भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, 1992
(1992 का अधिनियम संख्यांक 34)
[1 सितंबर, 1992]
[पुनर्वास वृत्तिकों और कार्मिकों के प्रशिक्षण का विनियमन और मानीटर करने, पुनर्वास
में अनुसंधान तथा विशेष शिक्षा का संवर्धन करनेट के लिए भारतीय पुनर्वास
परिषद् के गठन का और केन्द्रीय पुनर्वास रजिस्टर रखे जाने
का तथा उनसे संबंधित या उनके आनुषंगिक
विषयों का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के तैंतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, 1992 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) अध्यक्ष" से धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन नियुक्त परिषद् का अध्यक्ष अभिप्रेत है ;
(ख) परिषद्" से धारा 3 के अधीन गठित भारतीय पुनर्वास परिषद् अभिप्रेत है ;
[(ग) असुविधाग्रस्त" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 के खंड (झ) में निर्दिष्ट किसी निःशक्तता से ग्रस्त है ;]
। । । ।
(च) सदस्य" से धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन नियुक्त सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष है ;
(छ) सदस्य-सचिव" से धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त सदस्य-सचिव अभिप्रेत है ;
(ज) मानसिक मंदता" से अभिप्रेत है किसी व्यक्ति के चित्त की अवरुद्ध या अपूर्ण विकास की अवस्था, जो विशेष रूप से बुद्धि की अवसामान्यता द्वारा अभिलक्षित होती है ;
(झ) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;
(ञ) विहित" से विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ट) मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता" से अनुसूची में सम्मिलित अर्हताओं में से कोई अर्हता अभिप्रेत है ;
(ठ) रजिस्टर" से धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन रखा गया केन्द्रीय पुनर्वास रजिस्टर अभिप्रेत है ;
(ड) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ;
[(डक) पुनर्वास" ऐसी प्रक्रिया के प्रति निर्देश करता है जिसका उद्देश्य निःशक्त व्यक्तियों को, उनका सर्वोत्तम शारीरिक, संवेदी, बौद्धिक, मानसिक या सामाजिक कृत्यकारी स्तर प्राप्त करने में और उसे बनाए रखने में समर्थ बनाना है ;]
(ढ) पुनर्वास वृत्तिक" से निम्नलिखित अभिप्रेत हैं, -
(i) श्रवण वैज्ञानिक और वाक् चिकित्सक ;
(ii) लाक्षणिक मनोविज्ञानी ;
(iii) श्रवण सहाय और कर्णसंच तकनीकी ;
(iv) पुनर्वास इंजीनियर और तकनीकी ;
(v) असुविधाग्रस्त के शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए विशेष अध्यापक ;
(vi) असुविधाग्रस्त से संबंधित व्यवसाय परामर्शी, रोजगार अधिकारी और स्थानन अधिकारी ;
(vii) बहुउद्देशीय पुनर्वास चिकित्सक, तकनीकी ; या
(viii) वृत्तिकों के ऐसे अन्य प्रवर्ग, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, परिषद् के परामर्श से, समय-समय पर,अधिसूचित करे ;
। । । ।
[(1क) उन शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो अधिनियम में हैं ।]
(2) इस अधिनियम में, किसी अधिनियमिति या उसके किसी उपबंध के प्रति किसी निर्देश का, किसी ऐसे क्षेत्र के संबंध में, जिसमें ऐसी अधिनियमिति या ऐसा उपबंध प्रवृत्त नहीं है, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के या तत्स्थानी विधि के सुसंगत उपबंध के, यदि कोई हो, प्रति निर्देश है ।
अध्याय 2
भारतीय पुनर्वास परिषद्
3. भारतीय पुनर्वास परिषद् का गठन और निगमन-(1) ऐसी तारीख से जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए भारतीय पुनर्वास परिषद् के नाम से एक परिषद् का गठन किया जाएगा ।
(2) परिषद् पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाली एक निगमित निकाय होगा, जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जंगम और स्थावर दोनों ही प्रकार की संपत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की और संविदा करने की शक्ति होगी तथा उक्त नाम से वह वाद लाएगी और उस पर वाद लाया जाएगा ।
(3) परिषद् निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात् :-
[(क) अध्यक्ष, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, पुनर्वास, निःशक्तताओं और विशेष शिक्षा क्षेत्र में वृत्तिक अर्हता सहित प्रशासन में अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से नियुक्त किया जाएगा ;
(ख) सात से अनधिक उतने सदस्य, जो निःशक्तताओं से ग्रस्त व्यक्तियों से संबंधित विषयों से संबद्ध केन्द्रीय सरकार के मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएं ;]
(ग) एक सदस्य, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ;
(घ) एक सदस्य जो भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् के महानिदेशालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ;
(ङ) दो सदस्य जो समाज कल्याण से संबंधित राज्यों या संघ राज्यक्षेत्र के मंत्रालय या विभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए वर्णाक्रमानुसार केन्द्रीय सरकार द्वारा चक्रानुक्रम से नियुक्त किए जाएंगे ;
(च) छह से अनधिक इतने सदस्य जो स्वैच्छिक संगठनों में कार्य कर रहे पुनर्वास वृत्तिकों में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे ;
(छ) चार से अनधिक इतने सदस्य जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् अधिनियम, 1956 (1956 का 102) के अधीन प्रविष्ट ऐसे चिकित्सा व्यवसायियों में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएं जो असुविधाग्रस्तों के पुनर्वास में लगे हैं ;
(ज) संसद् के तीन सदस्य, जिनमें से दो सदस्य लोक सभा द्वारा और एक सदस्य, राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किया जाएगा ;
(झ) तीन से अनधिक इतने सदस्य जो ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाएं जो निःशक्त व्यक्तियों की सहायता में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं ;
(ञ) सदस्य-सचिव, पदेन ।
(4) बोर्ड के सदस्य का पद, उसके धारक को संसद् के किसी सदन का सदस्य चुने जाने के लिए या सदस्य होने के लिए निरर्हित नहीं करेगा ।
4. अध्यक्ष और सदस्यों की पदावधि-(1) अध्यक्ष या सदस्य अपनी नियुक्ति की तारीख से दो वर्ष की अवधि तक या जब तक उसका उत्तराधिकारी सम्यक् रूप से नियुक्त नहीं कर दिया जाता तब तक, इसमें से जो भी अधिक हो, पद धारण करेगा ।
(2) परिषद् में हुई आकस्मिक रिक्ति को धारा 3 के उपबंधों के अनुसार भरा जाएगा और इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति उस अवधि के अवशिष्ट भाग के लिए पद धारण करेगा जिसके लिए वह सदस्य, जिसके स्थान पर वह नियुक्त किया गया था, उस पद को धारण करता ।
(3) परिषद् का अधिवेशन प्रति वर्ष कम से कम एक बार ऐसे समय और स्थान पर होगा, जो परिषद् द्वारा नियत किया जाए और वह अधिवेशन में कारबार के संव्यवहार में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का अनुपालन करेगी जो विहित किए जाएं ।
(4) अध्यक्ष, या यदि किसी कारण से वह परिषद् के अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है तो उस अधिवेशन में उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित कोई सदस्य, ऐसे अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा ।
(5) परिषद् के किसी अधिवेशन में उसके समक्ष आने वाले सभी प्रश्नों का विनिश्चय उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा और मत बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष का या उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा ।
5. निरर्हताएं-कोई व्यक्ति सदस्य नहीं होगा, यदि वह-
(क) विकृतचित्त का है या हो जाता है अथवा किसी सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित किया जाता है ; या
(ख) किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है या ठहराया जा चुका है जिसमें, केन्द्रीय सरकार की राय में, नैतिक अधमता अन्तर्वलित है ; या
(ग) दिवालिया न्यायनिर्णीत किया जाता है या किसी समय न्यायनिर्णीत किया गया है ।
6. सदस्यों द्वारा पद का रिक्त किया जाना-यदि कोई सदस्य, -
(क) धारा 5 में उल्लिखित निरर्हताओं में से किसी से ग्रस्त हो जाता है ; या
(ख) ऐसे प्रतिहेतु के बिना, जो परिषद् की राय में पर्याप्त है परिषद् के क्रमवर्ती तीन अधिवेशनों में उपस्थित रहता है ; या
(ग) धारा 3 की उपधारा (3) के खंड (छ) में निर्दिष्ट सदस्य की दशा में, भारतीय आयुर्विज्ञान रजिस्टर में प्रविष्ट नहीं रह जाता है,
तो ऐसा होने पर उसका स्थान रिक्त हो जाएगा ।
7. कार्यकारिणी समिति और अन्य समितियां-(1) परिषद् अपने सदस्यों में से एक कार्यकारिणी समिति और साधारण या विशेष प्रयोजनों के लिए अन्य ऐसी समितियां गठित करेगी जो वह परिषद् इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे ।
(2) कार्यकारिणी समिति, अध्यक्ष जो पदेन सदस्य होगा तथा कम से कम सात और अधिक से अधिक दस सदस्यों से, जिन्हें परिषद् द्वारा अपने सदस्यों में से नामनिर्देशित किया जाएगा, मिलकर बनेगी ।
(3) अध्यक्ष, कार्यकारिणी समिति का अध्यक्ष होगा ।
(4) कार्यकारिणी समिति या कोई अन्य समिति, ऐसी शक्तियों और कर्तव्यों के अतिरिक्त, जो इस अधिनियम द्वारा उसे प्रदत्त और उस पर अधिरोपित किए जाएं, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगी जो परिषद् किन्हीं विनियमों द्वारा, जो इस निमित्त बनाए जाएं, उसे प्रदत्त या उस पर अधिरोपित करे ।
8. परिषद् का सदस्य-सचिव और उसके कर्मचारी-(1) केन्द्रीय सरकार, परिषद् का सदस्य-सचिव, परिषद् के निदेश के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने और ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिए, जो अध्यक्ष द्वारा विहित किए जाएं या उसे प्रत्यायोजित किए जाएं, नियुक्त करेगी ।
(2) परिषद्, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, उतने अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को नियोजित करेगी जो वह इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे ।
(3) परिषद्, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, अध्यक्ष और अन्य सदस्यों को संदत्त किए जाने वाले भत्ते नियत करेगी तथा परिषद् के सदस्य-सचिव, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तें अवधारित करेगी ।
9. परिषद् में रिक्तियों से कार्यों, आदि का अविधिमान्य न होना-परिषद् या उसकी किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि, यथास्थिति, परिषद् या उसकी समिति में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ।
10. पुनर्वास परिषद् का विघटन तथा पुनर्वास परिषद् के अधिकारों, दायित्वों और कर्मचारियों का परिषद् को अंतरण-(1) परिषद् के गठन की तारीख को और उससे, पुनर्वास परिषद् विघटित हो जाएगी और ऐसे विघटन पर, -
(क) पुनर्वास परिषद् की या उससे संबंधित सभी जंगम और स्थावर संपत्ति और आस्तियां, परिषद् में निहित हो जाएंगी ;
(ख) पुनर्वास परिषद् के सभी अधिकार और दायित्व परिषद् को अन्तरित हो जाएंगे और परिषद् के अधिकार और दायित्व होंगे ;
(ग) खंड (ख) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उक्त पुनर्वास परिषद् के प्रयोजनों के लिए या उसके संबंध में पुनर्वास परिषद् द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उस तारीख के ठीक पूर्व उपगत सभी दायित्व, की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी मामले और बातें, परिषद् द्वारा, उसके साथ या उसके लिए उपगत, की गई या किए जाने के लिए वचनबद्ध समझी जाएंगी ;
(घ) पुनर्वास परिषद् को उस तारीख के ठीक पूर्व देय सभी धनराशियां, परिषद् को देय समझी जाएंगी ;
(ङ) ऐसे सभी वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां जो पुनर्वास परिषद् द्वारा या उसके विरुद्ध उस तारीख के ठीक पूर्व संस्थित की गई हैं या की जा सकती थीं परिषद् द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी या संस्थित की जा सकेंगी ; और
(च) पुनर्वास परिषद् के अधीन उस तारीख के ठीक पूर्व कोई पद धारण करने वाला प्रत्येक कर्मचारी, परिषद् में अपना पद उसी अवधि तक और पारिश्रमिक, छुट्टी, भविष्य-निधि, सेवानिवृत्ति तथा अन्य सेवांत प्रसुविधाओं की बाबत सेवा के उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर धारण करेगा जिन पर वह ऐसा पद परिषद् के गठित न होने की दशा में धारण करता और परिषद् के कर्मचारी के रूप में ऐसा करता रहेगा अथवा उस तारीख से छह मास की अवधि की समाप्ति तक ऐसा करता रहेगा, यदि ऐसा कर्मचारी ऐसी अवधि के भीतर परिषद् का कर्मचारी अपना यह विकल्प करता है कि वह परिषद् का कर्मचारी नहीं होना चाहता ।
(2) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, परिषद् द्वारा इस धारा के अधीन किसी कर्मचारी को अपनी नियमित सेवा में आमेलन किए जाने से, ऐसे कर्मचारी को उस अधिनियम या अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा में, पुनर्वास परिषद्" से ऐसी पुनर्वास परिषद् अभिप्रेत है जो सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन बनाई गई और रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी है और जो परिषद् के गठन के ठीक पूर्व उस रूप में कृत्य कर रही थी ।
अध्याय 3
परिषद् के कृत्य
11. भारत में के विश्वविद्यालयों, आदि द्वारा पुनर्वास वृत्तिकों के लिए अनुदत्त अर्हताओं को मान्यता-(1) भारत में के किसी विश्वविद्यालय या अन्य संस्था द्वारा अनुदत्त अर्हताएं, जो अनुसूची में सम्मिलित हैं, पुनर्वास वृत्तिकों के लिए मान्यताप्राप्त अर्हताएं होंगी ।
(2) कोई विश्वविद्यालय या अन्य संस्था, जो पुनर्वास वृत्तिकों के लिए ऐसी अर्हताएं अनुदत्त करती हैं, जो अनुसूची में सम्मिलित नहीं हैं, किसी ऐसी अर्हता की मान्यता के लिए केन्द्रीय सरकार को आवेदन कर सकेगी और केंद्रीय सरकार, परिषद् से परामर्श करने के पश्चात्, अधिसूचना द्वारा, अनुसूची को इस प्रकार संशोधित कर सकेगी जिससे कि उसमें ऐसी अर्हता सम्मिलित हो जाए और ऐसी किसी अधिसूचना द्वारा यह भी निदेश दिया जा सकेगा कि अनुसूची के अंतिम स्तंभ में ऐसी अर्हता के सामने यह प्रविष्टि तभी की जाए जब वह किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् अनुदत्त की जाए ।
12. भारत के बाहर की संस्थाओं द्वारा अनुदत्त अर्हताओं को मान्यता-परिषद्, भारत के बाहर के किसी देश में के किसी प्राधिकारी के साथ अर्हताओं की मान्यता के लिए व्यतिकार की स्कीम तय करने के लिए बातचीत कर सकेगी और किसी ऐसी स्कीम के अनुसरण में, केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, अनुसूची को इस प्रकार संशोधित कर सकेगी जिससे कि उसमें कोई ऐसी अर्हता सम्मिलित हो जाए जिसके लिए परिषद् ने यह विनिश्चिय किया है कि वह मान्यताप्राप्त होनी चाहिए और किसी ऐसी अधिसूचना द्वारा यह भी निदेश दिया जा सकेगा कि अनुसूची के अंतिम स्तंभ में यह घोषित करते हुए एक प्रविष्टि की जाए कि वह मान्यताप्राप्त अर्हता तभी होगी जब वह किसी विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् अनुदत्त की जाए ।
13. अनुसूची में सम्मिलित अर्हताएं रखने वाले व्यक्तियों के प्रविष्ट किए जाने के अधिकार-(1) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए, अनुसूची में सम्मिलित कोई अर्हता, रजिस्टर में प्रविष्ट किए जाने के लिए पर्याप्त अर्हता होगी ।
(2) ऐसे पुनर्वास वृत्तिक से, जिसके पास मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता है और जो रजिस्टर में प्रविष्ट है, भिन्न कोई व्यक्ति, -
(क) सरकार या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी द्वारा घोषित किसी संस्था में पुनर्वास वृत्तिक के रूप में पद या कोई ऐसा पद (जो किसी भी पदनाम से ज्ञात हो) धारण नहीं करेगा ;
(ख) भारत में कहीं भी पुनर्वास वृत्तिक के रूप में व्यवसाय नहीं करेगा ;
(ग) कोई ऐसा प्रमाणपत्र, जिसका पुनर्वास वृत्तिक द्वारा हस्ताक्षरित या अधिप्रमाणित किया जाना किसी विधि द्वारा अपेक्षित है, हस्ताक्षरित या अधिप्रमाणित करने का हकदार नहीं होगा ;
(घ) असुविधाग्रस्त से संबंधित किसी विषय पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 45 के अधीन विशेषज्ञ के रूप में किसी न्यायालय में कोई साक्ष्य देने का हकदार नहीं होगा :
परन्तु यदि किसी व्यक्ति के पास इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को मान्यताप्राप्त पुनर्वास वृत्तिक अर्हताएं हैं तो वह ऐसे प्रारंभ से छह मास की अवधि तक और यदि उसने उक्त छह मास की अवधि के भीतर रजिस्टर में प्रविष्ट किए जाने के लिए कोई आवेदन किया है तो तब तक, जब तक कि ऐसे आवेदन का निपटारा नहीं हो जाता, प्रविष्ट पुनर्वास वृत्तिक समझा जाएगा ।
[(2क) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, कोई ऐसा व्यक्ति, जो शारीरिक आयुर्विज्ञान और पुनर्वास, अस्थि विज्ञान, कान, नाक या गला, नेत्र विज्ञान या मनःचिकित्सा के क्षेत्र में डाक्टर या पैरामेडिक है और केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी अस्पताल या स्थापन में अथवा केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार की निधि से चलाए जा रहे ऐसे किसी निकाय में, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, नियोजित या कार्यरत है, उस उपधारा के खंड (क) से खंड (घ) में निर्दिष्ट कृत्यों का निर्वहन कर सकेगा ।]
(3) जो कोई व्यक्ति उपधारा (2) के किसी उपबन्ध के उल्लंघन में कार्य करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
14. पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं के बारे में जानकारी की अपेक्षा करने की शक्ति-भारत में का ऐसा प्रत्येक विश्वविद्यालय या संस्था, जो मान्यताप्राप्त अर्हता अनुदत्त करती है, ऐसी अर्हता प्राप्त करने के लिए पूरे किए जाने वाले पाठ्यक्रमों और दी जाने वाली परीक्षाओं के बारे में, उस आयु के बारे में जिस पर ऐसे पाठ्यक्रम पूरे किए जाने और परीक्षाएं दी जानी अपेक्षित हैं तथा ऐसी अर्हता प्रदत्त की जाती है और साधारणतया ऐसी अर्हता प्राप्त करने की अपेक्षाओं के बारे में ऐसी जानकारी देगी जिसकी परिषद्, समय-समय पर, अपेक्षा करे ।
15. परीक्षाओं में निरीक्षक-(1) परिषद्, किसी विश्वविद्यालय या संस्था के, जहां पुनर्वास वृत्तिकों के रूप में व्यवसाय करने के लिए शिक्षा दी जाती है, निरीक्षण के लिए अथवा किसी विश्वविद्यालय या संस्था द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में, उस विश्वविद्यालय या संस्था द्वारा मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हताओं के रूप में अनुदत्त की जाने वाली अर्हताओं की मान्यता के लिए केन्द्रीय सरकार को सिफारिश करने के प्रयोजन से उपस्थित होने के लिए उतने निरीक्षक नियुक्त करेगी जितने वह आवश्यक समझे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त निरीक्षक किसी प्रशिक्षण या परीक्षा के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे किन्तु वे शिक्षा के स्तरों की, जिनके अंतर्गत कर्मचारिवृंद, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण और ऐसी शिक्षा देने के लिए विहित अन्य सुविधाएं भी हैं, पर्याप्तता के बारे में या प्रत्येक ऐसी परीक्षा की, जिसमें वे उपस्थित होते हैं, पर्याप्तता के बारे में परिषद् को रिपोर्ट देंगे ।
(3) परिषद्, उपधारा (2) के अधीन निरीक्षक की रिपोर्ट की एक प्रति संबंधित विश्वविद्यालय या संस्था को भेजेगी और उस पर विश्वविद्यालय या संस्था की टिप्पणियों सहित एक प्रति केन्द्रीय सरकार को भी भेजेगी ।
16. परीक्षाओं में परिदर्शक-(1) परिषद्, किसी विश्वविद्यालय या संस्था का, जिसमें पुनर्वास वृत्तिकों को शिक्षा दी जाती है, निरीक्षण करने के लिए या मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हताएं अनुदत्त करने के प्रयोजन के लिए किसी परीक्षा में उपस्थित होने के लिए, उतने परिदर्शक नियुक्त कर सकेगी जितने वह आवश्यक समझे ।
(2) कोई व्यक्ति, चाहे वह परिषद् का सदस्य हो या नहीं, उपधारा (1) के अधीन परिदर्शक के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा, किन्तु किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे किसी निरीक्षण या परीक्षा के लिए धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन निरीक्षक के रूप में नियुक्त किया जाता है, उसी निरीक्षण या परीक्षा के लिए परिदर्शक के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा ।
(3) परिदर्शक किसी प्रशिक्षण या परीक्षा के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेगा किन्तु वह शिक्षा के स्तरों की, जिनके अंतर्गत कर्मचारिवृंद, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण और पुनर्वास वृत्तिकों को शिक्षा देने के लिए विहित अन्य सुविधाएं भी हैं, पर्याप्तता के बारे में या प्रत्येक ऐसी परीक्षा की, जिसमें वे उपस्थित होते हैं, पर्याप्तता के बारे में अध्यक्ष को रिपोर्ट देगा ।
(4) परिदर्शक की रिपोर्ट जब तक कि अध्यक्ष किसी विशिष्ट मामले में अन्यथा निदेश न दे गोपनीय मानी जाएगी :
परंतु यदि केन्द्रीय सरकार परिदर्शक की रिपोर्ट की प्रति की अपेक्षा करे तो परिषद् उसे देगी ।
17. मान्यता का वापस लिया जाना-(1) जब निरीक्षक या परिदर्शक की रिपोर्ट से परिषद् को यह प्रतीत होता है कि-
(क) किसी विश्वविद्यालय या संस्था में पूरे किए जाने वाले पाठ्यक्रम और दी जाने वाली परीक्षा अथवा उसके द्वारा ली गई परीक्षा में अभ्यर्थियों से अपेक्षित प्रवीणता ; या
(ख) ऐसे विश्वविद्यालय या संस्था में, कर्मचारिवृंद, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण तथा उसमें दिए जाने वाले शिक्षण और प्रशिक्षण की अन्य सुविधाएं,
परिषद् द्वारा विहित स्तरों के अनुरूप नहीं हैं, तब परिषद् उस आशय का अभ्यावेदन केन्द्रीय सरकार को करेगी ।
(2) ऐसे अभ्यावेदन पर विचार करने के पश्चात्, केन्द्रीय सरकार उसे विश्वविद्यालय या संस्था को उस अवधि की प्रज्ञापना सहित भेज सकेगी, जिसके भीतर विश्वविद्यालय या संस्था उस सरकार को अपना स्पष्टीकरण दे सकेगी ।
(3) केन्द्रीय सरकार, स्पष्टीकरण की प्राप्ति पर या जहां नियत अवधि के भीतर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है, वहां उस अवधि की समाप्ति पर, ऐसी अतिरिक्त जांच, यदि कोई हो, करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि अनुसूची में उक्त मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता के सामने यह घोषित करते हुए एक प्रविष्टि की जाए कि, यथास्थिति, वह मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता तभी होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व प्रदान की जाए अथवा यदि उक्त मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता किसी ऐसे विनिर्दिष्ट विश्वविद्यालय या संस्था के विद्यार्थियों को प्रदान की जाए तो वह मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता तभी होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व प्रदान की जाए या उक्त मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता किसी विनिर्दिष्ट विश्वविद्यालय या संस्था के संबंध में मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता तभी होगी जब वह विनिर्दिष्ट तारीख के पश्चात् प्रदान की जाए ।
18. शिक्षा के न्यूनतम स्तर-परिषद्, भारत में के विश्वविद्यालयों या संस्थाओं द्वारा मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता प्रदान करने के लिए अपेक्षित शिक्षा के न्यूनतम स्तर विहित कर सकेगी ।
19. रजिस्टर में रजिस्ट्रीकरण-परिषद् का सदस्य-सचिव, किसी व्यक्ति द्वारा विहित रीति से किए गए आवेदन की प्राप्ति पर, रजिस्टर में उसका नाम दर्ज कर सकेगा, परंतु यह तब जबकि सदस्य-सचिव का यह समाधान हो जाता है कि ऐसे व्यक्ति के पास मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता है :
[परंतु परिषद्, श्रम मंत्रालय के अधीन व्यावसायिक पुनर्वास केन्द्रों में कार्यरत व्यावसायिक अनुदेशकों और अन्य कार्मिकों को उस मंत्रालय की सिफारिश पर रजिस्टर करेगी और व्यावसायिक पुनर्वास केन्द्रों को जनशक्ति विकास केन्द्रों के रूप में मान्यता देगी :
परंतु यह और कि परिषद्, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन निःशक्तता सें संबंधित राष्ट्रीय संस्थानों और शीर्षस्थ संस्थाओं में कार्यरत कार्मिकों को उस मंत्रालय की सिफारिश पर रजिस्टर करेगी और निःशक्तता से संबंधित राष्ट्रीय संस्थानों और शीर्षस्थ संस्थाओं को जनशक्ति विकास केन्द्रों के रूप में मान्यता देगी ।]
20. ऐसे व्यक्तियों के विशेषाधिकार जो रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत किए जाते हैं-मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हताएं रखने वाले व्यक्तियों द्वारा असुविधाग्रस्त के पुनर्वास के क्षेत्र में काम करने के संबंध में इस अधिनियम में अधिकथित शर्तों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जिसका नाम रजिस्टर में तत्समय है, भारत के किसी भी भाग में पुनर्वास वृत्तिक के रूप में व्यवसाय करने का और ओषधियों या अन्य साधित्रों की बाबत कोई व्यय, प्रभार या कोई फीस, जिसका वह हकदार हो, ऐसे व्यवसाय की बाबत विधि के सम्यक् अनुक्रम में वसूल करने का हकदार होगा ।
21. वृत्तिक आचरण और रजिस्टर से नामों का हटाया जाना-(1) परिषद्, पुनर्वास वृत्तिकों के लिए वृत्तिक आचरण और शिष्टाचार के स्तर तथा आचार संहिता विहित कर सकेगी ।
(2) परिषद् द्वारा उपधारा (1) के अधीन बनाए गए विनियमों में यह विनिर्दिष्ट किया जा सकेगा कि उनका कौन सा अतिक्रमण, वृत्ति के संबंध में गर्हित आचरण अर्थात्, वृत्तिक अवचार गठित करता है और ऐसा उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होगा ।
(3) परिषद् यह आदेश कर सकेगी कि किसी व्यक्ति का नाम रजिस्टर से हटा दिया जाएगा यदि उसका उस व्यक्ति को सुनवाई का उचित अवसर दिए जाने के पश्चात्, और ऐसी अतिरिक्त जांच, यदि कोई हो, जो वह करना ठीक समझे, करने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि-
(i) उसका नाम रजिस्टर में गलती से या दुर्व्यपदेशन या किसी तात्त्विक तथ्य के दबाए जाने के कारण दर्ज किया गया है ;
(ii) उसे किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है या वह किसी वृत्तिक संबंध में गर्हित आचरण का दोषी रहा है या उसने उपधारा (1) के अधीन विहित वृत्तिक आचरण और शिष्टाचार के स्तर या आचार संहिता का अतिक्रमण किया है, जिससे वह, परिषद् की राय में, रजिस्टर में रखे जाने के लिए अयोग्य हो गया है ।
(4) उपधारा (3) के अधीन किसी आदेश द्वारा यह निदेश दिया जा सकेगा कि वह व्यक्ति जिसका नाम रजिस्टर से हटाए जाने का आदेश किया गया है, इस अधिनियम के अधीन स्थायी रूप से या उतने वर्ष की अवधि के लिए जो विनिर्दिष्ट की जाए, रजिस्ट्रीकरण के लिए अपात्र होगा ।
22. रजिस्टर से हटाए जाने के आदेश के विरुद्ध अपील-(1) जहां रजिस्टर से किसी व्यक्ति का नाम, उसके पास अपेक्षित पुनर्वास अर्हताएं न होने के आधार से भिन्न किसी आधार पर, हटा दिया जाता है वहां वह विहित रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जिनके अन्तर्गत ऐसी फीस, जो विहित की जाए, के संदाय के बारे में शर्तें भी हैं, केन्द्रीय सरकार को अपील कर सकेगा जिसका उस पर विनिश्चय अंतिम होगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई अपील ग्रहण नहीं की जाएगी यदि वह धारा 21 की उपधारा (3) के अधीन आदेश की तारीख से [साठ दिन की अवधि] की समाप्ति के पश्चात् की जाती है :
परन्तु कोई अपील उक्त तीस दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण की जा सकेगी यदि अपीलार्थी, केन्द्रीय सरकार का यह समाधान कर देता है कि उसके पास उक्त अवधि के भीतर अपील न करने के लिए पर्याप्त हेतुक था ।
23. रजिस्टर-(1) सदस्य-सचिव का यह कर्तव्य होगा कि वह रजिस्टर को इस अधिनियम के उपबंधों और परिषद् द्वारा किए गए किसी आदेश के अनुसार रखे और बनाए रखे तथा समय-समय पर रजिस्टर का पुनरीक्षण करे और उसे राजपत्र में प्रकाशित करे ।
(2) ऐसा रजिस्टर भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) के अर्थ में लोक दस्तावेज समझा जाएगा और उसकी प्रति द्वारा साबित किया जा सकेगा ।
24. परिषद् द्वारा दी जाने वाली जानकारी और उसका प्रकाशन-(1) परिषद्, केन्द्रीय सरकार को ऐसी रिपोर्ट, अपने कार्यवृत्त की प्रतियां, अपने लेखाओं की संक्षिप्तियां और ऐसी अन्य जानकारी देगी जिसकी वह सरकार अपेक्षा करे ।
(2) केन्द्रीय सरकार, परिषद् द्वारा इस धारा या धारा 16 के अधीन उसको दी गई किसी रिपोर्ट, प्रतिलिपि, संक्षिप्ति या अन्य जानकारी ऐसी रीति से प्रकाशित कर सकेगी जो वह ठीक समझे ।
25. अपराधों का संज्ञान-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान, परिषद् द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा किए गए लिखित परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
26. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, परिषद्, अध्यक्ष, सदस्य, सदस्य-सचिव या परिषद् के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध नहीं होगी ।
27. परिषद् के कर्मचारियों का लोक सेवक होना-परिषद् का अध्यक्ष, सदस्य, सदस्य-सचिव, अधिकारी और अन्य कर्मचारी, जब वे इस अधिनियम के उपबंधों या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम और विनियम के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या जब उनका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।
28. नियम बनाने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
29. विनियम बनाने की शक्ति-परिषद्, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, अधिसूचना द्वारा, साधारणतया इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए विनियम बना सकेगी और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-
(क) परिषद् की संपत्ति का प्रबंध ;
(ख) परिषद् के लेखाओं को बनाए रखना और उनकी संपरीक्षा ;
(ग) परिषद् के सदस्यों का त्यागपत्र ;
(घ) अध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य ;
(ङ) धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन कारबार के संव्यवहार में प्रक्रिया के नियम ;
(च) धारा 7 के अधीन गठित कार्यकारिणी समिति और अन्य समितियों के कृत्य ;
(छ) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन सदस्य-सचिव की शक्तियां और कर्तव्य ;
(ज) निरीक्षकों और परिदर्शकों की अर्हताएं, नियुक्ति, शक्तियां और कर्तव्य तथा उनके द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ;
(झ) किसी विश्वविद्यालय या किसी संस्था में मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हता प्रदान करने के लिए किए जाने वाले पाठ्यक्रम और अध्ययन या प्रशिक्षण की अवधि, परीक्षा के विषय और उनमें अभिप्राप्त की जाने वाली प्रवीणता के स्तर ;
(ञ) पुनर्वास वृत्तिकों के अध्ययन या प्रशिक्षण के लिए कर्मचारिवृन्द, उपस्कर, वास-सुविधा, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के स्तर ;
(ट) परीक्षाओं का संचालन, परीक्षकों की अर्हताएं और ऐसी परीक्षाओं में प्रवेश की शर्त ;
(ठ) धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन पुनर्वास वृत्तिकों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले वृत्तिक आचरण और शिष्टाचार के स्तर तथा आचार संहिता ;
(ड) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन में कथित की जाने वाली विशिष्टियां और अर्हताओं का दिया जाने वाला सबूत ;
(ढ) वह रीति जिससे और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए, धारा 22 की उपधारा (1) के अधीन अपील की जा सकेगी ;
(ण) इस अधिनियम के अधीन आवेदकों और अपीलों के संबंध में संदत्त की जाने वाली फीस ;
(त) कोई अन्य विषय, जो विहित किया जाना है या किया जाए ।
30. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
अनुसूची
(धारा 11 देखिए)
भारत में विश्वविद्यालयों या संस्थाओं द्वारा अनुदत्त मान्यताप्राप्त पुनर्वास अर्हताएं
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विश्वविद्यालय/संस्था |
पाठ्यक्रम का नाम |
अर्हता |
टिप्पणियां |
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(1) |
(2) |
(3) |
(4) |
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I. पुनर्वास इंजीनियर/तकनीकी |
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नेशनल इंस्टीट्यूट फार दि आर्थोपैडिकली हैंडीकैप्ड, बी० टी० रोड, बोनहुगली, कलकत्ता-700090 |
डिप्लोमा इन प्रासथेटिक एण्ड आर्थोटिक इंजीनियरिंग (2 वर्ष) |
डिप्लोमा |
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डिपार्टमेंट आफ रिहैबिलिटेशन, सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली |
कोर्स इन प्रासथेटिक्स एण्ड आर्थोटिक्स (3 वर्ष) |
डिप्लोमा |
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गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट आफ रिहैबिलिटेशन आफ मैडिसिन, के० के० नगर, मद्रास-600083 |
डिप्लोमा इन आर्थोटिक्स एण्ड प्रासथेटिक्स |
डिप्लोमा |
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नेशनल इंस्टीट्यूट आफ रिहैबिलिटेशन ट्रेनिंग एंड रिसर्च, ओलातपुर, डाकघर बेरोई, जिला कटक (उड़ीसा) |
डिप्लोमा इन प्रासथेटिक एण्ड आर्थोटिक इंजीनियरिंग (2 वर्ष) |
डिप्लोमा |
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भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास का अखिल भारतीय संस्थान, हाजी अली, खाड़े मार्ग, महालक्ष्मी, मुम्बई-400034 |
बी० एस० सी० (प्रासथेटिक एण्ड आर्थोटिक) |
डिग्री |
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स्कूल आफ प्रासथेटिक्स एण्ड आर्थोटिक्स, के० के० नगर, मद्रास-600083 |
डिप्लोमा इन प्रासथेटिक्स एण्ड आर्थोटिक्स इंजीनियरिंग (2 वर्ष की अवधि) |
डिप्लोमा |
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शेफलिन लेपरौसी रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग सेंटर, कारीगिरी, एस० एल० आर० सैनिटोरियम, डाक घर उत्तरी आर्कोट जिला (दक्षिण भारत) |
प्रासथेटिक टैक्नीशियन कोर्स (18 मास) |
डिप्लोमा |
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II. श्रवणविशेषज्ञ और वाक् चिकित्सक |
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आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ स्पीच एण्ड हियरिंग, मानसा गंगोत्री, मैसूर-576006 |
बी० एससी० (स्पीच एण्ड हियरिंग) (3 वर्ष की अवधि) |
डिग्री |
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अली यावर जंग नेशनल इंस्टीट्यूट फार दि हियरिंग हैंडीकैप्ड, बांद्रा (पश्चिम), मुम्बई-400050 |
बी० एससी० (ए० एंड एस० टी०) (3 वर्ष की अवधि) |
डिग्री |
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पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एण्ड रिसर्च, चंडीगढ़-160012 |
बी० एससी०(स्पीच एण्ड हियरिंग) (3 वर्ष की अवधि) |
डिग्री |
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टोपीवाला नेशनल मेडिकल कालेज एण्ड बी० वाई० एल० नायर चैरिटेबल हास्पीटल, डा० ए० एल० नायर रोड, मुम्बई-400008 |
डिप्लोमा इन आडियोलाजी एंड स्पीच थेरापी (बी० एससी०) |
डिप्लोमा |
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, अंसारी नगर, नई दिल्ली |
बी० एससी० (आनर्स) इन (स्पीच एण्ड हियरिंग) |
डिग्री |
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III. निःशक्त व्यक्तियों के लिए विशेष विद्यालयों और समेकित विद्यालयों के अध्यापक |
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श्री के० एल० इंस्टीट्यूट फार दि डेफ, 51, विद्या नगर, भावनगर-364002 (गुजरात) |
टीचर्स ट्रेनिंग फार दि डेफ, (1 वर्ष की अवधि) |
डिप्लोमा |
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दि एडुकेशनल आडियोलाजी एंड रिसर्च सेंटर स्कूल फार दि डेफ पोनम", 67 नेपियन सी रोड, मुम्बई-400006 |
सर्टिफिकेट कोर्स फार टीचर्स आफ दि डैफ (10 मास की अवधि) |
प्रमाणपत्र |
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वी० आर० रुईया मूक-बधिर विद्यालय, पुणे-30 |
टीचर्स ट्रेनिंग डिप्लोमा कोर्स फार डेफ स्टूडेंट्स, (1 वर्ष की अवधि) |
डिप्लोमा |
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लिटल फ्लावर कान्वेंट हायर सेकेन्डरी स्कूल फार दि डेफ, 127, जी० एन० रोड, केथेड्रल डाक घर, मद्रास-600006 |
(i) जूनियर डिप्लोमा इन टीचिंग दि डेफ (ii) सीनियर डिप्लोमा इन टीचिंग दि डेफ (10 मास की अवधि) |
डिप्लोमा
डिप्लोमा |
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दि ब्लांइड रिलीफ एसोशिएसन, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, नई दिल्ली-110003 |
वन इयर डिप्लोमा कोर्स फार ट्रेनिंग आफ टीचर्स आफ दि ब्लाइंड |
डिप्लोमा |
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दि कलार्क स्कूल फार दि डेफ, साधना" नं० 3 , थर्ड स्ट्रीट, डा० राधाकृष्णन रोड, माइलापुर, मद्रास-600004 |
(I) टीचर्स ट्रेनिंग फार दि डेफ (ii) टीचर्स ट्रेनिंग फार दि मेंटली रिटार्डेड |
डिप्लोमाडिप्लोमा |
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रामकृष्ण मिशन, ब्लाइंड बायज अकादमी, हरेन्द्रपुर-743508, पश्चिमी बंगाल |
(i) इन-सर्विस प्राइमरी लेवल टीचर्स आफ दि विजुअली हैंडिकैप्ड (18 मास की अवधि) (ii) सेकेंडरी लेवल टीचर्स आफ दि विजुअली हैंडीकैप्ड (10 मास की अवधि) |
डिप्लोमा
डिप्लोमा |
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गवर्नमेंट हायर सेकेन्डरी स्कूल फार दि ब्लाइंड, पूनामल्ली, मद्रास-600056 |
(i) डिप्लोमा इन टीचिंग दि ब्लाइंड (विद्यालय में 6 मास पत्राचार द्वारा 12 मास) (ii) स्पेशल एग्जामिनेशन इन टीचिंग दि ब्लाइंड (10 मास का पाठ्यक्रम) |
डिप्लोमा
प्रमाणपत्र |
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अली यावर जंग नेशनल इंस्टीट्यूट फार दि हियरिंग हैंडीकैप्ड, बांद्रा (पश्चिम), मुम्बई-400050 |
(i) बी० एड० (डेफ) (ii) बी० एड० (डैफाइन रिजनल लैंगुएज़ेस) |
स्नातकोत्तर डिप्लोमा डिप्लोमा |
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IV. बहुउद्देशीय पुनर्वास चिकित्सक/तकनीकी/सहायक/कर्मकार |
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डिपार्टमेंट आफ रिहैबिलिटेशन, सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली-110029 |
वन ईयर सर्टिफिकेट कोर्स फार मल्टी-रिहैबिलिटेशन वर्कर |
प्रमाणपत्र |
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V. व्यावसायिक परामर्शी |
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राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्, श्री अरविंद मार्ग, नई दिल्ली-110016 |
डिप्लोमा कोर्स इन एजुकेशनल एंड वोकेशनल गाइडेंस (9 मास की अवधि) |
डिप्लोमा |
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भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास का अखिल भारतीय संस्थान, हाजी अली, खाड़े मार्ग, महालक्ष्मी, मुम्बई-400034 |
पी० जी० डी० आर० (वोकेशनल गाइडेंस) |
डिप्लोमा |
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VI. डिप्लोमा इन कम्युनिकेशन डिसआर्डर्स |
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अली यावर जंग नेशनल इंस्टीट्यूट फार दि हियरिंग हैंडिकैप्ड बांद्रा, (पश्चिम), मुम्बई-400050 |
डिप्लोमा इन कम्युनिकेशन डिसआर्डर्स (1 वर्ष) |
डिप्लोमा |
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