मुम्बई पुनर्गठन अधिनियम, 1960
(1960 का अधिनियम संख्यांक 11)
[25 अप्रैल, 1960]
मुम्बई राज्य के पुनर्गठन और उससे सम्बद्ध
विषयों का उपबन्ध करने हेतु
अधिनियम
भारत गणराज्य के ग्यारहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
भाग 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मुम्बई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 है ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “नियत दिन" से 1960 की मई का प्रथम दिन अभिप्रेत है ;
(ख) “अनुच्छेद" से संविधान का अनुच्छेद अभिप्रेत है ;
(ग) “सभा निर्वाचन-क्षेत्र", परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र" और संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र" के वे ही अर्थ हैं जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) में है ;
(घ) “विधि" के अन्तर्गत सम्पूर्ण मुम्बई राज्य में या उसके किसी भाग में नियत दिन के ठीक पूर्व विधि का बल रखने वाली कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखित भी हैं ;
(ङ) “अधिसूचित आदेश" से राजपत्र में प्रकाशित आदेश अभिप्रेत है ;
(च) महाराष्ट्र और गुजरात राज्य के सम्बन्ध में “जनसंख्या अनुपात" से 66.31 : 33.69 का अनुपात अभिप्रेत है ;
(छ) संसद् या मुम्बई राज्य के विधान-मंडल के दोनों सदनों में से किसी के सम्बन्ध में आसीन सदस्य" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है, जो नियत दिन के ठीक पूर्व उस सदन का सदस्य है ;
(ज) “अंतरित राज्यक्षेत्र" से वे राज्यक्षेत्र अभिप्रेत हैं, जो नियत दिन से गुजरात राज्य के राज्यक्षेत्र हैं ;
(झ) “खजाना" के अन्तर्गत उपखजाना भी है ;
(ञ) मुम्बई राज्य के किसी जिले, तालुक, गांव या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह 1959 के दिसम्बर के प्रथम दिन भू-राजस्व प्रयोजनों के लिए यथा मान्यताप्राप्त उस प्रादेशिक खण्ड में समाविष्ट क्षेत्र के प्रति निर्देश है ।
भाग 2
मुम्बई राज्य का पुनर्गठन
3. गुजरात राज्य का बनाया जाना-(1) नियत दिन से एक नया राज्य बनाया जाएगा, जो गुजरात राज्य कहलाएगा और जिसमें मुम्बई राज्य के निम्नलिखित राज्यक्षेत्र समाविष्ट होंगे, अर्थात् :-
(क) बनासकांठा, मेहसाणा, साबरकाठा, अहमदाबाद, खैरा, पंचमहाल, बड़ौदा, भरुच, सूरत, डांग, अमरेली, सुरेन्द्रनगर, राजकोट, जामनगर, जूनागढ़, भावनगर और कच्छ जिले; और
(ख) ठाणे जिले के उंबरगांव, तालुक के वे गांव, पश्चिम खानदेश जिले के नबापुर और नुदुरबार तालुकों के वे गांव और पश्चिम खानदेश जिले के अकलकुवा और तालौदा तालुक के वे गांव, जो क्रमशः प्रथम अनुसूची के भाग 1, 2 और 3 में विनिर्दिष्ट हैं,
और तब उक्त राज्यक्षेत्र मुम्बई राज्य के भाग नहीं रहेंगे और अवशिष्ट मुम्बई राज्य महाराष्ट्र राज्य कहलाएगा ।
(2) प्रथम अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट उंबरगांव तालुक के गांवों का उसी नाम से एक पृथक् तालुक होगा और वह सूरत जिले में सम्मिलित होगा और उक्त तालुक के शेष गांव ठाणे जिले के डहाणू तालुक में सम्मिलित होंगे और वे उसका भाग होंगे; तथा प्रथम अनुसूची के भाग 2 और 3 में विनिर्दिष्ट गांव; क्रमशः सूरत जिले के सोनगढ़ तालुक में और भरुच जिले के सागवारा तालुक में सम्मिलित होंगे और उसका भाग होंगे ।
4. संविधान की प्रथम अनुसूची का संशोधन-नियत दिन से, संविधान की प्रथम अनुसूची में, 1. राज्य" शीर्षक के नीचे,-
(क) प्रविष्टि 4 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“4. गुजरात-वे राज्यक्षेत्र, जो मुम्बई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 की धारा 3 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट हैं ;
(ख) प्रविष्टि 7 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“8. महाराष्ट्र-वे राज्यक्षेत्र, जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 8 की उपधारा (1) में उल्लिखित हैं कि किन्तु वे राज्यक्षेत्र, जो मुम्बई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 की धारा 3 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट हैं, इससे अपवर्जित हैं ।" ; और
(ग) 8 से 14 तक की प्रविष्टियां, क्रमशः 9 से 15 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित की जाएंगी ।
5. राज्य सरकार की शक्तियों की व्यावृत्ति-इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों की कोई भी बात राज्य सरकार की, नियत दिन के पश्चात्, राज्य के किसी जिले, तालुक या गांव के नाम, क्षेत्र या सीमाओं में परिवर्तन करने की शक्ति पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
भाग 3
विधान-मंडलों में प्रतिनिधित्व
राज्य सभा
6. संविधान की चतुर्थ अनुसूची का संशोधन-नियत दिन से, राज्य सभा में, महाराष्ट्र राज्य को 19 स्थान और गुजरात राज्य को 11 स्थान आबंटित किए जाएंगे और संविधान की चतुर्थ अनुसूची में, सारणी में,-
(क) प्रविष्ट 4 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“4. गुजरात..........................11";
(ख) प्रविष्टि 7 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“8. महाराष्ट्र..........................19";
(ग) 8 से 18 तक की प्रविष्टियां क्रमशः 9 से 19 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित की जाएंगी; और
(घ) “221" अंकों के स्थान पर 224" अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
7. आसीन सदस्यों का आबंटन-(1) मुम्बई राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य सभा के बारह आसीन सदस्यों के बारे में जिनके नाम द्वितीय अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट हैं, और 1960 के अप्रैल के तीसरे दिन पर विद्यमान रिक्तियों को भरने के प्रयोजन के लिए किए गए द्विवार्षिक निर्वाचनों में उस राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित नौ आसीन सदस्यों में से ऐसे छः सदस्यों के बारे में जिन्हें राज्य सभा का सभापति, आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करें, नियत दिन से, यह समझा जाएगा कि वे महाराष्ट्र राज्य को आबंटित उन्नीस स्थानों में से अठारह स्थान भरने के लिए सम्यक् रूप से निर्वाचित किए गए हैं ।
(2) मुंबई राज्य का प्रतिनधित्व करने वाले राज्य सभा के ऐसे पांच आसीन सदस्यों के बारे में, जिनके नाम द्वितीय अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट हैं, और उक्त द्विवार्षिक निर्वाचनों में निर्वाचित नौ सदस्यों में से शेष तीन सदस्यों के बारे में, नियत दिन से, यह समझा जाएगा कि वे गुजरात राज्य को आबंटित ग्यारह स्थानों में से आठ स्थान भरने के लिए सम्यक् रूप से निर्वाचित किए गए हैं ।
8. रिक्तियों को भरने के लिए उप-निर्वाचन-नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों को आबंटित अतिरिक्त स्थानों तथा गुजरात राज्य को आबंटित स्थानों में विद्यमान आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए उप-निर्वाचन किए जाएंगे ।
9. पदावधि-(1) आसीन सदस्यों की और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए चुने गए सदस्य की पदावधि अपरिवर्तित रहेगी ।
(2) महाराष्ट्र राज्य को आबंटित एक अतिरिक्त स्थान को भरने के लिए निर्वाचित सदस्य की पदावधि 1966 के अप्रैल के दूसरे दिन समाप्त होगी ।
(3) गुजरात राज्य को आबंटित दो अतिरिक्त स्थानों को भरने के लिए निर्वाचित दो सदस्यों में से उस सदस्य की पदावधि, जो मतों की गणना पर अन्त में निर्वाचित घोषित किया गया है, या यदि मतों की संख्या समान हो तो उनमें से ऐसे एक की पदावधि, जिसे रिटर्निंग आफिसर लाट द्वारा विनिश्चित करेगा, 1964 के अप्रैल के दूसरे दिन समाप्त हो जाएगी और दूसरे सदस्य की पदावधि 1966 के अप्रैल के दूसरे दिन समाप्त हो जाएगी ।
लोक सभा
10. लोक सभा में प्रतिनिधित्व-नियत दिन से, लोक सभा में महाराष्ट्र राज्य को चवालीस स्थान और गुजरात राज्य को बाईस स्थान आबंटित किए जाएंगे और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की प्रथम अनुसूची में,-
(क) प्रविष्टि 4 के स्थान पर, निम्निलखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“4. गुजरात..........................22";
(ख) प्रविष्टि 7 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“8. महाराष्ट्र.......................... 44"; और
(ग) 8 से 22 तक की प्रविष्टियां क्रमशः 9 से 23 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित की जाएंगी ।
11. संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन-नियत दिन से, संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1956 की प्रथम अनुसूची, इस अधिनियम की तृतीय अनुसूची में निदेशित रूप में, संशोधित हो जाएगी ।
12. आसीन सदस्यों के बारे में उपबन्ध-ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोक सभा के प्रत्येक आसीन सदस्य के बारे में, जो नियत दिन को धारा 11 के उपबन्धों के आधार पर, सीमाओं के परिवर्तन सहित या उसके बिना, महाराष्ट्र राज्य या गुजरात राज्य को आबंटित हो जाता है, यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार यथा आबंटित उस निर्वाचन-क्षेत्र से लोक सभा को निर्वाचित किया गया है ।
विधान सभाएं
13. विधान सभाओं की सदस्य संख्या-नियत दिन से महाराष्ट्र और गुजरात विधान सभाओं में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या, क्रमशः 264 और 132 होगी और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की द्वितीय अनुसूची में,-
(क) प्रविष्टि 4 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टि प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“4. गुजरात..........................132";
(ख) प्रविष्टि 7 के पश्चात्, निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“8. महाराष्ट्र.......................... 264"; और
(ग) 8 से 13 तक की प्रविष्टियां क्रमशः 9 से 14 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित की जाएंगी ।
14. सभा निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन-नियत दिन से संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1956 की द्वितीय अनुसूची, इस अधिनियम की चतुर्थ अनुसूची में निदेशित रूप में, संशोधित हो जाएगी ।
15. सदस्यों का आबंटन-(1) मुंबई विधान सभा का, ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रत्येक आसीन सदस्य, जो निर्वाचन-क्षेत्र धारा 14 के उपबन्धों के आधार पर नियत दिन को, चाहे सीमाओं के परिवर्तन सहित या उसके बिना, गुजरात राज्य को अंतरित हो गया हो, उस दिन से मुंबई विधान सभा का सदस्य नहीं रहेगा और उसके बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार यथा अंतरित उस निर्वाचन-क्षेत्र से गुजरात विधान सभा को निर्वाचित किया गया है ।
(2) मुंबई विधान सभा के सभी अन्य आसीन सदस्य, महाराष्ट्र विधान सभा के सदस्य होंगे और ऐसे निर्वाचन-क्षेत्र का, जिसका विस्तार, या नाम और विस्तार धारा 14 के उपबन्धों के आधार पर परिवर्तित किया गया है, प्रतिनिधित्व करने वाले किसी ऐसे आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार यथा परिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र से महाराष्ट्र विधान सभा को निर्वाचित किया गया है ।
(3) अनुच्छेद 333 के अधीन आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए मुंबई विधान सभा को नामनिर्देशित उस सभा के आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस अनुच्छेद के अधीन महाराष्ट्र विधान सभा में उक्त समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामनिर्देशित किया गया है ।
16. विधान सभाओं की अवधि-संविधान के अनुच्छेद 172 के खण्ड (1) में निर्दिष्ट पांच वर्ष की अवधि महाराष्ट्र या गुजरात विधान सभा की दशा में उस तारीख को प्रारम्भ हुई समझी जाएगी, जिस तारीख को वह मुंबई विधान सभा की दशा में वास्तविक रूप से प्रारंभ हुई थी ।
17. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष-(1) वे व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व मुंबई विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हों, महाराष्ट्र विधान सभा के क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होंगे ।
(2) नियत दिन के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, गुजरात विधान सभा, उस सभा के दो सदस्यों को क्रमशः उसके अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुनेगी और जब तक वे इस प्रकार नहीं चुने जाते तब तक अध्यक्ष के पद के कर्तव्य उस सभा के ऐसे सदस्य द्वारा किए जाएंगे जिसे उस प्रयोजन के लिए राज्यपाल नियुक्त करे ।
18. प्रक्रिया के नियम-नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त मुंबई विधान सभा की प्रक्रिया और कार्य-संचालन के नियम, जब तक अनुच्छेद 208 के खण्ड (1) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते, तब तक उसके अध्यक्ष द्वारा उनमें किए गए उपांतरों और अनुकूलनों के अधीन रहते हुए महाराष्ट्र या गुजरात विधान सभा के सम्बन्ध में प्रभावी होंगे ।
19. गुजरात विधान सभा के संबंध में विशष उपबन्ध-(1) धारा 16 के अधीन गुजरात विधान सभा की अवधि की समाप्ति पर या उसके विघटन पर प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरे जाने वाले उस सभा के स्थानों की कुल संख्या 132 से बढ़ाकर 154 की जाएगी ; और तद्नुसार ऐसी समाप्ति या विघटन की तारीख से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की द्वितीय अनुसूची में, प्रविष्टि 4 में अंक “132" के स्थान पर अंक “154" प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए, निर्वाचन आयोग इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति में निम्नलिखित का अवधारण करेगा-
(क) संविधान के सुसंगत उपबन्धों को ध्यान में रखते हुए, विधान सभा में राज्य की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाने वाले स्थानों की संख्या ;
[(ख) वे सभा निर्वाचन-क्षेत्र, जिनमें राज्य का विभाजन किया जाएगा, ऐसे निर्वाचन-क्षेत्रों में से प्रत्येक का विस्तार और उनमें से किस निर्वाचन-क्षेत्र में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित रखे जाएंगे; और]
(ग) राज्य में संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों की सीमाओं का समायोजन और उनके विस्तार के वर्णन का समायोजन, जो आवश्यक या समीचीन हो ।
[(3) उपधारा (2) के खण्ड (ख) और (ग) में निर्दिष्ट मामलों का अवधारण करने में, निर्वाचन आयोग निम्नलिखित उपबन्धों को ध्यान में रखेगा, अर्थात् :-
(क) सभी निर्वाचन-क्षेत्र एक-सदस्य निर्वाचन-क्षेत्र होंगे ;
(ख) सभी निर्वाचन-क्षेत्र, यावत्साध्य, भौगोलिक रूप से संहृत क्षेत्र होंगे और उनका परिसीमन भौतिक लक्षणों, प्रशासनिक इकाइयों की विद्यमान सीमाओं, संचार की सुविधाओं और सार्वजनिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा ; और
(ग) वे निर्वाचन-क्षेत्र, जिनमें या तो अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित हैं, यावत्साध्य ऐसे क्षेत्रों में स्थित होंगे जिनमें, यथास्थिति, अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या अधिकतम रूप से संकेन्द्रित है, किन्तु अनुसूचित जातियों के बारे में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षित स्थानों का वितरण हो जाए ।ट
(4) उपधारा (2) के अधीन निर्वाचन आयोग अपने कृत्यों के अनुपालन में अपनी सहायता करने के प्रयोजन के लिए, अपने साथ ऐसे पांच व्यक्तियों को सहयुक्त करेगा, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करेगी और वे ऐसे व्यक्ति होंगे, जो राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले या तो राज्य की विधान सभा के या लोक सभा के सदस्य हों :
परन्तु उक्त सहयुक्त सदस्यों में से किसी को भी मत देने का या निर्वाचन आयोग के किसी विनिश्चय पर हस्ताक्षर करने का अधिकार न होगा ।
(5) निर्वाचन-आयोग-
(क) राज्य के राजपत्र में, उपधारा (2) में उल्लिखित मामलों के बारे में अपने प्रस्ताव, उस तारीख को विनिर्दिष्ट करते हुए, जिसको या जिसके पश्चात् उन प्रस्तावों पर उसके द्वारा आगे विचार किया जाएगा, सूचना के साथ प्रकाशित करेगा ;
(ख) उन सभी आक्षेपों और सुझावों पर विचार करेगा, जो उसके द्वारा इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व प्राप्त किए जाएं और ऐसे विचार-विमर्श के प्रयोजन के लिए किसी ऐसे स्थान या स्थानों पर, जैसा वह ठीक समझे, एक या अधिक सार्वजनिक बैठकें करेगा ;
(ग) संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1956 की अनुसूचियों के, जहां तक राज्य से उनका संबंध है, ऐसे विस्तार तक पुनरीक्षण करने वाले आदेश देगा, जैसा आवश्यक या समीचीन हो ; और
(घ) आदेश की अधिप्रमाणित प्रतियां केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार को भेजेगा ।
(6) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा उक्त आदेश प्राप्त किए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, वह, यथास्थिति, लोक सभा या राज्य की विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा ।
(7) इस धारा के अधीन निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए आदेश को विधि का पूर्ण बल होगा और वह किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
विधान परिषद्
20. संविधान के अनुच्छेद 168 का संशोधन-नियत दिन से, संविधान के अनुच्छेद 168 में, खण्ड (1) के उपखण्ड (क) में मुंबई" शब्द का लोप किया जाएगा और मद्रास" शब्द के पश्चात् महाराष्ट्र" शब्द अन्तःस्थापित किया जाएगा ।
21. महाराष्ट्र की विधान परिषद्-नियत दिन से, महाराष्ट्र की विधान परिषद् में 78 स्थान होंगे, और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की तृतीय अनुसूची में-
(क) मुंबई से संबंधित प्रविष्टि संख्या 3 का लोप किया जाएगा और विद्यमान 4 और 5 प्रविष्टियां क्रमशः 3 और 4 प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित की जाएंगी ;
(ख) मद्रास से संबंधित प्रविष्टि के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
“5. महाराष्ट्र- 78 22 7 7 30 12 ।" ।
22. परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र-नियत दिन से, परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (मुंबई) आदेश, 1951 का पंचम अनुसूची में निदेशित रूप में संशोधन हो जाएगा ।
23. कतिपय आसीन सदस्यों के बारे में उपबन्ध-(1) नियत दिन को-
(क) षष्ठ अनुसूची में विनिर्दिष्ट मुंबई विधान परिषद् के आसीन सदस्य उस परिषद् के सदस्य नहीं रहेंगे ; और
(ख) उस परिषद् के सभी अन्य आसीन सदस्य, महाराष्ट्र विधान परिषद् के सदस्य हो जाएंगे और परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र का, जिसका विस्तार धारा 22 के उपबन्धों के आधार पर परिवर्तित किया गया है, प्रतिनिधित्व करने वाले किसी ऐसे आसीन सदस्य के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस प्रकार यथापरिवर्तित उस निर्वाचन-क्षेत्र द्वारा महाराष्ट्र विधान परिषद् को निर्वाचित किया गया है ।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट सदस्यों की पदावधि अपरिवर्तित रहेगी ।
24. द्विवार्षिक निर्वाचनों के बारे में विशेष उपबन्ध-(1) लोक प्रतिनधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) की धारा 16 में किसी बात के होते हुए भी, उस धारा के अधीन 1960 के अप्रैल के चौबीसवें दिन को अपनी पदावधि की समाप्ति पर निवृत्त होने वाले मुंबई विधान परिषद् के सदस्यों के स्थानों को भरने हेतु द्विवार्षिक निर्वाचन करने के लिए कोई भी अधिसूचना नियत दिन के पहले प्रकाशित नहीं की जाएगी ।
(2) उक्त द्विवार्षिक निर्वाचनों पर रिक्तियों को भरने के लिए निर्वाचित उक्त परिषद् के सदस्यों की पदावधि 1966 के अप्रैल के चौबीसवें दिन समाप्त होगी ।
25. सभापति और उपसभापति-(1) वह व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व मुंबई विधान परिषद् का उपसभापति है, महाराष्ट्र विधान परिषद् का उपसभापति होगा ।
(2) धारा 24 में निर्दिष्ट द्विवार्षिक निर्वाचनों की समाप्ति के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, महाराष्ट्र विधान परिषद् अपने सदस्यों में से एक सदस्य को उसके सभापति के रूप में चुनेगी ।
अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां
26. अनुसूचित जाति आदेश का संशोधन-नियत दिन से, संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 का, सप्तम अनुसूची में, निदेशित रूप में, संशोधन हो जाएगा ।
27. अनुसूचित जनजाति आदेश का संशोधन-नियत दिन से, संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 का, अष्टम अनुसूची में, निदेशित रूप में, संशोधन हो जाएगा ।
भाग 4
उच्च न्यायालय
28. गुजरात के लिए उच्च न्यायालय-(1) नियत दिन से गुजरात राज्य के लिए एक पृथक् उच्च न्यायालय होगा (जिसे इसमें इसके पश्चात् गुजरात उच्च न्यायालय" कहा गया है) और मुंबई उच्च न्यायालय महाराष्ट्र राज्य के लिए उच्च न्यायालय होगा (जिसे इसमें इसके पश्चात् मुंबई उच्च न्यायालय कहा गया है) ।
(2) गुजरात उच्च न्यायालय का प्रधान स्थान ऐसे स्थल पर होगा जिसे राष्ट्रपति अधिसूचित आदेश द्वारा नियत करे ।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और खण्ड न्यायालय, गुजरात राज्य में, उसके अपने प्रधान स्थान से भिन्न ऐसे अन्य स्थल या स्थलों पर पीठासीन हो सकेंगे, जिसे या जिन्हें मुख्य न्यायाधिपति, गुजरात के राज्यपाल के अनुमोदन से, नियत करे ।
29. गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश-(1) नियत दिन के ठीक पूर्व पद धारण करने वाले मुंबई उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश, जो राष्ट्रपति द्वारा अवधारित किए जाएं, उस दिन से मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नहीं रहेंगे और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे ।
(2) उन व्यक्तियों की, जो उपधारा (1) के आधार पर गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाते हैं, उस दशा के सिवाय, जहां कोई ऐसा व्यक्ति उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति के रूप में नियुक्त किया गया है, उस न्यायालय में, मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनकी अपनी-अपनी नियुक्तियों की पूर्विकता के अनुसार, ज्येष्ठता होगी ।
30. गुजरात उच्च न्यायालय की अधिकारिता-गुजरात उच्च न्यायालय को गुजरात राज्य में सम्मिलित राज्यक्षेत्रों में से किसी भाग के बारे में सभी ऐसी अधिकारिता, शक्तियां और प्राधिकार प्राप्त होंगे, जो मुंबई उच्च न्यायालय, उक्त राज्यक्षेत्रों के उस भाग के बारे में नियत से ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि के अधीन प्रयोक्तव्य है ।
। । । । ।
32. गुजरात उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया-इस भाग के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मुंबई उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरों सहित, गुजरात उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी, और तद्नुसार गुजरात उच्च न्यायालय को पद्धति और प्रक्रिया की बाबत नियम और आदेश बनाने की सभी ऐसी शक्तियां प्राप्त होंगी, जो मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा नियत दिन के ठीक पूर्व प्रयोक्तव्य है :
परन्तु वे नियम या आदेश जो मुंबई उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया की बाबत नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त हैं, जब तक गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए नियमों या आदेशों द्वारा उनमें फेरफार या उनका प्रतिसंहरण न किया जाए, जब तक गुजरात उच्च न्यायालय में पद्धति और प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक उपांतरों सहित लागू होंगे मानो वे उस न्यायालय द्वारा ही बनाए गए हों ।
33. गुजरात उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा-मुंबई उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा के संबंध में नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरों सहित, गुजरात उच्च न्यायालय की मुद्रा की अभिरक्षा की बाबत लागू होगी ।
34. रिटों और अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप-मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली, जारी की जाने वाली या दी जाने वाली रिटों और अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप की बाबत नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरों सहित, गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली, जारी की जाने वाली या दी जाने वाली रिटों और अन्य आदेशिकाओं के प्ररूप की बाबत लागू होगी ।
35. न्यायाधीशों की शक्तियां-मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति, एकल न्यायाधीशों तथा खण्ड न्यायालयों की शक्तियों के संबंध में और उन शक्तियों के प्रयोग के आनुषंगिक सभी विषयों के संबंध में नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि आवश्यक उपांतरों सहित, गुजरात उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।
36. उच्चतम न्यायालय की अपीलों के विषय में प्रक्रिया-मुंबई उच्च न्यायालय तथा उसके न्यायाधीशों और खण्ड न्यायालयों से उच्चतम न्यायालय की अपीलों से संबंधित नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त विधि, आवश्यक उपांतरों सहित, गुजरात उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होगी ।
37. मुंबई उच्च न्यायालय से गुजरात उच्च न्यायालय को कार्यवाहियों का अंतरण-(1) इनमें इसके पश्चात् यथा उपबंधित के सिवाय, मुंबई स्थित उच्च न्यायालय को, नियत दिन से अंतरित राज्यक्षेत्र के बारे में कोई अधिकारिता नहीं होगी ।
(2) नियत दिन से ठीक पूर्व, मुंबई उच्च न्यायालय में लंबित ऐसी कार्यवाहियों, चाहे वे उस दिन के पूर्व या पश्चात्, उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति द्वारा, वाद-हेतुक के प्रोद्भूत होने के स्थान और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, प्रमाणित की गई हैं कि ऐसी कार्यवाहियां, गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा सुनी और विनिश्चित की जानी चाहिएं, ऐसे प्रमाणन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, गुजरात उच्च न्यायालय को अंतरित कर दी जाएंगी ।
(3) इस धारा की उपधारा (1) और (2) या धारा 30 में किसी बात के होते हुए भी, किन्तु इनमें इसके पश्चात् दिए गए उपबंधों के सिवाय जहां किसी कार्यवाही में नियत दिन के पूर्व मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश की बाबत कोई अनुतोष चाहा गया हो, वहां अपीलों, उच्चतम न्यायालय को अपील करने की इजाजत के लिए आवेदनों, पुनर्विलोकन के लिए आवेदनों और अन्य कार्यवाहियों को ग्रहण करने, सुनने और निपटाने की अधिकारिता मुंबई स्थित उच्च न्यायालय को होगी और गुजरात उच्च न्यायालय को न होगी :
परन्तु यदि ऐसी किन्हीं कार्यवाहियों के मुंबई स्थित उच्च न्यायालय द्वारा ग्रहण किए जाने के पश्चात् उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को यह प्रतीत हो कि वे गुजरात उच्च न्यायालय को अंतरित की जानी चाहिएं तो वह आदेश देगा कि वे कार्यवाहियां इस प्रकार अंतरित की जाएं और तब ऐसी कार्यवाहियां तद्नुसार अंतरित कर दी जाएंगी ।
(4) (क) उपधारा (2) के आधार पर गुजरात उच्च न्यायालय को अंतरित किन्हीं कार्यवाहियों में नियत दिन के पूर्व, या
(ख) किन्हीं ऐसी कार्यवाहियों में, जिनकी बाबत मुंबई स्थित उच्च न्यायालय की अधिकारिता उपधारा (3) के आधार पर बनी रहती है,
मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया कोई आदेश, सभी प्रयोजनों के लिए, केवल मुंबई स्थित उच्च न्यायालय के आदेश के रूप में ही नहीं अपितु गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के रूप में भी प्रभावी होगा ।
38. गुजरात उच्च न्यायालय को अंतरित कार्यवाहियों में हाजिर होने या कार्य करने का अधिकार-किसी व्यक्ति को, जो नियत दिन के ठीक पूर्व मुंबई उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में विधि व्यवसाय करने या अटर्नी के रूप में कार्य करने का हकदार है और धारा 37 के अधीन जिसे उस न्यायालय से गुजरात उच्च न्यायालय को अंतरित किन्हीं कार्यवाहियों में हाजिर होने या कार्य करने के लिए प्राधिकृत किया गया था, उन कार्यवाहियों के संबंध में गुजरात उच्च न्यायालय में, यथास्थिति, हाजिर होने या कार्य करने का अधिकार होगा ।
39. निर्वचन-धारा 37 के प्रयोजनों के लिए-
(क) कार्यवाहियां न्यायालय में तब तक लंबित समझी जाएंगी जब तक उस न्यायालय ने पक्षकारों के बीच के सभी विवाद्यकों को, जिनके अन्तर्गत कार्यवाहियों के खर्चों के विनिर्धारण की बाबत विवाद्यक भी है, निपटा न दिया हो और इसके अन्तर्गत अपीलें, उच्चतम न्यायालय को अपील करने की इजाजत के लिए आवेदन, पुनर्विलोकन के लिए आवेदन, पुनरीक्षण के लिए अर्जियां और रिट के लिए अर्जिया भी होंगी ;
(ख) उच्च न्यायालय के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उनके अन्तर्गत उसके न्यायाधीश या खण्ड न्यायालय के प्रतिनिर्देश भी हैं और न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा दिए गए किसी आदेश के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उनके अन्तर्गत उस न्यायालय या न्यायाधीश द्वारा पारित दण्डादेश, निर्णय या डिक्री के प्रति निर्देश भी है ।
40. व्यावृत्तियां-इस भाग की किसी बात का प्रभाव संविधान के किन्हीं उपबन्धों के गुजरात उच्च न्यायालय को लागू होने पर नहीं पडे़गा तथा यह भाग किसी ऐसे उपबन्ध के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा, जिसे ऐसा उपबन्ध करने की शक्ति रखने वाला कोई विधान-मंडल या अन्य प्राधिकारी नियत दिन या उसके पश्चात् उस न्यायालय की बाबत बनाए ।
41. मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर में स्थायी न्यायपीठ-राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (1956 का 37) की धारा 51 के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना मुंबई स्थित उच्च न्यायालय के तीन से अन्यून ऐसे न्यायाधीश, जिन्हें मुख्य न्यायाधिपति समय-समय पर नामनिर्देशित करे, बुलढाणा, अंकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा, चान्दा और राजुरा जिलों में उद्भूत होने वाले मामलों की बाबत उस उच्च न्यायालय में तत्समय निहित अधिकारिता और शक्ति का प्रयोग करने के लिए नागपुर में कार्य करेंगे :
परन्तु मुख्य न्यायाधिपति, अपने विवेकानुसार, यह आदेश दे सकेगा कि किसी ऐसे जिले में उद्भूत किसी मामले की मुंबई में सुनवाई होगी ।
भाग 5
व्यय का प्राधिकरण
42. गुजरात राज्य के व्यय का प्राधिकरण-मुम्बई का राज्यपाल नियत दिन के पूर्व किसी समय, गुजरात राज्य की संचित निधि से किसी कालावधि के लिए, जो नियत दिन से आरंभ हो कर छः मास के बाद की नहीं होगी, ऐसा व्यय, जो वह आवश्यक समझे, तब तक के लिए प्राधिकृत कर सकेगा, जब तक कि ऐसा व्यय गुजरात विधान-मंडल द्वारा मंजूर न कर दिया जाए :
परन्तु नियत दिन के पश्चात् गुजरात का राज्यपाल गुजरात राज्य की संचित निधि से छः मास की उक्त कालावधि के पश्चात् विस्तारित न होने वाली किसी कालावधि के लिए ऐसा और व्यय, जो वह आवश्यक समझे, प्राधिकृत कर सकेगा ।
43. मुंबई राज्य के लेखाओं के संबंध में रिपोर्ट-(1) अनुच्छेद 151 के खण्ड (2) में निर्दिष्ट भारत के नियन्त्रक महालेखापरीक्षक की, नियत दिन के पूर्व किसी कालावधि की बाबत मुंबई राज्य के लेखाओं से संबंधित रिपोर्टें, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में से प्रत्येक के राज्यपाल को प्रस्तुत की जाएंगी, जो उन्हें उस राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा ।
(2) राष्ट्रपति आदेश द्वारा-
(क) वित्तीय वर्ष 1960-61 के दौरान नियत दिन के पहले की किसी कालावधि की बाबत या किसी पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की बाबत किसी सेवा पर मुम्बई की संचित निधि में से उपगत किसी व्यय को जो उस सेवा के लिए और उस वर्ष के लिए अनुदत्त रकम से आधिक्य में हो और जैसा कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट रिपोर्टों में प्रकट हो, सम्यक् रूप से प्राधिकृत घोषित कर सकेगा, तथा
(ख) उक्त रिपोर्टों से उठने वाले किसी विषय पर कोई कार्रवाई की जाने के लिए उपबन्ध कर सकेगा ।
44. गुजरात के राज्यपाल के भत्ते और विशेषाधिकार-गुजरात के राज्यपाल के भत्ते और विशेषाधिकार जब तक अनुच्छेद 158 के खण्ड (3) के अधीन संसद् विधि द्वारा इस निमित्त उपबन्ध न करे तब तक वे ही होंगे, जो राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, अवधारित करें ।
45. राजस्व का वितरण-(1) यूनियन ड्यूटीज आफ एक्साइज (डिस्ट्रिब्यूशन) ऐक्ट, 1957 (1957 का 55) की धारा 3, एस्टेट ड्यूटी एण्ड टैक्स आन रेलवे पेसेंजर फेयर्स (डिस्ट्रिब्यूशन) ऐक्ट, 1957 (1957 का 57) की धारा 3 और 5, अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क (विशेष महत्व का माल) अधिनियम, 1957 (1957 का 58) की धारा 4 और उसकी द्वितीय अनुसूची तथा संविधान (राजस्व वितरण) संख्या 2 आदेश, 1957, का पैरा 3, ऐसे उपांतरों के अधीन रहते हुए, प्रभावी होंगे जो नवम अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिनियमितियों और आदेश के अधीन महाराष्ट्र राज्य को नियत दिन से प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष 1960-61 के भाग की बाबत और वित्तीय वर्ष 1961-62 की बाबत संदेय कुल रकम क्रमशः 602 लाख रुपए और 614 लाख रुपए की राशि द्वारा घटाई जाएगी और इन अधिनियमितियों और आदेश के अधीन उन कालावधियों में से प्रत्येक की बाबत गुजरात राज्य को संदेय कुल रकम की तत्सम रूप में वृद्धि की जाएगी ।
भाग 6
आस्तियों और दायित्वों का प्रभाजन
46. भाग का लागू होना-इस भाग के उपबन्ध नियत दिन के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य की आस्तियों और दायित्वों के प्रभाजन के संबंध में लागू होंगे ।
47. भूमि और माल-(1) इस भाग के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, मुंबई राज्य के स्वामित्व की सब भूमि और सब सामान, वस्तुएं और अन्य माल,-
(क) यदि वे अन्तरित राज्यक्षेत्र के भीतर हों, गुजरात राज्य को संक्रांत हो जाएंगे, या
(ख) किसी अन्य मामले में, महाराष्ट्र राज्य की संपत्ति होगी :
परन्तु जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि किसी माल या किसी वर्ग के माल का वितरण माल के अवस्थान के अनुसार न होकर अन्यथा होना चाहिए, वहां केन्द्रीय सरकार, माल के न्यायसंगत और साम्यिक वितरण के लिए ऐसे निदेश दे सकेगी, जैसा वह उचित समझे, और तद्नुसार वह माल, यथास्थिति, महाराष्ट्र राज्य की संपत्ति होगी या गुजरात राज्य को संक्रांत हो जाएगा ।
(2) मुंबई राज्य के किसी ऐसे सामान का, जो दशम अनुसूची में निर्दिष्ट है, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच उसमें विनिर्दिष्ट रीति में विभाजन किया जाएगा ।
(3) इस धारा में “भूमि" पद के अंतर्गत प्रत्येक प्रकार की स्थावर संपत्ति तथा ऐसी संपत्ति में या उस पर के कोई अधिकार हैं और “माल" पद के अंतर्गत सिक्के, बैंक नोट तथा करेंसी नोट नहीं आते ।
48. खजाना और बैंक अतिशेष-नियत दिन के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य के सब खजानों में की कुछ रोकड़ बाकी तथा भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक तथा सौराष्ट्र स्टेट बैंक में उस राज्य के जमा अतिशेषों के योग का विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा :
परन्तु ऐसे विभाजन के प्रयोजनों के लिए, कोई रोकड़ बाकी किसी एक खजाने से किसी दूसरे खजाने को अंतरित नहीं की जाएगी और प्रभाजन दोनों राज्यों के भारतीय रिजर्व बैंक की बहियों में नियत दिन जमा अतिशेषों के समायोजन द्वारा किया जाएगा :
परन्तु यह और कि यदि गुजरात राज्य का भारतीय रिजर्व बैंक में नियत दिन को कोई खाता न हो, तो समायोजन ऐसी रीति से किया जाएगा, जिसका, केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा निदेश दे ।
49. करों की बकाया-संपत्ति पर के किसी कर या शुल्क की बकाया को, जिसके अंतर्गत भू-राजस्व की बकाया भी है, वसूल करने का अधिकार उस राज्य को होगा जिसमें वह संपत्ति स्थित है, और किसी अन्य कर या शुल्क की बकाया को वसूल करने का अधिकार उस राज्य को होगा जिसके राज्यक्षेत्रों के अंतर्गत नियत दिन उस कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान हो :
परन्तु केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, 1956 (1956 का 74) या मुंबई विक्रय कर अधिनियम, 1959 (1959 का मुम्बई अधिनियम सं० 51) के अधीन, 1960 की जनवरी के प्रथम दिन और 1960 के अप्रैल के तीसवें दिन (दोनों दिन सम्मिलित करके) के बीच की कालावधि के दौरान प्रोद्भूत कर की किसी बकाया की बाबत नियत दिन के पश्चात् वसूल की गई किसी रकम का, उसके वसूली के खर्च की कटौती के पश्चात्, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार विभाजन किया जाएगा ।
50. उधारों और अग्रिमों को वसूल करने का अधिकार-(1) मुंबई राज्य का, उस राज्य के भीतर किसी क्षेत्र में किसी स्थानीय निकाय, सोसायटी, कृषक या अन्य व्यक्ति को नियत दिन के पूर्व दिए गए किन्हीं उधारों या अग्रिमों को वसूल करने का अधिकार उस राज्य का होगा, जिसमें उस दिन वह क्षेत्र सम्मिलित है ।
(2) मुम्बई राज्य का उस राज्य के बाहर किसी व्यक्ति या संस्था को नियत दिन के पूर्व दिए गए उधारों या अग्रिमों को वसूल करने का अधिकार महाराष्ट्र राज्य का होगा :
परन्तु किसी ऐसे उधार या अग्रिम की बाबत वसूल की गई किसी रकम का विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा ।
51. कतिपय निधियों में जमा-(1) मुम्बई राज्य के रोकड़ बाकी विनिधान खाते में नियत दिन के पूर्व किए गए उस राज्य के विनिधानों में से 10 करोड़ रुपए के मूल्य की ऐसी प्रतिभूतियां, जिन्हें, केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, गुजरात राज्य को उस राज्य की राजधानी के निर्माण के संबंध में संक्रांत हो जाएंगी, और उक्त खाते में के बाकी विनिधानों का विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।
(2) राज्य अकाल राहत निधि, राज्य सड़क निधि, विकास स्कीमों के लिए निधि, बीमा निधि, मुम्बई राज्य दुग्ध निधि, प्रतिभूति समायोजन आरक्षित निधि और किसी अन्य साधारण निधि में नियत दिन के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य के विनिधान और केन्द्रीय सड़क निधि में उस राज्य के जमा खाते की राशियों का विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।
(3) डांग जिला आरक्षित निधि, पत्तन आरक्षित निधि, पत्तन विकास निधि और आनन्द संस्थान निधि में नियत दिन के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य के विनिधान गुजरात राज्य को संक्रांत हो जाएंगे और किसी अन्य विशेष निधि में के विनिधान, जिनके उद्देश्य किसी स्थानीय क्षेत्र तक सीमित हैं, उस राज्य के होंगे, जिसमें नियत दिन को वह क्षेत्र सम्मिलित है ।
(4) किसी प्राइवेट वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम में नियत दिन के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य के विनिधान, जहां तक ऐसे विनिधान रोकड़ बाकी विनिधान खाते से नहीं किए गए हैं या किए गए नहीं समझे गए हैं वहां तक उस राज्य को संक्रांत हो जाएंगे, जिसमें उस उपक्रम के कारबार का प्रधान स्थान स्थित है ।
(5) जहां भाग 2 के उपबंधों के आधार पर, किसी केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रान्तीय अधिनियम के अधीन मुम्बई राज्य या उसके किसी भाग के लिए गठित कोई निगमित निकाय अन्तरराज्यिक निगमित निकाय हो जाता है, वहां, मुम्बई राज्य द्वारा नियत दिन के पूर्व किसी ऐसे निगमित निकाय में के विनिधानों या उसे दिए गए उधारों या अग्रिमों का विभाजन, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में उसी अनुपात में किया जाएगा, जिसमें उस निगमित निकाय की आस्तियों का विभाजन भाग 7 के उपबंधों के अधीन किया जाता है ।
52. गुजरात में विशेष राजस्व आरक्षित निधि-(1) धारा 51 के उपबंधों को प्रभावी करने के पश्चात् रोकड़ बाकी विनिधान खाते में के विनिधानों में से, जो महाराष्ट्र राज्य के पास होंगे, 1,420 लाख रुपए के मूल्य की ऐसी प्रतिभूतियां, जैसा केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, गुजरात राज्य को अंतरित हो जाएंगी ।
(2) गुजरात राज्य में, उपधारा (1) के अधीन उस राज्य को अंतरित प्रतिभूतियों और 1419 लाख रुपए के मूल्य की गुजरात राज्य के स्वामित्व की ऐसी अन्य प्रतिभूतियों को, जिन्हें, केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, मिलाकर विशेष राजस्व आरक्षित निधि कहलाई जाने वाली एक निधि गठित की जाएगी ।
(3) उपधारा (2) के अधीन गठित निधि में से निम्नलिखित सारणी के स्तंभ (1) में विनिर्दिष्ट वित्तीय वर्षों में से प्रत्येक में गुजरात राज्य के राजस्व खाते में प्राप्तियों के रूप में उसके स्तंभ (2) में उस वर्ष के सामने दी गई रकम अंतरित की जाएगी और 1969-70 वित्तीय वर्ष में, उस निधि में का बाकी शेष, यदि कोई हो, अंतरित किया जाएगा :-
सारणी
|
वित्तीय वर्ष |
लाख रुपयों में रकम |
|
(1) |
(2) |
|
1962-63 |
612 |
|
1963-64 |
585 |
|
1964-65 |
561 |
|
1965-66 |
526 |
|
1966-67 |
433 |
|
1967-68 |
340 |
|
1968-69 |
209 |
53. राज्य उपक्रमों की आस्तियां और दायित्व-(1) मुम्बई राज्य के किसी वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम से संबंधित आस्तियां और दायित्व उस राज्य को संक्रांत हो जाएंगे, जिसमें वह उपक्रम स्थित हो ।
(2) जहां किसी ऐसे वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम के लिए मुम्बई राज्य द्वारा अवक्षयण आरक्षित निधि रखी गई हो, वहां उस निधि में से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियां, उस राज्य को संक्रांत हो जाएंगी, जिसमें वह उपक्रम स्थित हो ।
54. लोक ऋण-(1) मुम्बई राज्य का लोक ऋण, जो उस उधार के कारण हो, जो सरकारी प्रतिभूतियां जारी करके लिया गया हो, और नियत दिन के ठीक पूर्व जनता को देना बकाया हो, उस दिन से महाराष्ट्र राज्य का ऋण हो जाएगा :
परन्तु-
(क) गुजरात राज्य, महाराष्ट्र राज्य को ऋण की शोधन व्यवस्था और अदायगी के लिए समय-समय पर देय राशियों के अपने अंश का देनदार होगा ; और
(ख) उक्त अंश के अवधारण के प्रयोजन के लिए महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में ऋण का विभाजन इस प्रकार किया गया समझा जाएगा मानो वह, यथास्थिति, उपधारा (2) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट ऋण हो ।
(2) मुम्बई राज्य का लोक ऋण, जो उन उधारों के कारण हो जो किसी विनिर्दिष्ट संस्था को पुनः उधार देने के अभिव्यक्त प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय सहकारी विकास तथा भाण्डागारण बोर्ड या खादी तथा ग्रामोद्योग आयोग या किसी अन्य स्रोत से लिए गए हों और नियत दिन के ठीक पूर्व बकाया हों,-
(क) यदि किसी स्थानीय क्षेत्र में किसी स्थानीय निकाय, निगमित निकाय या अन्य संस्था को पुनः उधार दिया गया हो, तो वह उस राज्य का ऋण होगा, जिसके अंतर्गत नियत दिन वह स्थानीय क्षेत्र हो ; या
(ख) यदि मुम्बई राज्य विद्युत बोर्ड, मुम्बई राज्य सड़क परिवहन निगम या मुम्बई गृह-निर्माण बोर्ड या किसी ऐसी अन्य संस्था को पुनः उधार दिया गया हो, जो नियत दिन को अन्तरराज्यिक संस्था हो जाए, तो उसका विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में उसी अनुपात में किया जाएगा, जिसमें ऐसे निगमित निकाय या ऐसी संस्था की आस्तियों का विभाजन भाग 7 के उपबंधों के अधीन किया जाता है ।
(3) केन्द्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य निगमित निकाय से लिए गए उधारों के कारण मुम्बई राज्य का शेष लोक ऋण और जो नियत दिन के ठीक पूर्व उस राज्य पर बकाया हो उसका विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच उन राज्यों में से प्रत्येक में क्रमशः सम्मिलित किए गए राज्यक्षेत्रों में सब पूंजी-संकर्मों और अन्य पूंजी लागत मध्ये नियत दिन तक उपगत या उपगत समझे गए कुल व्यय के अनुपात में किया जाएगा :
परन्तु ऐसे विभाजन के प्रयोजनों के लिए ऐसी आस्तियों पर व्यय ही, जिसके लिए पूंजी खाते रखे गए हों, लेखे में लिया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-जहां पूंजी-संकर्मों या अन्य पूंजी लागतों मध्ये कोई व्यय, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में सम्मिलित राज्यक्षेत्रों में आबंटित नहीं किया जा सकता, वहां इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ऐसा व्यय उन राज्यक्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार उपगत किया गया समझा जाएगा ।
(4) जहां मुम्बई राज्य ने अपने द्वारा लिए गए किसी उधार की अदायगी के लिए कोई निक्षेप निधि या अवक्षयण निधि रखी हो, वहां उस निधि से किए गए विनिधानों की बाबत धारित प्रतिभूतियों का विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच उसी अनुपात में किया जाएगा, जिसमें इस धारा के अधीन दोनों राज्यों के बीच कुल लोक ऋण का विभाजन किया जाए ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, मुम्बई राज्य के लोक खाते में ऋण मोचन तथा परिहार निधि के रूप में ज्ञात निधि निक्षेप निधि समझी जाएगी ।
(5) उपधारा (3) के अधीन प्रभाजित लोक ऋण के मध्ये दायित्व में, गुजरात राज्य का अंश 1,419 लाख रुपयों से घटाया जाएगा और ऐसे दायित्व में महाराष्ट्र राज्य का अंश तत्समान बढ़ाया जाएगा ।
(6) इस धारा में सरकारी प्रतिभूति" पद से कोई ऐसी प्रतिभूति अभिप्रेत है, जो जनता से उधार लेने के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा सृजित और जारी की गई है और जो लोक ऋण अधिनियम, 1944 (1944 का 18) की धारा 2 के खंड (2) में विनिर्दिष्ट या उसके अधीन विहित रूपों में से किसी रूप में है ।
55. ऋण जारी करना-(1) किसी विलयित राज्य के किसी जारी किए गए, ऋण की बाबत मुम्बई राज्य का दायित्व उस राज्य का दायित्व होगा, जिसके राज्यक्षेत्र के अंतर्गत विलयित राज्य का क्षेत्र नियत दिन हो ।
(2) किसी वाणिज्यिक उपक्रम को लघु-अवधि के वित्त-पोषण का उपबंध करने के लिए किसी अन्य जारी किए गए उधार की बाबत मुम्बई राज्य का दायित्व, उस राज्य का दायित्व होगा जिसके राज्यक्षेत्र में वह उपक्रम स्थित है ।
56. आधिक्य में वसूल किए गए करों की वापसी-आधिक्य में वसूल किया गया संपत्ति पर कर या शुल्क, जिसके अंतर्गत भू-राजस्व भी है, वापस करने का मुम्बई राज्य का दायित्व, उस राज्य का दायितव होगा, जिसमें वह संपत्ति स्थित है, और आधिक्य में वसूल किए गए किसी अन्य कर या शुल्क को वापस करने का मुम्बई राज्य का दायित्व उस राज्य का दायित्व होगा, जिसके राज्यक्षेत्र में उस कर या शुल्क के निर्धारण का स्थान स्थित हो :
परन्तु नियत दिन के पश्चात्, केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, 1956 (1956 का 74) या मुम्बई विक्रय कर अधिनियम, 1959 (1959 का मुम्बई अधिनियम 51) के अधीन, एक जनवरी, 1960 और तीस अप्रैल, 1960 (दोनों दिन सम्मिलित करके) के बीच की अवधि के दौरान प्रौद्भूत किसी कर की बाबत वसूल किए गए आधिक्य के कारण किसी रकम को वापस करने का दायितव महाराष्ट्र और गुजरात दोनों राज्यों के बीच जनसंख्या के अनुपात के अनुसार विभाजित किया जाएगा ।
57. निक्षेप, आदि-(1) किसी सिविल निक्षेप या स्थानीय निधि निक्षेप की बाबत मुम्बई राज्य का दायित्व, नियत दिन से, उस राज्य का दायित्व होगा, जिसके क्षेत्र में निक्षेप किया गया हो ।
(2) किसी खैराती या अन्य विन्यास की बाबत मुम्बई राज्य का दायित्व, नियत दिन से उस राज्य का दायित्व होगा जिसके क्षेत्र में विन्यास का फायदा पाने की हकदार संस्था स्थित हो या उस राज्य का दायित्व होगा जिससे विन्यास के उद्देश्य, उसके निबंधनों के अधीन सीमित हों ।
58. भविष्य निधि-नियत दिन को सेवा में रहे किसी सरकारी सेवक के भविष्य निधि खाते की बाबत मुम्बई राज्य का दायित्व, उस दिन से, उस राज्य का दायित्व होगा, जिसे वह सरकारी सेवक स्थायी रूप से आबंटित किया गया हो ।
59. पेंशन-पेंशनों की बाबत मुम्बई राज्य के दायित्व का महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों को संक्रमण या उनमें प्रभाजन, ग्यारहवीं अनुसूची के उपबंधों के अनुसार होगा ।
60. संविदाएं-(1) जहां नियत दिन के पूर्व, मुम्बई राज्य ने, राज्य के किन्हीं प्रयोजनों के लिए अपनी कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में कोई संविदा की हो, वहां वह संविदा,-
(क) यदि संविदा के प्रयोजन, उस दिन से अनन्यतः या तो महाराष्ट्र राज्य या गुजरात राज्य के प्रयोजन हों, तो उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में ; तथा
(ख) किसी अन्य मामले में, महाराष्ट्र राज्य की कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में की गई समझी जाएगी और वे सब अधिकार और दायित्व, जो ऐसी किसी संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हों या प्रोद्भूत हों, उस सीमा तक, यथास्थिति, महाराष्ट्र राज्य या गुजरात राज्य के अधिकार या दायित्व होंगे, जिस तक वे मुंबई राज्य के अधिकार या दायित्व होते :
परंतु खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रकार के मामले में, इस उपधारा द्वारा किया गया अधिकारों और दायित्वों का प्रारंभिक आबंटन, ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा, जो महाराष्ट्र राज्य और गुजरात राज्य के बीच करार पाया जाए या ऐसे करार के अभाव में, जैसा केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा निदेश दे ।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि ऐसे दायित्वों के अंतर्गत, जो किसी संविदा के अधीन प्रोद्भूत हुए हों, या प्रोद्भूत हों, निम्नलिखित भी हैं,-
(क) संविदा से संबंधित कार्यवाहियों में किसी न्यायालय या अन्य अधिकरण द्वारा दिए गए आदेश या अधिनिर्णय की तुष्टि करने का कोई दायित्व; और
(ख) ऐसी किन्हीं कार्यवाहियों में या उनके संबंध में उपगत व्ययों की बाबत कोई दायित्व ।
(3) यह धारा उधारों, प्रत्याभूतियों और अन्य वित्तीय बाध्यताओं की बाबत दायित्वों के प्रभाजन से संबंधित इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी और बैंक अतिशेष तथा प्रतिभूतियों के विषय में कार्यवाही, उनके संविदात्मक अधिकारों की प्रकृति के होते हुए भी, उन व्यय उपबंधों के अधीन की जाएगी ।
61. अनुयोज्य दोष की बाबत दायित्व-जहां नियत दिन के ठीक पूर्व, मुंबई राज्य पर संविदा के भंग से भिन्न किसी अनुयोज्य दोष की बाबत कोई दायित्व हो, वहां वह दायित्व,-
(क) यदि वादहेतुक, पूर्णतया उस राज्यक्षेत्र के भीतर पैदा हुआ हो, जो उस दिन से महाराष्ट्र राज्य या गुजरात राज्य में से किसी का राज्यक्षेत्र हो, तो उस राज्य का दायित्व होगा ; तथा
(ख) किसी अन्य दशा में, प्रारंभिकतः महाराष्ट्र राज्य का दायित्व होगा, किन्तु यह ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा, जो महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच करार पाया जाए, या, ऐसे करार के अभाव में, जैसा केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे ।
62. प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायित्व-जहां, नियत दिन के ठीक पूर्व मुंबई राज्य किसी रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी या अन्य व्यक्ति के दायित्व के बारे में प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायी हो, वहां वह दायित्व,-
(क) यदि उस सोसाइटी या व्यक्ति का कार्यक्षेत्र उस राज्यक्षेत्र तक सीमित हो जो उस दिन से महाराष्ट्र राज्य या गुजरात राज्य में से किसी का राज्यक्षेत्र हो, तो वह दायित्व उस राज्य का होगा ; तथा
(ख) किसी अन्य दशा में, प्रारंभिकतः महाराष्ट्र राज्य का दायित्व होगा, किन्तु यह ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन होगा जो महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच करार पाया जाए या, ऐसे करार के अभाव में जैसा केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा निदेश दे ।
63. उचंत मद-यदि कोई उचंत मद अन्ततः इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी में निर्दिष्ट प्रकार की आस्ति या दायित्व पर प्रभाव डालने वाली पाई जाए तो उसके संबंध में उस उपबंध के अनुसार कार्यवाही की जाएगी ।
64. अवशिष्टीय उपबंध-मुंबई राज्य की किसी आस्ति या दायित्व का जिसके बारे में इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में व्यवस्था नहीं है फायदा या भार, प्रथमतः महाराष्ट्र राज्य को, ऐसे वित्तीय समायोजन के अधीन रहते हुए संक्रांत हो जाएगा, जो 1961 के अप्रैल के प्रथम दिन के पूर्व महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच करार पाया जाए, या ऐसे करार के अभाव में जैसा, केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, निदेश दे ।
65. आस्तियों या दायित्वों का करार द्वारा प्रभाजन-जहां महाराष्ट्र और गुजरात राज्य करार कर लें कि किसी विशिष्ट आस्ति या दायित्व के फायदे या भार का उनके बीच प्रभाजन ऐसी रीति से किया जाना चाहिए जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में दी गई रीति से भिन्न है, वहां उन उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी उस आस्ति या दायित्व के फायदे या भार का प्रभाजन उस रीति से किया जाएगा जो करार पाई जाए ।
66. कुछ मामलों में आबंटन या समायोजन के लिए आदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-जहां मुंबई और गुजरात राज्यों में से कोई राज्य इस भाग के उपबंधों में से किसी के आधार पर किसी संपत्ति का हकदार हो जाए या कोई फायदा प्राप्त करे या किसी दायित्व के अधीन हो जाए और नियत दिन से तीन वर्ष की कालावधि के भीतर किसी एक राज्य द्वारा निर्देश किए जाने पर केन्द्रीय सरकार की राय हो कि यह न्यायसंगत तथा साम्यापूर्ण है कि वह संपत्ति या वे फायदे उस अन्य राज्य को अंतरित किए जाने चाहिएं या उसमें से उसे अंश मिलना चाहिए या उस दायित्व के मद्धे अन्य राज्य द्वारा अभिदाय किया जाना चाहिए, वहां उक्त संपत्ति या फायदों का आबंटन, उन दोनों राज्यों के बीच ऐसी रीति से किया जाएगा या वह अन्य राज्य दायित्व के अधीन होने वाले राज्य को उसके बारे में ऐसा अभिदाय करेगा, जो केन्द्रीय सरकार, दोनों राज्य सरकारों से परामर्श के पश्चात् आदेश द्वारा, अवधारित करे ।
67. कुछ व्यय का संचित निधि पर भारित किया जाना-इस अधिनियम के उपबंधों के आधार पर या तो महाराष्ट्र राज्य द्वारा या गुजरात राज्य द्वारा उस अन्य राज्य को या केन्द्रीय सरकार द्वारा उन राज्यों में से किसी राज्य को संदेय सब राशियां, यथास्थिति, भारत की संचित निधि पर या उस राज्य की संचित निधि पर, जिसके द्वारा ऐसी राशियां संदेय हों, भारित होंगी ।
भाग 7
कुछ निगमों के बारे में उपबंध
68. मुंबई राज्य विद्युत् बोर्ड तथा राज्य भांडागारण निगम के बारे में उपबंध-(1) मुंबई राज्य के लिए गठित निम्नलिखित निगमित निकाय, अर्थात् :-
(क) विद्युत् प्रदाय अधिनियम, 1948 (1948 का 54) के अधीन गठित राज्य विद्युत् बोर्ड; तथा
(ख) कृषि उपज (विकास तथा भांडागारण) निगम अधिनियम, 1956 (1956 का 28) के अधीन स्थापित राज्य भांडागारण निगम,
नियत दिन से, उन क्षेत्रों में जिनकी बाबत उस दिन के ठीक पूर्व वे कार्य करते थे इस धारा के उपबंधों और ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए जाएं, कार्य करते रहेंगे ।
(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा उपधारा (1) के अधीन बोर्ड या निगम की बाबत जारी किए गए किन्हीं निदेशों के अंतर्गत ऐसा निदेश भी होगा कि वह अधिनियम, जिसके अधीन वह बोर्ड या वह निगम गठित हुआ, उस बोर्ड या निगम को लागू होने में ऐसे अपवादों और उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा, जो केन्द्रीय सरकार ठीक समझे ।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोर्ड या निगम, 1960 के अक्तूबर के प्रथम दिन से या ऐसी पूर्वतर तारीख से, जिसे केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, नियत करे कार्य करना बंद कर देगा और उस तारीख से विघटित समझा जाएगा; तथा ऐसे विघटन पर उसकी आस्तियों, अधिकारों तथा दायित्वों का महाराष्ट्र राज्य तथा गुजरात राज्य के बीच प्रभाजन ऐसी रीति से किया जाएगा जो, यथास्थिति, बोर्ड या निगम के विघटन के एक वर्ष के भीतर उनमें करार पाई जाए या यदि कोई करार न हो पाए तो जैसा केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा अवधारित करे ।
(4) इस धारा के पूर्ववर्ती उपबंधों की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह, यथास्थिति, महाराष्ट्र राज्य या गुजरात राज्य की सरकार को नियत दिन या उसके पश्चात् किसी समय राज्य विद्युत् बोर्ड या राज्य भांडागारण निगम से संबंधित अधिनियम के उपबंधों के अधीन ऐसा बोर्ड या निगम उस राज्य के लिए गठित करने से निवारित करती है; और यदि उन राज्यों में से किसी राज्य में ऐसे बोर्ड या निगम का इस प्रकार गठन उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोर्ड या निगम के विघटन से पहले किया जाए तो-
(क) उस राज्य में, विद्यमान बोर्ड या निगम से उसके सब उपक्रम, आस्तियां, अधिकार और दायित्व या उनमें से कोई ग्रहण करने हेतु नए बोर्ड या नए निगम को समर्थ बनाने के लिए उपबंध केन्द्रीय सरकार के आदेश द्वारा किया जा सकेगा; तथा
(ख) विद्यमान बोर्ड या निगम के विघटन पर किन्हीं आस्तियों, अधिकार और दायित्व, जो अन्यथा उपधारा (3) के उपबन्धों के कारण या अधीन उस राज्य को सक्रांत हो जाने चाहिए थे, उस राज्य की बजाय नए बोर्ड या निगम को संक्रांत हो जाएंगे ।
69. विद्युत शक्ति के उत्पादन और प्रदाय तथा जल-प्रदाय के बारे में इंतजाम का बना रहना-यदि केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत हो कि किसी क्षेत्र के लिए विद्युत शक्ति के उत्पादन या प्रदाय या जल-प्रदाय के बारे में या ऐसे उत्पादन या प्रदाय के लिए किसी परियोजना के निष्पादन के बारे में इंतजाम में उस क्षेत्र के लिए अहितकर उपांतरण इस कारण हो गया है या होना संभाव्य है कि वह क्षेत्र भाग 2 के उपबंधों के कारण उस राज्य के बाहर है, जिसमें, यथास्थिति, ऐसी शक्ति के उत्पादन और प्रदाय के लिए विद्युत स्टेशन और अन्य संस्थापन अथवा जल-प्रदाय के लिए आवाह क्षेत्र, जलाशय और अन्य संकर्म स्थित है, तो केन्द्रीय सरकार पहले वाले इंतजाम को यावत्साध्य बनाए रखने के लिए राज्य सरकार या अन्य सम्बद्ध प्राधिकारी को ऐसे निदेश दे सकेगी, जो वह ठीक समझे ।
70. मुंबई राज्य वित्तीय निगम के बारे में उपबन्ध-(1) राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन स्थापित मुंबई राज्य वित्तीय निगम, नियत दिन से, उन क्षेत्रों में, जिनके सम्बन्ध में वह उस दिन के ठीक पूर्व कार्य करता था, इस धारा के उपबन्धों तथा ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए जाएं, कार्य करता रहेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निगम के बारे में केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किन्हीं निदेशों के अन्तर्गत ऐसा निदेश भी होगा कि उक्त अधिनियम निगम को लागू होने में, ऐसे अपवादों तथा उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा, जो निदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(3) निगम का साधारण अधिवेशन, इस निमत्त, केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार उसके बोर्ड द्वारा 1960 की जुलाई के इकतीसवें दिन या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर, जिसे केन्द्रीय सरकार, मंजूर करे, यथास्थिति, निगम के पुनर्संगठन या पुनर्गठन या विघटन के लिए किसी स्कीम के, जिसके अन्तर्गत नए निगमों के बनाए जाने और विद्यमान निगम की आस्तियां, अधिकार तथा दायित्व उन्हें अन्तरित किए जाने की प्रस्थापनाएं भी हैं, विचार के लिए बुलाया जा सकेगा और यदि ऐसी स्कीम, उपस्थित और मत देने वाले शेयरधारकों के बहुमत से, साधारण अधिवेशन में पारित संकल्प द्वारा अनुमोदित कर दी जाए, तो वह स्कीम केन्द्रीय सरकार को उसकी मंजूरी के लिए प्रस्तुत की जाएगी ।
(4) यदि स्कीम केन्द्रीय सरकार द्वारा उपांतरों के बिना या ऐसे उपांतरों के सहित, जो साधारण अधिवेशन में अनुमोदित हुए हैं, मंजूर कर दी जाए, तो केन्द्रीय सरकार, स्कीम को प्रमाणित करेगी और ऐसे प्रमाणन पर वह स्कीम तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी उस स्कीम द्वारा प्रभावित निगमों पर तथा उनके लेनदारों और शेयरधारकों पर आबद्धकर होगी ।
(5) यदि स्कीम इस प्रकार अनुमोदित या मंजूर न की जाए, तो केन्द्रीय सरकार वह स्कीम मुंबई उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उसके मुख्य न्यायाधिपति द्वारा इस निमित्त नामनिर्देशित किया जाए, निर्देशित कर सकेगी, और उस स्कीम के बारे में उस न्यायाधीश का विनिश्चय अंतिम होगा और स्कीम द्वारा प्रभावित निगमों पर तथा उनके लेनदारों और शेयरधारकों पर आबद्धकर होगा ।
(6) इस धारा के पूर्ववर्ती उपबन्धों की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह गुजरात राज्य की सरकार को नियत दिन को या उसके पश्चात् किसी समय, राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) के अधीन उस राज्य के लिए किसी राज्य वित्तीय निगम का गठन करने से निवारित करती है ।
71. 1950 के अधिनियम सं० 64 का संशोधन-सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 में,-
(1) धारा 47क में,-
(क) उपधारा (1) में,-
(i) राज्यों के पुनर्गठन के कारण कोई संपूर्ण राज्य या उसका कोई भाग जिसकी बाबत, 1956 के नवम्बर के प्रथम दिन के ठीक पूर्व कोई निगम क्रियाशील या प्रवर्तनशील था", शब्दों, अक्षरों और अंकों के स्थान पर या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन, राज्यों के पुनर्गठन के कारण, कोई संपूर्ण राज्य या उसका कोई भाग, जिसकी बाबत पुनर्गठन होने के दिन के ठीक पूर्व निगम क्रियाशील या प्रवर्तनशील था" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ;
(ii) स्पष्टीकरण में, खण्ड (त्) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
(i) “मुंबई राज्य सड़क परिवहन निगम के संबंध में, मुंबई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 के अधीन यथा गठित महाराष्ट्र या गुजरात राज्य की सरकार अभिप्रेत होगी ;" ;
(ख) उपधारा (3) में, खण्ड (च) में, राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 111" शब्दों और अक्षरों के पश्चात् या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किसी अन्य अधिनियमिति" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।
(2) धारा 47क के पश्चात् निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
48. मुंबई राज्य सड़क परिवहन निगमसेसंबंधित संक्रमणकालीन उपबंध-धारा 47क में किसी बात के होते हुए भी, मुंबई राज्य सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि उसकी उपधारा (1) के अधीन वह एक स्कीम तैयार करे और उसे 1960 की मई के प्रथम दिन के पूर्व केन्द्रीय सरकार को अग्रेषित कर दे, और ऐसी दशा में उसकी उपधारा (2) के अधीन आदेश करने की जो शक्ति केन्द्रीय सरकार को प्रदत्त है, उसका उस दिन के पूर्व प्रयोग किया जा सकेगा किन्तु इस प्रकार किया गया कोई भी आदेश उस दिन तक प्रभावी नहीं होगा ।" ।
72. गुजरात की विधिज्ञ परिषद् के लिए विशेष उपबंध-(1) भारतीय विधिज्ञ परिषद् अधिनियम, 1926 (1926 का 38) में,-
(क) धारा 4 में,-
(i) उपधारा (2) में निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
स्पष्टीकरण-गुजरात उच्च न्यायालय की विधिज्ञ परिषद् के निर्वाचन के प्रयोजन के लिए, पूर्वोक्त 10 वर्ष की अवधि उस अवधि को ध्यान में रखने के पश्चात् जिसके लिए सम्बद्ध व्यक्ति, 1960 की मई के प्रथम दिन के पूर्व मुंबई या सौराष्ट्र के उच्च न्यायालय में या कच्छ के न्यायिक आयुक्त के न्यायालय में अधिकार के तौर पर विधि व्यवसाय करने का हकदार था, संगणित की जाएगी ।";
(ii) उपधारा (4) के परन्तुक के स्थान पर निम्नलिखित परन्तु प्रतिस्थापित किया जाएग, अर्थात् :-
परन्तु पश्चिमी बंगाल, मद्रास, महाराष्ट्र तथा गुजरात का महाधिवक्ता उन राज्यों के उच्च न्यायालयों के लिए गठित विधिज्ञ परिषद् का क्रमशः पदेन अध्यक्ष होगा ।" ;
(ख) धारा 5 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
5क. गुजरात उच्च न्यायालय के लिए तदर्थ विधिज्ञ परिषद्-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, गुजरात उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति इस अधिनियम के अधीन गुजरात उच्च न्यायालय की प्रथम विधिज्ञ परिषद् के सदस्यों को नामनिर्देशित करेगा और इस प्रकार नामनिर्देशित सदस्य बारह मास की अवधि के लिए पद-धारण करेंगे ।" ।
(2) मुंबई उच्च न्यायालय की विधिज्ञ परिषद् की आस्तियों और दायित्वों का विभाजन मुंबई स्थित उच्च न्यायालय तथा गुजरात स्थित उच्च न्यायालय की विधिज्ञ परिषदों के बीच, ऐसी रीति से किया जाएगा जो करार पाई जाए, और ऐसे करार के अभाव में, जैसा भारत के महा-न्यायवादी द्वारा निदेशित किया जाए ।
73. 1942 के अधिनियम 6 का संशोधन-बहुएकक सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1942 में, धारा 5ख के पश्चात् निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
5ग. कुछ बहुएकक सहकारी सोसाइटियों से संबंधित संक्रमणकालीन उपबंध-(1) जहां मुम्बई पुनर्गठन अधिनियम, 1960 की बारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी ऐसी सहकारी सोसाइटी की बाबत, जो धारा 5क की उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन बहुएकक सहकारी सोसाइटी हो जाती है, निदेशक-बोर्ड, एकमत से सोसाइटी के पुनर्संगठन, पुनर्गठन या विघटन के लिए कोई स्कीम अंगीगृत करता हो, जिसमें किसी नई सहकारी सोसाइटी के बनाने तथा उसको उस सोसाइटी की आस्तियों तथा दायित्वों तथा कर्मचारियों के अन्तरण के लिए प्रस्ताव सम्मिलित है और मुंबई राज्य सरकार, 1960 की मई के प्रथम दिन के पूर्व किसी समय उस स्कीम को प्रमाणित करती है, वहां उक्त धारा की उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (4) में या उस सोसाइटी से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि, विनियम या उपविधि में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रमाणित स्कीम उस स्कीम द्वारा प्रभावित सभी सोसाइटियों पर तथा सभी ऐसी सोसाइटियों के शेयरधारकों, लेनदारों और कर्मचारियों पर, ऐसे वित्तीय समायोजनों के अधीन रहते हुए, जो उपधारा (3) के अधीन इस निमित्त निदेशित किए जाएं, बाध्यकर होगी किन्तु उक्त दिन के पूर्व कोई ऐसी स्कीम प्रभावी नहीं की जाएगी ।
(2) जब किसी सहकारी सोसाइटी के बारे में कोई स्कीम इस प्रकार प्रमाणित कर दी जाए, तब केन्द्रीय रजिस्ट्रार उस स्कीम को ऐसे व्यक्तियों के, जो उस स्कीम के प्रमाणन की तारीख के ठीक पूर्व सोसाइटी के सदस्य थे, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों में विहित रीति से बुलाए गए अधिवेशन में रखेगा और स्कीम उक्त अधिवेशन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा अनुमोदित की जा सकेगी ।
(3) यदि स्कीम इस प्रकार अनुमोदित न की जाए या उपांतरों के साथ अनुमोदित की जाए तो केन्द्रीय रजिस्ट्रार उस स्कीम को मुंबई स्थित उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को निर्देशित कर सकेगा, जो इस निमित्त उसके मुख्य न्यायाधिपति द्वारा नामनिर्देशित किया जाए, और वह न्यायाधीश प्रभावित सोसाइटियों में ऐसे वित्तीय समायोजन करने का निदेश दे सकेगा जो वह आवश्यक समझे, और स्कीम उन वित्तीय समायोजनों के अधीन रहते हुए अनुमोदित समझी जाएगी ।
(4) यदि उपधारा (3) के अधीन दिए गए निदेशों के परिणामस्वरूप कोई सोसाइटी किसी धनराशि की देनदार हो जाए तो वह राज्य जिसके क्षेत्र के भीतर सोसाइटी स्थित हो, ऐसे धन संदाय की बाबत प्रत्याभूतिदाता के रूप में दायी होगा ।" ।
74. कानूनी निगमों के बारे में साधारण उपबन्ध-(1) इस भाग के पूर्वगामी उपबन्धों द्वारा अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, जहां मुम्बई राज्य या उसके किसी भाग के लिए केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन गठित कोई निगमित निकाय भाग 2 के उपबन्धों के आधार अन्तर्राज्यिक निगमित निकाय हो गया हो, वहां जब तक उक्त निगमित निकाय के बारे में विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न किया जाए तब तक वह निगमित निकाय नियत दिन से उन क्षेत्रों में जिनकी बाबत वह नियत दिन के ठीक पूर्व कार्य करता था, ऐसे निदेशों के अधीन रहते हुए, जो समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए जाएं, कार्य करता रहेगा ।
(2) ऐसे निगमित निकाय की बाबत उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए गए किन्हीं निदेशों के अन्तर्गत ऐसा निदेश भी होगा कि कोई ऐसी विधि, जिसके द्वारा उक्त निगमित निकाय शासित होता हो उस निगमित निकाय को उसके लागू होने में, ऐसे अपवादों या उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, जो उस निदेश में विनिर्दिष्ट हों ।
75. 1957 के अधिनियम 38 का संशोधन-अन्तर्राज्यिक निगम अधिनियम, 1957 की उद्देशिका में, धारा 2 में और धारा 5 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 109" तथा धारा 4 की उपधारा (2) के खण्ड (च) में राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 111" शब्दों और अंकों के पश्चात् जहां कहीं भी वे पाए जाएं या राज्यों के पुनर्गठन से सम्बन्धित किसी अन्य अधिनियमिति में" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।
76. कुछ विद्यमान सड़क परिवहन अनुज्ञापत्रों के चालू रहने के बारे में अस्थायी उपबंध-(1) मोटर यान अधिनियम, 1939 (1939 का 4) की धारा 63 में किसी बात के होते हुए भी, मुम्बई राज्य के परिवहन प्राधिकारी या उस राज्य में किसी प्रादेशिक परिवहन प्राधिकारी द्वारा अनुदत्त अनुज्ञापत्र, यदि ऐसा अनुज्ञापत्र नियत दिन के ठीक पूर्व, अन्तरित राज्यक्षेत्र के किसी क्षेत्र में विधिमान्य तथा प्रभावी था तो उस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए उस दिन के पश्चात् विधिमान्य तथा प्रभावी बना रहा समझा जाएगा और ऐसे क्षेत्र में उपयोग के लिए उसे विधिमान्य करने के प्रयोजनार्थ ऐसे किसी अनुज्ञापत्र का गुजरात के राज्य परिवहन प्राधिकारी द्वारा या उसके किसी प्रादेशिक परिहवन प्राधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जाना आवश्यक नहीं होगा :
परन्तु केन्द्रीय सरकार उन शर्तों में, जो अनुज्ञापत्र देने वाले प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञापत्र से संलग्न की गई हों, परिवर्धन, संशोधन या परिवर्तन महाराष्ट्र और गुजरात की राज्य सरकारों से परामर्श के पश्चात् कर सकेगी ।
(2) किसी ऐसे अनुज्ञापत्र के अधीन गुजरात राज्य में चलाने के लिए किसी परिवहन यान की बाबत नियत दिन के पश्चात् कोई पथकर, प्रवेश फीस या वैसी ही प्रकृति के अन्य प्रभार, उद्गृहीत नहीं किए जाएंगे, यदि उस यान को उस दिन के ठीक पूर्व अन्तरित राज्यक्षेत्र के भीतर चलाने के लिए किसी ऐसे पथकर, प्रवेश फीस या अन्य प्रभारों के संदाय से छूट प्राप्त हो :
परन्तु केन्द्रीय सरकार, यथास्थिति, किसी ऐसे पथकर, प्रवेश फीस या अन्य प्रभार के उद्ग्रहण को महाराष्ट्र और गुजरात राज्य सरकारों से परामर्श के पश्चात् प्राधिकृत कर सकेगी ।
77. कुछ मामलों में छंटनी प्रतिकर से सम्बन्धित विशेष उपबन्ध-जहां केन्द्रीय अधिनियम, राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम के अधीन गठित कोई निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटियों से सम्बन्धित किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई सहकारी सोसाइटी या उस राज्य का कोई वाणिज्यिक या औद्योगिक उपक्रम इस अधिनियम के अधीन, मुम्बई राज्य के पुनर्गठन के कारण किसी भी रीति से पुनर्संगठित या पुनर्गठित किया जाए या किसी अन्य निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटी या उपक्रम में समामेलित किया जाए या विघटित किया जाए और ऐसे पुनर्संगठन, पुनर्गठन, समामेलन या विघटन के परिणामस्वरूप, ऐसे निगमित निकाय द्वारा या किसी ऐसी सहकारी सोसाइटी या उपक्रम में नियोजित कोई कर्मकार किसी अन्य निगमित निकाय को अन्तरित किया जाए या उसके द्वारा या किसी अन्य सहकारी सोसाइटी या उपक्रम में पुनर्नियोजित किया जाए वहां औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा अन्तरण या पुनर्नियोजन उसे उक्त धारा के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा :
परन्तु यह तब जबकि-
(क) ऐसे अन्तरण या पुनर्नियोजन के पश्चात् उस कर्मकार को लागू होने वाले सेवा के निबन्धन और शर्तें, अन्तरण या पुनर्नियोजन के ठीक पूर्व उसे लागू होने वाले निबन्धनों और शर्तों से कम अनुकूल न हो ;
(ख) उस निगमित निकाय, सहकारी सोसाइटी या उपक्रम से, जहां कर्मकार अंतरित या पुनर्नियोजित हो, सम्बन्धित नियोजक करार द्वारा या अन्यथा उस कर्मकार को उसकी छंटनी की दशा में, इस आधार पर कि उसकी सेवा चालू रही है और अन्तरण या पुनर्नियोजन द्वारा उसमें बाधा नहीं पड़ी है, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च के अधीन विधिक रूप से प्रतिकर का देनदार हो ।
78. आय-कर के बारे में विशेष उपबंध-जहां इस भाग के उपबन्धों के अधीन कारबार चलाने वाले किसी निगमित निकाय की आस्तियों, अधिकारों तथा दायित्वों को किसी अन्य निगमित निकायों को, जो उस अन्तरण के पश्चात् वहीं कारबार चलाते हों अन्तरित किया गया हो, वहां प्रथम वर्णित निगमित निकाय द्वारा हुई लाभ और अभिलाभों की हानियां, जो अन्तरण के अभाव में, इन्कम टैक्स ऐक्ट, (1922 का 11) की धारा 24 के उपबन्धों के अनुसार अग्रनीत की जाती और मुजरा की जाती, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाने वाले नियमों के अनुसार अन्तरिती निगमित निकायों में प्रभाजित की जाएंगी और ऐसे प्रभाजन पर प्रत्येक अन्तरिती निगमित निकाय को आबंटित हानि के अंश के सम्बन्ध में कार्यवाही उक्त अधिनियम की धारा 24 के उपबन्धों के अनुसार की जाएगी मानो वे हानियां स्वयं अंतरिती निगमित निकाय को अपने द्वारा किए गए कारबार में उन वर्षों में हुई हों, जिनमें वे हानियां वास्तव में हुईं ।
79. कुछ राजकीय संस्थाओं में प्रसुविधाओं का बना रहना-(1) यथास्थिति, महाराष्ट्र राज्य की सरकार या गुजरात राज्य की सरकार, तेरहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट उस राज्य में स्थित संस्थाओं की बाबत प्रसुविधाएं उस अन्य राज्य के लोगों को ऐसी कालावधि के लिए और ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर देती रहेगी, जो दो राज्य सरकारों के बीच 1960 के अक्तूबर के प्रथम दिन के पूर्व करार पाई जाएं, या यदि उक्त तारीख तक कोई करार न हो, तो जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, नियत करे तथा जो किसी भी प्रकार से ऐसे लागों के लिए उन प्रसुविधाओं से कम अनुकूल न होंगी, जो उन्हें नियत दिन के पूर्व दी जा रही थीं ।
(2) केन्द्रीय सरकार, 1960 के अक्तूबर के प्रथम दिन के पूर्व किसी समय, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, महाराष्ट्र या गुजरात राज्य में नियत दिन को विद्यमान किसी अन्य संस्था को, तेरहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट कर सकेगी और ऐसी अधिसूचना के जारी किए जाने पर यह समझा जाएगा कि अनुसूची का संशोधन उक्त संस्था को उसमें सम्मिलित करके किया गया है ।
भाग 8
सेवाओं के बारे में उपबन्ध
80. अखिल भारतीय सेवाओं से सम्बन्धित उपबन्ध-(1) इस धारा में “राज्य काडर" पद का,-
(क) भारतीय प्रशासनिक सेवा के सम्बन्ध में वही अर्थ है जो उसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (काडर) नियम, 1954 में दिया गया है ; तथा
(ख) भारतीय पुलिस सेवा के सम्बन्ध में वही अर्थ है जो उसे भारतीय पुलिस सेवा (काडर) नियम, 1954 में दिया गया है ।
(2) नियत दिन के ठीक पूर्व विद्यमान मुम्बई राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा भारतीय पुलिस सेवा के काडरों के स्थान पर, उस दिन से, इन सेवाओं में से प्रत्येक की बाबत दो पृथक् काडर होंगे, जिसमें एक महाराष्ट्र राज्य के लिए तथा दूसरा गुजरात राज्य के लिए होगा ।
(3) राज्य काडरों में से प्रत्येक की प्रारम्भिक सदस्य-संख्या और संरचना ऐसी होगी, जो केन्द्रीय सरकार, नियत दिन के पूर्व आदेश द्वारा अवधारित करे ।
(4) उक्त सेवाओं में से प्रत्येक के ऐसे सदस्य जो नियत दिन के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य के उन काडरों में दर्ज थे, महाराष्ट्र तथा गुजरात राज्यों में से प्रत्येक के लिए उसी सेवा के राज्य काडरों को ऐसी रीति से और ऐसी तारीख या तारीखों से आबंटित किए जाएंगे, जो केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे ।
(5) इस धारा की कोई भी बात, नियत दिन के पश्चात् उपधारा (2) के अधीन गठित उक्त सेवाओं के राज्य काडरों के सम्बन्ध में और उक्त काडरों पर के उन सेवाओं के सदस्यों के सम्बन्ध में अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 (1951 का 61) या तद्धीन बनाए गए नियमों के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
81. अन्य सेवाओं से सम्बन्धित उपबन्ध-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो नियत दिन के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा कर रहा हो, उस दिन से जब तक केन्द्रीय सरकार के साधारण या विशेष आदेश द्वारा उससे यह अपेक्षा न की जाए कि वह गुजरात राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में अनंतिम रूप से सेवा करे, तब तक महाराष्ट्र राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में अनंतिम रूप से सेवा करता रहेगा ।
(2) नियत दिन के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, केन्द्रीय सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, वह राज्य अवधारित करेगी, जिसे महाराष्ट्र या गुजरात राज्य को अनंतिम रूप से आबंटित प्रत्येक व्यक्ति सेवा के लिए अन्तिम रूप से आबंटित होगा और वह तारीख भी अवधारित करेगी, जिससे ऐसा आबंटन प्रभावी होगा या प्रभावी हुआ समझा जाएगा ।
(3) प्रत्येक व्यक्ति, जो उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन अंतिम रूप से महाराष्ट्र राज्य या गुजरात राज्य को आबंटित किया जाए, यदि वह पहले ही उसमें सेवा न करता हो, तो उस राज्य में, ऐसी तारीख से, जो दो राज्य सरकारों के बीच करार पाई जाए, या ऐसे करार के अभाव में, जो केन्द्रीय सरकार अवधारित करे, सेवा के लिए उपलब्ध किया जाएगा ।
(4) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के सम्बन्ध में अपनी सहायता के प्रयोजन के लिए आदेश द्वारा एक या अधिक सलाहकार समितियां स्थापित कर सकेगीः-
(क) महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच सेवाओं का विभाजन और एकीकरण ; तथा
(ख) इस धारा के उपबन्धों द्वारा प्रभावित सब व्यक्तियों के साथ ऋजु और साम्यापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना और ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए किसी अभ्यावेदन पर उचित विचार करना ।
(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबन्ध, किसी ऐसे व्यक्ति के सम्बन्ध में, जिसे धारा 80 के उपबन्ध लागू हों, लागू नहीं होंगे ।
(6) इस धारा की कोई भी बात, नियत दिन के पश्चात् महाराष्ट्र या गुजरात राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा करने वाले व्यक्तियों की सेवा की शर्तों के अवधारण के सम्बन्ध में संविधान के भाग 14 के अध्याय 1 के उपबन्धों के प्रवर्तन पर प्रभाव डालने वाली न समझी जाएगी :
परन्तु इस धारा के अधीन महाराष्ट्र या गुजरात राज्य को अनंतिम रूप से या अन्तिम रूप से आबंटित किसी व्यक्ति के मामले को नियत दिन के ठीक पूर्व लागू होने वाली सेवा की शर्तों में, उसके लिए अहितकर रूप में परिवर्तन, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा ।
82. अधिकारियों के उन्हीं पदों में बनाए रखने के बारे में उपबन्ध- प्रत्येक व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व किसी क्षेत्र में, जो उस दिन महाराष्ट्र या गुजरात राज्य के भीतर आता हो, मुम्बई राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में किसी पद या अधिकार पद को धारण करता हो या उसके कर्तव्यों का निर्वहन करता हो, उस राज्य में वही पद या अधिकार पद धारण करता रहेगा और उस दिन से उस राज्य की सरकार द्वारा या उसमें अन्य समुचित प्राधिकारी द्वारा उस पद या अधिकार पद पर सम्यक् रूप से नियुक्त समझा जाएगा :
परन्तु इस धारा की कोई बात, किसी सक्षम प्राधिकारी को, नियत दिन के पश्चात् ऐसे व्यक्ति के सम्बन्ध में उसके ऐसे पद या अधिकार पद पर बने रहने पर प्रभाव डालने वाले आदेश पारित करने से निवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी ।
83. केन्द्रीय सरकार की निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, महाराष्ट्र और गुजरात राज्य की सरकारों को ऐसे निदेश दे सकेगी, जो उसे इस भाग के पूर्वगामी उपबन्धों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों और राज्य सरकार ऐसे निदेशों का अनुपालन करेगी ।
84. मुम्बई लोक सेवा आयोग के बारे में उपबन्ध-(1) मुम्बई राज्य का लोक सेवा आयोग, नियत दिन से, महाराष्ट्र राज्य का लोक सेवा आयोग होगा ।
(2) मुम्बई लोक सेवा आयोग की नियत दिन के पहले की किसी अवधि के बारे में आयोग द्वारा किए गए कार्य की बाबत रिपोर्ट, अनुच्छेद 323 के खण्ड (2) के अधीन महाराष्ट्र और गुजरात राज्य के राज्यपालों को प्रस्तुत की जाएगी और महाराष्ट्र का राज्यपाल, ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर, उसकी एक प्रतिलिपि किसी ऐसे मामलों की बाबत, यदि कोई हो, जहां आयोग की सलाह अस्वीकार की गई थी, वहां ऐसी अस्वीकृति के कारणों को यावत्शक्य स्पष्ट करने वाले ज्ञापन सहित, महाराष्ट्र राज्य के विधान-मण्डल के समक्ष रखवाएगा और ऐसी रिपोर्ट या ऐसा कोई ज्ञापन गुजरात राज्य की विधान सभा के समक्ष रखवाना आवश्यक नहीं होगा ।
भाग 9
विधिक और प्रकीर्ण उपबन्ध
85. संविधान के अनुच्छेद 371 का संशोधन-नियत दिन से, संविधान के अनुच्छेद 371 में, खण्ड (2) में,-
(क) “मुम्बई राज्य" शब्दों के स्थान पर महाराष्ट्र या गुजरात राज्य" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ; और
(ख) “शेष महाराष्ट्र" शब्दों के स्थान और शेष महाराष्ट्र या, यथास्थिति" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
86. 1956 के अधिनियम 37 का संशोधन-राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 में,-
(त्) खण्ड (घ) में मुम्बई और मैसूर" शब्दों के स्थान पर गुजरात और महाराष्ट्र" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ;
(त्त्) खण्ड (ङ) में मद्रास और केरल" शब्दों के स्थान पर मद्रास, मैसूर और केरल" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
87. विधियों का प्रादेशिक विस्तार-भाग 2 के उपबन्धों की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि उनसे उन राज्यक्षेत्रों में, जिन पर नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त कोई विधि विस्तारित होती है या लागू होती है, कोई परिवर्तन हुआ है और ऐसी किसी विधि में, मुम्बई राज्य के प्रति प्रादेशिक निर्देशों का जब तक अन्य सक्षम विधान-मण्डल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा अन्यथा उपबंधित न हो, तब तक वही अर्थ लगाया जाएगा मानो वे नियत दिन के ठीक पूर्व उस राज्य के भीतर के राज्यक्षेत्र हों ।
88. विधियों के अनुकूलन की शक्ति-नियत दिन के पूर्व बनाई गई किसी विधि के महाराष्ट्र या गुजरात राज्य के सम्बन्ध में लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए समुचित सरकार, उस दिन से एक वर्ष के अवसान के पूर्व आदेश द्वारा विधि के ऐसे अनुकूलन तथा उपान्तर, चाहे वे निरसन के रूप में या संशोधन के रूप में हों, जैसा आवश्यक या समीचीन हो, कर सकेगी और तब ऐसी प्रत्येक विधि जब तक सक्षम विधान-मण्डल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा परिवर्तित, निरसित या संशोधित न कर दी जाए, तब तक इस प्रकार किए गए अनुकूलों और उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में समुचित सरकार" से संघ सूची में प्रगणित किसी विषय से सम्बन्धित किसी विधि के बारे में केन्द्रीय सरकार, और किसी अन्य विधि के बारे में राज्य सरकार अभिप्रेत है ।
89. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-इस बात के होते हुए भी कि नियत दिन के पूर्व बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन के लिए धारा 88 के अधीन कोई उपबंध नहीं किया गया है, या अपर्याप्त उपबंध किया गया है, ऐसी विधि को प्रवर्तित करने के लिए अपेक्षित या सशक्त किया गया कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी महाराष्ट्र या गुजरात राज्य के संबंध में उसके लागू होने को सुकर बनाने के प्रयोजन के लिए, उस विधि का अर्थान्वयन, सार पर प्रभाव डाले बिना, ऐसी रीति से कर सकेगा, जो उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष के मामले की बाबत आवश्यक या उचित हो ।
90. कानूनी कृत्यों का प्रयोग करने वाले प्राधिकारियों आदि को नामित करने की शक्ति-गुजरात राज्य की सरकार अंतरित राज्यक्षेत्र की बाबत राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसा प्राधिकारी, अधिकारी या व्यक्ति विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जो नियत दिन से या उसके पश्चात् उस दिन प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसे प्रयोक्तव्य कृत्यों का प्रयोग करने के लिए, जो उस अधिसूचना में उपवर्णित हो, सक्षम होगा और ऐसी विधि तद्नुसार प्रभावी होगी ।
91. विधिक कार्यवाहियां-जहां नियत दिन के ठीक पूर्व मुंबई राज्य, इस अधिनियम के अधीन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच प्रभाजनाधीन किसी संपत्ति, अधिकार या दायित्व की बाबत किन्हीं विधिक कार्यवाहियों का पक्षकार हो, वहां महाराष्ट्र या गुजरात राज्य, जो इस अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर उस संपत्ति या उन अधिकारों या दायित्वों का वारिस होता हो या उसमें कोई भाग अर्जित करता हो, उन कार्यवाहियों के पक्षकार के रूप में मुंबई राज्य के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया समझा जाएगा और कार्यवाहियां तद्नुसार चालू रखी जा सकेंगी ।
92. लंबित कार्यवाही का अन्तरण-(1) नियत दिन के ठीक पूर्व ऐसे क्षेत्र में, जो उस दिन महाराष्ट्र राज्य के भीतर आता हो, किसी न्यायालय (उच्च न्यायालय से भिन्न), अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी के समक्ष की लंबित प्रत्येक कार्यवाही, यदि वह कार्यवाही अनन्यतः अंतरित राज्यक्षेत्रों से संबंधित हो, तो गुजरात राज्य में तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी को अंतरित हो जाएगी ।
(2) यदि कोई प्रश्न उठे कि क्या उपधारा (1) के अधीन कोई कार्यवाही अंतिरत हो जानी चाहिए, तो वह मुंबई स्थित उच्च न्यायालय को निर्देशित की जाएगी और उस उच्च न्यायालय का विनिश्चय अंतिम होगा ।
(3) इस धारा में-
(क) “कार्यवाही" के अंतर्गत कोई वाद, मामला या अपील भी है ; तथा
(ख) गुजरात राज्य में तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी" से अभिप्रेत है-
(i) वह न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी जिसमें या जिसके समक्ष वह कार्यवाही यदि वह नियत दिन के पश्चात् संस्थित की जाती तो रखी जाती ; या
(ii) शंका की दशा में, उस राज्य का ऐसा न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी, जो नियत दिन के पश्चात् उस राज्य की सरकार द्वारा या नियत दिन के पूर्व मुंबई की सरकार द्वारा तत्स्थानी न्यायालय, अधिकरण, प्राधिकारी या अधिकारी के रूप में अवधारित किया जाए ।
93. कुछ दशाओं में विधि-व्यवसाय करने का प्लीडरों का अधिकार-कोई व्यक्ति, जो नियत दिन के ठीक पूर्व मुंबई राज्य में किन्हीं अधीनस्थ न्यायालयों में विधि व्यवसाय करने के हकदार प्लीडर के रूप में नामावलित हो, उस दिन से एक वर्ष की कालावधि के लिए, इस बात के होते हुए भी कि उन न्यायालयों की अधिकारिता के भीतर के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसका कोई भाग गुजरात राज्य को अंतरित कर दिया गया है, उन न्यायालयों में विधि-व्यवसाय करने का हकदार बना रहेगा ।
94. अधिनियम के अन्य विधियों से असंगत उपबंधों का प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध किसी अन्य विधि में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
95. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई आती है, तो राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, कोई भी बात कर सकेगा जो ऐसे उपबंधों से असंगत न हो तथा जो उस कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो ।
96. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।
[(2) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।]
प्रथम अनुसूची
[धारा 3(1) (ख) देखिए]
मुंबई राज्य से गुजरात राज्य को अन्तरित राज्यक्षेत्र
(इस अनुसूची में किसी गांव के संबंध में जनगणना कोड सं० के प्रति किसी निर्देश का यह अभिप्राय है कि वह कोड सं० 1951 की जनगणना में उस गांव को दी गई है ।)
भाग 1
ठाणे जिले का उंबरगांव तालुक
|
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
|
*उंबरगांव |
1 |
नाहुली |
28 |
|
कालगांव |
2 |
पालगांव |
29 |
|
कलई |
3 |
पाली |
30 |
|
गोवड |
4 |
पुनत |
31 |
|
ताडगांव |
6 |
बोरीगांव तर्फ काचीगांव |
32 |
|
देहरी |
7 |
बोरलई |
33 |
|
नारगोल |
8 |
भिलद |
34 |
|
फांसा (सम्पूर्ण) |
9 |
मांदा |
35 |
|
मामकवाड़ा |
11 |
मणिकपुर |
36 |
|
*मारोली |
12 |
मोहन |
37 |
|
सरोंदा |
13 |
वणकस |
38 |
|
अच्छरी |
14 |
वालवाडा |
39 |
|
आणगांव |
15 |
शिरगांव |
40 |
|
आहु |
16 |
संजान |
41 |
|
एकलहरे |
17 |
सरई |
42 |
|
काचीगांव |
18 |
सोलसुंबा |
43 |
|
भटी करंबेली |
19 |
हमरण |
44 |
|
करंबेली पाली |
20 |
देहली |
48 |
|
करंबेले |
21 |
तलवाडा |
49 |
|
*खट्टलवाडा |
22 |
धानोली |
50 |
|
घिमसे काकरिया |
23 |
नांदगांव |
51 |
|
जंबुरी |
24 |
मालव |
52 |
|
टेंभी |
25 |
अंकलास |
55 |
|
तुंब |
26 |
झारोली |
67 |
|
दाहद |
27 |
नागवस |
70 |
|
|
|
|
|
टिप्पण :-*इसमें इसी नाम के शहर भी हैं ।
भाग 2
पश्चिम खानदेश जिला
नवापुर तालुक
|
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
|
अभंकुवा (वन) |
- |
थुती |
108 |
|
आनंदपुर |
2 |
उच्छल |
111 |
|
बाबरघाट |
3 |
वदधे खुर्द |
115 |
|
भडबुंजा |
6 |
वडपातल |
117 |
|
भिंड बुद्रक |
11 |
झरनपाडा |
123 |
|
भिंट खुर्द |
12 |
नंदुरबार तालुक |
|
|
चचरबंडे़ |
18 |
आदडे |
2 |
|
चाधवबंडे़ (वन) |
- |
अंतुर्ली |
5 |
|
छापटी |
19 |
अरकुंडा (वन) |
- |
|
चिखली (वन) |
- |
भिलभावली |
19 |
|
धज |
27 |
भिलजांबोली |
20 |
|
हरिपुर |
35 |
बोराठे |
25 |
|
जमकी |
38 |
बोरडे |
23 |
|
जमने |
36 |
चिंचोडे |
28 |
|
काचली |
39 |
चोरगांव (त्यक्त) |
28 क |
|
कमालपुर |
41 |
देवहाले |
31 |
|
काटसवन खबड कोकम्बे (वन) माणिकपुर मिरकोट
|
48
50 - 68
70 |
देव मोगरा-बैबी अंबर |
(पातन क्षेत्र श्रेणी 20 के कूप सं० 1, 2 तथा 20 तथा पातन क्षेत्र श्रेणी 21 के कू सं० 1 से 9 तक के वन गांव)
|
|
मोगरबारा (वन) |
72 |
गामडी |
39 |
|
मोग्रानी (वन) |
- |
गुजरपुर |
43 |
|
नाचल |
75 |
हरदुली (दिगर) |
44 |
|
नारायणपुर |
77 |
हतनूर (दिगर) |
46 |
|
नुरबाड़ |
82 |
हिंगणी (दिगर) |
48 |
|
पाखरी |
83 |
कविठे |
63 |
|
परचुली |
86 |
खैरवे खुर्द तर्फ धनोर |
65 |
|
पेठपुर |
89 |
खोडाडे |
69 |
|
साकर्डे (दिगर) |
94 |
कोथली बुद्रुक |
77 |
|
ससे |
96 |
लखमीखेडे |
79 |
|
शेलुड |
101 |
लेकुरवाली |
80 |
|
सुंदरपुर |
106 |
|
|
|
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
|
मुबारकपुर |
86 |
शाले |
119 |
|
नसरपुर |
93 |
शेलु |
121 |
|
नेवले |
96 |
सुलवडे |
125 |
|
निजार |
99 |
तापी खडकले |
128 |
|
पिपलोद तर्फ निसार |
108 |
वाडली |
136 |
|
रायगड |
109 |
वाके |
143 |
|
राणि खडकले (त्यक्त) |
112क |
वलेडे |
149 |
|
सरवले |
115 |
व्यावल |
154 |
भाग 3
पश्चिम खानदेश जिला
अक्कलकुवा तालुक
|
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
|
अक्कलकुवा बुद्रुक |
1 |
पलसवाडा |
132 |
|
अंघट |
6क |
पाना |
133 |
|
बर्कतुरा |
15 |
परोद |
135 |
|
भोगवद |
23 |
पारोडी |
136 |
|
चाटवद |
32 |
पातीपाडा |
138 |
|
छोटी कोराली (त्यक्त) |
35क |
पिम्परीपाडा (आर) |
143 |
|
दवरियंब |
37 |
राणिपुर |
150 |
|
डोगरीपाडा(जी) |
44 |
रंजनीवाड |
152 |
|
गांगथा |
50 |
रुंडीगावन |
156 |
|
इतवाई |
59 |
उमान |
176 |
|
जावली |
63 |
उमजा |
175 |
|
केनवाडा |
78 |
उमरण |
180 |
|
केवदमोई |
79 |
वडगांव |
189 |
|
खैरपाडा |
84 |
झापा-अमली |
196
|
|
खानोर |
85 |
झिरी-बेडी |
197 |
|
खोकवाड |
91 |
तालोद तालुक |
|
|
कोकटीपाडा |
94 |
||
|
कोलवण |
95 |
अक्कलुतार |
1 |
|
लंगडी |
104 |
अमोड तर्फ साटोणे |
6 |
|
मेघी |
111 |
अमोड तर्फ तलोदा |
7 |
|
नवागांव (जी०) |
120 |
आसापुर |
10 |
|
नेवडी (आंबा) |
126 |
आशरवे |
11 |
|
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
गांव का नाम |
जनगणना कोड सं० |
|
अष्टे तर्फ बुधावल |
13 |
मेंढपुर |
74 |
|
बहुरुपे |
14 |
मोड़ले |
77 |
|
बालदे |
16 |
मोरंबे |
80 |
|
बालंबे |
15 |
निम्भोर |
84 |
|
बेज |
20 |
पानिबरे |
87 |
|
भमसाल |
21 |
पाटी |
89 |
|
बोरीकुवा |
25 |
पिपलास |
91 |
|
चिरमटी |
31 |
पिसावर |
93 |
|
चोखियामली |
33 |
राजपुर |
95 |
|
फुलवाडी |
90 |
रानैची |
98 |
|
गाडीड |
41 |
सदगांवे |
100 |
|
गोरसे |
44 |
सातोले |
108 |
|
हतोडे |
47 |
तोरांडे |
120 |
|
होल |
48 |
तुलसे |
122 |
|
केलानी |
56 |
उभड़ |
123 |
|
कोंड्रज |
64 |
उन्तवड |
126 |
|
कुकुरमंडे |
66 |
वरपाडे |
128 |
|
मोहमदपुर (त्यक्त) |
70क |
वेसगांव |
129 |
|
मतावल |
73 |
झुमकटी |
131 |
द्वितीय अनुसूची
(धारा 7 देखिए)
भाग 1
राज्य सभा के महाराष्ट्र के सदस्य
वे सदस्य, जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1962 को समाप्त होती है
1. श्री पी० एन० राजभोज ।
2. डा. वामन शिवदास बारलिंगे ।
3. श्री टी० आर० देवगिरीकर ।
4. श्री जी० आर० कुलकर्णी ।
5. श्री धैर्यशीलराव यशवंतराव पवार ।
6. श्री एम० डी० तुमपल्लीबार ।
वे सदस्य, जिनकी पदावधि, 2 अप्रैल 1964 को समाप्त होती है
7. श्री बाबुभाई एम० चिनाय ।
8. श्री रामराव माधवराव देशमुख ।
9. श्री भाऊराव देवजी खोब्रागडे ।
10. श्री सोनुसिंह धनसिंह पाटिल ।
11. श्री लालजी पेंडसे ।
12. श्री अबिद अली ।
भाग 2
राज्य सभा के गुजरात के सदस्य
वे सदस्य, जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1962 को समाप्त होती है
1. श्री जाडवजी केशवजी मोदी ।
2. प्रोफेसर डा० रघुवीर ।
3. “रिक्त" ।
वे सदस्य, जिनकी पदावधि 2 अप्रैल, 1964 को समाप्त होती है
4. श्री रोहित मनुशंकर दवे ।
5. श्री खंडुभाई के० देसाई ।
6. श्री डाहयाभाई वल्लभभाई पटेल ।
तृतीय अनुसूची
(धारा 11 देखिए)
संसदीय तथा सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1956
की प्रथम अनुसूची के संशोधन
(1) “4-मुंबई" शीर्षक के स्थान पर “4-गुजरात" प्रतिस्थापित करें ।
(2) प्रविष्टि 111 में “पारडी" शब्द के पश्चात् “उंबरगांव" शब्द अन्तःस्थापित करें और “सूरत जिला" शब्दों के स्थान पर, “सूरत जिला ; और डांग जिला" शब्द प्रतिस्थापित करें ।
(3) प्रविष्टि 111 के पश्चात् निम्नलिखित टिप्पण जोड़ दें :-
“टिप्पण-इस भाग में भरुच, सूरत या डांग जिले या सूरत जिले के सोनगढ़ या उंबरगांव तालुक या भरुच जिले के सगबरा तालुक के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ होगा कि, 1960 की मई के प्रथम दिन वह क्षेत्र, यथास्थिति, उस जिले या तालुक में समाविष्ट है ।" ।
(4) प्रविष्टि 112 के ठीक पूर्व “4क-महाराष्ट्र" शीर्षक अन्तःस्थापित करें ।
(5) प्रविष्टि 129 में “डांग जिला" शब्दों का लोप करें ।
(6) प्रविष्टि 148 के पश्चात् के टिप्पण में निम्नलिखित जोड़ दें-
“(3) इस भाग में ठाणे या पश्चिम खानदेश जिले या पश्चिम खानदेश जिले के नवांपुर, नंदुरबार, अक्कलकुवा या तलोदा तालुक के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ होगा कि 1960 की मई के प्रथम दिन वह क्षेत्र, यथास्थिति, उस जिले या तालुक में समाविष्ट है ।" ।
(7) परिशिष्ट में-
(क) “2-मुंबई" शीर्षक के स्थान पर, 2-गुजरात" प्रतिस्थापित करें ; और
(ख) “कुलाबा जिला" उप-शीर्षक के ठीक पूर्व 2-क महाराष्ट्र" शीर्षक अन्तःस्थापित करें ।
चतुर्थ अनुसूची
(धारा 14 देखिए)
संसदीय और सभा निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन आदेश, 1956 की द्वितीय अनुसूची के संशोधन
(1) “4-मुंबई" शीर्षक के स्थान पर 4-गुजरात" प्रतिस्थापित करें ।
(2) प्रविष्टि 103 में, सगबरा महाल" शब्दों के स्थान पर “सगबरा तालुक" प्रतिस्थापित करें ।
(3) प्रविष्टि 106 के पूर्व आने वाले सूरत जिला" उप-शीर्षक के स्थान पर, “सूरत और डांग जिले" उप-शीर्षक प्रतिस्थापित करें ।
(4) प्रविष्टि 114 में, “बसंडा तालुक" शब्दों के स्थान पर, “डांग जिला, बसंडा तालुक" शब्द प्रतिस्थापित करें ।
(5) प्रविष्टि 118 में, स्तम्भ 3 में “पारडी तालुक" शब्दों के स्थान पर “पारडी और उंबरगांव तालुक" शब्द प्रतिस्थापित करें ।
(6) प्रविष्टि 118 के पश्चात्-
(क) निम्नलिखित टिप्पण जोड़ दें :-
“टिप्पण-इस भाग में भरुच, सूरत या डांग जिले या भरुच जिले के सगबरा तालुक या सूरत जिले के सोनगढ़ या उंबरगांव तालुक के प्रति निर्देश का यह अर्थ होगा कि, 1960 की मई के प्रथम दिन वह क्षेत्र, यथास्थिति, उस जिले या तालुक में समाविष्ट है ।";
(ख) उक्त टिप्पण के पश्चात् आदेश के भाग 4 के विद्यमान परिशिष्ट की मद (1) से (33) तक को दोहरा कर एक परिशिष्ट अन्तःस्थापित करें ।
(7) “बृहत मुंबई जिला" उप-शीर्षक के ठीक पूर्व, परिशिष्ट और उपाबन्ध के सहित सभी निम्नलिखित प्रविष्टियों का महाराष्ट्र राज्य के लिए एक पृथक् भाग बनाने हेतु “4-क महाराष्ट्र" शीर्षक अन्तःस्थापित करें ।
(8) “बृहत मुंबई जिला" उप-शीर्षक और पाद-टिप्पण 1 और 2 के पूर्व के तारांक चिह्न का लोप करें ।
(9) प्रविष्टि 143 में “डहाणू और उंबरगांव तालुक" शब्दों के स्थान पर, “डहाणू तालुक" शब्द प्रतिस्थापित करें ।
(10) प्रविष्टि 228 के ठीक पूर्व उप-शीर्षक के स्थान पर, “नाशिक और डांग जिले" शब्दों के स्थान पर, “नाशिक जिला" प्रतिस्थापित करें ।
(11) प्रविष्टि 230 में, “पेंट और सुरगणा महाल" शब्दों के स्थान पर “पेंट महाल" शब्द प्रतिस्थापित करें ।
(12) प्रविष्टि 231 में स्तंभ 2 में डांग" शब्द के स्थान पर कलवण" शब्द प्रतिस्थापित करें और स्तंभ 3 में डांग जिला" शब्दों के स्थान पर सुरगणा महाल" शब्द प्रतिस्थापित करें ।
(13) प्रविष्टि 238 में, स्तम्भ 3 की प्रविष्टि के स्थान पर साकरी और “नंदुरबार तालुक" प्रतिस्थापित करें ।
(14) प्रविष्टि 239 में, स्तम्भ 3 की प्रविष्टि के स्थान पर “नवापुर तालुक" प्रतिस्थापित करें ।
(15) प्रविष्टि 339 के ठीक पश्चात् आने वाले टिप्पण के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें :-
“टिप्पण-(1) इस भाग में ठाणे या पश्चिम खानदेश जिले या ठाणे जिले के डहाणू तालुक या पश्चिम खानदेश जिले के नवापुर, नंदुरबार, अक्कलकुवा या तलोदा तालुक के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ होगा कि 1960 की मई के प्रथम दिन वह क्षेत्र, यथास्थिति, उस जिले या तालुक में समाविष्ट है ।
(2) बृहत मुंबई के 77 जनगणना वार्डों के नाम परिशिष्ट की मद (1) में उपवर्णित है और सं. 1 से 21 तक के सभा निर्वाचन-क्षेत्रों का पथ, सड़क तथा अन्य आम रास्तों तथा गांवों के रूप में पूरा वर्णन परिशिष्ट की मद (2) में दिया गया है ।
(3) सभा निर्वाचन-क्षेत्र में क्रमशः सं० 220 तथा 221 में निर्दिष्ट बनोटी और सोएगांव सर्किलों के गांवों के नाम इस भाग के परिशिष्ट में उपवर्णित है ।" ।
(16) प्रविष्टि 119 से 339 तक को क्रमशः 1 से 221 तक की प्रविष्टियों के रूप में पुनःसंख्यांकित करें और उन प्रविष्टियों में परिशिष्ट की मद (36) से (71) तक और (73) से (79) तक के प्रति निर्देशों को क्रमशः (3) से (45) तक के रूप में पुनःसंख्यांकित करें ।
(17) परिशिष्ट में,-
(क) “मद (1) से (33) तक का और उनके उप-शीर्षकों का लोप करें ;
(ख) मद (34) से (71) तक को क्रमशः मद (1) से (38) तक के रूप में पुनःसंख्यांकित करें ;
(ग) मद (72) का लोप करें ;
(घ) मद (73) से (79) तक को क्रमशः (39) से (45) तक के रूप में पुनःसंख्यांकित करें ; और
(ङ) इस प्रकार पुनःसंख्यांकित मद (2) में सभा निर्वाचन-क्षेत्र संख्या 119 से 139 तक के प्रतिनिर्देशों को क्रमशः सं० 1 से 21 तक निर्देशों के रूप में पुनःसंख्यांकित करें ।
पंचम अनुसूची
(धारा 22 देखिए)
परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र (मुंबई) परिसीमन आदेश, 1951 के संशोधन
(1) पैरा 2 में, “मुंबई" शब्द के स्थान पर, “महाराष्ट्र" शब्द प्रतिस्थापित करें ।
(2) सारणी में, निम्नलिखित का लोप करें-
(क) निम्नलिखित से संबंधित प्रविष्टियां-
(i) गुजरात (स्नातक) निर्वाचन-क्षेत्र ;
(ii) गुजरात (अध्यापक) निर्वाचन-क्षेत्र ;
(iii) सौराष्ट्र (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र ;
(iv) गुजरात उत्तर (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र ;
(v) गुजरात दक्षिण (स्थानीय प्राधिकारी) निर्वाचन-क्षेत्र ; और
(ख) स्तंभ 2 में डांग" शब्द, जहां कहीं भी आए ।
(3) सारणी में, स्तंभ 2 में,-
(क) स्तंभ 1 में “विदर्भ (स्थानीय प्राधिकारी)" के सामने भंडारा तथा चांदा जिले" के स्थान पर भंडारा, चांदा और राजुरा जिले" को प्रतिस्थापित करें ;
(ख) स्तंभ 1 में “विदर्भ (अध्यापक)" के सामने चांदा" के पश्चात् राजुरा" को अन्तःस्थापित करें ;
(ग) स्तंभ 1 में, “विदर्भ (स्थानीय प्राधिकारी)" के सामने “भंडारा तथा चांदा जिले" के स्थान पर भंडारा, चांदा और राजुरा जिले" को प्रतिस्थापित करें ।
षष्ठ अनुसूची
[धारा 23 (1) देखिए]
वे आसीन सदस्य, जिनका मुंबई विधान परिषद् का सदस्य बने रहना समाप्त हो जाएगा
(i) पंचम अनुसूची की मद (2) (क) में विनिर्दिष्ट पांच निर्वाचन-क्षेत्रों में से किसी का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य ।
(ii) मुंबई विधान-सभा के सदस्यों द्वारा निर्वाचित निम्नलिखित सदस्य, अर्थात् :-
1. श्री दादुभाई अमीन ।
2. श्री चंद्रकांत छोटालाल मेहता ।
3. श्री गुलाम हैदर वलीमहंमद मोमिन ।
4. श्रीमती मदीनाबाई अकबरभाई नागोरी ।
5. श्रीमती भानुमति बेन मणिलाल पारेख ।
6. श्रीमती अनसुया छोटालाल शाह ।
7. श्रीमती ज्योत्स्नाबेन बहुसुखराम शुक्ला ।
सप्तम अनुसूची
(धारा 26 देखिए)
संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1960 के संशोधन
(1) पैरा 4 के स्थान पर, प्रतिस्थापित करें-
“4-इस आदेश में, अनुसूची के भाग 4 और 7क के सिवाय किसी राज्य या उसके किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ होगा कि वह 1956 के नवम्बर के प्रथम दिन से यथागठित उस राज्य, जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है ; और उस अनुसूची के भाग 4 और 7क में किसी राज्य, या उसके किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ होगा कि वह 1960 की मई के प्रथम दिन से यथागठित उस राज्य, जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है ;" ।
(2) भाग 4 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें :-
“भाग 4-गुजरात
1. राजकोट खण्ड और कच्छ जिले के सिवाय समस्त राज्य में :-
1. अगेर
2. बाकड़ या बंट
3. भांबी, भांभी, असादरु, असोदी, चमाडिया, चमार, चांभार, चमगार, हरलय्या, हराली, खालपा, मचिगार, मोचिगार, मादर, मादिग, तेलुगु-मोची, कामाटी-मोची, रानीगार, रोहिदास, रोहित या समगार
4. भंगी, मेहतर, ओल्गना, रुखी, मलकाना, हलालखोर, लालबेगी, बालमीकी, कोरार या झाडमल्ली
5. चलवादि या चन्नइया
6. चेन्न दासर या होलेय दासर
7. ढोर, कक्काया, कंकैय्या
8. गरोडा या गरो
9. हल्लोर
10. हलसार, हसलार, हुलस्वार या हलस्वार
11. होलार या बलहार
12. होलेय या होलेर
13. लिंगाडेर
14. महार, तराल या धेगु मेगु
15. महायाबंशी, धेढ, वणकर या मारु वणकर
16. मांग, मातंग या मिणिमादिग
17. मांग-गारुडी
18. मेघवाल या मेंघवार
19. मुक्री
20. नाडीया या हाडी
21. पासी
22. शेनवा, चेनवा, सेडमा या रावत
23. तिरगर या तिरबंडा
24. तुरी
2. डांग जिले तथा सूरत जिले के उंबरगांव तालुक में :-
मोची
3. राजकोट खंड में :-
1. बाबा (धेढ) या धेढ-साधु
2. भंगी या रुखी
3. चमाडिया
4. चमार, नालिया या रोहित
5. डंगाशिया
6. गरोडा
7. गरमालंग
8. हाडी
9. मेघवाल
10. सेनवा
11. शिमालिया
12. थोरी
13. तुरी
14. तुरी-बरोत या धेढ-बरोत
15. वणकर, धेढ या अंत्यज
4. कच्छ जिले में :-
1. भंगी
2. चमार
3. गरोडा
4. मेघवाल
5. तुरी
6. तुरी-बरोत
(3) भाग 7 के पश्चात्, निम्नलिखित अन्तःस्थापित करें ;
“भाग 7क-महाराष्ट्र
1. बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा, चांदा, औरंगाबाद, परभणी, नांदेड, भीर, उस्मानाबाद और राजूरा जिलों के सिवाय समस्त राज्य में :-
1. अगेर
2. बाकढ़ या बंट
3. भांबी, भांभी, असादरु, असोदी, चमाडिया, चमार, चांभार, चमगार, हरलय्या, हराली, खालपा, मचिगार, मोचिगार, मादर, मादिग, मोची, तेलुगु-मोची, कामाटी-मोची, रानीगार, रोहिदास, रोहित या समगार
4. भंगी, मेहतर, ओलगाना, रुखी, मलकाना, हलालखोर, लालबेगी, बाल्मीकी, कोरार या झाडमल्ली
5. चलवादि या चन्नइया
6. चेन्न दासर या होलेय दासर
7. ढोर, कक्काया, कंकैय्या
8. गरोडा या गरो
9. हल्लीर
10. हलसार, हसलार, हुलस्वार या हलस्वार
11. होलार या बलहार
12. होलेय या होलेर
13. लिंगाडेर
14. महार, तराल या धेगुमेगु
15. महायावंशी, धेढ, वणकर या मारु वणकर
16. मांग, मातंग या मिणिमादिग
17. मांग-गारुडी
18. मेघवाल या मेंघवार
19. मुक्री
20. नाडीया या हाडी
21. पासी
22. शेनवा, चेनवा, सेडमा या रावत
23. तिरगर या तिरंबडा
24. तुरी
2. बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा और चांदा जिलों में :-
1. बहना या बाहना
2. बलाही या बलाई
3. बसोर, बुरुड, बांसौर या बांसोडी
4. चमार, चमारी, मोची, नोना, रोहिदास, रामनामी, सतनामी, सूर्यवंशी या सूर्ज्यरामनामी
5. डोम या डुमार
6. डोहोर
7. गांडा या गांडी
8. घासी या घासिया
9. कैकाडी
10. कातिया या पथारिया
11. खटीक, चिकवा या चिकवी
12. माडगी
13. महार या मेहर
14. मांग, दंखनी-मांग, मांग-माहशी, मांग-गारुड़ी, मदारी, गारुडी या राधे-मांग
15. मेहतर या भंगी
16. सांसी ।
3. अकोला, अमरावती और बुलढाणा जिलों में :-
बेडर ।
4. भंडारा जिले में :-
1. चडार
2. होलिया ।
5. भंडारा और बुलढाणा जिलों में :-
खंगार, कनेरा या मिरघा ।
6. अमरावती, भंडारा और बुलढाणा जिलों में :-
कोरी ।
7. औरंगाबाद, परभणी, नांदेड, राजुरा, भीर और उस्मानाबाद जिलों में :-
1. अनामुक
2. आरे (माल)
3. अर्वमाल
4. बेड (बुड्ग) जंगम
5. बिंड्ल
6. बैगारा
7. चलवादि
8. चांमार
9. डक्कल (डोक्कल्वार)
10. ढोर
11. एल्लमल्वार् (येल्लमालवाण्डलु)
12. होलेय
13. होलेय दासरि
14. कोलुपुलवाण्डुल
15. मादिग
16. महार
17. माल
18. मालदासरी
19. माल हन्नै
20. मालजंगम
21. मालमस्ति
22. मालसाले (नेट्कानि)
23. माल सन्यासि
24. मांग
25. मांग गारोडी
26. मन्ने
27. मश्ति
28. मेहतर
29. मिता अय्यल्वार
30. मोची
31. सामगार
32. सिंधोल्लु (चिंदोल्लू)" ।
अष्टम् अनुसूची
(धारा 27 देखिए)
संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 का संशोधन
(3) पैरा 3 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें :-
“3. इस आदेश में, अनुसूची के भाग 4 और 7क के सिवाय, किसी राज्य या उसके किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ होगा कि वह 1956 के नवम्बर के प्रथम दिन से यथा गठित उस राज्य, जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है ; और अनुसूची के भाग 4 और 7क में किसी राज्य या उसके किसी जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ होगा कि वह 1960 की मई के प्रथम दिन से यथा गठित उस राज्य, जिले या अन्य प्रादेशिक खण्ड के प्रति निर्देश है ।" ।
(2) भाग 4 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित करें :-
“भाग 4-गुजरात
1. राजकोट खण्ड तथा कच्छ जिले के सिवाय समस्त राज्य में :-
1. बर्डा
2. बाबचा व बामचा
3. भील जिनके अन्तर्गत भील गरासिया, ढोली भील, डुंगरी भील, डुंगरी गरासिया, मेवासी भील, रावल भील, तडवी भील, भगालिया, भिलाला, पावरा, बसावा और बसावे आते हैं
4. चौधरा
5. तडवी, तेतरिया और वलवी सहित धाणका
6. घोडिया
7. तलाविया या हलपति सहित दुबला
8. मांवची, पाडवी, वसावा, वसावे और वलवी सहित गामति या गामटा या गावीट
9. गोंड या राज गोंड
10. ढोर काथोडी या ढोर कातकरी और सोन काथोडी या सोन कालकरी सहित काथोडी या कातकरी
11. कोकणा, कोकणी, कुकणा
12. [कोली ढोरट, टोकरे कोली, कोलचा या कोलघा
13. चोली वाला नायका, कडिया नायका, मोटा नायका और नाना नायका सहित नायकडा या नायक
14. अडवीचिंचेर और फांसे पारधी सहित पारधी
15. पटेलिया
16. पोमला
17. राथवा
18. वारली
19. विटोरिया, कोतवालीया या बरोडिया ।
2. डांग जिले में, कुणबी ।
3. सूरत जिले में :-
(क) उंबरगांव तालुक में, कोली मलहार, कोली महादेव या डोंगर कोली
(ख) अन्य तालुक में, चौधरी ।
4. राजकोट खंड में, सिद्दि ।
5. अलेक, गिर और बर्डा वनों में नासेस क्षेत्र में :-
1. भरवाड़
2. चरण
3. रावरी ।
6. सुरेन्द्रनगर जिले में :-
पघाड़ ।
7. कच्छ जिले में :-
1. भील
2. घोडिया
3. कोली
4. पारधी
5. वाघरी ।
(3) भाग 7 के पश्चात् निम्नलिखित अन्तःस्थापित करें :-
“भाग 7क-महाराष्ट्र
1. बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा, चांदा, औरंगाबाद, परभणी, नांदेड, भीर, उस्मानाबाद और राजुरा जिले के सिवाय समस्त राज्य में :-
1. वर्डा
2. बावचा या बामचा
3. भील जिनके अंतर्गत भील गरासिया, धोली भील, डुंगरी भील, डुंगरी गरासिया, मेवासी भील, रावल भील, तडवी भील, भगालिया, भिलाला, पावरा, बसावा और बसावे आते हैं
4. चौधरा
5. तडवी, तेतारिया और वलवी सहित धाणका
6. घोडिया
7. तलाविया या हलपति सहित दुबला
8. मांवची, पाडवी, वसावा, वसावे और वलवी सहित गामित या गामटा या गावीट
9. गोंड या राजगोंड
10. ढोर काथोडी या ढोर कातकरी और सोन काथोडी या सोन कातकरी सहित काथोडी या कातकरी
11. कोकणा, कोकणी, कुकणा
12. कोली ढोर, टोकरे, कोली, कोलचा या कोलघा
13. चोली वाला नायका, कडिया नायका, मोटा नायका और नाना नायका सहित नायकडा या नायक
14. अडवीचिंचेर और फांसे पारधी सहित पारघी
15. पटेलिया
16. पोमला
17. राथवा
18. वारली
19. विटोलिया, कोतवलीया या बरोडिया ।
2. ठाणे जिले में :-
कोली मल्हार ।
3. (क) अहमदनगर जिले के-
अकोला, राहुरी और संगमनेर तालुकाओं में
(ख) कुलावा जिले के
कर्जत, खासलपुर, अलीबाग, महाड़ और सुधागढ़ तालुकाओं में
(ग) नाशिक जिले के-
नाशिक, निफाड़, सिन्नर, चांदौर, बागलाण, इगतपुरी, दिन्डोरी
और कलवण तालुकाओं में और सुरगणा और पेंट महालों में
(घ) पुणे जिले के-
अम्बेगांव, जुन्नर, खेड, मावल और मुलशी तालुकाओं
और वेलहे महाल में
(ङ) ठाणे जिले के-
ठाणे, मुरबाढ, भिबंडी, वसई, वाडा, शाहापुर डहाणु, पालघर,
जव्हार और मोरवाड़ा तालुकाओं में
4. (क) अहमदनगर जिले के-
अकोला, राहुरी और संगमनेर तालुकाओं में
(ख) कुलाबा जिले के-
कर्जत, खालपुर, पेण, पनवेल और सुधागढ़ तालुकाओं और काथेरन
(ग) नाशिक जिले के-
इगतपुरी, नाशिक और सिन्नर तालुकाओं में
(घ) पुणे जिले के-
अम्बेगांव, जुन्नर, खेड, मावल तालुकाओं में
(ङ) ठाणे जिले के-
ठाणे, कल्याण, मुरबाड, भिबंडी, बसई, बाडा,
शाहापुर, पालघर, जव्हार और
मोरवाड़ा तालुकाओं में
5. (1) अमरावती जिले की मेलघाट तहसील,
(2) चांदा जिले की गढ़चिरोली और सिरोंछा तहसीलों, तथा
(3) यवतमाल जिले की केलापुर, वणी और यवतमाल तहसीलों में :-
1. आंध
2. बैगा
3. भैना
4. भारिया-भूमिया या पांडे सहित, भुईआर, भूमिया
5. भतरा
6. भील
7. भूंजिया
8. बिंझवार
9. बिरहूल या बिरहोड
10. धनवार
11. गढबा या गढाबा
12. गोंड, जिनके अंतर्गत हैं-
अरख या आरख
अगरिया
असुर
बड़ी मारिया या बड़ा मारिया
भटोला
भीम्मा
भूता, कोइला भूता या कोइला-भुती
भर
विसोनहार्न मारिया
छोटा मारिया
दंडामी मारिया
धुरु या धुरुआ
धोबा
ढुलिया
डोरला
गायकी
गट्टा या गट्टी
गैटा
गोंड गोवारी
हिल मारिया
कण्डरा
कलंगा
खटोला
कोइतर
कोया
खिरवार या खिरवारा
कुचामारिया
कुचाकी मारिया
माडिया (मारिया)
माना
भन्नेवार
मोघिया या मोगिया या मोंघया
मुडिया (मुरिया)
नागरची
नागवंशी
ओझा
राज
सोंझरी झरेका
थाटिया या थोटया
वाडे मारिया या वडे मारिया
13. हलबा या हलबी
14. कमार
15. कवर या कंवर, कोर, चेरवा राठिया तनवर या चतरी
16. खैरवाड़
17. खड़िया
18. कोढ़ या खोंड या कोंध, कांध
19. कोल
20. कोलम
21. बोपची, मौसी, निहाल या नहुल और बौंघी या बौंडया सहित कोरकू
22. कोडाकू सहित कोरवा
23. मझवार
24. मुंडा
25. नगेसिया या नगासिया
26. निहाल
27. धनका और धनगड सहित उरांव
28. परधान, पथारी और सरोती
29. बहेलिया या बहेल्लिया, चितपारधी, लंगोली पारधी, फांस पारधी, शिकारी, टाकनकर और टाकिया सहित पारधी
30. परजा
31. साऔंता और सौंता
32. संवर या संवरा ।
6. औरंगाबाद, परभणी, नांदेड़, राजुरा, भीर और उस्मानाबाद जिलों में :-
1. आंध
2. भील
3. गोंड (नायकपोड और राजगोंड सहित)
4. कोलम (मन्नुर वारलू सहित)
5. कोया (भिने कोया और राजकोया सहित)
6. परधान
7. थोटी ।
नवम् अनुसूची
[धारा 45 (1) देखिएट
ख्र्. यूनियन ड्यूटीज ऑफ एक्साइज (डिस्ट्रिब्यूशन) ऐक्ट, 1957 की धारा 3 का उपांतरित प्ररूप
(1) यूनियन ड्यूटीज ऑफ एक्साइज (डिस्ट्रिब्यूशन) ऐक्ट, 1957 की धारा 3, 1960 की मई के प्रथम दिन से, निम्नलिखित उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, अर्थात् :-
धारा 3 के नीचे की सारणी में, मुंबई से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टियां प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
महाराष्ट्र 8.07
गुजरात 4.10" ।
(2) धारा 3 के अधीन 1960 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष के प्रथम मास में मुंबई को तथा उस वित्तीय वर्ष के बाकी 11 मास के दौरान महाराष्ट्र और गुजरात को संदेय रकम की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए वितरणीय संघ उत्पाद-शुल्क के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस वित्तीय वर्ष के लिए वितरणीय संघ उत्पाद-शुल्क का क्रमशः 1/12 और 11/12 है ।
ख्र्ख्र्. एस्टेट ड्यूटी एण्ड टैक्स ऑन रेलवे पेसेंजर फेयर्स (डिस्ट्रिब्यूशन) ऐक्ट,
1957 की धारा 3 और 5 का उपांतरित प्ररूप
क-संपदा शुल्क का वितरण
(1) एस्टेट ड्यूटी एण्ड टैक्स ऑन रेलवे पैसेंजर फेयर्स (डिस्ट्रिब्यूशन) ऐक्ट, 1957 की धारा 3, 1960 के मई के प्रथम दिन से निम्नलिखित उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, अर्थात् :-
उपधारा (2) के खण्ड (ख) में, मुंबई से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टियां प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
महाराष्ट्र 8.97
गुजरात 4.55" ।
(2) धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन 1960 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष के प्रथम मास में मुंबई को तथा उस वित्तीय वर्ष के बाकी 11 मास के दौरान महाराष्ट्र और गुजरात को संदेय रकम की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए वितरण की जाने वाली कुल रकम के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस वित्तीय वर्ष के लिए वितरण की जाने वाली कुल रकम का क्रमशः 1/12 और 11/12 है ।
ख-रेल यात्री किराए पर कर का वितरण
(1) एस्टेट ड्यूटी एण्ड टैक्स ऑन रेलवे पेसेंजर फेयर्स (डिस्ट्रिब्यूशन) ऐक्ट, 1957 की धारा 5, 1960 की मई के प्रथम दिन से, निम्नलिखित उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, अर्थात् :-
मुंबई से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टियां प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
महाराष्ट्र 10.80
गुजरात 5.48" ।
(2) धारा 5 के अधीन, 1960 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारम्भ होने वाले वित्तीय वर्ष के प्रथम मास में मुंबई को तथा उस वित्तीय वर्ष के बाकी 11 मास के दौरान महाराष्ट्र और गुजरात को संदेय रकम की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए रेल यात्री किराए पर कर के शुद्ध आगमों के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस वित्तीय वर्ष के लिए ऐसे कर के शुद्ध आगम का क्रमशः 1/12 और 11/12 है ।
ख्र्ख्र्ख्र्. अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क (विशेष महत्व का माल) अधिनियम,
1957 की द्वितीय अनुसूची का उपांतरित प्ररूप
क-चीनी पर अतिरिक्त शुल्क का वितरण
(1) द्वितीय अनुसूची में, भाग 1 के अन्त की सारणी, 1960 की मई के प्रथम दिन से, निम्नलिखित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, अर्थात् :-
मुंबई से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टियां प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
महाराष्ट्र 8.07 162 13.37
गुजरात 4.10 83 6.80" ।
(2) द्वितीय अनुसूची के भाग 1 के अधीन, 1960 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष के प्रथम मास में मुम्बई को तथा उस वित्तीय वर्ष के बाकी 11 मास के दौरान महाराष्ट्र तथा गुजरात को संदेय रकम की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, चीनी की बाबत अतिरिक्त शुल्क के शुद्ध आगमों के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस वित्तीय वर्ष के लिए ऐसे शुल्क के शुद्ध आगम का क्रमशः 1/12 और 11/12 है, और उस वित्ती वर्ष की बाबत सारणी के तृतीय स्तंभ में विनिर्दिष्ट राशियों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे मुंबई के सम्बन्ध में प्रथम मास के लिए 20 से तथा बाकी 11 मास के लिए महाराष्ट्र के संबंध में 149 से और गुजरात के सम्बन्ध में 76 से पुनःस्थापित की गई हैं ।
ख-तम्बाकू पर अतिरिक्त शुल्क का वितरण
(1) द्वितीय अनुसूची में, पैरा 4 के नीचे की सारणी, 1960 की मई के प्रथम दिन से, निम्नलिखित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, अर्थात् :-
मुंबई से संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टियां प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
महाराष्ट्र 8.07 76 11.54
गुजरात 4.10 39 5.87" ।
(2) पैरा 4 के अधीन 1960 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारम्भ होने वाले वित्तीय वर्ष के प्रथम मास में मुंबई को तथा उस वित्तीय वर्ष के बाकी 11 मास के दौरान महाराष्ट्र और गुजरात को संदेय रकम की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, तम्बाकू पर अतिरिक्त शुल्क के शुद्ध आगमों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे उस वर्ष के लिए ऐसे शुल्क के कुल आगमों का क्रमशः 1/12 और 11/12 हैं ; और उस वित्तीय वर्ष की बाबत, सारणी के द्वितीय स्तम्भ में विनिर्दिष्ट राशियों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे मुंबई के सम्बन्ध में प्रथम मास के लिए 10 से, और बाकी 11 मास के लिए महाराष्ट्र के सम्बन्ध में 70 से तथा गुजरात के सम्बन्ध में 35 से पुनःस्थापित की गई हैं ।
ग-वस्त्र पर अतिरिक्त शुल्क का वितरण
(1) द्वितीय अनुसूची में, भाग 3 के अन्त की सारणी, 1960 की मई के प्रथम दिन से, निम्नलिखित उपांतरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगी, अर्थात् :-
मुम्बई से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टियां प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
महाराष्ट्र 308 10.91
गुजरात 202 5.55" ।
(2) द्वितीय अनुसूची के भाग 3 के अधीन, 1960 के अप्रैल के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष के प्रथम मास में मुम्बई को तथा उस वित्तीय वर्ष के बाकी 11 मास के दौरान महाराष्ट्र और गुजरात को संदेय रकम की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए सूती कपड़ों, रेयन या कृत्रिम रेशमी कपड़ों तथा ऊनी कपड़ों की बाबत अतिरिक्त शुल्क के शुद्ध आगमों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे उस वित्तीय वर्ष के लिए ऐसे शुल्क के आगमों के क्रमशः 1/12 और 11/12 हैं, और उस वित्तीय वर्ष की बाबत सारणी के द्वितीय स्तम्भ में विनिर्दिष्ट राशियों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे मुम्बई के सम्बन्ध में प्रथम मास के लिए 50 से और बाकी 11 मास के लिए महाराष्ट्र के सम्बन्ध में 365 से और गुजरात के सम्बन्ध में 185 से पुनःस्थापित की गई है ।
ख्र्ज्. संविधान (राजस्व वितरण) सं० 2 आदेश, 1957 के पैरा 3 का उपांतरित प्ररूप
(1) संविधान (राजस्व वितरण) सं० 2 आदेश, 1957 का पैरा 3, 1960 की मई के प्रथम दिन से, निम्नलिखित उपान्तरों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा, अर्थात् :-
पैरा 3 के अन्त की सारणी में, मुंबई से संबंधित प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित प्रविष्टियां प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
महाराष्ट्र 10.59
गुजरात 5.38" ।
(2) पैरा 3 के अधीन 1960 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष के प्रथम मास में मुंबई को तथा उस वित्तीय वर्ष के बाकी 11 मास के दौरान महाराष्ट्र और गुजरात को संदेय रकम की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, आय पर करों के शुद्ध आगमों के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस वित्तीय वर्ष के लिए आय पर कर के शुद्ध आगमों का क्रमशः 1/12 और 11/12 है ।
दशम् अनुसूची
[धारा 47 (2) देखिएट
1. विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए जैसे कि विशिष्ट संस्थाओं, कर्मशालाओं या उपक्रमों या निर्माणाधीन विशिष्ट संकर्मों में उपयोग या प्रयोग के लिए धारित भण्डार, उस राज्य को संक्रांत होंगे जिसमें, नियत दिन ऐसी संस्थाएं, कर्मशालाएं, उपक्रम या संकर्म अवस्थित हैं ।
(2) नियत दिन के ठीक पूर्व सम्पूर्ण मुम्बई राज्य पर अधिकारिता रखने वाले सचिवालय तथा विभागों के प्रमुखों के कार्यालयों से संबंधित भंडार महाराष्ट्र राज्य की संपत्ति होंगे :
परन्तु टापराइटरों, डुप्लिकेटरों, घड़ियों तथा यानों का विभाजन, जनगणना के अनुपात के अनुसार महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में किया जाएगा ।
(3) सभी अन्य अनिर्गमित भंडार, पुलित भंडार और 1959 की जुलाई के प्रथम दिन या उसके पश्चात् क्रय किए गए भंडार का विभाजन, जो किसी भी वर्ग के हों, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में 1960 के मार्च के इकतीसवें दिन समाप्त होने वाली तीन वर्ष की अवधि में उन राज्यों में से प्रत्येक में क्रमशः सम्मिलित राज्यक्षेत्रों के लिए क्रय किए गए उस वर्ग के कुल भण्डार के अनुपात में किया जाएगा :
परन्तु जहां किसी वर्ग के भंडार की बाबत ऐसे अनुपात का अभिनिश्चय नहीं किया जा सकता या जहां ऐसे किसी वर्ग के भण्डार का मूल्य दस हजार रुपए से अधिक नहीं है, वहां उस वर्ग के भण्डार का विभाजन उन दो राज्यों में जनगणना के अनुपात के अनुसार किया जाएगा ।
ग्यारहवीं अनुसूची
[धारा 59 देखिएट
पेंशनों के बारे में दायित्व का प्रभाजन
1. पैरा 3 में वर्णित समायोजनों के अधीन रहते हुए, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में से प्रत्येक राज्य, नियत दिन के पूर्व मुंबई राज्य द्वारा अनुदत्त पेंशनों की बाबत, अपने खजानों में से दी जाने वाली पेंशनें देगा ।
2. उक्त समायोजनों के अधीन रहते हुए, मुंबई राज्य के कार्यकलापों के सम्बन्ध में सेवा करने वाले उन अधिकारियों की पेंशनों के बारे में दायित्व, जो नियत दिन के पूर्व निवृत्त होते हैं या सेवानिवृत्ति पूर्व छुट्टी पर चले जाते हैं, किन्तु पेंशनों के लिए जिनके दावे उस दिन के ठीक पूर्व बकाया हैं, महाराष्ट्र राज्य का होगा ।
3. नियत दिन से प्रारंभ होने वाले वित्तीय वर्ष के किसी भाग की बाबत तथा प्रत्येक पश्चात्वर्ती वित्तीय वर्ष की बाबत पैरा 1 और 2 में निर्दिष्ट पेंशनों के बारे में महाराष्ट्र और गुजरात के राज्यों के प्रत्येक राज्य में किए गए कुल संदायों की संगणना की जाएगी । पेंशनों की बाबत मुम्बई राज्य के दायित्व की कुल रकम का प्रभाजन महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा और अपने द्वारा देय अंश से अधिक का संदाय करने वाले राज्य की, उस अन्य राज्य द्वारा आधिक्य की रकम की, प्रतिपूर्ति की जाएगी ।
4. (1) नियत दिन के ठीक पूर्व मुम्बई राज्य के कार्यकलापों के संबंध में सेवा करने वाले और उस दिन को या उसके पश्चात् निवृत्त होने वाले किसी अधिकारी की पेंशन की बाबत दायित्व उस राज्य का होगा, जो उसे पेंशन देता है, किन्तु नियत दिन के पूर्व मुम्बई राज्य के कार्यकलाप से संबंधित ऐसे किसी अधिकारी की सेवा के परिणामस्वरूप पेंशन का प्रभाग महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में जनसंख्या के अनुपात में आबंटित किया जाएगा और वह सरकार, जो पेंशन देती है, उस अन्य सरकार से उस दायित्व का अपना अंश प्राप्त करने की हकदार होगी ।
(2) यदि ऐसा कोई अधिकारी नियत दिन के पश्चात् महाराष्ट्र राज्य के कार्यकलापों से सम्बन्धित कुछ अवधि के लिए तथा गुजरात राज्य के कार्यकलापों से संबंधित कुछ अवधि के लिए सेवा करता रहा हो, तो पेंशन देने वाली सरकार से भिन्न सरकार, उस सरकार को, जिसके द्वारा पेंशन दी गई है ऐसी रकम की प्रतिपूर्ति करेगी, जिसकी नियत दिन के पश्चात् की उसकी सेवा के कारण दी जा सकने वाले पेंशन के प्रभाग का वही अनुपात होगा, जो प्रतिपूर्ति करने वाले राज्य के अधीन नियत दिन के पश्चात् की उसकी अर्हक सेवा का उस अधिकारी की उसकी पेंशन के प्रयोजनार्थ परिकलित नियत दिन के पश्चात् की कुल सेवा का हो ।
5. इस अनुसूची में पेंशन के प्रति किसी निर्देश का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत पेंशन के संराशीकृत मूल्य के प्रति निर्देश भी हैं ।
बारहवीं अनुसूची
(धारा 73 देखिए)
1. दि बाम्बे स्टेट कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड ।
2. दि बाम्बे स्टेट कोआपरेटिव एण्ड मार्गेज बैंक लिमिटेड ।
3. दि बाम्बे स्टेट कोआपरेटिव हाऊसिंग फाइनेंस सोसाइटी ।
4. दि बाम्बे स्टेट इंडस्ट्रीयल कोआपरेटिव एसोसिएशन ।
5. दि बाम्बे स्टेट कोआपरेटिव यूनियन ।
6. मुम्बई राज्य सहकारी कारखाना संघ ।
तेरहवीं अनुसूची
(धारा 79 देखिए)
1. स्थापत्य कला का जे० जे० महाविद्यालय, मुम्बई ।
2. अनुप्रयुक्त कला का जे० जे० संस्थान, मुम्बई ।
3. मुद्रण प्रौद्योगिकी का विद्यालय, मुम्बई ।
4. सरकारी चर्म-शोधन संस्थान, मुम्बई ।
5. सरकारी चमड़ा-कार्य विद्यालय, मुम्बई ।
6. पशु-चिकित्सा महाविद्यालय, मुम्बई ।
7. आर० ए० पोद्दार चिकित्सा महाविद्यालय (आयुर्वेद), मुम्बई ।
8. सी० इ० एम० दंत-चिकित्सा महाविद्यालय, मुम्बई ।
9. हाफकीन संस्थान, मुम्बई ।
10. न्याय संबंधी विज्ञान प्रयोगशाला तथा रासायनिक विश्लेषक विभाग, मुम्बई ।
11. राज्य अग्नि-शमन विद्यालय, घाटकोपर, मुम्बई ।
12. सचिवालय अभिलेख कार्यालय, मुम्बई ।
13. गणित उपकरण डिपो और कर्मशाला, मुम्बई ।
14. ओषधि परीक्षण प्रयोगशाला, मुम्बई ।
15. शारीरिक शिक्षा के लिए प्रशिक्षण, संस्थान, कांदिवली, मुम्बई ।
16. कला का जे० जे० विद्यालय, मुम्बई ।
17. एस० टी० महाविद्यालय, मुम्बई ।
18. जेल अधिकारी प्रशिक्षण विद्यालय, येरवडे़, पुणे ।
19. भू-संक्रामण कार्यालय, पुणे ।
20. सरकारी फोटोझिंको मुद्रणालय, पुणे ।
21. सरकारी फोटो रजिस्ट्री, पुणे ।
22. पशु-चिकित्सा जैविक-उत्पाद संस्थान, पुणे ।
23. पुलिस बेतार प्रशिक्षण केन्द्र, दापोडी, पुणे ।
24. लोक-स्वास्थ्य संस्थान, नागपुर ।
25. वैक्सिन संस्थान, नागपुर ।
26. मुम्बई राज्य भांग ओषधि तथा अफीम पैक करने और प्रदाय डिपो, अहमदाबाद ।
27. पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय, नाशिक ।

