सालार जंग संग्रहालय अधिनियम, 1961
(1961 का अधिनियम संख्यांक 26)
[19 मई, 1961]
हैदराबाद स्थित सालार जंग पुस्तकालय के साथ सालार जंग संग्रहालय को
राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने के लिए और उसके
प्रशासन और कुछ अन्य सम्बद्ध विषयों के बारे में
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के बारहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सालार जंग संग्रहालय अधिनियम, 1961 है ।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. सालार जंग पुस्तकालय सहित सालार जंग संग्रहालय का राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया जाना-एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि आंध्र प्रदेश राज्य में हैदराबाद स्थित सालार जंग पुस्तकालय सहित सालार जंग संग्रहालय राष्ट्रीय महत्व की संस्था है ।
3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-
(क) बोर्ड" से धारा 4 के अधीन स्थापित बोर्ड अभिप्रेत है;
(ख) अध्यक्ष" से बोर्ड का अध्यक्ष अभिप्रेत है;
(ग) निधि" से धारा 19 में निर्दिष्ट निधि अभिप्रेत है;
(घ) सदस्य" से बोर्ड का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है;
(ङ) संग्रहालय" से इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया गया सालार जंग पुस्तकालय सहित सालर जंग संग्रहालय अभिप्रेत है;
(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(छ) राज्य सरकार" से आन्ध्र प्रदेश राज्य सरकार अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
सालार जंग संग्रहालय बोर्ड
4. बोर्ड का निगमन और स्थापना-(1) उस तारीख से जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सालार जंग संग्रहालय बोर्ड के नाम से ज्ञात होने वाला एक बोर्ड स्थापित किया जाएगा ।
(2) बोर्ड उपर्युक्त नामधारी, शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला और, इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन, सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की और संविदा करने की शक्ति रखने वाला निगमित निकाय होगा, और वह इस नाम से वाद ला सकेगा और उसके विरुद्ध वाद लाए जा सकेंगे ।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के सिवाय, अनुसूची के भाग 1 या भाग 2 में निर्दिष्ट किसी वस्तु या चीज का विक्रय या अन्यथा व्ययन नहीं करेगा ।
5. बोर्ड का गठन-(1) बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्: -
(क) आन्ध्र प्रदेश का राज्यपाल, पदेन अध्यक्ष;
(ख) संग्रहालय से सम्बन्धित मामलों से सम्पृक्त मंत्रालय में भारत सरकार का सचिव, पदेन;
(ग) हैदराबाद निगम का महापौर, पदेन,
(घ) उस्मानिया विश्वविद्यालय का कुलपति, पदेन;
(ङ) आन्ध्र प्रदेश का महालेखापाल, पदेन;
(च) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट एक व्यक्ति, जो स्वर्गीय नवाब सालार जंग बहादुर के, जिनकी मृत्यु 1949 के मार्च के दूसरे दिन हुई थी, कुटुम्ब का सदस्य होगा;
(छ) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट तीन व्यक्ति जो जहां तक हो सके ऐसे व्यक्ति होंगे जिनको संग्रहालय और पुस्कालयों से संबंधित मामलों का ज्ञान और अनुभव है;
(ज) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट दो व्यक्ति ।
(2) इस धारा के अधीन प्रत्येक नामनिर्देशन का केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किए जाने पर तुरन्त प्रभाव होगा ।
6. पदावधि-(1) नामनिर्दिष्ट सदस्यों की पदावधि इतनी होगी जो विहित की जाए ।
(2) कोई नामनिर्दिष्ट सदस्य केन्द्रीय सरकार को लिखित रूप में सूचना देकर अपना पद त्याग सकता है, और केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में ऐसे पद त्याग की अधिसूचना होने पर यह समझा जाएगा कि उसने पद रिक्त कर दिया है ।
(3) उपधारा (2) के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्य के पदत्याग के कारण या किसी अन्य कारणवश हुई आकस्मिक रिक्ति को नए नामनिर्देशन द्वारा भरा जा सकता है ।
(4) पदावरोही सदस्य पुनः नामनिर्देशन का पात्र होगा ।
7. सदस्य की अस्थायी अनुपस्थिति-(1) यदि कोई नामनिर्दिष्ट सदस्य किसी अंग-शैथिल्य के कारण या अन्यथा अपने कर्तव्यों को करने में अस्थायी रूप से असमर्थ हो जाता है या छुट्टी पर होने के कारण या अन्यथा ऐसी परिस्थितियों में अनुपस्थित है जिसमें उसका पद रिक्त करना अन्तर्वलित नहीं है, तो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, उसकी अनुपस्थिति के दौरान उसके स्थान पर कार्य करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को नामनिर्दिष्ट कर सकती है ।
(2) बोर्ड का कोई कार्य केवल निम्नलिखित कारणों से अविधिमान्य नहीं होगा: -
(क) बोर्ड में कोई रिक्ति या उसके गठन में कोई दोष; या
(ख) उसके सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के नामनिर्देशन में कोई दोष; या
(ग) उसकी प्रक्रिया में कोई अनियमितता जिसका मामले के गुणागुण पर प्रभाव न पड़ता हो ।
8. व्यक्तियों का नामनिर्देशन करने वाली सरकार के कर्तव्य आदि-(1) बोर्ड के सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति का नामनिर्देशन करने के पहले, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, अपना यह समाधान कर लेगी कि उस व्यक्ति का ऐसा कोई वित्तीय या अन्य हित नहीं होगा जिसका बोर्ड के सदस्य के रूप में उसके द्वारा अपने कृत्यों के प्रयोग या निर्वहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े, और, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार समय-समय पर अपने द्वारा नामनिर्दिष्ट बोर्ड के प्रत्येक सदस्य की बाबत अपना यह समाधान भी कर लेगी कि उसका कोई हित नहीं है और कोई व्यक्ति जो बोर्ड का सदस्य है या जिसको, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, नामनिर्दिष्ट करने की प्रस्थापना करती है और जिसने अपनी सहमति दे दी है, जब भी केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा ऐसा करने का अनुरोध किया जाए, ऐसी जानकारी देगा जो सरकार इस उपधारा के अधीन अपने कर्तव्यों के पालन के लिए आवश्यक समझे ।
(2) कोई नामनिर्दिष्ट सदस्य जो किसी भी प्रकार, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, बोर्ड द्वारा की गई या की जाने के लिए प्रस्थापित किसी संविदा में हितबद्ध है, सुसंगत परिस्थितियों से उसकी जानकारी में आने के पश्चात् यथासम्भव शीघ्र, बोर्ड की बैठक में अपना मत प्रकट करेगा और यह प्रकटीकरण बोर्ड के कार्यवृत्त में अभिलिखित किया जाएगा और वह सदस्य प्रकटीकरण के पश्चात् उस संविदा की बाबत बोर्ड के किसी विचार-विमर्श या विनिश्चय में भाग नहीं लेगा ।
9. बोर्ड की बैठक-(1) बोर्ड ऐसे समय और स्थानों पर बैठक करेगा और उपधारा (2), (3) और (4) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, उसकी बैठकों में (बैठकों में गणपूर्ति सहित) संव्यवहार करने के बारे में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्धित किया जाए ।
(2) अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में, उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से चुना गया कोई सदस्य, बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करेगा ।
(3) यदि धारा 5 के खण्ड (ख), (ग), (घ) और (ङ) में निर्दिष्ट कोई सदस्य बोर्ड की किसी बैठक में उपस्थित होने में असमर्थ है तो, वह, अध्यक्ष के पूर्वानुमोदन से, किसी व्यक्ति को लिखित रूप में ऐसा करने के लिए प्राधिकृत कर सकता है ।
(4) बोर्ड की बैठक में सभी प्रश्न उपस्थित और मतदाता सदस्यों के मतों की बहुसंख्या से विनिश्चित किए जाएंगे और समान मतों की दशा में अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले सदस्य का द्वितीय या निर्णायक मत होगा ।
10. विशिष्ट प्रयोजनों के लिए कुछ व्यक्तियों की बोर्ड से अस्थायी सहयुक्ति-(1) बोर्ड ऐसी रीति में और ऐसे प्रयोजनों के लिए जिनके लिए इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्ध किए जाए किसी व्यक्ति को जिसकी सहायता या सलाह वह इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के पालन के लिए चाहता है, अपने साथ सहयुक्त कर सकता है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन बोर्ड द्वारा अपने साथ किसी प्रयोजन के लिए सहयुक्त व्यक्ति को उसी प्रयोजन के बारे में बोर्ड की चर्चा में भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु इस धारा के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।
11. बोर्ड के आदेशों और अन्य लिखतों का अधिप्रमाणित किया जाना-बोर्ड द्वारा किए गए सभी आदेश और विनिश्चय अध्यक्ष के या इस निमित्त बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य सदस्य के हस्ताक्षर द्वारा अधिप्रमाणित किए जाएंगे और बोर्ड द्वारा जारी किए गए सभी अन्य लिखत इस निमित्त इसी रीति में प्राधिकृत बोर्ड के किसी अधिकारी के हस्तारक्षर द्वारा अधिप्रमाणित किए जाएंगे ।
12. बोर्ड का कर्मचारिवृन्द-(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का दक्षतापूर्वक निर्वहन करने के लिए अपने को समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए ऐसी संख्या में अधिकारी और अन्य कर्मचारी नियुक्त कर सकता है जो वह ठीक समझे ।
(2) ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें वे होंगी जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उपबन्धित की जाएं ।
13. विद्यमान कर्मचारियों की सेवाओं का बोर्ड को अन्तरण-इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, बोर्ड की स्थापना की तारीख के ठीक पहले संग्रहालय में नियोजित प्रत्येक व्यक्ति उस तारीख से ही जो बोर्ड अवधारित करे, ऐसे पदाभिधान सहित बोर्ड का कर्मचारी हो जाएगा और उसमें अपना पद या सेवा उसी सेवाधृति में उसी पारिश्रमिक पर और उन्हीं शर्तों और निबन्धनों पर धारण करेगा जिन पर वह ऐसी तारीख को धारण करता यदि बोर्ड स्थापित नहीं किया जाता और ऐसा ही करता रहेगा जब तक बोर्ड में उसका नियोजन समाप्त नहीं हो जाता है या जब तक उसकी सेवाधृति, पारिश्रमिक और शर्तें और निबन्धन बोर्ड द्वारा सम्यक्तः परिवर्तित नहीं हो जाते हैं :
परन्तु ऐसे किसी व्यक्ति की सेवाधृति, पारिश्रमिक और सेवा की शर्तें और निबन्धन उसके लिए अहितकर रूप से केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना परिवर्तित नहीं की जाएंगी ।
14. संग्रहालय की अवस्थिति-संग्रहालय हैदराबाद में स्थित होगा ।
अध्याय 3
बोर्ड के कृत्य
15. बोर्ड के कर्तव्य-(1) बोर्ड का यह साधारण कर्तव्य होगा कि वह संग्रहालय का दक्षतापूर्वक प्रबन्ध करे और संग्रहालय के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना, अभिवृद्धि, गठन और क्रियान्वयन करे और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करे जो केन्द्रीय सरकार, समय-समय पर बोर्ड को सौंपे ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड निम्नलिखित के लिए ऐसे पग उठा सकता है जो वह ठीक समझे :-
(क) संग्रहालयों और पुस्तकालयों से सम्बन्धित मामलों मे शिक्षण और अनुसंधान के लिए और ऐसे विषयों में विद्या की वृद्धि और ज्ञान के प्रसार के लिए उपबन्ध करने के लिए; और
(ख) ऐसी अन्य सभी बातों को करने के लिए जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों ।
16. बोर्ड की शक्तियां-(1) ऐसी शर्तों और निबन्धनों के अधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, बोर्ड ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है जो इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के पालन के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हों ।
(2) ऐसे विनियमों के अधीन रहते हुए जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए जाएं, बोर्ड समय-समय पर,-
(क) ऐसी वस्तुएं या चीजें क्रय या अर्जित कर सकता है जो बोर्ड की राय में, संग्रहालयों में रखने योग्य हों; या
(ख) खण्ड (क) के अधीन क्रय की गई या अर्जित किसी वस्तु या चीज का विनिमय या विक्रय कर सकता है या उसे नष्ट कर सकता है; या
(ग) अनुसूची के भाग 1 या भाग 2 में विनिर्दिष्ट किसी वस्तु या चीज को भारत के अन्दर उधार दे सकता है या भारत के अन्दर या बाहर, खण्ड (क) के अधीन क्रय की गई या अर्जित किसी वस्तु या चीज को उधार दे सकता है ।
अध्याय 4
वित्त, लेखे, संपरीक्षा और रिपोर्ट
17. सम्पत्ति का निहित लेना-अनुसूची के भाग 1, 2 और 3 में विनिर्दिष्ट सभी सम्पत्तियां, जो ऐसी सम्पत्तियां हैं जो आन्ध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की फाइल पर 1958 के सी०एस० सं० 13 में पारित डिक्री के आधार पर केन्द्रीय सरकार में आत्यन्तिक रूप से निहित सम्पत्ति है, बोर्ड के स्थापन की तारीख से ही, बोर्ड में निहित हो जाएंगी ।
18. केन्द्रीय सरकार द्वारा बोर्ड को अनुदान-इस अधिनियम के अधीन बोर्ड को अपने कृत्यों का दक्षतापूर्वक निर्वहन करने में समर्थ बनाने के लिए, केन्द्रीय सरकार, इस निमित्त, संसद् द्वारा विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात्, बोर्ड को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसी धनराशियां, अनुदान, उधार या अन्यथा किसी रूप में देगी जो सरकार आवश्यक समझे ।
19. बोर्ड की निधि-(1) बोर्ड एक निधि रखेगा जिसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे: -
(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा संदत्त सभी धन;
(ख) इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत सभी फीस और अन्य प्रभार;
(ग) बोर्ड द्वारा अनुदान, दान, संदान, उपकृति, वसीयत, चन्दा, अभिदाय या अन्तरण के रूप में प्राप्त सभी धन;
(घ) बोर्ड द्वारा किसी अन्य रूप में या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त अन्य सभी धन ।
(2) बोर्ड इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के अनुपालन के लिए ऐसी राशियां व्यय कर सकता है जो वह ठीक समझे और ऐसी राशियां निधि में संदेय व्यय समझी जाएंगी ।
(3) धन की एक राशि जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा उपबन्धित की जाने वाली रकम से अधिक नहीं होगी भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 में यथापरिभाषित किसी अनुसूचित बैंक में या केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित किसी अन्य बैंक के चालू खाते में रखी जाएगी, किन्तु उस रकम से अधिक सभी धन भारतीय रिजर्व बैंक में या भारतीय रिजर्व बैंक के अभिकर्ताओं के पास जमा किए जाएंगे या ऐसी रीति में विनिधान किए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार अनुमोदित करे ।
20. बजट-(1) बोर्ड, प्रत्येक वर्ष में ऐसी तारीख तक जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, उसके अनुमोदनार्थ उसके द्वारा विनिर्दिष्ट प्ररूप में आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए बजट प्रस्तुत करेगा जिसमें प्राक्कलित प्राप्ति और व्यय, और आने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान केन्द्रीय सरकार से अपेक्षित राशियां दर्शाई जाएंगी ।
(2) यदि केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदत्त कोई राशि किसी वित्तीय वर्ष में भागतः या पूर्णतः अव्ययित रहती है, तो वह आने वाले वित्तीय वर्ष में अग्रेषित की जाएगी और केन्द्रीय सरकार द्वारा उस वर्ष के लिए उपबन्ध की जाने वाली राशि अवधारित किए जाने के लिए लेखे में ली जाएगी ।
(3) उपधारा (4) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए बोर्ड द्वारा या उसके निमित्त कोई राशि व्यय नहीं की जाएगी, जब तक कि वह व्यय केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित बजट के उपबन्धों के अन्तर्गत नहीं आता है ।
(4) ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार अधिरोपित करना ठीक समझे, बोर्ड व्यय के एक शीर्ष से दूसरे को या एक प्रयोजन के लिए किए गए उपबन्ध को किसी अन्य प्रयोजन के लिए पुनर्विनियोजित करने की मंजूरी दे सकता है ।
21. लेखे और संपरीक्षा-(1) बोर्ड उचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और तुलन पत्र सहित लेखे और वार्षिक कथन ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो विनिर्दिष्ट किए जाएं और जो ऐसे साधारण निदेशों के अनुसार हों जो केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के परामर्श से जारी करे ।
(2) बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा भारत के नियन्त्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा प्रति वर्ष की जाएगी और ऐसी संपरीक्षा के सम्बन्ध में उसके द्वारा उपगत व्यय भारत के नियन्त्रक और महालेखापरीक्षक को बोर्ड द्वारा संदेय होगा ।
(3) भारत के नियन्त्रक और महालेखापरीक्षक को और बोर्ड के लेखाओं की संपरीक्षा के सम्बन्ध में उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी संपरीक्षा के सम्बन्ध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो भारत के नियन्त्रक और महालेखा-परीक्षक को सरकार के लेखाओं की संपरीक्षा के सम्बन्ध में हैं, और विशिष्टतया, पुस्तकों, लेखाओं, सम्बद्ध वाउचरों और अन्य दस्तावेजों और कागज पत्रों को पेश करने की मांग करने का और बोर्ड के कार्यालय और संग्रहालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियन्त्रक और महालेखापरीक्षक द्वारा या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्ति किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित बोर्ड के लेखे, उनकी संपरीक्षा की रिपोर्ट सहित, केन्द्रीय सरकार को प्रतिवर्ष अग्रेषित किए जाएंगे ।
22. विवरणियां और रिपोर्ट-(1) बोर्ड केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर और ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में जो केन्द्रीय सरकार निदेश करे, ऐसी विवरणियां, कथन और विशिष्टियां देगा जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ के पश्चात् यथासम्भव शीघ्र, केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय के अन्दर जो केन्द्रीय सरकार विनिर्दिष्ट करे, पूर्वतन वित्तीय वर्ष के दौरान बोर्ड के क्रियाकलापों का सही और पूरा लेखा-जोखा देते हुए और चालू वित्तीय वर्ष के दौरान जिन क्रियाकलापों के लिए जाने की सम्भाव्यता है उनका वृत्त देते हुए एक रिपोर्ट देगा ।
अध्याय 5
प्रकीर्ण
23. केन्द्रीय सरकार की बोर्ड को निदेश जारी करने की शक्ति-(1) इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में बोर्ड, नीति के प्रश्नों पर ऐसे निदेशों से आबद्ध होगा जो केन्द्रीय सरकार समय-समय पर उसे दे:
परन्तु इस उपधारा के अधीन निदेश देने के पहले बोर्ड को अपना मत व्यक्त करने का अवसर दिया जाएगा ।
(2) कोई प्रश्न नीति का प्रश्न है या नहीं इस पर केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा ।
24. शक्तियों और कर्तव्यों का प्रत्यायोजन-बोर्ड लिखित में साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकता है कि वे सभी शक्तियां और कर्तव्य जिनका वह प्रयोग या निर्वहन कर सकता है या उनमें से कुछ, ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन, यदि कोई हों, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, बोर्ड के किसी सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जो इस निमित्त आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रयोग की जाएंगी या निर्वहन किए जाएंगे ।
25. बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-बोर्ड के सभी अधिकारी और कर्मचारी, जब वे इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबन्धों के अनुसरण में कार्य कर रहें हो या इस प्रकार जिनका कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे ।
26. इस अधिनियम के अधीन की गई कार्रवाइयों का संरक्षण-इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही बोर्ड या बोर्ड के किसी सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
27. केन्द्रीय सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड से परामर्श के पश्चात्, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के लिए नियम बना सकती है ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं बातों के लिए उपबन्ध कर सकते हैं, अर्थात्: -
(क) धारा 5 की उपधारा (1) के खण्ड (च), (छ) और (ज) के अधीन नामनिर्दिष्ट सदस्यों की पदावधि और आकस्मिक रिक्तियों के भरने की रीति;
(ख) अध्यक्ष से भिन्न किसी सदस्य को संदेय यात्रा और अन्य भत्ते;
(ग) बोर्ड की सदस्यता के लिए निरर्हताएं और ऐसे सदस्य को जो किसी निरर्हता से ग्रस्त है या हो जाता है हटाने के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(घ) वे शर्तें जिनके अधीन, और वह ढंग जिसके द्वारा, बोर्ड द्वारा या बोर्ड की ओर से संविदाएं की जा सकती हैं;
(ङ) संग्रहालय में प्रवेश के लिए उद्ग्रहण की जाने वाली फीस;
(च) कोई अन्य बात जो विहित की जानी हो या विहित की जाए ।
[(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
28. बोर्ड की विनियम बनाने की शक्ति-(1) बोर्ड, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए अपने को समर्थ करने के लिए ऐसे विनियम बना सकता है जो इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया, और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं बातों के लिए उपबन्ध कर सकते हैं, अर्थात्: -
(क) वे शर्तें और निर्बन्धन जिनके अधीन बोर्ड में निहित वस्तुएं और चीजें उधार दी जा सकती हैं;
(ख) बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें;
(ग) बोर्ड की बैठकों का समय और स्थान, ऐसी बैठकों में संव्यवहार करने के बारे में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और बैठक में संव्यवहार के लिए आवश्यक गणूर्ति;
(घ) बोर्ड की बैठकों के कार्यवृत्त का रखना और केन्द्रीय सरकार को उसकी प्रतियों का पारेषण;
(ङ) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड को अपने कृत्यों के पालन में सहायता और सलाह देने के प्रयोजन के लिए बोर्ड द्वारा उपसमितियों या व्यक्तियों के संगमों की नियुक्ति;
(च) वे व्यक्ति जिनके द्वारा और वह रीति जिसमें बोर्ड की ओर से संदाय, निक्षेप और विनिधान किए जा सकते हैं;
(छ) अधिकतम राशि जो चालू खाते में रखी जा सकती है;
(ज) रजिस्टर और लेखाओं का रखना;
(झ) संग्रहालय में पुस्तकों, पाण्डुलिपियों और अन्य वस्तुओं और चीजों की सूची और तालिका बनाना;
(ञ) संग्रहालय में पुस्तकों, पाण्डुलिपियों और अन्य वस्तुओं और चीजों के परिरक्षण के लिए कार्यवाही करना;
(ट) संग्रहालय का साधारण प्रबन्ध;
(ठ) संग्रहालय में प्रवेश से भिन्न प्रयोजनों के लिए फीस का उद्ग्रहण;
(ड) कोई अन्य बात जिसकी बाबत बोर्ड की राय में, इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के निर्वहन के लिए उपबन्ध आवश्यक है ।
(3) केन्द्रीय सरकार, बोर्ड से परामर्श के पश्चात्, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी विनियम का जिसका उसने अनुमोदन किया है संशोधन, फेरफार या विखण्डन कर सकती है और विनियम का तदनुसार प्रभाव होगा, किन्तु उपधारा (1) और (2) के अधीन बोर्ड की शक्ति के प्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ।
[(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम और उपधारा (3) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना बनाए या जारी की जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा/रखी जाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम या अधिसूचना में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा/होगी । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए या अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा/जाएगी । किन्तु विनियम या अधिसूचना के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
अनुसूची
(धारा 17 देखिए)
भाग 1
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में 1958 के सं० 13 वाले सिविल वाद में फाइल की गई तारीख 2 दिसम्बर, 1958 की समझौते की अर्जी के साथ, जिसके निबन्धनों के अनुसार उस वाद में 1959 के मार्च के पांचवें दिन उस वाद में डिक्री पारित की गई थी, उपाबद्ध ए" विहित सूची में सम्मिलित सभी प्राचीन वस्तुएं, कौतुक वस्तुएं, केबिनेट, कलाकृतियां, मूर्तिया, रंगचित्र, फर्नीचर और अन्य सभी वस्तुएं ।
भाग 2
उक्त समझौता अर्जी के साथ उपाबद्ध बी" चिह्नित सूची में सम्मिलित सम्पूर्ण पुस्तकालय जिसके अन्तर्गत सभी भाषाओं की पुस्तकें, कतें और पांडुलिपियां हैं चाहे कागज पर या अन्य सामग्री पर मुद्रित हों या हस्तलिखित हों ।
भाग 3
उक्त समझौता अर्जी के साथ उपाबद्ध सी" चिह्नित रेखाचित्र में वर्णित और अंकित लगभग 28,390 वर्ग गज माप वाली भूमि ।
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