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डालमिया दादरी सीमेंट लिमिटेड (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1981 ( Dalmia Dadri Cement Limited (Acquisition And Transfer of Undertakings) Act, 1981 )


 

डालमिया दादरी सीमेंट लिमिटेड (उपक्रमों का

अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1981

(1981 का अधिनियम संख्यांक 31)

[15 सितम्बर, 1981]

सीमेंट का, जो देश की अर्थ-व्यवस्था की आवश्यकताओं के लिए आवश्यक है, विनिर्माण,

उत्पादन और वितरण जारी रखना सुनिश्चित करके जनसाधारण के हित साधन

के लिए डालमिया दादरी सीमेंट लिमिटेड के उपक्रमों का उचित

प्रबन्ध सुनिश्चित करने की दृष्टि से उसके उपक्रमों के

और उनसे संबंधित तथा उनके आनुषंगिक

विषयों का उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

 

                मैसर्स डालमिया दादरी सीमेंट लिमिटेड, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की प्रथम अनुसूची में उल्लिखित वस्तु पोर्टलैन्ड सीमेंट के विनिर्माण और उत्पादन में लगी हुई थी;

                और कंपनी के परिसमापन के लिए एक आदेश किया गया है और उसके समापन के लिए कार्यवाहियां पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में लम्बित हैं;

                और कंपनी के उपक्रम मार्च, 1980 से काम नहीं कर रहे हैं;

                और उक्त कंपनी के उपक्रमों का अर्जन यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि उक्त कंपनी के उपक्रमों द्वारा पोर्टलैन्ड सीमेंट का जो देश की अर्थ-व्यवस्था की, आवश्यकता के लिए महत्वपूर्ण है, विनिर्माण, उत्पादन और वितरण जारी रख कर जनसाधारण का हित साधन होता रहे;

भारत गणराज्य के बत्तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम डालमिया दादरी सीमेंट लिमिटेड (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1981 है

(2) यह 23 जून, 1981 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो, -

                () नियत दिन" से 23 जून, 1981 अभिप्रेत है;

() सीमेंट निगम" से भारतीय सीमेंट निगम अभिप्रेत है जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन निगमित और रजिस्ट्रीकृत कम्पनी है;

() आयुक्त" से धारा 14 के अधीन नियुक्त संदाय आयुक्त अभिप्रेत है;

() कम्पनी" से डालमिया दादरी सीमेंट लिमिटेड अभिप्रेत है जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अर्थ में एक कम्पनी है और जिसका रजिस्ट्रीकृत कार्यालय चरखी दादरी (हरियाणा) में है;

() अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

() विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

() इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट तारीख" से ऐसी तारीख अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार उस उपबन्ध के प्रयोजनों के लिए, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबन्धों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट की जा सकेंगी;

() उन शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वे ही अर्थ होंगे जो उनके क्रमशः उस अधिनियम में हैं;

अध्याय 2

कम्पनी के उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण

3. कम्पनी के उपक्रमों का केन्द्रीय सरकार को अन्तरण और उनका उसमें निहित होना-नियत दिन को कंपनी के उपक्रम और उसके उपक्रमों के सम्बन्ध में कम्पनी के अधिकार, हक और हित, इस अधिनियम के आधार पर, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगे

4. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) कम्पनी के उपक्रमों के बारे में यह समझा जाएगा कि उनके अन्तर्गत सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार और सभी स्थावर तथा जंगम सम्पत्ति, जिसके अन्तर्गत भूमि, भवन, कर्मशालाएं, स्टोर, उपकरण, मशीनरी और उपस्कर, रोकङ बाकी, हाथ की रोकङ, आरक्षित निधियां, विनिधान बही ऋण और ऐसी सम्पत्ति में या उससे उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित हैं, जो नियत दिन से ठीक पूर्व कम्पनी के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियन्त्रण में, चाहे भारत में या भारत के बाहर थे और तत्सम्बन्धी सभी लेखा बहियां, रजिस्टर और अन्य सभी दस्तावेज हैं, चाहे वे किसी भी प्रकार की हैं

(2) यथा पूर्वोक्त सभी सम्पत्तियां, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित होने के बल पर किसी न्यास, बाध्यता, बंधक, भार, धारणाधिकार और उन्हें प्रभावित करने वाले सभी अन्य विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएंगी और किसी न्यायालय की ऐसी किसी कुर्की, व्यादेश, डिक्री या आदेश की बाबत, जो ऐसी सम्पत्तियों के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बन्धित करता है, यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है

(3) किसी ऐसी सम्पत्ति का, जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, प्रत्येक बन्धकदार और किसी ऐसी सम्पत्ति में या उसके सम्बन्ध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे समय के अन्दर और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, ऐसे बन्धक, भार, धारणाधिकार या अन्य हित की सूचना आयुक्त को देगा

(4) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी सम्पत्ति का बन्धकदार या ऐसी किसी सम्पत्ति में या उसके सम्बन्ध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित रखने वाला कोई अन्य व्यक्ति, धारा 7 में विनिर्दिष्ट रकमों में से और धारा 8 के अधीन अवधारित रकमों में से भी, बन्धक धन या अन्य शोध्य रकमों के पूर्णतः या भागतः संदाय के लिए अपने अधिकारों और हितों के अनुसार दावा करने का हकदार होगा किन्तु ऐसा कोई बन्धक, भार, धारणाधिकार या अन्य हित किसी ऐसी सम्पत्ति के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा जो केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है

(5) ऐसे किसी उपक्रम के सम्बन्ध में, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है, कम्पनी को नियत दिन से पूर्व किसी समय अनुदत्त और नियत दिन से ठीक पूर्व प्रवृत्त कोई अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत ऐसे उपक्रम के सम्बन्ध में और उसके प्रयोजनों के लिए ऐसे दिन को और उसके पश्चात् अपने प्रकट शब्दानुसार प्रवृत्त बनी रहेगी और ऐसे उपक्रम के धारा 6 के अधीन सीमेंट निगम में निहित होने की तारीख से ही, उस निगम के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में उसी प्रकार प्रतिस्थापित हो गया है मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत उस निगम को अनुदत्त की गई हो और वह निगम उसे उस शेष अवधि के लिए धारण करेगा जिसके लिए वह कम्पनी उसे उसके निबन्धनों के अनुसार धारण करती

(6) यदि, नियत दिन को, किसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, कम्पनी द्वारा संस्थित या उसके विरुद्ध लाया गया कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, चाहे वह किसी भी प्रकार की हो, लम्बित है तो कम्पनी के उपक्रमों के अन्तरण या इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के कारण उसका उपशमन नहीं होगा, वह बन्द नहीं होगी, या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके विरुद्ध, या जहां कम्पनी के उपक्रम धारा 6 के अधीन सीमेंट निगम में निहित किए जाने के लिए निदेशित हैं वहां उस निगम द्वारा या उसके विरुद्ध, जारी रखी जा सकेगी, चलाई जा सकेगी या प्रवर्तित की जा सकेगी

5. पूर्व दायित्वों के लिए केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम का दायी होना-(1) नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के सम्बन्ध में कम्पनी का प्रत्येक दायित्व कम्पनी का दायित्व होगा और उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय होगा और केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या जहां कम्पनी के उपक्रम धारा 6 के अधीन सीमेंट निगम में निहित होने के लिए निदेशित हैं, वहां उस निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा

(2) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि: -

                () इस धारा में या इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध में अभिव्यक्त रूप से जैसा उपबन्धित है उसके सिवाय नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत कम्पनी का कोई दायित्व, केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या जहां कम्पनी के उपक्रम धारा 6 के अधीन सीमेंट निगम में निहित किए जाने के लिए निदेशित हैं, वहां उस निगम के विरुद्ध, प्रवर्तनीय नहीं होगा;

                () कम्पनी के उपक्रमों के संबंध में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण का कोई अधिनिर्णय, डिक्री या आदेश, जो नियत दिन के पूर्व उत्पन्न किसी मामले, दावे या विवाद के बारे में नियत दिन के पश्चात् पारित किया गया है, केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या जहां कम्पनी के उपक्रम धारा 6 के अधीन सीमेंट निगम में निहित किए जाने के लिए निदेशित हैं, वहां उस निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा;

() तत्समय प्रवृत्त विधि के किसी उपबन्ध के उल्लंघन के लिए नियत दिन के पूर्व उपगत कम्पनी का कोई दायित्व, केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध या जहां कम्पनी के उपक्रम धारा 6 के अधीन सीमेंट निगम में निहित किए जाने के लिए निदेशित हैं, वहां उस निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा

6. कंपनी के उपक्रमों के सीमेंट निगम में निहित किए जाने का निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) धारा 3 और धारा 4 में किसी बात के होते हुए भी केन्द्रीय सरकार ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अधीन रहते हुए जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि कम्पनी के उपक्रम और कम्पनी के उपक्रमों के सम्बन्ध में उसके अधिकार, हक और हित, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, केन्द्रीय सरकार में निहित रहने के बजाय, या तो अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख को या ऐसी किसी पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती तारीख को (जो नियत दिन से पहले की तारीख हो), जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, सीमेंट निगम में निहित हो जाएंगे

(2) जहां कम्पनी के उपक्रमों के सम्बन्ध में उसके अधिकार, हक और हित उपधारा (1) के अधीन सीमेंट निगम में निहित हो जाते हैं वहां वह सीमेंट निगम ऐसे निहित होने की तारीख से ही, ऐसे उपक्रमों के सम्बन्ध में स्वामी समझा जाएगा और ऐसे उपक्रमों के सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार के सभी अधिकार और दायित्व, ऐसे निहित होने की तारीख से ही, उस सीमेंट निगम के क्रमशः अधिकार और दायित्व समझे जाएंगे

अध्याय 3

रकमों का संदाय

7. रकम का संदाय-केन्द्रीय सरकार, कंपनी के उपक्रमों का और कम्पनी के उपक्रमों के संबंध में कंपनी के अधिकार, हक और हित का धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार को अन्तरण करने और उन्हें उसमें निहित करने के लिए कम्पनी को चौरासी लाख सत्तासी हजार रुपए की रकम नकद और अध्याय 6 में विनिर्दिष्ट रीति से देगी

8. अतिरिक्त रकम का संदाय-(1) धारा 7 में विनिर्दिष्ट रकम पर, चार प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज, नियत दिन से प्रारम्भ होकर उस तारीख को, जिसको ऐसी रकम का संदाय केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि के लिए दिया जाएगा

(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसार अवधारित रकम कम्पनी को उस रकम के अतिरिक्त देगी जो धारा 7 में विनिर्दिष्ट है

(3) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि कम्पनी के उन उपक्रमों के संबंध में जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, उसके दायित्वों का उन्मोचन कम्पनी के लेनदारों के अधिकारों और हितों के अनुसार, धारा 7 में विनिर्दिष्ट रकम में से और उपधारा (1) के अधीन अवधारित रकम में से भी किया जाएगा

अध्याय 4

कंपनी के उपक्रमों का प्रबन्ध, आदि

9. कंपनी के उपक्रमों का प्रबंध, आदि-कंपनी के उपक्रमों के, जिनके सम्बन्ध में अधिकार, हक और हित धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, कार्यकलाप और कारबार का साधारण अधीक्षण, निदेशन, नियंत्रण और प्रबन्ध, जहां केन्द्रीय सरकार ने धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन कोई निदेश दिया है वहां, सीमेंट निगम में निहित होगा और तब सीमेंट निगम सभी अन्य व्यक्तियों का अपवर्जन करते हुए ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे सभी कार्य करने का हकदार होगा जिन शक्तियों का प्रयोग और  [जिन कार्यों को, जिनमें धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय (औद्योगिक विकास विभाग) की अधिसूचना सं० का०आ० 502(), तारीख 23 जून, 1981 द्वारा उसमें निहित कंपनी के उपक्रमों की आस्तियों का व्ययन करने की, यदि आस्तियों का ऐसा व्ययन सीमेंट निगम द्वारा विधिक या वित्तीय विचारणाओं के कारण आवश्यक समझा गया है, शक्ति भी सम्मिलित है करने के लिए कंपनी अपने उपक्रमों के संबंध में] प्राधिकृत थी

10. कंपनी के उपक्रमों और उनसे सम्बन्धित दस्तावेजों का कब्जा परिदत्त करने का कर्तव्य-(1) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी कंपनी का शासकीय समापक या ऐसा अन्य कोई व्यक्ति जिसके कब्जे या अभिरक्षा में या जिसके नियंत्रण के अधीन कंपनी के उपक्रम या उसका कोई भाग है, कंपनी के उपक्रमों या उसके किसी भाग का कब्जा तुरन्त केन्द्रीय सरकार को या, जहां कंपनी के उपक्रम धारा 6 के अधीन सीमेंट निगम में निहित हैं वहां, उस निगम को परिदत्त करेगा

(2) कंपनी के उपक्रमों का प्रबन्ध सीमेंट निगम में निहित हो जाने पर कंपनी का शासकीय समापक या कोई अन्य व्यक्ति, नियत दिन को जिसके कब्जे या अभिरक्षा में या जिसके नियंत्रण के अधीन, ऐसे निहित होने या नियुक्ति के ठीक पूर्व, कंपनी के उपक्रमों से सम्बन्धित कोई बहियां, दस्तावेजें या अन्य कागज-पत्र हैं, उक्त बहियों, दस्तावेजों या अन्य कागज-पत्रों को सीमेंट निगम को या ऐसे व्यक्ति को, जिसे, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार या सीमेंट निगम इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, परिदत्त करने के लिए बाध्य होगा

(3) केन्द्रीय सरकार उन उपक्रमों का, जो धारा 3 के अधीन उसमें निहित हो गए हैं, कब्जा प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा सकेगी या उठवा सकेगी

(4) केन्द्रीय सरकार सीमेंट निगम को ऐसे निदेश दे सकेगी जो वह मामले की परिस्थितियों में वांछनीय समझे और वह सीमेंट निगम भी, यदि ऐसा करना आवश्यक समझा जाए तो, केन्द्रीय सरकार को किसी भी समय उस रीति के बारे में जिसमें कंपनी के उपक्रमों का प्रबन्ध संचालित किया जाएगा या ऐसे किसी अन्य विषय के बारे में जो ऐसे प्रबन्ध के दौरान उत्पन्न हो, अनुदेश देने के लिए आवेदन कर सकेगा

11. विशिष्टियां देने का कर्तव्य-(1) कंपनी ऐसी अवधि के भीतर, जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, उस सरकार को या सीमेंट निगम को उन उपक्रमों के सम्बन्ध में जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम में निहित हो गए हैं, नियत दिन को यथाविद्यमान कंपनी की सभी सम्पत्तियों और आस्तियों की एक पूर्ण सूची देगी

(2) उपधारा (1) के अधीन कंपनी की उतनी बाध्यता का, जितनी का सम्बन्ध कंपनी के शासकीय समापक के कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में कंपनी की सम्पत्तियों और आस्तियों से है, उन्मोचन उसके द्वारा किया जाएगा

अध्याय 5

कंपनी के कर्मचारियों के बारे में उपबन्ध

12. कुछ कर्मचारियों के नियोजन का जारी रहना-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व कम्पनी के उपक्रमों में से किसी उपक्रम में नियोजित रहा है, -

                () नियत दिन से ही, केन्द्रीय सरकार का कर्मचारी हो जाएगा; और

                () जहां कंपनी के उपक्रम धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन सीमेंट निगम में निहित किए जाने के लिए निदेशित हैं वहां, ऐसे निहित होने की तारीख से ही उस निगम का कर्मचारी हो जाएगा,

और पेंशन, उपदान और अन्य बातों के बारे में, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम के अधीन वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ पद या सेवा धारण करेगा जो उसे उस स्थिति में अनुज्ञेय होते यदि ऐसा निधान हुआ होता और वह तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम में उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता है या जब तक उसका पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तें, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर देता है

                (2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, कंपनी के किसी उपक्रम में नियोजित किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की सेवाओं का, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम को अन्तरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा, कोई न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण ग्रहण नहीं करेगा

                (3) जहां सेवा की किसी संविदा के निबन्धनों के अधीन या अन्यथा कोई व्यक्ति, जिसकी सेवाएं इस अधिनियम के उपबन्धों के कारण केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम को अन्तरित हो जाती हैं, वेतन या मजदूरी या ली गई किसी छुट्टी के लिए किसी संदाय के या किसी अन्य संदाय के, जो उपदान या पेंशन के संदाय के रूप में नहीं है, बकाया के लिए हकदार है, वहां ऐसा व्यक्ति अपने दावे का प्रवर्तन कंपनी के विरुद्ध कर सकेगा किन्तु केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम के विरुद्ध नहीं कर सकेगा

13. भविष्य निधि तथा अन्य निधियां-(1) जहां कंपनी के उपक्रमों में से किसी उपक्रम में नियोजित व्यक्तियों के फायदे के लिए कंपनी ने कोई भविष्य निधि, अधिवार्षिकी निधि, कल्याण निधि या अन्य निधि स्थापित की है वहां, ऐसे अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों से, जिनकी सेवाएं, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम को इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अन्तरित हो गई हैं, संबंधित धनराशियां, ऐसी भविष्य निधि, अधिवार्षिकी निधि, कल्याण निधि या अन्य निधि में, नियत दिन को जमा धनराशियों में से, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएंगी

(2) उन धनराशियों के सम्बन्ध में जो उपधारा (1) के अधीन, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम को अन्तरित हो जाती हैं, उस सरकार या उस निगम द्वारा ऐसी रीति से कार्रवाई की जाएगी जो विहित की जाए

 

 

 

अध्याय 6

संदाय आयुक्त

14. संदाय आयुक्त की नियुक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 7 और धारा 8 के अधीन कंपनी को संदेय रकमों के संवितरण के प्रयोजन के लिए, अधिसूचना द्वारा, एक संदाय आयुक्त नियुक्त करेगी

(2) केन्द्रीय सरकार आयुक्त की सहायता के लिए ऐसे अन्य व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह ठीक समझे और तब आयुक्त ऐसे व्यक्तियों में से एक या अधिक को भी इस अधिनियम के अधीन अपने द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा और भिन्न-भिन्न व्यक्तियों को भिन्न-भिन्न शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जा सकेगा

(3) कोई व्यक्ति, जो आयुक्त द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आयुक्त द्वारा प्राधिकृत किया गया है, उन शक्तियों का प्रयोग उसी रीति से कर सकेगा और उनका वही प्रभाव होगा मानो वे शक्तियां उस व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा प्रत्यक्षतः प्रदान की गई हैं, प्राधिकरण के रूप में नहीं

(4) इस धारा के अधीन नियुक्त आयुक्त और अन्य व्यक्तियों के वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि में से चुकाए जाएंगे

15. केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार, कंपनी को संदाय करने के लिए आयुक्त को, विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के अन्दर, उतनी रकम नकद देगी जो-

                () धारा 7 में विनिर्दिष्ट रकम के बराबर रकम है, और

                () धारा 8 के अधीन कंपनी को संदेय रकम के बराबर रकम है

(2) केन्द्रीय सरकार भारत के लोक खाते में आयुक्त के नाम एक निक्षेप खाता खोलेगी और आयुक्त, इस अधिनियम के अधीन उसे संदत्त प्रत्येक रकम, उक्त निक्षेप खाते में जमा करेगा और उक्त निक्षेप खाते को चलाएगा

(3) आयुक्त कंपनी के ऐसे उपक्रमों के बारे में, जिनके सम्बन्ध में इस अधिनियम के अधीन उसे संदाय किया गया है, अभिलेख बनाए रखेगा

(4) उपधारा (2) में निर्दिष्ट निक्षेप खाते में जमा रकम पर प्रोद्भूत होने वाला ब्याज कंपनी के फायदे के लिए काम आएगा

16. केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम की कुछ शक्तियां-(1) यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम, नियत दिन के पश्चात् वसूल किया गया ऐसा कोई धन, जो कंपनी को उसके उन उपक्रमों के सम्बन्ध में शोध्य है जो केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम में निहित हो गए हैं, अन्य सभी व्यक्तियों का अपवर्जन करके, विनिर्दिष्ट तारीख तक प्राप्त करने का हकदार इस बात के होते हुए भी होगा कि ऐसी वसूली नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि से सम्बन्धित है

(2) यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम आयुक्त को ऐसे प्रत्येक संदाय के सम्बन्ध में दावा कर सकेगा जो नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के सम्बन्ध में कंपनी के किसी दायित्व का उन्मोचन करने के लिए उसके द्वारा नियत दिन के पश्चात् किया गया है; और ऐसे प्रत्येक दावे को उन पूर्विकताओं के अनुसार पूर्विकता प्राप्त होगी जो उस विषय को, जिसके सम्बन्ध में ऐसे दायित्व का उन्मोचन केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम द्वारा किया गया है, इस अधिनियम के अधीन प्राप्त है

(3) इस अधिनियम में जैसा उपबन्धित है उसके सिवाय, नियत दिन के पूर्व के किसी संव्यवहार के सम्बन्ध में कंपनी के ऐसे दायित्व, जिनका विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व उन्मोचन नहीं किया गया है, उस कंपनी के दायित्व होंगे

17. आयुक्त के समक्ष दावों का किया जाना-प्रत्येक व्यक्ति, जिसका कंपनी के विरुद्ध कोई दावा है, ऐसा दावा विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के अन्दर आयुक्त के समक्ष करेगा:

परन्तु यदि आयुक्त का समाधान हो जाता है कि दावेदार पर्याप्त कारण से तीस दिन की उक्त अवधि के अन्दर दावा करने से निवारित रहा था तो वह तीस दिन की अतिरिक्त अवधि के अन्दर दावा ग्रहण कर सकेगा किन्तु उसके पश्चात् नहीं

18. दावों की पूर्विकता-अनुसूची में विनिर्दिष्ट विषयों से उद्भूत होने वाले दावों को निम्नलिखित सिद्धान्तों के अनुसार पूर्विकता प्राप्त होगी, अर्थात्: -

() प्रवर्ग i को अन्य सभी प्रवर्गों पर अग्रता दी जाएगी और प्रवर्ग ii को प्रवर्ग iii पर अग्रता दी जाएगी और इसी प्रकार आगे भी;

() प्रत्येक प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट दावे समान पंक्ति के होंगे और उनका पूर्णतः संदाय किया जाएगा किन्तु यदि रकम ऐसे दावों को पूर्णतः चुकाने के लिए अपर्याप्त है तो वे समान अनुपात में कम कर दिए जाएंगे और तदनुसार उनका संदाय किया जाएगा;

() किसी निम्नतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट विषय की बाबत किसी दायित्व के उन्मोचन का प्रश्न केवल तब उठेगा जब उसके ठीक उच्चतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट सभी दायित्वों को चुकाने के पश्चात् कोई अधिशेष रह जाए

19. दावों की परीक्षा-(1) आयुक्त, धारा 17 के अधीन किए गए दावों की प्राप्ति पर, उन्हें अनुसूची में विनिर्दिष्ट पूर्विकताओं के क्रम में क्रमबद्ध करेगा और ऐसे पूर्विकता क्रम से उनकी परीक्षा करेगा

(2) यदि दावों की परीक्षा करने पर आयुक्त की यह राय है कि इस अधिनियम के अधीन उसे संदत्त रकम किसी निम्नतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट दायित्वों को चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है तो उससे यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह ऐसे निम्नतर प्रवर्ग की बाबत दावों की परीक्षा करे

20. दावों का स्वीकार या अस्वीकार किया जाना-(1) अनुसूची में उपवर्णित पूर्विकताओं के प्रति निर्देश से दावों की परीक्षा करने के पश्चात्, आयुक्त कोई तारीख नियत करेगा जिसको या जिसके पूर्व प्रत्येक दावेदार अपने दावे का सबूत फाइल करेगा

(2) इस प्रकार नियत तारीख के बारे में कम से कम चौदह दिन की सूचना अंग्रेजी भाषा के किसी ऐसे दैनिक समाचारपत्र के एक अंक में, जो देश के अधिकांश भाग में पढ़ा जाता हो और ऐसी प्रादेशिक भाषा के, जिसे आयुक्त उपयुक्त समझे, किसी दैनिक समाचारपत्र के एक अंक में, विज्ञापन द्वारा दी जाएगी, और ऐसी प्रत्येक सूचना में दावेदार से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपने दावे का सबूत विज्ञापन में विनिर्दिष्ट अवधि के अन्दर आयुक्त के समक्ष, फाइल करे

(3) प्रत्येक दावेदार, जो आयुक्त द्वारा विनिर्दिष्ट समय के अन्दर अपने दावे का सबूत फाइल करने में असफल रहता है, आयुक्त द्वारा किए जाने वाले संवितरणों से अपवर्जित कर दिया जाएगा

(4) आयुक्त ऐसा अन्वेषण करने के पश्चात्, जो उसकी राय में आवश्यक है और कम्पनी को दावे का खंडन करने का अवसर देने के पश्चात् और दावेदार को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात्, लिखित आदेश द्वारा, दावे को पूर्णतः या भागतः स्वीकार या अस्वीकार करेगा

(5) आयुक्त को अपने कृत्यों के निर्वहन से उत्पन्न होने वाले सभी मामलों में, जिनके अन्तर्गत वह या वे स्थान भी हैं जहां वह अपनी बैठक कर सकेगा, अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी और इस अधिनियम के अधीन कोई अन्वेषण करने के प्रयोजन के लिए उसे वही शक्तियां प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन निम्नलिखित विषयों की बाबत वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात्: -

                () किसी साक्षी को समन करना और हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना;

                () किसी दस्तावेज या अन्य तात्विक पदार्थ का, जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने के योग्य हो, प्रकटीकरण और पेश किया जाना;

                () शपथपत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;

                () साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना

(6) आयुक्त के समक्ष कोई अन्वेषण, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा और आयुक्त को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा

(7) कोई दावेदार, जो आयुक्त के विनिश्चय से असंतुष्ट है, उस विनिश्चय के विरुद्ध अपील, आरम्भिक अधिकारिता वाले उस प्रधान सिविल न्यायायल में कर सकता है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर कम्पनी का रजिस्ट्रीकृत कार्यालय स्थित है:

परन्तु जहां कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है, आयुक्त नियुक्त किया जाता है, वहां अपील पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय को होगी और ऐसी अपील उस उच्च न्यायालय के कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा सुनी और निपटाई जाएगी

21. आयुक्त द्वारा दावेदारों को धन का संवितरण-इस अधिनियम के अधीन दावा स्वीकार करने के पश्चात्, ऐसे दावे की बाबत शोध्य रकम, आयुक्त द्वारा ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को संदत्त की जाएगी जिसे या जिन्हें ऐसी रकम शोध्य है, और ऐसा संदाय कर दिए जाने पर, कम्पनी के उपक्रमों के सम्बन्ध में ऐसे दावे की बाबत कम्पनी के दायित्व का उन्मोचित हो जाएगा

22. कम्पनी को रकमों का संवितरण-(1) यदि कम्पनी के उपक्रमों के संबंध में आयुक्त को संदत्त धन में से अनुसूची में यथा विनिर्दिष्ट दायित्वों को चुकाने के पश्चात् कोई अतिशेष रह जाता है तो आयुक्त ऐसे अतिशेष का संवितरण कम्पनी को करेगा

(2) जहां किसी मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति का कब्जा इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम में निहित हो गया है किन्तु ऐसी मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति उस कम्पनी की नहीं है, वहां केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसी मशीनरी या उपस्कर या अन्य सम्पत्ति का कब्जा उन्हीं निबन्धनों और शर्तों पर बनाए रखे जिनके अधीन वह नियत दिन के ठीक पूर्व कम्पनी के कब्जे में थी

23. असंवितरित या दावा की गई रकम का साधारण राजस्व खाते में निक्षिप्त किया जाना-यदि आयुक्त को संदत्त कोई धन, जो उस तारीख से, जिसको आयुक्त का पद अन्तिम रूप से परिसमाप्त किया जाता है, ठीक पूर्ववर्ती तारीख को असंवितरित रहता है या उसके बारे में कोई दावा नहीं किया जाता है तो वह आयुक्त द्वारा अपने पद के अन्तिम रूप से परिसमापन से पूर्व, केन्द्रीय सरकार के साधारण राजस्व खाते को अन्तरित किया जाएगा ; किन्तु इस प्रकार अन्तरित किसी धन के लिए कोई दावा, ऐसे संदाय के हकदार व्यक्ति द्वारा केन्द्रीय सरकार को किया जा सकता है और उस संबंध में कार्यवाही इस प्रकार की जाएगी मानो ऐसा अन्तरण किया ही नहीं गया था और दावे के संदाय लिए आदेश, यदि कोई हो, राजस्व के प्रतिदाय के लिए किया गया आदेश माना जाएगा

अध्याय 7

प्रकीर्ण

24. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के उपबन्ध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण की किसी डिक्री या आदेश में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे

25. केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम के अनुसमर्थन के अभाव में संविदाओं का प्रभावहीन हो जाना-कम्पनी द्वारा अपने ऐसे उपक्रमों के संबंध में जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गए हैं, किसी सेवा, विक्रय या प्रदाय के लिए की गई और नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त प्रत्येक संविदा, नियत दिन से एक सौ अस्सी दिन की समाप्ति से ही प्रभावहीन हो जाएगी, जब तक कि उक्त अवधि की समाप्ति से पूर्व ऐसी संविदा का केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम, जहां इस अधिनियम के अधीन ऐसे उपक्रम उस निगम में निहित हो गए हैं वहां, लिखित रूप में अनुसमर्थन नहीं कर देता है और केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम ऐसी संविदा का अनुसमर्थन करने में उसमें ऐसा परिवर्तन या उपान्तरण कर सकेगा जो वह ठीक समझे :

परन्तु केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम किसी संविदा का अनुसमर्थन करने में लोप और उसमें कोई परिवर्तन या उपान्तरण तब तक नहीं करेगा, जब तक कि-

() उसका यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसी संविदा असम्यक् रूप से दुर्भर है या असद्भावपूर्वक की गई है या केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम के लिए अहितकर है, और

() वह ऐसी संविदा के पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे देता है और संविदा का अनुसमर्थन करने से इन्कार करने या उसमें कोई परिवर्तन या उपान्तरण करने के अपने कारण अभिलिखित नहीं कर देता है

26. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या उस सरकार या सीमेंट निगम के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी या उस सरकार अथवा निगम द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध होगी

(2) सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या हो सकने वाले किसी नुकसान के लिए कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या उस सरकार या सीमेंट निगम के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारियों या उस सरकार या निगम द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध होगी

27. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली ऐसी सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग, जो इस धारा, धारा 30 और धारा 31 द्वारा प्रदत्त शक्तियों से भिन्न हैं, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा जिन्हें अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए

(2) जब कभी शक्ति का कोई प्रत्यायोजन उपधारा (1) के अधीन किया जाता है तब वह व्यक्ति, जिसको ऐसी शक्ति प्रत्यायोजित की गई है, केन्द्रीय सरकार के निदेश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा

28. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति-

() कम्पनी के किन्हीं उपक्रमों की भागरूप किसी सम्पत्ति को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम से सदोष विधारित करेगा; या

() कम्पनी के उपक्रमों की भागरूप किसी सम्पत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या उसे सदोष प्रतिधारित करेगा; या

() कम्पनी के उपक्रमों से संबंधित किसी दस्तावेज या तालिका को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम या उस सरकार या सीमेंट निगम द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय से जानबूझकर विधारित करेगा या उसे देने में असफल रहेगा; या

() कम्पनी के उपक्रमों से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखा बहियों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावेजों को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, केन्द्रीय सरकार या सीमेंट निगम या उस सरकार या सीमेंट निगम द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को देने में असफल रहेगा; या

() कम्पनी के उपक्रमों की भागरूप किसी सम्पत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा; या

() इस अधिनियम के अधीन ऐसा दावा करेगा जिसके बारे में वह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का उचित कारण है कि वह मिथ्या या बिल्कुल गलत है,

वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा

29. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

                () कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है, तथा

                () फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है  

30. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्: -

() वह समय, जिसके अन्दर और वह रीति जिससे धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन कोई सूचना आयुक्त को दी जाएगी;

() वह रीति जिससे धारा 13 के अधीन किसी भविष्य निधि या अन्य निधि में जमा धन की बाबत कार्रवाई की जाएगी;

                () कोई अन्य विषय जो विहित किए जाने के लिए अपेक्षित है या विहित किया जाए

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा

31. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी:

परन्तु ऐसा कोई आदेश नियत दिन से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा

32. निरसन और व्यावृत्ति-(1) डालमिया दादरी सीमेंट लिमिटेड (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अध्यादेश, 1981 (1981 का 6) इसके द्वारा निरसित किया जाता है

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी

 

 

 

 

अनुसूची

[धारा 18, 19 (1), 20(1) और 22(1) देखिए]

कम्पनी के दायित्वों के उन्मोचन के लिए पूर्विकताओं का क्रम

प्रवर्ग i

                () कम्पनी के कर्मचारियों को संदेय मजदूरी, वेतन और अन्य शोध्य रकमें,

                () भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा अभिदाय, भारतीय जीवन बीमा निगम से संबंधित प्रीमियम या किसी अन्य प्रयोजन के लिए कर्मचारियों के वेतन और मजदूरियों से की गई कटौतियां,

                () कम्पनी द्वारा भविष्य निधि में तथा कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (1948 का 34) के अधीन और उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन भी, जिसमें ऐसे अभिदायों के लिए उपबंध हों, किए जाने वाले अभिदायों के संबंध में बकाया

प्रवर्ग ii

                निम्नलिखित द्वारा दिए गए उधार की मूल रकम, अर्थात्: -

                                (i) केन्द्रीय सरकार;

                                (ii) राज्य सरकार;

                                (iii) बैंक और वित्तीय संस्थान;

                                (iv) कोई अन्य स्रोत;

प्रवर्ग iii

                () कम्पनी द्वारा व्यापार या विनिर्माण संक्रियाओं के प्रयोजन के लिए लिए गए ऋण;

                () माल के प्रदाय या की गई सेवाओं के लिए राज्य विद्युत बोर्डों या अन्य सरकारी या अर्ध सरकारी संस्थाओं को शोध्य रकमें

                () उधारों और अग्रिम धनों पर ब्याज की बकाया

प्रवर्ग iv

                () केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय प्राधिकरणों का राजस्व, कर, उपकर, रेट या अन्य शोध्य रकमें;

                () कोई अन्य शोध्य रकमें

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