गन्ना अधिनियम, 1934
(1934 का अधिनियम संख्यांक 15)
[1 मई, 1934]
चीनी के कारखानों में उपयोग के लिए आशयित गन्ने के
मूल्य को विनियमित करने के लिए
अधिनियम
यतः गन्ना उत्पादकों को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए उस मूल्य को विनियमित करना समीचीन है, जिस पर वह गन्ना, जो चीनी के विनिर्माण में काम में लाए जाने के लिए आशयित है, गन्ना कारखानों द्वारा या उनके लिए खरीदा जाए;
अतः एतद्द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है :-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम गन्ना अधिनियम, 1934 है ।
[(2) इसका विस्तार [उन राज्यक्षेत्रों को छोड़कर, जो 1 नवम्बर, 1956 से ठीक पूर्व भाग ख राज्यों में समाविष्ट थे,] सम्पूर्ण भारत पर होगा ।]
(3) यह धारा तत्काल प्रवृत्त हो जाएगी, इस अधिनियम की शेष धाराएं किसी राज्य [या उसके भाग] में ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगी जिसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियत करे ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरुद्ध न हो,-
(1) नियंत्रित क्षेत्र" से धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन निकाली गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्र अभिप्रेत है;
(2) कारखाने" से (उसकी प्रसीमाओं सहित) कोई परिसर अभिप्रेत है, जिसमें पूर्ववर्ती बारह मास के किसी दिन को बीस या इससे अधिक कर्मकार काम कर रहे हैं या काम कर रहे थे और जिसके किसी भाग में विद्युत शक्ति की सहायता से चीनी के उत्पादन से संबंधित विनिर्माण प्रक्रिया चलाई जाने वाली है, या मामूली तौर पर चलाई जाती है; और
(3) चीनी" से चीनी का ऐसा कोई रूप अभिप्रेत है, जिसमें नब्बे प्रतिशत इक्षु-शर्करा है ।
3. नियंत्रित क्षेत्रों की घोषणा और मूल्यों का नियत किया जाना-(1) राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्रों को नियंत्रित क्षेत्र घोषित कर सकेगी ।
(2) *** राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी नियंत्रित क्षेत्र के किसी कारखाने में उपयोग के लिए आशयित गन्ने के क्रय के लिए न्यूनतम मूल्य या न्यूनतम मूल्यों को नियत कर सकेगी ।
(3) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी नियंत्रित क्षेत्र में गन्ना उत्पादक से या स्थानीय सरकार द्वारा क्रय अभिकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए अनुज्ञप्त व्यक्ति से अन्यथा उस गन्ने के, जो किसी कारखाने में उपयोग के लिए आशयित है, क्रय को प्रतिषिद्ध कर सकेगी ।
4. धारा 3 के अधीन अधिसूचनाओं का पूर्व प्रकाशन-धारा 3 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी अधिसूचना के निकाले जाने से अन्यून तीस दिन पूर्व राज्य सरकार राजपत्र में और ऐसी रीति से (यदि कोई हो) जैसी वह उचित समझती है, ऐसी तारीख, जिसको या जिसके पश्चात् प्रारूप पर विचार किया जाएगा, विनिर्दिष्ट करके प्रस्थापित अधिसूचना का प्रारूप प्रकाशित करेगी और किसी व्यक्ति से उस प्रारूप के बारे में जो आक्षेप या सुझाव इस प्रकार विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व प्राप्त हो उस पर विचार करेगी ।
5. धारा 3 के अधीन अधिसूचना के उल्लंघन में गन्ने का क्रय करने के लिए शास्ति-जो कोई व्यक्ति किसी नियंत्रित क्षेत्र में किसी गन्ने का, जो किसी कारखाने में उपयोग के लिए आशयित है, क्रय धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन अधिसूचना द्वारा उसके लिए नियत न्यूनतम मूल्य से कम मूल्य पर या धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन किए गए किसी प्रतिषेध के उल्लंघन में करेगा, वह जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
6. इस अधिनियम के अधीन अभियोजन के लिए मंजूरी-कोई न्यायालय, जिला मजिस्ट्रेट के आदेश द्वारा या प्राधिकार के अधीन किए गए परिवाद पर के सिवाय, धारा 5 के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान नहीं लेगा ।
7. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति-(1) राज्य सरकार इस अधिनियम के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित विषयों के बारे में उपबन्ध कर सकेंगे :-
(क) धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग के लिए प्रारम्भिक जांच करने;
(ख) इस अधिनियम के प्रशासन से संबद्ध किसी प्रयोजन के लिए सलाहकार समितियां स्थापित करने और ऐसी समितियों की शक्तियों, कृत्यों और प्रक्रिया को परिभाषित करने;
(ग) क्रय अभिकर्ताओं को अनुज्ञप्तियां देने, ऐसी अनुज्ञप्तियों के लिए फीसें, और ऐसे अभिकर्ताओं द्वारा और उन्हें किए जाने वाले गन्ने के क्रय और विक्रय का विनियमन करने;
(घ) कारखानों को गन्ने का विक्रय करने के लिए गन्ना उत्पादकों का संगठन सोसाइटियों के रूप में करने;
(ङ) उन प्राधिकारियों के बारे में, जिनके द्वारा इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन किन्हीं कृत्यों का पालन किया जाना है;
(च) उन अभिलेखों, रजिस्टरों और लेखाओं के बारे में, जिन्हें इस अधिनियम के उपबन्धों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए रखा जाना है ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के खण्ड (ग) या (च) के अधीन किसी नियम को बनाते समय राज्य सरकार यह उपबन्ध कर सकेगी कि जहां इस अधिनियम द्वारा कोई अन्य शास्ति उपबन्धित नहीं की गई है, वहां नियम का कोई भंग, दो हजार रुपए से अनधिक जुर्माने से, दण्डनीय होगा ।
8. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति- [(1)] राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा पूर्व प्रकाशन के पश्चात् इस अधिनियम के उपबन्धों से कारखानों या कारखानों के किसी वर्ग को छूट देने के लिए नियम बना सकेगी ।
[(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, राज्य-विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा ।]
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