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बीड़ी कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1976 ( Beedi Workers Welfare Cess Act, 1976 )


 

बीड़ी कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1976

(1976 का अधिनियम संख्यांक 56)

[8 अप्रैल, 1976]

[विनिर्मित बीड़ी] पर उपकर के रूप

में उत्पाद-शुल्क का उद्ग्रहण और

संग्रहण करने के लिए उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के सत्ताईसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम बीड़ी कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1976 है ।

                (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।

                (3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।

2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) निधि" से बीड़ी कर्मकार कल्याण निधि अधिनियम, 1976 (1976 का 62) की धारा 3 के अधीन स्थापित बीड़ी कर्मकार कल्याण निधि अभिप्रेत है ;

(ख) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

 [() उन शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं, किन्तु परिभाषित नहीं हैं और जो केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 (1944 का 1) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ]

 [3. विनिर्मित बीड़ी पर उपकर का उद्ग्रहण और संग्रहण-(1) ऐसी तारीख से, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे, विनिर्मित बीड़ी पर बीड़ी कर्मकार कल्याण निधि अधिनियम, 1976 (1976 का 62) के प्रयोजनों के लिए उपकर के रूप में उत्पाद-शुल्क विनिर्मित बीड़ी के प्रति हजार पर  [पचास पैसे से अन्यून या पांच रुपए से अनधिक] की ऐसी दर से, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर नियत करे, उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क, विनिर्मित बीड़ी पर (चाहे उसे उस रूप में लिखा गया हो या बीड़ी या किसी अन्य रूप में लिखा गया हो) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उद्गृहीत किसी उपकर या शुल्क के अतिरिक्त होगा ।]

 [3क. उपकर को 1944 के अधिनियम 1 का लागू होना-समय-समय पर यथा प्रवृत्त केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 के या उसके अधीन नियमों के उपबंध, जिनके अन्तर्गत शुल्क की वापसी और छूट से संबंधित उपबंध भी हैं, यावत्संभव इस अधिनियम के अधीन उपकर के उद्ग्रहण, संग्रहण और वापसी या उससे छूट के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे उस अधिनियम के अधीन विनिर्मित बीड़ी के बारे में उत्पाद-शुल्क के उद्ग्रहण, संग्रहण और वापसी या उससे छूट के संबंध में लागू होते हैं ।]

4. शुल्क के आगमों का भारत की संचित निधि में जमा किया जाना-धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन उद्गृहीत उत्पाद-शुल्क के आगम भारत की संचित निधि में जमा किए जाएंगे ।

5. जानकारी मांगने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार या इस निमित्त उसके द्वारा विनिर्दिष्ट कोई अन्य प्राधिकारी किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, ऐसे आंकड़ों की और कोई अन्य जानकारी दे, जो वह ठीक समझे ।

6. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के या केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध होगी

7. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे :-

 ।                                             ।                                              ।                                              ।                             

() केन्द्रीय सरकार को या इस निमित्त उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य प्राधिकारी को किसी व्यक्ति द्वारा आंकड़ों की ऐसी और किसी अन्य जानकारी का दिया जाना जिसके दिए जाने की धारा 5 के अधीन अपेक्षा की जाए ;

() कोई अन्य विषय जिन्हें इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित, या उपबन्धित किया जाना है या   किया जाए

(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

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