केन्द्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948
(1948 का अधिनियम संख्यांक 61)
[20 सितम्बर, 1948]
***रेशम उद्योग का विकास केन्द्र के नियंत्रणाधीन करने के वास्ते उपबंध करने
के लिए और उस प्रयोजन के लिए एक केन्द्रीय रेशम बोर्ड
स्थापित करने के लिए
अधिनियम
यतः यह समीचीन है कि 2*** रेशम उद्योग का विकास केन्द्र के नियंत्रणाधीन करने के लिए उपबन्ध किया जाए और उस प्रयोजन के लिए एक केन्द्रीय रेशम बोर्ड स्थापित किया जाए ;
अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है : -
1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) यह अधिनियम केन्द्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 कहा जा सकेगा ।
[(2) इसका विस्तार *** सम्पूर्ण भारत पर है ।]
[2. संघ के नियंत्रण की समीचीनता के बारे में घोषणा-इसके द्वारा घोषित किया जाता है कि लोक हित में यह समीचीन है कि रेशम उद्योग को संघ अपने नियन्त्रण में ले ले ।]
3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो, -
(क) “बोर्ड" से इस अधिनियम के अधीन बनाया गया केन्द्रीय रेशम बोर्ड अभिप्रेत है ;
[(कक) “केन्द्रीय रेशम-कीट बीज परीक्षण प्रयोगशाला" से धारा 8छ की उपधारा (1) के अधीन स्थापित या प्रत्यायित केन्द्रीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला अभिप्रेत है ;]
(ख) “चरखे के कच्चे रेशम" से किसी ऐसे उपकरण की सहायता से जो शक्ति द्वारा चालित न हो, रेशम कीटकोषों से रील में लपेट कर निकाला गया कच्चा रेशम अभिप्रेत है ;
6[(खक) “समिति" से धारा 8क की उपधारा (1) के अधीन गठित केन्द्रीय रेशम-कीट बीज समिति अभिप्रेत है ;
(खख) “व्यौहारी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो रेशम-कीट बीज, कोष, चॉकी निर्मित रेशम-कीटों के क्रय और विक्रय, आयात या निर्यात का कारबार करता है और जिसके अंतर्गत किसी व्यौहारी का अभिकर्ता भी है ;
(खग) “निर्यात" से भारत के बाहर किसी स्थान पर भारत से बाहर ले जाना अभिप्रेत है ;]
(ग) “कच्चे रेशम के सूत्रण" से किसी ऐसे उपकरण की सहायता से जो शक्ति द्वारा चालित हो, रेशम कीटकोषों से रील में लपेट कर निकाला गया कच्चा रेशम अभिप्रेत है ;
6[(गक) “संकर प्राधिकरण समिति" से धारा 8घ की उपधारा (1) के अधीन गठित संकर प्राधिकरण समिति अभिप्रेत है ;
(गख) “आयात" से भारत के बाहर किसी स्थान से भारत में लाया जाना अभिप्रेत है ;
(गग) रेशम-कीट बीज के संबंध में अधिसूचित प्रकार या किस्म" से धारा 8ग की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित उसका कोई प्रकार या किस्म अभिप्रेत है ;]
(घ) “शक्ति" से ऊर्जा का कोई रूप अभिप्रेत है जिसका संचार यन्त्र द्वारा किया जाता है और जिसका उत्पादन मानव या पशु द्वारा नहीं किया जाता है तथा वैद्युत ऊर्जा इसके अन्तर्गत है ;
(ङ) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
6[(ङक) “रजिस्ट्रीकरण समिति" से धारा 8ङ की उपधारा (2) के अधीन गठित रजिस्ट्रीकरण समिति अभिप्रेत है ;
(ङख) “विनियम" से इस अधिनियम के अधीन समिति द्वारा बनाया गया विनियम अभिप्रेत है ;
(ङग) “रेशम-कीट बीज" या “बीज" से विशुद्ध रेशम-कीट प्रजातियों से उत्पादित सभी प्रकार के रेशम-कीट बीज अभिप्रेत है जिनके अंतर्गत दो या अधिक विशुद्ध प्रजातियों से उत्पादित संकर, सभी प्रकार के रेशम-कीट बीज कोष और उत्पादन या वाणिज्यिक समुपयोजन के प्रयोजन के लिए प्रयोग या निर्मित किए जाने के लिए आशयित उनके शलभ भी हैं ।
स्पष्टीकरण-इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए,
(i) “विशुद्ध प्रजाति" से मूल के सही लक्षणों सहित पुनरुत्पादक रेशम-कीट बीज के माध्यम से अनुरक्षित रेशम-कीट नस्ल या किस्म अभिप्रेत है ;
(ii) “संकर" से संकर ओज या संकर ऊर्जश्विता के समुपयोजन के उद्देश्य से दो या अधिक विशुद्ध प्रजातियों या मूल प्रजातियों से उत्पादित बीज अभिप्रेत है;ऱ्;
(ङघ) “रेशम-कीट बीज विश्लेषक" से धारा 8छ की उपधारा (3) के अधीन नियुक्त या अधिसूचित बीज विश्लेषक अभिप्रेत है ;
(ङङ) “रेशम-कीट प्रमाणीकरण अभिकरण" से धारा 8च के अधीन गठित या प्रत्यायित रेशम-कीट प्रमाणीकरण अभिकरण अभिप्रेत है ;
(ङच) “रेशम-कीट बीज अधिकारी" से धारा 8ज की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त या अधिसूचित बीज अधिकारी अभिप्रेत है;]
(च) “कते रेशम" से छिद्रित या खराब हुए कीटकोषों कीटकोषों, से रोयौ, रेशम के टुकड़ों, गट्ठियों या अन्य रेशम की कतरनों से कता हुआ रेशम का सूत अभिप्रेत है ;
(छ) “स्थायी समिति" से धारा 6 की उपधारा (2) के अधीन बनाई गई बोर्ड की स्थायी समिति अभिप्रेत है ।
4. बोर्ड का बनाया जाना-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक बोर्ड बनाएगी जो केन्द्रीय रेशम बोर्ड कहलाएगा ।
(2) बोर्ड पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा जिसे जंगम और स्थावर दोनों प्रकार की सम्पत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लगाए और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।
[(3) बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् : -
(क) एक अध्यक्ष जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ;
[(ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले तीन से अनधिक अधिकारी, जिनमें से एक उपाध्यक्ष के रूप में वस्त्र मंत्रालय के रेशम प्रभाग का प्रधान होगा और एक बोर्ड का सचिव होगा, दोनों अधिकारी भारत सरकार के संयुक्त सचिव की पंक्ति से न्यून के नहीं होंगे ;]
परन्तु किसी अधिकारी के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह विहित परिस्थितियों में बोर्ड की किसी बैठक में अपनी ओर से उपस्थित होने के लिए किसी अन्य अधिकारी को प्रतिनियुक्त करे ;
(ग) संसद् द्वारा निर्वाचित किए जाने वाले छह व्यक्ति जिनमें से चार लोक सभा से होंगे जो लोक सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे तथा दो राज्य सभा से होंगे जो राज्य सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए जाएंगेः
[परन्तु संसद् सदस्य, यथास्थिति, लोक सभा या राज्य सभा का सदस्य न रहने पर, बोर्ड का सदस्य नहीं रहेगा ।";]
(घ) [कर्नाटक] की सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले [पांच व्यक्ति,] जिनमें से एक कच्चे रेशम के सूत्रण के उद्योग का प्रतिनिधित्व करेगा और दो बाकी रेशम उत्पादन उद्योग का प्रतिनिधित्व करेंगे ;
(ङ) [मद्रास] सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाला [एक व्यक्ति] ;
(च) पश्चिमी बंगाल सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले दो व्यक्ति ;
[(छ) आन्ध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल की सरकारों में से प्रत्येक द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाला एक व्यक्ति ;]
(ज) जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाने वाला एक व्यक्ति;
(झ) कच्चे रेशम के उत्पादकों का और खण्ड (घ) से लेकर (छ) तक में विनिर्दिष्ट राज्यों से भिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले तीन से अनधिक व्यक्ति ;
(ञ) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले आठ व्यक्ति जिनमें से एक कते रेशम के उद्योग का, एक रेशम ऐंठने और बांटने के उद्योग का, एक रेशम बुनाई उद्योग का, एक श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करेगा तथा उनमें से दो रेशम उत्पादन के विशेषज्ञ होंगे ।
(4) बोर्ड के सदस्य उसकी निधियों में से ऐसे यात्रा और अन्य भत्ते प्राप्त करेंगे जो विहित किए जाएं ।
[(5) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सदस्य की पदावधि तीन वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि होगी जो विहित की जाए ।
(6) उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, -
(क) केंद्रीय सरकार अध्यक्ष को कम से कम तीन मास की अवधि की सूचना देने के पश्चात् उसकी नियुक्ति समाप्त कर सकेगी ;
(ख) अध्यक्ष केंद्रीय सरकार को कम से कम तीन मास की अवधि की लिखित सूचना देकर अपने पद का त्याग कर सकेगा और ऐसा पदत्याग उस सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किए जाने पर यह समझा जाएगा कि अध्यक्ष ने अपना पद रिक्त कर दिया है । ]
[4क. बोर्ड के सदस्य के रूप में नामनिर्देशित या नियुक्त किए जाने के लिए निरर्हता-कोई व्यक्ति सदस्य के रूप में नामनिर्देशित या नियुक्त किए जाने या बने रहने के लिए निरर्हित होगा यदि वह -
(क) भारत का नागरिक नहीं है ; या
(ख) किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है और कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है जिसमें, केन्द्रीय सरकार की राय में, नैतिक अधमता अन्तर्वलित है; या
(ग) अनुन्मोचित दिवालिया है ; या
(घ) सदस्य के रूप में कार्य करने में शारीरिक या मानसिक रूप से असमर्थ हो गया है ; या
(ङ) ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लेता है, जिसके कारण सदस्य के रूप में उसके कृत्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है ।]
5. नामनिर्देशनों के अभाव में केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार से भिन्न कोई सरकार कोई ऐसा नामनिर्देशन जैसा करने के लिए वह धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन हकदार है उस निमित्त विहित समय के अन्दर करने में असफल हो तो केन्द्रीय सरकार स्वयं नामनिर्देशन कर सकेगी ।
(2) जब बोर्ड का कोई सदस्य मर जाए, त्यागपत्र दे दे, हटा दिया जाए, भारत में न रहे, या कार्य करने के अयोग्य हो जाए तो धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन उस सदस्य को नामनिर्देशित करने के लिए हकदार प्राधिकारी या निकाय उस रिक्ति को भरने के लिए किसी व्यक्ति को नामनिर्देशित कर सकेगा और जहां ऐसा नामनिर्देशन उस निमित्त विहित समय के अन्दर न किया जाए वहां केन्द्रीय सरकार स्वप्रेरणा पर स्वयं वह नामनिर्देशन कर सकेगी ।
(3) बोर्ड द्वारा किया गया कोई कार्य केवल इस आधार पर प्रश्नास्पद नहीं किया जाएगा कि बोर्ड में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई त्रुटि विद्यमान है ।
6. उपाध्यक्ष और स्थायी समिति-(1) [उपाध्यक्ष] जो अध्यक्ष की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या जो अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(2) बोर्ड, स्वविवेकानुसार, एक स्थायी समिति अपनी ऐसी शक्तियों का प्रयोग और अपने ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के प्रयोजन के लिए बना सकेगा जैसे उस द्वारा प्रत्यायोजित किए जाएं और जो ऐसी शक्तियां या ऐसे कर्तव्य नहीं होंगे जिनका प्रत्यायोजन इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा प्रतिषिद्ध है ।
(3) स्थायी समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और बोर्ड द्वारा अपने सदस्यों में से निर्वाचित पांच अन्य सदस्य होंगे ।
7. बोर्ड का सचिव-[बोर्ड का सचिव] बोर्ड के नियंत्रण और निदेश के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जैसे विहित किए जाएं या जैसे बोर्ड अथवा अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
8. बोर्ड के कृत्य-(1) बोर्ड का कर्तव्य होगा कि वह *** रेशम उद्योग के विकास के संवर्धन के लिए ऐसे उपाय करे जैसे वह ठीक समझे ।
(2) पूर्वगामी उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उसमें निर्दिष्ट उपाय निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे -
(क) वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक अनुसंधान करना, उसमें सहायता देना या उसे प्रोत्साहित करना ;
(ख) शहतूत उत्पादन के बेहतर तरीकों के लिए उपाय खोजना, स्वस्थ रेशम के अण्डों का पोषण, विकास और वितरण, [रेशम कीटकोषों और रेशम की कतरनों को, यथास्थिति, रील में लपेटना या कातना,] कच्चे रेशम की क्वालिटी और उत्पादन में सुधार करना जिसके लिए यदि आवश्यक हो तो सभी कच्ची रेशम का विपणन केवल उसके पश्चात् किया जाना अनिवार्य कर देना जबकि उसे उचित रूप से साजसामान युक्त रेशम अनुकूलन गृहों में परीक्षित कर लिया गया हो और उसका श्रेणीकरण कर लिया गया हो ;
। । । । (घ) कच्चे रेशम के विपणन में सुधार करना ;
(ङ) ऐसे व्यक्तियों से जो विहित किए जाएं सांख्यिकी का संग्रहण ;
[(च) कोई अन्य कर्तव्य करना जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन बोर्ड में निहित किया जाए ।]
(3) बोर्ड का यह भी कर्तव्य होगा कि वह -
[(क) रेशम-कीट बीज के उत्पादन, प्रदाय, वितरण, व्यापार और वाणिज्य, रेशम उद्योग और उसके उत्पादों के, विकास जिसके अंतर्गत निर्यात और आयात भी हैं, से संबंधित सभी मामलों पर केन्द्रीय सरकार को सलाह दे;]
। । । ।
(ग) 2*** रेशम उद्योग के बारे में ऐसी *** रिपोर्ट तैयार करे और दे जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा अपेक्षित की जाएं ।
[8क. केन्द्रीय रेशम-कीट बीज समिति का गठन-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय रेशम-कीट बीज समिति के नाम से ज्ञात एक समिति का गठन राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, करेगी, जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगी :
(क) बोर्ड का उपाध्यक्ष जो समिति का पदेन अध्यक्ष होगा ;
(ख) (i) राज्यों से रेशम उत्पादन से सम्बद्ध सात पदधारी, जो भारत सरकार के उप सचिव की पंक्ति से नीचे के न हों-सदस्य ;
(ii) रेशम-कीट बीज विकास के क्षेत्र से दो विशेषज्ञ-सदस्य ;
(iii) रेशम उत्पादन सेक्टर का प्रतिनिधित्व करने के लिए पांच व्यक्ति जिनमें से तीन कृषक होंगे और दो रीलर होंगे-सदस्य ;
जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड के सदस्यों में से नामनिर्देशित किया जाएगा ;
(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाने वाला राष्ट्रीय रेशम-कीट बीज संगठन का निदेशक-सदस्य ; और
(घ) बोर्ड का सचिव, जो समिति का पदेन सचिव होगा ।
(2) समिति, ऐसे प्रयोजनों के लिए और ऐसी रीति में, जो वह ठीक समझे, किसी व्यक्ति को जिसकी सहायता और सलाह, वह इस अधिनियम के उपबंधों के अनुपालन के लिए आवश्यक समझे, अपने साथ सहयोजित कर सकेगी और इस प्रकार सहयोजित व्यक्ति को उन प्रयोजनों से, जिनके लिए उसे सहयोजित किया गया है, सुसंगत समिति की कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा और वह ऐसे भत्ते और फीस प्राप्त करने का हकदार होगा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किया जाए ।
(3) उपधारा (1) के अधीन नामनिर्देशित सदस्य, जब तक कि उसका स्थान पद त्याग, मृत्यु द्वारा या अनयथा पहले रिक्त नहीं हो जाता है ; अपने नामनिर्देशन की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा और पुनः नामनिर्देशन के लिए पात्र होगा :
परन्तु उपधारा (1) के अधीन नामनिर्देशित व्यक्ति उतने समय तक ही पद धारण करेगा जितने समय तक वह उस नियुक्ति को धारण करता है जिसके फलस्वरूप उसका नामनिर्देशन किया गया था ।
(4) समिति का कोई कृत्य या कार्यवाही मात्र इस कारण से अविधिमान्य नहीं हो जाएगी कि,
(i) उसमें कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ; या
(ii) समिति की प्रक्रिया से संबंधित कोई ऐसा विषय है जो मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं डालता है ।
(5) केन्द्रीय सरकार समिति को ऐसे अन्य तकनीकी तथा अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी जो इस अधिनियम के अधीन कृत्यों के दक्ष निष्पादन के लिए आवश्यक हों ।
(6) (क) समिति, ऐसे समय और स्थान पर अधिवेशन करेगी और अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार की बाबत (जिसके अंतर्गत अधिवेशन में गणपूर्ति भी है) ऐसी प्रक्रिया का अनुपालन करेगी, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
(ख) अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में समिति के उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया कोई सदस्य, समिति के अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा ।
(ग) समिति के अधिवेशन में सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जाएगा और मतों की समानता की दशा में, अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में अधिवेशन की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का दूसरा या निर्णायक मत होगा ।
8ख. समिति की शक्तियां और कृत्य-(1) समिति उपधारा (2) में यथाविनिर्दिष्ट उपाय करके इस अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होगी ।
(2) पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इसमें निर्दिष्ट उपाय निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे
(i) रेशम-कीट बीज के प्रकार या किस्म के लिए क्वालिटी मानक अधिकथित करना ;
(ii) वाणिज्यिक उपयोग के लिए रेशम-कीट प्रजातियों और संकरों का प्राधिकरण ;
(iii) रेशम-कीट बीजों के उत्पादन के लिए क्वालिटी मानक अधिकथित करना ;
(iv) वे शर्तें और अपेक्षाएं अधिकथित करना जिन्हें रेशम-कीट बीज या ग्रेनेज के उत्पादन के लिए प्रसुविधाएं स्थापित करने के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा पूरा किया जाना है ;
(v) रजिस्ट्रीकृत उत्पादकों द्वारा विक्रय किए जाने वाले बीजों के लिए प्रमाणन और रेशम-कीट बीज परीक्षण प्रक्रियाएं अधिकथित करना ;
(vi) रेशम-कीट बीज उत्पादकों और व्यौवहारियों का रजिस्ट्रीकरण करना और विनिर्दिष्ट क्वालिटी मानक तथा बीज प्रमाणन अपेक्षाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण प्रक्रिया का नियंत्रण और पर्यवेक्षण करना ;
(vii) रेशम-कीट बीज के निर्यात और आयात के लिए शर्तें और मानक अधिकथित करना और उनका अनुपालन करना ;
(viii) रेशम-कीट बीज उत्पादन का कार्यक्रम बनाना और उसकी योजना तैयार करना ;
(ix) केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों को पूर्वोक्त विषयों के संबंध में सलाह देना ; और
(x) रेशम-कीट बीज के उत्पादन, प्रदाय, वितरण, व्यापार और वाणिज्य से संबंधित और उनके आनुषंगिक ऐसे अन्य विषय, जो समिति द्वारा समय-समय पर बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
8ग. रेशम-कीट बीज के प्रकार या किस्म को अधिसूचित करने की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की, समिति से परामर्श करने के पश्चात्, यह राय है कि उत्पादन के प्रयोजन के लिए और वाणिज्यिक उपयोग के लिए किसी प्रकार या किस्म के रेशम-कीट बीज की क्वालिटी को विनियमित करना आवश्यक या समीचीन है तो, वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे प्रकार या किस्म को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित प्रकार या किस्म घोषित कर सकेगी और भिन्न-भिन्न राज्यों के लिए या उनके भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार या किस्में अधिसूचित की जा सकेंगी और ऐसे रेशम-कीट बीज के प्रत्येक उत्पादक या व्यौहारी का यह दायित्व होगा कि वह रेशम-कीट बीज के ऐसे अधिसूचित प्रकारों या किस्मों का उत्पादन या व्यवहार करे, किसी अन्य का नहीं ।
(2) केन्द्रीय सरकार, समिति की सिफारिश पर, अधिसूचना द्वारा -
(क) रेशम-कीट बीज के अधिसूचित प्रकार या किस्म के लिए न्यूनतम क्वालिटी मानक और शर्तों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, और
(ख) यह उपदर्शित करने के लिए चिह्न या लेबल विनिर्दिष्ट कर सकेगी कि ऐसे रेशम-कीट बीज विनिर्दिष्ट क्वालिटी मानकों के अनुरूप है ।
8घ. संकर प्राधिकरण समिति-(1) समिति एक संकर प्राधिकरण समिति का गठन करेगी, जिसमें बोर्ड का सचिव, जो संकर प्राधिकरण समिति का अध्यक्ष होगा और उसके कर्तव्यों के निर्वहन में उसकी सहायता के लिए उतने अन्य सदस्य होंगे जो समिति अवधारित करे ।
(2) संकर प्राधिकरण समिति का यह कर्तव्य होगा कि वह स्वप्रेरणा से या उसको किए गए आवेदन पर और सम्यक् विचारण, परीक्षण और ऐसी अन्य अपेक्षाओं को, जो वह अपने समाधान के लिए आवश्यक समझे पूरा करने के पश्चात् समिति को उत्पादन और वाणिज्यिक उपयोग के लिए बाजार में उपलब्ध रेशम-कीट बीज, रेशम-कीट संकर बीज और प्रजातियों के प्रकार और किस्मों की केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना के लिए सिफारिश करे ।
8ङ. रजिस्ट्रीकरण समिति-(1) उत्पादन या वाणिज्यिक उपयोग के प्रयोजन के लिए किसी प्रकार या किस्म के रेशम-कीट बीज का किसी उत्पादन या व्यौहारी द्वारा तब तक उत्पादन, प्रदाय, वितरण, व्यापार, विक्रय या अन्यथा, व्ययन नहीं किया जाएगा जब तक कि वह रजिस्ट्रीकरण समिति द्वारा ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, रजिस्ट्रीकृत न हो ।
(2) समिति एक रजिस्ट्रीकरण समिति का गठन करेगी जिसमें एक अध्यक्ष और उसके ऐसे कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए दो से अन्यून उतने सदस्य होंगे जो समिति द्वारा अवधारित किए जाएं ।
(3) रजिस्ट्रीकरण समिति को -
(क) इन दावों की संवीक्षा करने के पश्चात् कि रेशम-कीट बीज केन्द्रीय सरकार द्वारा सम्यक् रूप से अधिसूचित प्रकार या किस्म के अनुरूप हैं, अधिसूचित प्रकार या किस्म के रेशम-कीट बीज को रजिस्टर करने की शक्ति होगी ;
(ख) यह सुनिश्चित करने के पश्चात् कि बीज उत्पादन की प्रसुविधा केन्द्रीय सरकार द्वारा यथाअधिसूचित क्वालिटी मानक बनाए रखने की अपेक्षा या शर्त को पूरा करती है, रेशम-कीट बीज उत्पादक को रजिस्टर करने की शक्ति होगी ;
(ग) रेशम-कीट व्यौहारी को आवेदन में किए गए उनके दावों की संवीक्षा करने के पश्चात् रजिस्टर करने की शक्ति होगी ;
(घ) ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करने की शक्ति होगी जो उसे सौंपे जाएं ।
(4) उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए प्रत्येक आवेदन, ऐसे प्ररूप में किया जाएगा और उसमें शर्तों सहित ऐसी विशिष्टियां होंगी और उसके साथ ऐसी फीस होगी, जो विहित की जाएं ।
8च. बीज प्रमाणन अभिकरण का गठन-समिति आदेश द्वारा, उत्पादकों और व्यौहारियों के रजिस्ट्रीकरण के लिए निरीक्षण करने के लिए ऐसे मानदण्डों के अनुसार जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं एक या अधिक रेशम-कीट बीज प्रमाणन अभिकरणों का गठन कर सकेगी या विद्यमान प्रमाणन अभिकरणों का प्रत्यायन कर सकेगी ।
8छ. केन्द्रीय बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं का गठन-(1) समिति, आदेश द्वारा, केन्द्रीय बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना कर सकेगी और बोर्ड या राज्य सरकारों की ऐसी विद्यमान प्रयोगशालाओं का, जिनमें ऐसी सुविधाएं हैं जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, प्रत्यायन कर सकेगी ।
(2) केन्द्रीय बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्रत्यायित प्रयोगशालाएं ऐसे कृत्य करेंगी, जो उन्हें समिति द्वारा समय-समय पर सौंपे जाएं ।
(3) समिति, आदेश द्वारा बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं में, बीज विश्लेषक के रूप में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी जिसे वह ठीक समझे या प्रत्यायित प्रयोगशालाओं के ऐसे पदाधिकारियों या कर्मचारियों को जिनके पास ऐसी अर्हताएं हैं जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, नियुक्त या अधिसूचित कर सकेगी और उनकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाएं परिभाषित कर सकेगी ।
8ज. बीज अधिकारियों की नियुक्ति-(1) समिति, आदेश द्वारा, बीज अधिकारियों के रूप में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी जिसे वह ठीक समझे या बोर्ड के ऐसे कर्मचारी को जिसके पास ऐसी अर्हताएं हैं जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, अधिसूचित कर सकेगी और उनकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाएं परिभाषित कर सकेगी ।
(2) प्रत्येक बीज अधिकारी समिति के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन होगा और बीज उत्पादकों और व्यौहारियों के पास, उनके रजिस्ट्रीकरण के पहले या उसके पश्चात् उपलब्ध बीज का यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस संबंध में अधिकथित मानकों और शर्तों का पालन किया जा रहा है, निरीक्षण करने के लिए उत्तरदायी होगा ।
(3) बीज अधिकारी,
(क) (i) किसी उत्पादक या व्यौहारी से ; या
(ii) किसी ऐसे व्यक्ति से जो ऐसे क्रेता या परेषिती से ऐसा बीज संप्रेषित करने के क्रम में है ; या
(iii) ऐसे बीज के परिदान के पश्चात्, क्रेता या परेषिती से,
किसी प्रकार या किस्म की किसी रेशम-कीट बीज का नमूना ले सकेगा ;
(ख) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ।
8झ. रेशम-कीट बीज का निर्यात और आयात-(1) समिति, समय-समय पर केन्द्रीय सरकार को रेशम-कीट बीज के निर्यात और आयात के संबंध में सलाह देगी और केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा ऐसे निबंधन और शर्तें जिनके अंतर्गत रेशम-कीट बीज के निर्यात और आयात के लिए निर्यात और आयात नीति भी है, विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।
(2) रेशम-कीट बीज का संपूर्ण आयात, धारा 8ग की उपधारा (2) के अधीन विनिर्दिष्ट क्वालिटी मानकों के अनुरूप होगा ।
(3) केन्द्रीय सरकार ऐसे आयात को शासित करने के लिए शर्तों और क्वालिटी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए, आदेश द्वारा सहायक आयुक्त के स्तर के अधिकारियों को सीमाओं और पत्तनों पर निरीक्षण की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी और ऐसे अधिकारी इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए बीज अधिकारी समझे जाएंगे ।
(4) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, अनुसंधान के प्रयोजनों के लिए ऐसी मात्रा में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विनिर्दिष्ट की जाएं, रेशम-कीट बीज की अरजिस्ट्रीकृत किस्म के आयात की अनुज्ञा दे सकेगी ।
(5) केन्द्रीय सरकार, यदि वह ऐसा समझती है कि इसमें रेशम उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकेगा या ऐसे अन्य आधारों पर जिन्हें वह आवश्यक समझे, अधिसूचना द्वारा, किसी प्रकार या किस्म के रेशम-कीट बीज के आयात या निर्यात को निर्बन्धित कर सकेगी ।
8ञ. रेशम-कीट बीज उत्पादकों द्वारा विवरण-प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत रेशम-कीट बीज उत्पादक और व्यौहारी समिति को ऐसे प्ररूप में, ऐसी रीति और ऐसे अंतरालों पर जो विनियम द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, सावधिक विवरण देगा ।]
9. बोर्ड की निधियां-(1) केन्द्रीय सरकार समय-समय पर बोर्ड को ऐसी राशियों का अनुदान करेगी जिन्हें केन्द्रीय सरकार बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक समझे ।
(2) बोर्ड की निधियां ऐसे बैंक में रखी जाएंगी या ऐसी रीति में विनिहित की जाएंगी जो विहित की जाए, और बोर्ड द्वारा उनका व्यय इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन में अथवा ऐसे व्ययों की पूर्ति के लिए ही किया जाएगा जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा प्राधिकृत हों ।
10. कतिपय प्रकार के रेशम पर उपकर लगाना-(1) उस तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे, उन राज्यक्षेत्रों में जिन पर इस अधिनियम का तत्समय विस्तार है रील में लपेटकर निकाले गए सब कच्चे रेशम के सूत्रण पर और सब कते रेशम पर ऐसी दर पर जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा समय-समय पर नियत करे एक उत्पादन-शुल्क इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपकर के रूप में उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा ।
(2) उक्त उत्पादन-शुल्क कच्चे रेशम के सूत्रण या कते रेशम के रील-कर्ताओं द्वारा संदेय होगा और उनके द्वारा बोर्ड को उसका संदाय उस निमित्त बोर्ड से मांग की सूचना मिलने की तारीख से एक मास के अन्दर किया जाएगा ।
(3) उक्त उत्पादन-शुल्क इस प्रकार वसूल किया जा सकेगा मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो ।
(4) कच्चे रेशम के सूत्रण या कते रेशम के रीलकर्ताओं द्वारा इस अधिनियम के अधीन संदेय उत्पाद-शुल्क का परिमाण निर्धारित करने में बोर्ड को समर्थ बनाने के प्रयोजनों के लिए,
(क) बोर्ड शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वक्षरा वह अवधि नियत करेगा जिसके संबंध में निर्धारण किया जाएगा ; और
(ख) कच्चे रेशम के सूत्रण या कते रेशम का प्रत्येक रीलकर्ता विहित समय के अन्दर बोर्ड को एक विवरणी देगा जिसमें ऐसी अवधि के दौरान रील में लपेटे गए कच्चे रेशम के सूत्रण या कते रेशम का कुल परिमाण विनिर्दिष्ट होगा ।
(5) यदि कच्चे रेशम के सुत्रण या कते रेशम का कोई रीलकर्ता विहित समय के अन्दर ऐसी विवरणी देने में असफल हो या ऐसी विवरणी दे जिसकी बाबत बोर्ड के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि वह अशुद्ध या त्रुटिपूर्ण है, तो बोर्ड ऐसे रीलकर्ता द्वारा संदेय परिमाण का निर्धारण ऐसी रीति से कर सकेगा जैसी विहित की जाए ।
(6) इस धारा के अधीन निर्धारण से अपने आप की व्यथित समझने वाला कोई रीलकर्ता उपधारा (2) के अधीन सूचना मिलने के तीन मास के अन्दर, जिला न्यायाधीश या ऐसे अन्य सिविल न्यायिक अधिकारी से जो विहित किया जाए उस निर्धारण को रद्द करने या उपान्तरित करने के लिए आवेदन कर सकेगा, और ऐसा जिला या न्यायिक अधिकारी बोर्ड को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, ऐसा आदेश करेगा जैसा वह ठीक समझे और ऐसा आदेश अन्तिम होगा ।
[(7) बोर्ड को संदत्त किए गए उत्पाद-शुल्क के आगम प्रथमतः भारत की संचित निधि में जमा किए जाएंगे और केन्द्रीय सरकार तत्पश्चात् समय-समय पर बोर्ड को ऐसे आगमों में से ऐसी धन राशियां दे सकेगी जैसी वह ठीक समझे ।]
11. केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण-(1) बोर्ड के सब कार्य केन्द्रीय सरकार के नियंत्रणाधीन होंगे जो बोर्ड द्वारा किए गए किसी कार्य या दिए गए किसी आदेश को रद्द कर सकेगी, निलम्बित कर सकेगी या उपान्तरित कर सकेगी जैसा भी वह ठीक समझे ।
(2) बोर्ड के अभिलेख केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा सब युक्तियुक्त समयों पर निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे ।
12. बोर्ड के लेखे-(1) बोर्ड अपने द्वारा प्राप्त और व्यय की गई सब धनराशियों के बारे में ऐसे लेखे ऐसी रीति और प्ररूप में रखेगा जो विहित किए जाएं ।
[(2) बोर्ड के लेखे भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं संपरीक्षित किए जाएंगे और ऐसी संपरीक्षा के संबंध में उपगत कोई व्यय बोर्ड द्वारा नियंत्रक और महोलेखापरीक्षक को संदेय होगा ।
(3) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के तथा बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के ऐसी संपरीक्षा के संबंध में वे ही अधिकार, विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं, और विशिष्टतया, उसे बहियां, लेखा, सम्बद्ध वाऊचरों तथा अन्य दस्तावेज और कागज पेश किए जाने की मांग करने और बोर्ड के कार्यालयों में से किसी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा इस निमित्त उसके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित बोर्ड के लेखे तद्विषयक संपरीक्षा रिपोर्ट सहित केन्द्रीय सरकार को हर वर्ष भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
(5) ऐसे प्रमाणित बोर्ड के लेखाओं की एक प्रति, उन पर संपरीक्षक की रिपोर्ट के सहित, उसी समय बोर्ड को भेजी जाएगी ।]
[12क. वार्षिक रिपोर्ट-बोर्ड प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए उस वर्ष के दौरान अपने क्रियाकलापों और सफलताओं की एक रिपोर्ट तैयार करेगा और उस रिपोर्ट को ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी तारीख को या उसके पूर्व जो विहित की जाए केन्द्रीय सरकार को पेश करेगा और वह सरकार उस रिपोर्ट की एक प्रति को संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।]
13. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम , शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
[(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना इस धारा के अधीन बनाए गए नियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :
(i) बोर्ड के सदस्यों की पदावधि, वे परिस्थितियां जिनमें और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा सदस्य हटाए जा सकेंगे और बोर्ड में आकस्मिक रिक्तियों का भरा जाना ;
(ii) कारबार के संचालन के लिए बोर्ड की बैठकों में और स्थायी समिति में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया तथा सदस्यों की वह संख्या जिससे किसी बैंठक में कोरम पूरा होगा ;
(iii) बोर्ड द्वारा किए गए कारबार के अभिलेखों का बोर्ड द्वारा रखा जाना और उसकी प्रतियों का केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत किया जाना ;
(iv) प्रत्येक वर्ष की जाने वाली न्यूनतम बैठकों की संख्या ;
(v) व्यय उपगत करने के संबंध में बोर्ड, उसके अध्यक्ष और स्थायी समिति की शक्ति ;
(vi) वे शर्तें जिनके अधीन बोर्ड भारत के बाहर व्यय उपगत कर सकेगा ;
(vii) बोर्ड की प्राप्तियों और व्यय के बजट प्राक्कलनों की तैयारी और वह प्राधिकारी जिस द्वारा वे प्राक्कलन मन्जूर किए जाने हों ;
(viii) बोर्ड की आय और व्यय के लेखाओं *** का रखा जाना ;
[(viiiक) बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट का प्ररूप और वह तारीख जिसको या जिसके पूर्व उसे केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा ; ]
(ix) बोर्ड की निधियों का बैंक में निक्षेप और ऐसी निधियों का विनिधान ;
(x) प्राक्कलित बचतों का बजट के एक शीर्ष से बजट के किसी दूसरे शीर्ष को पुनर्विनियोग ;
(xi) वे शर्तें जिनके अधीन बोर्ड निधियां उधार ले सकेगा ;
(xii) वे शर्तें जिनके अधीन और वह रीति जिसमें बोर्ड द्वारा या उसकी ओर से संविदाएं की जा सकेंगी ;
(xiii) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड की किन्हीं शक्तियों और कर्तव्यों का स्थायी समिति या अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या बोर्ड के सदस्यों अथवा अधिकारियों को प्रत्यायोजन ;
(xiv) कर्मचारिवृन्द जो बोर्ड द्वारा नियोजित किए जा सकेंगे और बोर्ड के अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्ते, छुट्टी ओर सेवा की अन्य शर्तें ;
(xv) बोर्ड के और स्थायी समिति के सदस्यों के यात्रा और अन्य भत्ते ;
[(xvक) धारा 8क की उपधारा (2) के अधीन समिति से सहयुक्त व्यक्तियों के भत्ते या फीस विनिर्दिष्ट करना ;
(xvख) धारा 8ख की उपधारा (2) के खण्ड (न्) के अधीन रेशम-कीट बीज के उत्पादन, प्रदाय, वितरण, व्यापार और वाणिज्य से, आनुषंगिक मामले ;
(xvग) धारा 8ङ की उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रीकरण समिति द्वारा किसी उत्पादक या व्यौहारी के रजिस्ट्रीकरण की रीति और उपधारा (4) के अधीन आवेदन के लिए प्ररूप और संदत्त की जाने वाली फीस ;]
(xvi) वे प्रयोजन जिनके लिए बोर्ड की निधियां व्यय की जा सकेंगी ;
(xvii) बोर्ड के और उसकी स्थायी समिति के रजिस्टरों और अन्य अभिलेखों का रखा जाना ;
(xviii) कच्चे रेशम या रेशम के किसी उत्पाद के सम्बन्ध में किसी जानकारी या सांख्यिकी का संग्रहण ;
[ (xix) कच्चे रेशम और रेशम उद्योग के उत्पादों का श्रेणीकरण, विपणन, विकास और वितरण की रीति;]
(xx) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए ।
। । । ।
[13क. विनियम बनाने की शक्ति-(1) समिति, बोर्ड के परामर्श से और केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, उन सभी विषयों का उपबंध करने के लिए, जिनके लिए इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों से संगत विनियम, अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :
(i) धारा 8क की उपधारा (6) के खण्ड (क) के अधीन समिति के अधिवेशन में कारबार संव्यवहार की बाबत प्रक्रिया ;
(ii) धारा 8ख की उपधारा (2) के अधीन रेशम-कीट बीज का प्रकार या किस्म, उत्पादन, परीक्षण, प्रदाय, वितरण, व्यापार और वाणिज्य तथा निर्यात और आयात से संबंधित विभिन्न मानक अधिकथित करना ;
(iii) धारा 8च के अधीन केन्द्रीय रेशम-कीट बीज प्रमाणन अभिकरण स्थापित करने के लिए मानदंड विनिर्दिष्ट करना ; धारा 8छ की उपधारा (1) और उपधारा (3) के अधीन केन्द्रीय बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं के मानदंड और अधिकारिता तथा बीज विश्लेषक की अर्हताएं और धारा 8ज की उपधारा (1) और उपधारा (3) के खण्ड (ख) के अधीन बीज अधिकारियों की अर्हताएं और उनकी अन्य शक्तियां विनिर्दिष्ट करना ;
(iv) वह प्ररूप, रीति और वे अंतराल जिन पर उत्पादक और व्यौहारी द्वारा धारा 8ञ के अधीन विवरण दिया जा सकेगा ।
13ख. नियमों, विनियमों और अधिसूचनाओं का रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, विनियम और जारी की गई अधिसूचना बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा या रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम या अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम, विनियम और अधिसूचना नहीं बनाया जाना चाहिए या नहीं बनाई जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा या हो जाएगी, किन्तु उस नियम या विनियम या अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
14. शास्तियां -[(1)] यदि कोई व्यक्ति, -
(क) इस अधिनियम के अधीन दी जाने वाली किसी विवरणी में कोई ऐसा कथन करेगा जो मिथ्या है और जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, या
(ख) इस अधिनियम के द्वारा या इसके अधीन [बोर्ड समिति और रजिस्ट्रीकरण समिति के किसी अधिकारी को प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में या उस पर अधिरोपित किसी कर्तव्य के निर्वहन में उसे बाधित करेगा, या
(ग) किसी लेखा बही या अन्य अभिलेख को अपने नियंत्रण या अपनी अभिरक्षा में रखते हुए ऐसी बही या अभिलेख को पेश करने में, इस अधिनियम के अधीन वैसा करने के लिए अपेक्षित होने पर, असफल होगा,
तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से दण्डनीय होगा ।
[(2) यदि उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध करने वाला व्यक्ति कम्पनी हो तो प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था उसने ऐसे अपराध का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, जहां उपधारा (1) के अधीन कोई अपराध कम्पनी के किसी निदेशक या प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए
(क) “कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है ; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में “निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।]
[14क. धारा 8ग और धारा 8ङ के उल्लंघन के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम की धारा 8ग और धारा 8ङ या उसके अधीन बनाए गए विनियमों या रेशम-कीट बीज विनियमों से संबंधित किसी अधिसूचना के उपबंधों का उल्लंघन करेगा तो वह रेशम-कीट बीज का उत्पादन करने के रजिस्ट्रीकरण के निलंबन, रद्दकरण के अतिरिक्त पांच हजार रुपए के जुर्माने से जो पच्चीस हजार रुपए तक बढ़ाया जा सकेगा, दण्डनीय होगा ।
। । । । ।
16. विधिक कार्यवाही का वर्जन-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही बोर्ड के या बोर्ड के किसी सदस्य या अधिकारी के विरुद्ध न होगी ।
[16क. अन्य अधिनियमितियों से असंगत अधिनियम और नियमों, आदि का प्रभाव-इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के उपबंध, इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति या इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति के कारण प्रभाव रखने वाली वाली किसी अन्य लिखत में अंतर्विष्ट उससे असंगत किसी बात के होते हुए प्रभावी होंगे ।]
17. [केन्द्रीय सरकार की अस्थायी शक्तियां ।]-केन्द्रीय रेशम बोर्ड (संशोधन) अधिनियम,1953 (1953 का 31) की धारा 11 द्वारा निरसित ।]
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