कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1983
(1983 का अधिनियम संख्यांक 40)
[25 दिसम्बर, 1983]
पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट कंपनियों के कपड़ा उपक्रमों का
राष्ट्रीयकरण होने तक, लोक हित में, ऐसे उपक्रमों का,
प्रबन्ध-ग्रहण करने के लिए और उससे संबंधित
या आनुषंगिक विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट कपड़ा उपक्रमों के कार्यकलापों के कुप्रबन्ध के कारण, उनकी वित्तीय स्थिति मुंबई में कपड़ा हड़ताल के जनवरी, 1982 में प्रारम्भ के पूर्व ही पूर्ण रूप से असंतोषजनक हो गई थी और तत्पश्चात् उनकी वित्तीय स्थिति और भी बिगड़ गई है ;
और कुछ लोक वित्तीय संस्थाओं ने, ऐसी कंपनियों को जिनके स्वामित्व में ऐसे उपक्रम हैं, ऐसे उपक्रमों को व्यवहार्य बनाने की दृष्टि से अत्यधिक मात्रा में धनराशि उधार दी है ;
और उक्त उपक्रमों का पुनर्गठन और पुनरुद्धार करने के लिए और उसके द्वारा उनमें नियोजित कर्मकारों के हितों की सुरक्षा करने के लिए और विभिन्न किस्मों के कपड़ों और सूतों का उत्पादन बढ़ाने और उनका उचित कीमत पर वितरण करने के लिए बहुत बड़ी धनराशि का अतिरिक्त विनिधान करने की आवश्यकता है जिससे कि जनसाधारण का हितसाधन किया जा सके ;
और केन्द्रीय सरकार द्वारा उक्त उपक्रमों का अर्जन करना इसलिए आवश्यक है जिससे कि वह भारी धनराशि का विनिधान करने में समर्थ हो सके ;
और उक्त उपक्रमों के अर्जन होने तक, लोक हित में उक्त उपक्रमों का प्रबन्ध-ग्रहण करना समीचीन है ;
भारत गणराज्य के चौंतीसवें वर्ष मे संसद् निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अधिनियम, 1983 है ।
(2) यह 18 अक्तूबर, 1983 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तब कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जिसको यह अधिनियम प्रवृत्त होता है ;
(ख) अभिरक्षक" से उपक्रमों का प्रबन्ध-ग्रहण करने के लिए धारा 4 के अधीन नियुक्त व्यक्ति अभिप्रेत है ;
(ग) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है ;
(घ) कपड़ा उपक्रम" या उक्त कपड़ा उपक्रम" से ऐसा उपक्रम अभिप्रेत है जो पहली अनुसूची के दूसरे स्तम्भ में विनिर्दिष्ट है ;
(ङ) कपड़ा कंपनी" से ऐसी कंपनी [जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित कंपनी है] अभिप्रेत है जो पहली अनुसूची के तीसरे स्तम्भ में विनिर्दिष्ट कंपनी है और उस अनुसूची के दूसरे स्तम्भ की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट उपक्रम की स्वामी है ;
(च) उन शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं, और परिभाषित नहीं है किन्तु कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके उस अधिनियम में हैं ।
अध्याय 2
कुछ कपड़ा उपक्रमों का प्रबन्ध-ग्रहण
3. कुछ कपड़ा उपक्रमों के प्रबन्ध का केन्द्रीय सरकार में निहित होना-(1) नियत दिन से ही सभी कपड़ा उपक्रमों का प्रबन्ध केंद्रीय सरकार में निहित हो जाएगा ।
(2) यह समझा जाएगा कि कपड़ा उपक्रम के अन्तर्गत कपड़ा कम्पनी की उक्त उपक्रमों से संबंधित सभी आस्तियां, अधिकार, पट्टाधृतियां, शक्तियां, प्राधिकार और विशेषाधिकार तथा जंगम और स्थावर ऐसी सभी सम्पत्ति, जिसमें भूमि, भवन, कर्मशालाएं, परियोजनाएं, स्टोर, फालतू पुर्जे, उपकरण, मशीनरी, उपस्कर, मोटर-गाडियां और अन्य यान, उत्पादन या अभिवहन के अधीन के माल, रोकड़ बाकी, आरक्षित निधि, विनिधान और बही-ऋण सम्मिलित हैं तथा ऐसी संपत्ति के या उससे उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित, जो नियत दिन के ठीक पूर्व, चाहे भारत में या भारत के बाहर, कपड़ा कम्पनी के स्वामित्व, कब्जे, शक्ति या नियन्त्रण में थे तथा तत्संबंधी सभी लेखाबहियां, रजिस्टर और सभी प्रकार की अन्य सब दस्तावेजें हैं ।
(3) कोई संविदा, चाहे वह अभिव्यक्त हो या विवक्षित अथवा कोई अन्य ठहराव, जहां तक वह कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में उसके कारबार और कार्यकलाप के प्रबन्ध के बारे में है और नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त है, या किसी न्यायालय द्वारा किया गया कोई आदेश, जहां तक वह कपड़ा उपक्रम के सम्बन्ध में उसके कारबार और कार्यकलाप के प्रबन्ध के बारे में है और नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त है, नियत दिन से समाप्त हुआ समझा जाएगा ।
(4) नियत दिन के ठीक पूर्व प्रबन्ध के भारसाधक सभी व्यक्तियों के बारे में, जिनके अन्तर्गत कपड़ा उपक्रम के संबंध में कपड़ा कंपनी के निदेशक या प्रबन्धक का पद धारण करने वाले व्यक्ति या कोई प्रबन्धकीय कार्मिक भी हैं, यह समझा जाएगा कि उन्होंने नियत दिन से अपने पद रिक्त कर दिए हैं ।
(5) उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी कोई व्यक्ति, जिसके संबंध में प्रबन्ध की कोई संविदा या अन्य ठहराव उपधारा (3) के उपबंधों के कारण समाप्त किया जाता है या जो उपधारा (4) के उपबंधों के कारण कोई पदधारण करने से प्रविरत हो जाता है, यथास्थिति, प्रबन्ध की संविदा या अन्य ठहराव के समय-पूर्व समाप्ति या पद की हानि के लिए किसी प्रतिकर का दावा करने का हकदार नहीं होगा ।
(6) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी या (इस अधिनियम से भिन्न) उस समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रिसीवर या अन्य व्यक्ति जिसके कब्जे या अभिरक्षा में या जिसके नियंत्रण के अधीन उक्त कपड़ा उपक्रम या उसका कोई भाग नियत दिन के ठीक पूर्व है, इस अधिनियम के प्रारम्भ पर, यथास्थिति, उक्त उपक्रम या उसके ऐसे भाग का कब्जा अभिरक्षक को या यदि कोई अभिरक्षक नियुक्त नहीं किया गया है तो ऐसे अन्य व्यक्ति को, जिसे केन्द्रीय सरकार निदिष्ट करे, सौंप देगा ।
(7) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि कपड़ा उपक्रम के संबंध में कपड़ा कंपनी द्वारा नियत दिन के पूर्व उपगत, कोई दायित्व, संबंधित कपड़ा कंपनी के विरुद्ध प्रवर्तनीय होगा, न कि केन्द्रीय सरकार या अभिरक्षक के विरुद्ध ।
4. कपड़ा उपक्रमों का अभिरक्षक-(1) केन्द्रीय सरकार किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय को, (जिसके अन्तर्गत सरकारी कंपनी भी है, चाहे वह इस अधिनियम के प्रारम्भ के समय विद्यमान है या तत्पश्चात् निगमित हो) ऐसे कपड़ा उपक्रम का प्रबन्ध-ग्रहण करने के लिए कपड़ा उपक्रम का अभिरक्षक, यथाशीघ्र, तब नियुक्त कर सकेगी जब प्रशासनिक दृष्टि से ऐसा करना सुविधाजनक हो, और इस प्रकार नियुक्त अभिरक्षक कपड़ा उपक्रमों का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार के लिए और उसकी ओर से चलाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन अभिरक्षक की नियुक्ति होने पर कपड़ा उपक्रमों का प्रबन्ध ऐसे अभिरक्षक में निहित हो जाएगा और ऐसी नियुक्ति के ठीक पूर्व ऐसे उपक्रम के प्रबन्ध के भारसाधक सभी व्यक्ति, ऐसे प्रबन्ध के भारसाधक नहीं रह जाएंगे और अभिरक्षक को ऐसा प्रबन्ध देने के लिए आबद्ध होंगे ।
(3) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा किसी व्यक्ति को (जिसके अन्तर्गत कोई सरकारी कंपनी भी है, चाहे वह इस अधिनियम के प्रारम्भ पर विद्यमान है अथवा तत्पश्चात् निगमित हो) कपड़ा उपक्रम के लिए अपर अभिरक्षक के रूप में नियुक्त करने के लिए अभिरक्षक को प्राधिकृत कर सकेगी ।
(4) अपर अभिरक्षक इस अधिनियम के अधीन अभिरक्षक की, उसकी शक्तियों और अधिकारों का प्रयोग करने में, सहायता करेगा और अभिरक्षक के निदेशन, पर्यवेक्षण और नियंत्रण के अधीन कार्य करेगा और अभिरक्षक अपनी सभी या ऐसी शक्तियां अपर अभिरक्षक को प्रत्यायोजित कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(5) अभिरक्षक द्वारा दिए गए किसी साधारण या विशेष निदेश या अधिरोपित की गई किसी शर्त के अधीन रहते हुए, अभिरक्षक द्वारा किसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कोई व्यक्ति, उस शक्ति का उसी रीति से प्रयोग कर सकेगा और उसका वही प्रभाव होगा मानो वह उस व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा प्रत्यक्षतः प्रदत्त की गई थी, प्राधिकरण के रूप में नहीं ।
(6) केन्द्रीय सरकार अभिरक्षक को उसकी शक्तियों और कर्तव्यों के बारे में ऐसे निदेश (जिनके अन्तर्गत किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के समक्ष किसी विधिक कार्यवाही को आरम्भ करने, उसमें प्रतिरक्षा करने या उसे चालू रखने की बाबत निदेश भी है), जारी कर सकेगी, जिन्हें केन्द्रीय सरकार मामले की परिस्थितियों में वांछनीय समझे और अभिरक्षक केन्द्रीय सरकार को किसी भी समय उस रीति के बारे में जिससे अभिरक्षक कपड़ा उपक्रम के प्रबन्ध का संचालन करेगा या ऐसे प्रबन्ध के अनुक्रम में उत्पन्न होने वाली किसी बात के सम्बन्ध में अनुदेशों के लिए, आवेदन कर सकेगा ।
(7) अभिरक्षक, इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों और केन्द्रीय सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, कपड़ा उपक्रम के संबंध में कपड़ा कंपनी के निदेशक बोर्ड की सभी शक्तियों का, (जिसके अन्तर्गत कपड़ा कंपनी की सम्पत्ति और आस्तियों के व्ययन की शक्ति भी है) प्रयोग करने का हकदार, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) में किसी बात के होते हुए भी, होगा चाहे ऐसी शक्तियां कंपनी अधिनियम, 1956 से या संबंधित कपड़ा कंपनी के ज्ञापन और संगम-अनुच्छेद से या किसी अन्य स्रोत से व्युत्पन्न हों ।
(8) प्रत्येक व्यक्ति जिसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में किसी कपड़ा उपक्रम की भागरूप कोई सम्पत्ति है, ऐसी संपत्ति का परिदान अभिरक्षक या केन्द्रीय सरकार अथवा अभिरक्षक या केन्द्रीय सरकार के किसी ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी को करेगा, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त प्राधिकृत करे ।
(9) कोई व्यक्ति जिसके कब्जे में या जिसके नियंत्रण के अधीन नियत दिन को, ऐसे कपड़ा उपक्रम से संबंधित जिसका प्रबंध इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित हो गया है, कोई बही, कागजपत्र या अन्य दस्तावेजें है, उस समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, अभिरक्षक को उन बहियों, कागजपत्रों और अन्य दस्तावेजों का (जिनके अन्तर्गत ऐसी कार्यवृत्त-पुस्तकें, चेक बुक, पत्र, ज्ञापन, टिप्पण या अन्य पत्र व्यवहार भी हैं) लेखा-जोखा देने के लिए दायी होगा और उन्हें अभिरक्षक को या ऐसे अन्य व्यक्ति को (जो केन्द्रीय सरकार का या अभिरक्षक का कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी है), जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त प्राधिकृत करे, परिदत्त करेगा ।
(10) नियत दिन के ठीक पूर्व किसी कपड़ा उपक्रम के प्रबन्ध का भारसाधक प्रत्येक व्यक्ति उस दिन से दस दिन के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुज्ञात करे, अभिरक्षक को उन सभी सम्पत्तियों और आस्तियों की, जो नियत दिन के ठीक पूर्व ऐसे उपक्रम की भागरूप है (जिनके अन्तर्गत बही-ऋणों, विनिधानों तथा माल असबाब की विशिष्टियां भी हैं) तथा ऐसे उपक्रम के संबंध में कपड़ा कम्पनी के ऐसे सभी दायित्वों और बाध्यताओं की, जो उस दिन के पूर्व विद्यमान हो, तथा उन सभी करारों को भी, जो ऐसी कपड़ा कम्पनी द्वारा अपने उपक्रम के संबंध में किए गए हों और उस दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त हों, एक पूर्ण तालिका प्रस्तुत करेगा ।
(11) अभिरक्षक और अपर अभिरक्षक, कपड़ा उपक्रमों की निधि में से ऐसे पारिश्रमिक प्राप्त करेंगे जो केन्द्रीय सरकार नियत करे ।
5. रकम का संदाय-(1) केन्द्रीय सरकार, धारा 3 के अधीन, कम्पनी के कपड़ा उपक्रम का प्रबन्ध केन्द्रीय सरकार में निहित किए जाने के लिए, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट दर से ऐसी प्रत्येक कपड़ा कम्पनी को एक नकद रकम देगी ।
(2) ऐसे प्रत्येक मास के लिए, जिसके दौरान कपड़ा उपक्रम का प्रबन्ध इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित रहता है, उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम की संगणना-
(i) किसी कताई यूनिट के लिए प्रति 1000 तकुआ या उसके किसी भाग के लिए पचास पैसे की दर से;
(ii) किसी ब्यूतन यूनिट के लिए प्रति 100 करघों या उसके किसी भाग के लिए एक रुपए की दर से;
(iii) रंजन गृह सहित या उसके बिना किसी संयुक्त यूनिट के लिए प्रति 1000 तकुआ या उनके किसी भाग पर पचास पैसे धन 100 करघों पर एक रुपए धन नियत दिन के ठीक पूर्व पूर्ववर्ती तीन वर्षों की अवधि के दौरान मासिक औसत उत्पादन पर आधारित रंजन गृह में प्रसंस्कृत प्रति 10,000 मीटर कपड़े पर एक पैसे की दर से;
(iv) किसी पूर्णतः प्रसंस्करण यूनिट के लिए (जो ऐसी यूनिट है जिसमें कोई तकुआ या करघा न हो) ऐसी यूनिट में नियत दिन के ठीक पूर्ववर्ती तीन वर्षों की अवधि के दौरान प्रसंस्कृत कपड़े की कुल मात्रा के औसत के प्रति एक हजार वर्ग मीटर या उस के किसी भाग के लिए एक पैसा की दर से,
की जाएगी ।
अध्याय 3
कपड़ा उपक्रमों को राहत देने की शक्ति
6. कुछ कपड़ा उपक्रमों के संबंध में कुछ घोषणाएं करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का, किसी कपड़ा उपक्रम या उसके किसी भाग के सम्बन्ध में, जिसका प्रबन्ध इस अधिनियम के अधीन उसमें निहित हो गया है, यह समाधान हो जाता है कि ऐसे उपक्रम के उत्पादन की मात्रा में गिरावट को रोकने की दृष्टि से जनसाधारण के हित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह, अधिसूचना द्वारा, घोषणा कर सकेगी कि-
(क) दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट सभी या कोई अधिनियमितियां ऐसे उपक्रम को लागू नहीं होंगी या ऐसे परिवर्तन, परिवर्धन या लोप के तौर पर (जिससे अधिनियमितियों की नीति पर प्रभाव न पड़ता हो) ऐसे अनुकूलनों के साथ लागू होंगी, जो ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं; या
(ख) अधिसूचना के जारी किए जाने की तारीख के ठीक पूर्व प्रवृत्त सभी या किन्हीं संविदाओं, संपत्ति के हस्तांतरण-पत्रों, करारों, समझौतों, पंचाटों, स्थायी आदेशों या अन्य लिखतों का (जिनका एक पक्षकार ऐसा कपड़ा उपक्रम या वह कपड़ा कम्पनी है जिसके स्वामित्व में ऐसा उपक्रम है या जो ऐसे कपड़ा उपक्रम या कपड़ा कम्पनी को लागू हों), प्रवर्तन निलम्बित रहेगा या यह कि उक्त तारीख से पूर्व उसके अधीन प्रोद्भूत या उत्पन्न होने वाले सभी या कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यताएं और दायित्व निलम्बित रहेंगे या ऐसे अनुकूलनों के साथ और ऐसी रीति से प्रवर्तनीय होंगे जैसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं ।
(2) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना, पहली बार में एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहेगी किन्तु ऐसी अधिसूचना की अवधि समय-समय पर अतिरिक्त अधिसूचना द्वारा एक समय में अधिक से अधिक एक वर्ष की अवधि के लिए, बढ़ाई जा सकेगी:
परन्तु किसी भी दशा में ऐसी कोई अधिसूचना इस अधिनियम के प्रारम्भ से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात् प्रवृत्त नहीं रहेगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई कोई अधिसूचना, किसी अन्य विधि, करार या लिखत में अथवा किसी न्यायालय, अधिकरण, अधिकारी या अन्य प्राधिकरण को किसी डिक्री या आदेश में अथवा किसी माध्यस्थम्-करार, समझौते या स्थायी आदेश में तत्प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होगी ।
(4) जहां उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन अधिसूचना के आधार पर कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व निलंबित रहता है या उसका प्रवर्तन अनुकूलनों के अधीन रहते हुए और अधिसूचना में विनिर्दिष्ट रीति से होता है, वहां किसी न्यायालय, अधिकरण, अधिकारी या अन्य प्राधिकरण के समक्ष, लम्बित तत्सम्बन्धी सभी कार्यवाहियां तदनुसार, यथास्थिति, रुकी रहेंगी अथवा ऐसे अनुकूलनों के अधीन रहते हुए जारी रखी जाएंगी, किन्तु इस प्रकार कि उस अधिसूचना के प्रभावी न रह जाने पर-
(क) ऐसा कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व वैसे ही प्रवर्तनीय हो जाएगा मानो उक्त अधिसूचना कभी जारी ही न की गई हो;
(ख) किसी कार्यवाही में जो इस प्रकार रुकी रही हो, उस प्रक्रम के जिस तक वह कार्यवाही रोके जाने के समय पहुंची थी, आगे कार्यवाही तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए की जाएगी ।
(5) उपधारा (1) के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व के प्रवर्तन के लिए परिसीमाकाल की संगणना करने में वह अवधि अपवर्जित कर दी जाएगी जिसके दौरान वह और उसके प्रवर्तन के लिए उपचार निलम्बित रहा हो ।
अध्याय 4
प्रकीर्ण
7. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के या उसके अधीन निकाली गई किसी अधिसूचना, किए गए आदेश या बनाए गए नियम के उपबन्ध (इस अधिनियम से भिन्न) किसी अन्य विधि में, या इस अधिनियम से भिन्न किसी विधि के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय की किसी डिक्री या आदेश में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे ।
8. 1956 के अधिनियम संख्यांक 1 का लागू होना-(1) जब तक किसी कपड़ा कम्पनी के कपड़ा उपक्रम का प्रबन्ध इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार में निहित रहता है, तब तक कम्पनी अधिनियम, 1956 या ऐसी कम्पनी के ज्ञापन या संगम-अनुच्छेदों में किसी बात के होते हुए भी-
(क) कपड़ा कम्पनी के शेयरधारकों या किसी अन्य व्यक्ति के लिए यह विधिपूर्ण नहीं होगा कि वह किसी व्यक्ति को ऐसे उपक्रम के संबंध में ऐसी कपड़ा कम्पनी के निदेशक के रूप में नामनिर्दिष्ट या नियुक्त करे;
(ख) नियत दिन को या उसके पश्चात् कपड़ा कम्पनी के शेयरधारकों के किसी अधिवेशन में पारित कोई सकंल्प जो ऐसे उपक्रम को प्रभावित करता है (चाहे वह प्रत्यक्षतः हो या अप्रत्यक्षतः हो) तब तक प्रभावी नहीं किया जाएगा जब तक केन्द्रीय सरकार उसका अनुमोदन न करे दे;
(ग) कपड़ा कम्पनी के परिसमापन के लिए या उसकी बाबत किसी समापक या रिसीवर की नियुक्ति के लिए कोई कार्यवाही केन्द्रीय सरकार की सहमति के बिना किसी न्यायालय में नहीं होगी ।
(2) उपधारा (1) और इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए और ऐसे किन्हीं अन्य अपवादों, निर्बन्धनों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, यदि कोई हों, जो केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1), कपड़ा कम्पनियों को उसी रीति से लागू होता रहेगा जैसे वह नियत दिन के पूर्व उनको लागू था ।
9. परिसीमाकाल से इस अधिनियम के प्रवर्तन की अवधि का अपवर्जन-कपड़ा उपक्रम से संबंधित किसी संव्यवहार से उत्पन्न होने वाले किसी विषय के संबंध में किसी कपड़ा कम्पनी द्वारा किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी वाद या आवेदन के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा विहित परिसीमाकाल की संगणना करने में उस समय को अपवर्जित कर दिया जाएगा जिसके दौरान यह अधिनियम प्रवृत्त रहता है ।
10. सद्भावपू्र्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण-(1) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के बारे में कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या अभिरक्षक या अपर अभिरक्षक या केन्द्रीय सरकार अथवा अभिरक्षक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के कारण हुए या हो सकने वाले किसी नुकसान के लिए कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार, अभिरक्षक या अपर अभिरक्षक या केन्द्रीय सरकार अथवा अभिरक्षक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
11. असद्भावपूर्वक की गई संविदा आदि का रद्द किया जा सकना या उसमें परिवर्तन किया जाना-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का, ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि नियत दिन के ठीक पूर्ववर्ती तीन वर्ष के भीतर किसी समय किसी कपड़ा कम्पनी के या किसी ऐसी कपड़ा कम्पनी के प्रबन्धक या अन्य निदेशक और किसी अन्य व्यक्ति के बीच संबंधित कपड़ा उपक्रम के लिए या उनके द्वारा किसी सेवा, विक्रय या प्रदाय के संबंध में कोई संविदा या करार, जो नियत दिन के ठीक पूर्व प्रवृत्त है, असद्भावपूर्वक किया गया है या सम्बन्धित कपड़ा कम्पनी के कपड़ा उपक्रम के लिए अहितकर है तो केन्द्रीय सरकार उस संविदा या करार को (चाहे बिना किसी शर्त के अथवा ऐसी शर्तों के अधीन जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे) रद्द करते हुए या उसमें कोई परिवर्तन करते हुए कोई आदेश नियत दिन से एक सौ अस्सी दिन के भीतर कर सकेगी और तत्पश्चात् वह संविदा या करार तदनुसार प्रभावी होगा :
परन्तु किसी संविदा या करार को तब तक रद्द या परिवर्तित नहीं किया जाएगा तब तक उस संविदा या करार के पक्षकारों को सुनवाई का उचित अवसर न दे दिया गया हो ।
(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति प्रारम्भिक अधिकारिता वाले उस प्रधान सिविल न्यायालय में, जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर संबंधित कपड़ा कम्पनी का रजिस्ट्रीकृत कार्यालय स्थित है, ऐसे आदेश में परिवर्तन करने के लिए अथवा उसके उलट दिए जाने के लिए आवेदन कर सकेगा और तब ऐसा न्यायालय ऐसे आदेश की पुष्टि कर सकेगा या उसमें परिवर्तन कर सकेगा या उसे उलट सकेगा ।
12. स्वेच्छा से किए गए अन्तरणों का शून्य किया जाना-यदि किसी कपड़ा कम्पनी द्वारा या उसकी ओर से किसी स्थावर या जंगम संपत्ति का अंतरण या माल का कोई परिदान (जो उसके कारबार के सामान्य अनुक्रम में किया गया अंतरण या परिदान नहीं है अथवा जो मूल्यवान प्रतिफल के लिए और किसी क्रेता के पक्ष में सद्भावपूर्वक किया गया अन्तरण नहीं है) नियत दिन से ठीक पूर्ववर्ती छह मास की अवधि के भीतर किया गया है तो वह, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या अभिरक्षक के विरुद्ध शून्य होगा ।
13. नियोजन संविदा को समाप्त करने की शक्ति-यदि अभिरक्षक की यह राय है कि किसी कपड़ा कम्पनी द्वारा या कपड़ा उपक्रम के संबंध में किसी कम्पनी के प्रबन्धक अथवा अन्य निदेशक द्वारा नियत दिन से पूर्व किसी भी समय की गई कोई नियोजन संविदा असम्यक् रूप से दुर्भर है तो वह कर्मचारी को एक मास की लिखित सूचना देकर अथवा उसके बदले में एक मास का वेतन या मजदूरी देकर, ऐसी नियोजन संविदा को समाप्त कर सकेगा ।
14. शास्तियां-(1) जो कोई व्यक्ति-
(क) किसी कपड़ा उपक्रम की भागरूप किसी संपत्ति को अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में रखते हुए, ऐसी संपत्ति को अभिरक्षक से या इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति से सदोष विधारित करेगा; या
(ख) किसी ऐसी संपत्ति का कब्जा सदोष अभिप्राप्त करेगा; या
(ग) ऐसे कपड़ा उपक्रम की भागरूप किसी सम्पत्ति को जानबूझकर प्रतिधारित रखेगा या हटाएगा या नष्ट करेगा; या
(घ) ऐसे कपड़ा उपक्रम से संबंधित बहियों, कागज-पत्रों, या अन्य दस्तावेजों को, जो उसके कब्जे, शक्ति या अभिरक्षा में है या उसके नियंत्रण के अधीन है, अभिरक्षक या इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति से विधारित करेगा या उसे देने में असफल रहेगा; या
(ङ) बिना किसी उचित कारण के धारा 4 में या उपबन्धित जानकारी या विशिष्टियां देने में असफल रहेगा,
वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा ।
(2) कोई न्यायालय इस धारा के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान, केन्द्रीय सरकार या उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं ।
15. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया हो वहां ऐसा व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के लिए दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे:
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी, उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कंपनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) किसी फर्म के सम्बन्ध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
16. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए, अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
17. निरसन और व्यावृत्ति-(1) कपड़ा उपक्रम (प्रबन्ध-ग्रहण) अध्यादेश, 1983 (1983 का 10) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
पहली अनुसूची
[धारा 2 (घ) और (ङ) देखिए]
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क्रम संख्यांक |
उपक्रम का नाम |
स्वामी का नाम |
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1 |
2 |
3 |
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1. |
एल्फिंस्टोन स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्स, एल्फिंस्टोन रोड, मुम्बई । |
दि एल्फिंस्टोन स्पिनिंग एण्ड वीविंग मिल्ज कंपनी लिमिटेड, कमानी चैम्बर्स, 32, रामजी भाई कमानी मार्ग, मुम्बई-38. |
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2. |
फिनले मिल्स, 10/11, डा० एस० एस० राव रोड, मुम्बई । |
दि फिनले मिल्स लिमिटेड, चार्टर्ड बैंक बिल्डिंग, फोर्ट, मुम्बई-23. |
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3. |
गोल्ड मोहर मिल्स, दादा साहेब फाल्के रोड, दादर, मुम्बई । |
दि गोल्ड मोहर मिल्स लिमिटेड, चार्टर्ड बैंक बिल्डिंग, फोर्ट, मुम्बई-23. |
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4. |
जाम मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, लालबाग, परेल, मुम्बई । |
दि जाम मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनी लिमिटेड, लालबाग, परेल, मुम्बई- 12. |
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5. |
कोहिनूर मिल्स (नं० 1), नायगांव क्रास रोड, दादर, मुम्बई । |
दि कोहिनूर मिल्स कंपनी लिमिटेड, किलिक हाऊस, चरणजीत राय मार्ग (होम स्ट्रीट), फोर्ट, मुम्बई-1. |
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6. |
कोहिनूर मिल्स (नं० 2), नायगांव क्रास रोड, दादर, मुम्बई । |
दि कोहिनूर मिल्स कंपनी लिमिटेड, किलिक हाऊस, चरणजीत राय मार्ग (होम स्ट्रीट), फोर्ट, मुम्बई-1. |
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7. |
कोहिनूर मिल्स (नं० 3), लेडी जमशेदजी रोड, दादर, मुम्बई । |
दि कोहिनूर मिल्स कंपनी लिमिटेड, किलिक हाऊस, चरणजीत राय मार्ग (होम स्ट्रीट), फोर्ट, मुम्बई-1. |
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8. |
न्यू सिटी आफ बाम्बे मैन्यूफैक्चरिंग मिल्स, 63, तुकाराम बी० कदम मार्ग, मुम्बई । |
दि न्यू सिटी आफ बाम्बे मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड, 63, तुकाराम भीसाजी कदम पथ, मुम्बई-33. |
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9. |
पोद्दार मिल्स, एन० एम० जोशी मार्ग, मुम्बई । |
दि पोद्दार मिल्स लिमिटेड, पोद्दार चैम्बर्स, सैयद अब्दुल्ला ब्रेल्वी रोड, फोर्ट, मुम्बई-1. |
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10. |
पोद्दार मिल्स (प्रासेस हाऊस), गनपत राव कदम मार्ग, मुम्बई । |
दि पोद्दार मिल्स लिमिटेड, पोद्दार चैम्बर्स, सैयद अब्दुल्ला ब्रेल्वी रोड, फोर्ट, मुम्बई-1. |
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11. |
मधुसूदन मिल्स, पान्डुरंग बूधकार मार्ग, मुम्बई । |
दि मधुसूदन मिल्स लिमिटेड, 31, चौरंगी रोड, कलकत्ता-16. |
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12. |
श्री सीताराम मिल्स, एन० एम० जोशी मार्ग, मुम्बई । |
श्री सीताराम मिल्स लिमिटेड, एन० एम० जोशी मार्ग, मुम्बई-11. |
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13. |
टाटा मिल्स, डा० अम्बेडकर रोड, दादर, मुम्बई । |
दि टाटा मिल्स लिमिटेड, बाम्बे हाऊस, 24, होमी मोदी स्ट्रीट, फोर्ट, मुम्बई-23. |
दूसरी अनुसूची
(धारा 6 देखिए)
1. औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 (1946 का 20) ।
2. औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) ।
3. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 (1948 का 11) ।
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