संसद के अधिनियम
काजी अधिनियम, 1880
(1880 का अधिनियम संख्यांक 12)1
[9 जुलाई, 1880]
काजी के पद पर व्यक्तियों की
नियुक्ति के लिए
अधिनियम
1864 के अधिनियम सं. 11 की उद्देशिका (हिन्दू तथा मुसलमान विधि अधिकारियों के पदों से और काजी-उल्-कुज्जात के और काजी के पदों से संबंधित विधि का निरसन करने तता भूतपूर्व पदों को उत्सादित करने के लिए अधिनियम) द्वारा (अन्य बातों के साथ-साथ) यह घोषित किया गया था कि काजी-उल-कुज्जात या नहर, शहर या परगना काज़ियों की सरकार द्वारा नियुक्ति असमीचीन हैं, और उसी अधिनियम द्वारा उक्त अधिकारियों की सरकार द्वारा नियुक्ति से संबंधित अधिनियमितियां निरसित की गई थीं ; और 3 भारत के कुछ भागों में मुसलमान समाज की प्रथा द्वारा, सरकार द्वारा नियुक्त काज़ियों की उपस्थिति निकाहों के अवसर पर तथा कतिपय अन्य धार्मिक कृत्यों तथा कर्मों के किए जाने में अपेक्षित होती हैं और इसलिए यह समीचीन हैं कि सरकार को काजी के पद पर व्यक्तियों की नियुक्ति करने के लिए पुनः सशक्त किया जाना चाहिए ;
अतः एतदद्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता हैं:
1. संक्षिप्त नाम - इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम काजी अधिनियम, 1880 हैं ।
4॥।
स्थानीय विस्तार - इसका विस्तार प्रथमतः केवल फोर्ट सेंट जार्ज के
- इस अधिनियम का 1970 के विनियम सं. 2 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा (15-10-1970 से) लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र पर और 1968 के अधिनियम सं. 26 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा पांडिचेरी संघ राज्यक्षेत्र पर विस्तार किया गया ।
- 1868 के अधिनियम सं. 8 द्वारा निरसित ।
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा प्रान्तों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1914 के अधिनियम सं. 10 की धारा 3 तथा अनुसूची 2 द्वारा और वह तुरन्त प्रवृत्त होगा शब्द निरसित ।
सपरिषद् गवर्नर द्वारा प्रशासित राज्यक्षेत्रों पर हैं । 1 किन्तु किसी अन्य राज्य की सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा समय-समय पर उसे अपने 2प्रशासनाधीन संपूर्ण राज्यक्षेत्रों पर या उनके किसी भाग पर विस्तारित कर सकेगी ।
2. किसी स्थानीय क्षेत्र के लिए काज़ियों की नियुक्ति करने की शक्ति - जहां कहीं राज्य सरकार को यह प्रतीत होता हैं कि किसी स्थानीय क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में मुसलमान निवासी यह चाहते हैं कि ऐसे स्थानीय क्षेत्र के लिए एक या अधिक काज़ियों को नियुक्त किया जाना चाहिए, वहां राज्य सरकार, यदि वह उचित समझे, तो ऐसे स्थानीय क्षेत्रों के प्रमुख मुसलमान निवासियों से परामर्श करने के पश्चात् एक या अधिक योग्य व्यक्तियों का चयन कर सकेगी तथा उसे या उन्हें ऐसे स्थानीय क्षेत्र के लिए काज़ियों के रूप में नियुक्त कर सकेगी ।
यदि यह प्रश्न उठता हैं कि क्या कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन काजी ठीक ही नियुक्त किया गया हैं, तो राज्य सरकार द्वारा उसके बारे में विनिश्चय निश्चायक होगा ।
यदि राज्य सरकार, ठीक समझती हैं, तो इस धारा के अधीन नियुक्त किए गए किसी ऐसे काजी को निलंबित कर सकेगी या पद से हटा सकेगी जो उसके पद के कार्य के निष्पादन में किसी अवचार का दोषी हैं, या जो छह मास की लगातार अवधि के लिए उस स्थानीय क्षेत्र से, जिसके लिए वह नियुक्त हैं, अनुपस्थित रहा हैं या अन्यत्र निवास करने के प्रयोजन के लिए ऐसे स्थानीय क्षेत्र को छोड़ देता हैं या दिवालिया घोषित किया जाता हैं या पद से उन्मोचित किए जाने की वांछा करता हैं या जो अपने पद के कर्तव्यों का निर्वहन करने से इनकार करता हैं या राज्य सरकार की राय में उसके लिए अयोग्य या वैयक्तिक रूप से असमर्थ हो गया है ।
3. नायब काजी - इस अधिनियम के अधीन नियुक्त कोई काजी, ऐसे सम्पूर्ण स्थानीय क्षेत्र में या उसके किसी भाग में, जिसके लिए उसकी नियुक्ति की गई हैं, अपने पद से संबंधित सभी विषयों या उनमें से किसी
- 1951 के अधिनियम सं. 3 की धारा 3 तथा अनुसूची 2 द्वारा किन्तु किसी अन्य भाग क राज्य की सरकार या किसी भाग ग राज्य की सरकार के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- यह अधिनियम मुंबई प्रेसिडेंसी पश्चिमी बंगाल, संयुक्त प्रांत, पंजाब, मध्य प्रांत तथा आसाम के कतिपय स्थानों पर विस्तारित किया गया हैं ।
के लिए अपने स्थान पर कार्य करने के लिए एक या अधिक व्यक्तियों को अपने नायब या नायबों के रूप में नियुक्त कर सकेगा, और इस प्रकार नियुक्त किए गए किसी नायब को निलंबित कर सकेगा या पद से हटा सकेगा ।
जब कोई काजी धारा 2 के अधीन निलंबित किया जाता हैं या पद से हटा दिया जाता हैं, तब उसके नायब या नायबों को (यदि कोई हो), यथास्थिति, निलंबित या पद से हटाया गया समझा जाएगा ।
4. अधिनियम की कोई भी बात काज़ी को न्यायिक या प्रशासनिक शक्तियां नहीं करेगी, या काज़ी की उपस्थिति आवश्यक नहीं बनाएगी या किसी व्यक्ति को काज़ी के रूप में कार्य करने से निवारित नहीं करेगी - इसमें अन्तर्विष्ट किसी भी बात के बारे में तथा इसके अधीन की गई किसी भी नियुक्ति के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह –
(क) इसके अधीन नियुक्त किए गए किसी काज़ी या नायब काज़ी को कोई न्यायिक या प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करती हैं; या
(ख) किसी निकाह के अवसर पर या किसी धार्मिक कृत्य या कर्म के किए जाने में किसी काज़ी या नायब काज़ी की उपस्थिति आवश्यक बनाती है; या
(ग) किसी व्यक्ति को काज़ी के कृत्यों में से किसी का निर्वहन करने से निवारित करती है ।

