गन्दी बस्ती क्षेत्र (सुधार तथा उन्मूलन) अधिनियम, 1956
(1956 का अधिनियम संख्यांक 96)
[29 दिसम्बर 1956]
कतिपय संघ राज्यक्षेत्रों में गन्दी बस्ती क्षेत्रों में सुधार तथा
उन्मूलन के लिए और ऐसे क्षेत्रों में किराएदारों
की बेदखली से संरक्षण के लिए
उपबन्ध करने हेतु
अधिनियम
भारत गणराज्य के सातवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम गन्दी बस्ती क्षेत्र (सुधार तथा उन्मूलन) अधिनियम, 1956 है ।
(2) इसका विस्तार अंदमान तथा निकोबार द्वीप समूह तथा लक्कदीव, मिनिकोय और अमीनदीवी द्वीव के संघ राज्यक्षेत्रों के सिवाय सभी संघ राज्यक्षेत्रों पर है ।
(3) यह किसी संघ राज्यक्षेत्र में उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ; और विभिन्न संघ राज्यक्षेत्रों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकती हैं ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “प्रशासक" से किसी संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है ;
(ख) “इमारत" के अन्तर्गत इस रूप में परिभाषित कोई संरचना या निर्माण किसी इमारत का कोई भाग है, किन्तु इसमें किसी इमारत में समाविष्ट संयंत्र या मशीनरी नहीं है ;
(ग) “सक्षम प्राधिकरण" से ऐसा अधिकारी या प्राधिकरण अभिप्रेत है, जिसे प्रशासक, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सक्षम प्राधिकरण के रूप में नियुक्त करे ;
(घ) किसी इमारत के सम्बन्ध में निर्माण" के अन्तर्गत उसका विस्तार, परिवर्तन या पुनर्निर्माण है ;
[(ङ) “भूमि" के अन्तर्गत भूमि से उद्भूत फायदे और भूमि से संलग्न या भूमि से स्थायी रूप से जकड़ी हुई वस्तुएं हैं ;
(च) “अधिष्ठाता" के अन्तर्गत निम्नलिखित हैं :-
(क) कोई ऐसा व्यक्ति जो तत्समय स्वामी को ऐसी भूमि या इमारत का किराया या किराए का प्रभाग, जिसकी बाबत ऐसे किराए का संदाय किया जाता है या संदेय है, संदाय करता है या संदाय करने का दायी है ;
(ख) अपनी भूमि या इमारत का अधिभोग करने वाला या अन्यथा उसका उपयोग करने वाला स्वामी ;
(ग) किसी भूमि या इमारत का बिना-किराए वाला किराएदार ;
(घ) किसी भूमि या इमारत का अधिभोग करने वाला अनुज्ञप्तिधारी ; और
(ङ) कोई ऐसा व्यक्ति जो स्वामी को किसी भूमि या इमारत के उपयोग या अधिभोग के लिए नुकसानी देने के लिए दायी है ;]
(छ) “स्वामी" के अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति है जो किसी इमारत या भूमि का किराया, चाहे अपनी ओर से या अपनी तथा औरों की ओर से या अभिकर्ता या न्यासी के रूप में प्राप्त करता है या प्राप्त करने का हकदार है, या जो, यदि वह इमारत या भूमि किसी किराएदार को किराए पर दी गई होती तो इस प्रकार किराया प्राप्त करता या उसे प्राप्त करने का हकदार होता ;
(ज) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(झ) “गन्दी बस्ती उन्मूलन" से इमारतों को तोड़ कर या हटाकर किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र का उन्मूलन अभिप्रेत है ; और
[(ञ) किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में किसी इमारत के सम्बन्ध में सुधार-संकर्म" के अन्तर्गत निम्नलिखित संकर्मों में से किसी एक या अधिक का निष्पादन है, अर्थात् :-
(i) आवश्यक मरम्मत ;
(ii) संरचनात्मक परिवर्तन ;
(iii) बत्तियों, पानी के नलों तथा नहाने के स्थानों की व्यवस्था ;
(iv) आवृत्त या अनावृत्त नालियों का निर्माण ;
(v) शौचालय की व्यवस्था, जिसके अन्तर्गत सूखे शौचालयों को पानी वाले शौचालयों में परिवर्तन करना भी है ;
(vi) अतिरिक्त या सुधार किए गए फिक्सचरों या फिटिंगों की व्यवस्था ;
(vii) आंगन खोलना या उसमें फर्श लगाना ;
(viii) कूड़ा हटाना ; और
(ix) कोई अन्य संकर्म, जिसमें किसी ऐसी इमारत या उसके किसी भाग को तोड़ना है, जो सक्षम प्राधिकरण की राय में उपर्युक्त विनिर्दिष्ट संकर्मों में से किसी के निष्पादन के लिए आवश्यक है ।]
अध्याय 2
गन्दी बस्ती क्षेत्र
3. गन्दी बस्ती क्षेत्र की घोषणा-(1) जहां सक्षम प्राधिकरण या उसके किन्हीं अधिकारियों की रिपोर्ट पर या उसके पास की अन्य जानकारी पर किसी क्षेत्र की बाबत यह समाधान हो जाता है कि उस क्षेत्र की इमारतें-
(क) किसी भी बाबत मानव निवास के लिए अयोग्य हैं, या
(ख) टूटफूट, भीड़, ऐसी इमारतों के दोषपूर्ण आयोजन और डिजाइन सड़कों की संकीर्णता या दोषपूर्ण आयोजन, संवातन, प्रकाश, सफाई की सुविधाओं के अभाव या इन कारणों में से मिले-जुले कारणों से सुरक्षा, स्वास्थ्य या सदाचार के लिए अपायकर हैं,
वहां वह, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे क्षेत्र को गन्दी बस्ती क्षेत्र घोषित कर सकता है ।
(2) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए कोई इमारत मानव निवास के लिए अयोग्य है या नहीं इसका अवधारण करने में निम्नलिखित बातों के बारे में उसकी दशा पर ध्यान दिया जाएगा, अर्थात् :-
(क) मरम्मत ;
(ख) मजबूती ;
(ग) नमी से मुक्तता ;
(घ) प्राकृतिक प्रकाश तथा वायु ;
(ङ) जल प्रदाय ;
(च) जल निकास तथा सफाई की सुविधाएं ;
(छ) खाद्य के भण्डारकरण, बनाने तथा पकाने की और अपशिष्ट जल के निकालने की सुविधाएं,
और वह इमारत केवल तभी यथापूर्वोक्त अयोग्य समझी जाएगी यदि वह उक्त बातों में से एक या अधिक बातों में वहां तक सदोष है कि उस दशा में वह अधिभोग के लिए उचित रूप से उपयुक्त नहीं है ।
अध्याय 3
गन्दी बस्ती सुधार
4. मानव निवास के लिए अयोग्य इमारतों के सुधार की अपेक्षा करने की सक्षम प्राधिकरण की शक्ति-(1) जहां समक्ष प्राधिकरण का, उसके किन्हीं अधिकारियों की रिपोर्ट पर या उसके पास की अन्य जानकारी पर, यह समाधान हो जाता है कि किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में कोई इमारत, किसी भी बाबत मानव निवास के लिए आयोग्य है, तो वह, सिवाय तब जब उसकी राय में वह इमारत समुचित व्यय पर इस प्रकार योग्य बनाए जाने के सक्षम नहीं है, इमारत के स्वामी पर ऐसी सूचना तामील कर सकता है कि सूचना में विनिर्दिष्ट सुधार-संकर्मों को, उतने समय के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, और तीस दिन से कम न हो, निष्पादित करे और प्राधिकरण की राय में ऐसे संकर्मों से इमारत मानव निवास के योग्य हो जाएगी :
[परन्तु जहां इमारत का स्वामी, जिस भूमि पर वह इमारत खड़ी है उसके स्वामी से भिन्न है और जहां निष्पादन के लिए अपेक्षित सुधार-संकर्म, पानी के नल, नहाने के स्थान, आवृत्त या अनावृत्त नालियों का निर्माण, जलवाहित शौचालय की व्यवस्था या कूड़ा हटाने की व्यवस्था से संबंधित है और ऐसे संकर्म इमारत के बाहर निष्पादित किए जाने वाले हैं, वहां सूचना की तामील भूमि के स्वामी पर की जाएगी ।]
(2) इस धारा के अधीन स्वामी पर सूचना की तामील करने के अतिरिक्त, सक्षम प्राधिकरण सूचना की प्रति की तामील किसी ऐसे अन्य व्यक्ति पर कर सकता है जिसका इमारत में 1[या जिस पर वह इमारत खड़ी है उस भूमि में], चाहे पट्टाधारी या बंधकदार के रूप में या अन्यथा, कोई हित है ।
(3) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए यह अवधारित करने के लिए कि क्या कोई इमारत समुचित व्यय पर मानव निवास के लिए योग्य बनाई जा सकती है, उसे इस प्रकार योग्य बनाने के लिए आवश्यक संकर्म की प्राक्कलित लागत तथा संकर्म पूरा होने पर उस इमारत के प्राक्कलित मूल्य पर ध्यान दिया जाएगा ।
5. सुधार-संकर्म के निष्पादन की अपेक्षा की सूचना का प्रवर्तन-(1) यदि, यथास्थिति, इमारत के स्वामी से, [या जिस पर वह इमारत खड़ी है, उस भूमि के स्वामी से] सुधार-संकर्म निष्पादित करने की अपेक्षा की धारा 4 के अधीन सूचना की तामील का अनुपालन नहीं किया जाता, तो सक्षम प्राधिकरण सूचना में विनिर्दिष्ट समय की समाप्ति के पश्चात्, सूचना में अपेक्षित संकर्म स्वयं कर सकता है ।
(2) इस धारा के अधीन सक्षम प्राधिकरण द्वारा उपगत सभी व्यय, ऐसी दर पर ब्याज सहित, जैसी केन्द्रीय सरकार आदेश द्वारा नियत करे, उस तारीख से जिससे व्यय के लिए मांग की गई है, और उसके संदाय तक, यथास्थिति, इमारत के, या जिस भूमि पर वह इमारत खड़ी है उस भूमि के स्वामी से सक्षम प्राधिकरण द्वारा भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल किए सकते हैं :
परन्तु यदि वह स्वामी यह साबित करता है कि-
(क) किसी अन्य व्यक्ति के लिए वह केवल अभिकर्ता या न्यासी के रूप में किराया प्राप्त करता है ; और
(ख) उसके पास उस अन्य व्यक्ति की ओर से प्राधिकरण की संपूर्ण मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है,
तो उसका दायित्व ऐसे धन की कुल राशि तक सीमित होगा जो यथापूर्वोक्त उसके हाथ में है ।
। । । ।
6. सुधार, आदि के संकर्मों को बनाए रखने के व्यय इमारत के अधिष्ठाताओं से वसूलीय-जहां सुधार-संकर्म किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र की किसी इमारत के संबंध में, धारा 4 और 5 के उपबंधों के अनुसरण में सुधार-संकर्म निष्पादित किए गए हैं, वहां ऐसे सुधार-संकर्मों को बनाए रखने या ऐसे संकर्मों द्वारा संभवतः बनाई गई प्रसुविधाओं तथा सुविधाओं के उपभोग के संबंध में, यथास्थिति, सक्षम प्राधिकरण या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उपगत व्यय इमारत के अधिष्ठाता या अधिष्ठाताओं से भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूलीय होंगे ।
[6क. गन्दी बस्ती क्षेत्रों में इमारत, आदि पर निर्बन्धन-(1) सक्षम प्राधिकरण, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकता है कि कोई भी व्यक्ति किसी गंदी बस्ती क्षेत्र में सक्षम प्राधिकरण की लिखित पूर्व मंजूरी के बिना किसी भी इमारत का निर्माण नहीं करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना का उसकी तारीख से दो वर्ष की समाप्ति पर, ऐसी समाप्ति के पूर्व की गई या छोड़ दी गई बातों के सिवाय, प्रभावी होना समाप्त हो जाएगा ।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट मंजूरी प्राप्त करने की इच्छा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति सक्षम प्राधिकरण को ऐसे प्ररूप में, तथा उस इमारत के निर्माण के सम्बन्ध में, जिससे आवेदन संबंधित है, ऐसी जानकारी समाविष्ट करते हुए, जो विहित की जाए, लिखित आवेदन करेगा ।
(4) ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर, सक्षम प्राधिकरण ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी वह आवश्यक समझे, लिखित आदेश द्वारा,-
(क) ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, या तो मंजूरी देगा ; या
(ख) ऐसी मंजूरी देने से इंकार करेगा :
परन्तु ऐसी मंजूरी देने से इन्कार करने का आदेश करने के पूर्व आवेदक को यह हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर दिया जाएगा कि मंजूरी देने से इंकार क्यों नहीं किया जाए ।
(5) उपधारा (1) की कोई भी बात, निम्नलिखित को लागू नहीं होगी-
(क) धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन किसी सूचना द्वारा या धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन दिए गए किसी वचन के अनुसरण में निष्पादित किए जाने के लिए अपेक्षित कोई सुधार-संकर्म, या
(ख) किसी ऐसे क्षेत्र में किसी इमारत का निर्माण, जिसकी बाबत धारा 10 के अधीन गंदी बस्ती उन्मूलन आदेश दिया गया है ।]
7. मानव निवास के लिए अयोग्य इमारतों को तोड़ने का आदेश देने की सक्षम प्राधिकरण की शक्ति-(1) जहां सक्षम प्राधिकरण का, उसके किन्हीं अधिकारियों को रिपोर्ट पर या उसके पास की अन्य जानकारी पर, यह समाधान हो जाता है कि किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में कोई इमारत मानव निवास के लिए अयोग्य है और समुचित व्यय करने पर भी इस योग्य नहीं बनाई जा सकती वहां वह इमारत के स्वामी पर और इमारत में चाहे पट्टेदार या बंधकदार के रूप में या अन्यथा हित रखने वाले किसी अन्य व्यक्ति पर, वह ऐसे समय के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, यह हेतुक दर्शित करने की सूचना को तामील करेगा कि इमारत को तोड़ने का आदेश क्यों न दिया जाए ।
(2) यदि उन व्यक्तियों में से कोई व्यक्ति, जिन पर उपधारा (1) के अधीन सूचना की तामील की गई है, उसके अनुसरण में सक्षम प्राधिकरण के समक्ष उपस्थित होता है और प्राधिकरण को यह वचन देता है कि वह प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर इमारत के संबंध में ऐसे सुधार संकर्म निष्पादित करेगा जो प्राधिकरण की राय में इमारत को मानव निवास के लिए योग्य बना देंगे, या कि वह तब तक मानव निवास के लिए उपयोग में नहीं लाई जाएगी जब तक प्राधिकरण, यह समाधान होने पर कि वह उस प्रयोजन के योग्य बना दी गई है, वचनबद्धता को रद्द नहीं करता, तो प्राधिकरण इमारत को तोड़ने का कोई आदेश नहीं देगा ।
(3) यदि उपधारा (2) में यथावर्णित कोई ऐसा वचन नहीं दिया जाता है या यदि किसी ऐसे मामले में, जहां कोई ऐसा वचन दिया गया है, उस वचन से संबंधित कोई सुधार-संकर्म विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर कार्यान्वित नहीं किया जाता है या वचन के निबंधनों के उल्लंघन में किसी समय इमारत का उपयोग किया जाता है, तो सक्षम प्राधिकरण यह अपेक्षा करते हुए इमारत के तोड़ डालने का तत्काल आदेश देगा कि वह इमारत आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, जो आदेश की तारीख से तीस दिन से कम नहीं होगी, खाली की जाए, और वह उस अवधि की समाप्ति के पश्चात् छह सप्ताह के भीतर तोड़ डाली जाए ।
8. तोड़ने का आदेश देने की दशा में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया-(1) जहां धारा 7 के अधीन किसी इमारत को तोड़ने के लिए आदेश दिया गया है, वहां इमारत का स्वामी या उसमें हित रखने वाला कोई अन्य व्यक्ति उस इमारत को, उस आदेश द्वारा उस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर तोड़ डालेगा, और यदि उस समय के भीतर इमारत तोड़ी नहीं जाती है तो सक्षम प्राधिकरण इमारत में प्रवेश करेगा और उसे तोड़ देगा, और उसकी सामग्री का विक्रय करेगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन सक्षम प्राधिकरण द्वारा उपगत कोई व्यय, यदि इमारत की सामग्री के विक्रय के आगमों में से पूरे न हो जाएं, तो इमारत के स्वामी या उसमें हित रखने वाले किसी अन्य व्यक्ति से भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूलीय होंगे ।
अध्याय 4
गन्दी बस्ती उन्मूलन और पुनर्विकास
9. किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र को उन्मूलन क्षेत्र के रूप में घोषित करने की शक्ति-(1) जहां सक्षम प्राधिकरण का, उसके किन्हीं अधिकारियों की रिपोर्ट पर या उसके पास की अन्य जानकारी पर, किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र के सम्बन्ध में यह समाधान हो जाता है कि उस क्षेत्र की दशायों में कार्रवाई करने की सबसे अधिक समाधानकारक पद्धति उस क्षेत्र में सभी इमारतों को तोड़ डालना है, तो वहां प्राधिकरण, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, उस क्षेत्र को उन्मूलन क्षेत्र के रूप में घोषित करेगा, अर्थात् वह क्षेत्र जिसमें से इस अधिनियम के प्रयोजनों के अनुसरण में सभी इमारतों को गिराया जाना है :
परन्तु उस क्षेत्र में कोई ऐसी इमारत जो मानव निवास के लिए आयोग्य नहीं है या स्वास्थ्य के लिए खतरनाक या हानिकर नहीं है उस घोषणा से अपवर्जित की जा सकती है यदि सक्षम प्राधिकरण ऐसा आवश्यक समझे ।
(2) सक्षम प्राधिकरण प्रशासक को इस धारा के अधीन घोषणा की प्रति उन व्यक्तियों की संख्या के विवरण सहित तत्काल भेजेगा जो विवरण में विनिर्दिष्ट तारीख को उन्मूलन क्षेत्र में समाविष्ट इमारतों के अधिष्ठाता थे ।
10. गंदी बस्ती उन्मूलन आदेश-(1) सक्षम प्राधिकरण किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र को उन्मूलन क्षेत्र घोषित करने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र उस क्षेत्र के संबंध में गंदी बस्ती उन्मूलन का आदेश देगा जिसमें, उसमें विनिर्दिष्ट इमारतों में से प्रत्येक को तोड़ डालने तथा प्रत्येक ऐसी इमारत को ऐसे समय के भीतर खाली करने की अपेक्षा करने का आदेश होगा, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए और आदेश के पुष्टिकरण के लिए आदेश प्रशासक को प्रस्तुत करेगा ।
(2) प्रशासक आदेश को या तो संपूर्णतः या ऐसे उपांतरणों के अधीन रहते हुए, जैसे वह आवश्यक समझे, पुष्ट करेगा या आदेश को नामंजूर कर सकेगा ।
(3) यदि प्रशासक आदेश की पुष्टि करता है तो ऐसे पुष्टिकरण की तारीख से आदेश प्रवृत्त होगा ।
(4) जब गन्दी बस्ती उन्मूलन आदेश प्रवृत्त हो जाने पर उन इमारतों के स्वामी, जिन्हें वह आदेश लागू होता है, इमारतों को उस तारीख से, जब आदेश द्वारा इमारतें खाली की जाने की अपेक्षा की जाती है, छह सप्ताह की समाप्ति के पूर्व या ऐसी दीर्घतर अवधि की समाप्ति के पूर्व, जो उन परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकरण उचित समझे, तोड़ डालेंगे ।
(5) यदि वे इमारतें, उपधारा (4) में वर्णित अवधि की समाप्ति के पूर्व तोड़ नहीं डाली जाती हैं, तो सक्षम प्राधिकरण उन इमारतों में प्रवेश करेगा तथा उन्हें तोड़ डालेगा और उनकी सामग्री का विक्रय करेगा ।
(6) सक्षम प्राधिकरण द्वारा किसी इमारत को तोड़ने में उपगत कोई व्यय, यदि उसकी सामग्री के विक्रय के आगमों से पूरा न हो जाए, तो सक्षम प्राधिकरण द्वारा भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूलीय होगा ।
[(7) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां गन्दी बस्ती उन्मूलन आदेश प्रवृत्त हो वहां, ऐसी भूमि का स्वामी, जिसे वह आदेश लागू होता है, सक्षम प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित नक्शों के अनुसार और, यदि कोई हो, तो ऐसे निर्बन्धनों तथा शर्तों के अधीन रहते हुए (जिसके अन्तर्गत यह शर्त भी है कि कितने समय में पुनर्विकास पूरा किया जाएगा), जिन्हें अधिरोपित करना प्राधिकरण ठीक समझे, भूमि का पुनर्विकास कर सकता है :
परन्तु कोई ऐसा स्वामी, जो अपनी भूमि के उपयोग पर इस प्रकार अधिरोपित किसी ऐसे निर्बन्धन या शर्त द्वारा या किसी ऐसे निर्बन्धन या शर्त को रद्द करने या उपांतरित करने के सक्षम प्राधिकरण के पश्चात्वर्ती इंकार द्वारा व्यथित है, ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, प्रशासक को अपील कर सकता है और प्रशासक उस मामले में ऐसा आदेश देगा जैसा वह ठीक समझे और उसका विनिश्चय अंतिम होगा ।]
(8) उपधारा (7) के अधीन अनुमोदित नक्शों या अधिरोपित किसी निर्बन्धन या शर्त के उल्लंघन में कोई भी व्यक्ति किसी संकर्म का प्रारम्भ नहीं करेगा या प्रारम्भ नहीं करवाएगा ।
[11. उन्मूलन क्षेत्र का पुनर्विकास करने की सक्षम प्राधिकरण की शक्ति-(1) सक्षम प्राधिकरण, धारा 10 की उपधारा (7) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, गन्दी बस्ती उन्मूलन आदेश के अनुसार भूमि से इमारतों का उन्मूलन किए जाने के पश्चात् किन्तु स्वामी द्वारा उस भूमि के पुनर्विकास के संकर्म के प्रारम्भ होने के पूर्व, आदेश द्वारा, उस भूमि के पुनर्विकास का विनिश्चय कर सकता है यदि प्राधिकरण का यह समाधान हो जाए कि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है ।
(2) जहां किसी गन्दी बस्ती उन्मूलन आदेश के अनुसार भूमि से इमारतों का उन्मूलन कर दिया गया है, वहां सक्षम प्राधिकरण का यदि यह समाधान हो जाता है कि धारा 10 की उपधारा (7) के अधीन प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित नक्शों या अधिरोपित किन्हीं निर्बन्धनों या शर्तों के उल्लंघन में स्वामी द्वारा भूमि का पुनर्विकास किया गया है या किया जा रहा है या उस समय के भीतर, यदि कोई हो, जो ऐसी शर्तों के अधीन विनिर्दिष्ट है, उसका पुनर्विकास नहीं हुआ है, तो वह आदेश द्वारा भूमि के पुनर्विकास का विनिश्चय कर सकता है ;
परन्तु ऐसा आदेश पारित करने के पूर्व, स्वामी को यह हेतुक दर्शित करने के लिए समुचित अवसर दिया जाएगा कि आदेश क्यों न पारित किया जाए ।]
अध्याय 5
भूमि का अर्जन
12. भूमि अर्जन करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) जहां सक्षम प्राधिकरण के किसी अभ्यावेदन पर केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि प्राधिकरण को किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में किसी इमारत के संबंध में किसी सुधार-संकर्म का निष्पादन करने हेतु सक्षम बनाने के लिए या किसी उन्मूलन क्षेत्र का पुनर्विकास करने के लिए यह आवश्यक है कि किसी ऐसे क्षेत्र के भीतर की, उससे संलग्न या उसके चारों ओर की भूमि का अर्जन किया जाना आवश्यक है वहां, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में इस प्रभाव की सूचना प्रकाशित करके कि केन्द्रीय सरकार ने इस धारा के अनुसरण में उस भूमि को अर्जित करने का विनिश्चय किया है, भूमि का अर्जन कर सकती है ;
परन्तु ऐसी सूचना के प्रकाशन के पूर्व केन्द्रीय सरकार ऐसी भूमि के स्वामी से या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति से, जो केन्द्रीय सरकार की राय में ऐसी भूमि में हितबद्ध हो, यह हेतुक दर्शित करने की मांग कर सकती है कि उसका अर्जन क्यों न किया जाए और स्वामी द्वारा या भूमि में हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दिखाए गए कारण पर विचार करने के पश्चात् केन्द्रीय सरकार ऐसे आदेश पारित कर सकती है जैसे वह ठीक समझे ।
(2) जब यथापूर्वोक्त सूचना राजपत्र में प्रकाशित की गई हो, तब वह भूमि ऐसी तारीख पर और तारीख से, जब सूचना इस प्रकार प्रकाशित की गई हो, सभी विल्लंगमों से मुक्त, आत्यंतिक रूप से, केन्द्रीय सरकार में निहित होगी ।
13. केन्द्रीय सरकार द्वारा अर्जित भूमि का सक्षम प्राधिकरण को उपलभ्य कराना-जहां किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में या उन्मूलन क्षेत्र में किसी भूमि का इस अधिनियम के अधीन अर्जन किया गया है, वहां केन्द्रीय सरकार भूमि को सक्षम प्राधिकरण को कोई सुधार-संकर्म निष्पादित करने या तोड़ डालने के किसी आदेश को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए या पुनर्विकास करने के प्रयोजन के लिए उपलभ्य करेगी :
[परन्तु जहां सक्षम प्राधिकरण के किसी अभ्यावेदन पर केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाए कि कोई ऐसी भूमि या उसका कोई भाग इस धारा में वर्णित प्रयोजनों के लिए उपयुक्त नहीं है, वहां केन्द्रीय सरकार भूमि का उपयोग कर सकती है या उसे ऐसे अन्य लोक प्रयोजन या प्रयोजनों के हेतु उपयोग करने के लिए अनुज्ञात कर सकती है जैसा वह ठीक समझे ।]
14. प्रतिकर प्राप्त करने का अधिकार-इस अधिनियम के अधीन अर्जित किसी भूमि में कोई हित रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति केन्द्रीय सरकार से ऐसा प्रतिकर प्राप्त करने का हकदार होगा जैसा इस अधिनियम में इसके पश्चात् उपबंधित किया गया है ।
15. प्रतिकर के अवधारण के लिए आधार-(1) इस अधिनियम के अधीन अर्जित किसी भूमि की बाबत प्रतिकर के रूप में संदेय राशि धारा 12 में निर्दिष्ट सूचना के प्रकाशन की तारीख के ठीक पूर्वगामी पांच आनुक्रमिक वर्षों की अवधि के दौरान ऐसी भूमि से वास्तविक रूप से व्युत्पन्न शुद्ध औसत मासिक आय के साठ गुना राशि के बराबर होगी ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट शुद्ध औसत मासिक आय अनुसूची में उपबन्धित रीति से तथा सिद्धान्तों के अनुसार संगणित की जाएगी ।
(3) सक्षम प्राधिकरण, विहित रीति से जांच करने के पश्चात्, उपधारा (2) के उपबन्धों के अनुसार, उस भूमि से वास्तविक रूप से व्युत्पन्न शुद्ध औसत मासिक आय अवधारित करेगा और इस प्रकार अवधारित की गई राशि विनिर्दिष्ट करते हुए तथा भूमि के स्वामी और उसमें हितबद्ध प्रत्येक व्यक्ति से सूचना में विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व उसे संसूचित करने की मांग करते हुए राजपत्र में सूचना प्रकाशित करेगा जिसमें यह पूछा जाएगा कि क्या ऐसा स्वामी या व्यक्ति इस प्रकार अवधारित राशि से सहमत है और यदि इस प्रकार सहमत नहीं है, तो भूमि से वास्तविक रूप से व्युत्पन्न शुद्ध औसत मासिक आय के रूप में कितनी रकम का दावा करता है ।
(4) कोई व्यक्ति जो उपधारा (3) के अधीन सक्षम प्राधिकरण द्वारा अवधारित शुद्ध औसत मासिक आय की रकम से सहमत नहीं है और इस रकम से अधिक राशि का दावा करता है, उस उपधारा में निर्दिष्ट सूचना में विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के भीतर प्रशासक को अपील कर सकता है ।
(5) अपील पर अपीलार्थी की सुनवाई के पश्चात् प्रशासक शुद्ध औसत मासिक आय का अवधारण करेगा और उसका अवधारण अंतिम होगा और किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
(6) जहां उस भूमि पर, जिसके बारे में शुद्ध औसत मासिक आय अवधारित की गई है, कोई इमारत है, वहां ऐसी इमारत के संबंध में कोई पृथक् प्रतिकर संदत्त नहीं किया जाएगा :
परन्तु जहां भूमि का स्वामी और ऐसी भूमि पर की इमारत का स्वामी भिन्न है, वहां सक्षम प्राधिकरण प्रतिकर की रकम का भूमि के स्वामी तथा इमारत के स्वामी के बीच [उसी अनुपात में प्रभाजन करेगा, जो अर्जन की तारीख पर भूमि के बाजार मूल्य का इमारत के बाजार मूल्य से है ।]
। । । ।
16. प्रतिकर का प्रभाजन-(1) जहां धारा 15 के अधीन अवधारित प्रतिकर की रकम में कई व्यक्ति हितबद्ध होने का दावा करते हैं, वहां सक्षम प्राधिकरण उन व्यक्तियों का, जो उसकी राय में प्रतिकर प्राप्त करने के हकदार हैं, और उनमें से प्रत्येक को संदेय राशि का, अवधारण करेगा ।
(2) यदि प्रतिकर या उसके किसी भाग के प्रभाजन के बारे में या उन व्यक्तियों के बारे में, जिन्हें वह प्रतिकर या उसका कोई भाग संदेय है, कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो सक्षम प्राधिकरण विवाद को प्रशासक के विनिश्चय के लिए विनिर्दिष्ट कर सकता है और प्रशासक, किसी ऐसे विवाद का विनिश्चय करने में, यावत्शक्य भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) के भाग 3 के उपबंधों का अनुसरण करेगा ।
17. प्रतिकर का संदाय या उसका न्यायालय में निक्षेप-(1) प्रतिकर की रकम का अवधारण किए जाने के पश्चात् सक्षम प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार की ओर से प्रतिकर के हकदार व्यक्तियों को संदाय निविदत्त करेगा और देगा ।
(2) यदि प्रतिकर के लिए हकदार व्यक्ति उसे प्राप्त करने के लिए सम्मति नहीं देते हैं या यदि प्रतिकर प्राप्त करने के हक के बारे में या उसके प्रभाजन के बारे में कोई विवाद है तो सक्षम प्राधिकरण प्रतिकर की रकम जिला न्यायाधीश के न्यायालय में जमा करेगा और वह न्यायालय इस प्रकार जमा की गई रकम के बारे में भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) की धारा 32 तथा 33 में उपवर्णित रीति से व्यवहार करेगा ।
18. प्रतिकर, आदि के अवधारण के संबंध में सक्षम प्राधिकरण की शक्तियां-(1) सक्षम प्राधिकरण प्रतिकर की रकम का अवधारण करने या उसके प्रभाजन के प्रयोजनों के लिए आदेश द्वारा किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा कर सकता है कि वह उस आदेश में विनिर्दिष्ट की गई ऐसी जानकारी दे जो उसके पास है ।
(2) सक्षम प्राधिकरण को धारा 15 के अधीन जांच करते समय, निम्नलिखित विषयों की बाबत वे सभी शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन वाद का विचारण करने वाले सिविल न्यायालय की हैं, अर्थात् :-
(क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना ;
(ख) किसी दस्तावेज के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना ;
(ग) शपथ-पत्र पर साक्ष्य ग्रहण करना ;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक-अभिलेख की अध्यपेक्षा करना ;
(ङ) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।
अध्याय 6
गन्दी बस्ती क्षेत्रों में बेदखली से किराएदारों का संरक्षण
[19. सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बिना किराएदारों की बेदखली के लिए कार्यवाहियां न करना-(1) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई भी व्यक्ति, सक्षम प्राधिकरण की लिखित पूर्व मंजूरी के सिवाय,-
(क) गंदी बस्ती क्षेत्र (विकास तथा उन्मूलन) संशोधन अधिनियम, 1964 (1964 का 43) प्रारम्भ के पश्चात् किसी गंदी बस्ती क्षेत्र में किसी इमारत या भूमि से किसी किराएदार की बेदखली के लिए कोई डिक्री या आदेश प्राप्त करने के लिए कोई दावा या कार्यवाही संस्थित नहीं करेगा, या
(ख) जहां ऐसे क्षेत्र में किसी इमारत या भूमि से किसी किराएदार की बेदखली के लिए ऐसे प्रारम्भ के पूर्व संस्थित किसी वाद या कार्यवाही में कोई डिक्री या आदेश प्राप्त किया गया है, वहां ऐसी डिक्री या आदेश का निष्पादन नहीं करेगा ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट मंजूरी प्राप्त करने की वांछा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, सक्षम प्राधिकरण को, ऐसे प्ररूप में और ऐसी विशिष्टियां अन्तर्विष्ट करते हुए जो विहित की जाएं, लिखित आवेदन करेगा ।
(3) ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर, सक्षम प्राधिकरण, पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् और मामले की परिस्थितियों में जैसी वह ठीक समझे वैसी संक्षिप्त जांच करने के पश्चात् लिखित आदेश द्वारा, या तो ऐसी मंजूरी देगा या ऐसी मंजूरी देने से इंकार करेगा ।
(4) उपधारा (3) के अधीन मंजूरी देने में या मंजूरी देने से इंकार करने में, सक्षम प्राधिकरण, निम्नलिखित बातों पर ध्यान देगा, अर्थात् :-
(क) यदि किराएदार को बेदखल किया जाए तो क्या उसे उसकी आय के भीतर वैकल्पिक वास-सुविधा उपलब्ध हो सकेगी ;
(ख) क्या बेदखली गन्दी बस्ती क्षेत्र के विकास तथा उन्मूलन के हित में है ;
(ग) अन्य बातें, यदि कोई हों, जो विहित की जाएं ।
(5) जहां सक्षम प्राधिकरण मंजूरी देने से इंकार करता है, वहां वह ऐसे इंकार के कारणों का संक्षिप्त विवरण लिखेगा और आवेदक को उसकी प्रति देगा ।]
[20. अपील-धारा 6क की उपधारा (1) में या धारा 19 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट मंजूरी देने से इंकार करने वाला सक्षम प्राधिकरण के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, प्रशासक को अपील कर सकता है और प्रशासक अपीलार्थी की सुनवाई के पश्चात् ऐसी अपील का विनिश्चय कर सकता है और उसका विनिश्चय अंतिम होगा ।]
[20क. किसी किराएदार द्वारा खाली किए गए परिसर के कब्जे का प्रत्यावर्तन-(1) जहां किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में किसी इमारत का अधिभोगी किराएदार कोई इमारत खाली करता है या उससे उसे इस आधार पर बेदखल किया जाता है कि वह इमारत किसी विकास-संकर्म का निष्पादन करने के प्रयोजन के लिए या इमारत के पुनःनिर्माण के प्रयोजन के लिए अपेक्षित थी, वहां किराएदार, ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, सक्षम प्राधिकरण के पास ऐसी घोषणा प्रस्तुत कर सकता है कि वह, यथास्थिति, विकास-संकर्म की पूर्ति के पश्चात् या इमारत के पुनःनिर्माण के पश्चात् पुनःइमारत का अधिभोगी बनना चाहता है ।
(2) ऐसी घोषणा की प्राप्ति पर, सक्षम प्राधिकरण, आदेश द्वारा उस इमारत के स्वामी से ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, विकास-संकर्म या पुनः निर्माण के नक्शे तथा उसके व्यय के प्राक्कलन तथा ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो आवश्यक हों, देने की अपेक्षा करेगा और ऐसे दिए गए नक्शों और प्राक्कलनों और विशिष्टियों, यदि कोई हों, के आधार पर और धारा 20ख की उपधारा (3) के उपबंधों पर ध्यान देते हुए और ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, अनन्तिम रूप से ऐसे किराए का अवधारण करेगा जो किराएदार द्वारा, यदि वह उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा की गई घोषणा के अनुसरण में इमारत का पुनः अधिभोगी बनता तो संदेय होता ।
(3) उपधारा (2) के अधीन अन्तिम रूप से अवधारित किराया किराएदार तथा स्वामी को विहित रीति से संसूचित किया जाएगा ।
(4) यदि ऐसी संसूचना की प्राप्ति के पश्चात् किराएदार, ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, सक्षम प्राधिकरण को लिखित रूप में यह संसूचित करता है कि जब उसे उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा की गई घोषणा के अनुसरण में इमारत का पुनः अधिभोगी बनाया जाए तब वह स्वामी को उपधारा (2) के अधीन अनन्तिम रूप से अवधारित किराए का संदाय तब तक करेगा जब तक धारा 20 के अधीन किराया अंतिम रूप से अवधारित नहीं कर दिया जाता, तो सक्षम प्राधिकरण स्वामी को यह निदेश देगा कि वह, यथास्थिति, सुधार-संकर्म की पूर्ति के पश्चात् या इमारत के पुनः निर्माण के पश्चात् किराएदार को इमारत का अधिभोगी बना दे और स्वामी ऐसे निदेश का अनुपालन करने के लिए बाध्य होगा ।
20ख. गंदी बस्ती क्षेत्र में इमारतों का किराया-(1) जहां किसी गंदी बस्ती क्षेत्र में कोई इमारत किसी विकास के संकर्म के निष्पादन के पश्चात् या उसके पुनः निर्माण के पश्चात् किराएदार को किराए पर दी गई है, वहां इमारत का किराया इस धारा के उपबधों के अनुसार अवधारित किया जाएगा ।
(2) जिस किराएदार को धारा 20क की उपधारा (4) के अधीन जारी किए गए निदेश के अनुसरण में उस इमारत का कब्जा दिया गया है उससे भिन्न किसी भी किराएदार को यदि ऐसी कोई इमारत किराए पर दी जाती है तो वह स्वामी को निम्नलिखित का संदाय करने का दायी होगा :-
(क) यदि उस क्षेत्र में किराया नियंत्रण से संबंधित कोई साधारण विधि प्रवृ्त है और वह उस इमारत को लागू है, तो उस विधि के उपबन्धों के अनुसार अवधारित किराया ;
(ख) यदि उस क्षेत्र में कोई ऐसी विधि प्रवृत्त नहीं है, तो ऐसा किराया, जो स्वामी तथा किराएदार के बीच तय पाया जाए ।
(3) जहां कोई ऐसी इमारत धारा 20क की उपधारा (4) के अधीन जारी किए गए किसी निदेश के अनुसरण में किसी किराएदार को किराए पर दी गई है, वहां किराएदार उस क्षेत्र में प्रवृत्त किराए के नियंत्रण से संबंधित किसी विधि के होते हुए भी स्वामी को निम्नलिखित का संदाय करने का दायी होगा :-
(क) यदि उस इमारत के संबंध में कोई विकास-संकर्म किया गया है, तो निम्नलिखित कुल रकमों की बराबर की राशि का वार्षिक किराया, अर्थात् :-
(i) वह वार्षिक किराया, जो किराएदार विकास-संकर्म के निष्पादन के प्रयोजन के लिए उस इमारत के खाली करने के ठीक पूर्व देता था ;
(ii) विकास-संकर्मों की लागत का छह प्रतिशत ; और
(iii) किसी ऐसी भूमि की बाबत संदेय प्रतिकर के बराबर राशि का छह प्रतिशत, जो ऐसा विकास करने के प्रयोजन के लिए ऐसे अर्जित की गई हो मानो वह विकास-संकर्म के प्रारम्भ की तारीख पर धारा 12 के अधीन अर्जित की गई थी ;
(ख) यदि इमारत का पुनः निर्माण किया गया है, तो इमारत के पुनः निर्माण की कुल लागत के तथा जिस पर इमारत का पुनः निर्माण किया गया है उस भूमि की लागत के चार प्रतिशत के बराबर राशि का वार्षिक किराया ।
स्पष्टीकरण-इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए भूमि की लागत, यदि वह भूमि धारा 12 के अधीन उस इमारत के पुनः निर्माण के प्रारम्भ की तारीख पर अर्जित की गई थी वही राशि समझी जाएगी जो उस भूमि की बाबत संदेय प्रतिकर के बराबर है ।
(4) उपधारा (3) के अधीन किसी इमारत की बाबत किसी किराएदार द्वारा संदेय किराया, किराएदार या स्वामी द्वारा किए गए आवेदन पर, उपधारा (5) में निर्दिष्ट प्राधिकरण द्वारा अवधारित किया जाएगा :
परन्तु स्वामी या किराएदार द्वारा ऐसे किराए के अवधारण के लिए आवेदन, पर्याप्त कारण बिना, ऐसे प्राधिकरण द्वारा, यथास्थिति, सुधार-संकर्म की पूर्ति या इमारत के पुनः निर्माण से नब्बे दिन की समाप्ति के पश्चात स्वीकृत नहीं होगा ।
(5) वह प्राधिकरण, जिसे उपधारा (4) में निर्दिष्ट आवेदन किया जाएगा, निम्नलिखित होगा :-
(क) जहां उस क्षेत्र में, जिसमें इमारत स्थित है, किराए के नियंत्रण से संबंधित कोई साधारण विधि प्रवृत्त है, वहां वह प्राधिकरण जिसे उस क्षेत्र में स्थित इमारतों के किराए नियत करने के लिए आवेदन किए जाए ; और इस धारा के अधीन किराए का अवधारण करने के प्रयोजन के लिए वह प्राधिकरण जो उक्त साधारण विधि के अधीन प्राप्त सभी शक्तियों या उनमें से किसी का प्रयोग कर सकता है और ऐसी विधि के उपबंध, अपीलों से संबंधित उपबन्धों सहित, तद्नुसार लागू होंगे ;
(ख) यदि उस क्षेत्र में कोई ऐसी विधि प्रवृत्त नहीं है, तो ऐसा प्राधिकरण, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए और ऐसे नियम उस प्रक्रिया का उपबंध कर सकते हैं, जो उस प्राधिकरण द्वारा किराए का अवधारण करने के लिए तथा ऐसे प्राधिकरण के विनिश्चय के विरुद्ध अपीलों का अवधारण करने के लिए भी अनुसरित की जाएगी ।
(6) जहां इस धारा के अधीन किराया अंतिम रूप से अवधारित किया गया है, वहां किराएदार द्वारा संदत्त किराए की रकम, इस प्रकार अंतिम रूप से अवधारित किराए के प्रति समायोजित की जाएगी और जहां इस प्रकार संदत्त रकम अन्तिम रूप से अवधारित किराए से कम है या अधिक है, तो वहां किराएदार, यथास्थिति, कमी का संदाय करेगा या वापसी का हकदार होगा ।
21. कतिपय इमारतों से किराएदारों की बेदखली को अध्याय का लागू नहीं होना-इस अध्याय की कोई भी बात सरकार, [दिल्ली विकास प्राधिकरणट या किसी अन्य प्राधिकरण के गन्दी बस्ती क्षेत्र में, किसी इमारत के किराएदार पर या उसके संबंध में, [किसी विधि के अधीन बेदखली को लागू नहीं होगीट ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
22. प्रवेश की शक्तियां-सक्षम प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में सहायकों या कर्मकारों सहित या उनके बिना, किसी इमारत या भूमि में या भूमि पर, कोई जांच, निरीक्षण, माप या मूल्यांकन करने या सर्वेक्षण करने के लिए या कोई ऐसा संकर्म निष्पादित करने के लिए, जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत किया गया है या जिसका निष्पादन करना इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के उपबंधों में से किसी के प्रयोजनों के लिए या उसके अनुसरण में आवश्यक है, प्रवेश करे ।
23. निरीक्षण की शक्तियां-(1) सक्षम प्राधिकरण, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी व्यक्ति को निम्नलिखित के बारे में प्राधिकृत कर सकता है :-
(क) किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में किसी इमारत या भूमि में या या उस पर कोई नाली, शौचालय, मूत्रालय, नाबदान, पाइप, मलवाहिका या वाहिका का निरीक्षण करना और स्वविवेकानुसार, यथास्थिति, उस नाली, शौचालय, मूत्रालय, नाबदान, पाइप, मलवाहिका या वाहिका से उत्पन्न किसी न्यूसेंस को रोकने या हटाने के प्रयोजन के लिए भूमि की खुदाई करना ;
(ख) गन्दी बस्ती क्षेत्र में निर्माणाधीन संकर्मों की परीक्षा करना, तलमापन करना या किसी मीटर को हटाना, उसकी परख करना, परीक्षा करना, उसे प्रतिस्थापित करना या पढ़ना ।
(2) यदि ऐसे निरीक्षण पर किसी न्यूसेंस को रोकने या हटाने के लिए जमीन खोदना आवश्यक हो जाए, तो उसके द्वारा उपगत व्यय, इमारत या भूमि के स्वामी या अधिष्ठाता द्वारा संदत्त किए जाएंगे, किन्तु यदि यह पाया जाए कि कोई भी न्यूसेंस विद्यमान नहीं है या ऐसे न खोदने के कारण वह उत्पन्न हो जाती है तो ऐसे निरीक्षण के प्रयोजन के लिए किसी इमारत, नाली या अन्य संकर्म की खोली हुई, नुकसान पहुंचाई गई या हटाई गई जमीन या उसका प्रभाग सक्षम प्राधिकरण द्वारा, यथास्थिति, भरा जाएगा, पूर्ववत किया जाएगा या ठीक किया जाएगा ।
24. जहां काम चालू है वहां संलग्न भूमि में प्रवेश करने की शक्ति-(1) इस निमित्त सक्षम प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति, सहायकों या कर्मकारों सहित या उसके बिना, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत किसी संकर्म के पचास गज के भीतर किसी भूमि पर, प्रवेश कर सकता है और ऐसा उस भूमि पर मृदा, गिट्टी, पत्थर या अन्य सामग्रियां रखने या ऐसे संकर्म तक पहुंच पाने या उस पर कार्यान्वित किए जाने वाले किन्हीं अन्य प्रयोजनों के संबंध में किया जा सकेगा ।
(2) इस प्रकार प्राधिकृत व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन किसी भूमि पर प्रवेश करने के पूर्व उसका प्रयोजन कथित करेगा और यदि अधिष्ठाता या स्वामी द्वारा इस प्रकार अपेक्षित हो तो इतनी भूमि पर बाड़ लगाएगा जितनी ऐसे प्रयोजन के लिए आवश्यक हो ।
(3) इस प्रकार प्राधिकृत व्यक्ति, इस धारा द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग करते हुए, जितना हो सके उतना कम नुकसान करेगा और सक्षम प्राधिकरण द्वारा ऐसी भूमि के स्वामी या अधिष्ठाता को, या दोनों को, किसी नुकसान के लिए, चाहे वह स्थायी हो या अस्थायी, प्रतिकर संदेय होगा ।
25. इमारतों में अनाधिकृत प्रवेश करना-इस निमित्त सक्षम प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह किसी स्थान में किसी दरवाजे, फाटक या रोध को खोलने या खुलवाने के लिए प्रवेश करे-
(क) यदि वह समझता है कि ऐसे प्रवेश के प्रयोजन के लिए उसका खोलना आवश्यक है ; और
(ख) यदि स्वामी या अधिष्ठाता अनुपस्थित है या उपस्थित होते हुए ऐसा दरवाजा, फाटक या रोध खोलने से इंकार करता है ।
26. प्रवेश दिन में किया जाना-इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत कोई भी प्रवेश सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय के बीच के सिवाय नहीं किया जाएगा ।
27. स्वामी की सम्मति का साधारण तौर पर प्राप्त किया जाना- [इस अधिनियम में यथा उपबंधित से सिवाय, किसी भी इमारत या भूमिट में अधिष्ठाता की या यदि कोई अधिष्ठाता नहीं है, तो उसके स्वामी की, सम्मति के बिना प्रवेश नहीं किया जाएगा और कोई भी ऐसा प्रवेश, यथास्थिति, उक्त अधिष्ठाता या स्वामी को ऐसे प्रवेश करने के आश्य की चौबीस घंटों से अन्यून लिखित सूचना दिए बिना नहीं किया जाएगा :
परन्तु कोई ऐसी सूचना आवश्यक नहीं होगी यदि निरीक्षण किए जाने वाला स्थान जानवरों का सायबान है या शौचालय, मूत्रालय या निर्माणाधीन संकर्म है ।
28. बेदखली की शक्ति का केवल सक्षम प्राधिकरण द्वारा प्रयोग किया जाना-जहां सक्षम प्राधिकरण का या तो किसी इमारत के स्वामी के प्रत्यावेदन पर या उसके कब्जे में की अन्य जानकारी पर यह समाधान हो जाता है कि इमारत के अधिष्ठाताओं ने प्राधिकरण द्वारा जारी की गई या दी गई सूचना, आदेश या निदेश के अनुसरण में उसे खाली नहीं किया है, वहां वह प्राधिकरण आदेश द्वारा इमारत से अधिष्ठाताओं की बेदखली के लिए ऐसी रीति से और ऐसे समय के भीतर, जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, निदेश [और ऐसी बेदखली के प्रयोजनों के लिए ऐसे बल का प्रयोग कर सकेगा या करवा सकेगा जैसा आवश्यक हो] :
परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेश देने के पूर्व सक्षम प्राधिकरण उस इमारत के अधिष्ठाताओं को यह हेतुक दर्शित करने के लिए समुचित अवसर न दिया गया हो कि ऐसा आदेश क्यों न बेदखल किया जाए ।
29. गन्दी बस्ती क्षेत्र से आपत्तिजनक या खतरनाक व्यवसायों को हटाने की शक्ति-सक्षम प्राधिकरण लिखित आदेश द्वारा, किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र में खतरनाक या आपत्तिजनक व्यवसाय करने वाले किसी व्यक्ति को, उस क्षेत्र से उस व्यवसाय को, ऐसे समय के भीतर जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, हटाने का निदेश दे सकता है :
परन्तु इस धारा के अधीन कोई भी आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक व्यवसाय करने वाले व्यक्ति को यह हेतुक दर्शित करने के लिए समुचित अवसर न दिया गया हो कि ऐसा आदेश क्यों न दिया जाए ।
30. अपीलें-(1) इस अधिनियम में यथा अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबंधित के सिवाय, सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी की गई या दी गई किसी सूचना, आदेश या निदेश द्वारा व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसी सूचना, आदेश या निदेश जारी करने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर प्रशासक को अपील कर सकता है ।
(2) इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक अपील, लिखित याचिका द्वारा, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, उस सूचना, आदेश या निदेश की प्रति के साथ की जाएगी ।
(3) किसी अपील की स्वीकृति पर उस सूचना, आदेश या निदेश को प्रवृत्त करने की सभी कार्यवाहियां और उसके उल्लंघन के लिए सभी अभियोजन अपील का विनिश्चय लम्बित होने तक स्थगित रखे जाएंगे, और यदि सूचना, आदेश या निदेश अपील पर अपास्त किया गया है, उसकी अवज्ञा अपराध के रूप में नहीं समझी जाएगी ।
(4) इस धारा के अधीन कोई भी अपील तब तक विनिश्चित नहीं की जाएगी जब तक अपीलार्थी की सुनवाई न की गई हो या अपीलार्थी को वैयक्तिक रूप से या किसी विधि व्यवसायी द्वारा सुनवाई का समुचित अवसर प्राप्त न हुआ हो ।
(5) अपील पर प्रशासक का विनिश्चय अंतिम होगा और किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
31. सूचना, आदि की तामील-(1) इस अधिनियम के अधीन जारी की गई प्रत्येक सूचना, आदेश या निदेश की तामील, इस अधिनियम में अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबंधित के सिवाय, निम्नलिखित रूप में की जाएगी,-
(क) उस व्यक्ति को, जिसके लिए वह आशयित है, सूचना, आदेश या निदेश को देकर, या प्रस्तुत करके या डाक द्वारा भेज कर, या
(ख) यदि ऐसा व्यक्ति नहीं पाया जा सकता है तो उस सूचना, आदेश या निदेश को उसके निवास या कारबार के अन्तिम ज्ञात स्थान के किसी सहजदृश्य भाग पर चिपकाकर या उस सूचना, आदेश या निदेश को कुटुम्ब के किसी वयस्थ पुरूष सद्स्य को या नौकर को देकर या प्रस्तुत करके या जिससे वह संबंधित है उस इमारत या भूमि के, यदि कोई है, किसी सहजदृश्य भाग पर चिपकाकर ।
(2) जहां वह व्यक्ति, जिस पर किसी सूचना, आदेश या निदेश की तामील की जानी है, अवयस्क है, वहां उसके संरक्षक पर या उसके कुटुम्ब के किसी वयस्थ पुरूष सदस्य या नौकर पर उसकी तामील अवयस्क पर तामील के रूप में समझी जाएगी ।
(3) ऐसी प्रत्येक सूचना, आदेश या निदेश के बारे में जिसकी इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन किसी लोक सूचना, आदेश या निदेश के रूप में या ऐसी सूचना, आदेश या निदेश के रूप में, जिसकी उसमें विनिर्दिष्ट किसी व्यष्टि पर तामील की जानी आवश्यक नहीं है, तामील की जानी है, यथा अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबंधित के सिवाय यह समझा जाएगा कि वह पर्याप्त रूप से तामील की गई है, यदि उसकी एक प्रति ऐसी अवधि के दौरान सक्षम प्राधिकरण के कार्यालय के ऐसे सहजदृश्य भाग पर या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान में चिपकाई गई है या ऐसे स्थानीय समाचारपत्र में या किसी अन्य रीति से, जैसा सक्षम प्राधिकरण निदेश दे, प्रकाशित की गई है ।
32. शास्तियां-(1) जो कोई इस अधिनियम के अधीन जारी की गई या दी गई किसी सूचना, आदेश या निदेश का [अनुपालन करने में असफल रहता हैट कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा ।
(2) जो कोई धारा 10 की उपधारा (7) के अधीन अधिरोपित किसी निर्बन्धन या शर्त के उल्लंघन में किसी संकर्म या उन्मूलन क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए किसी योजना का प्रारम्भ करता है, या करवाता है, वह कारावास से, जो तीन मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(3) जो कोई इस अधिनियम के अधीन किसी इमारत या भूमि में या भूमि पर प्रवेश करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति के प्रवेश में बाधा डालता है या ऐसे प्रवेश के पश्चात् ऐसे व्यक्ति को सताता है, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
(4) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कम्पनी है, तो प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबन्धित किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध का निवारण करने के लिए सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(5) उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित होता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक या प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) “कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है, और
(ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
33. कतिपय दशाओं में इमारतों को तोड़ डालने का आदेश- [(1)] जहां धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन अधिरोपित किसी निर्बन्धन या शर्त के या किसी उन्मूलन क्षेत्र के पुनर्विकास की योजना के उल्लंघन में या इस अधिनियम के अधीन जारी की गई या दी गई किसी सूचना, आदेश या निदेश के उल्लंघन में किसी इमारत के निर्माण का प्रारम्भ किया गया है या उसे निष्पादित किया जा रहा है या उसे पूरा किया गया है, वहां सक्षम प्राधिकरण किसी अन्य उपचार के अतिरिक्त, जो इस अधिनियम के अधीन या किसी अन्य विधि के अधीन किया जाए, यह निदेशित करते हुए आदेश दे सकता है कि ऐसा निर्माण, उसके स्वामी द्वारा दो मास से अनधिक ऐसी अवधि के भीतर, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, तोड़ डाला जाएगा और स्वामी के ऐसे आदेश का अनुपालन करने में असफल रहने पर सक्षम प्राधिकरण स्वयं निर्माण तुड़वा सकता है और ऐसे तोड़ने के व्यय भू-राजस्व की बकाया के रूप में स्वामी से वसूलनीय होंगे :
परन्तु कोई भी ऐसा आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक स्वामी को सुनवाई का समुचित अवसर न दिया गया हो ।
[(2) उपधारा (1) के अधीन किसी इमारत को तुड़वाने के प्रयोजन के लिए सक्षम प्राधिकरण ऐसे बल का उपयोग कर सकेगा या करवा सकेगा जैसा आवश्यक हो ।]
34. न्यायालयों की अधिकारिता-प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट से अन्यून वर्ग का कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
35. अभियोजन के लिए सक्षम प्राधिकरण या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी की पूर्व मंजूरी-इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए अभियोजन सक्षम प्राधिकरण की या इस निमित्त सक्षम प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी की पूर्व मंजूरी के सिवाय संस्थित नहीं किया जाएगा ।
36. प्रत्यायोजन करने की शक्ति- [(1)] सक्षम प्राधिकरण राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकता है कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य किसी शक्ति का, ऐसे मामलों में तथा ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे अधिकारी या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा भी, जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रयोग किया जा सकता है ।
[(2) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकती है कि धारा 10 की उपधारा (7), धारा 15, धारा 20 तथा धारा 30 के अधीन प्रशासक द्वारा प्रयोक्तव्य किसी शक्ति का, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, मुख्य सचिव द्वारा या ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा भी, जो उसमें उल्लिखित किया जाए, प्रयोग किया जा सकता है ।]
37. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए परित्राण-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही सक्षम प्राधिकरण या किसी व्यक्ति के प्रति किसी ऐसी बात के लिए नहीं होगी, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई है या जिसका सद्भापूर्वक किया जाना आशयित है ।
[37क. अधिकारिता का अपवर्जन-इस अधिनियम में अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित के सिवाय, किसी भी सिविल न्यायालय को किसी ऐसी बात की बाबत अधिकारिता नहीं होगी, जिसे सक्षम प्राधिकरण या कोई अन्य व्यक्ति इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अवधारित करने के लिए सशक्त किया गया है, और इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई की बाबत किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण द्वारा कोई भी व्यादेश नहीं दिया जाएगा ।]
38. सक्षम प्राधिकरण, आदि का लोक सेवक होना-सक्षम प्राधिकरण, तथा इस अधिनियम के अधीन [इसके] द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
39. अधिनियम का अन्य विधियों पर अध्यारोही होना-इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्ध, किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
40. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी बातों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकते हैं, अर्थात् :-
(क) सक्षम प्राधिकरण की सूचनाओं, आदेशों या अन्य लिखतों के अधिप्रमाणन की रीति ;
(ख) किसी गन्दी बस्ती क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए योजनाओं का बनाना और ऐसी योजनाओं में सम्मिलित किए जाने वाले विषय ;
[(खख) वह प्ररूप जिसमें धारा 6क की उपधारा (3) के अधीन आवेदन किया जाएगा और ऐसे आवेदन की बाबत दी जाने वाली जानकारी तथा उद्गृहीत की जाने वाली फीसें ;
(खखख) वह रीति जिसमें धारा 15 तथा 19 के अधीन जांच की जा सकती है ;]
(ग) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञा के लिए आवेदन किए जाएंगे और ऐसे आवेदनों की बाबत उद्गृहीत की जाने वाली फीसें ;
(घ) सक्षम प्राधिकरण द्वारा धारा 19 के अधीन अनुज्ञा देने या देने से इन्कार करने के पूर्व अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया 1[तथा विचार में ली जाने वाली बातें] ;
(ङ) वह समय जिसके भीतर [धारा 10 की उपधारा (7) या धारा 20ट के अधीन अपील की जा सकती है ;
1[(ङङ) वह समय जिसके भीतर उपधारा (1) के अधीन घोषणा फाइल की जा सकती है या धारा 20क की उपधारा (4) के अधीन सूचना भेजी जा सकती है और वह फीस, यदि कोई हो, जो ऐसी घोषणा की बाबत उद्गृहीत की जानी है ;
(ङङङ) वह समय जिसके भीतर धारा 20क की उपधारा (2) में निर्दिष्ट नक्शे, प्राक्कलन या अन्य विशिष्टियां दी जा सकती है ;
(ङङङङ) सक्षम प्राधिकरण द्वारा धारा 20क की उपधारा (2) के अधीन अन्तिम किराया नियत करने के लिए अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया ;
(ङङङङङ) वह रीति जिसमें धारा 20क के अधीन अन्तिम रूप से अवधारित किराया किराएदारों तथा स्वामियों को संसूचित किया जाएगा ;
(ङङङङङङ) वे बातें, जिनकी बाबत धारा 20ख की उपधारा (5) के अधीन उपबन्ध किया जा सकता है ;]
(च) वे अधिकारी तथा स्थानीय प्राधिकारी जिन्हें धारा 36 के अधीन शक्तियां प्रत्यायोजित की जा सकती हैं ; और
(छ) कोई ऐसा अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जा सकता है ।
[(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के असान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
अनुसूची
(धारा 15 देखिए)
शुद्ध औसत मासिक आय के अवधारण के सिद्धान्त
1. सक्षम प्राधिकरण पहले अर्जित भूमि के, जिसके अन्तर्गत उस पर कोई इमारत भी है, स्वामी द्वारा धारा 15 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट पांच क्रमवर्ती वर्षों की अवधि के दौरान वास्तविक रूप से व्युत्पन्न कुल किराए का पहले अवधारण करेगा ।
2. ऐसे अवधारण के लिए सक्षम प्राधिकरण स्थानीय जांच कर सकता है और यदि आवश्यक हो तो सम्बन्धित नगरपालिका या अन्य स्थानीय प्राधिकारी की सम्पदा-कर-निर्धारण बहियों से ऐसी भूमि के किराए मूल्य को दर्शित करने वाली प्रतियां प्राप्त कर सकता है ।
3. धारा 15 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट शुद्ध औसत मासिक आय ऐसे औसत मासिक कुल किराए का साठ प्रतिशत होगी जो पैरा 1 के अधीन सक्षम प्राधिकरण द्वारा यथा अवधारित पांच क्रमवर्ती वर्षों के दौरान कुल किराए का 1/60 भाग होगा ।
4. ऊपर निर्दिष्ट कुल मासिक किराए का चालीस प्रतिशत, शुद्ध औसत मासिक आय का अवधारण करने में विचार में नहीं लिया जाएगा किन्तु वह ऐसे व्यय के बदले में घटाया जाएगा, जो भूमि का स्वामी सामान्यताया, किसी नगरपालिका या अन्य स्थानीय प्राधिकारी को किसी सम्पदा कर के संदाय के लिए, वसूली के प्रभारों के लिए, आय-कर या डूबन्त ऋणों के लिए तथा भूमि पर की इमारतों की मरम्मत तथा अनुरक्षण संकर्मों के लिए, यदि कोई हों, उपगत करे ।
5. जहां भूमि या उसका कोई भाग किसी के अधिभोग में नहीं रहा है, या स्वामी को पोच वर्ष की उक्त सम्पूर्ण अवधि के दौरान या उसके किसी भाग के दौरान भूमि के अधिभोग के लिए कोई किराया प्राप्त नहीं हुआ है, वहां कुल किराया ऐसी आय के रूप में लिया जाएगा जो स्वामी को वास्तविक रूप से प्राप्त होता यदि भूमि उक्त अवधि के दौरान पट्टे पर दी गई होती ; और इस प्रयोजन के लिए, उस अवधि के पूर्व या पश्चात्, जिसके दौरान वह खाली रही है, किसी अवधि के दौरान भूमि से वास्तविक रूप से व्युत्पन्न किराया या समीप की तत्समान भूमि से वास्तविक रूप से व्युत्पन्न किराया विचार में लिया जाएगा ।
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