खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956
(1956 का अधिनियम संख्यांक 61)
झ्र्25 सितम्बर, 1956ट
खादी और ग्रामोद्योगों के विकास के लिए एक आयोग की स्थापना करने
के लिए तथा उससे संबंधित विषयों के लिए उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सातवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :श्न्
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभश्न्(1) यह अधिनियम खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।
2. परिभाषाएंश्न्इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,श्न्
(क) बोर्डञ्ज् से झ्र्धारा 10ट के अधीन गठित बोर्ड अभिप्रेत है ;
(ख) अध्यक्षञ्ज् से आयोग का अध्यक्ष अभिप्रेत है ;
(ग) आयोगञ्ज् से धारा 4 के अधीन स्थापित खादी और ग्रामोद्योग आयोग अभिप्रेत है ;
झ्र्(गग) नियत पूंजी विनिधानञ्ज् के अंतर्गत संयंत्र तथा मशीनरी में विनिधान और किसी उद्योग की भूमि और भवन भी है ;ट
(घ) खादीञ्ज् से भारत में हाथ से काते गए सूती, रेशमी या ऊनी धागे से अथवा ऐसे सब धागों या उनमें से किसी दो के मिश्रण से भारत में हथकरघे पर बुना कोई कपड़ा अभिप्रेत है ;
(ङ) सदस्यञ्ज् से आयोग का कोई सदस्य अभिप्रेत है झ्र्और अध्यक्ष ॥। इसके अंतर्गत हैट ;
(च) विहितञ्ज् से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
2झ्र्(चच) ग्रामीण क्षेत्रञ्ज् से किसी ग्राम में समाविष्ट क्षेत्र अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत किसी ऐसे नगर में समाविष्ट क्षेत्र भी है जिसकी जनसंख्या झ्र्बीस हजारट या ऐसी अन्य संख्या से अधिक नहीं है जो कन्द्रीय सरकार समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे ;ट
। । । ।
झ्र्(ज) ग्रामोद्योगञ्ज् से निम्नलिखित अभिप्रेत है,श्न्
(त्) कोई ऐसा उद्योग जो किसी ऐसे ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित है जो शक्ति के प्रयोग से या उसके बिना किसी माल का उत्पादन करता है या कोई सेवा करता है और जिसमें प्रति शिल्पी या कर्मकार नियत पूंजी विनिधान झ्र्एक लाख रुपएट या ऐसी अन्य राशि से अधिक नहीं है, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए :
परन्तु अनुसूची में विनिर्दिष्ट और किसी ग्रामीण क्षेत्र से भिन्न क्षेत्र में अवस्थित तथा खादी और ग्रामोद्योग आयोग (संशोधन) अधिनियम, 1987 (1987 का 12) के प्रारंभ के पूर्व किसी भी समय ग्रामोद्योग के रूप में मान्यताप्राप्त कोई उद्योग, इस उपखंड में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन ग्रामोद्योग बना रहेगा ;
झ्र्परन्तु यह और कि किसी पर्वतीय क्षेत्र में अवस्थित किसी उद्योग की दशा में, इस उपखंड के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो एक लाख रुपएञ्ज् शब्दों के स्थान पर एक लाख पचास हजार रुपए,ञ्ज् शब्द रखे गए हों ;ट
(त्त्) कोई ऐसा अन्य गैर-निर्माण एक (जिसके अंतर्गत मूल एकक भी है) जिसकी स्थापना किसी ग्रामोद्योग के संवर्धन, अनुरक्षण, सहायता, सेवा या प्रबंध करने के एकमात्र प्रयोजन के लिए की गई है ;ट
। । । । । । ।
अध्याय 2
खादी और ग्रामोद्योग आयोग
4. आयोग की स्थापना और उसका संगठनश्न्(1) उस तारीख से जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियत करे खादी और ग्रामोद्योग आयोग कहलाए जाने वाले एक आयोग की स्थापना की जाएगी जो शाश्वत् उत्तराधिकार और समान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा जिसे संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।
झ्र्(1क) इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, इस अधिनियम के अधीन सभी शक्तियों का प्रयोग और सभी कृत्यों का निर्वहन, जिसके अंतर्गत आयोग के दिन-प्रतिदिन के कार्यकलापों का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंधन भी है, आयोग में निहित होगा ।ट
झ्र्(2) आयोग में निम्नलिखित सदस्य होंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे, अर्थात् :श्न्
(क) छह गैर सरकारी सदस्य, झ्र्जिन्हें खादी या ग्रामोद्योगों का विशिष्ट ज्ञान और कम से कम दस वर्ष का अनुभव है,ट जो देश के ऐसे छह भौगोलिक परिक्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगे जो विहित किए जाएं ;
झ्र्(ख) चार गैर सरकारी सदस्य, जिनमें से प्रत्येक सदस्य निम्नलिखित विद्या की शाखाओं में से होगा, अर्थात् :श्न्
(त्) एक सदस्य, जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञीय जानकारी और अनुभव है ;
(त्त्) एक सदस्य, जिसे विपणन में विशेषज्ञीय जानकारी और अनुभव है ;
(त्त्) एक सदस्य, जिसे ग्रामीण विकास में विशेषज्ञीय जानकारी और अनुभव है ; और
(त्ध्) एक सदस्य, जिसे तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण में अनुभव है ;ट
3झ्र्(खक) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक का अध्यक्ष, या कोई अधिकारी, जो उपप्रबंध निदेशक की पंक्ति से नीचे का न हो, जिसे भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया जाएश्न्पदेन ;ट
झ्र्(ग) एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी, पदेन ; और
(घ) एक वित्त सलाहकार, जो आयोग का मुख्य लेखा अधिकारी भी होगा, पदेन ।ट
। । । । । । ।
(3) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन नियुक्त सदस्यों में से एक को अध्यक्ष नियुक्त कर सकेगी जो पूर्णकालिक सदस्य होगा ।ट
झ्र्5. मुख्य कार्यपालक अधिकारी की शक्तियां और कृत्यश्न् झ्र्(1) धारा 4 की उपधारा (1क) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए धारा 4 की उपधारा (2) के खंड (ग) के अधीन नियुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी आयोग के कार्यकलापों और उसके दिन प्रति दिन के प्रबंध के संबंध में साधारण अधीक्षण के संबंध में ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा, जो विहित किए जाएं ।ट
(1क) उपधारा (1) में निर्दिष्ट शक्तियों और कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना मुख्य कार्यपालक अधिकारी आयोग के साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंध के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा ।ट
(2) झ्र्मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उपधारा (1) में निर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का निर्वहन करने के अतिरिक्त,ट ऐसी सभी विवरणियों, रिपोर्टों और विवरणों को, जो धारा 24 के अधीन केन्द्रीय सरकार को दिए जाने के लिए अपेक्षित हैं, देने के लिए उत्तरदायी होगा ।
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी का आयोग के समक्ष उसके विचार्थ और विनिश्चय के लिए वित्तीय महत्व के किसी विषय को रखने का कर्तव्य होगा, यदि वित्तीय सलाहकार ने लिखित रूप में उसे यह सुझाव दिया हो कि ऐसा विषय आयोग के समक्ष रखा जाए ।
5क. वित्तीय सलाहकार की शक्तियां और कृत्यश्न् झ्र्धारा 4 की उपधारा (2) के खंड (घ) के अधीन नियुक्त वित्त सलाहकार आयोग के ऐसे वित्तीय विषयों का जो विहित किए जाएं जिनके अंतर्गत उसका बजट, लेखा और लेखापरीक्षा भी है, भारसाधक होगाट और वित्तीय सलाहकार का यह कर्तव्य होगा कि वह मुख्य कार्यपालक अधिकारी की मार्फत वित्तीय महत्व के ऐसे विषय को आयोग की जानकारी में लाए जिस पर, उसकी राय में, आयोग द्वारा विचार और विनिश्चय किए जाने की अपेक्षा है ।
6. आयोग की सदस्यता के लिए निरर्हताएंश्न्कोई व्यक्ति आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए और उसका सदस्य होने के लिए निरर्हित होगाश्न्
(क) यदि वह पागल या विकृतचित व्यक्ति है या पाया जाता है ; या
(ख) यदि उसे दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है ; या
(ग) यदि उसे किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है जिसमें नैतिक अधमता अंतर्वलित है ; या
(घ) यदि उसका कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 3 में यथा परिभाषित किसी कंपनी में (किसी निदेशक से भिन्न) शेयर धारक के सिवाय आयोग से या उसके द्वारा की गई किसी विद्यमान संविदा या किए जा रहे किसी कार्य में कोई वित्तीय हित है :
परन्तु जहां वह शेयर धारक है, वहां वह केंद्रीय सरकार को ऐसी किसी कंपनी में अपने द्वारा धारित शेयरों की प्रकृति और मात्रा को प्रकट करेगा ; या
(ङ) यदि उसका अधिनियम की अनुसूची में विनिर्दिष्ट या विनिर्दिष्ट समझे गए कारबार से संबंधित किसी कारबार उपक्रम या किसी अन्य ग्रामोद्योग में कोई वित्तीय हित है ।
6क. आयोग से अध्यक्ष, सदस्य आदि का हटाया जानाश्न्केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, आयोग के किसी ऐसे सदस्य को पद से हटा सकेगी जोश्न्
(क) धारा 6 में वर्णित निरर्हताओं में से किसी के अधीन है या हो जाता है ; या
(ख) केन्द्रीय सरकार की राय में अपने कर्तव्यों को कार्यान्वित करने में असफल रहता है या असमर्थ है ; या
(ग) आयोग की इजाजत के बिना आयोग के तीन क्रमवर्ती अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता है :
परंतु ऐसी कोई अधिसूचना जारी करने के पूर्व, केन्द्रीय सरकार संबद्ध सदस्य को ऐसे हटाए जाने के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का अवसर देगी ।ट
7. सदस्य द्वारा पदत्यागश्न्कोई सदस्य केन्द्रीय सरकार को लिखित सूचना देकर अपना पदत्याग सकेगा और ऐसे पदात्याग के उस सरकार द्वारा शासकीय राजपत्र में अधिसूचित किए जाने पर यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है ।
8. रिक्तियों आदि से आयोग के कार्यों और कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होनाश्न्आयोग का कोई कार्य या कार्यवाही उसके सदस्यों में किसी रिक्ति के या उसके गठन में किसी त्रुटि के होने के ही कारण अविधिमान्य नहीं होगी ।
9. विशिष्ट प्रयोजनों के लिए आयोग के साथ व्यक्तियों का अस्थायी रूप से सहमेलनश्न्(1) आयोग ऐसी रीति से और ऐसे प्रयोजनों के लिए जिन्हें इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा अवधारित किया जाए, किन्हीं ऐसे व्यक्तियों को अपने साथ सहयुक्त कर सकेगा जिनकी सहायता या सलाह वह इस अधिनियम के उपबंधों में से किसी का अनुवर्तन करने में चाहे ।
(2) आयोग द्वारा किसी प्रयोजन के लिए उपधारा (1) के अधीन अपने साथ सहयुक्त व्यक्ति को उस प्रयोजन से संबंधित आयोग के विचार-विमर्श में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु मतदान का अधिकार न होगा और वह किसी भा अन्य प्रयोजन के लिए सदस्य न होगा ।
(3) कन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, सरकार के एक या अधिक अधिकारियों को आयोग के किन्हीं अधिवेशनों में हाजिर होने और आयोग के विचार-विमर्श में भाग लेने के लिए प्रतिनियुक्त कर सकेगी, किन्तु ऐसे अधिकारी या अधिकारियों को मतदान का अधिकार न होगा ।
10. बोर्ड का गठनश्न् झ्र्(1)ट आयोग को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में सहायता देने के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक बोर्ड गठित कर सकेगी जो 1झ्र्राष्ट्रीय खादी और ग्रामोद्योग बोर्डट कहलाएगा और जिसमें एक अध्यक्ष तथा इतने अन्य सदस्य होंगे जितने केन्द्रीय सरकार ठीक समझे और जो ऐसे व्यक्तियों में से चुने जाएंगे जो खादी और ग्रामोद्योग के विकास से संबंधित विषयों में अनुभव तथा दर्शित क्षमता रखते हुए अर्ह हों ।
झ्र्(2) बोर्ड उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए ऐसे समयों और स्थानों पर अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में, जिसके अंतर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है, प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएं ।
(3) बोर्ड, वर्ष में कम से कम दो अधिवेशन करेगा ।ट
11. आयोग का बोर्ड से परामर्श करनाश्न्आयोग इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के संबंध में मामूली तौर पर बोर्ड से परामर्श करेगा ।
12. आयोग के अधिवेशनश्न्(1) आयोग का अधिवेशन ऐसे समय और स्थान पर होगा और वह उपधारा (2) और (3) के उपबंधों के अध्यधीन अपने अधिवेशनों में कार्य संपादन के बारे में (जिसके अंतर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुपालन करेगा जैसे इस अधिनियम के अधीन आयोग द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा उपबंधित हों :
परन्तु आयोग का अधिवेशन प्रत्येक मास में कम से कम एक बार होगा ।
झ्र्(2) आयोग के अधिवेशन में अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया (पदेन सदस्य से भिन्न) कोई सदस्य अध्यक्षता करेगा ।ट
(3) आयोग के अधिवेशन में सभी प्रश्न झ्र्उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों की (जिनके अंतर्गत पदेन सदस्य भी हैं) बहुसंख्या द्वारा विनिश्चित किए जाएंगे और मतों के बराबर होने की दशा में अध्यक्ष का या उसकी अनुपस्थिति में पीठासीन व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा ।ट
झ्र्12क. आंचलिक समितिश्न्(1) आयोग, धारा 4 की उपधारा (2) के खंड (क) में निर्दिष्ट छह भौगोलिक अंचलों में से प्रत्येक के लिए एक आंचलिक समिति का गठन करेगा, जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात :श्न्
(क) धारा 4 की उपधारा (2) के खंड (क) में निर्दिष्ट अंचल का प्रतिनिधित्व करने वाला गैर सरकारी सदस्य, जो संबंधित अंचल के लिए गठित आंचलिक समिति का अध्यक्ष होगा ;
(ख) अंचल में, यथास्थिति, राज्यों के प्रत्येक राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड या प्रत्येक राज्य सरकार का एक ऐसा प्रतिनिधि, जो संबंधित राज्य सरकार के परामर्श से केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएश्न्सदस्य ;
(ग) आयोग का आंचलिक उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जो आंचलिक समिति का संयोजक होगाश्न्सदस्य ; और
(घ) अंचल में राज्यों के आयोग निदेशालयों के भारसाधक राज्य निदेशकश्न्सदस्य ;
(ङ) अंचल में कार्यरत अग्रणीय बैंकों में से एक बैंक का आंचलिक या प्रादेशिक प्रबंधकश्न्सदस्य ; और
(च) अंचल में प्रत्येक राज्य से, केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित ख्यातिप्राप्त किसी ऐसी संस्था का एक प्रतिनिधि जो खादी या ग्रामोद्योग सेक्टर में कम से कम दस वर्ष तक कार्य कर रहा हो और जिसके कार्य का रिकार्ड अच्छा होश्न्सदस्य ।
(2) आंचलिक समिति, ऐसे समयों और स्थानों पर अधिवेशन करेगी और वह उपधारा (3) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में (जिसके अंतर्गत अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है) प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगी, जो इस अधिनियम के अधीन आयोग द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा उपबंधित किए जाएं :
परंतु समिति प्रत्येक तीन मास में कम से कम एक बार अधिवेशन करेगी ।
(3) समिति के अधिवेशन में आंचलिक समिति का अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया कोई सदस्य अध्यक्षता करेगा ।
(4) आंचलिक समिति साधारणतया परामर्श के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगी और तद्नुसार अन्य बातों के साथ-साथश्न्
(क) अंचल में खादी और ग्रामोद्योग के विकास के लिए आयोग के कार्यक्रमों और स्कीमों से संबंधित जानकारी के प्रसारण के लिए एक नलिका के रूप में कार्य करेगी ;
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट कार्यक्रमों और स्कीमों के कार्यान्वयन को समय-समय पर मानिटर करेगी ;
(ग) परिकल्पित समस्याओं और कठिनाइयों पर तथा खंड (क) में निर्दिष्ट कार्यक्रमों और स्कीमों के कार्यान्वयन में लगे हुए बैंकों, स्वैच्छिक अभिकरणों, कारीगरों और अन्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर आयोग को पोषक जानकारी देगी ।ट
झ्र्13. अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तेंश्न्(1) आयोग का पदेन सदस्यों से भिन्न प्रत्येक सदस्य झ्र्केन्द्रीय सरकार के प्रसादपर्यंत, जो पांच वर्ष की सतत् अवधि से अधिक नहीं होगी,ट पद धारण करेगा :
परन्तु अध्यक्ष, अपनी अवधि के अवसान के होते हुए भी, पद तब तक धारण करता रहेगा जब तक कि उसका पदोत्तरवर्ती अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है ।
(2) अध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, वित्तीय सलाहकार और अन्य सदस्यों की सेवा के निबंधन और शर्तें वे होंगी जो विहित की जाएं ।ट
14. आयोग के अधिकारी और सेवकश्न् । । । । ।
॥। ऐसे नियमों के अध्यधीन जैसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाएं, आयोग ऐसे अन्य अधिकारी और सेवक नियुक्त कर सकेगा जिन्हें वह अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निष्पादन के लिए आवश्यक समझे :
। । । । । । ।
अध्याय 3
आयोग के कृत्य
झ्र्15. आयोग के कृत्यश्न्(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, आदेश के कृत्य, जहां भी आवश्यक हो, साधारणतया ग्रामीण विकास में लगे हुए अन्य अभिकरणों के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्र में खादी और ग्रामोद्योग की स्थापना और झ्र्उसके विकास की योजना बनाना, उसका संवर्धन करना, उसे सुकर बनाना, संगठित करना और उसकी सहायता करनाट, होंगे
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आयोग निम्नलिखित की बाबत ऐसे उपाय कर सकेगा जो वह ठीक समझे,श्न्
(क) खादी और ग्रामोद्योग में नियोजित या नियोजन प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों को प्रशिक्षण की 7झ्र्प्रत्यक्षतः या विनिर्दिष्ट अभिकरणों के माध्यम से योजना बनाना और उसे संगठित करनाट;
(ख) कच्ची सामग्री और उपकरणों का 7झ्र्प्रत्यक्षतः या विनिर्दिष्ट अभिकरणों के माध्यम से भंडार तैयार करनाट और उन्हें हाथ से कते हुए सूत या खादी के उत्पादन या ग्रामोद्योग में लगे हुए या लगने के लिए संभावित व्यक्तियों को 7झ्र्ऐसी दरों से जो आयोग विनिश्चय करे, प्रदान करना या कच्ची सामग्री और उपकरणों के प्रदाय की व्यवस्था करनाट ;
(ग) कच्ची सामग्री या अर्ध परिसाधित माल के प्रसंस्करण के लिए तथा खादी या ग्रामोद्योगों के उपादों के उत्पादन और विपणन को अन्यथा सुकर बनाने के लिए सामान्य सेवा सुविधाओं के सर्जन को प्रोत्साहित करना और उसमें सहायता देना ;
(घ) खादी या ग्रामोद्योगों या दस्तकारी के उत्पादों के विक्रय और विपणन की अभिवृद्धि करना तथा इस प्रयोजन के लिए जहां भी आवश्यक और साध्य हो वहां, स्थापित विपणन अभिकरण से सम्पर्क स्थापित करना ;
(ङ) खादी और ग्रामोद्योग में प्रयुक्त प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को उत्पादकता में वृद्धि, नीरसता को दूर करने और अन्यथा उनकी स्पर्धा क्षमता बढ़ाने की दृष्टि से प्रोत्साहित और उसका संवर्धन करना जिसके अंतर्गत अपारम्परिक ऊर्जा और विद्युत शक्ति का प्रयोग भी है, और ऐसे अनुसंधान से प्राप्त प्रमुख परिणामों के प्रसार की व्यवस्था करना ;
(च) खादी या ग्रामोद्योग की समस्याओं का सीधे या अन्य अभिकरणों की मार्फत अध्ययन करना ;
(छ) खादी या ग्रामोद्योग के विकास और कार्यान्वयन में लगी हुए संस्थाओं या व्यक्तियों को झ्र्प्रत्यक्षतः या विनिर्दिष्ट अभिकरणों के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध करानाट तथा ऐसे माल का उत्पादन करने और ऐसी सेवाओं के प्रयोजन के लिए जिनकी आयोग की राय में अधिक मांग है, डिजाइन, प्रोटोटाइप और अन्य तकनीकी जानकारी का प्रदाय करके उनका मार्गदर्शन करना ;
(ज) 1झ्र्प्रत्यक्षतः या विनिर्दिष्ट अभिकरणों के माध्यम से ऐसे प्रयोग करना या आरंभिक परियोजनाएं आरंभ करनाट जो आयोग की राय में खादी और ग्रामोद्योग के विकास के लिए आवश्यक हैं ;
(झ) उपर्युक्त किसी या सभी विषयों को क्रियान्वित करने के प्रयोजन के लिए पृथक् संगठनों की स्थापना करना और उनका अनुरक्षण करना ;
(ञ) खादी के विनिर्माताओं में या ग्रामोद्योगों में लगे हुए व्यक्तियों में सहकारी प्रयोसों का संवर्धन करना और उन्हें प्रोत्साहित करना ;
(ट) क्वालिटी का असलीपन सुनिश्चित करना और उसका मानक स्थापित करना तथा यह सुनिश्चित करना कि खादी और ग्रामोद्योग के उत्पाद उक्त मानकों के अनुरूप हैं, जिसके अंतर्गत संबद्ध व्यक्तियों को प्रमाणपत्र या मान्यतापत्र जारी करना भी है ; और
(ठ) उपर्युक्त विषयों के आनुषंगिक किन्हीं अन्य विषयों को क्रियान्वित करना ।ट
झ्र्स्पष्टीकरणश्न्उपधारा (2) के खंड (क), खंड (ख), खंड (छ) और खंड (ज) के प्रयोजनों के लिए, विनिर्दिष्ट अभिकरणोंञ्ज् पद से ऐसे अभिकरण अभिप्रेत हैं जिन्हें केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।ट
16. निदेश देने की केन्द्रीय सरकार की शक्तिश्न्इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में आयोग ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा जो केन्द्रीय सरकार उसे दे ।
अध्याय 4
वित्त, लेखा, संपरीक्षा, और रिपोर्टें
17. आयोग को संदायश्न्केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् आयोग को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसी राशियां संदत्त करेगी जैसी इस अधिनियम के अधीन आयोग के कृत्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक समझी जाएं ।
झ्र्17क. आयोग का दान, अनुदान आदि ग्रहण करनाश्न्आयोग खादी के विकास झ्र्ग्रामोद्योग के विकास या खादी और ग्रामोद्योग के विकासट के प्रयोजन के लिए सरकार या किसी अन्य व्यक्ति से दान, अनुदान, संदान या उपकृतियां ग्रहण कर सकेगा ।ट
18. आयोग की निधियांश्न् झ्र्(1) आयोग की तीन पृथक् निधियां होंगी जो खादी निधि, ग्रामोद्योग निधि तथा साधारण और प्रकीर्ण निधि कहलाएंगी ।
(1क) (क) खादी से संबंधित प्रयोजनों के लिए आयोग द्वारा प्राप्त सभी धनराशियां खादी निधि में जमा की जाएंगी ;
(ख) ग्रामोद्योग और दस्तकारी उत्पादों से संबंधित प्रयोजनों के लिए आयोग द्वारा प्राप्त सभी धनराशियां ग्रामोद्योग निधि में जमा की जाएंगी ;
(ग) आयोग द्वारा प्राप्त सभी अन्य धनराशियां साधारण और प्रकीर्ण निधि में जमा की जाएंगी :
परंतु यदि उक्त निधियों में से किसी में उपलब्ध कोई रकम उस निधि की आवश्यकताओं से अधिक है और उक्त निधियों में से किसी अन्य में उपलब्ध रकम उस निधि की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए अपर्याप्त है, तो आयोग, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से प्रथम वर्णित निधि से उतनी अधिक रकम या उसका उतना भाग जितना आवश्यक हो, अन्य निधि में अंतरित कर सकेगा ।
स्पष्टीकरणश्न्उक्त निधियों में से किसी में रकम की संगणना करने के प्रयोजन के लिए, धारा 17क के अधीन प्राप्त रकम को हिसाब में नहीं लिया जाएगा ।
(1ख) उपधारा (1) के अधीन,श्न्
(क) खादी निधि में जमा धनराशि का खादी से संबंधित प्रयोजनों के लिए उपयोजन किया जाएगा ;
(ख) ग्रामोद्योग निधि में जमा धनराशि का ग्रामोद्योगों और दस्तकारी उत्पादों से संबंधित प्रयोजनों के लिए उपयोजन किया जाएगा ;
(ग) साधारण और प्रकीर्ण निधि में जमा धनराशि का खादी और ग्रामोद्योग से संबंधित प्रयोजनों के लिए और आयोग के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा अन्य पारिश्रमिक और आयोग के अन्य प्रशासनिक खर्चों की पूर्ति के लिए उपयोजन किया जाएगा ।ट
(2) केन्द्रीय सरकार द्वारा यथा अन्यथा निर्दिष्ट के सिवाय, ऐसी निधियों के सब धन भारतीय रिजर्व बैंक में या भारतीय रिजर्व बैंक के अभिकर्ताओं के पास या जहां न तो भारतीय रिजर्व बैंक का कोई कार्यालय हो और न भारतीय रिजर्व बैंक का कोई अभिकर्ता ही हो वहां सरकारी खजाने में जमा किए जाएंगे या ऐसी प्रतिभूतियों में विनिहित किए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित हों ।
19. आयोग की खर्च करने की शक्तिश्न्धारा 20 के उपबंधों के अध्यधीन, आयोग को इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत प्रयोजनों पर इतनी राशि खर्च करने की शक्ति होगी जितनी वह ठीक समझे :
परन्तु इस धारा की कोई बात आयोग को उन राज्यक्षेत्रों से, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, बाहर ऐसे किसी प्रयोजन पर इतनी धनराशि जितनी वह ठीक समझे केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से खर्च करने से रोकने वाली नहीं समझी जाएगी ।
झ्र्19क. स्थायी वित्त समितियांश्न्(1) धारा 18 में निर्दिष्ट झ्र्तीनों निधियोंट में से प्रत्येक के संबंध में एक स्थायी वित्त समिति, आयोग के सदस्यों में से विहित रीति में, गठित की जाएगी :
झ्र्परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी और वित्त सलाहकार धारा 18 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट तीन पृथक् निधियों में से प्रत्येक के संबंध में स्थायी वित्त समिति के पदेन सदस्य होंगे ।ट
(2) स्थायी वित्त समिति धारा 11 के अधीन आयोग की शक्तियों में से ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगी जो उसे आयोग द्वारा प्रत्यायोजित की जाएं ।
19ख. आयोग को देय धनराशियों की भूराजस्व की बकाया के रूप में वसूलीश्न्(1) किसी अभिव्यक्त या विवक्षित करार के अधीन या अन्यथा किसी भी प्रकार से आयोग को संदेय कोई राशि वैसी ही रीति से वसूल की जा सकेगी जैसी से भू-राजस्व की बकाया ।
(2) यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या कोई राशि आयोग को उपधारा (1) के अर्थ में संदेय है तो वह उस प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा गठित अधिकरण को निर्देशित किया जाएगा जो ऐसी जांच, जैसी वह ठीक समझे, करने के पश्चात् और उस व्यक्ति को जिस द्वारा वह राशि संदेय होनी अभिकथित है सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् प्रश्न का विनिश्चय करेगा ; और अधिकरण का विनिश्चय अंतिम होगा तथा किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी द्वारा प्रश्नास्पद नहीं किया जाएगा ।
(3) अधिकरण में एक व्यक्ति होगा जो आयोग से या उस व्यक्ति द्वारा जिस द्वारा वह राशि संदेय होनी अभिकथित है संबधित न हो ।
(4) अधिकरण के खर्चे आयोग द्वारा उठाए जाएंगे ।ट
20. बजटश्न्(1) आयोग प्रत्येक वर्ष प्रत्येक वर्ष ऐसी तारीख तक जो विहित की जाए अगले वित्तीय वर्ष के लिए विहित प्ररूप में झ्र्तीन पृथक् बजटट तैयार करेगा और केन्द्रीय सरकार को अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करेगा जो खादी बजट झ्र्ग्रामोद्योग बजट तथा साधारण और प्रकीर्ण बजटट कहलाएंगे और जिनमें उस वित्तीय वर्ष के दौरान झ्र्क्रमशः ग्रामोद्योगों और दस्तकारी उत्पादों तथा खादी और ग्रामोद्योगट के संबंध में प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शित होंगे ।
(2) उपधारा (3) और (4) के उपबन्धों के अध्यधीन आयोग द्वारा या उसकी ओर से किसी राशि का व्यय तब तक नहीं किया जाएगा जब तक वह व्यय केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित बजट में किसी विशिष्ट उपबंध के अंतर्गत न हो ।
झ्र्(3) आयोग, खादी बजट, ग्रामोद्योग बजट तथा साधारण और प्रकीर्ण बजट की संबंधित सीमाओं के अंदर एक व्यय शीर्ष से दूसरे को अथवा एक स्कीम के लिए किए गए उपबंध से दूसरे के संबंध में कोई पुनर्विनियोग मंजूर कर सकेगा, किंतु धारा 18 की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन रहते हुए किसी भी दशा में एक बजट से अन्य दोनों बजटों में से किसी को निधि का कोई पुनर्विनियोग नहीं किया जाएगा :
परंतु बजटों में से किसी में उधारञ्ज् शीर्ष से व्यय के किसी अन्य शीर्ष को और व्यय के किसी अन्य शीर्ष से उधारञ्ज् शीर्ष को कोई पुनर्विनियोग आयोग द्वारा केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना मंजूर नहीं किया जाएगा ।ट
(4) आयोग ऐसी सीमाओं के अंदर और ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जो विहित की जाएं, केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित बजट में उपबंधित सीमा से अधिक व्यय किसी व्यय के शीर्ष के अधीन या किसी विशिष्ट स्कीम के संबंध में वहां तक उपगत कर सकेगा जहां तक केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित झ्र्बजट मेंट संकलित रकम में वृद्धि न हो ।
21. धन उधार लेनाश्न्ऐसे नियमों के, जैसे इस निमित्त बनाए जाएं, अध्यधीन रहते हुए आयोग को, खादी निधि या ग्रामोद्योग निधि अथवा किसी अन्य आस्ति की प्रतिभूति पर, ऐसे किन्हीं प्रयोजनों के जिनके लिए ऐसी निधियां प्रस्तुत की जा सकती हैं, उधार लेने की शक्ति होगी ।
22. दायित्वों और बाध्यताओं का आयोग को अंतरणश्न्खादी या ग्रामोद्योग के विकास के संबंध में 1953 की जनवरी के 14वें दिन के पश्चात् और इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व किसी समय केन्द्रीय सरकार द्वारा उपगत सब दायित्व, उसके साथ की गई सब संविदाएं, और उसके द्वारा या उसकी ओर से किए जाने के लिए वचनबद्ध सब मामले या बातें, ऐसे प्रारंभ के पश्चात् आयोग द्वारा उपगत, उसके साथ की गई अथवा उसके द्वारा या उसकी ओर से किए जाने के लिए वचनबद्ध समझे जाएंगे ।
23. लेखा और संपरीक्षाश्न्(1) आयोग उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, जिसके अंतर्गत लाभ और हानि लेखा तथा तुलनापत्र भी हैं, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जैसा केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के परामर्श से विहित किया जाए ।
(2) आयोग के लेखे भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अंतरालों पर, जो उसके द्वारा विहित किए जाएं, संपरीक्षित किए जाएंगे ।
(3) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के तथा आयोग के लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के ऐसी संपरीक्षा के संबंध में वे ही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया उसे बहियों, लेखाओं, संबद्ध वाउचरों तथा अन्य दस्तावेजों और कागजों के पेश किए जाने की मांग करने और आयोग के कार्यालयों में से किसी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथा प्रमाणित आयोग के लेखे तद्विषक संपरीक्षा रिपोर्ट सहित केन्द्रीय सरकार को हर वर्ष भेजे जाएंगे, और वह सरकार उन्हें संसद् के हर एक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
24. विवरणियां और रिपोर्टेंश्न्(1) आयोग ऐसे समय पर और ऐसे प्ररूप और रीति में जैसी विहित की जाए या जैसी केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, खादी और ग्रामोद्योगों की अभिवृद्धि और विकास के लिए किसी प्रस्थापित या विद्यमान कार्यक्रम के बारे में ऐसी विवरणियां और विवरण तथा ऐसी विशिष्टियां जैसी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षित करे, केन्द्रीय सरकार को देगा ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आयोग प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् यथासंभव शीघ्र ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख से पूर्व जो विहित की जाए केन्द्रीय सरकार को एक रिपोर्ट देगा जिसमें पूर्व वित्तीय वर्ष के दौरान उसके कार्यकलापों, नीति और कार्यक्रम का सही और पूर्ण वृत्तांत दिया होगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त रिपोर्ट की एक प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
झ्र्24क. आय-कर संदाय करने के दायित्व से छूटश्न्आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) में किसी बात के होते हुए भी आयोग अपनी आय, लाभ या अभिलाभ पर कोई आय-कर संदाय करने का दायी नहीं होगा ।ट
25. आयोग का विघटनश्न्(1) केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि उस तारीख से जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए आयोग विघटित कर दिया जाएगा और तब आयोग तद्नुसार विघटित हुआ समझा जाएगा ।
(2) उक्त तारीख और उससेश्न्
(क) सब सम्पत्तियां और निधियां जो, उक्त तारीख से ठीक पहले, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आयोग के कब्जे में थीं केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएंगी ; और
(ख) सब सदस्य आयोग के सदस्यों के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे ।
झ्र्(3) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना के जारी होने के पश्चात् किसी समय, धारा 4 के उपबंधों के अनुसार आयोग को पुनःस्थापित कर सकेगी और आयोग के पुनःस्थापन की तारीख से ही ऐसी संपत्तियां और निधियां, जो उपधारा (2) के खंड (क) के अधीन पहले केन्द्रीय सरकार में निहित थीं, इस प्रकार पुनःस्थापित आयोग में निहित हो जाएंगी ।ट
26. नियम बनाने की शक्तिश्न्(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए नियम शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :श्न्
झ्र्(क) आयोग के सदस्यों में आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति और आयोग के अध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, वित्तीय सलाहकार और अन्य सदस्यों की सेवा के निबंधन और शर्तें, जिनके अंतर्गत उनको दिए जाने वाले वेतन और भत्ते तथा जब वे दौरे पर हों तब उनके द्वारा लिए जाने वाले यात्रा और दैनिक भत्ते भी हैं ;ट
झ्र्(कक) धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियां और निर्वहन किए जाने वाले कृत्य;
(कख) ऐसे वित्तीय विषय जिनके संबंध में वित्त सलाहकार धारा 5क के अधीन भारसाधक होगा ;
(कग) धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन बोर्ड के अधिवेशनों में कारबार का संव्यवहार ;ट
(ख) ॥। किसी ऐसे सदस्य को, जो किसी निरर्हता के अध्यधीन है या हो जाता है, हटाने में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया ;
(ग) बोर्ड के सदस्यों की पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें, कृत्यों के निर्वहन में उनके द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया तथा उनमें आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति ;
। । । । । ।
झ्र्(घघ) धारा 19क की उपधारा (1) के अधीन स्थायी वित्त समितियों का गठन;
(घघघ) धारा 19ख की उपधारा (2) के अधीन अधिकरण को निर्देशित प्रश्नों का विनिश्चय करने में उसके द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया ;ट
(ङ) वह तारीख जिस तक और वह प्ररूप जिसमें धारा 20 की उपधारा (1) के अधीन प्रतिवर्ष बजट तैयार और प्रस्तुत किया जाएगा ;
(च) निधियों को आयोग के कब्जे में रखने के लिए अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया ;
(छ) धन उधार लेने या उधार देने में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया और अनुपालित की जाने वाली शर्तें ;
(ज) वे शर्तें जिनके अध्यधीन और वह ढंग जिसमें आयोग द्वारा या उसकी ओर से संविदाएं की जा सकेंगी ;
(झ) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन आयोग के लेखा रखे जाएंगे ;
(ञ) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 24 के अधीन विवरणियां, रिपोर्टें और विवरण दिए जाएंगे ; और
(ट) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए ।
। । । । । ।
27. विनियम बनाने की शक्तिश्न्(1) आयोग, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में अपने को समर्थ बनाने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे विनियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी क लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :श्न्
(क) झ्र्मुख्य कार्यपालक अधिकारीट और आयोग के वित्तीय सलाहकार से भिन्न आयोग के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्ति और सेवा के निबंधन और शर्तें और वेतनमान जिनके अंतर्गत इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए ऐसे अधिकारियों और सेवकों द्वारा की गई यात्राओं के संबंध में यात्रा और दैनिक भत्तों का संदाय भी है ;
(ख) आयोग के अधिवेशनों का समय और स्थान, ऐसे अधिवेशनों में कार्य संपादन के बारे में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया तथा अधिवेशन में ऐसे कार्य संपादन के लिए आवश्यक गणपूर्ति ;
झ्र्(खक) धारा 12क की उपधारा (2) के अधीन आंचलिक समिति के अधिवेशनों में कारबार का संव्यवहार ;ट
झ्र्(खख) स्थायी वित्त समिति के अधिवेशन बुलाना और करना, और कारबार का संचालन ;ट
(ग) ॥। आयोग के किसी कर्मचारी की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रत्यायोजन ;
(घ) आयोग और बोर्ड के अधिवेशनों के कार्यवृ्त्त रखना और उनकी प्रतियों को केन्द्रीय सरकार को भेजना ;
(च) आयोग के चालू व्यय के लिए अपेक्षित धनराशियों की अभिरक्षा और उन धनराशियों का विनिधान जो ऐसे अपेक्षित न हों ;
(छ) लेखाओं को रखना ; और
(ज) वह प्ररूप जिसमें खादी और ग्रामोद्योगों के उत्पादों के असलीपन के प्रमाणपत्र आयोग द्वारा दिए जा सकेंगे झ्र्और उनके संबंध में प्रभार्य फीसेंट ।
झ्र्(2क) इस धारा के अधीन आयोग के कर्मचारियों की सेवा के निबंधनों और शर्तों की और उनके वेतनमान तथा उन्हें दी जाने वाली पेंशन की बाबत विनियम बनाए जाने की शक्ति में उस तारीख से, जो इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्वतर न हो, ऐसे विनियमों या उनमें से किसी को भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति भी सम्मिलित होगी किंतु किसी ऐसे विनियम को भूतलक्षी प्रभाव नहीं दिया जाएगा जिससे किसी ऐसे व्यक्ति के, जिसको ऐसा विनियम लागू हो, हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े ।ट
(3) केन्द्रीय सरकार किसी ऐसे विनियम को जिस उसने मंजूर किया हो शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विखंडित कर सकेगी और तब वह विनियम प्रभावी नहीं होगा ।
झ्र्28. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जानाश्न्इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पङेगा ।ट
अनुसूची
झ्र्धारा 2(ज) देखिएट
1. मधुमक्खी पालन ।
2. घरेलू दियासलाई उद्योग ।
3. मिट्टी के बरतनों का कुटीर उद्योग ।
4. घरेलू साबुन उद्योग ।
5. खालों और चमड़ों को उतारना, संसाधित करना और कमाना तथा उससे संबंधित उद्योग और कुटीर चर्म उद्योग ।
6. घानी तेल उद्योग ।
7. हाथ से बना कागज ।
8. गन्ना-गुड़ और खंडसारी का विनिर्माण ।
9. ताड़गुड़ बनाना और अन्य ताड़-उत्पादन उद्योग ।
10. अनाज और दालों का प्रसंस्करण ।
11. चमड़ा विनिर्माण ।
12. ओषधीन प्रयोजनों के लिए जंगली पौधों और फलों का संग्रहण ।
13. फल प्रंसस्करण और फल संरक्षण ।
14. बांस और बेंत कर्म ।
15. लोहारकर्म
16. बढ़ई का काम ।
17. कयर से भिन्न रेशा ।
18. गोबर और अन्य अवशिष्ट उत्पादों से (जैसे मृत पशुओं का मांस, विष्ठा आदि) खाद और मिथैन गैस का विनिर्माण और प्रयोग ।
19. चूना विनिर्माण उद्योग ।
20. अल्मूनियम के घरेलू बरतनों का विनिर्माण ।
21. गौंद राल का विनिर्माण ।
22. कत्था विनिर्माण ।
23. लोक वस्त्र कपड़े का विनिर्माण ।

