन्त चिकित्सा अर्हता रखने वाले और विभिन्न राज्यों में से किसी में स्थित किसी दन्त संस्था में अध्यापन या अनुसंधान के लिए नियोजित किसी व्यक्ति को, उसकी नियोजन की अवधि के लिए या पांच वर्ष की अवधि के लिए, इनमें से जो भी लघुतर हो, दन्त चिकित्सकों के राज्य रजिस्टर में अस्थायी रूप से रजिस्ट्रीकृत किए जाने के लिए *** अनुज्ञात किया जा सकेगा:
परन्तु यह तब जब वह व्यक्तिगत अभिलाभ के लिए दन्त चिकित्सा वृत्ति नहीं करता है और रजिस्ट्रीकरण के लिए उसका आवेदन परिषद् के सभापति द्वारा अनुमोदित हो ।
35. रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदनों की संवीक्षा-(1) दन्त चिकित्सकों के प्रथम रजिस्टर में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदनों की प्राप्ति की तारीख नियत किए जाने के पश्चात् रजिस्ट्रीकरण के लिए सभी आवेदन [राज्य] परिषद् के रजिस्ट्रार को संबोधित किए जाएंगे और उसके साथ विहित फीस दी जाएगी ।
(2) यदि ऐसा आवेदन किए जाने के पश्चात् रजिस्ट्रार की यह राय है कि आवेदक रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराने का हकदार है तो वह आवेदक का नाम उसमें दर्ज करेगा:
परन्तु कोई व्यक्ति, जिसका नाम इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी राज्य के रजिस्टर में से हटा दिया गया है, ऐसी [राज्य] परिषद् की अनुमति के बिना जिसके रजिस्टर में से उसका नाम हटाया गया है, रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराने का हकदार नहीं होगा ।
(3) ऐसा व्यक्ति जिसके रजिस्ट्रीकरण का आवेदन रजिस्ट्रार द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाता है, ऐसी अस्वीकृति की तारीख से तीन मास के भीतर, राज्य परिषद् को अपील कर सकेगा और उस पर [राज्य] परिषद् का विनिश्चय अंतिम होगा ।
(4) इस धारा के अधीन रजिस्टर में किसी नाम के दर्ज हो जाने पर रजिस्ट्रार विहित प्ररूप में रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र देगा ।
[35क. दन्त चिकित्सकों के रजिस्टर में संशोधन करने के लिए विशेष उपबंध-(1) इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी रजिस्ट्रार, लिखित आदेश द्वारा रजिस्टर में ऐसे व्यक्ति के नाम को विलोपित करते हुए संशोधन कर सकेगा जो आन्ध्र प्रदेश राज्य बनने के कारण न तो मद्रास राज्य मे निवास करता है और न तो वहां दन्त-चिकित्सा का कारबार या वृत्ति करता है :
परन्तु रजिस्ट्रार ऐसा आदेश पारित करने से पूर्व, ऐसी जांच कर सकेगा जो वह आवश्यक समझे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे प्राधिकारी को और ऐसे समय के भीतर जो मद्रास राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, अपील कर सकेगा और ऐसा अधिकारी अपील पर ऐसा आदेश पारित करेगा जो वह ठीक समझे ।
(3) उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रार का आदेश या जहां उपधारा (2) के अधीन उसके विरुद्ध अपील की गई है वहां अपीली अधिकारी का आदेश अंतिम होगा ।
(4) इस धारा का उपबंध उस तारीख से प्रवृत्त नहीं रहेगा जो मद्रास सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।]
36. दंत स्वास्थ्य-विज्ञानियों और दंत यांत्रिकों का रजिस्टर-(1) 2[राज्य] सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि 2[राज्य] परिषद् दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानियों या दंत यांत्रिकों का एक रजिस्टर रखेगी ।
(2) इस धारा में निर्दिष्ट रजिस्टर में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदनों के संबंध में धारा 35 के उपबंध वहां तक लागू होंगे जहां तक वे लागू किए जा सकें ।
37. दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानियों के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए अर्हता-कोई व्यक्ति विहित फीस संदाय करने पर दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानियों के रजिस्टर में अपना नाम रजिस्टर कराने का हकदार तभी होगा जब वह 1[राज्य] में निवास करता है और मान्यता-प्राप्त दन्त स्वास्थ्य संबंधी अर्हता रखता है :
परन्तु दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानियों के प्रथम रजिस्टर के प्रयोजनों के लिए कोई व्यक्ति रजिस्ट्रीकृत किए जाने के लिए हकदार तभी होगा जब वह धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना की तारीख से पूर्व कम से कम दो वर्ष की अवधि के लिए अपनी जीविका के मुख्य साधन के लिए दन्त स्वास्थ्य-विज्ञान के रूप में कार्य कर रहा है ।
38. दन्त यांत्रिकों के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए अर्हता-कोई व्यक्ति विहित फीस संदाय करने पर दन्त यांत्रिकों के रजिस्टर में अपना नाम रजिस्टर कराने का हकदार तभी होगा जब वह धारा 12 में निर्दिष्ट विहित अपेक्षाओं को पूरा करे :
परन्तु दन्त यांत्रिकों के प्रथम रजिस्टर के बनाने के प्रयोजनों के लिए कोई व्यक्ति रजिस्ट्रीकृत किए जाने के लिए हकदार तभी होगा जब वह धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना की तारीख से पूर्व कम से कम दो वर्ष की अवधि के लिए अपनी जीविका के मुख्य साधन के लिए दन्त यांत्रिक के रूप में कार्य कर रहा है ।
39. नवीकरण फीस-(1) 2[राज्य] सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि उस वर्ष के, जिसमें रजिस्टर में नाम प्रथम बार दर्ज किया गया है ठीक बाद के वर्ष का 31 दिसम्बर के पश्चात् उस रजिस्टर में नाम बनाए रखने के लिए 2[राज्य] परिषद् को प्रति वर्ष उतनी नवीकरण फीस दी जाएगी जितनी प्रत्येक रजिस्टर के संबंध में, विहित की जाए और जहां ऐसा निदेश किया जाता है वहां ऐसी नवीकरण फीस उस वर्ष के जिससे वह सम्बद्ध है प्रथम अप्रैल से पहले संदाय करने के लिए शोध्य हो जाएगी ।
(2) जहां नियत तारीख से पूर्व नवीकरण फीस का संदाय नहीं किया जाता है वहां रजिस्ट्रार व्यतिक्रमी का नाम रजिस्टर से हटा देगा:
परन्तु इस प्रकार हटाया गया नाम ऐसी रीति से संदाय करने पर जो विहित की जाए, रजिस्टर में फिर से दर्ज किया जाएगा ।
[(3) नवीकरण फीस संदाय करने पर, रजिस्ट्रार उसके लिए एक नवीकरण प्रमाणपत्र देगा और ऐसा प्रमाणपत्र रजिस्ट्रीकरण के नवीकरण का सबूत होगा ।]
40. अतिरिक्त अर्हताओं का दर्ज किया जाना-कोई रजिस्ट्रीकृत दन्त चिकित्सक, विहित फीस के संदाय पर, ऐसी किसी अतिरिक्त मान्यताप्राप्त [दन्त] अर्हता को जिसे वह प्राप्त करे, रजिस्टर में दर्ज कराने का हकदार होगा ।
41. रजिस्टर से हटाया जाना-(1) इस धारा के उपबन्धों के अधीन रहते हुए [राज्य] परिषद् किसी व्यक्ति का नाम किसी रजिस्टर में से हटाए जाने के लिए आदेश, उस व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् और ऐसी अतिरिक्त जांच, यदि कोई हो, जिसे वह करना ठीक समझे, करने के पश्चात् दे सकेगी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि-
(i) उसका नाम गलती से या दुर्व्यपदेशन के कारण या किसी तात्त्विक तथ्य को छिपाने के कारण, रजिस्टर में दर्ज किया गया है; या
(ii) वह किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है या किसी वृत्ति सम्बन्धी किसी कुत्सित आचरण का दोषी रहा है [या उसने धारा 17क के अधीन विहित वृत्तिक आचरण और शिष्टाचार के मानकों का या नैतिकता के ऐसे नियमों का अतिक्रमण किया है] जो राज्य परिषद् की राय में उसे रजिस्टर में बनाए रखने के लिए अयोग्य बना दे; [या]
4[(iii) धारा 34 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन अस्थायी रजिस्ट्रीकरण अनुज्ञात किए जाने पर, ऐसे रजिस्ट्रीकरण के पश्चात् भी वह वैयक्तिक लाभ के लिए दन्त चिकित्सा वृत्ति करता हुआ पाया जाता है ।]
(2) उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश में यह निदेश किया जा सकेगा कि जिस व्यक्ति का नाम रजिस्टर में से हटाए जाने के लिए आदेश हुआ है वह या तो स्थायी रूप से या ऐसी अवधि के लिए जो विनिर्दिष्ट की जाए, इस अधिनियम के अधीन उस [राज्य] में रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र नहीं होगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश उसके किए जाने की तारीख से तीन मास की समाप्ति पर ही प्रभावी होगा ।
(4) उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, आदेश के किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर 2[राज्य] सरकार को अपील कर सकेगा और उस अपील पर राज्य सरकार का आदेश अंतिम होगा ।
(5) ऐसा व्यक्ति जिसका नाम इस धारा या धारा 39 की उपधारा (2) के अधीन रजिस्टर से हटा दिया गया है, अपना रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र 3[और नवीकरण प्रमाणपत्र, यदि कोई हो,] तत्काल रजिस्ट्रार को अभ्यर्पित करेगा और इस प्रकार हटाया गया नाम राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा ।
4[(6) ऐसा व्यक्ति जिसका नाम इस धारा या धारा 39 की उपधारा (2) के अधीन राज्य के दन्त रजिस्टर में से हटाया गया है, किसी अन्य राज्य के दन्त चिकित्सकों के रजिस्टर में अपना नाम रजिस्टीकृत कराने का हकदार तभी होगा जब उसे उस राज्य परिषद् का, जिसके रजिस्टर में से उसका नाम हटाया गया है, अनुमोदन प्राप्त हो जाता है, अन्यथा नहीं ।]
42. रजिस्टर में प्रत्यावर्तन-2[राज्य] परिषद्, किसी भी समय, ऐसे कारणों से जो उसे पर्याप्त प्रतीत हों, और 2[राज्य] सरकार के अनुमोदन के अधीन रहते हुए, यह आदेश दे सकेगी कि जिस व्यक्ति का नाम रजिस्टर में से हटा दिया गया है उसका नाम विहित फीस के संदाय पर उसमें प्रत्यावर्तित कर लिया जाए ।
43. अधिकारिता का वर्जन-रजिस्टर में कोई नाम दर्ज करने से इन्कार करने या रजिस्टर में से नाम हटा देने का कोई आदेश किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
44. प्रमाणपत्रों की दूसरी प्रति का जारी किया जाना-जहां रजिस्ट्रार के समाधानप्रद रूप में यह दर्शित किया जाता है कि रजिस्ट्रीकरण का कोई प्रमाणपत्र [या नवीकरण प्रमाणपत्र] खो गया है या नष्ट हो गया है, वहां रजिस्ट्रार विहित फीस के संदाय पर विहित प्ररूप में प्रमाणपत्र की दूसरी प्रति दे सकेगा ।
45. रजिस्टरों का मुद्रण-प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल के बाद यथाशक्य शीघ्र रजिस्टरों की प्रतियां उस रूप में जिसमें वे उक्त तारीख को थे, मुद्रित कराएगा और ऐसी प्रतियां उनके लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों को विहित प्रभार के संदाय किए जाने पर उपलब्ध कराई जाएगी और वे इस बात का साक्ष्य होंगी कि ऐसे व्यक्ति जिनके नाम उनमें दर्ज हैं, उक्त तारीख को, यथास्थिति, रजिस्ट्रीकृत दन्त चिकित्सक, रजिस्ट्रीकृत दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानी या रजिस्ट्रीकृत दन्त यांत्रिक थे ।
46. रजिस्ट्रीकरण का प्रभाव-(1) किसी अन्य विधि में किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति निर्देश के बारे में जो विधि द्वारा दन्त चिकित्सक के रूप में मान्यताप्राप्त है यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत दन्त चिकित्सक के प्रति निर्देश है ।
(2) किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन दन्त चिकित्सक से अपेक्षित कोई प्रमाणपत्र तब तक विधिमान्य नहीं होगा जब तक उस पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत दन्त चिकित्सक न हो ।
(3) [धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन नियत तारीख से] [तीन वर्ष] के अवसान के पश्चात् कोई व्यक्ति जो दन्त चिकित्सकों के [राज्य] रजिस्टर के भाग ‘क’ में रजिस्ट्रीकृत नहीं है ***किसी चिकित्सालय, अस्पताल या अन्य ऐसी संस्था में जो लोक या स्थानीय निधियों द्वारा पूर्णतः या भागतः चलाए जाते हों [केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार] की मंजूरी से ही कोई नियोजन धारण करेगा, अन्यथा नहीं:
परन्तु इस उपधारा के उपबंध ऐसे किसी व्यक्ति को लागू नहीं होंगे जो [उक्त तारीख से ठीक पूर्व] ऐसा नियोजन धारण किए हों ।
(4) किसी राज्य में दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानियों के रजिस्टर के प्रकाशन से दो वर्ष के अवसान के पश्चात् कोई व्यक्ति जिसका नाम उस रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया है, राज्य के किसी चिकित्सालय, अस्पताल या अन्य ऐसी संस्था में, जो लोक या स्थानीय निधियों द्वारा पूर्णतः या भागतः चलाए जाते हों, नियोजन धारण नहीं करेगा ।
(5) यदि कोई व्यक्ति जो किसी राज्य में रजिस्ट्रीकृत दन्त चिकित्सक, रजिस्ट्रीकृत दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानी या रजिस्ट्रीकृत दंत यांत्रिक है, तो वह उसी हैसियत में किसी अन्य [राज्य] में व्यवसाय कर सकता है ।
[46क. रजिस्ट्रीकरण का अन्तरण-जहां कोई व्यक्ति किसी राज्य में रजिस्ट्रीकृत दन्त चिकित्सक है और वह किसी अन्य राज्य में दन्त चिकित्सा का व्यवसाय कर रहा है वहां वह विहित प्ररूप में ऐसी विहित फीस, जो उस अन्य राज्य में नवीकरण फीस से अधिक नहीं होगी, संदाय करने पर परिषद् को उसे राज्य के रजिस्टर में से जिसमें वह रजिस्ट्रीकृत है उस अन्य राज्य के रजिस्टर में जिसमें वह इस समय दन्त चिकित्सा का व्यवसाय कर रहा है अपने नाम को अंतरित करने के लिए आवेदन कर सकेगा और ऐसे आवेदन के प्राप्त हो जाने पर, परिषद् इस अधिनियम में किसी अन्य बात के होते हुए भी निदेश दे सकेगी कि ऐसे व्यक्ति का नाम प्रथम वर्णित रजिस्टर में से हटा दिया जाए और उसे द्वितीय वर्णित राज्य के रजिस्टर में दर्ज कर दिया जाए और संबद्ध राज्य परिषद् ऐसे निदेशों का पालन करेंगी :
परन्तु ऐसे व्यक्ति से इस प्रभाव का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए अपेक्षा की जएगी कि उसने पूर्ववर्ती राज्य में अपने रजिस्ट्रीकरण के संबंध में सभी देयों का संदाय कर दिया है:
परन्तु यह और कि जहां अन्तरण के लिए कोई आवेदन ऐसे दन्त चिकित्सक द्वारा किया जाता है जिसके विरुद्ध कोई अनुशासनिक कार्यवाही लंबित है और किसी अन्य कारण से परिषद् को यह प्रतीत होता है कि अन्तरण के लिए आवेदन सद्भावपूर्वक नहीं किया गया है और अन्तरण नहीं किया जाना चाहिए, वहां परिषद् दन्त चिकित्सक को इस निमित्त अभ्यावेदन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् आवेदन को नामंजूर कर सकेगी ।]
अध्याय 5
प्रकीर्ण
47. रजिस्ट्रीकृत होने का मिथ्या दावा करने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, जिसका नाम उस रजिस्टर में दर्ज नहीं है, मिथ्या रूप से यह दावा करेगा कि उसका नाम इस प्रकार दर्ज है या अपने नाम या पदनाम के संबंध में ऐसे शब्दों या अक्षरों का प्रयोग करेगा जिनसे युक्तियुक्त रूप से यह प्रकट करने के लिए प्रकल्पित है कि उसका नाम इस प्रकार दर्ज है तो वह प्रथम दोषसिद्ध पर जुर्माने से जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, और किसी पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि छह माह तक की हो सकेगी, या एक हजार रुपए से अनधिक के जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
48. पदनामों का दुरुपयोग-यदि कोई व्यक्ति-
(क) दन्त चिकित्सकों के रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति नहीं है, दन्त व्यवसायी, दंत-सर्जन, सर्जन दन्त चिकित्सक या दन्त चिकित्सक पदनाम रखेगा या उन पदनामों का प्रयोग करेगा, या
(ख) जिसका नाम दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानियों के रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत नहीं है उस 7[राज्य] में जिसमें ऐसा रजिस्टर प्रकाशित किया गया है दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानी पदनाम रखेगा या उसका प्रयोग करेगा, या
(ग) जिसका नाम दंत यांत्रिक के रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत नहीं है । उस 7[राज्य] में जिसमें ऐसा रजिस्टर प्रकाशित किया गया है, दन्त यांत्रिक पदनाम रखेगा या उसका प्रयोग करेगा, [या]
2[(घ) जिसके पास मान्यताप्राप्त दन्त अर्हता नहीं है, ऐसी उपाधि या डिप्लोमा या संक्षेपाक्षर का प्रयोग करेगा जिससे दन्त अर्हता प्रकट होती है या विवक्षित हो],
तो वह प्रथम दोषसिद्धि पर जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, और किसी पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर, कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या एक हजार रुपए से अनधिक के जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
49. अरजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों द्वारा व्यवसाय-(1) दन्त चिकित्सकों के मामले मे, [धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन नियत की गई तारीख से] [तीन वर्ष] की समाप्ति के पश्चात् और उन [राज्यों] में जहां धारा 36 के अधीन दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानियों या दन्त यांत्रिकों का रजिस्टर तैयार किया गया है, ऐसी तारीख से जो [राज्य] सरकार, दन्त स्वास्थ्य विज्ञानियों या दंत यांत्रिकों के मामले में राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, रजिस्ट्रीकृत दन्त चिकित्सक, रजिस्ट्रीकृत दन्त स्वास्थ्य-विज्ञानी या रजिस्ट्रीकृत दन्त यांत्रिक से भिन्न कोई भी व्यक्ति, यथास्थिति, दन्त चिकित्सा या दांतों से परत उतारने की कला का, दंत साफ करने या उन्हें चमकाने का, कृत्रिम दांत और दन्त साधित्र बनाने या उनकी मरम्मत करने का व्यवसाय नहीं करेगा, या किसी प्रकार से यह प्रकट नहीं करेगा कि वह इस प्रकार व्यवसाय करने के लिए तैयार है :
परन्तु इस धारा के उपबंध निम्नलिखित को लागू नहीं होंगे, अर्थात्:
(क) किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा दन्त चिकित्सा के व्यवसाय करने पर;
(ख) किसी व्यक्ति द्वारा कोई दांत निकाले जाने पर, यह तब जब मामला अतिआवश्यक हो और कोई रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यससायी उपलब्ध न हो, किन्तु ऐसी शल्यक्रिया किसी सार्वदेहिक या स्थानिक निश्चेतक के प्रयोग किए बिना की गई हो;
(ग) लोक या स्थानीय निधियों द्वारा चलाई जा रही या समर्थन प्राप्त किसी अस्पताल या चिकित्सालय में दन्त कार्य या विकिरण कार्य पर ।
(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, तो वह प्रथम दोषसिद्धि पर जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, और किसी पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या एक हजार रुपए से अनधिक के जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
50. रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को अभ्यर्पित करने में चूक-यदि कोई व्यक्ति जिसका नाम रजिस्टर में से हटा दिया गया है, पर्याप्त कारण के बिना अपना रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र [या नवीकरण प्रमाणपत्र या दोनों] को तत्काल अभ्यर्पित करने में चूक करेगा तो वह जुर्माने से जो पचास रुपए प्रति मास तक का हो सकेगा और अपराध के जारी रहने की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से जो प्रथम दिन के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान अपराध जारी रहता है, दो रुपए प्रतिदिन तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
51. कंपनियों द्वारा दन्त चिकित्सा न किया जाना-(1) इसमें इसके पश्चात् जैसा उपबंधित है उसके सिवाय किसी कम्पनी या अन्य निगमित निकाय द्वारा दन्त चिकित्सा वृत्ति नहीं की जाएगी ।
(2) उपधारा (1) के उपबंध
(क) ऐसी किसी कंपनी या अन्य निगमित निकाय का जो केवल दन्त चिकित्सा वृत्ति करता है या ऐसा कोई कारबार करता है या जो दन्त चिकित्सा वृत्ति का प्रासंगिक है और जिसके निदेशकों में से अधिकांश निदेशक और जिसके कार्य करने वाले कर्मचारिवृन्द रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सक हैं;
(ख) दन्त चिकित्सा वृत्ति करने वाले ऐसे नियोजकों को जो अपने कर्मचारियों के लिए रजिस्ट्रीकृत दंत-चिकित्सक द्वारा दन्त उपचार की व्यवस्था करते हैं और जहां ऐसी व्यवस्था लाभ के लिए नहीं है ।
(ग) दन्त चिकित्सकों या दंत स्वास्थ्य-विज्ञानियों के प्रशिक्षण के लिए किसी अस्पताल या चिकित्सालय या संस्था द्वारा या किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकरण या निकाय द्वारा जो दन्त उपचार की व्यवस्था करने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत या अपेक्षित है, दन्त चिकित्सा वृत्ति करने वाले को,
लागू नहीं होंगे:
परन्तु [धारा 32 की उपधारा (2) के अधीन नियत तारीख के ठीक पूर्व] दन्त चिकित्सा वृत्ति कर रही कोई कम्पनी या निगमित निकाय, ऐसी वृत्ति तब तक जारी रख सकेगी या सकेगा जब तक ऐसी तारीख से तीन वर्ष का अवसान नहीं हो जाता ।
(3) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, तो वह प्रथम दोषसिद्धि पर जुर्माने से जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा और ऐसी पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या एक हजार रुपए से अनधिक के जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
52. अपराधों का संज्ञान-कोई भी न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान [राज्य] सरकार या 2[राज्य] परिषद् के आदेश द्वारा किए गए परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
53. फीस के भाग का परिषद् को संदाय-राज्य परिषद्, प्रत्येक वर्ष जून के अन्त से पहले, परिषद् को उस वर्ष के 31 मार्च को समाप्त होने वाले बारह मास की अवधि के दौरान, इस अधिनियम के अधीन राज्य परिषद् के द्वारा वसूल की गई कुल फीस की एक चौथाई के बराबर रकम का संदाय करेगी ।
[53क. लेखा और लेखापरीक्षा-(1) परिषद् समुचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगी और लेखाओं का वार्षिक विवरण जिसमें तुलनपत्र भी सम्मिलित है, ऐसे साधारण निदेशों के अनुसार तैयार करेगी जो जारी किए जाएं और वे ऐसे प्ररूप में होंगे जो केन्द्रीय सरकार, भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के परामर्श से विनिर्दिष्ट करे ।
(2) परिषद् की लेखाओं की परीक्षा भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिवर्ष की जाएगी और उसके द्वारा ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में या इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति द्वारा उपगत कोई भी व्यय परिषद् द्वारा भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।
(3) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक और परिषद् की लेखाओं की लेखापरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में वे ही अधिकार और विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो लेखापरीक्षा के संबंध में भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं के बारे में प्राप्त हैं, और विशिष्टतया उसे लेखा बहियों, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों और कागजपत्र पेश किए जाने की मांग करने का और परिषद् के कार्यालय के निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित परिषद् के लेखे, उनकी लेखापरीक्षा रिपोर्ट के साथ, केन्द्रीय सरकार को प्रतिवर्ष भेजे जाएंगे ।
(5) परिषद् के इस प्रकार प्रमाणित लेखाओं की एक प्रति, लेखापरीक्षा की रिपोर्ट सहित, साथ-साथ परिषद् को भेजी जाएगी ।]
54. जांच आयोग की नियुक्ति-(1) जब कभी केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि परिषद् इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी का अनुपालन नहीं कर रही है, तब केन्द्रीय सरकार एक जांच आयोग की नियुक्ति कर सकेगी । इसमें तीन व्यक्ति होंगे जिनमें से दो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे और एक उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होगा और एक व्यक्ति परिषद् द्वारा नियुक्त किया जाएगा और केन्द्रीय सरकार आयोग को ऐसे विषय निर्दिष्ट करेगी जिन पर जांच की जानी है ।
(2) आयोग संक्षिप्त रीति से जांच करेगा और अपने को निर्दिष्ट विषयों पर ऐसे उपचार सहित, यदि कोई हों, जो आयोग सिफारिश करना चाहे, केन्द्रीय सरकार को रिपोर्ट करेगा ।
(3) केन्द्रीय सरकार, उस रिपोर्ट को स्वीकार कर सकेगी या उसे उपान्तरण या पुनर्विचार के लिए आयोग को लौटा सकेगी ।
(4) रिपोर्ट के अन्तिम रूप से स्वीकृत हो जाने के पश्चात् केन्द्रीय सरकार परिषद् को यह आदेश दे सकेगी कि वह इस प्रकार सिफारिश किए गए उपचारों को विनिर्दिष्ट समय के भीतर अंगीकार कर ले और यदि परिषद् इस प्रकार विनिर्दिष्ट समय के भीतर उक्त आदेश का अनुपालन नहीं करती है, तो केन्द्रीय सरकार आयोग की सिफारिशों को प्रभावी करने के लिए ऐसा आदेश दे सकेगी या ऐसी कार्रवाई कर सकेगी, जो आवश्यक हो ।
(5) जब कभी 2[राज्य] सरकार को यह प्रतीत होता है कि 2[राज्य] परिषद् इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों का अनुपालन नहीं कर रही है तब, 2[राज्य] सरकार, 2[राज्य] परिषद् की बाबत उसी रीति से जांच करने के लिए एक वैसा ही जांच आयोग उसी प्रकार नियुक्त कर सकेगी और ऐसा आदेश पारित कर सकेगी या कार्रवाई कर सकेगी जैसा कि उपधारा (3) और (4) में विनिर्दिष्ट है ।
55. नियम बनाने की शक्ति-(1) [राज्य] सरकार अध्याय 3, 4 और 5 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इन नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा:
(क) 1[राज्य] परिषद् की सम्पत्ति का प्रबन्ध और उसकी लेखाओं का रखा जाना और लेखापरीक्षा;
(ख) वह रीति जिससे अध्याय 3 के अधीन निर्वाचन किए जाएंगे;
(ग) 1[राज्य] परिषद् के अधिवेशनों को बुलाना और आयोजित करना, वे समय और स्थान जहां ऐसे अधिवेशन किए जाएंगे, उनके कार्य संचालन और गणपूर्ति के लिए आवश्यक सदस्य संख्या;
(घ) 1[राज्य] परिषद् के सभापति और उपसभापति की शक्तियां और कर्तव्य;
(ङ) कार्यकारिणी समिति का गठन और उसके कृत्य, उसके अधिवेशन बुलाना और आयोजित करना, वे समय और स्थान जहां ऐसे अधिवेशन किए जाएंगे और उनके कार्य संचालन और गणपूर्ति के लिए आवश्यक सदस्य संख्या;
(च) 1[राज्य] परिषद् के रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों और सेवकों की पदावधि और शक्तियां और उनके कर्तव्य जिसमें कोषपाल द्वारा दी जाने वाली प्रतिभूति की रकम और प्रभार भी सम्मिलित है;
(छ) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदनों में दी जाने वाली विशिष्टियां और अर्हताओं के लिए दिए जाने वाले सबूत;
[(छछ) एक राज्य से दूसरे राज्य में रजिस्ट्रीकरण के अन्तरण के लिए आवेदन का प्ररूप;]
[(ज) रजिस्टरों की मुद्रित प्रतियों के प्रदाय के लिए प्रभार और निम्नलिखित के लिए संदेय फीस, अर्थात्:
(i) रजिस्ट्रीकरण या उसके रजिस्ट्रीकरण के नवीकरण के लिए;
(ii) रजिस्ट्रीकरण या उसके नवीकरण-प्रमाणपत्र की दूसरी प्रति प्रदाय करने के लिए; और
(iii) एक राज्य से दूसरे राज्य में रजिस्ट्रीकरण के अन्तरण के लिए;
(झ) रजिस्ट्रीकरण और उसके नवीकरण के प्रमाणपत्रों के प्ररूप;]
(ञ) कोई ऐसा अन्य विषय जो अध्याय 3, अध्याय 4 और अध्याय 5 के अधीन धारा 54 की उपधारा (1), उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4) के सिवाय विहित किया जाना हो या विहित किया जा सके ।
[(3) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]
अनुसूची
भाग 1
[धारा 10 की उपधारा (1) और उपधारा (2) देखिएट
भारत में प्राधिकरणों या संस्थाओं द्वारा प्रदान की जाने वाली मान्यताप्राप्त दन्त अर्हताएं
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प्राधिकरण या संस्था |
मान्यताप्राप्त दंत अर्हतार |
जिस्ट्रीकरण के लिए संक्षेपाक्षर |
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1 |
2 |
3 |
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1.बोर्ड आफ एगजामिनर्स, कलकत्ता डेन्ट्रल कोलेज एंड हास्पिटल, कलकत्ता |
लाइसेन्शिएट इन डेन्टल साइंस: यदि 1 मई, 1941 से पहले प्रदान किया गया है । |
एल० डी० एस० सी०, कलकत्ता |
|
2. स्टेट मेडिकल फैक्ल्टी, बंगाल, कलकत्ता |
लाइसेन्शिएट इन डेन्टल साइंस; यदि 30 अप्रैल, 1941 के पश्चात् प्रदान किया गया है । |
एल० डी० एस०, (एस० एम० एफ०) बंगाल |
|
3.सिटी डेन्टल कालेज एण्ड हास्पिटल, कलकत्ता |
लाइसेन्शिएट इन डेन्टल साइंस; यदि 31 मार्च, 1940 से पहले किसी ऐसे व्यक्ति को प्रदान किया गया है: (i) जिसने उस संस्था में दो वर्षीय पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो; या (ii) जिसने पहले दन्त चिकित्सक या चिकित्सा व्यवसायी के रूप में नियोजित रह कर उस संस्था में एक वर्षीय पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण प्राप्त किया है । |
एल० डी० एस० सी० (सी० डी० सी०) कलकत्ता |
|
1 |
2 |
3 |
|
4.मुम्बई विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी
-प्रोस्थेटिक डेंस्टिस्ट्री -पीरिओडोन्शिया -ओरल सर्जरी
-आर्थोडोन्शिया -डेन्टल रेडियोलाजी -आपरेटिव डेन्टिस्ट्री -डेन्टल पैथोलाजी एण्ड -बैक्टीरिओलाजी
|
बी० डी० एस०
एम० डी० एस० (प्रास०), मुम्बई एम० डी० एस० (पीरिओ०), मुम्बई एम० डी० एस० (ओरल सर्जरी), मुम्बई एम० डी० एस० (आर्थो०), मुम्बई एम० डी० एस०(रेडियोलाजी), मुम्बई एम० डी० एस० (आपरेटिव), मुम्बई एम० डी० एस० (डेन्ट० पैथ० एण्ड बैक्ट०), मुम्बई |
|
5. कालेज आफ फिजीशियन्स एण्ड सर्जन्स, मुम्बई |
लाइसेंशिएट इन डेन्टल साइंस |
एल० डी० एस० (सी० पी० एस०), मुम्बई |
|
6.नायर हास्पिटल, डेन्टल बोर्ड, मुम्बई |
लाइसेंशिएट इन डेन्टल साइंस |
एल० डी० एस० सी० (नायर), मुम्बई |
|
7.पूर्वी पंजाब विश्वविद्यालय |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी - यदि वर्ष 1948 के दौरान प्रदान किया गया है |
बी० डी० एस०, पूर्वी पंजाब |
|
8.लखनऊ विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी -प्रास्थोडांटिक्स -पीरिओडांन्टिक्स -आर्थोडान्टिक्स -ओरल सर्जरी
-पेडाडान्शिया एण्ड प्रिवेन्टिव डेन्टिस्ट्री |
बी० डी० एस०, लखनऊ
एम० डी० एस० (प्रास०), लखनऊ एम० डी० एस० (पीरिओ०), लखनऊ एम० डी० एस० (आर्थो०), लखनऊ एम० डी० एस० (ओरल सर्जरी), लखनऊ
एम० डी० एस० (पेडा०), लखनऊ |
|
9.चेन्नई विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी -ओरल सर्जरी
-पीरिओडोन्टालाजी -आपरेटिव डेन्टिस्ट्री -आर्थोडोन्शिया |
बी० डी० एस०, चेन्नई
एम० डी० एस० (ओरल सर्जरी), चेन्नई
एम० डी० एस० (पीरिओ०), चेन्नई एम० डी० एस० (आपरेटिव), चेन्नई एम० डी० एस० (आर्थो०), चेन्नई |
|
10. कलकत्ता विश्वविद्यालय
|
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी
|
बी० डी० एस०, कलकत्ता
|
|
11. पंजाब विश्वविद्यालय
|
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी -पेडाडान्शिया एण्ड प्रिवेन्टिव डेन्टिस्ट्री -डेन्टल प्रोस्थसिस एण्ड क्राउन एण्ड ब्रिज वर्क -यदि 31 दिसम्बर, 1970 से पहले प्रदान किया गया है @(iii) पेडाडान्शिया एंड प्रिवेंटिव डेन्टिस्ट्री -यदि मई, 1980 को या उसके पश्चात् प्रदान किया गया है । भारत सरकार स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना सं० ध्-12017/6/83-पी० एन० एस० तारीख 27-8-1984) द्वारा निम्नानुसार आगे उपान्तरित रूप में पढ़ा जाए । @-यदि 1987 में या उसके पश्चात् प्रदान किया गया है ।
|
बी० डी० एस०, पंजाब
एम० डी० एस० (पेडा०), पंजाब
एम० डी० एस० (प्रोस०), पंजाब
एम० डी० एस० (पेडा०), पीजीआईएमईआर |
|
1 |
2 |
3 |
|
12.पंजाबी विश्वविद्यालय |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस०, पंजाब |
|
13.उस्मानिया विश्वविद्यालय |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस०, उस्मानिया |
|
14.केरल विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी -आपरेटिव डेन्टिस्ट्री -प्रोस्थेटिक डेंस्टिस्ट्री -पीरिओडोन्शिया -आर्थोडोन्शिया |
बी० डी० एस०, केरल एम० डी० एस०, केरल एम० डी० एस० (प्रास०), केरल एम० डी० एस० (पीरिओ०), केरल बी० डी० एस०, (आर्थो०) केरल |
|
15.मैसूर विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी आपरेटिव डेन्टिस्ट्री
-आर्थोडोन्शिया -पेरिओडोंशिया |
बी० डी० एस०, मैसूर
* एम० डी० एस० (आपरेटिव), मैसूर (यह अर्हता तब ही मान्यताप्राप्त होगी जब 12-9-1975 के पहले प्रदान की गई हो) एम० डी० एस० (आर्थो०), मैसूर एम० डी० एस० (पीरिओ०), मैसूर |
|
16.पटना विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी (प्रोस्थेटिक डेंस्ट्रिस्ट्री) |
बी० डी० एस०, पटना एम० डी० एस० (प्रोस्थेटिक डेंस्टिस्ट्री), पटना |
|
17.बंगलौर विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी (आर्थोडान्टिक्स) -ओरल सर्जरी
-पेरिओडोंशिया -ओरल डायगनोसिस एण्ड डेन्टल रेडिओलाजी -पब्लिक हैल्थ डेन्टिस्ट्री |
बी० डी० एस०, बंगलौर बी० डी० एस०, (आर्थों०) बैंगलौर
एम० डी० एस० (ओरल सर्जरी), बंगलौर एम० डी० एस० (पीरिओ०), बंगलौर एम० डी० एस० (ओरल डायगनोसिस एण्ड डेन्टल रेडिओलाजी), बंगलौर एम० डी० एस० (पब्लिक हैल्थ डेन्टिस्ट्री), बंगलौर
|
|
18.इंदौर विश्वविद्यालय |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस०, इंदौर |
|
19.गुजरात विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस०, गुजरात |
|
|
प्रोस्थेटिक डेंस्टिस्ट्री पेरिओडोंशिया ओरल पैथोलाजी एण्ड बैक्टीरिओलाजी |
एम० डी० एस० (प्रास०), गुजरात एम० डी० एस० (पीरिओ०), गुजरात एम० डी० एस० (ओरल, पैथ० एण्ड बैक्ट०), गुजरात |
|
|
ओरल डायगनोसिस एण्ड डेन्टल रेडिओलाजी आपरेटिव डेन्टिस्ट्री ओरल सर्जरी
आर्थोडोन्शिया |
एम० डी० एस० (ओरल, डायग० एण्ड रेडिओलाजी), गुजरात एम० डी० एस० (आपरेटिव), गुजरात एम० डी० एस० (ओरल सर्जरी), गुजरात एम० डी० एस० (आर्थो०), गुजरात |
|
20.गुरू नानक विश्वविद्यालय |
(i) बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी (ii) मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस०, गुरू नानक |
|
|
पेडोडान्शिया एण्ड प्रिवेन्टिव डेन्टिस्ट्री डेन्टल प्रोस्थेसिस एण्ड क्राउन एण्ड ब्रिज वर्क |
एम० डी० एस० (पेडो०), गुरु नानक एम० डी० एस० (प्रोस०), गुरु नानक |
|
21.नागपुर विश्वविद्यालय |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस०, नागपुर |
|
1 |
2 |
3 |
|
22.मंगलौर विश्वविद्यालय |
मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी -ओरल सर्जरी
-पीरिओडान्टिक्स
-प्रोस्थेटिक डेंस्टिस्ट्री
-आर्थोडोन्शिया
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी
|
एम० डी० एस० (ओरल सर्जरी), मंगलौर
एम० डी० एस० (पीरिओडान्टिक्स), मंगलौर
एम० डी० एस० (प्रोस्थेटिक डेंस्टिस्ट्री), मंगलौर
एम० डी० एस० (आर्थोडोन्शिया), मंगलौर बी० डी० एस०, मंगलौर |
|
23.बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय |
मास्टर आफ सर्जरी -आपरेटिव डेण्टिस्ट्री |
एम० डी० एस० (आपरेटिव डेण्टिस्ट्री), वाराणसी |
|
24.अन्नामलई विश्वविद्यालय |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस०, (अन्नामलई) |
भाग 2
(धारा 10 की उपधारा 3 देखिए)
जब रजिस्टर प्रथम बार तैयार किया जाता है तब उसमें रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त
दंत अर्हताएं
|
प्राधिकरण या संस्था |
मान्यताप्राप्त दंत अर्हता |
रजिस्ट्रीकरण के लिए संक्षेपाक्षर |
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1 |
2 |
3 |
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1.दि यूनिवर्सिटी आफ वियना (आस्ट्रिया) |
पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट आफ डेन्टिस्ट्री |
जैड० डी० एस० (वियना) |
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2. दि टुलेन यूनिवर्सिटी आफ लूइसीयना (यू०एस०ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
डी० डी० एस० लुइसीयना (यू०एस०ए०) |
|
3.डसेलडर (जर्मनी) |
जानर्स डिप्लोमा |
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|
(अनुसूची 1)
भाग 3
(धारा 10 की उपधारा (4) देखिए)
भारत के बाहर के प्राधिकरणों तथा संस्थाओं द्वारा प्रदत्त मान्यताप्राप्त दंत अर्हताएं केवल उसी दशा में
जब वे केवल भारत के नागरिकों की ही प्रदान की गई हों
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प्राधिकरण या संस्था |
मान्यताप्राप्त दंत अर्हता |
रजिस्ट्रीकरण के लिए संक्षेपाक्षर |
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1.दि यूनिवर्सिटी आफ पंजाब, लाहौर |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी यदि 15 अगस्त, 1947 से पहले प्रदान किया गया है |
बी० डी० एस०, लाहौर एम० डी० एस०, लाहौर |
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2.पंजाब स्टेट मेडिकल फैक्लटी, लाहौर |
लाइसेन्शिएट इन डेन्टल साइंस यदि 15 अगस्त, 1947 से पहले प्रदान किया गया है |
एल० डी० एससी० एस० एम० एफ०, सी०, लाहौर |
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1 |
2 |
3 |
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3.बोर्ड आफ इग्जामिनर्स, कालेज आफ डेन्टिस्ट्री, कराची |
लाइसेन्शिएट इन डेन्टल साइंस
यदि 31 दिसम्बर, 1943 से पहले प्रदान किया गया है |
एल० डी० एससी०, कराची |
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4.रायल कालेज आफ सर्जन्स, इंगलैंड (यू०के०) |
लाइसेन्स इन डेन्टल सर्जरी
फैलोशिप इन डेन्टल सर्जरी डिप्लोमा इन आर्थोडान्टिक |
एल० डी० एस०, आर० सी० एस०, इंग०
एफ० डी० एस० आर० सी० एस०, इंग० डी० आर्थ० आर० सी० एस०, इंग० |
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5.रायल कालेज आफ सर्जन्स, एडिनबर्ग (यू०के०) |
लाइसेन्शिएट इन डेन्टल सर्जरी
फैलो इन डेन्टल सर्जरी |
एल० डी० एस०, आर० सी० एस०, एडिन०
एफ० डी० एस० आर० सी० एस० एडिन० |
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6.रायल कालेज आफ फिजीशियन्स एण्ड सर्जन्स आफ ग्लास्गो/रायल फैकल्टी आफ फिजीशियन्स एण्ड सर्जन्स, ग्लास्गो (यू०के०) |
लाइसेन्स इन डेन्टल सर्जरी
डिप्लोमा इन आर्थोपेडिक्स फैलोशिप इन डेन्टल र्सजरी हायर डेन्टल डिप्लोमेट केवल 1965 तक प्रदान किया गया है |
एल० डी० एस० आर० सी० पी० एस० जी०
डी० डी० ओ० आर० सी० पी० एस० जी० एफ० डी० एस० आर० सी० पी० एस० बी० एच० डी० डी० |
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7.रायल कालेज आफ सर्जन्स, आयरलैंड |
लाइसेन्स इन डेन्टल सर्जरी
फैलोशिप आफ दि फैकल्टी आफ डेन्टिस्ट्री |
एल० डी० एस० आर० सी० एस०, आयरलैंड
एफ० एफ० डी० आर० सी० एस०, आयरलैंड |
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8.यूनिवर्सिटी आफ न्यूकेसन अपोन आइन/दि यूनिवर्सिटी आफ डरहम, न्यूकेसल अपोन टाइन (यू०के०) |
लाइसेन्स इन डेन्टल सर्जरी बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी डाक्टर आफ डेन्टल साइंस ।1962 से समाप्त |
एल० डी० एस० डनेलम बी० डी० एस० न्यूकेसल/डनेलम
एम० डी० एस० न्यूकेसल/डनेलम डी० डी० एस० न्यूकेसल/डनेलम |
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9.यूनिवर्सिटी आफ लंदन (यू०के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस (डेन्टिस्ट्री) |
बी० डी० एस०, लंदन एम० डी० एस०, लंदन एम० एस० सी०, लंदन |
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10.यूनिवर्सिटी आफ मेनचेस्टर (यू०के०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी लाइसेन्शिएट इन डेन्टल सर्जरी |
डी० डी० एस० (यू० मेनचेस्टर) एम० डी०एस० (यू० मेनचेस्टर) बी० डी० एस० (यू० मेनचेस्टर) एल० डी० एस० (यू० मेनचेस्टर) |
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11.यूनिवर्सिटी आफ बर्गिमघम (यू०के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी लाइसेन्स आफ डेन्टल सर्जरी 1950 में समाप्त |
बी० डी० एस० बर्मिगघम एम० डी० एस० बर्गिगघम एल० डी० एस० बर्गिगघम |
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12.यूनिवर्सिटी आफ लिवरपूल (यू०के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी डाक्टर आफ फिलोस्फी लाइसेंस इन डेन्टल सर्जरी 1963 में समाप्त |
बी० डी० एस० लिवरपूल एम० डी० एस० लिवरपूल पी० एच० डी० लिवरपूल एल० डी० एस० लिवरपूल |
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3 |
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13.यूनिवर्सिटी आफ लीड्स, (यू०के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी डिप्लोमा इन डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० सी० एच० डी० यू० लीड्स एल० डी० एस० यू० लीड्स एम० सी० एच० डी० यू० लीड्स |
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14.यूनिवर्सिटी आफ शेफील्ड (यू०के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी लाइसेन्शिएट आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० सी० एच० यू० शेफील्ड एम० डी० एस० यू० शेफील्ड एल० डी० एस० यू० शेफील्ड |
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15.यूनिवर्सिटी आफ ब्रिस्टल (यू०के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी डिप्लोमा इन डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस० यू० ब्रिस्टल एल० डी० एस० यू० ब्रिस्टल एम० डी० एस० यू० ब्रिस्टल |
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16.यूनिवर्सिटी आफ डन्डी/यूनिवर्सिटी आफ सेंट एंडज, डन्डी (यू०के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी
मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी डाक्टर आफ डेन्टल सांइस
डिप्लोमा इन पब्लिक डेन्टिस्ट्री डिप्लोमा इन डेन्टल डेन्टिस्ट्री 1950 में समाप्त |
बी० डी० एस० यू० डन्डी/सेंट एंडज
एम० डी० एस० यू० डन्डी/सेंट एंडज डी० डी० एस० सी० यू० डन्डी/सेंट एंडज
डी० पी० डी० यू० डन्डी/सेंट एंडज एम० डी० एस० यू० सेंट एंडज
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17.क्वींस यूनिवर्सिटी आफ बेलफास्ट (यू० के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी
मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी लाइसेन्शिएट इन डेन्टल सर्जरी समाप्त |
बी० डी० एस० क्यू० यू० बेलफास्ट
एम० डी० एस० क्यू० यू० बेलफास्ट एल० डी० एस० क्यू० यू० बेलफास्ट |
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18.नेशनल यूनिवर्सिटी आफ आयरलैंड, डबलिन |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी
मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस० एन० यू० आयरलैंड
एम० डी० एस० एन० यू० आयरलैंड |
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19.एमरो यूनिवर्सिटी, अटलान्टा (यू० एस० ए०) अटलान्टा/सदर्न डेन्टल कालेज अटलान्टा, जार्जिया (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस इन डेन्टिस्ट्री |
डी० डी० एस० अटलान्टा एम० एस० डी० अटलान्टा
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20.यूनिवर्सिटी आफ इलिनोइस, शिकागो (यू० एस० ए०) |
डिग्री आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस |
डी० डी० एस० इलिनोइस एम० एस० (इलिनोइस) |
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21.लियोला यूनिवर्सिटी, शिकागो (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस इन ओरल बायलोजी |
डी० डी० एस० लियोला एम० एस० लियोला |
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22.नार्थ-वेस्टर्न यूनिवर्सिटी, शिकागो, इलिनोइस (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस मास्टर आफ साइंस इन डेंटिस्ट्री (1959 में बन्द कर दिया गया) |
डी० डी० एस० नार्थ-बेस्टर्न एम० एस० नार्थ-वेस्टर्न एम० एस० डी० नार्थ-वेस्टर्न |
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23.इंडियाना यूनिवर्सिटी, इंडियानापोलिस, इंडियाना (यू०एस०ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस इन डेंटिस्ट्री |
डी० डी० एस० इंडियाना एम० एस० डी० इंडियाना |
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24.कालेज आफ डेंटिस्ट्री यूनिवर्सिटी आफ आयोवा सिटी, आयोवा (यू०एस०ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस |
डी० डी० एस आयोवा एम० एस० डी० आयोवा |
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25.हारवर्ड यूनिवर्सिटी, बोस्टन, मैसाचूसेट्स (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल मेडिसिन |
डी० डी० एस० हारवर्ड |
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26.यूनिवसिर्टी आफ नेबरास्का, ओमा नेबरास्का (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस इन डेंटिस्ट्री |
डी० डी० एस० नेबरास्का एम० एस० डी० नेबरास्का |
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27.कोलम्बिया यूनिवर्सिटी, न्यूयार्क सिटी (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
डी० डी० एस० कोलम्बिया |
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1 |
2 |
3 |
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28.यूनिवर्सिटी आफ पेनसिलवनिया, फिले-डल्फिया, पेनसिलवानिया (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी डाक्टर आफ डेन्टल मेडिसिन (1964 में समाप्त) |
डी० डी० एस० पेन डी० एम० डी० पेन |
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29.यूनिवर्सिटी आफ टेक्साज एट हाउस्टन, टेक्साज डेन्टल कालेज, हाउस्टन (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
डी० डी० एस० टेक्साज |
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30.यूनिवर्सिटी आफ मिनेसौटा (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस इन डेन्टिस्ट्री डाक्टर आफ फिलासफी |
डी० डी० एस० मिनेसौटा एम० एस० टी० मिनेसौटा पी० एच० डी० मिनेसौटा |
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31.सेंट लुइस यूनिवर्सिटी, मिसौरी (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
डी० डी० एस० सेंट लुइस |
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32.यूनिवर्सिटी आफ मिशीगन (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस डाक्टर आफ फिलासफी |
डी० डी० एस० मिशीगन एम० एस० मिशीगन पी० एच० डी० मिशीगन |
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33.टफ्ट्स यूनिवर्सिटी, टफ्ट्स कालेज, बोस्टन (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल मेडिसिन मास्टर आफ साइंस मास्टर आफ डेन्टल साइंस डाक्टर आफ फिलासफी |
डी० एम० डी० टफ्ट्स एम० एस० टफ्ट्स एम० डी० एस० टफ्ट्स पी० एच० डी० टफ्ट्स |
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34.यूनिवर्सिटी आफ टोरेंटो ओनटारियों (कनाडा) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी डिप्लोमा इन डेन्टल पब्लिक हैल्थ डिप्लोमा इन ओरल सर्जरी एण्ड एनीरिवसिया डिप्लोमा इन पीडोडान्टिक्स डिप्लोमा इन आर्थोडान्टिक्स डिप्लोमा इन पेरिओडान्टिक्स बेचलर आफ साइंस इन डेन्टिस्ट्री मास्टर आफ साइंस इन डेन्टिस्ट्री डाक्टर आफ फिलासफी |
डी० डी० एस० टोरोंटो डी० डी० पी० एच० टोरोंटो डिप० ओरल सर्ज० टोरोंटो डिप० पीडोडान्ट० टोरोंटो डिप० आर्थोडान्ट० टोरोंटो डिप० परिओडान्ट० टोरोंटो बी० एससी० बी० टोरोंटो एम० एससी० डी० टोरोंटो पी० एच० डी० टोरेंटो |
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35. मैकगिल यूनिवर्सिटी मांट्रीयल (कनाडा) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
डी० डी० एस० मैकगिल |
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36.ड्यूशो जानीर्ज्टलीश यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट बोन (जर्मनी) |
डिप्लोमा |
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37.ड्यूशीजानीर्ज्टलीश यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट म्यूनिख (जर्मनी) |
डिप्लोमा |
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38.ईकोल डेन्टेयर डि पेरिस, पेरिस |
चिरजीन डेन्टिस्ट (डिप्लोमा आफ डेन्टल सर्जन) |
डी० ई० डी० पी० पेरिस |
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39.ईकोल डेन्टेयर फांसिंस, पेरिस |
डिप्लोमा आफ डेन्टल सर्जन |
डी० ई० डी० एफ० पेरिस |
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40.अमेरिकन डेन्टल कालेज, कराची |
लाइसेन्शिएट इन डेन्टल साइंस यदि 31 दिसम्बर, 1936 को या उससे पहले प्रदान किया गया है। |
एल० डी० एससी० कराची |
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41.फैकल्टी आफ मेडिसिन, यूनिवर्सिटी आफ वियना (आस्ट्रिया) |
फैकल्टी आफ मेडिसिन, यूनिवर्सिटी आफ वियना द्वारा, उस पाठ्यक्रम के दो वर्ष के पश्चात् जिसके लिए उस यूनिवर्सिटी की एम० डी० डिग्री अभिप्राप्त की गई हो, प्रदान की गई दंत विशेषज्ञ की अर्हता । |
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42.यूनिवर्सिटी आफ बर्लिन (जर्मनी) |
जानीर्जट डिप्लोमा डाक्टर मेडिसिन डेन्टेयर |
--------- डा० मेड० डेन्ट० |
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43.यूनिवर्सिटी आफ फ्रेबूर्ग (जर्मनी) |
जानीर्जट डिप्लोमा |
------ |
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44.यूनिवर्सिटी आफ फ्रेन्कफर्ट (जर्मनी) |
डाक्टर मेडिसिन डेन्टेयर |
डा० मेड० डेन्ट० |
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1 |
2 |
3 |
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45.बाल्टीमोर कालेज आफ डेन्टल सर्जरी, यूनिवर्सिटी आफ मेरीलैण्ड (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेंटल सर्जरी मास्टर आफ सर्जरी |
डी० डी० एस० मेरीलैंड एम० एस० मेरीलैण्ड
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46.यूनिवर्सिटी आफ रोस्टोक (जर्मनी) |
डाक्टर मेडिसिन डेन्टल |
डा० मेड० डेन्ट० |
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47.यूनिवर्सिटी आफ डेटरोइट (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस |
डी० डी० एस० डेटरोइट एम० एस० डेटरोइट |
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48.यूनिवर्सिटी आफ रोचेस्टर (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ फिलोसफी |
पी० एच० डी० रोचेस्टर |
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49.यूनिवर्सिटी आफ एडिनबर्ग (यू० के०) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस० एडिनबर्ग |
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50.पंजाब डेन्टल कालेज/डेन्टल एण्ड आप्टीकल कालेज, लाहौर (अब निष्क्रिय) |
लाइसेन्शिएट आफ डेन्टल साइंस डिप्लोमा बेचलर आफ डेन्टल साइंस डिप्लोमा यदि 14 अगस्त, 1947 को या उससे पहले प्रदान किया गया हो । |
एल० डी० एस० सी० लाहौर बी० डी० एस० सी० लाहौर
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51.टोकियो मेडिकल एण्ड डेन्टल यूनिवर्सिटी, टोकियो (जापान) |
डा० आफ मेडिकल साइंस -आपरेटिव डेंटिस्ट्री |
डी० एम० एस० सी० इगाकुहा कुशी |
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52. यूनिवर्सिटी आफ न्यूजीलैंड विलिंगटन (न्यूजीलैंड) |
मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
एम० डी० एस० न्यूजीलैंड |
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53.ईकोल डिचिरुजी डेन्टेयर एट डिस्टोमेटोलाजी डि पेरिस (फ्रांस) |
डिप्लोमा |
डी० ई० सी० डी० एण्ड एस० पेरिस |
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54.यूनिवर्सिटी आफ सिडनी, सिडनी (आस्ट्रेलिया) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस० सिडनी एम० डी० एस० सिडनी |
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55.जार्जटाउन यूनिवर्सिटी वाशिंगटन (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ सर्जरी इन पेडोडान्शिया |
डी० डी० एस० जार्जटाउन एम० एस० (पेडो०) जार्जटाउन |
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56.यूनिवर्सिटी आफ अलाबामा, अलाबामा (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस इन डेन्टिस्ट्री |
डी० डी० एस० अलाबामा एम० एस० डी० अलाबामा |
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57.युनिवर्सिटी आफ ओटागो, डनेडिन सी० 1 (न्यूजीलैंड) |
मास्टर आफ डेन्टल सर्जरी |
एम० डी० एस० ओटागो |
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58.मारकेट यूनिवर्सिटी, मिलवाकी बिस्कोन्सिन (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस |
एम० डी० एस० मारकेट एम० एस० मारकेट |
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59.न्यूयार्क यूनिवर्सिटी, न्यूयार्क (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस इन डेंटिस्ट्री |
डी० डी० एस० न्यूयार्क एम० एस० डी० न्यूयार्क |
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60.यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया सानफ्रांसिसको (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस |
डी० डी० एस० कैलिफोर्निया एम० एस० कैलिफोर्निया |
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61.यूनिवर्सिटी आफ मिसौरी एट कानसास सिटी, मिसौरी (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस |
डी० डी० एस० मिसौरी एम० एस० मिसौरी |
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62.वाशिंगटन यूनिर्वसिटी, सेंट लूइस मिसौरी (यू० एस० ए०) |
डाक्टर आफ डेन्टल सर्जरी मास्टर आफ साइंस |
डी० डी० एस० वाशिंगटन एम० एस० वाशिंगटन |
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63.यूनिवर्सिटी आफ मलाया, सिंगापुर |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस० मलाया |
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64.यूनिवर्सिटी आफ पिट्सबर्ग, पिट्सबर्ग (पेन्सिलवानिया) (यू० एस० ए०) |
मास्टर आफ साइंस इन डेन्टिस्ट्री पेडोडान्टिक्स |
एम० एस० डी० (पेडो०) पिट्सबर्ग |
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65.यूनिवर्सिटी आफ अलाबामा इन बरमिंगघम (यू० एस० ए०) |
मास्टर आफ साइंस डिग्री इन पैथोलाजी (ओरल पैथोलोजी) |
एम० एस० डी० (ओरल पैथो०) बरमिंगघम |
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66.कारोलिन्स्का इंस्टीट्यूट स्कूल आफ डेंटिस्ट्री स्टाकहाम, स्वीडन |
डाक्टर आफ ओडोन्टोलाजी |
डा० ओडोन्ट कारोलिन्स्का |
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67.वेस्टफैलिया विल्हेम्स यूनिवर्सिटी मंस्टॉर (जर्मनी) |
डाक्टर आफ डेंटल मेडिसिन |
डा० मेड० डेंट० वेस्टफैलिया विल्हेम्स |
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1 |
2 |
3 |
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68. यूनिवर्सिटी आफ क्वीन्सलैंड आस्ट्रेलिया |
मास्टर आफ डेंटल साइंसओरल बायोलाजी (ओरल हिस्टोलाजी एण्ड ओरल पैथोलाजी) |
एम० डी० एस० सी० (ओरल बायो० ओरल हिस्टो० एण्ड ओरल पैथो०) क्वीन्सलैंड |
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69.बोस्टन यूनिवर्सिटी बोस्टन, मैसाच्यूस्ट्रस (यू० एस० ए०) |
मास्टर आफ साइंस आर्थोडोंटिक्स |
एम० एस० सी० डी० आर्थो० बोस्टन |
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70.जार्ज टाउन यूनिवर्सिटी वाशिंगटन, डी० सी० (यू० एस० ए०) |
मास्टर आफ साइंस (आर्थोडोंटिक्स) |
एम० एस० (आर्थो०) जार्ज टाउन |
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71.मास्को मेडिकल स्टोमैटोलाजिकल इंस्टीट्यूट मास्को (यू० एस० एस० आर०) |
डिप्लोमा इन स्टोमैटोलाजी |
डिप० स्टोम० मास्को |
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72.ढाका यूनिवर्सिटी, ढाका (बंगला देश) |
बेचलर आफ डेन्टल सर्जरी |
बी० डी० एस० ढाका |
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