टेक्सटाइल समिति अधिनियम, 1963
(1963 का अधिनियम संख्यांक 41)
[3 दिसम्बर, 1963]
टेक्सटाइल और टेक्सटाइल मशीनरी की क्वालिटी सुनिश्चित
करने के लिए एक समिति की स्थापना का
और उससे सम्बन्धित विषयों का
उपबन्ध करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के चौदहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम टेक्सटाइल समिति अधिनियम, 1963 है ।
(2) इसका विस्तार ॥। सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ में विरुद्ध न हो, -
(क) अध्यक्ष" से समिति का अध्यक्ष अभिप्रेत है;
(ख) समिति" से धारा 3 के अधीन स्थापित समिति अभिप्रेत है;
[(खक) फाइबर" से कृत्रिम फाइबर अभिप्रेत है जिसके अन्तर्गत पुनर्योजित सेलूलोज रेयान, नायलोन और ऐसे ही फाइबर हैं;]
(ग) निधि" से धारा 7 में निर्दिष्ट टेक्सटाइल निधि अभिप्रेत है;
3[(गक) हथकरघा उद्योग" का वही अर्थ है जो खादी और अन्य हथकरघा उद्योग विकास (कपडे़ पर अतिरिक्त उत्पाद-शुल्क) अधिनियम, 1953 (1953 का 12) में है;]
(घ) सदस्य" से समिति का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी हैं;
3[(घक) बिजली करघा" से ऐसा करघा अभिप्रेत है जो कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 2 के खंड (छ) में यथापरिभाषित शक्ति से चालित होता है और जो पूर्णतः या भागतः कपास के सूत, ऊनी सूत या फाइबर या किसी भी प्रकार के मिश्रित सूत से केवल कपडे़ की बुनाई के लिए प्रयुक्त किया जाता है या प्रयुक्त किया जा सकता है;
(घख) बिजली करघा उद्योग" से ऐसा उद्योग अभिप्रेत है जिसमें टेक्सटाइल के किसी विनिर्माता के पास उसके स्वामित्व, नियंत्रण या प्रबंध के अधीन वाले कारखाने या कारखानों में, धारा 5क की उपधारा (5) के खंड (क) के अधीन समिति द्वारा नियत अवधि के दौरान किसी समय (किन्हीं कताई संयंत्रों को छोड़कर) अधिक से अधिक पचास बिजली करघे हैं ।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए कारखाना" पद का वही अर्थ है जो कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) में है;]
(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(च) टेक्सटाइल-मशीनरी" से वह उपस्कर अभिप्रेत है, जो टेक्सटाइल फाइबर को सूत के रूप में प्रसंस्कृत करने के लिए और बुनाई या बिनाई द्वारा उससे फैब्रिक के विनिर्माण के लिए प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः काम में लाया जाता है और इसके अन्तर्गत टेक्सटाइल के परिष्करण, तह करने या पैक करने के लिए या तो पूर्णतः या भागतः प्रयुक्त उपस्कर भी है;
[(छ) टेक्सटाइल" से ऐसा कोई फैब्रिक या कपड़ा या सूत या वस्त्र या कोई अन्य वस्तु अभिप्रेत है, जो पूर्णतः या भागतः-
(i) कपास; अथवा
(ii) ऊन; अथवा
(iii) रेशम; अथवा
(iv) कृत्रिम रेशम या अन्य फाइबर,
से बनी है और इसके अन्तर्गत फाइबर भी है;]
(ज) उपाध्यक्ष" से समिति का उपाध्यक्ष अभिप्रेत है ।
[2क. किसी ऐसी विधि के प्रति जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त नहीं है, या किसी ऐसे कृत्यकारी के प्रति जो जम्मू-कश्मीर राज्य में विद्यमान नहीं है, निर्देशों का अर्थान्वयन-इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त नहीं है या किसी ऐसे कृत्यकारी के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में विद्यमान नहीं है, किसी निर्देश का अर्थ, उस राज्य के संबंध में यह लगाया जाएगा कि वह उस राज्य में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के प्रति या उस राज्य में विद्यमान तत्समान कृत्यकारी के प्रति निर्देश है ।]
3. टेक्सटाइल समिति की स्थापना-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उस तारीख से जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, एक समिति स्थापित करेगी जो टेक्सटाइल समिति कहलाएगी, जो कि निगमित निकाय होगी, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और जिसे सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उस नाम से वह वाद ला सकेगी या उस पर वाद लाया जा सकेगा ।
(2) समिति का प्रधान कार्यालय मुम्बई में होगा ।
(3) समिति निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात् :-
(क) एक अध्यक्ष जिसे केन्द्रीय सरकार नियुक्त करेगी ;
(ख) एक उपाध्यक्ष जो टेक्सटाइल आयुक्त होगा, पदेन ;
(ग) भारत सरकार का संयुक्त सचिव, जिसे केन्द्रीय सरकार नियुक्त करेगी, पदेन ;
(घ) ऐसे अन्य सदस्य, जिन्हें नियुक्त करना केन्द्रीय सरकार ठीक समझे और जिन्हें उस सरकार की राय में, टेक्सटाइल उद्योग और व्यापार तथा टेक्सटाइल-मशीनरी के विनिर्माण से संबंधित विषयों का विशेष ज्ञान या व्यवहारिक अनुभव है ।
4. समिति के कृत्य-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, समिति के कृत्य साधारणतया ऐसे उपायों द्वारा, जिन्हें वह ठीक समझे, अन्तर्देशीय विपणन तथा निर्यात दोनों के प्रयोजनों के लिए टेक्सटाइल की मानक क्वालिटी और मानक प्रकार की टेक्सटाइल-मशीनरी का विनर्माण और प्रयोग सुनिश्चित करना होगा ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, समिति-
(क) टेक्सटाइल उद्योग और टेक्सटाइल-मशीनरी के सबंध में वैज्ञानिक, प्रौद्योगिक और आर्थिक अनुसंधान का जिम्मा ले सकेगी, उसकी सहायता कर सकेगी और उसे प्रोत्साहन दे सकेगी;
(ख) टेक्सटाइल और टेक्सटाइल-मशीनरी के निर्यात की अभिवृद्धि और उस प्रयोजन के लिए प्रचार कर सकेगी;
[(ग) निर्यात के प्रयोजनों और अन्तर्देशीय उपभोग के लिए,-
(i) टेक्सटाइल के ; और
(ii) टेक्सटाइल अथवा टेक्सटाइल-मशीनरी को पैक करने के लिए प्रयुक्त पैकिंग सामग्री के,
मानक विनिर्देश नियत कर सकेगी, या उन्हें अपना सकेगी या मान्यता दे सकेगी तथा टेक्सटाइल और पैकिंग सामग्री की ऐसी मानकीकृत किस्मों पर उपयुक्त चिह्न लगा सकेगी ;]
(घ) यह विनिर्दिष्ट कर सकेगी कि टेक्सटाइल तथा टेक्सटाइल-मशीनरी पर किस प्रकार का क्वालिटी नियंत्रण या निरीक्षण लागू किया जाएगा ;
[(घक) टेक्सटाइल या टेक्सटाइल-मशीनरी पर लागू किए जाने वाले क्वालिटी नियंत्रण की तकनीकों में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था कर सकेगी ;]
(ङ) निम्नलिखित के निरीक्षण और पुरीक्षण की व्यवस्था कर सकेगी :-
(i) टेक्सटाइल ;
(ii) टेक्सटाइल-मशीनरी विनिर्माण के किसी भी प्रक्रम पर और तब भी जब वह मिल-हैड में प्रयोग में लाई जा रही है ;
[(iii) टेक्सटाइल अथवा टेक्सटाइल-मशीनरी को पैक करने के लिए प्रयुक्त पैकिंग सामग्री ;]
(च) टेक्सटाइल के परीक्षण के लिए प्रयोगशालाएं और परीक्षणशालाएं स्थापित कर सकेगी ;
(छ) खंड (च) के अधीन स्थापित प्रयोगशालाओं और परीक्षणशालाओं के भिन्न प्रयोगशालाओं और परीक्षणशालाओं में टेक्सटाइल और टेक्सटाइल-मशीनरी के परीक्षण के लिए व्यवस्था कर सकेगी ;
(ज) ऊपर वर्णित प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए निम्नलिखित से संबंधित आंकडे़ संगृहीत कर सकेगी :-
(i) टेक्सटाइल के विनिर्माता और व्यवहारी ;
(ii) टेक्सटाइल-मशीनरी के विनिर्माता ; और
(iii) ऐसे अन्य व्यक्ति जो विहित किए जाएं ;
(झ) टेक्सटाइल उद्योग के विकास और टेक्सटाइल-मशीनरी के उत्पादन से संबंधित सभी विषयों पर सलाह दे सकेगी ;
(3) अपने कृत्यों के निर्वहन में समिति उन निदेशों से आबद्ध होगी जिन्हें केन्द्रीय सरकार ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, समय-समय पर उसे दे ।
5. समिति की शक्तियां-समिति उन सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगी जो इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों का निष्पादन करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हों ।
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5ख. अधिकरण का गठन- केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे एक सदस्य वाले अधिकरण का गठन कर सकेगी, जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है, या नियुक्त किए जाने के लिए अर्हित है और जिसका समिति से कोई सम्बन्ध नहीं है और वह उन शक्तियों का प्रयोग तथा उन कृत्यों का निर्वहन करेगा जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन उस अधिकरण को प्रदत्त या उस पर अधिरोपित हों ।
5ग. अधिकरण द्वारा अपीलों की सुनवाई-(1) धारा 5क की उपधारा (7) के अधीन कोई अपील उस तारीख से, जिसकी निर्धारण संबंधी मांग की सूचना, विनिर्माता पर तामील की जाती है, एक मास के भीतर अधिकरण को की जा सकेगी:
परन्तु अधिकरण पूर्वोक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगा, यदि उसका समाधान हो जाता है कि उस अवधि के भीतर अपील न करने का अपीलार्थी के पास पर्याप्त कारण था ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक अपील विहित प्ररूप में होगी और उसे विहित रीति से सत्यापित किया जाएगा तथा उसके साथ उतनी फीस दी जाएगी जितनी विहित की जाए ।
(3) अधिकरण, अपील की सुनवाई के लिए कोई दिन और स्थान नियत करेगा और उसकी सूचना अपीलार्थी तथा समिति को देगा ।
(4) अधिकरण, अपीलार्थी और समिति को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगा जिन्हें वह ठीक समझे:
परन्तु निर्धारण में वृद्धि करने वाला कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक अपीलार्थी को ऐसी वृद्धि के विरुद्ध कारण दर्शित करने का समुचित अवसर न दे दिया गया हो ।
(5) अधिकरण इस धारा के अधीन पारित किए गए किसी आदेश की प्रति अपीलार्थी और समिति को भेजेगा तथा ऐसा आदेश अन्तिम होगा ।
(6) इस धारा के अधीन कृत्यों का निर्वहन करने में अधिकरण, उन नियमों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाए जाएं, ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा जिसे वह ठीक समझे ।
(7) अधिकरण को निम्नलिखित विषयों की बाबत सिविल न्यायालय की वे सभी शक्तियां प्राप्त होंगी जो उसे सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय प्राप्त होती हैं, अर्थात् :-
(क) किसी व्यक्ति को समन करना और उसे हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना ;
(ख) किन्हीं दस्तावेजों के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना ;
(ग) शपथ पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना ;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना ;
(ङ) साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;
(च) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।
(8) अधिकरण के व्यय केन्द्रीय सरकार द्वारा उठाए जाएंगे ।
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6. केन्द्रीय सरकार द्वारा समिति को अनुदान-समिति को इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करने में समर्थ बनाने के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा विधि द्वारा इस निमित्त किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् प्रत्येक वित्तीय वर्ष में समिति को अनुदान या उधार के रूप में या अन्यथा इतनी धनराशियां दे सकेगी जितनी वह सरकार आवश्यक समझे ।
7. निधि का गठन-(1) समिति की एक निधि होगी जो टेक्सटाइल निधि कहलाएगी और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे-
(क) धारा 24 की उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन उसे अन्तरित सभी धन ;
[(कक) धारा 5क के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा समिति को दिए गए उत्पाद-शुल्क के आगम ;]
(ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 6 के अधीन दिए गए सभी धन ;
(ग) इस अधिनियम के अधीन उद्गृहीत सभी फीसें और अन्य प्रभार ;
(घ) अनुदान, दान, संदान, अभिदाय या अन्तरण के रूप में या अन्यथा समिति द्वारा प्राप्त सभी धन ।
(2) निधि के धनों का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाएगा :-
(क) समिति के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्तों तथा समिति के अन्य प्रशासनिक व्ययों की पूर्ति ;
(ख) इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करना ।
(3) निधि के सब धन भारतीय स्टेट बैंक में जमा किए जाएंगे या ऐसी प्रतिभूतियों में विनिहित किए जाएंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएं ।
8. स्थायी अथवा तदर्थ समितियां-(1) समिति अपनी किसी शक्ति का प्रयोग अथवा किसी कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए या किसी ऐसे विषय की, जो समिति उन्हें निर्दिष्ट करे, जांच करने या उसके सम्बन्ध में रिपोर्ट और सलाह देने के लिए, स्थायी समितियों या तदर्थ समितियों का गठन कर सकेंगी ।
[(2) उपधारा (1) के अधीन गठित स्थायी समिति या तर्द्थ समिति में ऐसे व्यक्ति सम्मिलित हो सकेंगे जो समिति के सदस्य नहीं हैं, किन्तु उनकी संख्या उसकी कुल सदस्य संख्या के आधे से अधिक नहीं होगी ।]
9. समिति के अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी-(1) केन्द्रीय सरकार, समिति से परामर्श करके, किसी व्यक्ति को समिति का सचिव नियुक्त करेगी ।
(2) ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त बनाए जाएं, समिति ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त कर सकेगी जिन्हें वह अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए आवश्यक समझे ।
(3) समिति के अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की रीति, उनकी सेवा की शर्तें और उनके वेतन मान-
(क) सचिव की दशा में वे होंगे जो विहित की जाए ; और
(ख) अन्य अधिकारियों और कर्मचारियोंकी दशा में वे होंगे जो इस अधिनियम के अधीन समिति द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा अवधारित किए जाएं ।
10. वर्तमान कर्मचारियों की सेवा का समिति को अन्तरण-इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए यह है कि समिति की स्थापना की तारीख से ठीक पूर्व, सूती टेक्सटाइल निधि अध्यादेश, 1944 (1944 का 34) की धारा 5 के अधीन गठित सूती टेक्सटाइल निधि समिति द्वारा नियोजित प्रत्येक व्यक्ति, उस तारीख को समिति का कर्मचारी हो जाएगा और उसका वह पदनाम होगा जो समिति अवधारित करे, तथा उसमें वह अपना पद या सेवा उसी अवधि के लिए, उसी पारिश्रमिक पर और उन्हीं निबंधनों और शर्तों पर धारण करेगा जिन पर कि वह उस तारीख को करता यदि समिति स्थापित न की गई होती, और तब तक वैसा करता रहेगा जब तक समिति में उसका नियोजन समाप्त नहीं कर दिया जाता या जब तक ऐसी सेवावधि, पारिश्रमिक और निबन्धन और शर्तें समिति द्वारा सम्यक् रूप से परिवर्तित नहीं कर दी जाती :
परन्तु ऐसे किसी व्यक्ति की सेवावधि, पारिश्रमिक और सेवा के निबन्धनों और शर्तों में ऐसा परिवर्तन, जो उसके लिए अपहितकर हो, केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन के बिना नहीं किया जाएगा ।
11. निरीक्षण-(1) समिति, उसे किए गए आवेदन पर या अन्यथा ऐसे अधिकारी को, जो उस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया हो, निदेश दे सकेगी कि वह टेक्सटाइल की क्वालिटी या विनिर्माण के समय उपयोग के लिए या टेक्सटाइल मिल में प्रयोग के समय, टेक्सटाइल-मशीनरी की उपयुक्तता की परीक्षा करे और समिति को रिपोर्ट प्रस्तुत करे ।
(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन रहते हुए, ऐसे अधिकारी को निम्नलिखित के लिए शक्ति प्राप्त होगी :-
(क) उस टेक्सटाइल या टेक्सटाइल-मशीनरी के, जिसके बारे में निर्माण-विशिष्टियां, चिह्न या निरीक्षण-मानक विनिर्दिष्ट किए गए हैं, विनिर्माण के सम्बन्ध में की जाने वाली किसी संक्रिया का निरीक्षण करना ;
(ख) किसी वस्तु के, या किसी वस्तु या प्रक्रिया में प्रयुक्त किसी सामग्री या पदार्थ के, जिसके सम्बन्ध में निर्माण-विशिष्टियां, चिह्न या निरीक्षण-मानक विनिर्दिष्ट किए गए हैं, नमूने लेना ;
(ग) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना, जो विहित की जाएं ।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रिपोर्ट की प्राप्ति पर, समिति टेक्स्टाइल के विनिर्माता, टेक्सटाइल-मशीनरी के विनिर्माता और आवेदक को ऐसी सलाह दे सकेगी जैसी वह ठीक समझे ।
12. निरीक्षण और परीक्षा के लिए फीस का उद्ग्रहण-(1) समिति-
(क) टेक्सटाइल के निरीक्षण और उसकी परीक्षा के लिए,
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[(ख)] किसी [ऐसी विशेष] सेवा के लिए, जो समिति टेक्सटाइल और टेक्सटाइल-मशीनरी के विनिर्माताओं [या निर्यातकों] को दे,
इतनी फीस उद्गृहीत कर सकेगी जितनी विहित की जाए:
4[परन्तु ऐसी टेक्सटाइल के निरीक्षण और परीक्षा की बाबत कोई फीस उद्गृहीत नहीं की जाएगी जिस पर इस अधिनियम के अधीन उत्पाद-शुल्क उद्ग्रहणीय है:]
[परन्तु यह और भी कि केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, साधारणतया या किसी विशिष्ट मामले में, फीस के संदाय में छूट दे सकेगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन समिति को संदेय कोई धनराशि भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल की जा सकेगी ।]
13. लेखा और संपरीक्षा-(1) समिति उच्च लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगी और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण, जिसके अन्तर्गत तुलन-पत्र भी है, ऐसे साधारण निदेशों के अनुसार जो केन्द्रीय सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से जारी किए जाएं और ऐसे प्ररूप में जो विहित किया जाए, तैयार करेगी ।
(2) समिति की लेखाओं की संपरीक्षा प्रति वर्ष भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा की जाएगी और ऐसी संपरीक्षा के संबध में उसके द्वारा उपगत कोई व्यय समिति द्वारा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।
(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के तथा समिति के लेखाओं की संपरीक्षा में वे ही अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के सरकारी लेखाओं की संपरीक्षा के संबंध में होते हैं और विशिष्टतया उसे बहियां, लेखा या सम्बद्ध वाउचर तथा अन्य दस्तावेजें और कागजपत्र पेश किए जाने की मांग करने और समिति के कार्यालयों में से किसी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा इस निमित्त, उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित समिति के लेखे उसकी बाबत संपरीक्षा रिपोर्ट सहित प्रति वर्ष केन्द्रीय सरकार को भेजे जाएंगे और वह सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
14. शक्तियों और कर्तव्यों का प्रत्यायोजन-समिति, लिखित रूप में साधारण या विशेष द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि उन सभी शक्तियों या कर्तव्यों का, जिनका प्रयोग या पालन उसके द्वारा किया जा सकता है, या उनमें से किसी का, ऐसी परिस्थितियों में तथा ऐसी शर्तों के अधीन, यदि कोई हों, जो उसके आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रयोग या निर्वहन समिति के किसी ऐसे अधिकारी या कर्मचारी द्वारा भी किया जा सकेगा जो उस आदेश में इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए ।
15. समिति के कार्यों या कार्यवाहियों का अविधिमान्य न हो जाना-समिति का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल निम्नलिखित के कारण ही अविधिमान्य नहीं हो जाएगी: -
(क) समिति में कोई रिक्ति अथवा समिति के गठन में कोई त्रुटि; अथवा
(ख) समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि; अथवा
(ग) समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता, जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव न पड़ता हो ।
16. समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना-समिति के सभी अधिकारी और कर्मचारी, जब वे इस अधिनियम के अथवा उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबंधों के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या उनका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित हो, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझे जाएंगे ।
17. टेक्सटाइल और टेक्सटाइल-मशीनरी के निर्यातों और अन्तर्देशीय विपणन को प्रतिषिद्ध करने की शक्ति-(1) जहां समिति ने अंतर्देशीय उपभोग के लिए या निर्यात के प्रयोजनों के लिए टेक्सटाइल के मानक विनिर्देश नियत किए हैं, अपनाएं हैं या उन्हें मान्यता दी है अथवा टेक्सटाइल-मशीनरी का मानक प्रकार नियत किया है, अपनाया है या उसे मान्यता दी है और केन्द्रीय सरकार से इस निमित्त की गई सिफारिश पर उसकी यह राय है कि किसी ऐसी टेक्सटाइल या टेक्सटाइल-मशीनरी का, जो समिति द्वारा उसकी बाबत निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, निर्यात नहीं किया जाना चाहिए, या अन्तर्देशीय उपभोग के लिए विक्रय नहीं किया जाना चाहिए, वहां केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे निर्यात या विक्रय को प्रतिषिद्ध कर सकेगी ।
(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए किसी ऐसे आदेश का उल्लंघन करेगा, जिसके द्वारा: -
(क) किसी टेक्सटाइल या टेक्सटाइल-मशीनरी के निर्यात का प्रतिषेध किया गया है, अथवा
(ख) अन्तर्देशीय उपभोग के लिए किसी टेक्सटाइल या टेक्सटाइल-मशीनरी के विक्रय का प्रतिषेध किया गया है,
तो दोषसिद्ध किए जाने पर, वह-
(i) प्रथम अपराध के लिए कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा;
(ii) द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी दंडनीय होगा और विशेष तथा पर्याप्त कारणों के अभाव में, जो कि न्यायालय के निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगी, ऐसा कारावास तीन मास से कम का नहीं होगा ।
(3) उपधारा (1) के अधीन टेक्सटाइल या टेक्सटाइल-मशीनरी के विपणन का प्रतिषेध करने वाले किसी आदेश के उल्लंघन का विचारण करने वाला न्यायालय, उपधारा (2) के खंड (ख) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यह निदेश दे सकेगा कि वह टेक्सटाइल या टेक्सटाइल-मशीनरी, जिसकी बाबत न्यायालय का समाधान हो गया है कि ऐसा उल्लंघन किया गया है, केन्द्रीय सरकार को समपहृत हो जाएगी ।
18. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कोई कम्पनी है तो हर एक व्यक्ति जो अपराध किए जाने के समय कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कम्पनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे तथा तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्रवाई की जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे:
परन्तु इस उपधारा की कोई भी बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध का किया जाना निवारित करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सम्मति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने का और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; तथा
(ख) फर्म के सम्बन्ध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
19. अभियोजन के लिए प्रक्रिया-इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए कोई भी अभियोजन, केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसकी सम्मति से ही संस्थित किया जाएगा, न कि अन्यथा ।
20. न्यायालयों को अधिकारिता-प्रेसिडेन्सी मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
21. अधिनियम के अधीन की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के लिए, जो इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित है, समिति या उसके किसी सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
22. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेंगे: -
(क) समिति के सदस्यों की संख्या और उसकी संरचना तथा वह रीति जिससे सदस्य चुने जाएंगे;
(ख) समिति के सदस्यों की पदावधि और उनमें हुई आकस्मिक रिक्तियों को भरने की रीति;
(ग) समिति के सदस्यों को संदेय भत्ते, यदि कोई हों;
(घ) समिति की सदस्यता के लिए निर्रहता;
[(घक) वह रीति जिससे धारा 5क के अधीन उद्ग्रहणीय उत्पाद-शुल्क का निर्धारण, संदाय या संग्रहण किया जा सकेगा और वह रीति जिसमें देय रकम से अधिक संदत्त या संगृहीत ऐसे शुल्क का कोई प्रतिदाय किया जा सकेगा;
(घख) धारा 5ख के अधीन अधिकरण गठित करने वाले व्यक्ति की सेवा शर्तें;
(घग) वह प्ररूप जिसमें तथा वह रीति जिससे धारा 5ख के अधीन गठित अधिकरण को अपील प्रस्तुत और सत्यापित की जा सकेगी, ऐसी अपीलों पर संदेय फीस और ऐसी अपीलों का निपटारा करने में अधिकरण द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;]
(ङ) उन फीसों का मापमान जो धारा 12 के अधीन ॥। उद्गृहीत की जा सकेगी;
(च) वह प्ररूप जिसमें समिति अपने लेखाओं का वार्षिक विवरण और तुलनपत्र तैयार करेगी;
(छ) समिति के सचिव की नियुक्ति की पद्धति, उसकी सेवा की शर्तें और उसका वेतनमान;
(ज) टेक्सटाइल उद्योग और व्यापार तथा टेक्सटाइल-मशीनरी के विनिर्माण की बाबत किसी जानकारी या आंकड़ों का संग्रहण;
(झ) समिति द्वारा निरीक्षण का ढंग और वह रीति जिससे उसके द्वारा नमूने लिए जा सकेंगे;
1[(ञ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या किया जाए ।]
[(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि पूर्वोक्त सत्र या आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।]
23. विनियम बनाने की शक्ति-(1) समिति, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, उन सब बातों का उपबन्ध करने के लिए, जिनके लिए उपबन्ध करना इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन है, ऐसे विनियम, जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे: -
(क) समिति, स्थायी समितियों और तदर्थ समितियों की बैंठकें, ऐसी बैठकों के लिए गणपूर्ति और उनमें कामकाज का संचालन;
(ख) स्थायी समितियों या तदर्थ समितियों के सदस्यों को संदेय भत्ते;
(ग) समिति के (सचिव से भिन्न) अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की पद्धतियां, सेवा की शर्तें और वेतनमान;
(घ) समिति के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के कर्तव्य और आचरण; और
(ङ) कोई अन्य विषय जिसकी बाबत समिति इस अधिनियम के अधीन विनियम बनाने के लिए सशक्त या अपेक्षित है ।
(3) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसे विनियम को जिसे उसने मंजूर किया है, संशोधित, परिवर्तित या विखण्डित कर सकेगी और तब वह विनियम तद्नुसार प्रभावी होगा, किन्तु उपधारा (1) के अधीन समिति की शक्तियों के प्रयोग पर उसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।
24. निरसन और व्यावृत्ति-(1) सूती टेक्सटाइल निधि अध्यादेश, 1944 (1944 का 34) उस तारीख से, जिसको धारा 3 के अधीन समिति की स्थापना की जाती है, निरसित हो जाएगा ।
(2) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी, -
(क) निरसित अध्यादेश के अधीन स्थापित सूती टेक्सटाइल निधि के खाते में उक्त तारीख से ठीक पहले जमा सब धन, उक्त तारीख से, धारा 7 में निर्दिष्ट टेक्सटाइल निधि को अन्तरित हो जाएंगे और उसका भाग बन जाएंगे,
(ख) उक्त अध्यादेश द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों में से किसी शक्ति के प्रयोग में बनाए गए या बनाए गए समझे गए कोई नियम या की गई कोई बात या कार्रवाई, इस अधिनियम के द्वारा या अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में बनाए गए समझे जाएंगे या की गई समझी जाएगी, मानो यह अधिनियम उस दिन प्रवृत्त था जिसको ऐसे नियम बनाए गए थे या ऐसी बात या कार्रवाई की गई थी ।
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