खेल प्रसारण सिगनल (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य हिस्सेदारी) अधिनियम, 2007
(2007 का अधिनियम संख्यांक 11)
[19 मार्च, 2007]
प्रसार भारती के साथ खेल प्रसारण सिगनलों में अनिवार्य हिस्सेदारी के
माध्यम से राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों की अधिकतम
संख्या में श्रोताओं और दर्शकों की फ्री टू एयर आधार
पर पहुंच का और उससे संबंधित या उसके
आनुषंगिक विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के अठावनवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम खेल प्रसारण सिगनल (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य हिस्सेदारी) अधिनियम, 2007 है ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
(3) जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, यह 11 नवम्बर, 2005 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) प्रसारणकर्ता" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जो अंतर्वस्तु प्रसारण सेवा प्रदान करता है और उसके अंतर्गत प्रसारण नेटवर्क सेवा प्रदाता भी है जब वह अपनी स्वयं की टेलीविजन या रेडियो चैनल सेवा का प्रबंध करता है और उसका प्रचालन करता है;
(ख) प्रसारण" से किसी प्रकार के संचार अंतर्वस्तु को जैसे कि चिह्नों, संकेतों, लेखन, चित्र, प्रतिबिंब और ध्वनियों को समायोजित करना और उनका कार्यक्रम तैयार करना तथा या तो उसे विनिर्दिष्ट आवृत्तियों पर वैद्युत-चुंबकीय तरंगों पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखना और उसे वाहक तरंगों पर निरंतर उपलब्ध कराने के लिए अंतरिक्ष या केबलों के माध्यम से पारेषण करना या कंप्यूटर नेटवर्क पर अंकीय डाटा रूप में निरंतर प्रवाहित करना, जिससे कि वह या तो प्रत्यक्ष रूप से या परोक्ष रूप से अभिग्राही युक्तियों के माध्यम से एकल या विविध-उपयोगकर्ताओं के लिए पहुंच के भीतर हो; और उसके सभी व्याकरणीय रूपभेद और सजातीय पद अभिप्रेत हैं;
(ग) प्रसारण सेवा" से संचार अंतर्वस्तु का समायोजन करना, कार्यक्रम तैयार करना और उन्हें विनिर्दिष्ट आवृत्तियों पर वैद्युत-चुंबकीय तरंगों पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखना और उसे प्रसारण नेटवर्क या नेटवर्क के माध्यम से निरंतर पारेषित करना अभिप्रेत है जिससे सभी या किन्हीं विविध-उपयोगकर्ताओं को अपनी अभिग्राही युक्तियों को अपने संबंधित प्रसारण नेटवर्कों से जोड़कर अपनी पहुंच बनाने के लिए समर्थ बनाया जा सके और उसके अंतर्गत अंतर्वस्तु प्रसारण सेवाएं और प्रसारण नेटवर्क सेवाएं भी हैं;
(घ) प्रसारण नेटवर्क सेवा" से ऐसी सेवा अभिप्रेत है जो विविध-उपयोगकर्ताओं को पथ-निर्धारित या अपथ-निर्धारित वैद्युत-चुंबकीय तरंगों के माध्यम से विनिर्दिष्ट आवृत्तियों पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रसारण अंतर्वस्तु को ले जाने के लिए केबलों या पारेषण युक्तियों की अवसंरचना का नेटवर्क प्रदान करती है और इसके अंतर्गत निम्नलिखित में से किसी का प्रबंध और प्रचालन भी हैः-
(i) टेलीपोर्ट/हब/भू-केन्द्र;
(ii) डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्रसारण नेटवर्क;
(iii) बहु-प्रणाली केबल टेलीविजन नेटवर्क;
(iv) स्थानीय केबल टेलीविजन नेटवर्क;
(v) उपग्रह रेडियो प्रसारण नेटवर्क;
(vi) ऐसी कोई अन्य नेटवर्क सेवा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाए;
(ङ) केबल टेलीविजन चैनल सेवा" से विविध अभिदाताओं को दी गई आवृत्तियों के समुच्चय पर किसी प्रसारण-टेलीविजन अंतर्वस्तु को समायोजित करना, उनका कार्यक्रम तैयार करना और केबलों द्वारा पारेषण करना अभिप्रेत है;
(च) केबल टेलीविजन नेटवर्क" से ऐसी कोई प्रणाली अभिप्रेत है जो संवृत पारेषण पथ के किसी सैट और सहचरी सिगनल जनन, नियंत्रण और वितरण उपस्कर से मिलकर बनी है जो विविध अभिदाताओं द्वारा अभिग्रहण किए जाने के लिए और टेलीविजन चैनलों या कार्यक्रमों को प्राप्त करने तथा उन्हें पुनः पारेषित करने के लिए अभिकल्पित किया गया है;
(छ) सामुदायिक रेडियो सेवा" से स्थलीय रेडियो प्रसारण अभिप्रेत है जो किसी विनिर्दिष्ट समुदाय के लिए ही और विनिर्दिष्ट प्रदेश के लिए आशयित और निर्बंधित है;
(ज) अंतर्वस्तु" से कोई ऐसी ध्वनि, पाठ, डाटा तस्वीर (स्थिर या चल), अन्य श्रव्य-दृश्य रूपण, सिगनल या किसी प्रकार की आसूचना या उनका कोई समुच्चय अभिप्रेत है जो इलेक्ट्रॉनिक रूप से सृजित किए जाने, प्रसंस्कृत किए जाने, भंडारित किए जाने, पुनः प्राप्त किए जाने या संसूचित किए जाने योग्य है;
(झ) अंतर्वस्तु प्रसारण सेवा" से किसी अंतर्वस्तु को समायोजित करना, उसका कार्यक्रम तैयार करना और इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखना तथा उसे प्रसारण नेटवर्क पर विनिर्दिष्ट आवृत्तियों पर वैद्युत-चुंबकीय तरंगों पर पारेषित या पुनः पारेषित करना अभिप्रेत है जिससे कि उसे विविध-उपयोगकर्ताओं द्वारा अपनी अभिग्राही युक्तियों को नेटवर्क के संबंध द्वारा पहुंच प्राप्त करने योग्य बनाया जा सके और इसके अंतर्गत निम्नलिखित में से किसी का प्रबंध और प्रचालन भी हैः-
(i) स्थलीय टेलीविजन सेवा;
(ii) स्थलीय रेडियो सेवा;
(iii) उपग्रह टेलीविजन सेवा;
(iv) उपग्रह रेडियो सेवा;
(v) केबल टेलीविजन चैनल सेवा;
(vi) सामुदायिक रेडियो सेवा;
(vii) ऐसी कोई अन्य अंतर्वस्तु प्रसारण सेवाएं जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित की जाएं;
(ञ) डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्रसारण सेवा" से ऐसी सेवा अभिप्रेत है जो किसी अभिदाता के परिसर में कार्यक्रमों को किसी मध्यवर्ती जैसे कि केबल ऑपरेटर के माध्यम से वितरित न करके उपग्रह प्रणाली के अपलिंकिंग के द्वारा बहु-चैनल से वितरित की जाती है;
(ट) दिशानिर्देशों" से धारा 5 के अधीन जारी किए गए दिशानिर्देश अभिप्रेत हैं;
(ठ) बहु-प्रणाली केबल टेलीविजन नेटवर्क" से किसी स्थलाधारित पारेषण प्रणाली द्वारा तार केबल या बेतार केबल या दोनों के संयोजन का प्रयोग करके या तो विविध अभिदाताओं द्वारा सीधे या एक या अधिक स्थानीय केबल ऑपरेटरों के माध्यम से एक साथ प्राप्त करने के लिए टेलीविजन कार्यक्रमों की बहु-चैनल डाउनलिंकिंग तथा वितरण प्रणाली अभिप्रेत है;
(ड) प्रसार भारती" से प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) अधिनियम, 1990 (1990 का 25) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) के नाम से ज्ञात निगम अभिप्रेत है;
(ढ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ण) उपग्रह टेलीविजन सेवा" से ऐसी टेलीविजन प्रसारण सेवा अभिप्रेत है जो उपग्रह का उपयोग करते हुए प्रदान की जाती है और स्थानीय अभिग्राही प्रणाली की सहायता से या उसकी सहायता के बिना प्राप्त की जाती है किन्तु उसके अंतर्गत डायरेक्ट-टू-होम वितरण सेवा नहीं है;
(त) उपग्रह रेडियो सेवा" से ऐसी रेडियो प्रसारण सेवा अभिप्रेत है जो उपग्रह का उपयोग करते हुए प्रदान की जाती है और भारत में विविध अभिदाताओं द्वारा अभिग्राही सेटों के माध्यम से सीधे प्राप्त की जा सकती है;
(थ) सेवा प्रदाता" से प्रसारण सेवा का प्रदाता अभिप्रेत है;
(द) विनिर्दिष्ट" से धारा 5 के अधीन जारी किए गए दिशानिर्देशों के अधीन विनिर्दिष्ट अभिप्रेत है;
(ध) राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजन" से ऐसे राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन अभिप्रेत हैं, जो भारत या भारत से बाहर आयोजित किए गए हों और जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में राष्ट्रीय महत्व के अधिसूचित किए जाएं;
(न) स्थलीय टेलीविजन सेवा" से ऐसी टेलीविजन प्रसारण सेवा अभिप्रेत है जो स्थलाधारित ट्रांसमीटर का उपयोग करके वायु द्वारा प्रदान की जाती है और जनता द्वारा अभिग्राही सेटों के माध्यम से सीधे प्राप्त की जाती है;
(प) स्थलीय रेडियो सेवा" से ऐसी रेडियो प्रसारण सेवा अभिप्रेत है जो स्थलाधारित ट्रांसमीटर का प्रयोग करके वायु के माध्यम से प्रदान की जाती है और जनता द्वारा अभिग्राही सेटों के माध्यम से सीधे प्राप्त की जाती है ।
(2) उन शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं, किंतु परिभाषित नहीं हैं और केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 (1995 का 7), भारतीय दूर-संचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 (1997 का 24), भारतीय तार अधिनियम, 1885 (1885 का 13), भारतीय बेतार तारयांत्रिकी अधिनियम, 1933 (1933 का 17) में परिभाषित किए गए हैं, वही अर्थ होंगे, जो उन अधिनियमों में उनके हैं ।
अध्याय 2
प्रसार भारती के साथ खेल प्रसारण सिगनलों की अनिवार्य हिस्सेदारी
3. कतिपय खेल प्रसारण सिगनलों की अनिवार्य हिस्सेदारी-(1) कोई भी अंतर्वस्तु अधिकार का स्वामी या धारक और कोई भी टेलीविजन या रेडियो प्रसारण सेवा प्रदाता, भारत में किसी केबल पर या डायरेक्ट-टू-होम नेटवर्क या रेडियो पर व्याख्यात्मक वर्णन के प्रसारण पर, राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों का सीधा प्रसारण तभी करेगा, जब वह एक साथ प्रसार भारती के साथ, ऐसी रीति में और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो विनिर्दिष्ट की जाएं, उसके स्थलीय नेटवर्कों और डायरेक्ट-टू-होम नेटवर्कों पर उनका पुनः प्रसारण करने में उसे समर्थ बनाने के लिए, अपने विज्ञापनों के बिना, सीधे प्रसारण सिगनलों में हिस्सेदारी करे ।
(2) उपधारा (1) के अधीन निबंधन और शर्तें यह भी उपबंध करेंगी कि अंतर्वस्तु अधिकार के स्वामी या धारक और प्रसार भारती के बीच टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र के मामले में विज्ञापन राजस्व का बंटवारा 75: 25 और रेडियो प्रसारण क्षेत्र के मामले में 50: 50 से अन्यून अनुपात में होगा ।
(3) केन्द्रीय सरकार उपधारा (2) के अधीन प्रसार भारती द्वारा प्राप्त राजस्व का कुछ प्रतिशत विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिसका उपयोग प्रसार भारती द्वारा अन्य खेल आयोजनों के प्रसारण पर किया जाएगा ।
4. शास्तियां-केन्द्रीय सरकार, ऐसे विभिन्न निबंधनों और शर्तों के अतिक्रमण के लिए, जो धारा 3 के अधीन विनिर्दिष्ट की जाएं, अधिरोपित की जाने वाली शास्तियां, जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति, अनुमति या रजिस्ट्रीकरण का निलम्बन या प्रतिसंहरण भी है, इस शर्त के अधीन रहते हुए, विनिर्दिष्ट कर सकेगी कि किसी धनीय शास्ति की रकम एक करोड़ रुपए से अधिक नहीं होगीः
परंतु कोई भी शास्ति सेवा प्रदाता को युक्तियुक्त अवसर दिए बिना अधिरोपित नहीं की जाएगी :
परंतु यह और कि 11 नवम्बर, 2005 के पश्चात् और खेल प्रसारण सिगनल (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य हिस्सेदारी) अध्यादेश, 2007 (2007 का अध्यादेश संख्यांक 4) के प्रख्यापन की तारीख से पूर्व, किसी व्यक्ति की ओर से किया गया कोई कार्य या लोप शास्तियों के अध्यधीन नहीं होगा ।
अध्याय 3
दिशानिर्देश जारी करने की केन्द्रीय सरकार की शक्तियां
5. दिशानिर्देश जारी करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों के संबंध में प्रसार भारती के साथ खेल प्रसारण सिगनलों में अनिवार्य हिस्सेदारी के लिए, दिशानिर्देश जारी करके ऐसे सभी उपाय करेगी, जो वह ठीक या समीचीन समझेः
परंतु खेल प्रसारण सिगनल (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य हिस्सेदारी) अध्यादेश, 2007 (2007 का अध्यादेश संख्यांक 4) के प्रख्यापन से पूर्व जारी दिशानिर्देश के संबंध में यह समझा जाएगा कि वे इस धारा के उपबंधों के अधीन विधिमान्य रूप से जारी किए गए हैं ।
अध्याय 4
प्रकीर्ण
6. विधिमान्यकरण-(1) खेल प्रसारण सिगनलों की अनिवार्य हिस्सेदारी के लिए 11 नवंबर, 2005 की डाउनलिंकिंग की टेलीविजन चैनलों के लिए और 2 दिसंबर, 2005 को भारत से अपलिंकिंग के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों के उपबंध ऐसे विधिमान्य समझे जाएंगे, मानो वे इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए हों ।
(2) किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार या प्रसार भारती द्वारा उपधारा (1) में निर्दिष्ट दिशानिर्देशों के अनुसरण में किया गया कोई कार्य सभी प्रयोजनों के लिए विधि के अनुसार किया गया और हमेशा ही किया गया समझा जाएगा मानो वे दिशानिर्देश सभी तात्त्विक समयों पर विधिमान्य रूप से प्रवर्तन में थे और पूर्वोक्त किसी बात के होते हुए भी और पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी न्यायालय द्वारा दिए गए किसी निदेश या ऐसी किसी डिक्री या आदेश के प्रवर्तन के लिए, जो यदि उक्त दिशानिर्देश सभी तात्त्विक समयों पर विधिमान्य रूप से प्रवृत्त होते, तो नहीं दिया गया होता, कोई विधिक कार्यवाही किसी न्यायालय में नहीं चलाई जाएगी या जारी नहीं रखी जाएगी ।
7. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।
8. नियमों और दिशानिर्देशों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन, यथास्थिति, बनाया गया प्रत्येक नियम और जारी किया गया प्रत्येक दिशानिर्देश, बनाए जाने या जारी किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या दिशानिर्देश में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए या दिशानिर्देश जारी नहीं किया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किंतु नियम या दिशानिर्देश के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
9. व्यावृत्ति-प्रसार भारती के साथ खेल प्रसारण सिगनलों की अनिवार्य हिस्सेदारी के लिए 11 नवंबर, 2005 को जारी किए गए टेलीविजन चैनलों की डाउनलिंकिंग के लिए दिशानिर्देशों और 2 दिसंबर, 2005 को भारत से अपलिंकिंग के लिए दिशानिर्देशों के अधीन सुसंगत उपबंध, इस अधिनियम के अधीन नए दिशानिर्देश जारी किए जाने तक प्रवृत्त बने रहेंगे ।
10. निरसन और व्यावृत्ति-(1) खेल प्रसारण सिगनल (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य हिस्सेदारी) अध्यादेश, 2007 (2007 का अध्यादेश संख्यांक 4) इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) खेल प्रसारण सिगनल (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य हिस्सेदारी) अध्यादेश, 2007 (2007 का अध्यादेश संख्यांक 4) के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
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