पंजाब विधान परिषद् (उत्सादन) अधिनियम, 1969
(1969 का अधिनियम संख्यांक 46)
[27 दिसम्बर, 1969]
पंजाब राज्य की विधान परिषद् के उत्सादन का तथा उसके अनुपूरक, आनुषंगिक
और पारिणामिक विषयों का उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) यह अधिनियम पंजाब विधान परिषद् (उत्सादन) अधिनियम, 1969 कहा जा सकेगा ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) समुचित सरकार" से संविधान की सप्तम अनुसूची की सूची 1 में प्रगणित किसी विषय से संबंधित विधि की बाबत केन्द्रीय सरकार और किसी अन्य विधि की बाबत राज्य सरकार अभिप्रेत है;
(ख) अनुच्छेद" से संविधान का अनुच्छेद अभिप्रेत है;
(ग) परिषद्" से पंजाब राज्य की विधान परिषद् अभिप्रेत है;
(घ) विधि" के अंतर्गत कोई अधिनियमिति, अध्यादेश, विनियम, आदेश, उपविधि, नियम, स्कीम, अधिसूचना या अन्य लिखत भी है जो सम्पूर्ण पंजाब राज्य में या उसके किसी भाग में विधि का बल रखती है;
(ङ) विधान सभा" से पंजाब राज्य की विधान सभा अभिप्रेत है ।
3. परिषद् का उत्सादन-(1) पंजाब राज्य की विधान परिषद् एतद्द्वारा उत्सादित हो जाती है ।
(2) परिषद् के उत्सादन पर उसका कोई सदस्य ऐसा सदस्य न रह जाएगा ।
4. अनुच्छेद 168 का संशोधन-अनुच्छेद 168 के खण्ड (1) के उपखण्ड (क) में, पंजाब" शब्द का लोप कर दिया जाएगा ।
5. 1950 के अधिनियम सं० 43 का संशोधन-लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में,-
(क) तृतीय अनुसूची में पंजाब संबंधी प्रविष्टि संख्या 7 का लोप कर दिया जाएगा ;
(ख) चतुर्थ अनुसूची में पंजाब" शीर्षक और उसके नीचे की प्रविष्टियों का लोप कर दिया जाएगा ।
6. परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पंजाब) आदेश, 1951 का निरसन-परिषद् निर्वाचन-क्षेत्र परिसीमन (पंजाब) आदेश, 1951 एतद्द्वारा निरसित किया जाता है ।
7. लंबित विधेयकों के बारे में उपबन्ध-(1) इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व परिषद् में लंबित कोई भी विधेयक, जो विधान सभा द्वारा पारित न किया गया हो, परिषद् के उत्सादन पर व्यपगत हो जाएगा ।
(2) इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व परिषद् में लंबित कोई विधेयक, जो विधान सभा द्वारा पारित कर दिया गया हो, परिषद् के उत्सादन पर व्यपगत न होगा, किन्तु ऐसे उत्सादन पर यह समझा जाएगा कि वह पंजाब राज्य के विधान-मंडल के दोनों सदनों द्वारा ऐसे प्रारम्भ के पूर्व उस रूप में पारित कर दिया गया जिसमें वह विधान सभा द्वारा पारित किया गया था ।
(3) यदि ऐसा कोई विधेयक विधान सभा द्वारा पारित कर दिए जाने के पश्चात्, इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व विधान परिषद् द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया हो या विधान परिषद् द्वारा संशोधन सहित पारित कर दिया गया हो तो विधान सभा ऐसे प्रारम्भ के पश्चात् उस विधेयक को फिर ऐसे संशोधनों के, यदि कोई हों, सहित या उनके बिना जो परिषद् द्वारा किए गए हों, पुनः पारित कर सकेगी और इस प्रकार पारित विधेयक के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् विधान सभा में पुरःस्थापित और उसके द्वारा पारित विधेयक है ।
8. विधियों के अनुकूलन की शक्ति-समुचित सरकार इस अधिनियम के प्रारम्भ से एक वर्ष के अवसान के पूर्व, आदेश द्वारा, ऐसे प्रारम्भ के पूर्व बनाई गई किसी विधि में से ऐसे अनुकूलन और उपान्तर, चाहे वे निरसन के रूप में हों या संशोधन के रूप में, कर सकेगी जो धारा 3 के अधीन परिषद् के उत्सादन के परिणामस्वरूप आवश्यक या समीचीन हों, और तब प्रत्येक ऐसी विधि इस प्रकार किए गए अनुकूलनों और उपान्तरों के सहित प्रभावी होगी ।
9. विधियों के अर्थान्वयन की शक्ति-इस बात के होते हुए भी कि इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व बनाई गई किसी विधि के अनुकूलन या उपान्तरण के लिए धारा 8 के अधीन उपबन्ध न किया गया हो या अपर्याप्त उपबन्ध किया गया हो, ऐसी विधि को प्रवर्तित कराने के लिए अपेक्षित या सशक्त कोई न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी, उसके सार पर प्रभाव डाले बिना, उस विधि का अर्थान्वयन उस न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष के विषय के सम्बन्ध में ऐसी रीति से कर सकेगा जो परिषद् के उत्सादन के कारण आवश्यक या उचित हो ।
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