कलकत्ता भूमिगत रेल (प्रचालन और अनुरक्षण)
अस्थायी उपबन्ध अधिनियम, 1985
(1985 का अधिनियम संख्यांक 10)
[16 फरवरी, 1985]
कलकत्ता भूमिगत रेल के प्रचालन और अनुरक्षण के लिए नियमित
इन्तजाम किए जाने तक उसके प्रचालन और अनुरक्षण
का और उससे संबंधित विषयों का अस्थायी
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत के गणराज्य के पैंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ और लागू होना-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कलकत्ता भूमिगत रेल (प्रचालन और अनुरक्षण) अस्थायी उपबंध अधिनियम, 1985 है ।
(2) यह 22 अक्तूबर, 1984 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
(3) यह कलकत्ता महानगर को लागू होगा ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) कलकत्ता भूमिगत रेल प्रशासन" या भूमिगत रेल प्रशासन" से सन्निर्माण अधिनियम की धारा 3 के अधीन नियुक्त भूमिगत रेल का महाप्रबंधक अभिप्रेत है;
(ख) आयुक्त" से सन्निर्माण अधिनियम की धारा 27 के अधीन नियुक्त भूमिगत रेल का आयुक्त अभिप्रेत है;
(ग) सन्निर्माण अधिनियम" से भूमिगत रेल (संकर्म-सन्निर्माण) अधिनियम, 1978 (1978 का 33) अभिप्रेत है;
(घ) भूमिगत रेल" से सन्न्िर्माण अधिनियम के उपबंधों के अधीन कलकत्ता महानगर में सन्निर्मित भूमिगत रेल का ऐसा प्रभाग अभिप्रेत है जो तत्समय यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए उपलभ्य है और उसके अन्तर्गत है-
(i) भूमिगत रेल से अनुलग्न भूमि की सीमाएं दर्शित करने वाले सीमा चिह्नों के भीतर की सब भूमि;
(ii) भूमिगत रेल के प्रयोजनों के लिए या उनके सम्बन्ध में रेल की सब कार्य चालित लाइनें, साइडिंग, यार्ड या शाखाएं;
(iii) भूमिगत रेल के प्रयोजनों के लिए या उसके सम्बन्ध में सन्निर्मित सभी स्टेशन, कार्यालय, संवातन शैफ्ट और वाहिनी, भांडागार, कर्मशालाएं, विनिर्माण शालाएं, स्थिर संयंत्र और मशीनरी, शेड, डिपो और अन्य संकर्म;
(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ।
(2) उन सभी अन्य शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु भारतीय रेल अधिनियम,1890 (1890 का 9) या भूमिगत रेल (संकर्म-सन्निर्माण) अधिनियम, 1978 (1978 का 33) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उन अधिनियमों में हैं ।
अध्याय 2
कलकत्ता भूमिगत रेल प्रशासन
3. कलकत्ता भूमिगत रेल प्रशासन का भूमिगत रेल के प्रचालन और अनुरक्षण के लिए उत्तरदायी होना-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, कलकत्ता भूमिगत रेल प्रशासन, भूमिगत रेल के प्रचालन और अनुरक्षण के लिए उत्तरदायी होगा ।
(2) कलकत्ता भूमिगत रेल प्रशासन इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए, ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को, जिन्हें वह आवश्यक समझे, सेवा के ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर नियुक्त कर सकेगा जो विहित की जाएं ।
4. भूमिगत रेल चालू किए जाने के लिए केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी की अपेक्षा-(1) यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए कोई भूमिगत रेल केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से ही चालू की जाएगी, अन्यथा नहीं ।
(2) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन अपनी मंजूरी देने से पूर्व, सन्निर्माण अधिनियम की धारा 27 की उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन आयुक्त द्वारा दी गई रिपोर्ट पर (चाहे वह इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात् दी गई हो) और अन्य सुसंगत बातों पर विचार करने के पश्चात्, अपना समाधान करेगी कि भूमिगत रेल को, उसका उपयोग करने वाली जनता को किसी खतरे के बिना, चालू किया जा सकता है ।
(3) इस धारा के अधीन दी गई मंजूरी या तो आत्यन्तिक हो सकेगी या ऐसी शर्तों के अधीन हो सकेगी जिन्हें केन्द्रीय सरकार लोक सुरक्षा के लिए आवश्यक समझे ।
(4) जहां इस धारा के अधीन भूमिगत रेल के चालू किए जाने के लिए कोई मंजूरी किन्हीं शर्तों के अधीन रहते हुए दी जाती है वहां ऐसी रेल का तब तक कार्यचालन या उपयोग नहीं किया जाएगा जब तक ऐसी शर्तें केन्द्रीय सरकार के समाधानप्रद रूप में पूरी नहीं कर दी जाती हैं ।
अध्याय 3
भूमिगत रेल चलाने के लिए विशेष उपबन्ध
5. माल वहन-(1) कोई व्यक्ति, जब वह भूमिगत रेल में यात्रा कर रहा है विहित मात्रा और वजन से अनधिक निजी माल असबाब वाले छोटे यात्री सामान से भिन्न कोई माल, अपने साथ वहन नहीं करेगा ।
(2) जहां कोई व्यक्ति उपधारा (1) के उपबन्धों के उल्लंघन में भूमिगत रेल में यात्रा करता है वहां उसे, इस बात के होते हुए भी कि उसके पास ऐसी रेल में किसी यात्रा के लिए विधिमान्य पास या टिकट है, भूमिगत रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसे ऐसा भूमिगत रेल पदधारी अपनी सहायता के लिए कहे, रेलगाड़ी में से हटाया जा सकेगा ।
6. महिलाओं के लिए कक्षों के आरक्षण का आवश्यक न होना-भूमिगत रेल प्रशासन के लिए किसी रेलगाड़ी में महिलाओं के अनन्य उपयोग के लिए किसी कक्ष का आरक्षण करना आवश्यक नहीं होगा ।
7. खतरनाक या घृणोत्पादक माल-(1) कोई व्यक्ति भूमिगत रेल पर कोई खतरनाक या घृणोत्पादक माल नहीं ले जाएगा या नहीं ले जाने देगा ।
(2) यदि किसी भूमिगत रेल पदधारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसा कोई माल किसी यात्री की अभिरक्षा में किसी पैकेज में है तो वह उसकी अन्तर्वस्तुओं का अभिनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए उस पैकेज को खुलवा सकेगा ।
8. भूमिगत रेल पर घृणोत्पादक या खतरनाक माल ले जाने या ले जाने देने के लिए शास्ति-(1) यदि धारा 7 की उपधारा (1) के उल्लंघन में, कोई व्यक्ति भूमिगत रेल पर कोई घृणोत्पादक माल ले जाएगा या ले जाने देगा तो वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(2) यदि धारा 7 की उपधारा (1) के उल्लंघन में, कोई व्यक्ति भूमिगत रेल पर कोई खतरनाक माल ले जाएगा या ले जाने देगा तो वह, कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(3) यदि कोई व्यक्ति भूमिगत रेल पर कोई घृणोत्पादक माल या खतरनाक माल ले जाएगा या ले जाने देगा तो वह उपधारा (1) या उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट शास्तियों के अतिरिक्त ऐसी किसी हानि, क्षति या नुकसान के लिए भी उत्तरदायी होगा जो ऐसे माल के भूमिगत रेल पर इस प्रकार लाए जाने के कारण कारित हुई हो ।
9. कक्षों आदि में धूम्रपान-(1) कोई व्यक्ति भूमिगत रेल के किसी कक्ष या सवारी डिब्बे में या किसी भूमिगत रेल स्टेशन पर धूम्रपान नहीं करेगा ।
(2) जो कोई उपधारा (1) के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा वह जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(3) यदि कोई व्यक्ति किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा प्रविरत रहने के लिए चेतावनी दिए जाने के पश्चात् भी इस प्रकार धूम्रपान हठपूर्वक करता रहेगा तो वह उपधारा (2) में वर्णित दायित्व उपगत करने के अतिरिक्त, उस कक्ष या सवारी डिब्बे से, जिसमें वह यात्रा कर रहा है या उस भूमिगत स्टेशन से, जिस पर वह धूम्रपान करता हुआ पाया जाता है भूमिगत रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा हटाया जा सकेगा ।
10. भूमिगत रेल पर मत्तता या न्यूसेंस-(1) यदि भूमिगत रेल के किसी सवारी डिब्बे में या उसके किसी भाग पर कोई व्यक्ति-
(क) नशे की हालत में होगा; या
(ख) कोई न्यूसेंस या अशिष्ट कार्य करेगा अथवा अश्लील या गाली गलौज की भाषा का उपयोग करेगा; या
(ग) जानबूझकर या प्रतिहेतु के बिना किसी यात्री के आराम में किसी प्रकार से हस्तक्षेप करेगा,
तो वह जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा और ऐसे किसी किराए के, जो उसने दिया हो अथवा ऐसे किसी पास या टिकट के, जो उसने प्राप्त या क्रय किया हो, समपहरण का अथवा भूमिगत रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत भूमिगत रेल पदधारी द्वारा ऐसे सवारी डिब्बे या भाग से हटाए जाने का भी भागी होगा ।
(2) यदि ड्यूटी पर होते हुए कोई भूमिगत रेल पदधारी नशे की हालत में होगा तो वह जुर्माने से, जो दो सौ पच्चीस रुपए तक का हो सकेगा, या जहां कर्तव्य का अनुचित रूप से पालन किए जाने से भूमिगत रेल पर यात्रा करने वाले या उसमें होने वाले किसी यात्री की सुरक्षा को खतरा होना संभाव्य होगा वहां कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
11. भूमिगत रेल पर प्रदर्शनों का प्रतिषेध-(1) भूमिगत रेल के किसी भाग या उसके किसी अन्य परिसर पर किसी भी प्रकार का कोई प्रदर्शन नहीं किया जाएगा और भूमिगत रेल प्रशासन ऐसे परिसर से ऐसे किसी व्यक्ति को जो ऐसे प्रदर्शनों में भाग ले रहा है, हटा सकेगा चाहे उसके पास उक्त परिसर में से रहने का हकदार बनाने वाला कोई पास या टिकट है या नहीं है ।
(2) कोई व्यक्ति किसी विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना, भूमिगत रेल के किसी कक्ष या सवारी डिब्बे में या उसके किसी परिसर में कोई इश्तहार न तो चिपकाएगा और न ही लगाएगा और न ही कोई बात या विषय लिखेगा या चित्रित करेगा तथा ऐसे किसी व्यक्ति को जो ऐसा कार्य करते हुए पाया जाएगा भूमिगत रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा कक्ष, सवारी डिब्बे या परिसर से हटाया जा सकेगा ।
(3) जो कोई उपधारा (1) या उपधारा (2) के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा या किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा किसी कक्ष, सवारी डिब्बे या परिसर को छोड़ने के लिए कहे जाने पर ऐसा करने से इन्कार करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
12. रेल गाड़ी की छत आदि पर यात्रा करने के लिए शास्ति-यदि कोई यात्री किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा प्रतिविरत रहने की चेतावनी दिए जाने के पश्चात् भी किसी रेलगाड़ी की छत पर यात्रा करेगा या किसी रेलगाड़ी के ऐसे भाग में, जो यात्रियों के उपयोग के लिए आशयित नहीं है, हठपूर्वक यात्रा करेगा या अपने शरीर का कोई भाग रेलगाड़ी के बाहर निकालेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पचास रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा और भूमिगत रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा रेलगाड़ी से हटाया जा सकेगा ।
13. भूमिगत रेल में विधिवरुद्धतया प्रवेश करने या उस पर रहने या भूमिगत रेल लाइन पर चलने के लिए शास्ति-(1) यदि कोई व्यक्ति भूमिगत रेल में या उस पर किसी विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना प्रवेश करेगा अथवा विधिपूर्ण प्राधिकार से प्रवेश करने के पश्चात् वहां विधिविरुद्धतया रहेगा और किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा उसे छोड़ने के लिए अनुरोध किए जाने पर ऐसा करने से इन्कार करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(2) यदि कोई व्यक्ति भूमिगत रेल की लाइन पर किसी विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना चलेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
14. यात्रियों की सुरक्षा को संकटापन्न करना-यदि ड्यूटी पर होते हुए कोई भूमिगत रेल पदधारी-
(क) उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण कार्य या लोप द्वारा; या
(ख) किसी ऐसे नियम या आदेश की, जिसको ऐसा पदधारी अपने नियोजन के निबन्धनों के अनुसार पालन करने के लिए आबद्ध था और जिसके बारे में उसे जानकारी थी, अवज्ञा द्वारा,
किसी यात्री की सुरक्षा को संकटापन्न करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो छह हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
15. बिना प्राधिकार के रेलगाड़ी आदि का परित्याग-यदि ड्यूटी पर होते हुए किसी भूमिगत रेल पदधारी को किसी रेलगाड़ी या किसी अन्य चल स्टाक को एक स्टेशन या स्थान से दूसरे स्टेशन या स्थान तक पहुंचाने के सम्बन्ध में कोई उत्तरदायित्व सौंपा गया है और वह उस स्टेशन या स्थान पर पहुंचने से पहले बिना प्राधिकार के या ऐसी रेलगाड़ी या चल स्टाक को किसी अन्य प्राधिकृत भूमिगत रेल पदधारी के हवाले किए बिना अपनी ड्यूटी छोड़ देगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
16. रेल गाड़ियों आदि के चलने आदि में बाधा डालना-यदि कोई व्यक्ति किसी भूमिगत रेल की पटरी पर बैठ कर, पिकेटिंग करके या भूमिगत रेल पर बिना प्राधिकार के कोई चल स्टाक रख कर या किसी सिगनल प्रतिष्ठान से छेड़छाड़ करके या उसके कार्यकरण की यंत्र क्रिया में हस्तक्षेप करके या अन्य प्रकार से भूमिगत रेल पर किसी रेलगाड़ी या अन्य चल स्टाक को बाधा पहुंचाएगा, पहुंचवाएगा या पहुंचाने का प्रयत्न करेगा तो वह भूमिगत रेल प्रशासन द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी भूमिगत रेल पदधारी द्वारा हटाया जा सकेगा और वह कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
17. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कंपनी द्वारा किया गया हो वहां प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां, इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित कर दिया जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत कोई फर्म या व्यक्तियों का अन्य संगम भी है; और
(ख) फर्म के सम्बन्ध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
अध्याय 4
प्रकीर्ण
18. 1890 के अधिनियम 9 और उसके अधीन बनाए गए नियमों आदि का भूमिगत रेल को लागू होना-इस अधिनियम में जैसा अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित है उसके सिवाय भारतीय रेल अधिनियम, 1890 के और इसके अधीन बनाए गए या जारी किए गए नियमों, आदेशों या अधिसूचनाओं के उपबन्ध जहां तक हो सके, और ऐसे उपान्तरणों के अधीन रहते हुए, जो आवश्यक हों भूमिगत रेल के प्रचालन और अनुरक्षण के लिए, इस प्रकार लागू होगे मानो ऐसी भूमिगत रेल उस अधिनियम के अधीन परिभाषित रेल है और उस अधिनियम में रेल प्रशासन" और निरीक्षक" के प्रति निर्देशों का वही अर्थ लगाया जाएगा जो भूमिगत रेल प्रशासन" और आयुक्त" का है ।
19. अन्य अधिनियमितियों से असंगत अधिनियम और नियमों आदि का प्रभाव-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या जारी की गई किसी अधिसूचना के उपबन्ध, इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति में या इस अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में, उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
20. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम के अधीन सद्भापूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या भूमिगत रेल प्रशासन या उस सरकार या भूमिगत रेल प्रशासन के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या हो सकने वाले किसी नुकसान के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या भूमिगत रेल प्रशासन या उस सरकार या भूमिगत रेल प्रशासन के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
21. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, ऐसी कोई बात कर सकेगी जो ऐसे उपबन्धों से असंगत न हों और जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों:
परन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जाएगा ।
22. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन भूमिगत रेल प्रशासन के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन और शर्तें;
(ख) ऐसे मामले, जिनमें और ऐसी सीमा, जिस तक यात्रियों के सार्वजनिक वहन के लिए भूमिगत रेल चालू किए जाने के लिए धारा 4 में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया से अभिमुक्ति प्रदान की जा सकेगी;
(ग) ऐसे यात्री सामान की, जिसमें निजी माल-असबाब हैं, मात्रा और वजन जो भूमिगत रेल में यात्रा करते समय किसी व्यक्ति द्वारा ले जाया जा सकता है;
(घ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।
(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा ; किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल नहीं पड़ेगा ।
23. निरसन और व्यावृत्ति-(1) कलकत्ता भूमिगत रेल (प्रचालन और अनुरक्षण) अस्थायी उपबन्ध अध्यादेश,1984 (1984 का अध्यादेश 13) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
-------------

