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बाट और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 ( Standards of Weights and Measures (Enforcement) Act, 1985 )


 

बाट और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985

(1985 का अधिनियम संख्यांक 54)

[4 सितम्बर, 1985]

बाट और माप मानक अधिनियम, 1976 द्वारा या उसके अधीन

स्थापित बाटों और मापों के मानकों के प्रवर्तन का

और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक

विषयों का उपबंध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के छत्तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम बाट और माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम,1985 है ।

                (2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।

                (3) यह किसी राज्य में उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे, और उसके विभिन्न उपबंधों के लिए-

                                (क) राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में ; या

                                (ख) राज्य में विभिन्न वर्गों के उपक्रमों के संबंध में ; या

                                (ग) राज्य में उत्पादित, विक्रय किए गए, वितरित, विपणित या अंतरित विभिन्न वर्गों के मालों के संबंध में ; या

                                (घ) राज्य में की गई विभिन्न वर्गों की सेवाओं के संबंध में ; या

                (ङ) राज्य में विनिर्मित, विक्रय किए गए, वितरित, विपणित, अंतरित, मरम्मत किए गए या प्रयुक्त विभिन्न वर्गों के बाटों और मापों के संबंध में ; या

                                (च) राज्य में बाटों और मापों के विभिन्न वर्गों के उपभोक्ताओं के संबंध में,

भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी, तथा ऐसे किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह ऐसे क्षेत्रों में या ऐसे वर्गों के उपक्रमों, मालों, सेवाओं, बाटों और मापों के वर्गों या बाटों और मापों के उपभोक्ताओं के ऐसे वर्गों के बारे में, जिनके संबंध में यह अधिनियम प्रवृत्त किया गया है, यथास्थिति, इस अधिनियम के या उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है ।

2. अधिनियम का अन्तरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य को लागू होना-इस अधिनियम की कोई बात-

                (क) किसी बाट या माप के, या

                (ख) किन्हीं अन्य ऐसे मालों के, जिनका तोल, नाप या संख्या से विक्रय, परिदान या वितरण किया जाता है,

किसी अन्तरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य को लागू नहीं होगी ।

3. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

                (क) अपर नियंत्रक" के अंतर्गत, धारा 5 के अधीन नियुक्त संयुक्त नियंत्रक, उप नियंत्रक और सहायक नियंत्रक भी हैं;

                (ख) प्राधिकृत मुद्रा या स्टाम्प" से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन और उनके अनुसार बनाई गई कोई मुद्रा या स्टाम्प अभिप्रेत है;

                (ग) नियंत्रक" से धारा 5 के अधीन नियुक्त विधिक माप-विज्ञान नियंत्रक अभिप्रेत है;

                (घ) मुद्रा या स्टाम्प के संबंध में कूटकृत" से ऐसी मुद्रा या स्टाम्प अभिप्रेत है जो इस प्रकार बनाई गई है कि वह, यथास्थिति, किसी प्राधिकृत मुद्रा या स्टाम्प के सदृश हो और उस सादृश्य से धोखा हो जाने का आशय हो अथवा यह सम्भाव्य जानते हुए बनाई गई है कि उसके द्वारा धोखा दिया जाएगा ।

स्पष्टीकरण 1-यह आवश्यक नहीं है कि कूटकृत मुद्रा या स्टाम्प का प्राधिकृत मुद्रा या स्टाम्प से यथावत् सादृश्य हो ।

स्पष्टीकरण 2-जब कोई व्यक्ति किसी कूटकृत मुद्रा या स्टाम्प को किसी प्राधिकृत मुद्रा या स्टाम्प के सदृश बनाता है और सादृश्य ऐसा है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी मुद्रा या स्टाम्प पर निर्भर करे तो उसको उसके द्वारा धोखा हो सकता है, तब, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, यह उपधारणा की जाएगी कि मुद्रा या स्टाम्प को प्राधिकृत मुद्रा या स्टाम्प के इस प्रकार सदृश्य बनाने वाले व्यक्ति का आशय उस सादृश के माध्यम से धोखा देने का था या वह यह संभाव्य जानता था कि उसके द्वारा धोखा दिया जाएगा ; 

(ढ) ढेर" से विक्रय के लिए किसी वस्तु की कोई इकाई अभिप्रेत है जहां ऐसा विक्रय किसी तौल या माप के बिना, अथवा जहां विक्रय संख्या से किया जाता है वहां संख्या की गणना किए बिना, किया जाना आशयित है;

(च) निरीक्षक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो धारा 5 के अधीन उस रूप में नियुक्त किया गया है, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो;

                (छ) टकसाल" से केन्द्रीय सरकार की टकसाल अभिप्रेत है;

(ज) अधिसूचना" से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;

(झ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

(ञ) संरक्षण" से यह अवधारित करने के प्रयोजन के लिए कि किसी मनुष्य या पशु की भलाई की सुरक्षा के लिए अथवा किसी वस्तु, वनस्पति या चीज की या तो अलग-अलग या सामूहिक रूप से संरक्षा के लिए कोई उपाय किए जाने की आवश्यकता है, किसी बाट या माप का अथवा किसी बाट या माप की सहायता से प्राप्त किसी अंक का उपयोग अभिप्रेत है;

(ट) मानक अधिनियम" से बाट और माप मानक अधिनियम, 1976 (1976 का 7) अभिप्रेत है;

(ठ) मानक बाट या माप" से ऐसा बाट, माप या संख्या अभिप्रेत है जो मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उनके संबंध में स्थापित मानकों के अनुरूप है;

(ड) राज्य अधिनियम" से बाट और माप मानक अधिनियम, 1956 (1956 का 89) द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के प्रवर्तन के लिए किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा अधिनियमित किया गया अधिनियम अभिप्रेत है;

(ढ) संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में राज्य सरकार" से उसका प्रशासक अभिप्रेत है;

(ण) उन शब्दों और पदों के जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु मानक अधिनियम में परिभाषित हैं, वही अर्थ हैं जो उस अधिनियम में हैं ।

4. इस अधिनियम के उपबंधों का मानक अधिनियम के सिवाय किसी अन्य विधि के उपबंधों पर अध्यारोही होना-इस अधिनियम के उपबंध इस अधिनियम और मानक अधिनियम में अथवा इस अधिनियम या मानक अधिनियम से भिन्न किसी अधिनियमिति के आधार पर प्रभावी किसी लिखत में उनसे असंगत किसी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।

अध्याय 2

नियंत्रक, निरीक्षकों और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति

5. नियंत्रक, निरीक्षकों और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति-(1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, राज्य के लिए एक विधिक माप-विज्ञान नियंत्रक और उतने अपर, संयुक्त, उप और सहायक नियंत्रक, निरीक्षक और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी, जितने आवश्यक हों, उन शक्तियों का प्रयोग करने और उन कर्तव्यों का दक्षतापूर्वक निर्वहन करने के लिए, जो इस अधिनियम या मानक अधिनियम द्वारा या उनके अधीन उन्हें प्रदत्त या उन पर अधिरोपित किए गए हैं, नियुक्त कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रत्येक अपर नियंत्रक, निरीक्षक या अन्य अधिकारी नियंत्रक की ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जैसे कि राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत करे ।

(3) नियंत्रक, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, वे स्थानीय सीमाएं परिनिश्चित करेगा जिनके भीतर प्रत्येक अपर नियंत्रक, निरीक्षक या अन्य अधिकारी इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग और उस पर अधिरोपित कर्तव्यों का निर्वहन करेगा ।

(4) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रत्येक अपर नियंत्रक, निरीक्षक और अन्य अधिकारी अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने पद के कर्तव्यों का निर्वहन, नियंत्रक के साधारण अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण के अधीन करेगा और उन शक्तियों का प्रयोग और उन कर्तव्यों का निर्वहन उसी रीति से और उसी प्रभाव सहित करेगा मानो वे उसे इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन सीधे ही प्रदान या अधिरोपित किए गए थे, न कि प्राधिकार के रूप में ।

(5) नियंत्रक और प्रत्येक अपर नियंत्रक और इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत अन्य अधिकारी किसी निरीक्षक के-

                (क) सभी या किन्हीं कर्तव्यों का पालन करेगा, और

                (ख) उन सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करेगा जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के अधीन निरीक्षक को प्रदान की गई हों ।

6. बाटों या मापों का समायोजन करने के लिए निरीक्षक को प्राधिकृत करने की शक्ति-जहां नियंत्रक की यह राय है कि ऐसा करना आवश्यक है वहां वह लिखित आदेश द्वारा किसी ऐसे अधिकारी को, जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, अपनी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी क्षेत्र में किसी बाट या माप का समायोजन करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा ।

7. नियंत्रक और इस अधिनियम के अधीन नियुक्त अधिकारियों का लोक सेवक होना-(क) नियंत्रक और प्रत्येक अपर नियंत्रक तथा प्रत्येक निरीक्षक, और

(ख) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन किसी कर्तव्य का पालन करने के लिए प्राधिकृत प्रत्येक अन्य अधिकारी,

भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक समझा जाएगा ।

8. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या मानक अधिनियम अथवा पूर्वोक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही, नियंत्रक, किसी अपर नियंत्रक, निरीक्षक या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध न होगी जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन किसी शक्ति का प्रयोग या किसी कर्तव्य का पालन करने के लिए प्राधिकृत है ।

अध्याय 3

मानक बाटों और मापों के संबंध में साधारण उपबंध

9. मानक बाटों और मापों से भिन्न बाटों और मापों के प्रयोग का प्रतिषेध-(1) किसी भी प्रकार की किसी रूढ़ि, प्रथा या पद्धति के होते हुए भी, मानक बाट या माप से भिन्न किसी भी बाट या माप का प्रयोग नहीं किया जाएगा या उसे किसी परिसर में ऐसी परिस्थितियों में नहीं रखा जाएगा जिनसे यह उपदर्शित हो कि ऐसा बाट या माप किसी तौल या नाप के लिए आशयित है या उसका प्रयोग किए जाने की संभावना है ।

(2) इस अधिनियम के प्रारंभ से ही मानक बाट या माप से भिन्न किसी बाट, माप या संख्या का किसी व्यापार, वाणिज्य, उत्पादन या संरक्षा के संबंध में किसी संविदा या अन्य करार में प्रयोग नहीं किया जाएगा या वह उसका आधार नहीं बनेगी ।

(3) कोई ऐसी संविदा या अन्य करार, जो उपधारा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, शून्य होगा ।

10. कुछ दशाओं में केवल बाटों या केवल मापों का प्रयोग-(1) राज्य सरकार इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा निदेश दे सकेगी कि उन मालों, सेवाओं या उपक्रमों या उपयोक्ताओं के उन वर्गों के संबंध में, जो उसमें विनिर्दिष्ट हों,-

                (क) कोई संव्यवहार, व्यवहार या संविदा नहीं की जाएगी या होगी ; या

                (ख) कोई औद्योगिक उत्पादन आरंभ नहीं किया जाएगा ; या

                (ग) संरक्षा के लिए कोई उपयोग नहीं किया जाएगा,

और ऐसा, उस तौल, माप या संख्या के हिसाब से ही जो उनमें विनिर्दिष्ट की जाए, किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

                (2) उपधारा (1) के अधीन बनाया गया कोई नियम ऐसे क्षेत्र में ऐसी भावी तारीख से और ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, अधीन रहते हुए, प्रभावी होगा ।

11. कोटेशनों आदि का मानक बाट या माप के अनुसार दिए जाने से अन्यथा दिए जाने का प्रतिषेध-कोई भी व्यक्ति वहां के सिवाय जहां वह मानक अधिनियम के अधीन ऐसा करने के लिए अनुज्ञात है, किसी ऐसे माल या चीजों के संबंध में, जो विक्रय, अन्तरित, वितरित या परिदत्त की जाती है या किसी ऐसी सेवा के संबंध में, जो दी जाती है मानक बाट या माप के अनुसार से अन्यथा-

                (क) चाहे मौखिक रूप से या अन्यथा कोई कीमत या प्रभार कोट नहीं करेगा या उसकी घोषणा नहीं करेगा ; अथवा

                (ख) कोई कीमत सूची, बीजक, कैश मीमों या अन्य दस्तावेज जारी या प्रदर्शित नहीं करेगा ; अथवा

                (ग) किसी विज्ञापन, पोस्टर या अन्य दस्तावेज में किसी बाट या माप का उल्लेख नहीं करेगा ; अथवा

                (घ) किसी पैकेज की शुद्ध अंतर्वस्तुओं की तौल, माप या संख्या या तो उस पैकेज पर ही या किसी लेबल, कार्टन या अन्य चीज पर उपदर्शित नहीं करेगा ; अथवा

                (ङ) किसी संव्यवहार, औद्योगिक उत्पादन या संरक्षा के संबंध में कोई क्वालिटी या आकार व्यक्त नहीं करेगा ।

अध्याय 4

मानक उपस्कर की अभिरक्षा और सत्यापन

12. निर्देश मानकों की अभिरक्षा और सत्यापन-प्रत्येक निर्देश मानक ऐसे स्थान पर और ऐसी अभिरक्षा में रखा जाएगा, जो विहित की जाए तथा किसी ऐसे निर्देश मानक को तब तक निर्देश मानक नहीं समझा जाएगा और उस रूप में उसका प्रयोग नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे मानक अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार सत्यापित या अधिप्रमाणित न किया गया हो और न रखा गया हो ।

13. द्वितीय और कार्यकारी मानकों का तैयार किया जाना-राज्य सरकार मुम्बई स्थित टकसाल के माप-विज्ञान संबंधी खंड से द्वितीयक मानकों या कार्यकारी मानकों के उतने सैट तैयार करा सकेगी, जितने वह आवश्यक समझे :

परन्तु जहां टकसाल राज्य सरकार को लिखित रूप में यह प्रज्ञापित करती है कि वह कोई द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक तैयार करने में असमर्थ है तो वह सरकार ऐसा द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक ऐसे संगठन द्वारा तैयार करा सकेगी जिसे केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार द्वारा उसको दिए गए निर्देश पर अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।

14. द्वितीयक या कार्यकारी मानकों का सत्यापन, स्टापन और अभिरक्षा-(1) धारा 13 में निर्दिष्ट प्रत्येक द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक उन मानकों के अनुरूप होगा जो मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किए गए हैं और उसका सत्यापन-

                (क) द्वितीयक मानक की दशा में, उन स्थानों में से किसी एक पर, जहां निर्देश मानक रखे गए हैं, समुचित निर्देश मानक के अनुसार ;

                (ख) कार्यकारी मानक की दशा में उन स्थानों में से किसी एक पर, जहां द्वितीयक मानक रखे गए हैं, समुचित द्वितीयक मानक के अनुसार,

ऐसी रीति से और ऐसे कालिक अन्तरालों पर किया जाएगा, जो मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट किए जाएं तथा यदि ऐसे सत्यापन पर यह पाया जाता है कि वह उस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप है तो उसे स्टाम्पित किया जाएगा ।

                (2) जहां कोई द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक उपधारा (1) के अधीन स्टांपित किया जाता है, वहां एक प्रमाणपत्र पृथक्तः जारी किया जाएगा जिसमें वह तारीख दर्शित होगी, जिसको ऐसा बाट या माप स्टाम्पित किया गया था ।

                (3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक सत्यापन और स्टांपन ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा जो मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट किया जाए ।

                (4) ऐसे द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक को, जो उपधारा (1) और उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार सत्यापित और स्टांपित नहीं किया गया है, यथास्थिति, द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक नहीं समझा जाएगा तथा उसे, यथास्थिति, किसी कार्यकारी मानक के सत्यापन के लिए या किसी बाट या माप के सत्यापन के लिए प्रयुक्त नहीं किया जाएगा ।

                (5) प्रत्येक सत्यापित द्वितीयक मानक और प्रत्येक सत्यापित कार्यकारी मानक ऐसे स्थान पर और ऐसी अभिरक्षा में रखे जाएंगे, जो विहित की जाए ।

15. द्वितीयक या कार्यकारी मानक, जो स्टाम्पित नहीं किया जा सकेगा-(1) जहां राज्य सरकार की यह राय हो कि किसी द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक के आकार या स्वरूप के कारण यह वांछनीय या साध्य नहीं है कि उस पर स्टांप लगाया जाए तो वह निदेश दे सकेगी कि ऐसे द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक पर स्टांप लगाने की बजाय इस आशय का प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाए कि ऐसा द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक, मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप है तथा इस प्रकार प्रमाणित प्रत्येक द्वितीयक मानक या कार्यकारी मानक उस तारीख को, जिसको ऐसा प्रमाणपत्र जारी किया गया था इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से स्टाम्पित किया गया समझा जाएगा ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक प्रमाणपत्र ऐसे प्ररूप में होगा जो विहित किया जाए तथा उसमें ऐसे ब्यौरे होंगे जिनसे उस बाट या माप की, जिससे वह संबंधित है, स्पष्ट पहचान हो सके ।

अध्याय 5

बाटों और मानकों के उपयोगकर्ताओं का रजिस्ट्रीकरण

16. संव्यवहारों या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए बाटों या मापों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों द्वारा अपने को रजिस्टर कराना-कोई भी व्यक्ति, जो फेरी लगाकर बेचने वाला नहीं है, किसी बाट या माप का किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए तब तक उपयोग नहीं करेगा जब तक कि वह इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार रजिस्ट्रीकृत न हो ।

17. रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया-(1) प्रत्येक व्यक्ति जो किसी बाट या माप का किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए उपयोग प्रारम्भ करना या जारी रखना चाहता है, ऐसे रजिस्टर में जो उस प्रयोजन के लिए रखा जाएगा (जिसे इस धारा में इसके पश्चात्, उपयोगकर्ता रजिस्टर" कहा गया है) अपना नाम सम्मिलित किए जाने के लिए उतने समय के भीतर और ऐसी विशिष्टियों सहित, जो विहित की जाएं, आवेदन करेगा ।

(2) उपयोगकर्ता रजिस्टर ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से रखा जाएगा जो विहित की जाए ।

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आवेदन नियंत्रक को या ऐसे अन्य व्यक्ति को, जिसे नियंत्रक साधारण या विशेष लिखित आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत करे, किया जाएगा तथा ऐसा प्रत्येक आवेदन ऐसे प्ररूप में, ऐसी रीति से और ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाए, किया जाएगा ।

(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आवेदन की प्राप्ति पर नियंत्रक या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति, ऐसे व्यक्ति का नाम उपयोगकर्ता रजिस्टर में सम्मिलित करेगा तथा आवेदक को इस आशय का प्रमाणपत्र देगा कि उसका नाम इस प्रकार सम्मिलित कर लिया गया है ।

(5) उपधारा (4) के अधीन जारी किया गया प्रमाणपत्र उसमें विनिर्दिष्ट अवधि के लिए विधिमान्य होगा तथा उसे समय-समय पर ऐसी अतिरिक्त अवधि के लिए और ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहित की जाए, नवीकृत कराया जा सकेगा ।

18. रजिस्ट्रीकरण कराने के लिए दण्ड-जो कोई धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन विहित अवधि के अवसान के पश्चात् किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए किसी बाट या माप का उपयोग करेगा, वह जब तक कि इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार रजिस्ट्रीकृत न हो, जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।

अध्याय 6

बाटों और मापों का विनिर्माण, मरम्मत या विक्रय

19. अनुज्ञप्ति के बिना बाटों या मापों के विनिर्माण, मरम्मत या विक्रय पर प्रतिषेध-(1) कोई भी व्यक्ति, किसी बाट या माप का तब तक निर्माण, विनिर्माण मरम्मत या विक्रय नहीं करेगा अथवा उसे किसी मरम्मत या विक्रय के लिए प्रस्थापित, अभिदर्शित नहीं करेगा या कब्जे में नहीं रखेगा, जब तक उसके पास नियंत्रक द्वारा इस निमित्त जारी की गई विधिमान्य अनुज्ञप्ति न हो जो ऐसे व्यक्ति को ऐसा करने के लिए प्राधिकृत करती हो:

परन्तु ऐसे व्यक्ति से जो अपने स्वामित्व और कब्जे के किसी बाट या माप की वास्तव में मरम्मत करता है, यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह इस उपधारा में निर्दिष्ट अनुज्ञप्ति निकलवाए ।

(2) इस धारा के अधीन जारी की गई प्रत्येक अनुज्ञप्ति-

                (क) (i) ऐसे प्ररूप में होगी;

                (ii) ऐसी फीस के संदाय पर जारी की जाएगी; और

                (iii) ऐसी अवधि के लिए विधिमान्य होगी,

जो विहित की जाए;

                (ख) समय-समय पर नवीकृत कराई जा सकेगी; और

                (ग) उसमें ऐसी शर्तें और निर्बंधन हो सकेंगे जो विहित किए जाएं ।

(3) राज्य अधिनियम के अधीन जारी की गई प्रत्येक अनुज्ञप्ति, यदि वह इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व प्रवृत्त है तो तब तक प्रवृत्त बनी रहेगी जब तक उसकी विधिमान्यता की अवधि का अवसान या जब तक उसका रद्दकरण, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, नहीं हो जाता, तथा उसे उसकी विधिमान्यता की अवधि के अवसान के पश्चात्, इस अधिनियम के अधीन नवीकृत कराया जा सकेगा, यदि ऐसे नवीकरण के लिए आवेदन विहित प्ररूप में, अनुज्ञप्ति की विधिमान्यता की अवधि के अवसान के कम से कम एक मास पूर्व कर दिया जाता है ।

(4) प्रत्येक व्यक्ति, जो इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात्, किसी बाट या माप के निर्माता, विनिर्माता, मरम्मतकर्ता या विक्रेता के रूप में कारबार प्रारंभ करना चाहता है, अपने को ऐसी अनुज्ञप्ति के दिए जाने के लिए ऐसे प्ररूप में आवेदन करेगा जो विहित किया जाए, तथा इस प्रकार जारी की गई प्रत्येक अनुज्ञप्ति नवीकृत की जा सकेगी, यदि उसके नवीकरण के लिए आवेदन, ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसी फीस के साथ जो विहित की जाए, विहित प्ररूप में उसकी विधिमान्यता की अवधि के अवसान के कम से कम एक मास पूर्व कर दिया जाता है ।

(5) यदि नियंत्रक का यह समाधान हो जाता है कि किसी बाट या माप का, यथास्थिति, निर्माता, विनिर्माता, मरम्मतकर्ता या विक्रेता अपनी अनुज्ञप्ति के नवीकरण के लिए आवेदन उसकी विधिमान्यता की अवधि के अवसान के पूर्व करने से पर्याप्त कारण से निवारित किया गया था तो वह उसे उसके द्वारा ऐसी अतिरिक्त फीस का संदाय किए जाने पर, जो उस फीस से अधिक न हो, जो कि अनुज्ञप्ति के जारी किए जाने के लिए संदेय है, ऐसी विधिमान्यता की अवधि के अवसान की तारीख से एक मास की अतिरिक्त अवधि के भीतर, आवेदन करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा ।

(6) किसी अनुज्ञप्ति के जारी किए जाने या नवीकरण के लिए किसी आवेदन को तब तक नामंजूर नहीं किया जाएगा जब तक-

(क) यथास्थिति, आवेदक या अनुज्ञप्ति के धारक को प्रस्थापित कार्रवाई के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर न दे दिया गया हो; तथा

                (ख) नियंत्रक का यह समाधान नहीं हो जाता है कि-

                                (i) आवेदन इस धारा में विनिर्दिष्ट समय के भीतर नहीं किया गया है; या

                (ii) आवेदक ने उस अनुज्ञप्ति के जारी किए जाने या नवीकरण के लिए आवेदन में या उसके संबंध में कोई ऐसा कथन किया है जो गलत है या तात्त्विक विशिष्टियों में मिथ्या है; या

                (iii) आवेदक ने मानक अधिनियम के या किसी राज्य अधिनियम के या इस अधिनियम के या मानक अधिनियम, राज्य अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के किसी उपबंध का उल्लंघन किया है ।

                (7) नियंत्रक इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्त प्रत्येक मरम्मतकर्ता से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह दो सौ रुपए से अनधिक ऐसी राशि की, जो विहित की जाए, राज्य सरकार को प्रतिभूति दे ।

                (8) इस धारा की कोई भी बात किसी उपयोक्ता द्वारा (जो निर्माता, विनिर्माता, व्यवहारी या मरम्मतकर्ता नहीं है) किसी बाट या माप के विक्रय को लागू नहीं होगी:

                परन्तु विहित वर्णन के किसी बाट या माप का कोई विक्रय नियंत्रक की लिखित अनुज्ञा से ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

                (9) इस अधिनियम के अधीन जारी या नवीकृत की गई प्रत्येक अनुज्ञप्ति उस परिसर में जहां अनुज्ञप्तिधारी अपना कारबार चलाता है, किसी सहजदृश्य स्थान में संप्रदर्शित की जाएगी ।

20. अनुज्ञप्ति का निलम्बन और रद्दकरण-(1) यदि नियंत्रक के पास यह विश्वास करने का कोई उचित कारण हो कि इस अधिनियम के अधीन जारी की गई, नवीकृत की गई या चालू रखी गई किसी अनुज्ञप्ति के धारक ने अनुज्ञप्ति के जारी किए जाने, उसका नवीकरण किए जाने या उसे चालू रखे जाने के लिए किसी आवेदन में या उसके संबंध में कोई ऐसा कथन किया है जो गलत या किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या है अथवा उसने मानक अधिनियम या किसी राज्य अधिनियम या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के किसी उपबन्ध का उल्लंघन किया है तो नियंत्रक, ऐसी अनुज्ञप्ति के धारक के विरुद्ध किसी जांच या विचारण के पूरे होने तक ऐसी अनुज्ञप्ति को निलम्बित कर सकेगा :

परन्तु ऐसी कोई अनुज्ञप्ति तब तक निलम्बित नहीं की जाएगी, जब तक कि उसके धारक को प्रस्थापित कार्रवाई के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर न दे दिया गया हो:

परन्तु यह और कि जहां इस उपधारा में निर्दिष्ट जांच या विचारण, अनुज्ञप्ति के निलम्बन की तारीख से तीन मास की अवधि के भीतर पूरा नहीं कर लिया जाता है, वहां ऐसा निलम्बन पूर्वोक्त अवधि की समाप्ति पर रद्द हो जाएगा ।

(2) यदि नियंत्रक का, ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि अनुज्ञप्ति के धारक ने उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रकृति का मिथ्या या गलत कथन किया है अथवा उसने उस उपधारा में निर्दिष्ट किसी विधि का उल्लंघन किया है तो नियंत्रक ऐसी अनुज्ञप्ति को रद्द कर सकेगा:

परन्तु ऐसी कोई अनुज्ञप्ति तब तक रद्द नहीं की जाएगी जब तक कि उसके धारक को प्रस्थापित कार्रवाई के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर न दे दिया गया हो ।

(3) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जिसकी अनुज्ञप्ति निलम्बित कर दी गई है, ऐसे निलम्बन के ठीक पश्चात् ऐसे अनुज्ञप्तिधारी के रूप में कार्य करना बंद कर देगा तथा ऐसे अनुज्ञप्तिधारी के रूप में कारबार तब तक पुनः आरम्भ नहीं करेगा जब तक ऐसे निलम्बन का आदेश रद्द न कर दिया गया हो या रद्द नहीं कर दिया जाता है ।

(4) प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी, जिसकी अनुज्ञप्ति निलम्बित या रद्द कर दी गई है, यथास्थिति, ऐसे निलम्बन या रद्दकरण के पश्चात् ऐसी अनुज्ञप्ति उस प्राधिकारी को, जिसके द्वारा ऐसी अनुज्ञप्ति जारी की गई थी, अभ्यर्पित कर देगा ।

(5) प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी जिसकी अनुज्ञप्ति रद्द कर दी गई है, ऐसे रद्दकरण की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर, या ऐसी तारीख से तीन मास से अनधिक की ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर, जो नियंत्रक पर्याप्त कारण बताए जाने पर अनुज्ञात करे, उन बाटों या मापों का, जो ऐसे रद्दकरण की तारीख को उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में थे, व्ययन कर देगा तथा उसके ऐसा करने में असफल रहने की दशा में, नियंत्रक या कोई अन्य ऐसा अधिकारी जो उसके द्वारा लिखित रूप में इस निमित्त प्राधिकृत है, उनका अभिग्रहण और व्ययन कर सकेगा और उनके आगमों का ऐसी रीति से वितरण कर सकेगा, जो विहित की जाए ।

21. बाटों या मापों का विनिर्माण-मानक अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, कोई भी व्यक्ति-

(क) किसी बाट या माप का निर्माण या विनिर्माण नहीं करेगा, जब तक ऐसा बाट या माप मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप न हो;

(ख) किसी बाट या माप का, उस पर किसी ऐसे मात्रक के अनुसार किसी बाट या माप के उपदर्शनों के साथ निर्माण या विनिर्माण नहीं करेगा जो बाट या माप उन मात्रकों से भिन्न हैं जो मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट हैं ।

22. स्टाम्पित किए गए बाटों या मापों के विक्रय या उपयोग का प्रतिषेध-किसी बाट या माप का तब तक विक्रय नहीं किया जाएगा या उसे विक्रय के लिए तब तक प्रस्थापित, अभिदर्शित नहीं किया जाएगा या कब्जे में नहीं रखा जाएगा अथवा किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए तब तक उपयोग में नहीं लाया जाएगा या उपयोग के लिए नहीं रखा जाएगा, जब तक उसे सत्यापित और स्टाम्पित न किया जा चुका हो:

परन्तु इस धारा की कोई भी बात किसी ऐसे बाट या माप को लागू नहीं होगी जिसे आरम्भ में ही सत्यापित कर दिया गया हो और मानक अधिनियम की धारा 41 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट विशेष मुद्रा से स्टाम्पित कर दिया गया हो ।

23. विनिर्माता आदि द्वारा अभिलेखों और रजिस्टरों का रखा जाना-(1) किसी बाट या माप का प्रत्येक निर्माता, विनिर्माता, मरम्मतकर्ता या व्यवहारी और किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए उसका उपयोग करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसे अभिलेख और रजिस्टर रखेगा जो विहित किए जाएं तथा यदि निरीक्षक द्वारा ऐसा करने की अपेक्षा की जाए तो अभिलेखों और रजिस्टरों को निरीक्षण के लिए निरीक्षक के समक्ष पेश करेगा ।

(2) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, यदि नियंत्रक की यह राय हो कि किसी बाट या माप के निर्माता, विनिर्माता, व्यवहारी, मरम्मतकर्ता या उपयोक्ता द्वारा चलाए जा रहे कारबार की प्रकृति या मात्रा को ध्यान में रखते हुए ऐसा करना आवश्यक है तो वह आदेश द्वारा, ऐसे निर्माता, विनिर्माता, व्यवहारी, मरम्मतकर्ता या उपयोक्ता को उपधारा (1) के प्रवर्तन से छूट दे सकेगा ।

अध्याय 7

बाटों या मापों का सत्यापन और स्टाम्पन

24. बाटों या मापों का सत्यापन और स्टाम्पन-(1) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में कोई बाट या माप ऐसी परिस्थितियों में हैं, जिनसे यह उपदर्शित हो कि ऐसे बाट या माप का उसके द्वारा किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन  के लिए या संरक्षा के लिए उपयोग किया जा रहा है या उपयोग किया जाना आशयित या संभाव्य है, ऐसे बाट या माप को ऐसे उपयोग में लाने के पहले, ऐसी फीस का संदाय किए जाने पर जो विहित की जाए, ऐसे स्थान पर और ऐसे समय के दौरान जो नियंत्रक, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे (जिसे इसमें इसके पश्चात् विनिर्दिष्ट स्थान या विनिर्दिष्ट समय कहा    गया है) सत्यापित कराएगा ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक बाट या माप को ऐसे कालिक अन्तरालों पर जो विहित किए जाएं पुनः सत्यापित किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-शंकाओं के निराकरण के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि किसी ऐसे बाट या माप के संबंध में जिसका उपयोग अनन्यतः घरेलू प्रयोजनों के लिए किया जाता है, ऐसा कोई कालिक पुनः सत्यापन आवश्यक नहीं होगा ।

(3) प्रत्येक निरीक्षक, किसी बाट या माप के सत्यापन के प्रयोजन के लिए (अपनी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर) विनिर्दिष्ट स्थान पर विनिर्दिष्ट समय पर हाजिर होगा और प्रत्येक ऐसे बाट या माप का, जो ऐसे स्थान पर और ऐसे समय के भीतर उसके समक्ष लाया जाता है, सत्यापन करेगा तथा यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसा बाट या माप मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप है तो वह उस पर अपनी स्टाम्प लगाएगा:

परन्तु जहां कोई बाट या माप ऐसा है कि उसे उसके स्थान से नहीं हटाया जा सकता या नहीं हटाया जाना चाहिए तो निरीक्षक ऐसे बाट या माप के उसकी अवस्थिति के स्थान पर सत्यापन के लिए ऐसे कदम उठाएगा जो विहित किए जाएं ।

(4) जहां उपधारा (3) के अधीन कोई सत्यापन कर लिया गया है वहां निरीक्षक उपधारा (1) में निर्दिष्ट व्यक्ति को विहित प्ररूप में ऐसा प्रमाणपत्र देगा जिसमें उसके द्वारा सत्यापित और स्टाम्पित बाट या माप की विशिष्टियां उपदर्शित हों ।

(5) जहां नियंत्रक की यह राय हो कि किसी बाट या माप के आकार या स्वरूप के कारण उस पर स्टाम्प लगाना वांछनीय या साध्य नहीं है वहां वह लिखित आदेश द्वारा निदेश दे सकेगा कि ऐसे बाट या माप पर स्टाम्प लगाने के बजाय इस आशय का प्रमाणपत्र दे दिया जाए कि ऐसा बाट या माप मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप है तथा इस प्रकार प्रमाणित प्रत्येक बाट या माप को उस तारीख को जिसको ऐसा प्रमाणपत्र जारी किया गया था, इस अधिनियम के अधीन सम्यक्तः स्त्यापित और स्टाम्पित किया गया समझा जाएगा ।

(6) उपधारा (5) में निर्दिष्ट प्रत्येक प्रमाणपत्र ऐसे प्ररूप में होगा जो विहित किया जाए और उसमें ऐसे ब्यौरे होंगे, जिनसे उस बाट या माप की जिससे वह संबंधित है, स्पष्ट पहचान की जा सके ।

25. सत्यापन के प्रमाणपत्र का संप्रदर्शन-इस अधिनियम के अधीन दिया गया सत्यापन का प्रत्येक प्रमाणपत्र उस परिसर में, जहां ऐसे बाट या माप को किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए उपयोग में लाया जा रहा है या उपयोग में लाया जाना आशयित या संभाव्य है, किसी सहजदृश्य स्थान पर संप्रदर्शित किया जाएगा ।

26. सम्यक्तः स्टाम्पित बाटों या मापों की विधिमान्यता-(1) ऐसा बाट या माप जो इस अधिनियम के अधीन सम्यक्तः सत्यापित या स्टाम्पित है या माना गया है, उस राज्य के भीतर जिसमें उसे स्टाम्पित किया गया है, प्रत्येक स्थान पर, मानक अधिनियम के द्वारा स्थापित मानकों के अनुरूप समझा जाएगा, जब तक कि निरीक्षण या सत्यापन किए जाने पर यह न पाया जाए कि ऐसा बाट या माप मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप नहीं रह गया है ।

(2) किसी ऐसे बाट या माप का जो इस अधिनियम के अधीन सम्यक्तः सत्यापित या स्टाम्पित है या माना गया है, केवल इस बात के कारण पुनः स्टाम्पित किया जाना अपेक्षित नहीं होगा कि उसका राज्य के भीतर उस स्थान से, जिस पर उसे मूलतः सत्यापित और स्टाम्पित किया गया था, भिन्न किसी स्थान पर उपयोग किया जा रहा है :

परन्तु जहां एक स्थान पर प्रतिष्ठापित किसी बाट या माप को खोला जाता है और किसी भिन्न स्थान पर पुनः प्रतिष्ठापित किया जाता है वहां ऐसे बाट या माप को तब तक उपयोग में नहीं लाया जाएगा, जब तक कि इस बात के होते हुए भी कि ऐसे बाट या माप का कालिक पुनः सत्यापन शोध्य नहीं हुआ है, सम्यक्तः, पुनः सत्यापित और स्टाम्पित न कर दिया गया हो ।

(3) जहां किसी सत्यापित बाट या माप की या तो किसी अनुज्ञप्त मरम्मतकर्ता द्वारा या उस व्यक्ति द्वारा जिसके स्वामित्व और कब्जे में वह है, मरम्मत की गई है वहां ऐसे बाट या माप को तब तक उपयोग में नहीं लाया जाएगा जब तक उसे, इस बात के होते हुए भी कि ऐसे बाट या माप का कालिक पुनः सत्यापन शोध्य नहीं हुआ है, सम्यक्तः पुनः सत्यापित और स्टाम्पित न कर दिया गया हो ।

अध्याय 8

निरीक्षण, तलाशी, अभिग्रहण और समपहरण

27. निरीक्षण करने की शक्ति-(1) निरीक्षक अपनी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी ऐसे बाट या माप   का, जो-

                (i) किसी व्यक्ति के कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में है, या

                (ii) किसी परिसर में या परिसर पर है,

सभी युक्तियुक्त समयों पर ऐसी परिस्थितियों में जिनसे यह उपदर्शित हो कि ऐसे बाट या माप का किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए उपयोग किया जा रहा है या किया जाना आशयित या संभाव्य है, निरीक्षण और परीक्षण कर सकेगा तथा यह भी सत्यापित कर सकेगा कि ऐसा बाट या माप मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप है या नहीं ।

                (2) निरीक्षक किसी संव्यवहार में प्रयुक्त किसी बाट या माप की शुद्धता अभिनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए, ऐसे संव्यवहार के अनुक्रम में किसी व्यक्ति को विक्रय की गई या परिदत्त की गई वस्तु के तौल या माप का भी परीक्षण कर सकेगा ।

28. बाट या माप या अभिलेखों को निरीक्षण के लिए पेश किए जाने की अपेक्षा करने की निरीक्षक की शक्ति-(1) यदि किसी निरीक्षक के पास यह विश्वास करने का उचित कारण हो कि किसी बाट या माप के संबंध में इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया गया है या किया जाना संभाव्य है अथवा कोई बाट या माप मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप नहीं है तो वह उस व्यक्ति से जिसके पास ऐसे बाट या माप की अभिरक्षा या नियंत्रण है, सभी उचित समयों पर यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह प्रत्येक ऐसे बाट या माप को उसके समक्ष निरीक्षण के लिए पेश करे जिसका-

(i) ऐसे व्यक्ति द्वारा उपयोग किया जाता है, या ऐसे व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति से उपयोग कराया जाता है; अथवा

                (ii) जो ऐसे व्यक्ति के कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में उपयोग के लिए है; अथवा

                (iii) जिसको किसी परिसर में या उस पर, किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए उपयोग में लाए जाने के लिए रखा गया है ।

(2) निरीक्षक उपधारा (1) में निर्दिष्ट बाट या माप से संबंधित प्रत्येक दस्तावेज या अन्य अभिलेख के पेश किए जाने की भी अपेक्षा कर सकेगा तथा वह व्यक्ति जिसकी अभिरक्षा में ऐसा बाट या माप है, ऐसी अध्यपेक्षा का अनुपालन करेगा ।

(3) निरीक्षक या तो धारा 27 के अधीन या इस धारा के अधीन निरीक्षण करने पर, -

(क) किसी ऐसे बाट या माप पर से, जिसका सत्यापन शोध्य होते हुए भी उसे ऐसे सत्यापन के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया है,

(ख) किसी ऐसे बाट या माप पर से, जिसकी अन्तिम सत्यापन और स्टाम्पन के बाद मरम्मत की गई है या जिसका पुनः समायोजन किया गया है और जो ऐसी मरम्मत या पुनः समायोजन के पश्चात् मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप नहीं रहा है,

(ग) किसी ऐसे बाट या माप पर से, जिसका टूटे हुए, कटावदार या अन्यथा त्रुटिपूर्ण होने के कारण समुचित समायोजन नहीं किया जा सकता है,

(घ) उन बाटों या मापों से जो खंड (ख) या खंड (ग) में विनिर्दिष्ट हैं, भिन्न किसी ऐसे बाट या माप पर से, जो मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप नहीं है या जिन्हें अनुरूप नहीं बनाया जा सकता है;

स्टाम्प को मिटा देगा:

                परन्तु जहां निरीक्षक की यह राय हो कि ऐसे बाट या माप में त्रुटि या गलती ऐसी नहीं है कि उसके कारण स्टाम्प का तुरन्त मिटाया जाना अपेक्षित हो, वहां वह ऐसे बाट या माप के उपयोक्ता पर ऐसी सूचना की तामील करेगा जिसमें उसे बाट या माप या पाई गई त्रुटि या गलती की जानकारी दी गई हो और उससे यह मांग की गई हो कि वह उस त्रुटि या गलती को आठ दिन से अनधिक उतने समय के भीतर जितना वह विनिर्दिष्ट करे, दूर कर दे, तथा-

(i) यदि उपयोक्ता उस त्रुटि या गलती को उस अवधि के भीतर दूर करने में असफल रहता है तो वह स्टाम्प को मिटा देगा; अथवा

(ii) यदि त्रुटि या गलती को इस प्रकार दूर कर दिया जाता है कि उससे बाट या माप, मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप हो जाता है तो वह ऐसे बाट या माप को सत्यापित करेगा और उस पर अपनी स्टाम्प लगाएगा ।

                स्पष्टीकरण-किसी बाट या माप पर स्टाम्प के मिटाए जाने से निरीक्षक की ऐसे बाट या माप का इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार अभिग्रहण करने की शक्ति छिनेगी नहीं या न्यून नहीं होगी ।

29. परिसर में प्रवेश करने की निरीक्षक की शक्ति-यदि निरीक्षक के पास या तो किसी व्यक्ति द्वारा उसे दी गई और उसके द्वारा लेखबद्ध कर ली गई किसी जानकारी से या व्यक्तिगत ज्ञान से या अन्यथा यह विश्वास करने का कारण हो कि किसी ऐसे बाट, माप या अन्य माल के संबंध में जिसका तौल, नाप या संख्या से विक्रय, परिदान या वितरण किया जाता है, इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया गया है या उसके किए जाने की संभावना है तो वह सभी उचित समयों पर किसी ऐसे परिसर में प्रवेश कर सकेगा-

                (i) जहां ऐसे बाट या माप को-

(क) निर्मित, विनिर्मित, किया जाता है, उसकी मरम्मत की जाती है, या उसका विक्रय किया जाता है, अथवा

(ख) किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए उपयोग में लाया या रखा जाता है या यह विश्वास किया जाता है कि उसे उपयोग के लिए रखा गया है;

(ii) जहां ऐसे माल को विनिर्मित, पैक, वितरित किया जाता है या उसका विक्रय किया जाता है या उसे पैकेज में रखे हुए रूप में विक्रय के लिए रखा या प्रस्थापित किया जाता है,

तथा किसी बाट या माप का या तौल, नाप या संख्या से किसी पैकेज की शुद्ध अंतर्वस्तुओं का निरीक्षण या सत्यापन कर सकेगा तथा उसके संबंध में किसी दस्तावेज या अन्य अभिलेख की परीक्षा भी कर सकेगा ।

30. तलाशी लेने की शक्ति-(1) जहां नियंत्रक के पास यह विश्वास करने का कारण है कि कोई बाट या माप जो इस अधिनियम के अधीन अभिग्रहणीय है, या किसी बाट या माप के संबंध में कोई दस्तावेज या चीज, इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के लिए, उसकी राय में, उपयोगी या सुसंगत होगी, किसी स्थान में छिपाई गई है तो वह ऐसे बाट या माप, दस्तावेज या चीज के लिए तलाशी ले सकेगा या किसी ऐसे अधिकारी को, जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, तलाशी लेने और उसका अभिग्रहण करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा तथा ऐसी प्रत्येक तलाशी को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 100 और धारा 102 के उपबंध लागू होंगे ।

(2) नियंत्रक द्वारा उपधारा (1) के अधीन दिया गया प्रत्येक प्राधिकार दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 93 में निर्दिष्ट वारण्ट समझा जाएगा ।

31. किसी बाट या माप का अभिग्रहण करने की निरीक्षक की शक्ति-(1) निरीक्षक किसी ऐसे बाट या माप का जिसके संबंध में इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया जा रहा है या किया गया प्रतीत होता है अथवा जो ऐसे अपराध के किए जाने में उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित या सम्भाव्य है, अभिग्रहण और निरोध कर सकेगा तथा ऐसे बाट या माप से विक्रय या परिदत्त किए गए अथवा विक्रय या परिदत्त कराए गए किसी माल को अभिगृहित और निरुद्ध भी कर सकेगा:

परन्तु जहां इस उपधारा के अधीन अभिगृहीत कोई माल शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील है, वहां निरीक्षक ऐसे माल का ऐसी रीति से जो विहित की जाए, व्ययन कर सकेगा ।

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन कोई बाट या कोई वस्तु अभिगृहीत और निरुद्ध की गई है वहां निरीक्षक ऐसे बाट, माप या वस्तु से संबंधित कोई दस्तावेज या अन्य अभिलेख भी अभिगृहीत और निरुद्ध कर सकेगा ।

(3) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 102 के उपबंध, इस धारा के अधीन किए गए प्रत्येक अभिग्रहण को लागू होंगे ।

32. समपहरण-इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अभिगृहीत प्रत्येक मिथ्या अथवा असत्यापित बाट या माप (जो मानक अधिनियम की धारा 30 में निर्दिष्ट बाट या माप से भिन्न है) सरकार को समपहृत किए जाने के दायित्वाधीन होगा:

परन्तु ऐसा असत्यापित बाट या माप सरकार को समपहृत नहीं किया जाएगा यदि वह व्यक्ति जिससे ऐसा बाट या माप अभिगृहीत किया गया था उसे उतने समय के भीतर, जो विहित किया जाए, सत्यापित और स्टाम्पित करा लेता है ।

अध्याय 9

पैकेज में रखी वस्तुओं के राज्य के भीतर विक्रय और वितरण के बारे में उपबंध

33. पैकेज में रखी वस्तुओं से संबंधित मानक अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का राज्य के भीतर विक्रय या वितरित की गई पैकेज में रखी वस्तुओं को लागू होना-(1) मानक अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के वे उपबंध जो पैकेज में रखी वस्तुओं के संबंध में इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पहले प्रवृत्त हैं, जहां तक हो सके पैकेज में रखी ऐसी प्रत्येक वस्तु को जो राज्य में वितरित की जाती या विक्रय की जाती है या विक्रय के लिए रखी, प्रस्थापित या अभिदर्शित की जाती है, उसी प्रकार लागू होंगे, मानो पूर्वोक्त उपबन्ध इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन इस उपान्तर के अधीन रहते हुए अधिनियमित किए गए थे कि उनमें केन्द्रीय सरकार", मानक अधिनियम" और निदेशक" के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ किया जाएगा कि वे क्रमशः राज्य सरकार", इस अधिनियम" और नियंत्रक" के प्रति निर्देश हैं ।

(2) राज्य सरकार किसी ऐसी वस्तु के, जो राज्य के भीतर पैकेज में रखे हुए रूप में विक्रय की जाने या वितरित की जाने के लिए आशयित है, पैकेज में रखने को विनियमित करने के लिए अथवा पैकेज में रखी किसी वस्तु के राज्य के भीतर विक्रय या वितरण को विनियमित करने के लिए ऐसे नियम बना सकेगी जो मानक अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम से असंगत न हो ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, पैकेज में रखी वस्तु का वही अर्थ होगा जो उसका मानक अधिनियम में है तथा उसके अन्तर्गत पहले से पैक की हुई वस्तु भी होगी ।

अध्याय 10

किसी वस्तु के या तो परिमाण या संख्या द्वारा विक्रय से तथा वस्तुओं के ढेर लगाकर विक्रय से संबंधित

किसी रूढ़ि या प्रथा के बारे में उपबंध

34. अतिरिक्त परिमाणों के परिदान की अपेक्षा करने वाली रूढ़ि या प्रथा का समाप्त होना-(1) किसी भी प्रकार की कोई ऐसी रूढ़ि, प्रथा, चलन या रीति, जो किसी व्यक्ति को वस्तु, चीज या सेवा के किसी ऐसे परिमाण की जो उक्त वस्तु, चीज या सेवा के संबंध में किसी संविदा या अन्य करार में तोल या नाप द्वारा विनिर्दिष्ट परिमाण से अधिक या कम है, मांग करने या उसे प्राप्त करने या उसकी मांग कराने या उसे प्राप्त कराने के लिए अनुज्ञात करती है, शून्य होगी ।

(2) जहां संख्या द्वारा विक्रय की गई किसी वस्तु के संबंध में ऐसी वस्तु की ऐसी नियत संख्या का, जो वस्तुओं की उस संख्या से अधिक है जिसके लिए संदाय किया गया है, परिदान करने की रूढ़ि या प्रथा है वहां ऐसी रूढ़ि या प्रथा इस अधिनियम के प्रारम्भ से ही समाप्त हो जाएगी ।

35. ढेर लगाकर विक्रय-(1) जहां किसी वस्तु का ढेर लगाकर विक्रय किया जाता है वहां प्रत्येक ढेर में अंतर्विष्ट वस्तु के लगभग तोल, नाप या संख्या को विक्रेता या उसके अभिकर्ता द्वारा, यदि कोई हो, या तो मौखिक रूप में या प्रत्येक ढेर पर लगाई गई लिखित सूचना द्वारा सुस्पष्टतः घोषित किया जाएगा:

परन्तु किसी ऐसे ढेर की दशा में जहां ऐसे ढेर में की वस्तु की कुल कीमत दो रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी कोई घोषणा आवश्यक नहीं होगी ।

(2) जहां ढेर लगाकर विक्रय की गई किसी वस्तु के तोलने, नापने या गिनती करने पर पाया जाता है कि ऐसी तोल, नाप या गिनती द्वारा अवधारित तोल, नाप, संख्या विक्रेता या उसके अभिकर्ता द्वारा घोषित लगभग तोल, नाप या संख्या से कम है तथा ऐसी कमी ऐसी घोषित तोल या नाप या संख्या से पांच प्रतिशत से अधिक है तो विक्रेता के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने मिथ्या बाट या माप का प्रयोग किया है ।

अध्याय 11

अपराध और शास्तियां

36. अमानक बाटों या मापों के विनिर्माण आदि के लिए शास्ति-जो कोई-

(क) किसी बाट या माप का किन्हीं ऐसे मानकों के अनुसार, जो मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों से भिन्न है, (वहां के सिवाय जहां उसे मानक अधिनियम के अधीन ऐसा करने के लिए अनुज्ञात किया गया है) निर्माण या विनिर्माण करेगा या निर्माण या विनिर्माण कराएगा; अथवा

(ख) किसी ऐसे बाट या माप का, जो किन्हीं ऐसे मानकों के अनुसार विनिर्मित किया गया है जो मानक अधिनियम द्वारा उसके अधीन स्थापित मानकों से भिन्न है, -

(i) विक्रय करेगा या अन्यथा अन्तरण करेगा अथवा विक्रय कराएगा या अन्यथा अन्तरण कराएगा; अथवा

(ii) किराए पर देगा या दिलवाएगा;

वह [कारावास से जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।]

37. मुद्राओं के कूटकरण आदि के लिए शास्ति-(1) जो कोई-

                                (i) इस अधिनियम या मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट किसी मुद्रा का कूटकरण करेगा; या

                                (ii) किसी कूटकृत मुद्रा का विक्रय करेगा या उसका अन्यथा व्ययन करेगा; या

                                (iii) किसी कूटकृत मुद्रा को कब्जे में रखेगा; या

                (iv) किसी ऐसे स्टाम्प का, जो इस अधिनियम या मानक अधिनियम या उन अधिनियमों में से किसी के अधीन बनाए गए किसी नियम द्वारा विनिर्दिष्ट है, कूटकरण करेगा; या

                (v) किसी स्टाम्प को, चाहे वह इस अधिनियम या मानक अधिनियम या उन अधिनियमों में से किसी के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन निर्मित किया गया हो, हटाएगा या इस प्रकार निर्मित किसी स्टाम्प को बिगाड़ेगा; या

                (vi) किसी स्टाम्प को, चाहे वह इस अधिनियम या मानक अधिनियम या उन अधिनियमों में से किसी के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन बनाया गया हो, हटाएगा और इस प्रकार हटाए गए स्टाम्प को किसी अन्य बाट या माप पर चिपकाएगा या उसमें निविष्ट करेगा; या

                (vii) किसी बाट या माप में, किसी व्यक्ति को प्रवंचित करने की दृष्टि से या यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि उससे किसी व्यक्ति के प्रवंचित होने की संभावना है, वृद्धि, ह्रास या परिवर्तन करेगा,

वह [कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।]

(2) जो कोई इस अधिनियम या मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट किसी मुद्रा का विधिविरुद्ध साधनों से कब्जा अभिप्राप्त करेगा और ऐसी किसी मुद्रा का किसी बाट या माप पर यह रूपित करने की दृष्टि से कि ऐसी मुद्रा से निर्मित स्टाम्प इस अधिनियम या मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत है, कोई स्टाम्प लगाने के लिए उपयोग करेगा या उपयोग कराएगा, वह 2[कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।]

(3) जो कोई इस अधिनियम या मानक अधिनियम द्वारा या उसके अधीन विनिर्दिष्ट किसी मुद्रा का विधिपूर्ण कब्जा रखते हुए, ऐसी मुद्रा का, ऐसे प्रयोग के लिए किसी विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना उपयोग करेगा या उपयोग कराएगा, वह 2[कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।]

(4) जो कोई किसी ऐसे बाट या माप का जिसके बारे में वह यह जानता है या उसे यह विश्वास करने का कारण है कि उस पर कूटकृत स्टाम्प लगा हुआ है, विक्रय करेगा या विक्रय के लिए प्रस्थापित या अभिदर्शित करेगा या उसका अन्यथा व्ययन करेगा, वह  [कारावास से जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।]

38. अमानक बाट या माप से वस्तुओं आदि के विक्रय या परिदान के लिए शास्ति-(1) जो कोई वहां के सिवाय जहां वह मानक अधिनियम के अधीन ऐसा करने के लिए अनुज्ञात है, किसी ऐसी वाणिज्या, वस्तु या चीज का किसी ऐसे बाट, माप या संख्या से जो मानक बाट या माप से भिन्न है, विक्रय करेगा या कराएगा, परिदान करेगा या कराएगा, वह  [जुर्माने से जो पांच सौ रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।]

(2) जो कोई किसी ऐसे बाट, माप या संख्या के अनुसार जो, मानक बाट या माप से भिन्न है, कोई सेवा करेगा या कराएगा, वह 2[जुर्माने से जो पांच सौ रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।]

39. उपयोग के लिए अमानक बाटों या मापों के रखने के लिए और अन्य उल्लंघनों के लिए शास्ति-(1) जो कोई किसी ऐसे बाट या माप को, जो मानक बाट या माप से भिन्न है, किसी परिसर में ऐसी परिस्थितियों में रखेगा जिनसे यह उपदर्शित हो कि ऐसा बाट या माप-

                (क) किसी तौल या नाप के लिए, या

                (ख) किसी संव्यवहार के लिए या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए,

उपयोग में लाया जा रहा है या उपयोग में लाया जा सकता है, वह जुर्माने से जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा ।

                (2) जो कोई-

(i) तौल, माप या संख्या से किसी वस्तु या चीज का विक्रय करने में, क्रेता को उस वस्तु या चीज की कोई ऐसी मात्रा या संख्या परिदत्त करेगा या कराएगा, जो उस मात्रा या संख्या से कम है जिसके लिए संविदा की गई है और जिसके लिए संदाय किया गया है; अथवा

(ii) तौल, माप या संख्या से कोई सेवा देने में, वह सेवा उस सेवा से कम देगा जिसके लिए संविदा की गई है और जिसके लिए संदाय किया गया है; अथवा

(iii) किसी वस्तु या चीज को तौल, माप या संख्या से क्रय करने में, उस वस्तु या चीज को उस मात्रा या संख्या से जिसके लिए संविदा की गई है और जिसके लिए संदाय किया गया है, अधिक कपटपूर्वक प्राप्त करेगा या प्राप्त कराएगा; अथवा

(iv) कोई सेवा तौल, माप या संख्या से अभिप्राप्त करने में, उस सेवा को, उस सेवा से जिसके लिए संविदा की गई है और जिसके लिए संदाय किया गया है अधिक, अभिप्राप्त करेगा;

वह जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

                (3) जो कोई इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात्, कोई ऐसी संविदा या अन्य करार करेगा (जो निर्यात के लिए संविदा या अन्य करार नहीं है) जिसमें किसी तौल, माप या संख्या को किसी ऐसे मानक के रूप में अभिव्यक्त किया गया है जो मानक बाट या माप से भिन्न है, वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

40. धारा 10 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई किसी विनिर्दिष्ट प्रवर्ग के माल, सेवाओं, उपक्रमों या बाटों या मापों के उपयोक्ताओं के संबंध में, किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन के लिए या संरक्षा के लिए किसी ऐसे बाट, माप या संख्या का उपयोग करेगा, जो धारा 10 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट बाट, माप या संख्या से भिन्न है, वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

41. धारा 11 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई, वहां के सिवाय जहां वह मानक अधिनियम के अधीन ऐसा करने के लिए अनुज्ञात है, किसी ऐसे माल या चीज से संबंध में जिसका विक्रय, अन्तरण, वितरण या परिदान किया जाता है या किसी ऐसी सेवा के संबंध में जो दी जाती है, -

                (क) कोई ऐसी कीमत या प्रभार कोट करेगा या कीमत या प्रभार के बारे में कोई ऐसी घोषणा करेगा, या

                (ख) कोई ऐसी कीमत सूची, बीजक, कैशमीमो या अन्य दस्तावेज जारी करेगा या संप्रदर्शित करेगा, या

                (ग) किसी विज्ञापन, पोस्टर या अन्य दस्तावेज में किसी ऐसे बाट या माप का उल्लेख करेगा, या

                (घ) किसी लेबल, कार्टन या अन्य चीज पर किसी पैकेज की शुद्ध अन्तर्वस्तुओं की ऐसी तौल, माप या संख्या उपदर्शित करेगा, या

                (ङ) किसी संव्यवहार, औद्योगिक उत्पादन या संरक्षा के संबंध में कोई ऐसी मात्रा या आकार, अभिव्यक्त करेगा,

जो मानक बाट या माप के अनुसार से अन्यथा है, वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

42. धारा 19 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षा की जाने पर किसी ऐसी विधिमान्य अनुज्ञप्ति के धारण किए बिना, जो उसे ऐसा करने के लिए सशक्त करती है, कोई बाट या माप निर्मित करेगा, विनिर्मित करेगा, उसकी मरम्मत करेगा या उसका विक्रय करेगा, अथवा उसे मरम्मत या विक्रय के लिए प्रस्थापित, अभिदर्शित करेगा या कब्जे में रखेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा ।

43. धारा 20 के उल्लंघन के लिए शास्ति-कोई अनुज्ञप्तिधारी जो इस अधिनियम के अधीन अपने को जारी की गई या नवीकृत की गई या चालू रखी गई अनुज्ञप्ति के निलम्बन या रद्द करने के पश्चात् इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्तिधारी के रूप में कार्य करना बंद करने में लोप करेगा या बंद करने में असफल रहेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा ।

44. धारा 21 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई, वहां के सिवाय जहां उसे मानक अधिनियम के अधीन ऐसा करने के लिए अनुज्ञात किया गया है, कोई ऐसा बाट या माप निर्मित या विनिर्मित करेगा जो-

                (क) यद्यपि दृश्यतः उस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित मानकों के अनुरूप होने के लिए तात्पर्यित है, किन्तु वस्तुतः उक्त मानकों के अनुरूप नहीं है; अथवा

                (ख) जिस पर किसी ऐसे बाट या माप का उपदर्शन है जो उस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित बाट या माप के मानकों के अनुरूप नहीं है, चाहे ऐसा उपदर्शन उक्त मानकों के अनुसार बाट या माप के उपदर्शन के अतिरिक्त हो या न हो,

वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा ।

45. धारा 22 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई-

                (क) किसी ऐसे बाट या माप का, जिसे इस अधिनियम के अधीन सत्यापित और स्टाम्पित नहीं किया गया है, विक्रय करेगा या उसे विक्रय के लिए प्रस्थापित करेगा, अभिदर्शित करेगा या कब्जे में रखेगा; अथवा

                (ख) किसी ऐसे बाट या माप का जिसके इस अधिनियम के अधीन सत्यापित और स्टाम्पित किया जाना अपेक्षित होने पर, इस प्रकार सत्यापित या स्टाम्पित नहीं कराया गया है, उपयोग करेगा या उसे उपयोग के लिए रखेगा,

वह कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा:

                परन्तु खंड (ख) की कोई, बात किसी ऐसे बाट या माप के संबंध में, जिसका घरेलू प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है, लागू नहीं होगी ।

46. धारा 23 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई धारा 23 द्वारा कोई अभिलेख या रजिस्टर रखने के लिए अपेक्षा की जाने पर, ऐसा करने में लोप करेगा या असफल रहेगा अथवा निरीक्षक द्वारा कोई अभिलेख या रजिस्टर उसके निरीक्षण के लिए पेश किए जाने के लिए अपेक्षा की जाने पर ऐसा करने में लोप करेगा या असफल रहेगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा ।

47. धारा 24 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई किसी बाट या माप को सत्यापन या पुनःसत्यापन के लिए पेश करने के लिए धारा 24 द्वारा अपेक्षा की जाने पर किसी युक्तियुक्त कारण के बिना ऐसा करने में लोप करेगा या असफल रहेगा, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक का हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा ।

48. धारा 28 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई निरीक्षक या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन निरीक्षक की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत है, किसी बाट या माप या उससे संबंधित किसी दस्तावेज या अन्य अभिलेख को निरीक्षण के लिए उसके समक्ष पेश करने के लिए अपेक्षा की जाने पर किसी युक्तियुक्त कारण के बिना ऐसा करने में लोप करेगा या असफल रहेगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा ।

49. धारा 29 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई किसी बाट या माप या उससे संबंधित किसी दस्तावेज या अन्य अभिलेख अथवा किसी पैकेज में रखी वस्तु की शुद्ध अर्न्तवस्तुओं के निरीक्षण और सत्यापन के लिए या किसी अन्य विहित प्रयोजन के लिए, निरीक्षक या किसी ऐसे व्यक्ति के, जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन निरीक्षक की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत है, किसी परिसर में प्रवेश में बाधा डालेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा ।

50. धारा 30 और धारा 31 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई नियंत्रक को या किसी ऐसे अधिकारी को, जो नियंत्रक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत है, किसी परिसर की तलाशी लेने से रोकेगा अथवा किसी निरीक्षक को किसी बाट, माप, पैकेज में रखी वस्तु, माल, दस्तावेज, अभिलेख या लेबल का कोई अभिग्रहण करने से रोकेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा ।

51. धारा 33 के उल्लंघन के लिए शास्ति-(1) जो कोई किसी वस्तु को पैकेज में रखे हुए रूप में विनिर्मित करेगा, वितरित करेगा, पैक करेगा, उसका विक्रय करेगा या उसे विक्रय के लिए रखेगा या विक्रय के लिए प्रस्थापित या अभिदर्शित करेगा या विक्रय के लिए अपने कब्जे में रखेगा, वह, जब तक कि प्रत्येक ऐसा पैकेज मानक अधिनियम और धारा 33 के साथ पठित उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुरूप न हो, जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा ।

(2) जो कोई किसी वस्तु को पैकेज में रखे हुए रूप में, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि ऐसे पैकेज में अन्तर्विष्ट वस्तु तौल, माप या संख्या में, यथास्थिति, पैकेज, या उस पर के लेबल पर कथित तौल, माप या संख्या से कम है, विनिर्मित करेगा, पैक करेगा, वितरित करेगा या उसका विक्रय करेगा या विनिर्मित कराएगा, पैक कराएगा, वितरित कराएगा या उसका विक्रय कराएगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो तीन हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दण्डित   किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, यह अवधारित करने में कि क्या किसी पैकेज में अन्तर्विष्ट मात्रा उस पैकेज या उस पर के लेबल पर घोषित मात्रा से कम है, उस अधिकतम अनुज्ञेय गलती को जो मानक अधिनियम के अधीन उस वस्तु के संबंध में, जो ऐसे पैकेज में अन्तर्विष्ट है, विनिर्दिष्ट है, हिसाब में लिया जाएगा ।

52. धारा 35 के उल्लंघन के लिए शास्ति-जो कोई किसी वस्तु का धारा 35 के उपबंधों का अनुपालन किए बिना ढेरों में विक्रय करेगा, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।

53. अनुज्ञप्ति को बिगाड़ने के लिए शास्ति-जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन जारी या नवीकृत की गई किसी अनुज्ञप्ति को किसी ऐसे प्राधिकार के, जो नियंत्रक द्वारा इस निमित्त किया गया हो, अनुसार से अन्यथा परिवर्तित करेगा या अन्यथा बिगाड़ेगा, वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

54. अस्वीकृत बाटों और मापों का विक्रय या परिदान करने के लिए शास्ति-जो कोई किसी ऐसे बाट या माप का, जिसे इस अधिनियम या मानक अधिनियम या उक्त अधिनियमों में से किसी के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन सत्यापन करके अस्वीकृत कर दिया गया है, विक्रय करेगा, परिदान करेगा या व्ययन करेगा या विक्रय कराएगा, परिदान कराएगा, या व्ययन कराएगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा :

परन्तु इस धारा की कोई भी बात किसी ऐसे अस्वीकृत बाट या माप के जिसे विहित रीति से विरूपित कर दिया गया है, स्क्रैप के रूप में विक्रय को लागू नहीं होगी ।

55. पदधारियों के प्रतिरूपण के लिए शास्ति-जो कोई किसी भी रूप में नियंत्रक, अपर नियंत्रक या निरीक्षक या किसी अन्य ऐसे अधिकारी को, जो नियंत्रक द्वारा प्राधिकृत है, प्रतिरूपण करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा ।

56. मिथ्या जानकारी देने या मिथ्या अभिलेख या रजिस्टर रखने के लिए शास्ति-(1) जो कोई नियंत्रक, अपर नियंत्रक या निरीक्षक या नियंत्रक द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी को ऐसी जानकारी देगा, जिसकी वह अपने कर्तव्य के अनुक्रम में अपेक्षा या मांग करे तथा जिसके बारे में ऐसा व्यक्ति या तो जानता है या यह विश्वास करने का कारण रखता है कि वह मिथ्या है या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।

(2) जो कोई इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन ऐसा करने के लिए अपेक्षा की जाने पर, ऐसी विवरणी प्रस्तुत करेगा या कोई ऐसा अभिलेख या रजिस्टर रखेगा जो किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या है, वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

57. विधि के उल्लंघन में जानबूझकर सत्यापन या प्रकटन-(1) यदि कोई निरीक्षक या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाला कोई अन्य अधिकारी किसी बाट या माप को इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के उपबंधों के उल्लंघन में जानबूझकर सत्यापित या स्टाम्पित करेगा, तो वह ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

(2) यदि कोई निरीक्षक या अन्य ऐसा अधिकारी जो किसी परिसर में अपने कर्तव्य के अनुक्रम में प्रवेश करता है, किसी व्यक्ति पर, ऐसे कर्तव्य के पालन में के सिवाय जानबूझकर कोई ऐसी जानकारी प्रकट करेगा, जो उसने व्यापार संबंधी किसी गुप्त बात के बारे में या किसी विनिर्माण प्रक्रिया के संबंध में ऐसे परिसर से अभिप्राप्त की है, वह कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

58. तंग करने वाली तलाशी-निरीक्षक या कोई अन्य ऐसा अधिकारी जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश के अधीन शक्तियों का प्रयोग कर रहा है और जो यह जानता है कि ऐसा करने के लिए कोई युक्तियुक्त आधार नहीं है तथा फिर भी-

                (क) किसी गृह, सवारी या स्थान की तलाशी लेता है या तलाशी कराता है, या

                (ख) किसी व्यक्ति की तलाशी लेता है, या

                (ग) किसी बाट, माप या अन्य जंगम सम्पत्ति का अभिग्रहण करता है,

वह ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

59. ऐसे उल्लंघन के लिए शास्ति जिसके लिए पृथक्तः उपबंध नहीं किया गया है-जो कोई इस अधिनियम के किसी ऐसे उपबंध का उल्लंघन करेगा जिसके उल्लंघन के लिए इस अधिनियम में किसी दंड का पृथक्तः उपबंध नहीं किया गया है, वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा ।

60. कुछ मामलों में उपधारणा करना-(1) यदि कोई व्यक्ति-

                (क) किसी मिथ्या बाट या माप का निर्माण या विनिर्माण करेगा या निर्माण या विनिर्माण करवाएगा, अथवा

                (ख) किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन अथवा संरक्षा के लिए किसी मिथ्या या असत्यापित बाट या माप का प्रयोग करेगा या करवाएगा, अथवा

                (ग) किसी मिथ्या या असत्यापित बाट या माप का विक्रय, वितरण, परिदान करेगा, या अन्यथा अन्तरण करेगा या विक्रय, या वितरण, या परिदान करवाएगा या अन्यथा अन्तरण, करवाएगा ।

तो जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, यह उपधारणा की जाएगी कि उसने ऐसा इस जानकारी के साथ किया है कि वह बाट या माप, यथास्थिति, मिथ्या या असत्यापित बाट या माप था ।

                (2) यदि कोई व्यक्ति अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में कोई मिथ्या या असत्यापित बाट या माप ऐसी परिस्थितियों में रखेगा जिनसे यह उपदर्शित हो कि ऐसे बाट या माप का किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन अथवा संरक्षा के लिए प्रयोग किया जा सकता है, तो जब तक तत्प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, यह उपधारणा की जाएगी कि ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे मिथ्या या असत्यापित बाट या माप को किसी संव्यवहार में या औद्योगिक उत्पादन अथवा संरक्षा के लिए उपयोग किए जाने के आशय से कब्जे में रखा गया था, धारण किया गया था या नियंत्रण में रखा गया था ।

61. नियोजक की बाबत कब यह समझा जाएगा कि उसने किसी अपराध का दुष्प्रेरण किया है-(1) किसी ऐसे नियोजक के बारे में, जो यह जानता है या जिसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि उसके द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति ने ऐसे नियोजन के अनुक्रम में इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के किसी उपबंध का उल्लंघन किया है, यह समझा जाएगा कि उसने इस अधिनियम के विरुद्ध किसी अपराध का दुष्प्रेरण किया है:

परन्तु ऐसे किसी दुष्प्रेरण की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह किया गया है, यदि ऐसे नियोजक ने उस तारीख से जिसको, -

                (क) उसे उस उल्लंघन का पता चलता है, अथवा

                (ख) उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसा उल्लंघन किया गया है,

सात दिन के अवसान के पहले, नियंत्रक को उस व्यक्ति का नाम, जिसके द्वारा ऐसा उल्लंघन किया गया था, ऐसे उल्लंघन की तारीख और अन्य विशिष्टियां लिखित रूप में सूचित कर दी हैं ।

                (2) जिस किसी के बारे में उपधारा (1) के अधीन यह समझा जाएगा कि उसने इस अधिनियम के विरुद्ध अपराध का दुष्प्रेरण किया है, उसे कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, तथा द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, तथा जुर्माने से भी, दंडित किया जाएगा ।

                स्पष्टीकरण-उपधारा (1) के परन्तुक में विनिर्दिष्ट अवधि के अवसान के पश्चात् किसी कर्मचारी की पदच्युति या सेवा का पर्यवसान किसी नियोजक को इस उपधारा के अधीन उसके दायित्व से मुक्त नहीं करेगा ।

62. कम्पनियों द्वारा अपराध-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कम्पनी है तो प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने के भागी होंगे:

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था अथवा उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति, मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा तथा तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दंडित किए जाने का भागी होगा ।

स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

                (क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है; और

                (ख) फर्म के संबंध में निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।

63. अपराधों का संज्ञान-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, -

                 [(क) कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान निम्नलिखित द्वारा किए गए लिखित परिवाद पर ही करेगा, अन्यथा नहीं, अर्थात्: -

                                (i) नियंत्रक,

                                (ii) नियंत्रक द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी,

                                (iii) कोई व्यथित व्यक्ति, या

                                (iv) कोई मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम, चाहे व्यथित व्यक्ति ऐसे संगम का सदस्य हो या नहीं ।

स्पष्टीकरण-इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम" से कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत, कोई स्वैच्छिक उपभोक्ता संगम अभिप्रेत है ।]

64. कुछ अपराधों का संक्षिप्त विचारण-दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, धारा 36, धारा 38, धारा 39, धारा 40, धारा 41, धारा 42, धारा 45, धारा 51, धारा 52 या धारा 72 की उपधारा (3) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संक्षेपतः विचारण किया जा सकेगा ।

65. अपराधों का शमन-(1) धारा 39, धारा 40, धारा 41, धारा 42, धारा 44, धारा 45, धारा 46, धारा 47, धारा 48, धारा 51, धारा 52, धारा 54 या धारा 59 या धारा 72 की उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का या तो अभियोजन के संस्थित किए जाने के पहले या उसके पश्चात्, नियंत्रक या ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा, जिसे नियंत्रक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, राज्य सरकार के खाते में जमा की जाने के लिए ऐसी राशि के, जो नियंत्रक या ऐसा अन्य अधिकारी विनिर्दिष्ट करे, संदाय पर शमन किया जा सकेगा :

परन्तु ऐसी राशि किसी भी दशा में उस जुर्माने की, जो इस प्रकार शमन किए गए अपराध के लिए इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किया जाए, अधिकतम रकम से अधिक नहीं होगी ।

(2) उपधारा (1) की कोई भी बात ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जो उस तारीख से, जिसको उसके द्वारा किए गए प्रथम अपराध का शमन किया गया था, तीन वर्ष की अवधि के भीतर वही या समरूप अपराध करता है ।

स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए किसी द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध की बाबत, जो उस तारीख से जिसको अपराध का पहले शमन किया गया था, तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् किया गया है, यह समझा जाएगा कि वह प्रथम अपराध है ।

(3) जहां किसी अपराध का उपधारा (1) के अधीन शमन किया गया है वहां अपराधी के विरुद्ध, यथास्थिति, कोई कार्यवाही या आगे कार्यवाही इस प्रकार शमन किए गए अपराध के संबंध में नहीं की जाएगी तथा अपराधी को, यदि वह अभिरक्षा में है तो, तुरन्त उन्मोचित कर दिया जाएगा ।

(4) इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का इस धारा द्वारा उपबन्धित रूप में ही शमन किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

66. भारतीय दंड संहिता के उपबंधों का इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध को लागू होना-भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के उपबन्ध, जहां तक ऐसे उपबन्धों का संबंध बाट या माप की बाबत अपराध से है, किसी ऐसे अपराध को लागू नहीं होंगे जो इस अधिनियम के अधीन दंडनीय है ।

अध्याय 12

प्रकीर्ण

67. कारबार का अंतरण या पारेषण-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्त व्यक्ति का कारबार उत्तराधिकार, निर्वसीयत या वसीयती द्वारा पारेषित किया जाता है वहां ऐसे व्यक्ति का, यथास्थिति, वारिस या वसीयतदार ऐसे अनुज्ञप्तिधारी का कारबार स्वयं अपने नाम से या किसी अन्य नाम से तब तक नहीं चलाएगा जब तक कि वारिस या वसीयतदार ने ऐसे पारेषण की तारीख के पश्चात् साठ दिन के अवसान के पहले, नियंत्रक को इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार अनुज्ञप्ति दी जाने के लिए आवेदन न कर दिया हो :

परन्तु इस धारा की किसी भी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह वारिस या वसीयतदार को साठ दिन की पूर्वोक्त अवधि तक ऐसे अनुज्ञप्तिधारी के रूप में कारबार चलाने से प्रतिषिद्ध करती है, और यदि उसने ऐसी अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन कर दिया है तो जब तक उसे अनुज्ञप्ति अनुदत्त नहीं कर दी जाती है अथवा नियंत्रक द्वारा लिखित सूचना दी जाकर यह सूचित नहीं कर दिया जाता है कि उसे ऐसी अनुज्ञप्ति नहीं दी जा सकती है ।

(2) जहां इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्त किसी व्यक्ति का कारबार विक्रय, दान, पट्टे द्वारा या अन्यथा अन्तरित किया जाता है वहां, यथास्थिति, अन्तरिती या पट्टेदार ऐसा कारबार स्वयं अपने नाम से या किसी अन्य नाम से तब तक नहीं चलाएगा जब तक उसने ऐसा कारबार चलाने की अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त न कर ली हो ।

68. अनुज्ञप्तियों का तो विक्रेय और अन्तरणीय होना-इस अधिनियम के अधीन जारी या नवीकृत की गई अनुज्ञप्ति विक्रेय या अन्यथा अन्तरणीय नहीं होगी ।

69. अपीलें-(1) उपधारा (2) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, -

                (क) (i) किसी निरीक्षक, या

                (ii) किसी अपर नियंत्रक,

द्वारा इस अधिनियम के अध्याय 5, अध्याय 6, अध्याय 7, अध्याय 8, अध्याय 9 या अध्याय 10 के अधीन दिए गए प्रत्येक विनिश्चय या किए गए आदेश की अपील नियंत्रक को होगी; और

                (ख) इस अधिनियम के अध्याय 5, अध्याय 6, अध्याय 7, अध्याय 8, अध्याय 9 या अध्याय 10 के अधीन नियंत्रक द्वारा दिए गए प्रत्येक विनिश्चय या किए गए प्रत्येक आदेश की, जो खंड (क) के अधीन अपील में किया गया विनिश्चय नहीं है, अपील,

राज्य सरकार को या उस सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी को होगी ।

                (2) ऐसी प्रत्येक अपील उस विनिश्चय या आदेश की तारीख से, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, साठ दिन के भीतर की जाएगी:

                परन्तु यदि अपील प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी साठ दिन की उक्त अवधि के भीतर अपील करने से पर्याप्त कारण से निवारित किया गया था तो वह अपीलार्थी को साठ दिन की अतिरिक्त अवधि के भीतर अपील करने के लिए अनुज्ञा दे सकेगा ।

                (3) ऐसी किसी भी अपील की प्राप्ति पर, अपील प्राधिकारी, अपील के पक्षकारों को सुने जाने का उचित अवसर देने के पश्चात् और ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह उचित समझे, उस विनिश्चय या आदेश की, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्टि करने वाला, उसे उपान्तरित करने वाला या उलटने वाला ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे, अथवा मामले को ऐसे निदेश के साथ, जो वह उचित समझे, अतिरिक्त साक्ष्य, यदि आवश्यक हो, लेने के पश्चात् नए विनिश्चय या आदेश के लिए वापस भेज सकेगा ।

                (4) प्रत्येक अपील ऐसी फीस का संदाय करने पर, जो विहित की जाए, प्रस्तुत की जाएगी ।

                (5) राज्य सरकार स्वप्रेरणा से या अन्यथा, किसी ऐसी कार्यवाही का (जिसके अन्तर्गत अपील में कार्यवाही भी है) जिसमें कोई विनिश्चय या आदेश किया गया है, अभिलेख, ऐसे विनिश्चय या आदेश की सत्यता, वैधता या औचित्य के बारे में अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए मंगा सकेगी और उसकी परीक्षा कर सकेगी तथा उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगी जो वह ठीक समझे:

                परन्तु इस उपधारा के अधीन किसी विनिश्चय या आदेश में इस प्रकार परिवर्तन नहीं किया जाएगा कि जिससे उसका किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े, जब तक कि ऐसे व्यक्ति को प्रस्तावित कार्रवाई के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने का उचित अवसर न दे दिया गया हो ।

70. फीसों का उद्ग्रहण-राज्य सरकार धारा 72 के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा, ऐसी फीसें उद्गृहीत कर सकेगी, जो-

                (क) किसी बाट या माप के निर्माण या विनिर्माण के लिए, अनुज्ञप्ति के जारी या नवीकृत किए जाने के लिए, आवेदन के लिए पांच सौ रुपए से अधिक न हों;

                (ख) किसी बाट या माप की मरम्मत या विक्रय करने की अनुज्ञप्ति के जारी किए जाने के लिए एक सौ रुपए से अधिन न हों;

                (ग) किसी अनुज्ञप्ति के परिवर्तन के लिए, पचास रुपए से अधिक न हों;

                (घ) किसी बाट या माप के सत्यापन के लिए, उस समय और श्रम को ध्यान में रखते हुए जो ऐसा सत्यापन करने में अन्तर्वलित हो, किसी श्रेणीकृत मान के आधार पर पांच हजार रुपए से अधिक न हों ;

                (ङ) किसी बाट या माप के समायोजन के लिए दस रुपए से अधिक न हों;

                (च) अनुज्ञप्ति की दूसरी प्रति या सत्यापन प्रमाणपत्र के जारी किए जाने के लिए, दस रुपए से अधिक न हों;

                (छ) किसी ऐसे दस्तावेज की प्रतियां दी जाने के लिए, जो गोपनीय प्रकृति की दस्तावेज नहीं है, प्रत्येक सौ या उससे कम शब्दों के लिए, एक रुपए से अधिक न हों;

                (ज) इस अधिनियम के अधीन की गई किसी अपील के लिए, पचास रुपए से अधिक न हों;

                (झ) धारा 17 के अधीन रजिस्ट्रीकरण या रजिस्ट्रीकरण के नवीकरण के लिए आवेदन के लिए पांच रुपए से अधिक न हों ।

71. शक्तियों का प्रत्यायोजन-(1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश कर सकेगी कि इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य किसी शक्ति का, जो ऐसी शक्ति नहीं है जो (अपील से संबंधित)     धारा 69 या (फीसमान अधिकथित करने की शक्ति वाली) धारा 70 या (नियम बनाने की शक्ति वाली) धारा 72 द्वारा प्रदत्त है, ऐसे मामलों के संबंध में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विनिर्दिष्ट की जाएं, अपने अधीनस्थ ऐसे अधिकारी द्वारा भी, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रयोग किया जा सकेगा ।

(2) राज्य सरकार द्वारा अधिरोपित किसी साधारण या विशेष निदेश या शर्त के अधीन रहते हुए, कोई ऐसा व्यक्ति जो राज्य सरकार द्वारा किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत है, उन शक्तियों का प्रयोग उसी रीति से और उसी विस्तार तक कर सकेगा मानो वे उस व्यक्ति को इस अधिनियम द्वारा सीधे ही प्रदान की गई हैं, न कि प्रत्यायोजन के रूप में ।  

72. नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, और केन्द्रीय सरकार से परामर्श करने के पश्चात्, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों और उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्: -

                (क) उन मालों, सेवाओं, उपक्रमों या उपयोक्ताओं का वह वर्ग, जिनके संबंध में कोई संव्यवहार, व्यवहार या संविदा नहीं जाएगी या कोई औद्योगिक उत्पादन आरंभ नहीं किया जाएगा या संरक्षा के लिए कोई उपयोग नहीं किया जाएगा और ऐसा उस तौल, माप या संख्या के हिसाब से ही, जैसा धारा 10 द्वारा अपेक्षित है, किया जाएगा, अन्यथा नहीं;

                (ख) वे स्थान जिनमें और वह अभिरक्षा जिसमें निम्नलिखित मानक रखे जाएंगे, अर्थात्: -

                                (i) निर्देश मानक,

                                (ii) द्वितीयक मानक,

                                (iii) कार्यकारी मानक,

जैसा कि धारा 12 और धारा 14 की उपधारा (5) द्वारा अपेक्षित है;

                (ग) धारा 15 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्ररूप और बाट या माप की पहचान के लिए विशिष्टियों के ब्यौरे;

                (घ) वह समय जिसके भीतर धारा 17 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट आवेदन किया जाएगा और वे विशिष्टियां जो ऐसे आवेदन में होंगी तथा वह प्ररूप और रीति जिसमें ऐसा आवेदन किया जाएगा;

                (ङ) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 17 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट रजिस्टर रखा जाएगा;

                (च) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 17 की उपधारा (3) के अधीन आवेदन किया जाएगा;

                (छ) वह प्ररूप जिसमें किसी बाट या माप के निर्माता, विनिर्माता, मरम्मतकर्ता या व्यवहारी के रूप में कारबार चलाने के लिए अनुज्ञप्ति दी जाने या उसका नवीकरण किए जाने के लिए आवेदन किया जाएगा, जैसा कि धारा 19 की उपधारा (4) द्वारा अपेक्षित है;

(छ) वह प्ररूप जिसमें और वे शर्तें, परिसीमाएं और निर्बन्धन जिनके अधीन रहते हुए कोई अनुज्ञप्ति जारी की जा सकेगी और ऐसी अनुज्ञप्ति की विधिमान्यता की अवधि, जैसा कि धारा 19 की उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित है;

(झ) वह राशि जो किसी मरम्मतकर्ता द्वारा प्रतिभूति के रूप में दी जाएगी, जैसा कि धारा 19 की उपधारा (7) द्वारा अपेक्षित है;

(ञ) उस बाट या माप का विवरण जिसका किसी उपयोक्ता द्वारा नियंत्रक की लिखित अनुज्ञा से ही विक्रय किया जा सकेगा, अन्यथा नहीं जैसा कि धारा 19 की उपधारा (8) द्वारा अपेक्षित है;

(ट) अनुज्ञप्ति के रद्दकरण के पश्चात्, बाटों या मापों के व्ययन की रीति तथा उनके आगमों का वितरण, जैसा कि धारा 20 की उपधारा (5) द्वारा अपेक्षित है;

(ठ) बाटों या मापों से संबंधित वे अभिलेख और रजिस्टर जो धारा 23 की उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसरण में रखे जाएंगे;

(ड) वह अवधि जिसके भीतर बाटों या मापों का सत्यापन या पुनः सत्यापन किया जाएगा, जैसा कि धारा 24 की उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित है;

(ढ) किसी ऐसे बाट या माप का, जिसे उसके अवस्थान से हटाया नहीं जा सकता या हटाया नहीं जाना चाहिए, सत्यापन करने के लिए किए जाने वाले उपाय, जैसा कि धारा 24 की उपधारा (3) के परन्तुक द्वारा अपेक्षित है;

(ण) वह प्ररूप जिसमें किसी बाट या माप के सत्यापन का प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जैसा कि धारा 24 की उपधारा (4) द्वारा अपेक्षित है तथा वह प्ररूप जिसमें कि धारा 24 की उपधारा (5) में निर्दिष्ट प्रमाणपत्र, दिया जाएगा तथा वे ब्यौरे जो ऐसे प्रमाणपत्र में हो सकेंगे, जैसा कि धारा 24की उपधारा 6 द्वारा अपेक्षित है;

(त) ऐसी अभिगृहीत वस्तुओं के व्ययन की रीति, जो शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील हैं, जैसा कि धारा 31 की उपधारा (1) के परन्तुक द्वारा अपेक्षित हैं;

(थ) वह समय जिसके भीतर, इस अधिनियम के अधीन अभिगृहीत किसी असत्यापित बाट या माप को, धारा 32 के परन्तुक के अधीन, सत्यापित और स्टाम्पित किए जाने के लिए अनुज्ञात किया जा सकेगा;

(द) वह रीति जिसमें और वे शर्तें, निर्बन्धन और परिसीमाएं जिनके अधीन रहते हुए: -

(i) राज्य के भीतर विक्रय या वितरित की जाने के लिए आशयित किसी वस्तु को पैकेज में रखा जाएगा, या

                (ii) पैकेज में रखे हुए रूप में किसी वस्तु का राज्य के भीतर विक्रय या वितरण किया जाएगा,

जैसा कि धारा 33 की उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित है;

() अस्वीकृत बाटों या मापों पर स्टाम्पों के मिटाने की रीति, जैसा कि धारा 54 के परन्तुक द्वारा अपेक्षित है;

() वह प्ररूप जिसमें धारा 69 के अधीन अपीलें प्रस्तुत की जा सकेंगी तथा अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया;

() उन फीसों की रकम, जो धारा 70 में विनिर्दिष्ट विषयों में से प्रत्येक के लिए उद्गृहीत और संगृहीत की जा सकेंगी;

() कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना है या विहित किया जाए

                (3) इस धारा के अधीन कोई नियम बनाने में, राज्य सरकार यह उपबन्ध कर सकेगी कि उसका भंग जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा

                (4) इस धारा के अधीन नियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अधीन होगी कि नियम राजपत्र में पूर्व प्रकाशन के पश्चात् बनाए जाएंगे

                (5) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान-मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जहां दो सदन हैं और जहां राज्य विधान-मंडल का एक सदन है, वहां उस सदन के समक्ष रखा जाएगा

73. मानक अधिनियम के माडलों के अनुमोदन से संबंधित उपबंधों को बाटों या मापों के उन माडलों पर, जो राज्य के भीतर अनन्यतः प्रयुक्त किए जाने के लिए आशयित हैं, लागू करने की राज्य सरकार की शक्ति-(1) जहां किसी अनुज्ञप्त विनिर्माता द्वारा विनिर्मित बाट या माप की कोई किस्म ऐसी है कि उसके द्वारा राज्य के भीतर विनिर्मित उस किस्म के सभी बाट या माप राज्य के भीतर ही विक्रय, वितरित या परिदत्त किए जाने के लिए आशयित हैं, वहां राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि बाट या माप की प्रत्येक ऐसी किस्म का माडल मानक अधिनियम की धारा 36, धारा 37 और धारा 38 के उपबंधों के अनुसार अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा, तथा तदुपरि, उक्त धारा 36, धारा 37 और धारा 38 के उपबंध ऐसे माडल को लागू हो जाएंगे, तथा उन धाराओं में केन्द्रीय सरकार के प्रति और मानक अधिनियम के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे क्रमशः राज्य सरकार और इस अधिनियम के प्रति निर्देश हैं

(2) जहां राज्य सरकार बाट या माप की किसी किस्म के संबंध में उपधारा (1) के अधीन कोई निदेश देती है वहां मानक अधिनियम की धारा 39, धारा 40 या धारा 41 के बाट या माप की उस किस्म के संबंध में उपबंधों का कोई उल्लंघन, इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध होगा तथा मानक अधिनियम में उसके लिए उपबंधित दण्ड को इस अधिनियम में उसके लिए उपबंधित दण्ड समझा जाएगा मानो दंडों से संबंधित उक्त उपबंध इस अधिनियम द्वारा अधिनियमित किए गए थे

74. अधिनियम का कुछ मामलों को लागू होना-इस अधिनियम के उपबंध, जहां तक कि वे बाटों और मापों के सत्यापन और स्टाम्पन से संबंधित हैं, किसी ऐसे बाट या माप को लागू नहीं होंगे, जो-

                () किसी ऐसे कारखाने में प्रयुक्त किए जाते हैं जो अनन्यतः संघ के सशस्त्र बलों के प्रयोग के लिए किन्हीं आयुधों या गोला-बारूद या दोनों के विनिर्माण में लगा हुआ है;

                () वैज्ञानिक अन्वेषण के लिए या अनुसंधान के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं;

                () अनन्यतः निर्यात के लिए विनिर्मित किए जाते हैं

75. निरसन और व्यावृत्ति-(1) किसी राज्य में इस अधिनियम के किसी उपबंध के प्रारम्भ पर, उस राज्य में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि का तत्स्थानी उपबंध निरसित हो जाएगा, और ऐसे निरसन पर साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6 के उपबंध उसी प्रकार लागू होंगे मानो इस प्रकार निरसित उपबंध किसी केन्द्रीय अधिनियम के उपबंध थे

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, ऐसी विधि के अधीन की गई कोई नियुक्ति, जारी की गई अधिसूचना, जारी किया गया नियम, किया गया आदेश, किया गया रजिस्ट्रीकरण, जारी की गई अनुज्ञप्ति, दिया गया प्रमाणपत्र, दी गई सूचना, किया गया विनिश्चय, दिया गया अनुमोदन, प्राधिकार या दी गई सम्मति, यदि वह इस अधिनियम के प्रारम्भ पर प्रवृत्त है तो उसी प्रकार प्रवृत्त बनी रहेगी तथा इस प्रकार प्रभावी होगी मानो वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई, जारी की गई या दी गई हो

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