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कूच-बिहार (विधियों की एकरूपता) अधिनियम, 1950 ( Cooch Behar (Assimilation of State Laws) Act, 1950 )


 

कूच-बिहार (विधियों की एकरूपता) अधिनियम, 1950

(1950 का अधिनियम संख्यांक 67)

[7 दिसम्बर, 1950]

कूच-बिहार में प्रवृत्त कतिपय विधियों को पश्चिमी बंगाल

के शेष भाग में प्रवृत्त विधियों से

एकरूपता करने के लिए

अधिनियम

संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है :-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कूच-बिहार (विधियों की एकरूपता) अधिनियम,        1950 है

(2) यह ऐसी तारीख  को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे

2. निर्वचन-इस अधिनियम में,-

() “नियत दिन" से इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के लिए धारा 1 की उपधारा (2) के अधीन नियत की गई तारीख अभिप्रेत है;

() “कूच-बिहार" से अभिप्रेत है पश्चिमी बंगाल राज्यक्षेत्र में कूच-बिहार का विलयित राज्यक्षेत्र;

() “विधि" से किसी अधिनियम, अध्यादेश, विनियम, नियम, आदेश या उपविधि का उतना भाग अभिप्रेत है जितना कि संविधान की सप्तम् अनुसूची में प्रथम और तृतीय सूचियों में प्रगणित मामलों में किसी से संबंधित है

                3. विधियों की एकरूपता-(1) उपधारा (2) में यथाउपबंधित के सिवाय, समस्त विधियां जिनका नियत दिन के ठीक पहले पश्चिमी बंगाल राज्य पर विस्तार है या जो वहां प्रवृत्त है, किन्तु जिनका विस्तार कूच-बिहार में नहीं है या जो वहां प्रवृत्त नहीं है, उस दिन से कूच-बिहार में, यथास्थिति, उनका विस्तार होगा या वे प्रवृत्त होंगी; और समस्त विधियां जो नियत दिन के ठीक पहले कूच-बिहार में प्रवृत्त हैं किन्तु पश्चिमी बंगाल के शेष भाग में प्रवृत्त नहीं हैं, उक्त दिन से कूच-बिहार में प्रवृत्त रह जाएंगी, सिवाय उन बातों के बारे में जो कि उक्त दिन के पहले की गई थी या जिनका लोप किया गया था

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) के लागू होने का अधिनियम, 1937 (1937 का 26) कूच-बिहार में उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे; और 1897 का कूच-बिहार अधिनियम संख्या 2, जिसे मुस्लिम विरासत अधिनियम, 1897 कहा जाता है कूच-बिहार में उस तारीख तक प्रवृत्त रहेगा और वह उस तारीख से प्रवृत्त नहीं रह जाएगा सिवाय उन बातों के बारे में जो उक्त तारीख से पहले की गई थी या जिनका लोप किया गया था

4. कठिनाइयां दूर करने के लिए उपबन्ध-यदि धारा 3 के अधीन किसी विधि या विधियों के समूह से अन्य विधि या विधियों के समूह में संक्रमण के सम्बन्ध में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा कठिनाई को दूर करने के लिए ऐसे उपबन्ध कर सकेगी जो वह ठीक समझे

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