चन्द्रनगर (विलयन) अधिनियम, 1954
(1954 का अधिनियम संख्यांक 36)
[29 सितम्बर, 1954]
चन्द्रनगर के पश्चिमी बंगाल राज्य में विलयन तथा उससे संबद्ध
मामलों के लिए उपबन्ध करने हेतु
अधिनियम
भारत गणराज्य के पांचवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम चन्द्रनगर (विलयन) अधिनियम, 1954 है ।
(2) यह अक्तूबर, 1954 के दूसरे दिन प्रवृत्त होगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) “नियत दिन" से अक्तूबर, 1954 का दूसरा दिन अभिप्रेत है;
(ख) “सभा निर्वाचन-क्षेत्र", “परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र" और “संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र" के वे ही अर्थ हैं जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में हैं;
(ग) “चन्द्रनगर" से वह समस्त राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है जो जून 1952 के नवें दिन के ठीक पहले चन्द्रनगर के फ्री टाउन में समाविष्ट था;
(घ) “विधि" से किसी अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, नियम, स्कीम, अधिसूचना, उपविधि या विधि का बल रखने वाले किसी अन्य लिखत का उतना भाग अभिप्रेत है जितना संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 1 और सूची 3 में प्रगणित मामलों से संबंधित है;
(ङ) “आसीन सदस्य" से लोक सभा के या पश्चिमी बंगाल राज्य के विधान-मंडल के दोनों सदनों में से किसी के संबंध में वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो नियत दिन के ठीक पूर्व उस सदन का सदस्य है;
(च) “राज्य सरकार" से पश्चिमी बंगाल की सरकार अभिप्रेत है;
(छ) “संघ प्रयोजनों" से सरकार के वे प्रयोजन अभिप्रेत हैं जो संविधान की सप्तम् अनुसूची की संघ सूची में वर्णित मामलों में से किसी से संबंधित हैं ।
3. चन्द्रनगर का पश्चिमी बंगाल का भाग होना-(1) नियत दिन से चन्द्रनगर पश्चिमी बंगाल राज्य का भाग होगा और उस राज्य की सीमाएं इस प्रकार परिवर्तित की जाएंगी जिससे कि उसमें चन्द्रनगर राज्यक्षेत्र समाविष्ट हो जाए ।
(2) इसके पश्चात् जिलों और उपखंडों के विस्तार, सीमाओं और नामों को परिवर्तित करने की राज्य सरकार की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, चन्द्रनगर पश्चिमी बंगाल राज्य के हुगली जिले का भाग होगा और राज्य सरकार, राजपत्र में आदेश द्वारा, चन्द्रनगर को उक्त जिले का नया उपखण्ड बना कर उसके प्रशासन का उपबंध करेगी । यह उपखण्ड उस जिले के ऐसे क्षेत्रों को जोड़ कर जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं या बिना ऐसे जोड़े हुए बनाया जा सकेगा ।
4. संविधान की प्रथम अनुसूची का संशोधन-संविधान की प्रथम अनुसूची में, भाग (क) में, राज्यों के राज्यक्षेत्रों के विवरण में, अंतिम पैरा में, “मानो कि वे उस प्रांत के भाग रहे हों" शब्दों के पश्चात् निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
“तथा पश्चिमी बंगाल राज्य के सम्बन्ध में चन्द्रनगर (विलयन) अधिनियम, 1954 की धारा 2 के खंड (ग) में यथापरिभाषित चन्द्रनगर का राज्यक्षेत्र भी समाविष्ट होगा ।“।
5. लोकसभा में चन्द्रनगर का प्रतिनिधित्व-(1) जब तक कि विधि द्वारा अन्यथा उपबंधित न हो, नियत दिन से-
(क) चन्द्रनगर संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पश्चिमी बंगाल) आदेश, 1951 द्वारा बनाए गए हुगली संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र में सम्मिलित किया जाएगा और उसका भाग होगा और वह आदेश निम्नलिखित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा, अर्थात् :-
सारणी ‘क’ में-
(i) सीरामपुर निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित स्तम्भ 2 में की प्रविष्टि के लिए निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“हुगली जिले के भद्रेश्वर, सिंगुर, सीरामपुर, उत्तरपारा, चंडीतला और जोंगीपाड़ा पुलिस थाने और हावड़ा जिले के दुमजुर और बाली पुलिस थाने”;
(ii) हुगली निर्वाचन-क्षेत्र से संबंधित स्तम्भ 2 में की प्रविष्टि के लिए, निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“हुगली जिले के पांडुआ, धौनेखाली, चिनसुरा (बंसबाड़िया नगरपालिका के वार्ड संख्या 1 को अपवर्जित करते हुए), पांलबा, हरीपाल, तारकेश्वर आरामबाग, खानाकुल और परसुरा पुलिस थाने और चन्द्रनगर";
(ख) हुगली संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला लोक सभा का आसीन सदस्य इस अधिनियम द्वारा यथा उपान्तरित उस निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित समझा जाएगा ।
(2) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र हुगली संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावली लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार तैयार की जाएगी और इस प्रकार तैयार की गई नामावली अपने अंतिम प्रकाशन पर तुरन्त प्रवृत्त होगी ।
6. पश्चिमी बंगाल की विधान सभा में चन्द्रनगर का प्रतिनिधित्व-जब तक कि विधि द्वारा अन्यथा उपबंधित न हो-
(क) पश्चिमी बंगाल विधान सभा के लिए एक अतिरिक्त निर्वाचन-क्षेत्र होगा (जो चन्द्रनगर सभा निर्वाचन-क्षेत्र के नाम से ज्ञात होगा) जिसमें चन्द्रनगर का सम्पूर्ण क्षेत्र समाविष्ट होगा । यह क्षेत्र अन्य निर्वाचन-क्षेत्रों के ऐसे क्षेत्रों को जोड़ कर, जो राष्ट्रपति द्वारा अवधारित किए जाएं, या बिना ऐसे जोड़े हुए होगा और उक्त निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व उस विधान सभा में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए एक सदस्य द्वारा किया जाएगा;
(ख) राष्ट्रपति, नियत दिन के पश्चात् और निर्वाचन आयोग से परामर्श के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पश्चिमी बंगाल) आदेश, 1951 का आदेश द्वारा इस प्रकार संशोधन करेंगे जिससे कि उसके अन्तर्गत चन्द्रनगर सभा निर्वाचन-क्षेत्र और उससे संबंधित विशिष्टियां आ जाएं जैसा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की धारा 9 द्वारा अपेक्षित है ;
(ग) पश्चिमी बंगाल की विधान सभा में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या 238 से बढ़ा कर 239 कर दी जाएगी;
(घ) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की द्वितीय अनुसूची में भाग क राज्यों से संबंधित भाग में, “पश्चिमी बंगाल" के सामने स्तम्भ सं० 2 में की प्रविष्टि “239" प्रतिस्थापित की जाएगी ।
7. चन्द्रनगर सभा निवार्चन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावली-चन्द्रनगर सभा निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावली लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार तैयार और प्रकाशित की जाएगी और वह अपने अंतिम प्रकाशन पर तुरंत प्रवृत्त होगी ।
8. चन्द्रनगर सभा निर्वाचन-क्षेत्र को आबंटित स्थान भरने के लिए निर्वाचन-धारा 6 के खण्ड (ख) के उपबंधों के अधीन चन्द्रनगर सभा निर्वाचन-क्षेत्र के परिसीमन के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र पश्चिमी बंगाल की विधान सभा में चन्द्रनगर सभा निर्वाचन-क्षेत्र को आबंटित स्थान भरने के लिए निर्वाचन किया जाएगा और उस प्रयोजन के लिए निर्वाचन आयोग, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा चन्द्रनगर सभा निर्वाचन-क्षेत्र से यह अपेक्षा करेगा कि वह ऐसी तारीख से पहले, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, उस स्थान को भरने के प्रयोजन के लिए एक व्यक्ति का निर्वाचन करे और ऐसे निर्वाचन के संबंध में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) और उसके अधीन बनाए गए नियमों और आदेशों के उपबन्ध जहां तक हो सके, लागू होंगे ।
9. कतिपय सभा निर्वाचन-क्षेत्रों के विस्तार में परिवर्तन के परिणाम-चन्द्रनगर सभा निर्वाचन-क्षेत्र का गठन करने के प्रयोजन के लिए चन्द्रनगर क्षेत्रों में अभिवृद्धि के परिणामस्वरूप यदि विद्यमान किसी सभा निर्वाचन-क्षेत्र के विस्तार में कोई परिवर्तन हो जाता है तो-
(क) इस प्रकार परिवर्तित विद्यमान सभा निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावली के बारे में, जब तक कि यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार नए सिरे से तैयार नहीं की जाती है, यह समझा जाएगा कि उसमें उतनी निर्वाचक नामावली समाविष्ट है जितनी वह इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र के अन्दर समाविष्ट क्षेत्रों से संबंधित है;
(ख) पश्चिमी बंगाल की विधान सभा में विद्यमान सभा निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रत्येक आसीन सदस्य इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र से उस विधान सभा के लिए निर्वाचित समझा जाएगा ।
10. पश्चिमी बंगाल की विधान परिषद् में चन्द्रनगर का प्रतिनिधित्व-(1) जब तक कि विधि द्वारा अन्यथा उपबंधित न हो, नियत दिन से-
(क) चन्द्रनगर परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पश्चिमी बंगाल) आदेश, 1951 द्वारा बनाए गए निम्नलिखित परिषद् निर्वाचन-क्षेत्रों के अन्तर्गत और उनका भाग होगा, अर्थात् :-
(i) पश्चिमी बंगाल दक्षिण (स्नातक) निर्वाचक-क्षेत्र;
(ii) बर्दवान खण्ड (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्र;
(iii) हुगली-हावड़ा (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र;
(ख) उक्त आदेश में पश्चिमी बंगाल, बर्दवान खण्ड या हुगली जिले के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत चन्द्रनगर भी है;
(ग) पश्िचमी बंगाल दक्षिण (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र, बर्दवान खण्ड (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्र या हुगली-हावड़ा (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचक-क्षेत्र का, जिनका विस्तार खण्ड (क) के उपबंधों के आधार पर परिवर्तित किया गया है, प्रत्येक आसीन सदस्य इस प्रकार परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र से उक्त परिषद् के लिए निर्वाचित समझा जाएगा ।
(2) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र पश्चिमी बंगाल दक्षिण (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र, बर्दवान खण्ड (शिक्षक) निर्वाचन-क्षेत्र और हुगली-हावड़ा (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियां लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार तैयार की जाएंगी और इस प्रकार तैयार नामावलियां अपने अंतिम प्रकाशन पर तुरन्त प्रवृत्त होंगी ।
11. 1952 के अधिनियम सं० 81 की धारा 9 का संशोधन-परिसीमन आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 9 की उपधारा (3) में “और उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन दिए गए आदेशों" शब्दों के लिए “चन्द्रनगर (विलयन) अधिनियम, 1954 और उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन दिए गए आदेश" शब्द, कोष्ठक और अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
12. चन्द्रनगर में अधिवसित फ्रांस के नागरिकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना-चन्द्रनगर के फ्री टाउन के राज्यक्षेत्र की अर्पण संधि के अनुच्छेद 3 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी फ्रांसीसी प्रजा और फ्रांस संघ के नागरिक जो जून, 1952 के नवें दिन को उक्त राज्यक्षेत्र में अधिवसित थे उस दिन से भारत के नागरिक हुए समझे जाएंगे ।
13. सम्पत्ति और आस्तियां-(1) चन्द्रनगर के भीतर की सभी सम्पत्ति और आस्तियां, जो नियत दिन के ठीक पहले चन्द्रनगर के प्रशासन के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार में निहित हैं, उस दिन से राज्य सरकार में निहित होंगी जब तक कि वे प्रयोजन, जिनके लिए ऐसी सम्पत्ति या आस्तियां उस दिन के ठीक पहले धारित की जाती हों, संघ प्रयोजन नहीं हैं ।
(2) केन्द्रीय सरकार के सचिव द्वारा हस्ताक्षरित, उस सरकार का प्रमाणपत्र इस बात का निश्चायक होगा कि वे प्रयोजन जिनके लिए कोई सम्पत्ति या आस्तियां नियत दिन के ठीक पहले धारण की गई हैं, संघ प्रयोजन हैं ।
14. अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं-(1) चन्द्रनगर के प्रशासन से उद्भूत या उसके संबंध में केन्द्रीय सरकार के सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं नियत दिन से राज्य सरकार के अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी जब तक कि ऐसे अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं संघ प्रयोजनों से संबंधित न हों ।
(2) केन्द्रीय सरकार के सचिव द्वारा हस्ताक्षरित, उस सरकार का प्रमाणपत्र, इस बात का निश्चायक होगा कि चन्द्रनगर के प्रशासन से उद्भूत या उसके संबंध में कोई अधिकार, दायित्व या बाध्यताएं संघ प्रयोजनों से संबंधित हैं ।
15. अधीनस्थ न्यायालय-वे सभी न्यायालय, जो नियत दिन के ठीक पहले उच्च न्यायालय कलकत्ता के अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन चन्द्रनगर में विधिपूर्ण शक्तियों, प्राधिकार और अधिकारिता का प्रयोग कर रहे हैं, जब तक कि सक्षम विधान-मंडल या प्राधिकारी द्वारा और उपबंध नहीं किया जाता, उस उच्च न्यायालय के अधीक्षण और नियंत्रण के अधीन चन्द्रनगर में अपनी-अपनी शक्तियों, प्राधिकार और अधिकारिता का प्रयोग करते रहेंगे ।
16. वर्तमान प्राधिकारियों और अधिकारियों का चन्द्रनगर में बना रहना-चन्द्रनगर के प्रशासन के लिए समय-समय पर आवश्यकतानुसार अधिकारियों को नियुक्त करने की राज्य सरकार की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, चन्द्रनगर का प्रशासक, चन्द्रनगर के सभी न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारी, जो नियत दिन के ठीक पहले चन्द्रनगर या उसके किसी भाग में विधिपूर्ण कृत्यों का प्रयोग कर रहें हैं, जब तक कि राज्य सरकार द्वारा और उपबंध नहीं किया जाता, चन्द्रनगर के प्रशासन के संबंध में अपने-अपने कृत्यों का उसी रीति में और उसी परिमाण तक प्रयोग करते रहेंगे जैसा कि नियत दिन के पहले कर रहे थे ।
17. चन्द्रनगर पर विधियों का विस्तार-वे सब विधियां, जिनका नियत दिन के ठीक पहले साधारणतया पश्चिमी बंगाल राज्य पर विस्तार है या जो उसमें प्रवृत्त हैं, उस दिन से, यथास्थिति, चन्द्रनगर पर विस्तारित होंगी या उसमें प्रवृत्त होंगी ।
18. तत्स्थानी विधियों का निरसन और व्यावृत्तियां-(1) नियत दिन के ठीक पहले चन्द्रनगर में प्रवृत्त कोई विधि (जिसे इस अधिनियम में इसके पश्चात् “तत्स्थानी विधि" कहा गया है) जो धारा 17 में निर्दिष्ट किसी विधि की तत्स्थानी है, चाहे ऐसी तत्स्थानी विधि चन्द्रनगर में चन्द्रनगर (विधियों का लागू होना) आदेश, 1950 के आधार पर या चन्द्रनगर (प्रशासन) विनियम, 1952 (1952 का 1) के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना के आधार पर या अन्यथा प्रवृत्त है, उस दिन से चन्द्रनगर में निरसित हो जाएगी ।
(2) किसी तत्स्थानी विधि का उपधारा (1) द्वारा निरसन-
(क) ऐसी किसी विधि के पूर्व प्रवर्तन पर; अथवा
(ख) ऐसी किसी विधि के अधीन अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व पर; अथवा
(ग) ऐसी किसी विधि के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के बारे में उपगत किसी शास्ति, समपहरण या दण्ड पर; अथवा
(घ) यथापूर्वोक्त किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दण्ड के बारे में किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार पर प्रभाव नहीं डालेगा और ऐसा कोई अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार वैसे ही संस्थित किया जा सकेगा, चालू रखा जा सकेगा, प्रवर्तित किया जा सकेगा और ऐसी कोई शास्ति समपहरण या दण्ड वैसे ही अधिरोपित किया जा सकेगा मानो यह अधिनियम पारित नहीं किया गया था ।
(3) ऐसी तत्स्थानी विधि के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई (जिसके अन्तर्गत की गई कोई नियुक्ति या प्रत्यायोजन, जारी की गई अधिसूचना, आदेश, अनुदेश या निदेश, बनाया गया नियम, प्ररूप, उपविधि या स्कीम, अनुदत्त किया गया प्रमाणपत्र पेटेन्ट, अनुज्ञापत्र या अनुज्ञप्ति, अथवा किया गया रजिस्ट्रीकरण है), उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस विधि के जो नियत दिन को और से चन्द्रनगर पर विस्तारित है या उसमें प्रवृत्त है, तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी और तदनुसार तब तक प्रवृत्त रहेगी जब तक कि वह ऐसी विधि के अधीन की गई किसी बात या कार्रवाई द्वारा अतिष्ठित नहीं कर दी जाती ।
19. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-(1) यदि किसी तत्स्थानी विधि से किसी ऐसी विधि के संक्रमण के संबंध में कोई कठिनाई आती है, जो नियत दिन से चन्द्रनगर पर धारा 17 के आधार पर विस्तारित है या उसमें प्रवृत्त है, तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों ।
(2) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को (किसी तत्स्थानी विधि से संक्रमण के संबंध से भिन्न) प्रभावी करने में या चन्द्रनगर के पश्िचमी बंगाल के भाग के रूप में प्रशासन के सम्बन्ध में कोई कठिनाई आती है, तो राज्य सरकार, राजपत्र में आदेश द्वारा, ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के प्रयोजनों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों ।
(3) नियत दिन से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात्, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी भी शक्ति का प्रयोग नहीं किया जाएगा ।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किया गया कोई आदेश इस प्रकार किया जा सकेगा कि नियत दिन से किसी पूर्वतर तारीख तक वह भूतलक्षी न हो ।
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