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वायुयान अधिनियम, 1934 ( Aircraft Act, 1934 )


 

वायुयान अधिनियम, 1934

(1934 का अधिनियम संख्यांक 22)

[19 अगस्त, 1934]

वायुयान के विनिर्माण, कब्जे, उपयोग, प्रचालन, विक्रय, आयात

और निर्यात के नियंत्रण के लिए अधिक अच्छे

उपबंध करने के लिए

अधिनियम

वायुयान के विनिर्माण, कब्जे, उपयोग, प्रचालन, विक्रय, आयात और निर्यात के नियंत्रण के लिए अधिक अच्छे उपबन्ध करना समीचीन है, अतः एतद्द्वारा निम्नरूप में यह अधिनियमित किया जाता है :-

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) यह अधिनियम  *** वायुयान अधिनियम, 1934 कहा जा सकता है ।

 [(2) इसका विस्तार   *** सम्पूर्ण भारत पर है और यह-

(क) भारत के नागरिकों को जहां कहीं वे हों;  ***

(ख) भारत में रजिस्ट्रीकृत वायुयान को और उस पर स्थित व्यक्तियों को जहां कहीं वे हों,

                लागू होगा;] 

 [(ग) भारत से बाहर रजिस्ट्रीकृत वायुयान को किन्तु जो तत्समय भारत में या भारत के ऊपर हों और उस पर स्थित व्यक्तियों को; और 

(घ) ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो भारत का नागरिक नहीं है किन्तु उसके कारबार का मुख्य स्थान या स्थायी निवास भारत में है, प्रचालित किसी वायुयान को ।]

                 2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ से विरुद्ध न हो,-

(1) “वायुयान" से ऐसी कोई मशीन अभिप्रेत है जो वातावरण से  [पृथ्वी की सतह पर वायु की प्रतिक्रिया से भिन्न] वायु की प्रतिक्रिया द्वारा अवलम्ब प्राप्त कर सकती है, और इसके अन्तर्गत बेलून, चाहे स्थिर हो या अस्थिर वायु-पोत, पतंग, ग्लाइडर और उड्डयन मशीनें आती हैं; 

(2) “विमानक्षेत्र" से जल या थल का निश्चित या सीमित ऐसा कोई क्षेत्र अभिप्रेत है जो पूर्णतः या भागतः वायुयान के उतरने या उसके प्रस्थान के लिए आशयित है और इसके अन्तर्गत उस पर और उससे जुड़े हुए सभी भवन, शेड, यान, प्रस्तम्भ और अन्य संरचनाएं आती हैं;

7[(2क) किसी विमानक्षेत्र के संबंध में, “विमानक्षेत्र निर्देश बिन्दु" से वह अभिहित बिन्दु अभिप्रेत है जो वायुयान के प्रस्थान या उतरने के लिए आरक्षित विमानक्षेत्र के भाग में ज्यामितीय केन्द्र पर या उसके समीप क्षैत्रिज समतल में स्थापित किया जाए;] 

(3) “आयात" से  [भारत] में लाना अभिप्रेत है; और 

(4) “निर्यात" से 8[भारत] से बाहर ले जाना अभिप्रेत है । 

3. केन्द्रीय सरकार की कुछ वायुयानों को छूट देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी वायुयान या वायुयान के वर्ग और किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को  [इस अधिनियम के सभी या किन्हीं उपबन्धों से] छूट दे सकेगी या यह निदेश दे सकेगी कि वे ऐसे वायुयानों या व्यक्तियों को ऐसे उपान्तरों के अध्यधीन लागू होंगे जैसे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं । 

 [4. 1944 के अभिसमय को क्रियान्वित करने के लिए नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति- [धारा 14 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए केन्द्रीय सरकार,] शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी जो 7 दिसम्बर, 1944 को शिकागो में हस्ताक्षरित अन्तरराष्ट्रीय सिविल विमानन से संबंधित, समय-समय पर यथासंशोधित, अभिसमय को (जिसमें, अन्तरराष्ट्रीय मानकों और सिफारिश की गई पद्धतियों से संबंधित, उसका कोई उपाबन्ध भी है) क्रियान्वित करने के लिए उसे आवश्यक प्रतीत हों ।]

 [4क. सुरक्षा अन्वेक्षा कृत्य-सिविल विमानन का महानिदेशक या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किया गया कोई अन्य अधिकारी, इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट विषयों की बाबत सुरक्षा अन्वेक्षा कृत्यों का पालन करेगा ।]

5. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1)  [धारा 14 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए केन्द्रीय सरकार,] शासकीय राजपत्र मे अधिसूचना द्वारा, किसी वायुयान या वायुयान के वर्ग के विनिर्माण, कब्जे, उपयोग, प्रचालन, विक्रय, आयात या निर्यात का विनियमन करने वाले  [तथा वायुयानों के प्रचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, नियम  बना सकेगी ।]

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम, निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे-

                (क) वे प्राधिकारी जो इस अधिनियम से या के अधीन प्रदत्त शक्तियों में से किसी का प्रयोग करेंगे;

                 [(कक) वायु परिवहन सेवा की स्थापना को प्राधिकृत करने वाली अनुज्ञप्ति के प्राधिकार के अधीन और तदनुसार के सिवाय ऐसी सेवाओं का विनियमन और वायुयान का ऐसी सेवाओं में प्रयोग का प्रतिषेध;]

                 [(कख) सिविल विमानन और वायु परिवहन सेवाओं का आर्थिक विनियमन, जिसके अन्तर्गत  [वायु परिवहन सेवाओं के प्रचालकों के टैरिफ का [भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 (2008 का 27) की धारा 13 की उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट टैरिफ से भिन्नट अनुमोदन, अननुमोदन या पुनरीक्षण हैट वे अधिकारी या प्राधिकारी जो इस निमित्त शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे; ऐसे अधिकारियों या प्राधिकारियों द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया और वे बातें जिन्हें वे ध्यान में रखेंगे; ऐसे अधिकारियों या प्राधिकारियों के आदेशों के विरुद्ध केन्द्रीय सरकार को अपीलें और ऐसे टैरिफ से संबंधित अन्य सभी विषय ।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए टैरिफ" के अन्तर्गत यात्रियों या माल के वायु परिवहन के लिए किराया, रेट मूल्यांकन प्रभार और अन्य प्रभार, ऐसे किराए, रेट, मूल्यांकन प्रभारों और अन्य प्रभारों तथा रेटों को प्रभावित करने वाले नियम, विनियम, पद्धतियां या सेवाएं और यात्री या स्थौरा  विक्रय अभिकर्ताओं को संदेय कमीशन के निबन्धन और शर्तें हैं;]

 [(कग) जानकारी, जो वायु परिवहन सेवा की स्थापना को प्राधिकृत करने वाली अनुज्ञप्ति के आवेदक या धारक, ऐसे प्राधिकारियों को जो नियमों में विनिर्दिष्ट किए जाएं, देंगे;]

4[(ख) विमानक्षेत्रों का अनुज्ञापन, निरीक्षण और विनियमन, वे शर्तें जिनके अधीन विमानक्षेत्रों का अनुरक्षण किया जाएगा और अननुज्ञप्त विमानक्षेत्रों के उपयोग का प्रतिषेध या विनियमन;  

(खक) वह फीस जो उन विमानक्षेत्रों से प्रभारित की जा सकेगी जिनको भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1994 (1994 का 55) लागू नहीं होता है या लागू नहीं किया जाता है;]

(ग) वायुयान के विनिर्माण, मरम्मत और अनुरक्षण का और ऐसे स्थानों का जहां वायुयानों का विनिर्माण या मरम्मत की जा रही है या जहां वे रखे गए हैं, निरीक्षण और नियंत्रण; 

(घ) वायुयान को रजिस्टर करना और चिह्नित करना; 

(ङ) वे शर्तें जिनके अधीन वायुयान उड़ाए जा सकेंगे या यात्री, डाक या माल ले जा सकेंगे अथवा औद्योगिक प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जा सकेंगे और वायुयान में रखे जाने वाले प्रमाणपत्र, अनुज्ञप्तियां या दस्तावेज; 

(च) इस अधिनियम के और तद्धीन नियमों के प्रवर्तन के प्रयोजन के लिए वायुयान का निरीक्षण और ऐसे निरीक्षण के लिए दी जाने वाली सुविधाएं;  

(छ) वायुयान के प्रचालन, विनिर्माण, मरम्मत या अनुरक्षण में नियोजित व्यक्तियों का अनुज्ञापन;

 [(छक) वायु याततयात नियंत्रण में लगे व्यक्तियों का अनुज्ञापन; 

(छख) संचार, नौपरिवहन का प्रमाणन, निरीक्षण और विनियमन तथा वायु यातायात प्रबन्ध प्रसुविधाओं की निगरानी; 

(छग) विधिविरुद्ध हस्तक्षेप के कार्यों के विरुद्ध सिविल विमानन की सुरक्षा के उपाय;]

(ज) वे वायुमार्ग जिनसे और वे शर्तें जिनके अधीन वायुयान  [भारत] में प्रवेश या 2[भारत] से प्रस्थान कर सकेंगे अथवा भारत के ऊपर उड़ सकेंगे और वे स्थान जहां वायुयान उतरेंगे;  

(झ) किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र पर, या तो पूर्णतया या विनिर्दिष्ट समयों पर या विनिर्दिष्ट शर्तों और अपवादों के अध्यधीन वायुयान की उड़ान का प्रतिषेध; 

(ञ) वायुमार्ग के बीकनों, विमानक्षेत्र के प्रकाश और विमानक्षेत्रों के निकट या उन पर या वायुमार्गों के निकट, या उन पर प्रकाश का प्रदाय, पर्यवेक्षण और नियंत्रण; 

 [(ञञ) विमानक्षेत्रों के निकट की प्राइवेट सम्पत्ति पर या वायुमार्गों के निकट में या उन पर ऐसी सम्पत्ति के स्वामियों या अधिभोगियों द्वारा प्रकाश का प्रतिष्ठापन और उनका अनुरक्षण, ऐसे प्रतिष्ठापन और अनुरक्षण के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा संदाय और ऐसे प्रतिष्ठापन और अनुरक्षण का पर्यवेक्षण और नियंत्रण, जिसके अन्तर्गत ऐसे प्रयोजनों के लिए सम्पत्ति पर प्रवेश का अधिकार भी है;] 

(ट) वायुयान द्वारा या को संसूचना के प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने वाले संकेत और संकेत भेजने में प्रयुक्त उपकरण; 

(ठ) वायुयान में किसी विनिर्दिष्ट वस्तु या पदार्थ के वहन का प्रतिषेध और विनियमन; 

(ड) जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयोजनार्थ किए जाने वाले उपाय और ले जाए जाने वाले उपकरण; 

(ढ) लाग बुक जारी करना और रखना; 

(ण) अधिनियम या नियमों के अधीन किसी अनुज्ञप्ति या प्रमाणपत्र के जारी करने या उसके नवीकरण की रीति और शर्तें, उससे सम्बन्धित दी जानी वाली परीक्षाएं, और परीक्षण, ऐसी अनुज्ञप्ति या प्रमाणपत्र या लाग बुक का प्ररूप, अभिरक्षा, पेश करना, पृष्ठांकन, रद्दकरण, निलम्बन या अभ्यर्पण; 

(त) इस अधिनियम के अधीन किए गए, जारी किए गए या नवीकरण किए गए किसी निरीक्षण, परीक्षा, परीक्षण, प्रमाणपत्र या अनुज्ञप्ति के सम्बन्ध में प्रभार्य फीस; 

(थ) वायुयान के, या वायुयान के प्रचालन, विनिर्माण, मरम्मत या अनुरक्षण के लिए नियोजित व्यक्तियों की अर्हताओं के सम्बन्ध में 2[भारत] से अन्यत्र जारी किए गए प्रमाणपत्रों और अनुज्ञप्तियों को इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ मान्यता देना;  ***

 [(थथ) विमानक्षेत्र निर्देश बिन्दु से दस किलोमीटर के अर्धव्यास के भीतर पशुओं का वध करने और खाल उतारने का तथा कूड़ा, गन्दगी और अन्य प्रदूषित एवं हानिकर वस्तुएं डालने का प्रतिषेध; तथा]

(द) इस उपधारा में निर्दिष्ट मामलों के समनुषंगी या आनुषंगिक कोई मामला । 

 ।                             ।                              ।                              ।                              ।                     ।                      ।

 [5क. निदेश जारी करने की शक्ति-(1) सिविल विमानन का महानिदेशक या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विशेषतः सशक्त कोई अन्य अधिकारी, समय-समय पर, आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों तथा तद्धीन बनाए गए नियमों से संगत,  [धारा 5 की उपधारा (2) के खंड (कक), (ख), (ग), (ङ), (च), (छ), (छक), (छख), (छग), (ज), (झ), (ड) और (थथ) में विनिर्दिष्ट किसी विषय की बाबत, ऐसी किसी दशा में जब सिविल विमानन के महानिदेशक या किसी अन्य अधिकारी का समाधान हो जाता है कि भारत की सुरक्षा के हित में या वायुयानों के प्रचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करना आवश्यक है, किसी विमानक्षेत्र का उपयोग करने वाले या वायुयान प्रचालनों, वायु यातायात नियंत्रण, विमानक्षेत्र का अनुरक्षण और प्रचालन, संचार, नौपरिवहन, निगरानी और वायु यातायात प्रबंध कार्यों के विरुद्ध सिविल विमानन की सुरक्षा में लगे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को, निदेश जारी कर सकेगा । ]

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए प्रत्येक निदेश का अनुपालन ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा जिसको या जिन्हें ऐसा निदेश जारी किया गया है ।]

6. केन्द्रीय सरकार की आपात में आदेश देने की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि लोक रक्षा और प्रशान्ति के हित में निम्नलिखित आदेशों में से सभी या किसी का जारी किया जाना समीचीन है तो केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,-

(क) इस अधिनियम के अधीन दी गई सभी या किसी भी अनुज्ञप्ति या प्रमाणपत्र को या तो आत्यंतिक रूप से या ऐसी शर्तों के अध्यधीन जिन्हें वह आदेश में विनिर्दिष्ट करना ठीक समझे, रद्द या निलम्बित कर सकेगी; 

(ख)  सम्पूर्ण  [भारत] या उसके किसी भाग पर सभी वायुयानों, किसी वायुयान या किसी वर्ग के वायुयान की उड़ान का या तो आत्यंतिक रूप से या ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जिन्हें वह आदेश में विनिर्दिष्ट करना ठीक समझे, प्रतिषेध कर सकेगी अथवा उसे ऐसी रीति में विनियमित कर सकेगी जो आदेश में अन्तर्विष्ट हो; 

(ग) किसी विमानक्षेत्र, वायुयान कारखाना, उड्डयन विद्यालय या क्लब या वह स्थान जहां वायुयान या उनका कोई वर्ग या प्रकार विनिर्मित होते हैं, मरम्मत किए जाते हैं या रखे जाते हैं, आत्यंतिक रूप से या सशर्त प्रतिषेध कर सकेगी या विनियमित कर सकेगी; 

(घ) यह निदेश दे सकेगी कि कोई वायुयान या वायुयान का वर्ग या कोई विमानक्षेत्र, वायुयान कारखाना, उड्डयन विद्यालय या क्लब, या वह स्थान जहां वायुयान विर्निमित किए जाते हैं, मरम्मत किए जाते हैं या रखे जाते हैं, उस मशीन, संयंत्र, सामग्री या वस्तुओं सहित जो वायुयान के प्रचालन, विनिर्माण, मरम्मत या अनुरक्षण में प्रयुक्त होती हैं या तो तुरन्त या विनिर्दिष्ट समय के भीतर ऐसे प्राधिकारी को और उस रीति में जैसी आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, परिदत्त की जाएगी जिससे कि लोक सेवा के लिए सरकार के व्ययनधीन रहे । 

 [(1क) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम में किसी बात से असंगत होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन दिया गया कोई आदेश प्रभावी होगा ।]

(2) यदि किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के खण्ड (ग) या खण्ड (घ) के अधीन जारी किए गए किसी आदेश के कारण कोई प्रत्यक्ष क्षति या हानि होती है तो उसे उतना प्रतिकर दिया जाएगा जो ऐसे प्राधिकारी द्वारा अवधारित होगा जो इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाए । 

(3) केन्द्रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए आदेश का अनुपालन कराने के लिए ऐसे कदम उठाना प्राधिकृत कर सकेगी जो उसे आवश्यक प्रतीत हों ।  

(4) जो कोई जानबूझकर उपधारा (1)  के अधीन जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करेगा, या अनुपालन करने में असफल रहेगा या उसके उल्लंघन में कोई कार्य करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा और वह न्यायालय जिसके द्वारा वह दोषसिद्ध किया गया है यह निदेश दे सकेगा कि वह वायुयान या वस्तु (यदि कोई हो) जिसकी बाबत वह अपराध किया गया है, या ऐसी वस्तु का कोई भाग, सरकार को समपहृत हो जाएगा ।  

7. केन्द्रीय सरकार की दुर्घटनाओं का अन्वेषण करने के लिए नियम बनाने की शक्ति-(1)  [केन्द्रीय सरकार, धारा 14 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए-

(क) भारत में या भारत के ऊपर किसी भी वायुयान; या 

(ख) भारत में रजिस्ट्रीकृत वायुयान के कहीं भी, .

विमानचालन के दौरान या विमानचालन से उद्भूत दुर्घटना या घटना के अन्वेषण का उपबंध करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।]

(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम- 

(क) यह अपेक्षा कर सकेंगे कि ऐसी रीति में और ऐसे व्यक्ति द्वारा जो विहित किया जाए किसी 3[दुर्घटना या घटना] की सूचना दी जाएगी; 

(ख) अन्वेषण या  [दुर्घटनाओं या घटनाओं] से सम्बन्धित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबन्ध ऐसे अन्वेषण के प्रयोजनार्थ उपांतरों सहित या रहित लागू कर सकेंगे;  

(ग) अन्वेषण के लंबित रहने तक 1[दुर्घटनाग्रस्त या घटनाग्रस्त] वायुयान तक पहुंचने और हस्तक्षेप करने का प्रतिषेध कर सकेंगे और जहां तक अन्वेषण के प्रयोजनार्थ आवश्यक हो किसी व्यक्ति को यह प्राधिकार दे सकेंगे कि वह ऐसे किसी वायुयान तक पहुंच सकेगा, उसकी परीक्षा कर सकेगा, उसे हटा सकेगा, उसके परिरक्षण के लिए अध्युपाय कर सकेगा, या अन्य कार्यवाही कर सकेगा; और 

(घ) जब अन्वेषण से यह प्रतीत हो कि किसी अनुज्ञप्ति पर कार्यवाही की जानी चाहिए तब इस अधिनियम के अधीन अनुदत्त या मान्यताप्राप्त किसी अनुज्ञप्ति या प्रमाणपत्र के रद्दकरण, निलम्बन, पृष्ठांकन या अभ्यर्पण को प्राधिकृत या अपेक्षित कर सकेंगे और ऐसे प्रयोजन के लिए ऐसी अनुज्ञप्ति के पेश करने का उपबन्ध कर सकेंगे ।

8. वायुयान को निरुद्ध करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत प्राधिकारी किसी वायुयान को निरुद्ध कर सकेगा यदि ऐसे प्राधिकारी की राय में- 

(क) आशयित उड़ान की प्रकृति को देखते हुए ऐसे वायुयान की उड़ान से उस वायुयान में स्थित व्यक्तियों को या किन्हीं अन्य व्यक्तियों को या सम्पत्ति को खतरा हो सकता है; या

(ख)  ऐसा निरोध, इस अधिनियम या ऐसे वायुयान को लागू होने वाले नियमों के उपबन्धों का अनुपालन कराने के लिए आवश्यक है, या धारा 5 की उपधारा (2) के खण्ड (ज) या खण्ड (झ) के अधीन बनाए गए किसी नियम का उल्लंघन रोकने के लिए  [अथवा किसी न्यायालय द्वारा किए गए किसी आदेश को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक है] । 

(2)  [केन्द्रीय सरकार, धारा 14 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए] शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस शक्ति के प्रयोग के समनुषंगी या आनुषंगिक सभी मामलों को विनियमित करने के लिए नियम  बना सकेगी । 

 [8क. केन्द्रीय सकार की लोक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए नियम बनाने की शक्ति- [केन्द्रीय सरकार, धारा 14 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए] शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी विमानक्षेत्र पर आने वाले या स्थित होने वाले किसी वायुयान से लोक स्वास्थ्य को किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग के प्रवेश या फैलाने से होने वाले संकट को रोकने के लिए और किसी विमान क्षेत्र से प्रस्थान करने वाले किसी वायुयान के माध्यम से संक्रमण या संसर्ग के प्रवहण को रोकने के लिए और विशिष्ट रूप से और इस उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी भी वायुयान या विमानक्षेत्र या किसी विनिर्दिष्ट विमान क्षेत्र की बाबत उन विषयों का उपबन्ध करने वाले नियम बना सकेगी जिनके लिए भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 (1908 का 15) की धारा 6 की उपधारा (1) के खण्ड (त) के उपखण्ड (त्) से लेकर (ध्त्त्त्) तक के अधीन यानों या पत्तनों के विषय में नियम  बनाए जा सकते हैं ।]

 [8ख. लोक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आपातकालीन शक्तियां-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का समाधान हो गया है कि भारत या उसके किसी भाग में कोई खतरनाक महामारी फैली हुई है या फैलने की आंशका है और वायुयान द्वारा लोक स्वास्थ्य को उस रोग के प्रवेश या फैलने से होने वाले संकट को रोकने के लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के सामान्य उपबन्ध अपर्याप्त हैं तो केन्द्रीय सरकार ऐसे संकट को रोकने के लिए ऐसे अध्युपाय कर सकेगी जो वह आवश्यक समझे ।

(2) ऐसे किसी मामले में केन्द्रीय सरकार धारा 8क द्वारा प्रदत्त शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, वायुयान और उसमें यात्रा करने वाले व्यक्तियों या ले जाई जाने वाली वस्तुओं और विमानक्षेत्रों की बाबत, ऐसे अस्थायी नियम बना सकेगी जैसे वह उन परिस्थितियों में आवश्यक समझे । 

(3) धारा 14 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए उपधारा (2) के अधीन नियम बनाने की शक्ति नियमों के पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाने की शर्तों के अध्यधीन न होगी, किन्तु ऐसे नियम अधिसूचना की तारीख से तीन मास से अधिक प्रवृत्त नहीं रहेंगे :

परन्तु यह कि केन्द्रीय सरकार विशेष आदेश से उन्हें अतिरिक्त कालावधि या कालावधियों तक प्रवृत्त रख सकेगी, जो कुल मिलाकर तीस मास से अधिक नहीं होगी ।] 

 [8ग. बिना दावा वाली संपत्ति की सुरक्षित अभिरक्षा तथा पुनः परिदान सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति- [केन्द्रीय सरकार, धारा 14 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए] शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे नियम बना सकेगी जिनमें उस सम्पत्ति की सुरक्षित अभिरक्षा तथा पुनः परिदान सुनिश्चित करने के लिए उपबन्ध किए जा सकेंगे जो किसी विमानक्षेत्र पर अथवा किसी विमानक्षेत्र पर किसी वायुयान में उचित अभिरक्षाविहीन पाई जाए । ऐसे किन्हीं नियमों में विशिष्टतः निम्नलिखित के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा-

(क) ऐसी किसी सम्पत्ति को उसके हकदार व्यक्ति को पुनः परिदान करने से पूर्व, उस सम्पत्ति की बाबत प्रभारों का        संदाय; तथा 

(ख) जहां ऐसी सम्पत्ति उसके हकदार व्यक्ति को, नियमों में विनिर्दिष्ट कालावधि के अवसान के पूर्व, पुनः परिदत्त न की गई हो, उस दशा में सम्पत्ति का निपटान ।]

9. ध्वंस और उद्धारण-(1) ध्वंस और उद्धारण से सम्बन्धित  [वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 1958 (1958 का 44) के भाग 13 के उपबन्ध] समुद्र या ज्वारीय जल पर या उनके ऊपर के वायुयान को वैसे ही लागू होंगे जैसे पोत को लागू होते हैं, और वायुयान का स्वामी वायुयान द्वारा की गई उद्धारण सेवाओं के लिए युक्तियुक्त इनाम का वैसे ही हकदार होगा जैसे पोत का स्वामी होता है । 

(2) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उक्त उपबन्धों के वायुयान को लागू होने में ऐसे उपान्तरण कर सकेगी जैसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों । 

 [9क. भवन निर्माण, वृक्षारोपण आदि के प्रतिषेध या विनियमन की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि वायुयानों के प्रचालन की सुरक्षा के लिए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,-

(i) निदेश दे सकेगी कि विमानक्षेत्र निर्देश बिन्दु से बीस किलोमीटर से अनधिक ऐसे अर्धव्यास के भीतर जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, किसी भूमि पर किसी भवन या संरचना का निर्माण अथवा परिनिर्माण नहीं किया जाएगा, या वृक्ष रोपण नहीं किया जाएगा तथा यदि ऐसा कोई भवन, संरचना या वृक्ष ऐसी भूमि पर हो तो वह ऐसे भवन, संरचना या वृक्ष के स्वामी या उस पर नियन्त्रण रखने वाले व्यक्ति को, ऐसी कालावधि के भीतर जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, यथास्थिति, ऐसे भवन या संरचना को तुड़वाने अथवा ऐसे वृक्ष को कटवाने का निदेश भी दे सकेगी; 

(ii) निदेश दे सकेगी कि विमानक्षेत्र निदेश बिन्दु से बीस किलोमीटर से अनधिक अर्धव्यास के भीतर किसी भूमि पर उतनी ऊंचाई से, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अधिक ऊंचे किसी भवन या संरचना का निर्माण या परिनिर्माण नहीं किया जाएगा, अथवा ऐसा कोई वृक्षारोपण नहीं किया जाएगा जिसकी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट ऊचांई से अधिक ऊंचा उगने की संभाव्यता है या जो साधारणतया ऐसी ऊंचाई से अधिक ऊंचा उगता है, और यदि ऐसी भूमि पर किसी भवन या संरचना या वृक्ष की ऊंचाई विनिर्दिष्ट  ऊंचाई से अधिक हो तो वह ऐसे भवन, संरचना या वृ्क्ष के स्वामी या उस पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति को ऐसी कालावधि के भीतर जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, उसकी ऊंचाई कम करने का निदेश दे सकेगी ताकि वह विनिर्दिष्ट ऊंचाई से अधिक न रहे । 

(2) उपधारा (1) के खण्ड (i) या खण्ड (ii) के अधीन अर्धव्यास विनिर्दिष्ट करते समय तथा उक्त खण्ड (त्त्) के अधीन किसी भवन, संरचना या वृक्ष की ऊंचाई विनिर्दिष्ट करते समय, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित का ध्यान रखेगी,-

(क) विमानक्षेत्र में प्रचालित या प्रचालन के लिए आशयित वायुयानों का प्रकार; अथवा 

(ख) वायुयानों का प्रचालन शासित करने वाले अन्तरराष्ट्रीय मानक और सिफारिश की गई पद्धतियां । 

(3) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी भवन, संरचना या वृक्ष के स्वामी को अथवा उस पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति को ऐसे भवन या संरचना को तुड़वाने या ऐसे वृक्ष को कटवाने का अथवा किसी भवन, संरचना या वृक्ष की ऊंचाई कम करने का निदेश देने वाली कोई अधिसूचना जारी कर दी गई हो, वहां ऐसे निदेशयुक्त अधिसूचना की एक प्रति भवन, संरचना या वृक्ष के स्वामी पर अथवा उस पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति पर, यथास्थिति,-

(i) ऐसे स्वामी या व्यक्ति को परिदत्त या निविदत्त करके; अथवा 

(ii) यदि वह इस प्रकार परिदत्त या निविदत्त नहीं की जा सकती हो तो, ऐसे स्वामी या व्यक्ति के किसी अधिकारी को अथवा ऐसे स्वामी या व्यक्ति के परिवार के किसी वयस्क पुरुष सदस्य को परिदत्त या निविदत्त करके अथवा अधिसूचना की एक प्रति उस परिसर के, जिसमें ऐसे स्वामी या व्यक्ति का अन्तिम बार निवास किया जाना अथवा कारबार चलाना अथवा अभिलाभ के लिए स्वयं काम करना ज्ञात है, बाहरी द्वार पर अथवा सहजदृश्य किसी भाग पर लगाकर; अथवा इन साधनों द्वारा तामील करने में असफल रहने की दशा में,

(iii) डाक द्वारा,

तामील की जाएगी ।

                (4) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना में किसी निदेश का अनुपालन करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए बाध्यकर होगा ।

9ख. प्रतिकर का संदाय-(1) यदि धारा 9क की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना में किसी निदेश के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति को कोई हानि या नुकसान होता है तो ऐसे व्यक्ति को प्रतिकर दिया जाएगा । प्रतिकर की रकम, इसमें इसके पश्चात् उपवर्णित रीति से और सिद्धांतों के अनुसार अवधारित की जाएगी, अर्थात् :-

(क) जहां प्रतिकर की रकम सहमति से नियत की जा सकती हो, वहां वह ऐसी सहमति के अनुसार संदत्त की जाएगी; 

(ख) जहां ऐसी सहमति न हो सके, वहां केन्द्रीय सरकार, ऐसे व्यक्ति को, जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है अथवा इस रूप में नियुक्त होने के लिए अर्हित है, मध्यस्थ के रूप में नियुक्त कर सकेगी;

(ग) किसी विशिष्ट मामले में, केन्द्रीय सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे प्रतिकर के हकदार व्यक्ति को हुई हानि या नुकसान की प्रकृति की बाबत विशेष ज्ञान हो, नामनिर्देशन कर सकेगी और जहां ऐसा नामनिर्देशन किया जाता है वहां प्रतिकर का हकदार व्यक्ति भी उसी प्रयोजनार्थ एक असेसर नामनिर्दिष्ट कर सकेगा; 

(घ) मध्यस्थ के समक्ष कार्यवाहियों के प्रारम्भ पर, केन्द्रीय सरकार और प्रतिकर का हकदार व्यक्ति यह कथन करेंगे कि उनकी अपनी-अपनी राय में प्रतिकर की उचित रकम क्या है; 

(ङ) विवाद की सुनवाई के पश्चात् मध्यस्थ प्रतिकर की रकम, जो उसे न्यायसंगत प्रतीत हो, अवधारित करते हुए पंचाट करेगा और उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों को विनिर्दिष्ट करेगा जिसे या जिन्हें ऐसा प्रतिकर संदत्त किया जाएगा, और पंचाट करते समय वह प्रत्येक मामले की परिस्थितियों का तथा निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेगा-

(i) प्रतिकर के हकदार व्यक्ति को उसके उपार्जनों में हुआ नुकसान; 

(ii) यदि धारा 9क की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना में किसी निदेश के परिणामस्वरूप, ऐसी अधिसूचना के जारी होने के ठीक पश्चात् भूमि का बाजार मूल्य कम हो जाता है, तो ऐसे बाजार मूल्य में हुई कमी; 

(iii) यदि किसी निदेश के अनुसरण में कोई भवन या संरचना तुड़वा दी गई हो या कोई वृक्ष कटवा दिया गया हो अथवा किसी भवन, संरचना या वृक्ष की ऊंचाई कम कर दी गई हो तो ऐसे तुड़वाने, कटवाने या कम करने के परिणामस्वरूप प्रतिकर के हकदार व्यक्ति को हुआ नुकसान तथा ऐसे तुड़वाने, कटवाने या कम करने के लिए ऐसे व्यक्ति द्वारा उपगत व्यय; 

(iv) यदि प्रतिकर के हकदार व्यक्ति को अपना निवास-स्थान या कारबार का स्थान परिवर्तन करने के लिए बाध्य होना पड़े तो वह युक्तियुक्त व्यय जो उसे ऐसे परिवर्तन के कारण उपगत करना पड़े ;

(च) यदि प्रतिकर के हकदार व्यक्ति या व्यक्तियों की बाबत कोई विवाद है तो मध्यस्थ ऐसे विवाद का विनिश्चय करेगा और यदि मध्यस्थ इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि एक से अधिक व्यक्ति प्रतिकर के हकदार हैं तो वह प्रतिकर की रकम को ऐसे व्यक्तियों के बीच प्रभाजित करेगा; 

(छ) माध्यस्थम् अधिनियम, 1940 (1940 का 10) की कोई बात इस धारा के अधीन माध्यस्थमों को लागू नहीं      होगी । 

(2) उपधारा (1) के खण्ड (ङ) के अधीन मध्यस्थ द्वारा किए गए प्रत्येक पंचाट में, मध्यस्थ के समक्ष कार्यवाहियों में उपगत खर्चे की रकम, और खर्चे किन व्यक्तियों द्वारा और किस अनुपात में संदत्त किए जाएंगे यह भी, कथित होगा ।

9ग. प्रतिकर की बाबत पंचाटों की अपीलें-कोई व्यक्ति जो मध्यस्थ द्वारा धारा 9ख के अधीन किए गए पंचाट से व्यथित है ऐसे पंचाट की तारीख से तीस दिन के भीतर उस उच्च न्यायालय में, जिसकी अधिकारिता में विमानक्षेत्र स्थित हो, अपील कर सकेगा :

परन्तु  यदि उच्च न्यायालय का समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी पर्याप्त कारण से समय पर अपील फाइल नहीं कर सका था तो वह उक्त तीस दिन की कालावधि के अवसान के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगा ।

9घ. मध्यस्थ को सिविल न्यायालयों की कतिपय शक्ितयां होंगी-धारा 9ख के अधीन नियुक्त मध्यस्थ को, इस अधिनियम के अधीन माध्यस्थम् कार्यवाहियां करते समय, निम्नलिखित विषयों की बाबत, वे सभी शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन वाद का विचारण करने में सिविल न्यायालय को प्राप्त हैं, अर्थात् :-

(क) किसी व्यक्ति को समन करना और उसे हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना; 

(ख) किसी दस्तावेज के प्रकटीकरण और पेश करने की अपेक्षा करना; 

(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य लेना; 

(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख की अध्यपेक्षा करना; 

(ङ) साक्षियों की परीक्षाके लिए कमीशन निकालना ।] 

 [10. इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के उल्लंघन में कार्य की शास्ति-(1) यदि कोई व्यक्ति धारा 5 की उपधारा (2) के खण्ड (ठ) के अधीन बनाए गए, वायुयान में आयुध, विस्फोटक या अन्य संकटकारी माल के वहन का विनियमन या प्रतिषेध करने वाले किसी नियम के किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा या जब उस खण्ड के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन ऐसे मामले के बारे में सूचना देने की अपेक्षा की जाए ऐसी सूचना देगा जो मिथ्या है और जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, और यदि वह स्वामी नहीं है तो स्वामी भी (यदि वह यह साबित नहीं कर देता है कि अपराध बिना उसकी जानकारी, सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है) कारावास से जो दो वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा और  [जुर्माने का भी जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा] दायी होगा ।  

 [(1क) यदि कोई व्यक्ति विमानक्षेत्र निर्देश बिंदु से दस किलोमीटर के अर्धव्यास के भीतर पशुओं का वध करने और खाल उतारने का तथा कूड़ा, गंदगी और अन्य प्रदूषित तथा घृणाजनक वस्तुएं डालने का प्रतिषेध करने वाले, धारा 5 की उपधारा (2) के खंड (थथ) के अधीन बनाए गए किसी नियम के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगा तो वह 2[कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा,] या दोनों से, दंडनीय होगा ।

(1ख) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1क) में निर्दिष्ट अपराध                   संज्ञेय होगा ।]

(2) धारा 5 के अधीन कोई नियम बनाने में या 2[धारा 4, धारा 7] धारा 8, धारा 8क या धारा 8ख के अधीन नियम बनाने में केन्द्रीय सरकार यह निदेश दे सकेगी कि उसका भंग 2[कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा,ट या दोनों से, दण्डनीय होगा ।]

11. संकटकारी उड़ान के लिए शास्ति-जो कोई किसी वायुयान को जानबूझकर ऐसी रीति से उड़ाएगा जिससे जल या थल या वायु में किसी व्यक्ति या किसी सम्पत्ति को संकट कारित हो, वह  [कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा,] या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

 [11क. धारा 5के अधीन दिए गए निदेशों के अनुपालन करने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति धारा 5क के अधीन दिए गए किसी निदेश के अनुपालन में जानबूझकर चूक करेगा तो वह कारावास से, जिसकी कालावधि  [दो वर्ष] तक की हो सकेगी अथवा  [जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा,] अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा । 

11ख. धारा 9के अधीन दिए गए निदेशों के अनुपालन करने के लिए शास्ति-(1) यदि कोई व्यक्ति धारा 9क के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना में किसी निदेश के अनुपालन में जानबूझकर चूक करेगा तो वह  [कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा,] अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

(2) उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि कोई व्यक्ति धारा 9क की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना में के किसी निदेश के अनुसरण में, अधिसूचना में विनिर्दिष्ट कालावधि में, किसी भवन या संरचना को तुड़वाने में या किसी वृक्ष को कटवाने में अथवा किसी भवन, संरचना या वृक्ष की ऊंचाई कम करने में, चूक करेगा तो, ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त बनाए, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी ऐसे भवन या संरचना को तुड़वाने या ऐसे वृक्ष को कटवाने अथवा ऐसे भवन, संरचना या वृक्ष की ऊंचाई कम करने के लिए सक्षम होगा :]

 [परन्तु इस उपधारा के अधीन नियम बनाने की शक्ति, धारा 14 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए होगी ।]

                12. अपराधों के दुष्प्रेरण और प्रयतित अपराधों के लिए शास्ति-जो कोई इस अधिनियम या नियमों के अधीन किसी अपराध को करने का दुष्प्रेरण करेगा या ऐसा अपराध करने का प्रयत्न करेगा और ऐसे प्रयत्न में अपराध करने की दशा में कोई काम करेगा वह अपराध के लिए उपबन्धित दण्ड का दायी होगा ।

13. न्यायालय की समपहरण का आदेश देने के शक्ति- [जहां कोई व्यक्ति धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन या धारा 5 की उपधारा (2) के खण्ड (झ) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए सिद्धदोष है] वहां वह न्यायालय जिसके द्वारा वह सिद्धदोष ठहराया गया है, यह निदेश दे सकेगा कि, यथास्थिति, वायुयान या वस्तु या पदार्थ, जिसकी बाबत अपराध किया गया है, सरकार को समपहृत हो जाएगा । 

 [14. नियमों का प्रकाशन के पश्चात् बनाया जाना-इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त नियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अधीन है कि नियम पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाएंगे :

परन्तु केन्द्रीय सरकार, लोकहित में, लिखित आदेश द्वारा, किसी मामले में पूर्व प्रकशन की शर्त से छूट दे सकेगी ।]

 [14क. नियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो             जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]

15. उन वायुयानों पर जो भारत में रजिस्ट्रीकृत नहीं हैं पेटेन्टकृत आविष्कार का उपयोग-भारतीय पेटेंट और डिजाइन अधिनियम, 1911 (1911 का 2) की धारा 42 के उपबन्ध किसी वायुयान पर, जो  [भारत] में रजिस्ट्रीकृत नहीं है, प्रयुक्त आविष्कार उसी रीति से लागू होंगे जैसे वे विदेशी यान में प्रयुक्त आविष्कार को लागू होते हैं । 

16. [सीमाशुल्क लागू करने की शक्ति] सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 160 और अनुसूची द्वारा                 (1-2-1963 से) निरसित । 

17. कतिपय वादों का वर्जन-किसी भी सिविल न्यायालय में अतिचार या न्यूसेन्स की बाबत कोई वाद किसी वायुयान की किसी सम्पत्ति के ऊपर भूमि से इतनी ऊंचाई के उड़ान के ही आधार पर, जो वायु, मौसम और मामले की सभी परिस्थितियों को देखते हुए युक्तियुक्त है, या केवल ऐसी उड़ान से होने वाली सामान्य घटना के आधार पर नहीं लाया जाएगा । 

18. अधिनियम के अधीन सद्भावनापूर्वक किए गए कार्यों की व्यावृत्ति-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी ।

19. इस अधिनियम के लागू होने की व्यावृत्ति-इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी आदेश या  [धारा 8क या धारा 8ख के अधीन बनाए गए नियम से भिन्न, किसी] नियम की कोई बात  [संघ की नौसेना, सेना या वायुसेना] के स्वामित्व में या के द्वारा अनन्यतः नियोजित वायुयान को या की बाबत अथवा ऐसे वायुयान के संबंध में नियोजित ऐसे बलों के किसी व्यक्ति को लागू                       नहीं होगी ।             

(2) इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी आदेश या नियम की कोई बात किसी भी प्रकाशस्तम्भ को जिसे भारतीय प्रकाशस्तम्भ अधिनियम, 1927 (1927 का 17) लागू होता है, लागू नहीं होगी अथवा उस अधिनियम के अधीन किसी प्राधिकारी द्वारा प्रयोक्तव्य किसी अधिकार अथवा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव या असर नहीं डालेगी ।

20. [निरसित ।]-निरसन अधिनियम, 1938 (1938 का 1) की धारा 2 और अनुसूची द्वारा निरसित ।

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