हैदराबाद का स्टेट बैंक अधिनियम, 1956
(1956 का अधिनियम संख्यांक 79)
[22 दिसम्बर, 1956]
हैदराबाद स्टेट बैंक की शेयर-पूंजी भारतीय रिजर्व बैंक को
अन्तरित करने तथा उसके उचित प्रबंध के लिए
तथा उससे सम्बद्ध या आनुषंगिक
अन्य मामलों का उपबन्ध
करने के लिए
अधिनियम
यतः राज्यों के पुनर्गठन की दृष्टि से हैदराबाद स्टेट बैंक के सम्बन्ध में हैदराबाद की राज्य सरकार के कृत्यों को एक ही एकल प्राधिकारी को न्यागमित करना समीचीन है् ;
और यतः भारतीय रिजर्व बैंक के अभिकर्ता के रूप में हैदराबाद स्टेट बैंक द्वारा बैंककारी तथा खजाने सम्बन्धी कृत्यों का और अधिक दक्षतापूर्वक पालन करना सुनिश्चित करने के लिए और सहायकियों के अनुदान द्वारा या अन्यथा जनता को बड़े पैमाने पर बैंककारी सुविधाएं प्रदान करने के निमित्त हैदराबाद स्टेट बैंक की सहायतार्थ भारतीय रिजर्व बैंक को समर्थ बनाने के लिए, हैदराबाद स्टेट बैंक की शेयर-पूंजी भारतीय रिजर्व बैंक को अन्तरित करने के लिए तथा उसके उचित प्रबंध और उससे सम्बद्ध या आनुषंगिक अन्य मामलों के लिए उपबंध करना समीचीन और आवश्यक है ;
अतः भारत गणराज्य के सातवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :--
अभ्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हैदराबाद का स्टेट बैंक अधिनियम, 1956 है ।
(2) यह 22 अक्तूबर, 1956 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “नियत दिन" से 22 अक्तूबर, 1956 अभिप्रेत है ;
(ख) “हैदराबाद बैंक" से हैदराबाद स्टेट बैंक अभिप्रेत है, जो धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन हैदराबाद का स्टेट बैंक के रूप में पुनः नामित किया गया है ;
(ग) “हैदराबाद स्टेट बैंक" से हैदराबाद स्टेट बैंक अधिनियम, 1350 एफ. (1350 का एफ० 19) के अधीन गठित और निगमित हैदराबाद स्टेट बैंक अभिप्रेत है ;
(घ) “विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(ङ) “रिजर्व बैंक" से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक अभिप्रेत है;
[(च) “स्टेट बैंक" से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक अभिप्रेत है ।]
अध्याय 2
हैदराबाद स्टेट बैंक का पुनः नामकरण और उसकी शेयर-पूंजी का रिजर्व बैंक को अन्तरण
3. हैदराबाद स्टेट बैंक के नाम का परिवर्तन-(1) हैदराबाद स्टेट बैंक अधिनियम, 1350 एफ. (1350 का एफ० 19) द्वारा गठित निगमित निकाय, जो हैदराबाद स्टेट बैंक के नाम से ज्ञात है, नियत दिन से ही हैदराबाद का स्टेट बैंक के रूप में पुनः नामित हो जाएगा *** ।
[(2) उक्त निगमित निकाय स्टेट बैंक से, तथा हैदराबाद बैंक के, तत्मसय, अन्य शेयर धारकों से, यदि कोई हों, मिल कर बनेगा ।
(2क) हैदराबाद बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) के उपबन्धों के अनुसार बैंककारी का तथा अन्य कारबार करेगा और उसे अपने कारबार के प्रयोजनों के लिए जंगम अथवा स्थावर सम्पत्ति के अर्जन और धारण करने की और उसका व्ययन करने की शक्ति होगी ।]
(3) उपधारा (1) द्वारा हैदराबाद स्टेट बैंक के नाम के परिवर्तन से उस बैंक के अधिकारों या दायित्वों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और न ही उसके द्वारा या उसके विरुद्ध की गई विधिक कार्यवाहियां त्रुटियुक्त हो जाएंगी ; और कोई ऐसी विधिक कार्यवाहियां, जो हैदराबाद स्टेट बैंक के पूर्ववर्ती नाम से उसके द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी गई अथवा प्रारम्भ की गई हों, उसके नए नाम में उसके द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी ।
4. हैदराबाद बैंक का प्रधान कार्यालय और उसकी शाखाएं-(1) जब तक कि केन्द्रीय सरकार ने, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अन्यथा निदेश न दिया हो, हैदराबाद बैंक का प्रधान कार्यालय हैदराबाद में होगा ।
(2) हैदराबाद बैंक, हैदराबाद स्टेट बैंक की नियत दिन से ठीक पूर्व विद्यमान प्रत्येक शाखा और अभिकरण को चालू रखेगा [और स्टेट बैंक के परामर्श के बिना और रिजर्व बैंक के अनुमोदन के सिवाय कोई भी शाखा न तो बंद करेगा और न ही कोई नई शाखा स्थापित करेगा ।ट
5. हैदराबाद स्टेट बैंक की शेयर-पूंजी का रिजर्व बैंक को अन्तरण-हैदराबाद स्टेट बैंक की पूंजी में के सभी शेयर, नियत दिन को, रिजर्व बैंक को, सभी न्यासों, दायित्वों और विल्लंगमों से मुक्त हो कर, अन्तरित हो जाएंगे और उसमें निहित होंगे ।
6. हैदराबाद स्टेट बैंक के शेयरधारक को प्रतिकर-(1) रिजर्व बैंक, हैदराबाद की राज्य सरकार को और ऐसे प्रत्येक अन्य व्यक्ति को, जो नियत दिन से ठीक पूर्व हैदराबाद स्टेट बैंक में शेयरों के धारक के रूप में रजिस्ट्रीकृत है, धारा 5 के अधीन रिजर्व बैंक को ऐसे शेयरों के अन्तरण के लिए प्रतिकर के रूप में वह रकम अदा करेगा जो एक सौ उस्मानिया सिक्का रुपयों के अंकित मूल्य के प्रत्येक शेयर के लिए भारतीय करेंसी में चौरानवे रुपए चार आने छह पाई की दर से संगणित की जाएगी ।
(2) हैदराबाद स्टेट बैंक की पूंजी में शेयरों का रिजर्व बैंक को अन्तरण होते हुए भी, कोई भी शेयरधारक, जो नियत दिन से ठीक पूर्व हैदराबाद स्टेट बैंक के अपने द्वारा धृत शेयरों पर लाभांश पाने का हकदार था, किसी ऐसे वर्ष के लिए, जो नियत दिन से पूर्व समाप्त हुआ था, अपने उन शेयरों की बाबत, जो असंदत्त रह गए हैं, हैदराबाद बैंक से वे सभी लाभांश पाने का हकदार होगा जो हैदराबाद स्टेट बैंक ने घोषित किए हों ।
(3) हैदराबाद स्टेट बैंक अधिनियम, 1350 एफ० (1350 एफ० का 19) में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा कोई शेयरधारक, हैदराबाद स्टेट बैंक में अपने द्वारा धृत शेयरों पर, नियत दिन से पूर्व की किसी भी अवधि की बाबत, जिसके लिए बैंक ने लाभांश घोषित न किए हों, कोई भी लाभांश पाने का साधिकार हकदार नहीं होगा :
परन्तु केन्द्रीय सरकार, किसी ऐसी अवधि की बाबत लाभांश का संदाय ऐसी दर से प्राधिकृत कर सकेगी जिसे वह विनिर्दिष्ट करे, यदि उसका समाधान हो गया हो कि धारा 28 में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए ऐसे उपबंधों और अंशदानों के किए जाने के पश्चात् जिन्हें रिजर्व बैंक आवश्यक समझे, लाभ का पर्याप्त अतिशेष उपलब्ध है ।
(4) उपधारा (1) की कोई भी बात हैदराबाद स्टेट बैंक में किसी शेयर के धारक और किसी अन्य ऐसे व्यक्ति के बीच, जिसका उस शेयर में कोई हित हो, पारस्परिक अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी और ऐसा अन्य व्यक्ति ऐसे शेयर के धारक को दिए जाने वाले प्रतिकर के विरुद्ध, न कि रिजर्व बैंक के विरुद्ध, अपने हित को प्रवर्तित करने का हकदार होगा ।
7. हैदराबाद स्टेट बैंक के कतिपय अधिकारियों द्वारा अपने पद का रिक्त किया जाना-(1) नियत दिन से ठीक पूर्व हैदराबाद स्टेट बैंक में निदेशक (जिसके अन्तर्गत अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक भी हैं) या प्रबंध निदेशक के रूप में पदासीन प्रत्येक व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने नियत दिन को वह पद रिक्त कर दिया है और इस अधिनियम अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या किसी करार या संविदा में किसी बात के होते हुए भी, ऐसा व्यक्ति पदहानि के लिए अथवा उसके नियोजन से सम्बन्धित किसी करार या संविदा के असामयिक पर्यवसान के लिए ऐसी पेंशन, प्रतिकर या अन्य प्रसुविधा के सिवाय किसी भी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा जिसे हैदराबाद बैंक, रिजर्व बैंक के पूर्वानुमोदन से, उसे इस बात का ध्यान रखते हुए प्रदान करे कि यदि यह अधिनियम न पारित किया गया होता और यदि उसका नियोजन सामान्य अनुक्रम में नियत दिन को समाप्त हो गया होता तो उसे क्या मिलता ।
(2) उपधारा (1) की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह हैदराबाद बैंक को, रिजर्व बैंक की लिखित पूर्व अनुज्ञा से, हैदराबाद स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक या उप प्रबंध निदेशक को ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर फिर से नियुक्त करने या फिर से नियोजित करने से निवारित करती है जिन पर उसके और हैदराबाद बैंक के बीच सहमति हो जाए और जिनका अनुमोदन रिजर्व बैंक करे दे ।
8. विद्यमान अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में विशेष उपबन्ध-(1) किसी विधि या सेवा की संविदा या अन्य विलेख में किसी बात के होते हुए भी, 19 दिसम्बर, 1954 के पश्चात् और नियत दिन से पूर्व हैदराबाद स्टेट बैंक द्वारा की गई या दी गई कोई भी नियुक्ति, प्रोन्नति, वेतनवृद्धि, पेंशन या भत्ता या कोई अन्य प्रसुविधा, जो सामान्यतः नहीं की गई होती या नहीं दी गई होती या जो हैदराबाद स्टेट बैंक के नियमों या प्राधिकरणों या 19 दिसम्बर, 1954 से पूर्व प्रवृत्त भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि संबंधी नियमों या प्राधिकरणों के अधीन सामान्यतः अनुज्ञेय नहीं होती, जब तक कि रिजर्व बैंक ने, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यथास्थिति, उस नियुक्ति, प्रोन्नति या वेतनवृद्धि की पुष्टि न कर दी हो या, उस पेंशन, भत्ते या अन्य प्रसुविधा के दिए जाने का निदेश न दे दिया हो, प्रभावी नहीं होगी और न ही हैदराबाद बैंक से, अथवा किसी भविष्य निधि, पेंशन या अन्य निधि से या ऐसी किसी निधि का प्रशासन करने वाले किसी प्राधिकारी से संदेय या दावे-योग्य होगी ।
(2) जहां किस हैदराबाद स्टेट बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी ने, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी नियुक्ति, प्रोन्नति, वेतनवृद्धि के या ऐसी किसी पेंशन, भत्ते या अन्य प्रसुविधा के दिए जाने के कारण नियत दिन से पूर्व या उसके पश्चात् कोई ऐसी रकम प्राप्त की है जो उस उपधारा द्वारा उसे प्रदत्त शक्तियों के अनुसरण में रिजर्व बैंक द्वारा पुष्ट या मंजूर नहीं की गई है वहां, ऐसा अधिकारी या कर्मचारी उस रकम को हैदराबाद बैंक को वापस कर देने के लिए आबद्ध होगा और उस बैंक को ऐसे सभी उपाय करने का हक होगा जो उस रकम की वसूली के लिए आवश्यक हों ।
(3) जहां कि हैदराबाद स्टेट बैंक के किसी प्रबंध निदेशक, उप प्रबंध निदेशक या अन्य कर्मचारी को 19 दिसम्बर, 1954 के पश्चात् और नियत दिन से पू्र्व प्रतिकर या उपदान के रूप में कोई रकम दी गई है वहां इस प्रकार दी गई रकम की वापसी का दावा करने का हैदराबाद बैंक को हक होगा यदि उस संदाय को रिजर्व बैंक ने, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, पुष्ट न किया हो ।
(4) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, हैदराबाद स्टेट बैंक का पुनः नामकरण या उसकी शेयर-पूंजी का रिजर्व बैंक को कोई अन्तरण उस बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को ऐसे प्रतिकर के लिए हकदार नहीं बनाएगा जिसके लिए वह ऐसी विधि के अधीन हकदार हो, और ऐसा कोई भी दावा किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा ।
अध्याय 3
हैदराबाद बैंक की पूंजी
[9. प्राधिकृत पूंजी-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, हैदराबाद बैंक की प्राधिकृत पूंजी पांच अरब रुपए होगी ।
(2) हैदराबाद बैंक की प्राधिकृत पूंजी, एक-एक सौ रुपए के या ऐसे अंकित मूल्य के, जो हैदराबाद बैंक, स्टेट बैंक के अनुमोदन से, विनिश्चित करे, शेयरों में विभाजित होगी ।
(3) हैदराबाद बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 63 के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार, ऐसे अंकित मूल्य के, जो हैदराबाद बैंक, स्टेट बैंक के अनुमोदन से, विनिश्चित करे, समतुल्य मूल्य के शेयर प्रमाणपत्र जारी कर सकेगा और हैदराबाद बैंक का प्रत्येक शेयरधारक ऐसे अंकित मूल्य के समतुल्य मूल्य के शेयर प्रमाणपत्र प्राप्त करने का हकदार होगा ।
(4) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, स्टेट बैंक, [रिजर्व बैंक से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन सेट हैदराबाद बैंक को अपनी प्राधिकृत पूंजी बढ़ाने या घटाने के लिए प्राधिकृत कर सकेगाट ।
10. निर्गमित पूंजी-(1) हैदराबाद बैंक की निर्गमित पूंजी उस तारीख को, जिसको भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) द्वारा इस अधिनियम में किए गए संशोधन प्रभावी होते हैं, उतनी रकम की होगी जितनी स्टेट बैंक, रिजर्व बैंक के अनमोदन से, इस निमित्त नियत करे और वह रकम इस प्रकार नियत की जाएगी कि वह एक-एक सौ रुपए के पूर्णतः समादत्त शेयरों में ही हो ।
[(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, हैदराबाद बैंक की पुरोधृत पूंजी ऐसी रकम के रूप में होगी, जो स्टेट बैंक [रिजर्व बैंक से परामर्श करके और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन सेट नियत करे और धारा 9 की उपधारा (2) के अनुसार ऐसे अंकित मूल्य के पूर्णतः समादत्त शेयरों में विभाजित होगी ।ट
(2) हैदराबाद बैंक की निर्गमित पूंजी में सभी शेयर उस दिन स्टेट बैंक में निहित हो जाएंगे ।
(3) हैदराबाद बैंक, समय-समय पर, 4[रिजर्व बैंक से परामर्श करके, स्टेट बैंक और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन सेट भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 63 के अधीन बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार अपनी पुरोधृत पूंजी को, चाहे 4[लोक निर्गमन या अधिकारवान निर्गमन द्वाराट या अधिमानी आबंटन या निजी स्थापन द्वारा साधारण शेयर या अधिमानी शेयर जारी करके बढ़ा सकेगा ।
(3क) हैदराबाद बैंक की पुरोधृत पूंजी साधारण शेयरों या साधारण और अधिमानी शेयरों में होगी :
परन्तु अधिमानी शेयरों का जारी किया जाना, रिजर्व बैंक द्वारा अधिमानी शेयरों के वर्ग, ऐसे अधिमानी शेयरों के (चाहे शाश्वत हो या अमोचनीय या मोचनीय) प्रत्येक वर्ग के जारी शेयरों की सीमा और उन निबन्धनों और शर्तों को विनिर्दिष्ट करते हुए, जिनके अधीन प्रत्येक वर्ग के अधिमानी शेयर जारी किए जा सकेंगे, बनाए गए मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार होगा ।
(3ख) हैदराबाद बैंक [रिजर्व बैंक से परामर्श करके, स्टेट बैंक और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन सेट, समय-समय पर, विद्यमान साधारण शेयरधारकों को बोनस शेयर जारी करके अपनी पुरोधृत पूंजी को ऐसी रीति से बढ़ा सकेगा, जो स्टेट बैंक 1[रिजर्व बैंक से परामर्श करके, और केन्द्रीय सरकार के अनुमोदन से] निदेशित करे ।
(3ग) हैदराबाद बैंक की पुरोधृत पूंजी में कोई वृद्धि या कमी ऐसी रीति में नहीं की जाएगी कि स्टेट बैंक किसी भी समय हैदराबाद बैंक के साधारण शेयरों वाली पुरोधृत पूंजी के इक्यावन प्रतिशत से कम धारण करे ।
(3घ) हैदराबाद बैंक पुरोधृत पूंजी में वृद्धि के संबंध में जारी किए गए शेयरों के संबंध में किस्तों में धन स्वीकार कर सकेगा, उसके लिए मांग कर सकेगा और असमादत्त शेयरों का समपहरण कर सकेगा और भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 63 के अधीन बानाए गए विनियमों द्वारा यथा विनिर्दिष्ट रीति में उन्हें पुनः जारी कर सकेगा ।ट
(4) स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) के अधीन अधिकरण द्वारा प्रतिकर की रकम के अवधारण, यदि कोई हो, के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र यह विचार करेगा कि हैदराबाद बैंक के आरक्षित धन से, या को, अन्तरण द्वारा समायोजन करके, या किसी अन्य रीति से, उपधारा (1) के अधीन नियत की गई हैदराबाद बैंक की निर्गमित पूंजी में कोई वृद्धि या कमी करना आवश्यक, समीचीन या उपयुक्त है या नहीं और उसके पश्चात्, रिजर्व बैंक के अनुमोदन से, हैदराबाद बैंक को अपनी निर्गमित पूंजी को बढ़ाने या कम करने का निदेश दे सकेगा ।
अध्याय 4
हैदराबाद बैंक का प्रबन्ध
11-23. भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 64 और अनुसूची 3 द्वारा (1-10-1959 से) निरसित ।
अध्याय 5
हैदराबाद बैंक द्वारा किया जाने वाला कारबार
24-26. भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 64 और अनुसूची 3 द्वारा (1-10-1959 से) निरसित ।
अध्याय 6
आरक्षित निधि लेखा और लेखापरीक्षा
[27. आरक्षित निधि-(1) हैदराबाद बैंक की आरक्षित निधि, धारा 10 की उपधारा (4) के और इस धारा की उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए,--
(क) उस दिन को, जिसको भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) द्वारा इस अधिनियम में किए गए संशोधन प्रभावी होते हैं, उतनी धनराशि होगी जितनी स्टेट बैंक, रिजर्व बैंक के अनुमोदन से, अवधारित करे, और
(ख) उस दिन के पश्चात् पूर्वोक्त धनराशि और ऐसी अन्य धनराशियों का योग होगी जो हैदराबाद बैंक द्वारा अपने वार्षिक शुद्ध लाभ में से रिजर्व निधि को, लाभांश घोषित करने से पूर्व, अन्तरित की जाए ।
(2) स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) के अधीन, अधिकरण द्वारा प्रतिकर की रकम के अवधारण, यदि कोई हो, के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र यह विचार करेगा कि किसी खाते से, या को, अन्तरण द्वारा समायोजन के रूप में या डूबे हुए तथा शंकास्पद ऋणों के लिए, या आस्तियों में अवक्षय या आकस्मिकता व्यय के लिए उपबंध करके या किसी अन्य प्रयोजन के लिए, हैदराबाद बैंक की आरक्षित निधि में वृद्धि या कमी करना आवश्यक है या नहीं और उसके पश्चात् रिजर्व बैंक के अनुमोदन से, हैदराबाद बैंक को अपनी आरक्षित निधि बढ़ाने या कम करने का निदेश दे सकेगा ।ट
28-31. भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 64 और अनुसूची 3 द्वारा (1-10-1959 से) निरसित ।
अध्याय 7
प्रकीर्ण
32-40. भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 64 और अनुसूची 3 द्वारा (1-10-1959 से) निरसित ।
41. नियम बनाने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, रिजर्व बैंक के परामर्श से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इन नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध किया जा सकेगा,--
(क) इस अधिनियम के अधीन प्रतिकर की रीति तथा उसके संदाय की प्रक्रिया, जिसके अन्तर्गत वे अपेक्षाएं भी हैं जिनके अधीन रहते हुए ऐसा संदाय किया जाएगा ;
(ख) उन व्यक्तियों का अवधारण जिन्हें उक्त प्रतिकर सभी मामलों में संदेय होगा, जिसके अन्तर्गत वे मामले भी हैं, जहां शेयर एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा धारित किए गए हों या जहां वे नियत दिन से पूर्व अन्तरित कर दिए गए हों किन्तु वह अन्तरण रजिस्ट्रीकृत न हुआ हो या जहां शेयरधारक की मृत्यु हो गई हो ;
(ग) वे परिस्थितियां, जिनमें किसी शेयरधारक की मार्फत, या उससे व्युत्पन्न अधिकार के अधीन दावा करने वाले व्यक्तियों से उक्त प्रतिकर के संदेय के लिए दावे ग्रहण किए जा सकेंगे ;
(घ) किसी शेयरधारक द्वारा, जिसके शेयर प्रमाणपत्र खो गए हैं, नष्ट हो गए हैं, विकृत हो गए हैं, या चोरी हो गए हैं, उक्त प्रतिकर की प्राप्ति से पूर्व अनुपालित की जाने वाली अपेक्षाएं ;
(ङ) अपेक्षाएं, जिनके अधीन रहते हुए उक्त प्रतिकर के संदाय के सम्बन्ध में इत्तिला दी जा सकती है या इत्तिला देने से इन्कार किया जा सकता है और वे शर्तें जिनके अधीन रहते हुए ऐसी इत्तिला दी जा सकती है ।
[(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह ऐसी कुल तीस दिन की अवधि के लिए सत्र में हो, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकती है, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं, या दोनों सदन इस बात से सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो ऐसा नियम, यथास्थिति, तत्पश्चात् केवल ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, तथापि, उस नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से पहले उसके अधीन की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।]
42-43. भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 64 और अनुसूची 3 द्वारा (1-10-1959 से) निरसित ।
44. अन्य विधियों में हैदराबाद स्टेट बैंक के प्रति निर्देश-नियत दिन से ही, (इस अधिनियम से भिन्न) किसी विधि या किसी संविदा या अन्य लिखत में हैदराबाद स्टेट बैंक के प्रति निर्देश का, केन्द्रीय सरकार द्वारा किए गए किसी साधारण या विशेष आदेश में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह हैदराबाद बैंक के प्रति निर्देश दे ।
45-46. भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 64 और अनुसूची 3 द्वारा (1-10-1959 से) निरसित ।
पहली अनुसूची-[विश्वस्तता और गोपनीयता की घोषणा]-भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 64 और अनुसूची 3 द्वारा (1-10-1959 से) निरसित ।
दूसरी अनुसूची-[संशोधन] भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) की धारा 64 और अनुसूची 3 द्वारा (1-10-1959 से) निरसित ।
______

