सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008
(2009 का अधिनियम संख्यांक 7)
[7 जनवरी, 2009]
आर्थिक, जनसांख्यिकी, सामाजिक, वैज्ञानिक और पर्यावरर्णीय पहलुओं
पर सांख्यिकी संग्रहण को सुकर बनाने और उनसे
संबंधित या उनके आनुषंगिक
विषयों के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के उनसठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम सांख्यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008 है ।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) अभिकरण" के अन्तर्गत समुचित सरकार द्वारा प्रत्यक्षतः या बाह्य स्रोत के माध्यम से सांख्यिकी संग्रहण के लिए लगाया गया/लगाए गए व्यक्ति भी हैं;
(ख) समुचित सरकार" से धारा 3 के अधीन उसके द्वारा जारी किए गए किसी निदेश के अधीन सांख्यिकी संग्रहण के संबंध में, -
(i) केन्द्रीय सरकार का कोई मंत्रालय या विभाग; या
(ii) किसी राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन का कोई मंत्रालय या विभाग; या
(iii) कोई स्थानीय शासन जैसे कि, यथास्थिति, पंचायत या नगरपालिकाएं, अभिप्रेत है;
(ग) सूचनादाता" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो सांख्यिकीय सूचना का प्रदाय करता है या जिसके द्वारा सांख्यिकी सूचना का प्रदाय करना अपेक्षित है और इसके अन्तर्गत भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) के अधीन रजिस्ट्रीकृत फर्म का स्वामी या अधिभोगी या भारसाधक व्यक्ति या व्यक्तियों के संबंध में उनका प्राधिकृत प्रतिनिधि या किसी सहकारी सोसाइटी अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत सहकारी सोसाइटी या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन कोई रजिस्ट्रीकृत कंपनी या सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनयम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत मान्यताप्राप्त कोई संगम है ;
(घ) सूचना अनुसूची" से कोई पुस्तक, दस्तावेज, प्ररूप, कार्ड, टेप, डिस्क या कोई भंडारण माध्यम अभिप्रेत है, जिस पर अपेक्षित सूचना दर्ज या अभिलिखित की गई है या जिसका दर्ज करना या अभिलेखन करना इस अधिनियम के अधीन सांख्यिकीय प्रयोजनों के लिए अपेक्षित है;
(ङ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(च) नमूना लेना" से ऐसी कोई सांख्ियकीय प्रक्रिया अभिप्रेत है, जिसके द्वारा जांच के किसी विशेष क्षेत्र से संबंधित सूचना सांख्यिकीय तकनीकों के प्रयोग द्वारा जांच के क्षेत्र से सुसंगत संबंधित व्यक्तियों या एककों की कुल संख्या के समानुपात के संबंध में सूचना अभिप्राप्त की जाती है;
(छ) सांख्यिकीय सर्वेक्षण" से समुचित सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन या किसी अन्य सुसंगत अधिनियम के अधीन पूर्णतः या प्राथमिकतः समुचित सांख्यिकीय प्रक्रियाओं द्वारा प्रसंस्करण और संक्षिप्तीकरण के प्रयोजनों के लिए जनगणना या सर्वेक्षण अभिप्रेत है, जिसके द्वारा सभी सूचनादाताओं से जांच के क्षेत्र में या उसके नमूनों से सूचना का संग्रहण किया जाता है;
(ज) सांख्यिकी" से ऐसी सांख्यिकी अभिप्रेत है जो समुचित सरकार द्वारा ऐसे सांख्यिकीय सर्वेक्षणों, प्रशासनिक और रजिस्ट्रीकरण अभिलेखों और अन्य प्ररूपों तथा पत्रों से जिनका सांख्यिकीय विश्लेषण प्रकाशित या अप्रकाशित प्ररूप में है, सांख्यिकी संगृहीत, वर्गीकृत और उपयोग करके विशेषकर बड़ी मात्रा में या बड़ी मात्राओं के लिए या बड़ी संख्या सांख्यिकी प्राप्त की गई है;
(झ) सांख्यिकी अधिकारी" से इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन जारी किसी निदेश के प्रयोजनों के लिए धारा 4 के अधीन नियुक्त कोई अधिकारी अभिप्रेत है ।
अध्याय 2
सांख्यिकी का संग्रहण
3. सांख्यिकी का संग्रहण-समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि आर्थिक, जनसांख्यिकी, सामाजिक, वैज्ञानिक और पर्यावर्णीय पहलुओं पर सांख्यिकी, सांख्यिकीय सर्वेक्षण के माध्यम से या अन्यथा एकत्रित की जाएगी और उसके पश्चात् उस सांख्यिकी के संबंध में इस अधिनियम के उपबंध लागू होंगे: परंतु यह कि-
(क) इस धारा की किसी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह किसी राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन या किसी स्थानीय शासन को किसी विषय के संबंध में जो संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 1 (संघ सूची) में विनिर्दिष्ट प्रविष्टियों में से किसी के अधीन है, सांख्यिकी के संग्रहण की बाबत कोई निदेश जारी करने के लिए प्राधिकृत नहीं करेगी; या
(ख) जहां केन्द्रीय सरकार ने किसी विषय के संबंध में सांख्ियकी का संग्रहण करने के लिए इस धारा के अधीन कोई निदेश जारी किया है, वहां कोई राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन या कोई स्थानीय शासन केन्द्रीय सरकार की पूर्व अनुमति के सिवाय कोई वैसा ही निदेश तब तक जारी नहीं करेगी जब तक कि केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसी सांख्यिकी का संग्रहण पूरा नहीं हो जाता है; या
(ग) जहां किसी राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन या स्थानीय शासन ने किसी विषय से संबंधित सांख्ियकी के संग्रहण के लिए इस धारा के अधीन निदेश जारी किया है, वहां केन्द्रीय सरकार वैसा ही कोई निदेश तब तक जारी नहीं करेगी जब तक कि राज्य सरकार द्वारा ऐसी सांख्यिकी का संग्रहण पूरा नहीं हो जाता है सिवाय उस दशा में जब ऐसी सांख्ियकी का संग्रहण दो या अधिक राज्यों या संघ राज्यक्षेत्रों के संबंध में किया जाना है ।
4. समुचित सरकार की सांख्यिकी अधिकारियों आदि को नियुक्त करने की शक्तियां-(1) समुचित सरकार उसके द्वारा निदेशित किसी सांख्यिकी का संग्रहण करने के प्रयोजन के लिए किसी भौगोलिक इकाई के लिए किसी सांख्यिकी अधिकारी के रूप में किसी अधिकारी की नियुक्ति कर सकेगी या नियुक्ति करवा सकेगी ।
(2) समुचित सरकार किसी विनिर्दिष्ट भौगोलिक इकाई में सांख्यिकी का संग्रहण करने या उसमें सहायता करने या उसका पर्यवेक्षण करने में किसी अभिकरण को या ऐसे अभिकरणों में कार्यरत व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी, और ऐसे अभिकरण या व्यक्ति इस प्रकार नियुक्त किए जाने पर तदनुसार सेवा करने के लिए बाध्य होंगे ।
(3) समुचित सरकार उसके द्वारा निदेशित सांख्यिकी के संग्रहण के प्रयोजन के लिए संविदा के आधार पर किसी अभिकरण या कंपनी या संगठन या संगम या व्यक्ति को, ऐसे निबंधनों और शर्तों तथा ऐसे रक्षोपायों पर जो विहित किए जाएं, नियोजित कर सकेगी ।
(4) समुचित सरकार, किसी सांख्यिकी अधिकारी को, जिसे वह ठीक समझे, उपधारा (2) और उपधारा (3) द्वारा उसे प्रदत्त उस भौगोलिक इकाई के भीतर, जिसके लिए ऐसे सांख्यिकी अधिकारी की नियुक्ति की गई है, अभिकरणों या ऐसे अभिकरणों में कार्यरत व्यक्तियों को नियुक्त करने या किसी अभिकरण या कंपनी या संगठन या व्यक्तियों के संगम को संविदा के आधार पर नियोजित करने की शक्ति प्रत्यायोजित कर सकेगी ।
(5) समुचित सरकार, आदेश द्वारा अपेक्षित ऐसे प्ररूप, विशिष्टियां या अन्तराल में जिसके भीतर और वह सांख्यिकीय अधिकारी जिसको सूचनादाता द्वारा सांख्यिकीय सूचना दी जाएगी, विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।
(6) समुचित सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा किसी सांख्यिकी अधिकारी को जिसे वह ठीक समझे, उपधारा (5) के अधीन प्रदत्त कोई शक्ति धारा 3 के अधीन उसके द्वारा जारी निदेश के अधीन सांख्यिकी के संग्रहण के प्रयोजन के लिए प्रत्यायोजित कर सकेगी ।
5. सूचना मांगने की सांख्यिकी अधिकारी की शक्ति-सांख्यिकी अधिकारी, किसी भौगोलिक इकाई में जिसके लिए उक्त अधिकारी नियुक्त किया गया था, किसी विनिर्दिष्ट विषय पर सांख्यिकी संग्रहण करने के प्रयोजन के लिए, -
(क) किसी सूचनादाता पर धारा 4 की उपधारा (5) के अधीन विनिर्दिष्ट सूचना देने के लिए उससे लिखित में मांग करते हुए, किसी सूचना की तामील कर या करा सकेगा या उसको भरने के प्रयोजन के लिए किसी सूचनादाता को दी जाने वाली सूचना की समय सूची दिलवा सकेगा; या
(ख) किसी सूचनादाता से विषय से संबंधित सभी प्रश्न कर सकेगा; या
(ग) टैलीफैक्स या टेलीफोन या ई-मेल या किसी अन्य इलेक्ट्रानिक रीति या विभिन्न रीतियों के संयोजन के माध्यम से इस प्रकार विनिर्दिष्ट सूचना मांग सकेगा ।
6. सूचनादाता के कर्तव्य-वे सूचनादाता जिनसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कोई सूचना प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है, अपने सर्वोत्तम ज्ञान या विश्वास के अनुसार विहित रीति में ऐसी मांगी गई सूचना प्रस्तुत करने के लिए आबद्ध होंगे ; और उस दशा में जहां किसी विशिष्ट वर्ग या व्यक्तियों के समूह या इकाई के केवल एक भाग से किसी नमूना प्रक्रिया के कारण सूचना प्रस्तुत करने के लिए कहा जाता है वहां किसी सूचनादाता के पक्ष पर उस सूचना को यदि इस प्रकार मांगी गई है, प्रस्तुत करने में असफल रहने पर कोई बचाव नहीं होगा ।
7. सहायता के लिए सभी अभिकरण-प्रत्येक अभिकरण, सांख्यिकी अधिकारी या उसके द्वारा लिखित में प्राधिकृत किसी व्यक्ति या अभिकरण को, ऐसी मदद और सहायता प्रदान करेगा और ऐसी सूचना प्रस्तुत करेगा जिनकी वह कृत्यों के निर्वहन के लिए अपेक्षा करे, तथा ऐसे अभिलेखों, रेखांकों और अन्य दस्तावेजों को, जो आवश्यक हों, निरीक्षण और जांच के लिए उपलब्ध कराएगा ।
8. अभिलेखों या दस्तावेजों तक पहुंच का अधिकार-सांख्यिकी अधिकारी या उसके द्वारा इस निमित्त लिखित में प्राधिकृत किसी व्यक्ति को, इस अधिनियम के अधीन किसी सांख्यिकी के संग्रहण के प्रयोजनों के लिए किसी सूचनादाता के कब्जे में किसी सुसंगत अभिलेख या दस्तावेज की प्रति, जो इस अधिनियम के अधीन कोई सूचना प्रस्तुत करने के लिए अपेक्षित है, के प्रति पहुंच रखेगा और किसी युक्तियुक्त समय पर किन्हीं परिसरों में जहां वह यह विश्वास करता है कि ऐसा अभिलेख या दस्तावेज रखे जाते हैं, प्रवेश कर सकेगा और इस अधिनियम के अधीन प्रस्तुत किए जाने के लिए अपेक्षित किसी सूचना को अभिप्राप्त करने के लिए सुसंगत अभिलेखों या दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकेगा या उनकी प्रतियां ले सकेगा या कोई आवश्यक प्रश्न पूछ सकेगा ।
अध्याय 3
कतिपय दशाओं में सूचना का प्रकटन और उनके उपयोग पर निर्बन्धन
9. सूचना की सुरक्षा-(1) सांख्यिकी अधिकारी या इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति या अभिकरण को प्रस्तुत की गई कोई सूचना केवल सांख्यिकी प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाई जाएगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन सांख्यिकी संग्रहण और ऐसे संग्रहण के परिणामस्वरूप सांख्यिकी तैयार करने के कार्य में लगे व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन अभियोजन के प्रयोजनों के सिवाय किसी सूचना अनुसूची या पूछे गए प्रश्न के किसी उत्तर को देखने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा ।
(3) किसी सूचना अनुसूची में अंतर्विष्ट कोई सूचना और पूछे गए किसी प्रश्न का कोई उत्तर इस अधिनियम के अधीन अभियोजन के प्रयोजनों के सिवाय किसी अभिकरण को सूचनादाताओं की पहचान को छिपाए बिना पृथक् रूप से न तो प्रकाशित किया जाएगा और न ही प्रकटित किया जाएगा ।
(4) किसी अभिकरण द्वारा प्रकाशित सभी सांख्यिकीय सूचना ऐसी रीति में व्यवस्थित की जाएगी जिससे किन्हीं विशिष्टियों को किसी व्यक्ति द्वारा (उस सूचनादाता से भिन्न जिसके द्वारा वे विशिष्टियां प्रदाय की गई थीं) सूचनादाता से संबंधित विशिष्टियों के रूप में जिसने इसे प्रदाय किया है, समाप्त किए जाने की प्रक्रिया के माध्यम से भी पहचान योग्य बनाए जाने से तब तक न रोका जा सके, जब तक कि-
(क) उस सूचनादाता ने उस रीति में उनके प्रकाशन के लिए सहमति न दे दी हो; या
(ख) उस रीति में उनका प्रकाशन संबद्ध अभिकरण या उसके किसी कर्मचारी द्वारा युक्तियुक्त रूप से देख न लिया गया हो
(5) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (4) के प्रयोजनों के लिए ऐसे नियम बना सकेगी या ऐसी व्यवस्था कर सकेगी, जो वह आवश्यक समझे ।
10. कतिपय सूचना का प्रकटन करने के लिए प्राधिकृत समुचित सरकार-इस अधिनियम की धारा 9 के उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी, समुचित सरकार निम्नलिखित सूचना का प्रकटन कर सकेगी, अर्थात्: -
(क) ऐसे सूचनादाता द्वारा प्रदाय की गई सूचना जिसकी बाबत सूचनादाता या उक्त सूचनादाता द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा लिखित में प्रकटन की सहमति दी गई है;
(ख) किसी अधिनियम के अधीन या किसी लोक दस्तावेज के रूप में जनता को अन्यथा उपलब्ध सूचना;
(ग) नामों की अनुक्रमणिका या सूची के रूप में सूचना और वर्गीकरण सहित, सूचनादाताओं के पते यदि कोई हों, जो उनको आबंटित हों, और लगे हुए व्यक्तियों की संख्या ।
11. सद्भावपूर्वक अनुसंधान या सांख्यिकी प्रयोजनों के लिए सूचना अनुसूचियों का प्रकटन-(1) इस अधिनियम की धारा 9 में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के होते हुए भी समुचित सरकार, अन्य अभिकरण या व्यक्ति या संस्था या विश्वविद्यालय को उनके कृत्यों और कर्तव्यों के अनुसरण में सद्भावपूर्ण अनुसंधान या सांख्यिकी प्रयोजनों के लिए व्यष्टिक विवरणियों या फार्मेट या सूचना अनुसूची का प्रकटन कर सकेगी ।
(2) इस धारा के अनुसरण में कोई व्यष्टिक विवरणी या सूचना अनुसूची का तब तक प्रकटन नहीं किया जाएगा जब तक कि-
(क) उस सूचनादाता का नाम और पते का लोप नहीं किया जाता है जिसके द्वारा अनुसूची या संबंधित सूचना प्रदाय की गई थी;
(ख) अनुसंधान या सांख्यिकीय परियोजना में अंतर्वलित प्रत्येक अभिकरण या व्यक्ति या संस्था या विश्वविद्यालय उन्हें प्रकटित अनुसूचियों का उपयोग मात्र सद्भावपूर्ण अनुसंधान या सांख्यिकी प्रयोजनों के लिए करने की घोषणा नहीं करता हो; और
(ग) समुचित सरकार का ऐसा प्रकटन करते समय यह समाधान नहीं हो जाता है कि अनुसूची और उसमें अन्तर्विष्ट किसी सूचना की सुरक्षा का ह्रास नहीं होगा ।
(3) किसी अनुसंधान या सांख्यिकीय परियोजना के प्रकाशित परिणाम उस सूचना से अधिक कोई सूचना प्रकट नहीं होगी जिसे समुचित सरकार इस अधिनियम के अधीन प्रकाशित करे ।
(4) प्रत्येक अभिकरण या व्यक्ति या संस्था या विश्वविद्यालय जिसको इस धारा के अधीन कोई व्यष्टिक विवरणी या सूचना अनुसूची प्रकट की गई है, अनुसूचियों और उनमें अन्तर्विष्ट किसी सूचना से संबंधित प्रकटन करते समय सांख्यिकी संग्रहण के लिए प्राधिकृत अभिकरण द्वारा दिए गए निदेशों का अनुपालन करेगा ।
12. ऐतिहासिक दस्तावेजों का प्रकटन-इस अधिनियम की धारा 9 में किसी बात के होते हुए भी, समुचित सरकार सूचना अनुसूची से संबंधित ऐसे दस्तावेजों का निर्मोचन कर सकेगी जो उसकी राय में ऐतिहासिक महत्व रखते हैं ।
13. अभिलिखित सूचना की सुरक्षा-सांख्यिकी अधिकारी या सांख्यिकी संग्रहण के लिए प्राधिकृत कोई व्यक्ति या अभिकरण इस अधिनियम के अनुसरण में कोई सांख्यिकी सूचना व्यष्टिक विवरणियों, सूचना अनुसूचियों, कार्य पत्रकों या किसी अन्य गोपनीय स्रोत से कार्डों, टेपों, डिस्कों, फिल्मों या किसी अन्य प्रणाली से चाहे उनका कोड भाषा या साधारण भाषा प्रतीकों में प्रसंस्करण, भंडारण या विशिष्टियों के पुनरुत्पादन के लिए प्रति बनाते समय या अभिलेखन करते समय ऐसे उपाय किए जाएंगे या ऐसे उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे जो यह सुनिश्िचत करने के लिए आवश्यक हों कि इस अधिनियम के सुरक्षा उपबन्धों का अनुपालन किया जा रहा है ।
14. सूचना के उपयोग पर निर्बन्धन-इस अधिनियम के अधीन अन्यथा उपबंधित के सिवाय, -
(क) इस अधिनियम के अनुसरण में अभिप्राप्त कोई सूचना और किसी सूचनादाता के कब्जे में सूचना की कोई प्रति किसी भी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में प्रकटित या उपयोग नहीं की जाएगी; और
(ख) ऐसा कोई व्यक्ति जो किसी सांख्यिकी के संग्रहण में अपनी पदीय हैसियत के कारण किसी सूचना के प्रति पहुंच रखता है, इस अधिनियम में उपबंधित रीति के सिवाय किसी भी कार्यवाही में इस अधिनियम के प्रशासन के अनुक्रमण में अभिप्राप्त किसी सूचना के संबंध में कोई अनुसूची, दस्तावेज या अभिलेख या सूचना के संबंध में मौखिक साक्ष्य देने के लिए या प्रस्तुत करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा ।
अध्याय 4
अपराध और शास्तियां
15. विशिष्टियां प्रदाय करने में उपेक्षा या इंकार करने के लिए शास्ति-(1) जो कोई किसी लेखा बही, वाउचर, दस्तावेज या अन्य कारबार अभिलेख पेश करने में असफल रहता है अथवा जो कोई उसे दी गई या भेजी गई किसी सूचना-अनुसूची या विवरणी में अपेक्षित विशिष्टियों को भरने या उनका प्रदाय करने में उपेक्षा करता है या इंकार करता है या जो कोई इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन या इसके किसी उपबन्धों के प्रयोजनों के लिए अपेक्षित उसको संबोधित किसी प्रश्न या जांच का उत्तर देने में उपेक्षा करता है या इंकार करता है, वह ऐसे जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में ऐसे जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
(2) किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति या कंपनी की दोषसिद्धि उसे या उसको उपधारा (1) के अधीन बाध्यताओं से मुक्त नहीं करेगी और यदि दोषसिद्धि की तारीख से चौदह दिन के अवसान के पश्चात् वह या यह अपेक्षित विशिष्टियां देने में असफल रहता है या विशिष्टियों को उसमें भरने या प्रदाय करने से या प्रश्न या जांच का उत्तर देने में उपेक्षा करता है या इंकार करता है तब वह या यह उस प्रथम दिन से प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान वह व्यतिक्रम जारी रहता है अतिरिक्त जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में ऐसे जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
16. मिथ्या कथन करने के लिए शास्ति-(1) जो कोई, जानबूझकर इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन उसे किसी सूचना अनुसूची या विवरणी में जो भरी गई है या प्रदाय की गई है या उससे पूछे गए किसी प्रश्न के उत्तर में कोई मिथ्या या भ्रामक कथन से करता है या लोप करता है, तात्त्विक है, वह ऐसी अवधि के साधारण कारावास से जो छह मास तक की हो सकेगी अथवा ऐसे जुर्माने से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में ऐसे जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
17. सूचना अनुसूची को विकृत करने या प्रतिरूपण के लिए शास्ति-जो कोई, इस अधिनियम के अधीन संगृहीत किसी सूचना अनुसूची, प्ररूप या अन्य विशिष्टियों वाले दस्तावेज को नष्ट करता है, प्रतिरूपित करता है, हटाता है या विकृत करता है वह ऐसी अवधि के साधारण कारावास से जो छह मास तक की हो सकेगी अथवा ऐसे जुर्माने से जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में ऐसे जुर्माने से जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
18. कर्मचारियों को बाधा पहुंचाने के लिए शास्ति-जो कोई, किसी कर्मचारी को इस अधिनियम के अधीन उसको प्रदत्त किसी शक्ति या कर्तव्य का प्रयोग करने में हस्तक्षेप करता है, अवरोध करता है या बाधा पहुंचाता है, वह ऐसी अवधि के साधारण कारावास से जो छह मास तक की हो सकेगी अथवा ऐसे जुर्माने से जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में ऐसे जुर्माने से जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
19. अन्य अपराधों के लिए शास्ति-जो कोई-
(क) इस अधिनियम के किसी उपबंध या इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी अपेक्षा के उल्लंघन में कृत्य करता है या उसका अनुपालन करने में असफल रहता है; या
(ख) स्वेच्छया किसी सांख्यिकी अधिकारी या किसी अभिकरण या उसके किसी कर्मचारी के साथ प्रवंचना करता है या प्रवंचना करने का प्रयास करता है,
ऐसी अवधि के साधारण कारावास से, जो छह मास तक की हो सकेगी अथवा ऐसे जुर्माने से जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में ऐसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
20. कर्मचारियों द्वारा कर्तव्यों और कृत्यों को किए जाने में असफल रहने के लिए शास्ति-यदि कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन किसी कर्तव्य या कृत्य के निष्पादन में नियोजित है, -
(क) विधिपूर्ण कारण के बिना अपने कर्तव्य को करने का लोप करता है या जानबूझकर कोई मिथ्या घोषणा, कथन या विवरणी देता है; या
(ख) अपने कर्तव्यों का पालन करने में बहाना करता है, या ऐसी सूचना अभिप्राप्त करता है या अभिप्राप्त करने की वांछा करता है जिसे अभिप्राप्त करने के लिए वह प्राधिकृत नहीं है; या
(ग) इस अधिनियम के अनुसरण में सगृहीत सूचना अनुसूची में इकट्ठी या दर्ज की गई सूचना की गोपनीयता बनाए रखने में असफल रहता है और इस अधिनियम के अधीन यथा अनुज्ञेय के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन किसी सूचनादाता द्वारा फाइल की गई अनुसूची में या दी गई किसी सूचना की अंतर्वस्तु प्रकट करता है,
ऐसी अवधि के साधारण कारावास से जो छह मास तक की हो सकेगी अथवा ऐसे जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में ऐसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
21. कर्मचारी के प्रतिरूपण के लिए शास्ति-जो कोई, इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन सांख्यिकी संग्रह करने के लिए प्राधिकृत नहीं है, शब्द, आचरण या प्रदर्शन द्वारा यह बहाना करता है कि वह ऐसा करने के लिए प्राधिकृत है, ऐसी अवधि के साधारण कारावास से, जो छह मास तक की हो सकेगी अथवा ऐसे जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में ऐसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
22. साधारण शास्ति-जो कोई, इस अधिनियम के अधीन ऐसा कोई अपराध करता है जिसके लिए इस धारा से भिन्न अन्य कहीं कोई शास्ति विहित नहीं है, ऐसी अवधि के साधारण कारावास से, जो छह मास तक की हो सकेगी अथवा ऐसे जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या किसी कंपनी की दशा में, ऐसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का सकेगा अथवा दोनों से, दंडनीय होगा ।
23. कंपनी द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कंपनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही कंपनी भी, ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगेः
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी कंपनी के द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति से या उसकी मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है; और
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
24. अपराधों का संज्ञान-कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का संज्ञान समुचित सरकार या, यथास्थिति, ऐसी समुचित सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी या सांख्यिकी अधिकारी द्वारा किए गए परिवाद पर करने के सिवाय नहीं करेगा और महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से निम्नतर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
25. अपराध के अभियोजन के लिए मंजूरी-किसी सूचनादाता द्वारा किए गए किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन सांख्यिकी अधिकारी द्वारा या उसकी मंजूरी के सिवाय संस्थित नहीं किया जाएगा और सूचनादाता से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के लिए कोई अभियोजन समुचित सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी के सिवाय संस्थित नहीं किया जाएगा ।
26. न्यायालय की मामलों का संक्षिप्त विचारण करने की शक्ति-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन सभी अपराधों का किसी प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट या किसी महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण किया जाएगा और उक्त संहिता की धारा 262 से धारा 265 (इसमें दोनों सम्मिलित हैं) के उपबंध यथासाध्य ऐसे विचारण को लागू होंगेः
परन्तु जब इस धारा के अधीन किसी संक्षिप्त विचारण के अनुक्रम में, मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि मामले की प्रकृति ऐसी है कि किसी कारण से मामले का संक्षिप्त विचारण किया जाना अवांछनीय है तब मजिस्ट्रेट पक्षकारों की सुनवाई करने के पश्चात्, उस आशय का एक आदेश अभिलिखित करेगा और तत्पश्चात् किसी साक्षी को, जिसकी परीक्षा की जा चुकी है, पुनः बुलाएगा और उक्त संहिता द्वारा उपबंधित रीति में मामले की सुनवाई या पुनः सुनवाई करेगा ।
अध्याय 5
मुख्य सांख्यिकी के संबंध में शक्ति
27. मुख्य सांख्यिकी के संबंध में शक्ति-इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर राष्ट्रीय महत्व के सांख्यिकी संग्रहण के लिए किसी विषय को स्त्र्मुख्य सांख्यिकीऱ् के रूप में घोषित कर सकेगी और ऐसी व्यवस्थाएं कर सकेगी जो वह इस प्रकार घोषित विषय पर सांख्यिकी के संग्रहण और प्रसार को विनियमित करने के लिए आवश्यक समझे ।
अध्याय 6
प्रकीर्ण
28. निदेश देने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, यथास्थिति, किसी राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन या किसी स्थानीय सरकार अर्थात् पंचायतों या नगर पालिकाओं को इस अधिनियम का उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र या पंचायतों या नगर पालिकाओं में निष्पादन करने के लिए निदेश दे सकेगी ।
29. लोक सेवक-इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन कोई सांख्यिकी अधिकारी और सांख्यिकी संग्रहण या शासकीय सांख्यिकी तैयार करने के लिए प्राधिकृत कोई व्यक्ति भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा ।
30. अधिकारिता का वर्जन-किसी सिविल न्यायालय को किसी ऐसे विषय की बाबत कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण करने की अधिकारिता नहीं होगी, जिसके लिए समुचित सरकार या सांख्यिकी अधिकारी इस अधिनियम के द्वारा या इसके अधीन अवधारित करने के लिए सशक्त है और इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के अनुसरण में की गई या की जाने वाली किसी कार्रवाई की बाबत कोई व्यादेश किसी भी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी द्वारा नहीं दिया जाएगा ।
31. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या तद्धीन जारी किए गए नियमों या निदेशों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही समुचित सरकार या अभिकरण या किसी सांख्यिकी अधिकारी या अन्य अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
32. अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी असंगत बात के होते हुए भी जनगणना अधिनियम, 1948 (1948 का 37) के अधीन जारी निदेशों, यदि कोई हों, के अनुसार मानव जनसंख्या जनगणना के संचालन के सिवाय प्रभावी होंगे ।
33. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना केन्द्रीय सरकार, इस धारा के अधीन निम्निलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए नियम बना सकेगी, अर्थात्ः-
(क) केंद्रीय सरकार द्वारा सांख्यिकी अधिकारियों के नामांकन और रजिस्ट्रीकरण सहित धारा 3 के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए और सांख्यिकी के संग्रहण में अनावश्यक आवृत्ति से बचने के लिए भी यथासंभव प्रभावी रूप से समन्वय के लिए सिद्धांत;
(ख) वे शर्तें और निबंधन तथा ऐसे रक्षोपाय जिनके अधीन समुचित सरकार द्वारा धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन सांख्यिकी के संग्रहण के प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति या अभिकरण या कंपनी अथवा संगठन या संगम को लगाया जा सकेगा;
(ग) ऐसे प्ररूप और रीति विहित करने के लिए सिद्धांत जिनमें सूचना प्रस्तुत किए जाने की अपेक्षा की जा सकेगी;
(घ) उस रीति को विहित करने के लिए सिद्धांत जिसमें धारा 8 द्वारा प्रदत्त दस्तावेजों तक पहुंच के अधिकार और प्रवेश के अधिकार का प्रयोग किया जा सकेगा; और
(ङ) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या किया जाए ।
(3) इस अधिनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा, यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा, किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
34. निरसन और व्यावृत्ति-(1) सांख्यिकीय संग्रहण अधिनियम, 1953 (1953 का 32) इसके द्वारा निरसित किया जाता है
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अधिनियम के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
(3) उक्त अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी नियम तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे जब तक इस अधिनियम के अधीन नए नियम नहीं बनाए जाते हैं ।
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