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कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1995 ( Textile Undertakings (Nationalisation) Act, 1995 )


 

कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1995

(1995 का अधिनियम संख्यांक 39)

[8 सितम्बर, 1995]

विभिन्न किस्मों के वस्त्र और सूत के उत्पादन और वितरण में वृद्धि करने

की दृष्टि से जिससे जनसाधारण का हित साधन हो सके, पहली

अनुसूची में विनिर्दिष्ट कपड़ा उपक्रमों का और ऐसे कपड़ा

उपक्रमों के संबंध में स्वामियों के अधिकार, हक

और हित के अर्जन और अंतरण का और

उनसे संबंधित या उनके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध

करने के लिए

अधिनियम

पहली अनुसूची के स्तम्भ (3) में विनिर्दिष्ट कपड़ा कम्पनियां, उक्त अनुसूची के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट अपने उपक्रमों के माध्यम से विभिन्न किस्मों के वस्त्र और सूत के विनिर्माण में लगी हुई हैं ;  

और अर्जन होने तक उक्त कपड़ा उपक्रमों का प्रबन्ध, यथास्थिति, कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1983 (1983 का 40) की धारा 3 के अधीन या लक्ष्मीरत्तन एण्ड एथरटन वेस्ट काटन मिल्स (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1976 (1976 का 98) की धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किया गया था ;

और उक्त कपड़ा उपक्रमों को व्यवहार्य बनाए रखने की दृष्टि से बहुत अत्यधिक धनराशि का विनिधान किया गया है;

और कम्पनियों के उक्त कपड़ा उपक्रमों द्वारा वस्त्र और सूत के विनिर्माण, उत्पादन और वितरण के लिए उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए बहुत बड़ी धनराशि का और विनिधान किया जाना आवश्यक है;

और ऐसा विनिधान इसलिए भी आवश्यक है कि उक्त कपड़ा उपक्रमों में नियोजित कर्मकारों का नियोजन निरंतर बना रहे ;

और लोकहित में यह आवश्यक है कि उक्त कपड़ा कंपनियों के उक्त कपड़ा उपक्रमों का यह सुनिश्चित करने के लिए अर्जन किया जाए कि कंपनियों के उक्त उपक्रमों द्वारा विभिन्न किस्मों के वस्त्र और सूत का, जो देश की आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है, विनिर्माण, उत्पादन और वितरण निरन्तर जारी रखकर जनसाधारण के हितों की पूर्ति की जा सके ;

भारत गणराज्य के छियालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1995 है ।

(2) धारा 31 और धारा 32 के उपबंध तत्काल प्रवृत्त होंगे और इस अधिनियम के शेष उपबंध, 1 अप्रैल, 1994 को प्रवृत्त हुए समझे जाएंगे । 

2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- 

(क) नियत दिन" से 1 अप्रैल, 1994 अभिप्रेत है ; 

(ख) बैंक" से अभिप्रेत है,-

                                                (i) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक ; 

                (ii) भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में परिभाषित समनुषंगी बैंक ;

(iii) बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन गठित तत्स्थानी नया बैंक ; 

(iv) बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित तत्स्थानी नया बैंक ; 

(v) कोई अन्य बैंक, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 के खंड (ङ) में परिभाषित कोई अनुसूचित बैंक है ;

                                (ग) आयुक्त" से धारा 17 के अधीन नियुक्त संदाय आयुक्त अभिप्रेत है ; 

                (घ) अभिरक्षक" से, यथास्थिति, कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1983 (1983 का 40) की धारा 4 के अधीन या लक्ष्मीरत्तन एण्ड एथरटन वेस्ट काटन मिल्स (प्रबंध-ग्रहण) अधिनियम, 1976 (1976 का 98) की धारा 4 के अधीन नियुक्त अभिरक्षक अभिप्रेत है ;

                (ङ) राष्ट्रीय कपड़ा निगम" से कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनाया गया और रजिस्ट्रीकृत राष्ट्रीय कपड़ा निगम लिमिटेड अभिप्रेत है ; 

                                (च) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ; 

                (छ) स्वामी" से, जब कि वह किसी कपड़ा-उपक्रम के संबंध में प्रयुक्त हुआ है, कोई ऐसा व्यक्ति या फर्म अभिप्रेत है जो कपड़ा उपक्रम या उसके किसी भाग का, नियत दिन के ठीक पूर्व अव्यवहित स्वत्वधारी या पट्टेदार या अधिष्ठाता है और ऐसी कपड़ा कम्पनी की दशा में, जिसका परिसमापन किया जा रहा है या जिसका कारबार समापक या रिसीवर द्वारा चलाया जा रहा है, इसके अन्तर्गत ऐसा समापक या रिसीवर है, और ऐसे स्वामी का कोई अभिकर्ता या प्रबन्धक भी है, किन्तु इसके अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति या व्यक्तियों का निकाय नहीं है जो संपूर्ण कपड़ा-उपक्रम या उसके किसी भाग का प्रबन्ध-ग्रहण करने के लिए कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1983 (1983 का 40) के अधीन या लक्ष्मीरत्तन एण्ड एथरटन वेस्ट काटन मिल्स  (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1976 (1976 का 98) के अधीन प्राधिकृत किया गया है ;

                                (ज) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ; 

(झ) विनिर्दिष्ट तारीख" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के प्रयोजन के लिए, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबन्धों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें विनिर्दिष्ट की जा सकेंगी ; 

(ञ) समनुषंगी कपड़ा निगम" से राष्ट्रीय कपड़ा निगम (दक्षिण महाराष्ट्र) लिमिटेड, राष्ट्रीय कपड़ा निगम     (उत्तर प्रदेश) लिमिटेड या राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा अपने समनुषंगी के रूप में बनाया गया कोई अन्य कपड़ा निगम अभिप्रेत है ; 

(ट) कपड़ा" के अन्तर्गत सूत या फैब्रिक है जो पूर्णतः या भागतः कपास, ऊन, जूट, संश्लिष्ट और कृत्रिम (मानव निर्मित) फायबर से बने हों; 

                (ठ) कपड़ा कम्पनी" से पहली अनुसूची के स्तंभ (3) में विनिर्दिष्ट ऐसी कम्पनी जो कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित कम्पनी है अभिप्रेत है जो उस अनुसूची के स्तम्भ (2) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट कपड़ा उपक्रम का स्वामित्व रखती है ; 

(ड) कपड़ा-उपक्रम" या उक्त कपड़ा-उपक्रम" से पहली अनुसूची के स्तम्भ (2) में विनिर्दिष्ट ऐसा उपक्रम अभिप्रेत है जिसका प्रबन्ध, नियत दिन के पूर्व, यथास्थिति, कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1983 (1983 का 40) के अधीन या लक्ष्मीरत्तन एण्ड एथरटन वेस्ट काटन मिल्स (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1976 (1976 का 98) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण कर लिया गया था । 

                (2) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वहीं अर्थ हैं जो उस अधिनियम में हैं । 

अध्याय 2

कपड़ा उपक्रमों का अर्जन और अंतरण

3. स्वामियों के अधिकारों का अर्जन और कपड़ा उपक्रमों का निहित होना-(1) नियत दिन को, प्रत्येक कपड़ा-उपक्रम के संबंध में स्वामी के अधिकार, हक और हित, केन्द्रीय सरकार को अन्तरित हो जाएंगे और उसमें पूर्ण रूप से निहित हो जाएंगे ।  

(2) प्रत्येक कपड़ा उपक्रम, जो उपधारा (1) के आधार पर केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाता है, उसके इस प्रकार निहित हो जाने के ठीक पश्चात्, राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित हो जाएगा और उसमें निहित हो जाएगा ।

 [(3) उपधारा (2) के कारण राष्ट्रीय कपड़ा निगम को किसी कपड़ा उपक्रम के अंतरित और निहित होते हुए भी कपड़ा उपक्रम के पट्टाधृत अधिकार, केन्द्रीय सरकार में, पट्टाधृत भाटकों के संदाय पर, निहित होना बना रहेगा और जब कभी ऐसे पट्टाधृत भाटक या कोई रकम शोध्य और संदेय होती है तो उसको उस सरकार के निमित्त तथा उसकी ओर से राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा   चुकाया जाएगा ।

(4) उपधारा (3) के अधीन रहते हुए, किसी न्यायालय को केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित संपत्ति का उससे निर्निहितीकरण का आदेश करने की अधिकारिता नहीं होगी ।] 

4. निहित होने का साधारण प्रभाव-(1) धारा 3 में निर्दिष्ट कपड़ा उपक्रमों के बारे में यह समझा जाएगा कि उनके अन्तर्गत कपड़ा उपक्रमों से संबंधित सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा सभी स्थावर और जंगम सम्पत्ति, जिसमें भूमि, भवन, कर्मशालाएं, स्टोर, उपकरण, मशीनरी और उपस्कर, रोकड़ बाकी, हाथ-नकदी, आरक्षित निधियां, विनिधान और बही ऋण सम्मिलित हैं तथा ऐसी सम्पत्ति में या उससे उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित हैं जो नियत दिन के ठीक पूर्व उक्त उपक्रमों के संबंध में कपड़ा कम्पनी के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियंत्रण में, चाहे भारत में या भारत के बाहर थे तथा तत्संबंधी सभी लेखाबहियां, रजिस्टर और अन्य सभी दस्तावेजें हैं चाहे वे किसी भी प्रकार की हों, और यह भी समझा जाएगा कि उनके अन्तर्गत धारा 5 की उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दायित्व और बाध्यताएं भी हैं । 

(2) यथापूर्वोक्त सभी सम्पत्ति, जो धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई हैं, ऐसे निहित होने के आधार पर किसी न्यास, बाध्यता, बंधक, भार, धारणाधिकार और उसको प्रभावित करने वाले अन्य सभी विल्लंगमों से मुक्त और उन्मोचित हो जाएगी और ऐसी सम्पत्ति के उपयोग को किसी भी रीति से निर्बन्धित करने वाली किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी की किसी कुर्की, व्यादेश या डिक्री या आदेश के बारे में यह समझा जाएगा कि वह वापस ले लिया गया है । 

(3) जहां कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में कोई अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत, नियत तारीख के पूर्व किसी भी समय, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा स्वामी को प्रदान की गई थी वहां उस तारीख से ही राष्ट्रीय कपड़ा निगम के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में, निर्दिष्ट स्वामी के स्थान पर रखा गया है मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत उस निगम को प्रदान की गई थी और वह निगम ऐसी अनुज्ञप्ति को या ऐसी अन्य लिखत में विनिर्दिष्ट कपड़ा उपक्रम को ऐसी शेष अवधि के लिए धारण करेगा जिसके लिए स्वामी ऐसी अनुज्ञप्ति को या ऐसी अन्य लिखत के अधीन कपड़ा उपक्रम को     धारण करता ।

(4) किसी ऐसी सम्पत्ति का, जो इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, प्रत्येक बन्धकदार और किसी ऐसी सम्पत्ति में या उसके सम्बन्ध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, ऐसे बन्धक, भार, धारणाधिकार और अन्य हित की सूचना आयुक्त को देगा ।

(5) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी संपत्ति का बन्धकदार अथवा किसी ऐसी सम्पत्ति में या उसके सम्बन्ध में कोई भार, धारणाधिकार या अन्य हित धारण करने वाला कोई अन्य व्यक्ति, पहली अनुसूची में ऐसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट रकम में से बन्धक धन या अन्य शोध्य रकमों के पूर्णतः या भागतः संदाय के लिए, अपने अधिकारों और हितों के अनुसार, दावा करने का हकदार होगा, किन्तु ऐसा कोई बन्धक, भार, धारणाधिकार या अन्य हित किसी ऐसी सम्पत्ति के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा जो केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है । 

(6) यदि, नियत दिन को, किसी ऐसी सम्पत्ति के संबंध में, जो धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गई है, कपड़ा कम्पनी द्वारा या उसके विरुद्ध संस्थित या लाया गया कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, चाहे वह किसी भी प्रकार की हो, लम्बित है तो कपड़ा उपक्रम के अन्तरण या इस अधिनियम की किसी बात के कारण, उसका उपशमन नहीं होगा, वह बन्द नहीं होगी या उस पर किसी भी रूप में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा किन्तु वह वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी जा सकेगी, चलाई जा सकेगी और प्रवर्तित की जा सकेगी ।

(7) कोई व्यक्ति जो, उस तारीख को जिसको कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीकरण) अध्यादेश, 1995 (1995 का अध्यादेश संख्यांक 6) प्रख्यापित किया गया था, धारा 3 में निर्दिष्ट किसी सम्पूर्ण कपड़ा उपक्रम का या उसके किसी भाग का जिसका प्रबंध केन्द्रीय सरकार द्वारा किसी न्यायालय की किसी डिक्री, आदेश या व्यादेश के कारण या अन्यथा ग्रहण नहीं किया जा सका था, कब्जा रखता था अथवा वह उसकी अभिरक्षा में या उसके नियंत्रणाधीन था ऐसे उपक्रम या उसके भाग का कब्जा तथा ऐसे उपक्रम या उसके भाग से संबंधित सभी लेखाबहियां, रजिस्टर और अन्य सभी दस्तावेजें, चाहे वे किसी भी प्रकार की हों, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम या ऐसे अन्य व्यक्ति को, जिसे, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, तत्काल परिदत्त करेगा ।

 [(8) इस तथ्य के होते हुए भी कि पुनरुज्जीवित किए गए किसी कपड़ा उपक्रम में कपड़ा संक्रियाएं नहीं चल रही हैं, सभी प्रभावों और प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि कपड़ा संक्रियाएं चल रही हैं और कोई वाद या कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी या यदि संस्थित की जाती है तो इस आधार पर चालने योग्य होगी कि उसने कपड़ा उपक्रम में ऐसे क्रियाकलाप को बन्द कर दिया है ।

(9) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि केन्द्रीय सरकार में पट्टाधृत भूमि के समझे गए निहित होने का बना रहना राष्ट्रीय कपड़ा निगम के अधिकारों को, ऐसे किन्हीं पट्टाधृत अधिकारों के संबंध में पश्चात्वर्ती निहितदार के रूप में अभियोजन या प्रतिवाद करने के लिए किसी रीति से प्रभावित, ह्रासित नहीं करेगा या उनके प्रतिकूल नहीं होगा और ऐसी कोई कार्यवाही केवल उस सरकार को पक्षकार नहीं बनाने के कारण असफल नहीं होगी ।]

5. स्वामी का कतिपय पहले के दायित्वों के लिए जिम्मेदार होना-(1) कपड़ा उपक्रम के स्वामी का नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबात कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में ऐसा प्रत्येक दायित्व, जो उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दायित्व से भिन्न है, उसी स्वामी का दायित्व होगा और उसके विरुद्ध प्रवर्तनीय होगा और केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा । 

(2) कोई दायित्व, जो-

(क) यथास्थिति, कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1983 (1983 का 40) की धारा 3 के अधीन या लक्ष्मीरत्तन एण्ड एथरटन वेस्ट काटन मिल्स (प्रबंध-ग्रहण) अधिनियम, 1976 (1976 का 98) की धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा किसी कपड़ा उपक्रम का प्रबन्ध-ग्रहण कर लिए जाने के पश्चात्, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अथवा दोनों द्वारा ऐसे उपक्रम को दिए गए उधारों (उन पर शोध्य ब्याज सहित) ; 

(ख) राष्ट्रीय कपड़ा निगम या राज्य कपड़ा निगम द्वारा अथवा दोनों द्वारा किसी कपड़ा उपक्रम को, यथास्थिति, कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम 1983 (1983 का 40) की धारा 3 के अधीन या लक्ष्मीरत्तन एण्ड एथरटन वेस्ट काटन मिल्स (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1976 (1976 का 98) की धारा 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वरा ऐसे उपक्रम का प्रबन्ध-ग्रहण कर लिए जाने के पश्चात् दी गई रकमों और उन पर शोध्य ब्याज, 

(ग) केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे कपड़ा-उपक्रम का प्रबन्ध-ग्रहण कर लिए जाने के पश्चात्, किसी अवधि की बाबत ऐसे उपक्रमों के कर्मचारियों की मजदूरी, वेतन और अन्य शोध्य रकमों,

की बाबत उद्भूत होता है, नियत दिन से ही केन्द्रीय सरकार का दायित्व होगा और उसका निर्वहन उस सरकार के लिए और उसकी ओर से राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा किया जाएगा जैसे ही और जब भी ऐसे उधारों या रकमों का प्रतिसंदाय शोध्य होता है अथवा जैसे ही और जब भी ऐसी मजदूरी, वेतन या अन्य शोध्य रकमें शोध्य और संदेय होती हैं ।

(3) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि-

(क) इस धारा में या इस अधिनियम की किसी अन्य धारा में अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में कोई ऐसा दायित्व, जो उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दायित्व से भिन्न है, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ; 

(ख) किसी कपड़ा-उपक्रम के सम्बन्ध में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य अधिकारी का कोई अधिनिर्णय, डिक्री या आदेश, जो नियत दिन के पूर्व उत्पन्न किसी ऐसे मामले से संबंधित उपधारा (2) में निर्दिष्ट नहीं है, दावे या विवाद की बाबत नियत दिन के पश्चात् पारित किया जाता है, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ; 

(ग) तत्समय प्रवृत्त विधि के किसी उपबंध के, नियत दिन के पूर्व किए गए उल्लंघन के लिए किसी कपड़ा-उपक्रम के संबंध में किसी कपड़ा-उपक्रम का या उसके किसी स्वामी का कोई दायित्व, केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध प्रवर्तनीय नहीं होगा ।

6. किसी कपड़ा उपक्रम या उसके भाग का किसी समनुषंगी कपड़ा निगम को अंतरण-(1) राष्ट्रीय कपड़ा निगम, लिखित आदेश द्वारा, पहली अनुसूची के क्रम संख्यांक 1 से 13 में विनिर्दिष्ट किसी कपड़ा उपक्रम या किसी ऐसे कपड़ा उपक्रम के भाग को राष्ट्रीय कपड़ा निगम (दक्षिण महाराष्ट्र) लिमिटेड और पहली अनुसूची के क्रम संख्यांक 14 और 15 में विनिर्दिष्ट किसी कपड़ा उपक्रम या किसी ऐसे उपक्रम के भाग को, यथास्थिति, राष्ट्रीय कपड़ा निगम (उत्तर प्रदेश) लिमिटेड या किसी अन्य समनुषंगी कपड़ा निगम को अन्तरित कर सकेगा और कोई ऐसा अन्तरण ऐसे निबन्धनों और शर्तों के अधीन होगा जो उक्त आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं । 

(2) समनुषंगी कपड़ा निगम, ऐसे अन्तरण की तारीख से, धारा 4 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत में राष्ट्रीय कपड़ा निगम के स्थान पर रखा गया समझा जाएगा मानो ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत समनुषंगी कपड़ा निगम को प्रदान की गई हो और वह ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत को ऐसी शेष अवधि के लिए धारण करेगा जिसके लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम ऐसी अनुज्ञप्ति या अन्य लिखत को धारण करता । 

(3) समनुषंगी कपड़ा निगम को किसी कपड़ा उपक्रम या उसके किसी भाग का अन्तरण किए जाने पर, धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन निर्दिष्ट राष्ट्रीय कपड़ा निगम के दायित्व, जहां तक उनका संबंध समनुषंगी कपड़ा निगम को इस प्रकार अन्तरित कपड़ा उपक्रम या उसके भाग से है, ऐसे अन्तरण की तारीख से ही समनुषंगी कपड़ा निगम के दायित्व हो जाएंगे और उनका समनुषंगी कपड़ा निगम द्वारा निर्वहन किया जाएगा जैसे ही और जब भी ऐसे किसी दायित्व का निर्वहन किया जाना अपेक्षित हो ।

(4) इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, इस अधिनियम में राष्ट्रीय कपड़ा निगम के प्रति निर्देशों का अर्थ वह लगाया जाएगा कि वे किसी ऐसे कपड़ा उपक्रम या उसके किसी भाग के संबंध में जो समनुषंगी कपड़ा निगम को अन्तरित किया जाता है, समनुषंगी कपड़ा निगम के प्रति निर्देश हैं ।

7. केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित आस्तियों के मूल्य के लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा शेयरों का निर्गमन-(1) धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित और उसमें निहित कपड़ा उपक्रम की आस्तियों के मूल्य के बराबर रकम के बारे में यह समझा जाएगा कि वह केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय कपड़ा निगम की साधारण पूंजी में किया गया अभिदाय है और इस प्रकार किए गए अभिदाय के लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम, केन्द्रीय सरकार को अपनी साधारण पूंजी में, समादत्त शेयर (यदि आवश्यक हो तो अपने संगम-ज्ञापन और संगम-अनुच्छेद का संशोधन करने के पश्चात्) निर्गमित करेगा जिनका अंकित मूल्य पहली अनुसूची के स्तंभ (4) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में कपड़ा उपक्रम के सामने विनिर्दिष्ट रकम के बराबर होगा ।

(2) जहां इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सकार द्वारा ग्रहण किए गए किसी दायित्व को, राष्ट्रीय कपड़ा निगम, धारा 27 के अधन ग्रहण कर लेता है वहां केन्द्रीय सरकार, उस निगम को ऐसे शेयर अभ्यर्पित कर देगी जो उसे उपधारा (1) के अधीन निर्गमित किए गए थे और जिनका अंकित मूल्य राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा इस प्रकार ग्रहण किए गए दायित्व की रकम के बराबर होगा और तब राष्ट्रीय कपड़ा निगम की शेयर पूंजी, इस प्रकार अभ्यर्पित शेयरों के अंकित मूल्य के बराबर कम हो जाएगी । 

अध्याय 3

रकम का संदाय

8. कपड़ा उपक्रमों के स्वामियों को रकम का संदाय-प्रत्येक कपड़ा उपक्रम के स्वामी को केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे कपड़ा उपक्रम और ऐसे कपड़ा उपक्रम के संबंध में स्वामी के अधिकार, हक और हित, धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन उसको अन्तरित और उसमें निहित होने के लिए, पहली अनुसूची के स्तंभ (4) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में उसके सामने विनिर्दिष्ट रकम के बराबर रकम, नकद रूप में और अध्याय 6 में विनिर्दिष्ट रीति से दी जाएगी । 

9. अतिरिक्त रकम का संदाय-(1) धारा 3, धारा 4 और धारा 5 के उपबंधों के भूतलक्षी प्रवर्तन को ध्यान में रखते हुए, ऐसे प्रत्येक कपड़ा-उपक्रम के, जिसका प्रबंध केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण कर लिया गया है, स्वामी को केन्द्रीय सरकार द्वारा, यथास्थिति, कपड़ा-उपक्रम (प्रबंध-ग्रहण) अधिनियम, 1983 (1983 का 40) की धारा 5 में विनिर्दिष्ट या लक्ष्मीरत्तन एण्ड एथरटन वेस्ट काटन मिल्स (प्रबंध-ग्रहण) अधिनियम, 1976 (1976 का 98) की धारा 5 में विनिर्दिष्ट दर पर संगणित रकम के बराबर रकम, नियत दिन को प्रारम्भ होने वाली और उस तारीख को, जिसको कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीकरण) अध्यादेश, 1995 (1995 का अध्यादेश सं० 6) प्रख्यापित किया गया था, समाप्त होने वाली अवधि के लिए, नकद रूप में दी जाएगी । 

(2) धारा 8 में निर्दिष्ट रकम के अतिरिक्त, केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रत्येक कपड़ा उपक्रम के स्वामी को उस रकम पर, जो पहली अनुसूची के स्तम्भ (4) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में ऐसे स्वामी के सामने विनिर्दिष्ट है, चार प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज, नियत दिन को प्रारम्भ होने वाली और उस तारीख को, जिसको ऐसी रकम का संदाय केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि के लिए, नकद रूप में दिया जाएगा । 

(3) उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दर पर संगणित ब्याज की रकम उस रकम के अतिरिक्त दी जाएगी जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट है । 

(4) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि ऐसे कपड़ा उपक्रमों के संबंध में, जो धारा 3 के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित हो गए है, स्वामियों के दायित्व, पहली अनुसूची में निर्दिष्ट रकम से और स्वामी के लेनदारों के अधिकारों और हितों के अनुसार उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन अवधारित रकम से भी, उन्मोचित किए जाएंगे । 

अध्याय 4

कपड़ा उपक्रमों का प्रबन्ध, आदि

10. कपड़ा उपक्रमों का प्रबन्ध, आदि-राष्ट्रीय कपड़ा निगम या कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे वह निगम, लिखित आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, उस कपड़ा उपक्रम के, जिसके सम्बन्ध में स्वामी के अधिकार, हक और हित धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन उस निगम में निहित हो गए हैं, कार्यकलापों और कारबार के साधारण अधीक्षण, निदेशन, नियंत्रण और प्रबन्ध को ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने और ऐसी सभी बातें करने का हकदार होगा, जिन शक्तियों का प्रयोग करने और जिन बातों को करने के लिए कपड़ा उपक्रम का स्वामी प्राधिकृत है । 

11. कतिपय परिस्थितियों में कपड़ा उपक्रमों की आस्तियों के व्ययन के लिए विशेष उपबन्ध-यदि राष्ट्रीय कपड़ा निगम, किसी कपड़ा उपक्रम के बेहतर प्रबंध, आधुनिकीकरण, पुनःसंरचना या पुनरुज्जीवन के लिए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझता है तो वह, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मजूरी से, किसी कपड़ा उपक्रम की किसी भूमि, संयंत्र, मशीनरी या किसी अन्य आस्ति का अंतरण, बन्धक, विक्रय या अन्यथा व्ययन कर सकेगा:

परन्तु किसी आस्ति के किसी ऐसे अंतरण, बंधक, विक्रय या अव्ययन के आगमों का उपयोग उस प्रयोजन से जिसके लिए केन्द्रीय सरकार की मंजूरी प्राप्त की गई है, भिन्न किसी प्रयोजन के लिए नहीं किया जाएगा । 

12. कपड़ा उपक्रमों के प्रबन्ध के भारसाधक व्यक्तियों का सभी आस्तियों, आदि का परिदान करने का कर्तव्य-किसी कपड़ा उपक्रम के प्रबन्ध के राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित हो जाने पर ऐसे सभी व्यक्ति, जो ऐसे कपड़ा उपक्रम के प्रबन्ध के ऐसे निहित हो जाने के ठीक पूर्व भारसाधक थे, राष्ट्रीय कपड़ा निगम को कपड़ा उपक्रम से संबंधित ऐसी सभी आस्तियां, लेखाबहियां, रजिस्टर या अन्य दस्तावेजों, जो उनकी अभिरक्षा में हैं, परिदत्त करने के लिए आबद्ध होंगे ।

13. लेखे-राष्ट्रीय कपड़ा निगम, कपड़ा उपक्रमों के लेखे कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के उपबन्धों के अनुसार रखेगा ।

अध्याय 5

कपड़ा उपक्रमों के कर्मचारियों के बारे में उपबन्ध

14. कतिपय कर्मचारियों के नियोजन का चालू रहना-(1) प्रत्येक व्यक्ति, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के अर्थ में कर्मकार है और नियत दिन के ठीक पूर्व कपड़ा उपक्रम में नियोजित रहा है नियत दिन से ही, राष्ट्रीय कपड़ा निगम का कर्मचारी हो जाएगा और राष्ट्रीय कपड़ा निगम में पेंशन, उपदान और अन्य बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ पद या सेवा धारण करेगा जो उसे अनुज्ञेय होते यदि ऐसे कपड़ा उपक्रम के संबंध में अधिकार राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित न किए जाते और उसमें निहित न हो जाते और तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक उस राष्ट्रीय कपड़ा निगम में उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक, नियोजन के निबन्धन और शर्तें राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जाती  ।  

(2) प्रत्येक व्यक्ति, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के अर्थ में कर्मकार नहीं है और नियत दिन के ठीक पूर्व कपड़ा उपक्रम में नियोजित रहा है, जहां तक ऐसा व्यक्ति उस कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में नियोजित किया जाता है जो राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित हो गया है, नियत दिन से, राष्ट्रीय कपड़ा निगम का कर्मचारी हो जाएगा और वह उसमें उसी अवधि तक, उसी पारिश्रमिक पर और उन्हीं निबन्धनों और शर्तों पर तथा पेंशन और उपदान और अन्य बातों के बारे में वैसे ही अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद या अपनी सेवा धारण करेगा जैसा कि वह उस कपड़ा उपक्रम के अधीन धारण करता यदि वह राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित न होता और तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक उस राष्ट्रीय कपड़ा निगम में उसका नियोजन सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक उसका पारिश्रमिक, नियोजन के निबन्धन और शर्तें राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जातीं ।  

(3) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, किसी कपड़ा उपक्रम के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की सेवाओं का राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरण, ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं बनाएगा और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।

(4) जहां, सेवा की किसी संविदा के निबन्धनों के अधीन या अन्यथा, कोई ऐसा व्यक्ति, जिसकी सेवाएं इस अधिनियम के उपबन्धों के कारण समाप्त हो जाती हैं या जिसकी सेवाएं राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित हो जाती हैं, वेतन या मजदूरी की किन्हीं बकायों का या न ली गई किसी छुट्टी के लिए किसी संदाय का या किसी ऐसे संदाय का जो उपदान या पेंशन के तौर पर संदाय नहीं है, हकदार हैं वहां ऐसा व्यक्ति, उस दायित्व को छोड़कर जो केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 5 के अधीन ग्रहण कर लिया गया है, अपना दावा कपड़ा उपक्रम के स्वामी के विरुद्ध प्रवर्तित करा सकेगा किन्तु केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के विरुद्ध नहीं ।

15. भविष्य और अन्य निधियां-(1) जहां किसी कपड़ा उपक्रम के स्वामी ने ऐसे कपड़ा उपक्रम में, नियोजित व्यक्तियों के फायदे के लिए कोई भविष्य निधि, अधिवार्षिकी, कल्याण या अन्य निधि स्थापित की है वहां ऐसे कर्मचारियों से, जिनकी सेवाएं इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित हो गई हैं, संबंधित धनराशियां ऐसी भविष्य निधि, अधिवार्षिकी, कल्याण या अन्य निधि खाते में, नियत दिन को, जमा धनराशियों में से राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित और उसमें निहित हो जाएगी ।

(2) उन धनराशियों के संबंध में जो उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम को अन्तरित हो जाती हैं, उस निगम द्वारा ऐसी रीति से कार्रवाई की जाएगी जो विहित की जाए । 

16. कर्मचारियों का समनुषंगी कपड़ा निगम को अन्तरण-जहां कोई कपड़ा उपक्रम या उसका कोई भाग इस अधिनियम के अधीन किसी समनुषंगी कपड़ा निगम को अन्तरित किया जाता है वहां धारा 14 की उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे अन्तरण की तारीख से ही, समनुषंगी कपड़ा निगम का कर्मचारी हो जाएगा और धारा 14 और धारा 15 के उपबन्ध ऐसे कर्मचारी को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे राष्ट्रीय कपड़ा निगम के किसी कर्मचारी को लागू होते हैं मानो उक्त धाराओं में राष्ट्रीय कपड़ा निगम के प्रति निर्देश समनुषंगी कपड़ा निगम के प्रति निर्देश हों ।

अध्याय 6

संदाय आयुक्त

17. संदाय आयुक्तों की नियुक्ति-(1) प्रत्येक कपड़ा उपक्रम के स्वामी को संदेय रकमों के वितरण के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, -

(क) उतने व्यक्तियों को संदाय आयुक्त नियुक्त करेगी जितने वह ठीक समझे; और

(ख) उन स्थानीय सीमाओं का परिनिश्चय करेगी जिनके भीतर संदाय आयुक्त इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उनको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेंगे और उन पर अधिरोपित कर्तव्यों का पालन करेंगे ।

(2) केन्द्रीय सरकार ऐसे अन्य व्यक्तियों को आयुक्त की सहायता के लिए नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह ठीक समझे और तब आयुक्त ऐसे व्यक्तियों में से एक या अधिक को इस अधिनियम के अधीन अपने द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए भी प्राधिकृत कर सकेगा और भिन्न-भिन्न व्यक्तियों को भिन्न-भिन्न शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत किया जा सकेगा ।

(3) कोई ऐसा व्यक्ति, जो किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आयुक्त द्वारा प्राधिकृत किया जाता है, उन शक्तियों का प्रयोग उसी रीति से कर सकेगा और उनका वही प्रभाव होगा मानो वे उस व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा प्रत्यक्षतः प्रदत्त की गई थी और प्राधिकार के रूप में प्रदान नहीं की गई हो । 

(4) इस धारा के अधीन नियुक्त आयुक्त और अन्य व्यक्तियों के वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि में से चुकाए जाएंगे । 

(5) जहां एक से अधिक आयुक्त नियुक्त किए गए हैं वहां इस अधिनियम में आयुक्त के प्रति निर्देशों का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वे उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में आयुक्त के प्रति निर्देश हैं । 

18. केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार, विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के भीतर आयुक्त को किसी कपड़ा उपक्रम के स्वामी को संदाय करने के लिए पहली अनुसूची में कपड़ा उपक्रम के सामने विनिर्दिष्ट रकम के बराबर रकम का नकद रूप में संदाय करेगी और आयुक्त को ऐसी धनराशियां भी संदाय करेगी जो कपड़ा उपक्रम के स्वामी को धारा 9 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन शोध्य हों । 

(2) ऐसे कपड़ा उपक्रमों के संबंध में, जिनका प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1983 (1983 का 40) के अधीन ग्रहण किया गया था, केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को उस अधिनियम की धारा 5 के अधीन संदेय ऐसी रकम, जो उस तारीख को जिसको ऐसा प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किया गया था, प्रारम्भ होने वाली और नियत दिन को समाप्त होने वाली अवधि के संबंध मे अंसदत्त रह गई हैं  [उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रकम के अतिरिक्तट नकद रूप में संदत्त की जाएगी । 

(3) ऐसे कपड़ा उपक्रमों के सम्बन्ध में, जिनका प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा लक्ष्मीरत्तन एंड एथरटन वेस्ट काटन मिल्स (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1976 (1976 का 98) के अधीन ग्रहण किया गया था, केन्द्रीय सरकार द्वारा आयुक्त को उस अधिनियम की धारा 5 के अधीन संदेय ऐसी रकम, जो उस तारीख को जिसको ऐसा प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किया गया था, प्रारम्भ होने वाली और नियत दिन को समाप्त होने वाली अवधि के संबंध में अंसदत्त रह गई है [उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम के अतिरिक्तट नकद रूप में संदत्त की जाएगी । 

(4) केन्द्रीय सरकार भारत के लोक लेखे में आयुक्त के नाम से एक निक्षेप खाता खोलेगी और इस अधिनियम के अधीन आयुक्त को संदत्त की गई प्रत्येक रकम उसके द्वारा भारत के लोक लेखे में उक्त निक्षेप खाते में जमा की जाएगी और उसके पश्चात् आयुक्त उक्त निक्षेप खाते को चलाएगा । 

(5) आयुक्त ऐसे प्रत्येक कपड़ा-उपक्रम की बाबत, जिसके सम्बन्ध में इस अधिनियम के अधीन उसे संदाय किए गए हैं, अलग-अलग अभिलेख रखेगा । 

(6) उपधारा (4) में निर्दिष्ट निक्षेप खाते में जमा रकमों पर प्रोद्भूत होने वाला ब्याज, कपड़ा उपक्रमों के स्वामियों के फायदे के लिए काम आएगा । 

19. राष्ट्रीय कपड़ा निगम की कतिपय शक्तियां-(1) राष्ट्रीय कपड़ा निगम, अन्य सभी व्यक्तियों का अपवर्जन करके नियत दिन के पश्चात् वसूल किया गया कपड़ा उपक्रम को शोध्य धन, इस बात के होते हुए भी कि ऐसी वसूली नियत दिन के पूर्व की अवधि से सम्बन्ध रखती है, विनिर्दिष्ट तारीख तक प्राप्त करने का हकदार होगा । 

(2) राष्ट्रीय कपड़ा निगम, आयुक्त को प्रत्येक ऐसे संदाय के संबंध में दावा कर सकेगा जो, अभिरक्षक द्वारा नियत दिन के पश्चात् किन्तु उस तारीख के पूर्व जिसको कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अध्यादेश, 1995 (1995 का अध्यादेश संख्यांक 6) कपड़ा उपक्रम के स्वामी के नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि के सम्बन्ध में किसी दायित्व का निर्वहन करने के लिए प्रख्यापित किया गया था और ऐसे प्रत्येक दावे को उन पूर्विकताओं के अनुसार पूर्विकता प्राप्त होगी जो उस विषय को इस अधिनियम के अधीन प्राप्त है जिसके संबंध में ऐसे दायित्व का निर्वहन अभिरक्षक द्वारा किया गया है ।

(3) इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, नियत दिन के पूर्व की किसी अवधि की बाबत कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में दायित्व, जिनका अभिरक्षक द्वारा निर्वहन नहीं किया गया है, उस कपड़ा उपक्रम के स्वामी के दायित्व होंगे ।

20. आयुक्त के समक्ष दावों का किया जाना-प्रत्येक व्यक्ति जिसका किसी कपड़ा उपक्रम के स्वामी के विरुद्ध कोई दावा है, ऐसा दावा विनिर्दिष्ट तारीख से तीस दिन के भीतर आयुक्त के समक्ष करेगा:

परन्तु यह कि आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि दावेदार तीस दिन की उक्त अवधि के भीतर दावा करने से पर्याप्त कारण से निवारित किया गया था तो वह तीस दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर दावा ग्रहण कर सकेगा किन्तु उसके पश्चात् नहीं ।

  21. दावों की पूर्विकता-दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट विषयों से उद्भूत होने वाले दावों को निम्नलिखित सिद्धांतों के अनुसार पूर्विकता प्राप्त होगी, अर्थात्: - 

(क) प्रवर्ग 1 को अन्य सभी प्रवर्गों पर अग्रता दी जाएगी और प्रवर्ग 2 को प्रवर्ग 3 पर अग्रता दी जाएगी और इसी प्रकार आगे भी; 

(ख) प्रत्येक प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट दावे, सिवाय प्रवर्ग 4 के, एक समान होंगे और पूर्णतः संदत्त किए जाएंगे, किन्तु यदि रकम ऐसे दावों को पूर्णतः चुकाने के लिए अपर्याप्त हो तो वे समानुपात में कम कर दिए जाएंगे और तद्नुसार संदत्त किए जाएंगे;

(ग) प्रवर्ग 4 में विनिर्दिष्ट दायित्वों का निर्वहन इस धारा में विनिर्दिष्ट पूर्विकताओं के अधीन रहते हुए, प्रतिभूत उधारों के निबन्धनों और ऐसे उधारों की परस्पर पूर्विकता के अनुसार किया जाएगा; और 

(घ) किसी निम्नतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट विषय की बाबत दायित्व के संदाय का प्रश्न तभी उठेगा जब उसके ठीक उच्चतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट सभी दायित्वों को चुकाने के पश्चात् कोई अधिशेष रह जाए । 

22. दावों की परीक्षा-(1) आयुक्त, धारा 20 के अधीन दावों की प्राप्ति पर, उन्हें दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट पूर्विकता के अनुसार क्रमबद्ध करेगा और उक्त क्रम के अनुसार उनकी परीक्षा करेगा । 

(2) यदि दावों की परीक्षा करने पर, आयुक्त की यह राय है कि इस अधिनियम के अधीन उसे संदत्त रकम किसी निम्नतर प्रवर्ग में विनिर्दिष्ट दायित्वों को चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है तो उससे यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह ऐसे निम्नतर प्रवर्ग की बाबत दायित्वों की परीक्षा करे ।

23. दावों का स्वीकार या अस्वीकार किया जाना-(1) दूसरी अनुसूची में उपवर्णित पूर्विकता के अनुसार दावों की परीक्षा करने के पश्चात् आयुक्त ऐसी कोई निश्चित तारीख नियत करेगा जिसको या जिसके पूर्व प्रत्येक दावेदार अपने दावे का सबूत फाइल करेगा या आयुक्त द्वारा किए गए संवितरण के फायदे से अपवर्जित कर दिया जाएगा । 

(2) इस प्रकार नियत तारीख के बारे में कम से कम चौदह दिनों की सूचना ऐसे अंग्रेजी भाषा के दैनिक समाचारपत्र के एक अंक में और ऐसे प्रादेशिक भाषा के दैनिक समाचारपत्र के एक अंक में, जो आयुक्त उपयुक्त समझे, विज्ञापन द्वारा दी जाएगी और ऐसी प्रत्येक सूचना में दावेदार से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपने दावे का सबूत आयुक्त के समक्ष विज्ञापन में विनिर्दिष्ट समय के भीतर फाइल करे । 

(3) प्रत्येक दावेदार जो आयुक्त द्वारा विनिर्दिष्ट समय के भीतर अपने दावे का सबूत फाइल करने में असफल रहता है, आयुक्त द्वारा किए गए संवितरणों से अपवर्जित कर दिया जाएगा । 

(4) आयुक्त ऐसा अन्वेषण करने के पश्चात् जो उसकी राय में आवश्यक है और कपड़ा उपक्रम के स्वामी को दावे का खंडन करने का अवसर देने के पश्चात् और दावेदारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, लिखित रूप में, दावे को पूर्णतः या भागतः स्वीकार करेगा या अस्वीकार करेगा । 

(5) आयुक्त को, अपने कृत्यों के निर्वहन से उद्भूत होने वाले सभी मामलों में, जिनके अन्तर्गत वह या वे स्थान भी हैं जहां वह अपनी बैठकें कर सकेगा, अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी और इस अधिनियम के अधीन कोई अन्वेषण करने के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित विषयों की बाबत वही शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय में निहित होती हैं, अर्थात्: -

(क) किसी साक्षी को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना; 

(ख) किसी दस्तावेज या अन्य तात्त्विक सामग्री का, जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य हो, प्रकटीकरण और पेश किया जाना; 

(ग) शपथ पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;

(घ) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।

                (6) आयुक्त के समक्ष कोई अन्वेषण, भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और धारा 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा और आयुक्त को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा । 

(7) कोई दावेदार, जो आयुक्त के विनिश्चय से असन्तुष्ट है, उस विनिश्चय के विरुद्ध अपील आरम्भिक अधिकारिता वाले उस प्रधान सिविल न्यायालय को कर सकता है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर वह कपड़ा उपक्रम स्थित है:

परन्तु जहां कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है, आयुक्त नियुक्त किया जाता है, वहां ऐसी अपील उस राज्य के उच्च न्यायालय को की जाएगी, जिसमें वह कपड़ा उपक्रम स्थित है, और वह अपील उस उच्च न्यायालय के कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा सुनी और निपटाई जाएगी । 

24. आयुक्त द्वारा दावेदारों को धन का संवितरण-इस अधिनियम के अधीन दावा स्वीकार करने के पश्चात् ऐसे दावे की बाबत शोध्य रकम आयुक्त द्वारा सुसंगत निधि में जमा की जाएगी अथवा ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को संदत्त की जाएगी जिन्हें ऐसी धनराशियां शोध्य हैं और ऐसे जमा या संदाय किए जाने पर ऐसे दावे की बाबत स्वामी के दायित्व का निर्वहन हो जाएगा ।

25. स्वामियों को रकमों का संवितरण-(1) यदि किसी कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में आयुक्त को संदत्त धनराशियों में से, दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट दायित्वों को चुकाने के पश्चात् कोई अतिशेष रह जाता है तो वह उस अतिशेष का संवितरण ऐसे कपड़ा उपक्रम के स्वामी को करेगा । 

(2) उपधारा (1) के अधीन किसी कपड़ा उपक्रम के स्वामी को कोई संदाय करने के पूर्व, आयुक्त ऐसी सम्पूर्ण रकम या उसका कोई भाग प्राप्त करने के ऐसे व्यक्ति के अधिकार के बारे में अपना समाधान करेगा और यदि धारा 8 और धारा 9 में निर्दिष्ट सम्पूर्ण रकम या उसका कोई भाग प्राप्त करने के उस व्यक्ति के अधिकार के बारे में कोई शंका या विवाद है तो आयुक्त वह मामला न्यायालय को निर्देशित करेगा और उस न्यायालय के विनिश्चय के अनुसार संवितरण करेगा ।

(3) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि पहली अनुसूची के स्तम्भ (3) में की प्रविष्टियां उक्त अनुसूची के स्तम्भ (2) में की तत्स्थानी प्रविष्टियों में विनिर्दिष्ट किसी कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति के अधिकार, हक और हित के बारे में निश्चायक नहीं समझी जाएगी और ऐसे कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति का अधिकार, हक और हित स्थापित करने के लिए साक्ष्य ग्राह्य होगा । 

(4) जहां कपड़ा उपक्रम की कोई मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति, राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित हो गई है किन्तु ऐसी मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति ऐसे कपड़ा उपक्रम के स्वामी की नहीं हैं वहां पहली अनुसूची के स्तम्भ (4) में कपड़ा उपक्रम के सामने विनिर्दिष्ट रकम, न्यायालय को आयुक्त द्वारा किए गए निर्देश पर, न्यायालय द्वारा ऐसे कपड़ा उपक्रम के स्वामी और ऐसी मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति के स्वामी के बीच, ऐसी मशीनरी, उपस्कर या अन्य सम्पत्ति के नियत दिन को मूल्य का सम्यक् ध्यान रखते हुए प्रभाजित की जाएगी ।  

स्पष्टीकरण-इस धारा में, न्यायालय" से, किसी कपड़ा उपक्रम के संबंध में, आरम्भिक अधिकारिता वाला वह प्रधान सिविल न्यायालय अभिप्रेत है जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर वह कपड़ा उपक्रम स्थित है । 

26. असंवितरित या अदावाकृत रकमों का साधारण राजस्व खाते में जमा किया जाना-आयुक्त को संदत्त कोई धन, जो उस अंतिम दिन से, जिस दिन संवितरण किया गया था, तीन वर्ष की अवधि तक असंवितरित या अदावाकृत रहता है, आयुक्त द्वारा केन्द्रीय सरकार के साधारण राजस्व खाते में अन्तरित किया जाएगा, किन्तु इस प्रकार अन्तरित किसी धन के लिए कोई दावा ऐसे संदाय के हकदार व्यक्ति द्वारा केन्द्रीय सरकार को किया जा सकेगा और उस संबंध में कार्यवाही इस प्रकार की जाएगी मानो ऐसा अन्तरण नहीं किया गया हो और दावे के संदाय के लिए आदेश, यदि कोई हो, राजस्व के प्रतिदाय के लिए आादेश माना जाएगा ।

अध्याय 7

प्रकीर्ण

27. दायित्व का ग्रहण किया जाना-(1) जहां किसी कपड़ा उपक्रम के स्वामी के किसी ऐसे दायित्व का, जो दूसरी अनुसूची के प्रवर्ग 1 में विनिर्दिष्ट किसी मद से उद्भूत होता है, आयुक्त द्वारा उसका इस अधिनियम के अधीन संदत्त रकम में से, पूर्णतः निर्वहन नहीं किया जाता है वहां आयुक्त केन्द्रीय सरकार को उतने दायित्व की, जितने का निर्वहन नहीं किया जाता है, सूचना, लिखित रूप में, देगा और वह दायित्व केन्द्रीय सरकार द्वारा ग्रहण किया जाएगा ।

(2) केन्द्रीय सरकार, आदेश द्वारा, राष्ट्रीय कपड़ा निगम को यह निदेश दे सकेगी कि वह उपधारा (1) के अधीन उस सरकार द्वारा ग्रहण किए गए किसी दायित्व को ग्रहण करे और ऐसे निदेश की प्राप्ति पर, राष्ट्रीय कपड़ा निगम का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसे दायित्व का निर्वहन करे । 

28. प्रबन्ध का अभिरक्षक में तब तक निहित रहना जब तक आनुकल्पिक इंतजाम नहीं कर दिए जाएं-इस अधिनियम के अधीन किसी कपड़ा उपक्रम के राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित होने पर भी, -

(क) जब तक राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा आनुकल्पिक इंतजाम नहीं कर दिए जाएं तब तक ऐसा अभिरक्षक, जो उस तारीख के पूर्व, जिसको कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अध्यादेश, 1995 (1995 का अध्यादेश सं० 6) प्रख्यापित किया गया था, ऐसे उपक्रम के कार्यकलापों का प्रबंध कर रहा हो, ऐसे उपक्रमों के कार्यकलापों का प्रबन्ध ऐसे करता रहेगा मानो वह अभिरक्षक ऐसे उपक्रम के कार्यकलापों का प्रबन्ध करने के लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा प्राधिकृत किया गया हो; और 

(ख) जब तक राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा आनुकल्पिक इंतजाम नहीं कर दिए जाएं तब तक अभिरक्षक या उसके द्वारा इस प्रयोजन के लिए प्राधिकृत कोई व्यक्ति कपड़ा उपक्रम के संबंध में किसी बैंक में ऐसे उपक्रम के किसी खाते को चलाने के लिए वैसे ही प्राधिकृत किया जाता रहेगा मानो ऐसा अभिरक्षक या उस अभिरक्षक द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति ऐसा खाता चलाने के लिए राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा प्राधिकृत किया गया हो ।

29. अधिनियम का अन्य सभी अधिनियमितियों पर अध्यारोही होना-इस अधिनियम के उपबंध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी अन्य विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में या किसी न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी की किसी डिक्री या आदेश में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।

30. संविदाओं का प्रभावी रहना जब तक कि राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा अनुसमर्थन नहीं कर दिया जाए-(1) किसी सेवा, विक्रय या प्रदाय के लिए किसी कपड़ा उपक्रम के स्वामी या अधिष्ठाता द्वारा की गई और नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त प्रत्येक संविदा उस तारीख से, जिसको कपड़ा उपक्रम (रजिस्ट्रीकरण) अध्यादेश, 1995 (1995 का अध्यादेश सं० 6) प्रख्यापित किया गया था, एक सौ बीस दिन की समाप्ति से ही प्रभावी नहीं रहेगी जब तक कि ऐसी संविदा उस अवधि की समाप्ति के पूर्व राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा, लिखित रूप में अनुसमर्थित नहीं कर दी जाए और राष्ट्रीय कपड़ा निगम ऐसी संविदा का अनुसमर्थन करने में, ऐसे परिवर्तन या उपान्तरण कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।

परन्तु राष्ट्रीय कपड़ा निगम किसी संविदा का अनुसमर्थन करने से इंकार नहीं करेगा और किसी संविदा में कोई परिवर्तन या उपान्तरण तब तक नहीं करेगा जब तक उसका यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसी संविदा असम्यक् रूप से दुर्भर है या दुर्भाव से की गई है या कपड़ा उपक्रम के हितों के लिए अहितकर है ।

(2) राष्ट्रीय कपड़ा निगम संविदा का अनुसमर्थन करने से इन्कार और उसमें कोई परिवर्तन या उपान्तरण, उस संविदा के पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् ही, और संविदा का अनुसमर्थन करने से इंकार करने के या उसमें कोई परिवर्तन या उपान्तरण करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात् ही करेगा अन्यथा नहीं ।

31. शास्तियां-जो कोई व्यक्ति, -

(क) कपड़ा उपक्रम की भागरूप जो सम्पत्ति, उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, उस सम्पत्ति को केन्द्रीय सरकार या राष्ट्रीय कपड़ा निगम से या, यथास्थिति, उस सरकार या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत्त किसी व्यक्ति से सदोष विधारित करेगा, या 

(ख) कपड़ा उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा या उसे सदोष प्रतिधारित करेगा या ऐसे कपड़ा-उपक्रम से संबंधित किसी दस्तावेज को, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, जानबूझकर विधारित करेगा या केन्द्रीय सरकार, या राष्ट्रीय कपड़ा निगम को, या, यथास्थिति, उस सरकार या निगम द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति को, देने में असफल रहेगा अथवा कपड़ा उपक्रम से संबंधित किन्हीं आस्तियों, लेखाबहियों, रजिस्टरों या अन्य दस्तावजों को, जो उसकी अभिरक्षा में है, राष्ट्रीय कपड़ा निगम या उस निगम द्वारा विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति को देने में असफल रहेगा, या 

(ग) किसी कपड़ा उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति को सदोष हटाएगा या नष्ट करेगा अथवा इस अधिनियम के अधीन कोई ऐसा दावा करेगा जिसके बारे में वह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का युक्तियुक्त कारण है कि वह मिथ्या है या बिल्कुल गलत है,

वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।

32. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कम्पनी द्वारा किया गया है वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात, किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सभी सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध, कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, - 

(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है; और 

(ख) फर्म के सम्बन्ध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है । 

33. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही, केन्द्रीय सरकार के या उस सरकार के किसी अधिकारी के या अभिरक्षक के या राष्ट्रीय कपड़ा निगम के या किसी समनुषंगी कपड़ा निगम के या ऐसे निगमों में से किसी निगम द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी । 

34. कपड़ा कम्पनियों का न्यायालय द्वारा परिसमापन किया जाना-किसी ऐसी कपड़ा कम्पनी के, जिसके स्वामित्व में के कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में अधिकार, हक और हित इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित हो गए हैं, परिसमापन के लिए या उस कपड़ा उपक्रम के कारबार की बाबत रिसीवर की नियुक्ति के लिए कोई कार्यवाही, किसी न्यायालय में केंद्रीय सरकार की सहमति से ही होगी या की जाएगी, अन्यथा नहीं ।

35. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों का, जो धारा 36 के अधीन शक्ति से भिन्न है, प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा भी किया जा सकेगा, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं ।

(2) जब कभी शक्ति का कोई प्रत्यायोजन उपधारा (1) के अधीन किया जाता है तब वह व्यक्ति, जिसको ऐसी शक्ति का प्रत्यायोजन किया गया है, केन्द्रीय सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा । 

36. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी । 

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा, अर्थात्: -

(क) वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिससे धारा 4 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट सूचना दी जाएगी; 

(ख) वह रीति जिससे धारा 15 में निर्दिष्ट किसी भविष्य या अन्य निधि में की धनराशियों के संबंध में कार्रवाई की जाएगी; 

(ग) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए । 

(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।

37. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-(1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, ऐसे आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी:

परन्तु ऐसा कोई आदेश, कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीकरण) अध्यादेश, 1995 (1995 का अध्यादेश संख्यांक 6) के प्रख्यापित किए जाने की तारीख से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा । 

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।

38 निरसन और व्यावृत्ति-(1) कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अध्यादेश, 1995 (1995 का अध्यादेश संख्यांक 6) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।

(2)  ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी ।

 [39. विधिमान्यकरण-(1) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में किसी बात के होते हुए भी, -

(क) कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) विधि (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम, 2014 द्वारा यथासंशोधित इस अधिनियम के उपबंध, सभी प्रयोजनों के लिए उतने ही प्रभावी होंगे और सदैव उतने ही प्रभावी रहे समझे जाएंगे मानो उक्त अधिनियम द्वारा यथासंशोधित रूप में इस अधिनियम के उपबंध सभी तात्त्विक समयों पर प्रवृत्त थे;

(ख) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम से किसी व्यक्ति को निर्निहित की गई कोई पट्टाधृत संपत्ति, जो कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) विधि (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ से ठीक पहले विद्यमान थी, राष्ट्रीय कपड़ा निगम में सभी विल्लगंमों से मुक्त होकर उसी प्रकार अंतरित और निहित हो जाएगी या उसका निहित होना बना रहेगा जैसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन उक्त संपत्ति के ऐसे निर्निहित होने से पहले राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित थी मानो पूर्वोक्त अधिनियम द्वारा यथासंशोधित इस अधिनियम के उपबंध सभी तात्त्विक समयों पर    प्रवृत्त थे ;

(ग) पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रभाव डाले बिना, किसी न्यायालय या अधिकरण या प्राधिकरण में, ऐसे न्यायालय या अधिकरण या प्राधिकरण द्वारा दी गई डिक्री या आदेश या निदेश के प्रवर्तन के लिए कोई वाद या अन्य कार्यवाही, इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित उससे ऐसी पट्टाधृत संपत्ति का निर्निहितीकरण का निदेश करते हुए, जो कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) विधि (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम, 2014 के प्रारंभ से ठीक पहले विद्यमान थी, किसी न्यायालय या अधिकरण या प्राधिकरण में राष्ट्रीय कपड़ा निगम द्वारा फाइल किए गए वचनबंध के होते हुए भी, की जाएगी या उसको चलाया जाएगा और ऐसी पट्टाधृत संपत्ति का, पूर्वोक्त अधिनियम द्वारा यथासंशोधित इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित होना बना रहेगा ;

(घ) राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित की गई पट्टाधृत संपत्ति के संबंध में, किसी सिविल न्यायालय की डिक्री या किसी अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के आदेशों के निष्पादन में किसी कुर्की, अभिग्रहण या विक्रय के आदेश के कारण राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित की गई किसी संपत्ति के किसी अंतरण का, जो कपड़ा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) विधि (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम, 2014 द्वारा यथासंशोधित इस अधिनियम के उपबंधों के प्रतिकूल है, अकृत और शून्य होना समझा जाएगा और ऐसे अंतरण के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय कपड़ा निगम में निहित होना बना रहेगा ।]

पहली अनुसूची

[धारा 2(ठ) और (ड), धारा 8 और धारा 18(1) देखिए]

क्रम सं०

कपड़ा उपक्रम का नाम

स्वामी का नाम

रकम

(1)

(2)

(3)

(4)

1.

एल्फिन्स्टोन स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स, एल्फिन्स्टोन रोड, मुंबई

दि एल्फिन्स्टोन स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स कं०लि०, कामनी चेम्बर्स, 32, रामजी भाई कामनी मार्ग, मुंबई-38

4,56,98,000

2.

फिन्ले मिल्स, 10/11, डा० एस० एस० राव रोड, मुंबई

दि फिन्ले मिल्स लि०, चार्टर्ड बैंक बिल्डिंग, फोर्ट, मुम्बई-23

8,14,87,000

3.

गोल्ड मोहर मिल्स, दादासाहेब फाल्के रोड, दादर, मुबंई

दि गोल्ड मोहर मिल्स लि०, चार्टर्ड बैंक बिल्डिंग, फोर्ट, मुंबई-23

5,45,55,000

4.

जैम मेन्युफैक्चरिंग मिल्स, लालबाग, परेल, मुबई

दि जैम मेन्युफैक्चरिंग कं०लि०, लालबाग, परेल, मुंबई-12

2,79,62,000

5.

कोहिनूर मिल्स (नं०1), नाई मार्ग क्रास रोड, दादर, मुबंई  

दि कोहिनूर मिल्स क० लि०, क्लिक हाउस चरनजीत राय मार्ग (होम स्ट्रीट), फोर्ट, मुंबई-1

2,33,38,000

6.

कोहिनूर मिल्स (नं० 2), नाई गॉम क्रास रोड, दादर, मुंबई  

7.

कोहिनूर मिल्स (नं० 3), लेडी जमशेदजी रोड, दादर, मुंबई

8.

न्यू सिटी आफ बांबे मैन्युफैक्चरिंग मिल्स, 63, तुकाराम बी० कदम मार्ग, मुंबई

दि न्यू सिटी आफ बांबे मैन्युफेक्चरिंग कं०लि०, 63, तुकाराम बैसजी कदम मार्ग, मुंबई-33

4,23,57,000

9.

पोद्दार मिल्स, एन० एम० जोशी मार्ग, मुंबई

दि पोद्दार मिल्स लि०, पोद्दार चेम्बर्स, सैय्यद अब्दुल्ला बरेलवी रोड, फोर्ट, मुंबई-1

7,46,30,000

10.

पोद्दार मिल्स (प्रोसेस हाउस), गणपत राव कदम मार्ग, मुंबई

दि पोद्दार मिल्स लि०, पोद्दार चैंबर्स, सैय्यद अब्दुल्ला बरेलवी रोड, फोर्ट, मुंबई-1

1,91,94,000

11.

श्री मधुसूदन मिल्स, पांडुरंग बुधकर मार्ग, मुंबई

श्री मधुसूदन मिल्स लि०, 31, चौरंगी रोड, कलकत्ता-1

2,70,85,000

12.

श्री सीताराम मिल्स, एन० एम० जोशी मार्ग, मुंबई

श्री सीताराम मिल्स लि०, एन०एम० जोशी मार्ग, मुंबई-11

1,95,20,000

13.

टाटा मिल्स, डा० अंबेडकर रोड, दादर, मुबंई

दि टाटा मिल्स लि०, बांबे हाउस, 24, होमी मोदी स्ट्रीट, फोर्ट, मुंबई -23

9,33,47,000

14.

लक्ष्मीरत्तन काटन मिल्स, कालपी रोड, कानपुर

लक्ष्मीरत्तन काटन मिल्स कंपनी लिमिटेड, बिहारी निवास, चटाई महल, कानपुर

2,22,39,000

15.

एथरटन वेस्ट काटन मिल्स, अनवर गंज, कानपुर

एथरटन वेस्ट एण्ड कंपनी लिमिटेड, अनवर गंज, कानपुर

1,10,95,000

दूसरी अनुसूची

(धारा 21, धारा 22, धारा 23 और धारा 27 देखिए)

किसी कपड़ा उपक्रम की बाबत दायित्वों के निर्वहन के लिए

पूर्विकता का क्रम

भाग

प्रबन्ध ग्रहण के पश्चात् की अवधि

प्रवर्ग 1-

() किसी बैंक द्वारा दिए गए उधार

() किसी बैंक से भिन्न किसी संस्था द्वारा दिए गए उधार

() कोई अन्य उधार

() व्यापार या विनिर्माण संक्रियाओं के प्रयोजन के लिए लिया गया कोई ऋण

प्रवर्ग 2-

                () केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को राजस्व, कर, उपकर, रेट अथवा कोई अन्य शोध्य रकम

                () कोई अन्य शोध्य रकमें

भाग

प्रबन्ध ग्रहण के पूर्व की अवधि

प्रवर्ग 3-

                भविष्य-निधि, वेतन और मजदूरी की बाबत बकाया और अन्य रकमें, जो किसी कर्मचारी को शोध्य हों

प्रवर्ग 4-

                प्रतिभूत उधार

प्रवर्ग 5-

केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकारी या राज्य बिजली बोर्ड को राजस्व, कर, उपकर, रेट, अथवा कोई अन्य शोध्य रकम  

प्रवर्ग 6-

                () व्यापार या विनिर्माण संक्रियाओं के प्रयोजन के लिए लिया गया कोई ऋण

                () कोई अन्य शोध्य रकम

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