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लोक वित्तीय संस्था (विश्वस्तता और गोपनीयता विषयक बाध्यता) अधिनियम, 1983 ( Public Financial Institutions (Obligation as To Fidelity and Secrecy) Act, 1983 )


 

लोक वित्तीय संस्था (विश्वस्तता और गोपनीयता विषयक बाध्यता) अधिनियम, 1983

(1983 का अधिनियम संख्यांक 48)

[30 दिसम्बर, 1983]

लोक वित्तीय संस्थाओं की विश्वस्तता और गोपनीयता

विषयक बाध्यता के लिए उपबन्ध

करने के लिए

अधिनियम

                भारत गणराज्य के चौंतीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम लोक वित्तीय संस्था (विश्वस्तता और गोपनीयता विषयक बाध्यता) अधिनियम, 1983 है ।

2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, लोक वित्तीय संस्था" से अभिप्रेत है-

(क) इंडस्ट्रियल क्रैडिट एंड इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड, जो इंडियन कम्पनीज ऐक्ट, 1913   (1913 का 7) के अधीन बनाई गई और रजिस्ट्रीकृत कम्पनी है ;

(ख) इंडस्ट्रियल रीकंस्ट्रक्शन कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड, जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाई गई और रजिस्ट्रीकृत कम्पनी है ; अथवा

(ग) कोई अन्य ऐसी संस्था, जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथापरिभाषित कम्पनी या ऐसी कम्पनी है जिसको उस अधिनियम की धारा 619 के उपबन्ध लागू होते हैं, और जिसे केन्द्रीय सरकार, ऐसी संस्था द्वारा चलाए जा रहे कारबार की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए लोक वित्तीय संस्था विनिर्दिष्ट करे ।

                (2) उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, उसके जारी किए जाने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।

3. विश्वस्तता और गोपनीयता विषयक बाध्यता-(1) कोई लोक वित्तीय संस्था अपने संघटकों से या उनके कार्यकलाप से संबंधित कोई जानकारी, उपधारा (2) में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, उन परिस्थितियों में ही जिनमें विधि अथवा बैंककारों की रूढ़िगत पद्धति और प्रथा के अनुसार, उस लोक वित्तीय संस्था के लिए ऐसी जानकारी प्रकट करना आवश्यक या समुचित है, प्रकट करेगा, अन्यथा नहीं ।

                (2) कोई लोक वित्तीय संस्था अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के प्रयोजन के लिए,-

                                (क) केन्द्रीय सरकार से ; अथवा

                (ख) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक से, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) के अर्थ में किसी समनुषंगी बैंक से, बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन अथवा बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1980(1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित किसी तत्स्थानी नए बैंक से, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अर्थ में किसी अन्य अनुसूचित बैंक से ; अथवा

                                (ग) किसी अन्य लोक वित्तीय संस्था से,

ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी या अन्य जानकारी, जैसी वह उस प्रयोजन के लिए उपयोगी समझे, ऐसी रीति से और ऐसे समय पर जो वह उचित समझे, संगृहीत कर सकेगी या उसे ऐसी जानकारी दे सकेगी ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, प्रत्यय विषयक जानकारी" पद का इस उपान्तर के अधीन रहते हुए कि उसमें निर्दिष्ट बैंककारी कम्पनी से इस उपधारा के खंड (ख) में निर्दिष्ट बैंक या लोक वित्तीय संस्था अभिप्रेत होगी, वही अर्थ होगा जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45क के खंड (ग) में है ।

 [(3) इस धारा की कोई बात प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के अधीन प्रकट की गई प्रत्यय विषयक जानकारी को लागू नहीं होगी ।]

4. विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा-ऐसी लोक वित्तीय संस्था का, जिसे यह अधिनियम लागू है, प्रत्येक निदेशक, किसी समिति का सदस्य, लेखापरीक्षक या अधिकारी या कोई अन्य कर्मचारी,-

                (क) अपने कर्तव्य ग्रहण करने के पहले ; या

                (ख) जहां उसने उस रूप में अपने कर्तव्य उस तारीख के पहले ग्रहण कर लिए हैं जिसको यह अधिनियम ऐसी संस्था को लागू हुआ, उस तारीख से जिसको यह अधिनियम ऐसी संस्था को लागू हुआ, तीस दिन के भीतर,

उस प्ररूप में जो इस अधिनियम की अनुसूची में उपवर्णित है, विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा करेगा ।

 [5. 1948 के अधिनियम 15 का संशोधन-औद्योगिक वित्त निगम अधिनियम, 1948 में,-

(क) धारा 39 को उसकी उपधारा (3) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित उपधारा (3) के पहले निम्नलिखित उपधाराएं अन्तःस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-

(1) निगम अपने संघटकों से या उनके कार्यकलाप से संबंधित कोई जानकारी, इस अधिनियम द्वारा या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा अन्यथा अपेक्षित के सिवाय, उन परिस्थितियों में ही जिनमें विधि अथवा बैंककारों की रूढ़िगत पद्धति और प्रथा के अनुसार, निगम के लिए ऐसी जानकारी प्रकट करना आवश्यक या समुचित है, प्रकट करेगा, अन्यथा नहीं ।

(2) निगम इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के प्रयोजन के लिए,-

(क) केन्द्रीय सरकार से ; अथवा

(ख) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक से, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) के अर्थ में किसी समनुषंगी बैंक से, बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन अथवा बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1980    (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित किसी तत्स्थानी नए बैंक से, किसी अन्य अनुसूचित बैंक से, किसी राज्य सहकारी बैंक या विकास बैंक से,

ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी या अन्य जानकारी, जैसी वह उस प्रयोजन के लिए उपयोगी समझे, ऐसी रीति से और ऐसे समय पर जो वह उचित समझे, संगृहीत कर सकेगा या उसे ऐसी जानकारी दे सकेगा ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, प्रत्यय विषयक जानकारी" पद का इस उपान्तर के अधीन रहते हुए कि उसमें निर्दिष्ट बैंककारी कम्पनी से इस उपधारा के खंड (ख) में निर्दिष्ट बैंक अभिप्रेत होगा, वही अर्थ होगा जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45क के खंड (ग) में है । ;

(ख) अनुसूची में, (धारा 39 देखिए)" कोष्ठकों, शब्दों और अंकों के स्थान पर [धारा 39(3) देखिएट" कोष्ठक, शब्द और अंक रखे जाएंगे ।

6. 1951 के अधिनियम 63 का संशोधन-राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 में,-

(क) धारा 40 को उसकी उपधारा (3) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित उपधारा (3) के पहले निम्नलिखित उपधाराएं अन्तःस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-

(1) वित्तीय निगम अपने संघटकों से या उनके कार्यकलाप से सम्बन्धित कोई जानकारी, इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा अन्यथा अपेक्षित के सिवाय, उन परिस्थितियों में ही जिनमें विधि अथवा बैंककारों की रूढ़िगत पद्धति और प्रथा के अनुसार, उस वित्तीय संस्था के लिए ऐसी जानकारी प्रकट करना आवश्यक या समुचित है, प्रकट करेगा, अन्यथा नहीं ।

                                                (2) वित्तीय निगम इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के प्रयोजन के लिए,-

                                                                (क) केन्द्रीय सरकार से ; अथवा

                (ख) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक से, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) के अर्थ में किसी समनुषंगी बैंक से, बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन अथवा बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1980 (1980 का  40) की धारा 3 के अधीन गठित किसी तत्स्थानी नए बैंक से, किसी अन्य अनुसूचित बैंक से, किसी राज्य सहकारी बैंक या विकास बैंक से,

ऐसी प्रत्यय विषयक जानकारी या अन्य जानकारी, जैसी वह उस प्रयोजन के लिए उपयोगी समझे, ऐसी रीति से और ऐसे समय पर जो वह उचित समझे, संगृहीत कर सकेगा या उसे ऐसी जानकारी दे सकेगा ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, प्रत्यय विषयक जानकारी" पद का इस उपान्तर के अधीन रहते हुए कि उसमें निर्दिष्ट बैंककारी कम्पनी से इस उपधारा के खंड (ख) में निर्दिष्ट बैंक अभिप्रेत होगा, वही अर्थ होगा जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45क के खंड (ग) में है । ;

(ख) अनुसूची में, (धारा 40 देखिए)" कोष्ठकों, शब्दों और अंकों के स्थान पर [धारा 40(3) देखिए]" कोष्ठक, शब्द और अंक रखे जाएंगे ।]

अनुसूची

(धारा 4 देखिए)

विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा

                मैं . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . , इसके द्वारा घोषणा करता हूं कि मैं वफादारी, सच्चाई और अपने सर्वोत्तम कौशल और योग्यता से उन कर्तव्यों का निष्पादन और पालन करूंगा जो . . . . . . . . . . . . । के (यथास्थिति) निदेशक, किसी समिति के सदस्य, लेखा परीक्षक, अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में मुझ से अपेक्षित हैं और जो उक्त . . . . . . . . . . . . . . . . . . । मैं या उसके संबंध में मेरे द्वारा धारित किसी पद या स्थिति से उचित रूप से संबंधित हैं ।

                मैं यह भी घोषणा करता हूं कि मैं . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . । के कार्यकलाप से या . . . . . . . . . . . . . . . । के साथ कोई व्यवहार रखने वाले ऐसे किसी व्यक्ति के कार्यकलाप से संबंधित कोई जानकारी ऐसे किसी व्यक्ति को संसूचित नहीं करूंगा या नहीं होने दूंगा, जो वैध रूप से उसका हकदार न हो और न मैं ऐसे किसी व्यक्ति को, . . . . . . . . . . . . । की या उसके कब्जे में की और . . . . . . . . . . . . . . . . . . . । के कारबार से या . . . . . . . . . . . . . । के साथ कोई व्यवहार रखने वाले किसी व्यक्ति के कारबार से संबंधित किन्हीं भी बहियों या दस्तावेजों का निरीक्षण करने दूंगा और न उन तक उसकी पहुंच होने दूंगा ।

हस्ताक्षर . . . . . . . . . . . . . .

मेरे समक्ष हस्ताक्षर किए :

 

। यहां संपृक्कत लोक वित्तीय संस्था का नाम अन्तःस्थापित करें ।

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