पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम, 1955
(1955 का अधिनियम संख्यांक 42)
[22 अक्तूबर, 1955]
पुरस्कार प्रतियोगिताओं का नियंत्रण और
विनियमन करने के लिए
अधिनियम
यतः पुरस्कार प्रतियोगिताओं के नियंत्रण और विनियमन के लिए उपबन्ध करना समीचीन है;
और यतः उपरोक्त विषय और उसके आनुषंगिक विषयों के सम्बन्ध में, जहां तक ऐसे विषय संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 2 में प्रगणित विषय हैं, संविधान के अनुच्छेद 252 के खण्ड (1) के निबन्धनों के अनुरूप आंध्र, बम्बई, मद्रास, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, हैदराबाद, मध्य भारत, पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ और सौराष्ट्र राज्यों के विधान-मण्डलों में संकल्प पारित कर दिए हैं;
अतः भारत गणराज्य के छठे वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) यह अधिनियम पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम, 1955 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका विस्तार [उन राज्यक्षेत्रों पर है जो 1956 के नवम्बर के प्रथम दिन के ठीक पूर्व] आंध्र, बम्बई, मद्रास, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, हैदराबाद, मध्य भारत, पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ और सौराष्ट्र राज्यों और सब भाग ग राज्यों में 2[समाविष्ट] थे ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) अनुज्ञापन प्राधिकारी" से, इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने के प्रयोजन से, राज्य सरकार द्वारा शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त कोई अधिकारी या प्राधिकारी अभिप्रेत है;
(ख) धन" के अंतर्गत चैक, पोस्टल आर्डर अथवा मनीआर्डर भी आता है;
(ग) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(घ) पुरस्कार प्रतियोगिता" से कोई ऐसी प्रतियोगिता अभिप्रेत है, (चाहे वह वर्ग शब्द पहेली, पुरस्कार प्रतियोगिता, लुप्त शब्द पहेली पुरस्कार प्रतियोगिता, चित्र पहेली पुरस्कार प्रतियोगिता या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो) जिसमें अक्षरों, शब्दों अथवा आकृतियों के निर्माण, विन्यास, संयोजन या क्रम परिवर्तन पर आधारित किसी पहेली के हल के लिए पुरस्कार देने की प्रस्थापना की जाती है ।
3. निर्वचन-इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए-
(क) मुद्रण के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अन्तर्गत लेखन या अक्षरों, शब्दों या आकृतियों को दृश्य रूप में प्रतिदर्शित या पुनरुत्पादित करने के अन्य ढंगों के प्रति निर्देश भी हैं; और
(ख) दस्तावेज या अन्य चीजें वितरित की गई समझी जाएंगी यदि उन्हें उस राज्यक्षेत्र के अन्दर या बाहर व्यक्तियों या स्थानों में वितरित किया जाता है जिनमें इस अधिनियम का विस्तार है और वितरण" शब्द का अर्थ तदनुकूल लगाया जाएगा ।
4. जहां प्रस्थापित पुरस्कार एक मास में एक हजार रुपए से अधिक है वहां पुरस्कार प्रतियोगिताओं का प्रतिषेध-कोई व्यक्ति, किसी ऐसी पुरस्कार प्रतियोगिता या प्रतियोगिताओं का सम्प्रवर्तन या संचालन नहीं करेगा जिनमें प्रस्थापित किए जाने वाले पुरस्कार या पुरस्कारों का कुल मूल्य (चाहे नकद या अन्य रूप में) किसी मास में एक हजार रुपए से अधिक है, और प्रत्येक पुरस्कार प्रतियोगिता में प्रविष्टियों की संख्या दो हजार से अधिक नहीं होगी ।
5. पुरस्कार प्रतियोगिताओं का अनुज्ञापन, जहां प्रस्थापित पुरस्कार एक मास में एक हजार रुपए से अधिक नहीं है-धारा 4 के उपबन्धों के अध्यधीन कोई व्यक्ति किसी ऐसी पुरस्कार प्रतियोगिता या प्रतियोगिताओं का सम्प्रवर्तन या संचालन, जिनमें प्रस्थापित किए जाने वाले पुरस्कार या पुरस्कारों का कुल मूल्य (चाहे नकद या अन्य रूप में) किसी मास में एक हजार रुपए से अधिक नहीं है, तब तक नहीं करेगा जब तक कि उसने इस अधिनियम के उपबन्धों और तद्धीन बनाए गए नियमों के अनुसार अनुदत्त अनुज्ञप्ति उस निमित्त अभिप्राप्त न कर ली हो ।
6. पुरस्कार प्रतियोगिताओं के लिए अनुज्ञप्तियां-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो धारा 5 में निर्दिष्ट अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करना चाहता है, अनुज्ञापन प्राधिकारी को ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से जो विहित हो लिखित आवेदन करेगा ।
(2) ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर अनुज्ञापन प्राधिकारी, ऐसी जांच करके, जैसी वह आवश्यक समझता है, लिखित आदेश द्वारा या तो अनुज्ञप्ति अनुदत्त करेगा या अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इन्कार करेगा ।
(3) जहां अनुज्ञापन अधिकारी अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इन्कार करता है वहां वह ऐसे इन्कार के कारणों का एक संक्षिप्त विवरण अभिलिखित करेगा और उसकी एक प्रति आवेदक को देगा ।
(4) फीस जिसके संदाय पर, कालावधि जिसके लिए, शर्तें जिनके अध्यधीन और प्ररूप जिसमें अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जा सकेगी ऐसा होगा जो विहित किया जाए ।
7. पुरस्कार प्रतियोगिताओं के संप्रवर्तकों का लेखे रखना और उन्हें अनुज्ञापन अधिकारी को प्रस्तुत करना-पुरस्कार प्रत्येक व्यक्ति जो इस अधिनियम के उपबन्धों और तद्धीन बनाए गए नियमों के अनुसार पुरस्कार प्रतियोगिता का संप्रवर्तन या संचालन करता है, ऐसी प्रतियोगिता से सम्बन्धित लेखे रखेगा और ऐसे प्ररूप में तथा ऐसे अन्तरालों पर जो विहित किए जाएं एक लेखा विवरण अनुज्ञापन प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा ।
8. अनुज्ञप्तियों को रद्द या निलम्बित करने की शक्ति-(1) अनुज्ञापन प्राधिकारी इस अधिनियम के अधीन किसी अनुज्ञप्ति के धारक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् निम्नलिखित आधारों में से एक या अधिक पर अनुज्ञप्ति को रद्द या निलम्बित कर सकेगा, अर्थात्-
(क) कि उन शर्तों में से जिनके अध्यधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त की गई थी किसी को भंग किया गया है;
(ख) कि अनुज्ञप्तिधारक ने धारा 7 के उपबन्धों में से किसी का उल्लंघन किया है ।
(2) जब कभी कोई अनुज्ञप्ति रद्द या निलंबित की जाती है तब अनुज्ञापन प्राधिकारी ऐसे रद्दकरण या निलम्बन के लिए कारणों का एक संक्षिप्त विवरण अभिलिखित करेगा और उसकी एक प्रति उस व्यक्ति को देगा जिसकी अनुज्ञप्ति रद्द या निलम्बित की गई है ।
9. धारा 4 और 5 के उल्लंघन में किसी पुरस्कार प्रतियोगिता का संप्रवर्तन या संचालन के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति धारा 4 या 5 के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी पुरस्कार प्रतियोगिता का संप्रवर्तन या संचालन करेगा तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
10. लेखे रखने तथा प्रस्तुत करने में असफलता के लिए शास्ति-यदि धारा 7 के अधीन लेखे रखने या लेखा विवरण प्रस्तुत करने के दायित्वाधीन कोई व्यक्ति उस धारा में यथा अपेक्षित लेखा रखने या लेखा विवरण प्रस्तुत करने में असफल होगा अथवा ऐसे लेखे रखेगा या ऐसे लेखा विवरण प्रस्तुत करेगा जो मिथ्या हैं और जिनका मिथ्या होना वह जानता है या विश्वास करता है या जिनके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है तो वह कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, जुर्माने से जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से दण्डनीय होगा किन्तु इस धारा में अन्तर्विष्ट कोई बात धारा 8 में अन्तर्विष्ट उपबन्धों को प्रभावित नहीं करेगी ।
11. पुरस्कार प्रतियोगिताओं के सम्बन्ध में अन्य अपराधों के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति किसी पुरस्कार प्रतियोगिता का संप्रवर्तन अथवा संचालन इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति के उपबन्धों के अनुसार करने के सिवाय करने या इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन में करने की दृष्टि से अथवा किसी ऐसी पुरस्कार प्रतियोगिता के सम्बन्ध में जिसका संप्रवर्तन या संचालन ऐसे उपबंधों के अनुसार किए जाने से अन्यथा किया जाता है-
(क) उस पुरस्कार प्रतियोगिता में प्रयोग के लिए कोई टिकट, कूपन या अन्य दस्तावेज मुद्रित या प्रकाशित करेगा; या
(ख) उस पुरस्कार प्रतियोगिता में प्रयोग के लिए कोई टिकट, कूपन या अन्य दस्तावेज बेचेगा या वितरित करेगा या विक्रय अथवा वितरण के लिए प्रस्थापित या विज्ञापित करेगा अथवा विक्रय या वितरण के प्रयोजन के लिए अपने पास रखेगा; या
(ग) निम्नलिखित को मुद्रित, प्रकाशित या वितरित करेगा अथवा प्रकाशन या वितरण के प्रयोजन के लिए अपने पास रखेगा-
(I) पुरस्कार प्रतियोगिता का कोई विज्ञापन, या
(II) पुरस्कार प्रतियोगिता में पुरस्कार विजेताओं की कोई सूची (चाहे पूरी हो या नहीं), या
(III) पुरस्कार प्रतियोगिता की वर्णनात्मक या उससे अन्यथा सम्बद्ध कोई अन्य चीज जो उस पुरस्कार प्रतियोगिता या किसी अन्य पुरस्कार प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए व्यक्तियों को उत्प्रेरित करने के लिए प्रकल्पित है, अथवा
(घ) किसी टिकट, कूपन या अन्य दस्तावेज को जो उस पुरस्कार प्रतियोगिता में प्रयोग के लिए है या उसके किसी विज्ञापन को विक्रय या वितरण के प्रयोजन के लिए उन राज्यक्षेत्रों में जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है लाएगा या भेजने के लिए किसी व्यक्ति को आमंत्रित करेगा; या
(ङ) उस पुरस्कार प्रतियोगिता में प्रयोग के लिए किसी टिकट, कूपन या अन्य दस्तावेज के विक्रय या वितरण के सम्बन्ध में प्राप्त किसी धन या मूल्यवान वस्तु को उन राज्यक्षेत्रों से जिनमें इस अधिनियम का विस्तार है बाहर भेजेगा या भेजने का प्रयत्न करेगा; अथवा
(च) उस पुरस्कार प्रतियोगिता के संप्रवर्तन या संचालन से सम्बन्धित किन्हीं प्रयोजनों के लिए किसी परिसर का प्रयोग करेगा या किसी परिसर का प्रयोग कराएगा या जानबूझकर होने देगा; या
(छ) उपरोक्त कार्यों में से कोई कार्य किसी व्यक्ति से कराएगा या कराने के लिए उसे उपाप्त करेगा या उपाप्त करने का प्रयत्न करेगा,
तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से दण्डनीय होगा ।
12. निगमों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध का दोषी कोई व्यक्ति कम्पनी हो तो वह प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी उस अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे:
परंन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबन्धित किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति, या मौनानुकूलता से किया गया है या उसकी किसी घोर उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कम्पनी’ से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
13. लेखाओं और दस्तावेजों को मांगने तथा उनका निरीक्षण करने की अनुज्ञापन प्राधिकारी की शक्ति-अनुज्ञापन प्राधिकारी-
(क) पुरस्कार प्रतियोगिता का संप्रवर्तन या संचालन करने वाले किसी व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस व्यक्ति द्वारा रखे गए लेखाओं और अन्य दस्तावेजों को उसके समक्ष पेश करे या उस पुरस्कार प्रतियोगिता से सम्बद्ध ऐसी अन्य जानकारी उसे दे जैसी वह अपेक्षित करे;
(ख) ऐसे व्यक्ति द्वारा रखे गए लेखाओं और अन्य दस्तावेजों का सभी युक्तियुक्त समयों पर निरीक्षण कर सकेगा ।
14. प्रवेश और तलाशी की शक्ति-(1) राज्य सरकार द्वारा सामान्य अथवा विशेष लिखित आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी पुलिस अधिकारी के लिए जो उपनिरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो यह विधिपूर्ण होगा कि वह-
(क) किन्हीं ऐसे परिसरों में, जिनकी बाबत उसके पास यह संदेह करने का कारण है कि उनका प्रयोग इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी पुरस्कार प्रतियोगिता के सम्प्रवर्तन या संचालन से सम्बन्धित प्रयोजनों के लिए किया जा रहा है, यदि आवश्यक हो तो बलपूर्वक चाहे दिन में या रात में इतने सहायकों के साथ जितने वह आवश्यक समझता है; प्रवेश करे;
(ख) उन परिसरों की तथा उन व्यक्तियों की जिन्हें वह वहां पाए तलाशी ले;
(ग) ऐसे सब व्यक्तियों को अभिरक्षा में ले और किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करे जो इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी पुरस्कार प्रतियोगिता के सम्प्रवर्तन या संचालन से अथवा उससे सम्बद्ध प्रयोजनों के लिए ऐसे परिसरों के प्रयोग से सम्बन्धित हैं या जिनके ऐसे सम्बन्धित होने की बाबत उनके खिलाफ युक्तियुक्त परिवाद किया गया है या विश्वसनीय इत्तिला प्राप्त हुई है या युक्तियुक्त संदेह विद्यमान है; और
(घ) वहां पाई गई ऐसी सब चीजों को अभिगृहीत कर ले जो उस पुरस्कार प्रतियोगिता में प्रयोग किए जाने के लिए आशयित है या जिनके ऐसे प्रयोग हो चुकने का युक्तियुक्त संदेह है ।
(2) इस धारा के अधीन सभी तलाशियां दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) के उपबन्धों के अनुसार की जाएंगी ।
15. पुरस्कार प्रतियोगिताओं वाले समाचारपत्रों और प्रकाशनों का समपहरण-जहां किसी समाचारपत्र या अन्य प्रकाशन में कोई ऐसी पुरस्कार प्रतियोगिता, जिसका सम्प्रवर्तन या संचालन इस अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन में है, अथवा इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति के उपबन्धों के अनुसार होने से अन्यथा है या उसके सम्बन्ध में कोई विज्ञापन अन्तर्विष्ट है वहां राज्य सरकार ऐसी पुरस्कार प्रतियोगिता या विज्ञापन को अन्तर्विष्ट करने वाले समाचारपत्र की प्रत्येक प्रति को और प्रकाशन की प्रत्येक प्रति को, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, सरकार को समपहृत घोषित कर सकेगी ।
16. अपीलें-अनुज्ञापन प्राधिकारी के अनुज्ञप्ति के अनुदान से इन्कार करने वाले या अनुज्ञप्ति को रद्द या निलंम्बित करने वाले विनिश्चय से व्यथित कोई व्यक्ति, उतने समय के अन्दर जो विहित किया जाए राज्य सरकार को अपील कर सकेगा और ऐसी अपील पर राज्य सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।
17. अनुज्ञापन प्राधिकारी और अन्य अधिकारियों का लोक सेवक होना-अनुज्ञापन प्राधिकारी और इस अधिनियम के अधीन कार्यशील अन्य कोई अधिकारी भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।
18. अपराधों के विचारण की अधिकारिता-प्रेसिडेन्सी मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
19. इस अधिनियम के अधीन की गई कार्यवाही के लिए परित्राण-इस नियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही अनुज्ञापन प्राधिकारी के या सरकार के किसी अन्य अधिकारी के विरुद्ध न होगी ।
20. नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल पर प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -
(क) अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन का प्ररूप और रीति और ऐसी अनुज्ञप्ति के लिए फीस, यदि कोई हो;
(ख) कालावधि जिसके लिए, शर्तें जिनके अध्यधीन और प्ररूप जिसमें अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जा सकेगी;
(ग) प्ररूप जिसमें और अन्तराल जिनमें अनुज्ञापन प्राधिकारी को लेखा विवरण प्रस्तुत किए जाएंगे ।
(घ) समय जिसके अन्दर अनुज्ञापन प्राधिकारी के विनिश्चय के विरुद्ध राज्य सरकार को अपील की जा सकेगी;
(ङ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना हो या किया जाए ।
[(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]
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