कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985
(1986 का अधिनियम संख्यांक 2)
[8 जनवरी, 1986]
कुछ कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के विकास और निर्यात के
संवर्धन के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना का
और उससे सम्बन्धित विषयों का उपबंध
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के छत्तीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985 है ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
2. परिभाषाएं-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) प्राधिकरण" से धारा 4 के अधीन स्थापित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अभिप्रेत है ;
(ख) अध्यक्ष" से प्राधिकरण का अध्यक्ष अभिप्रेत है ;
(ग) निर्यात" से भूमि, समुद्र या वायुमार्ग द्वारा भारत से बाहर ले जाना अभिप्रेत है ;
(घ) निर्यातकर्ता" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो धारा 12 के अधीन, अनुसूचित उत्पादों के निर्यातकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकृत है ;
(ङ) सदस्य" से प्राधिकरण का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष भी है ;
(च) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(छ) [यथास्थिति, अनुसूचित उत्पादों या विशेष उत्पादों] के सम्बन्ध में, प्रसंस्करण" के अन्तर्गत ऐसे उत्पादों के परिरक्षण की प्रक्रिया, जैसे डिब्बों में भरना, ठण्डा करना, सुखाना, नमक लगाना, धूमन करना, छीलना या टुकड़े करना तथा प्रसंस्करण का कोई अन्य ऐसा ढंग है जो प्राधिकरण, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ;
(ज) विनियम" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ;
(झ) अनुसूचित उत्पाद" से 1[पहली अनुसूची] में सम्मिलित कृषि या प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों में से कोई उत्पाद अभिप्रेत है ;
[(ञ) विशेष उत्पाद" से दूसरी अनुसूची में सम्मिलित कृषि या प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों में से कोई उत्पाद अभिप्रेत है ।]
[3. अनुसूची का संशोधन करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उद्देश्यों का ध्यान में रखते हुए और यदि वह ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझती है तो राजपत्र में अधिसूचना द्वारा पहली अनुसूची या दूसरी अनुसूची में कोई कृषि या प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, यथास्थिति, जोड़ सकेगी या उसका उसमें से लोप कर सकेगी और, यथास्थिति, ऐसे जोड़े जाने या लोप किए जाने पर ऐसा उत्पाद, यथास्थिति, अनुसूचित उत्पाद या विशेष उत्पाद हो जाएगा या नहीं रहेगा ।] ।
अध्याय 2
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण
4. प्राधिकरण की स्थापना और उसका गठन-(1) ऐसी तारीख से, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त नियत करे, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक प्राधिकरण स्थापित किया जाएगा जिसका नाम कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण होगा ।
(2) प्राधिकरण पूर्वोक्त नाम का शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला निगमित निकाय होगा जिसे जंगम और स्थावर दोनों प्रकार की सम्पत्ति का अर्जन, धारण और व्ययन करने की तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वह वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।
(3) प्राधिकरण का प्रधान कार्यालय दिल्ली में होगा और प्राधिकरण केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, भारत में या भारत के बाहर अन्य स्थानों पर कार्यालय या अभिकरण स्थापित कर सकेगा ।
(4) प्राधिकरण निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-
(क) अध्यक्ष, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ;
(ख) भारत सरकार का कृषि विपणन सलाहकार, पदेन ;
(ग) एक सदस्य, जो योजना आयोग का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा ;
(घ) संसद् के तीन सदस्य, जिनमें से दो लोक सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे और एक राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किया जाएगा ;
(ङ) आठ सदस्य, जो क्रमशः निम्नलिखित से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे :-
(i) कृषि और ग्रामीण विकास ;
(ii) वाणिज्य ;
(iii) वित्त ;
(iv) उद्योग ;
(v) खाद्य ;
(vi) नागरिक पूर्ति ;
(vii) नागर विमानन ;
(viii) नौवहन और परिवहन ;
(च) पांच सदस्य, जो राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए वर्णक्रमानुसार चक्रानुक्रम से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे :
परन्तु इस खंड के अधीन कोई नियुक्ति, यथास्थिति, सम्बन्धित राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार की सिफारिश पर की जाएगी ;
(छ) सात सदस्य, जो निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे :-
(i) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् ;
(ii) राष्ट्रीय उद्यान-कृषि बोर्ड ;
(iii) राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन परिसंघ ;
(iv) केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्थान ;
(v) भारतीय पैकेजिंग संस्थान ;
(vi) मसाला निर्यात संवर्धन परिषद् ; और
(vii) काजू निर्यात संवर्धन परिषद् ;
(ज) बारह सदस्य, जो निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे, अर्थात् :-
(i) फल और वनस्पति उत्पाद उद्योग ;
(ii) मांस कुक्कुट-पालन और डेरी उत्पाद उद्योग ;
[(iii) अन्य अनुसूचित उत्पाद या विशेष उत्पाद उद्योग ;]
(iv) पैकेजिंग उद्योग ;
परन्तु उपखंड (i) से (iii) तक में विनिर्दिष्ट उद्योगों के समूहों में से किसी का या उपखंड (iv) में विनिर्दिष्ट उद्योग का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त सदस्यों की संख्या किसी भी दशा में दो से कम नहीं होगी,
(झ) दो सदस्य, जो कृषि अर्थशास्त्र और अनुसूचित उत्पादों के विपणन के क्षेत्र में विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों में से केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे ।
(5) उपधारा (4) के खंड (ख) में निर्दिष्ट सदस्य से भिन्न सदस्यों की, पदावधि और ऐसे सदस्यों में होने वाली रिक्तियों को भरने की रीति तथा सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी, जो विहित की जाए ।
(6) जब केन्द्रीय सरकार के किसी ऐसे अधिकारी को, जो प्राधिकरण का सदस्य नहीं है, उस सरकार द्वारा इस निमित्त प्रतिनियुक्त किया जाता है तब उसे प्राधिकरण के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।
(7) प्राधिकरण का या धारा 9 के अधीन उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाही केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि-
(क) प्राधिकरण या ऐसी समिति में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ; या
(ख) प्राधिकरण या ऐसी समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है ; या
(ग) प्राधिकरण या ऐसी समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जिसका मामले के गुणागुण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।
(8) प्राधिकरण ऐसे समयों और स्थानों पर अधिवेशन करेगा और अपने अधिवेशनों में कारबार के संव्यवहार के (जिसके अन्तर्गत उसके अधिवेशनों में गणपूर्ति भी है) सम्बन्ध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा जो विनियमों द्वारा उपबंधित किए जाएंगे ।
5. अध्यक्ष का वेतन और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें और सदस्यों के भत्ते-(1) अध्यक्ष ऐसे वेतन और भत्तों का हकदार होगा तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, नियत की जाएं ।
(2) प्राधिकरण के अन्य सदस्य ऐसे भत्ते प्राप्त करेंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत किए जाएं ।
(3) पदेन सदस्य से भिन्न कोई सदस्य केन्द्रीय सरकार को लिखित सूचना देकर अपना पद त्याग सकेगा और ऐसे त्यागपत्र के स्वीकार कर लिए जाने पर उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अपना पद रिक्त कर दिया है ।
6. अध्यक्ष का मुख्य कार्यपालक होना-अध्यक्ष, प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक होगा और ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं ।
7. प्राधिकरण का सचिव और अन्य कर्मचारिवृन्द-(1) केन्द्रीय सरकार प्राधिकरण के लिए एक सचिव नियुक्त करेगी जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो विहित किए जाएं या अध्यक्ष द्वारा उसे प्रत्यायोजित किए जाएं ।
(2) सचिव ऐसे वेतन और भत्तों का हकदार होगा तथा छुट्टी, पेंशन, भविष्य निधि और अन्य विषयों की बाबत सेवा की ऐसी शर्तों के अधीन होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, समय-समय पर, नियत की जाएं ।
(3) प्राधिकरण ऐसे नियंत्रण और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए जो विहित किए जाएं, ऐसे अन्य अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त कर सकेगा जो उसके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों, और प्राधिकरण के ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का ढंग, वेतनमान और भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होंगी जो प्राधिकरण द्वारा, विनियमों द्वारा, उपबंधित की जाएं ।
(4) प्राधिकरण का अध्यक्ष, सचिव और अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा के बिना इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों से असंबद्ध किसी कार्य को अपने हाथ में नहीं लेंगे ।
8. प्राधिकरण को कर्मचारियों का अंतरण करने के लिए विशेष उपबंध-(1) प्राधिकरण की स्थापना पर, केन्द्रीय सरकार के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह आदेश द्वारा और ऐसी तारीख या तारीखों से जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को, जो ऐसी तारीख के, जिसको प्राधिकरण स्थापित किया जाता है, ठीक पूर्व प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात संवर्धन परिषद् में (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् परिषद् कहा गया है) उस रूप में पद धारण कर रहा था, प्राधिकरण को स्थानान्तरित कर दे :
परन्तु प्राधिकरण में उस पद का, जिस पर ऐसे अधिकारी या अन्य कर्मचारी का अंतरण किया जाता है, वेतनमान उस पद के वेतनमान से कम नहीं होगा जिसे वह ऐसे अंतरण के ठीक पूर्व धारण कर रहा था, और उस पद की, जिस पर उसका अंतरण किया जाता है, सेवा के अन्य निबन्धन और शर्तें (जिनके अंतर्गत पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा प्रसुविधाएं हैं) ऐसे अंतरण के ठीक पूर्व उसके द्वारा धारित पद से संबंधित सेवा के निबन्धनों और शर्तों से कम अनुकूल नहीं होंगी ।
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश इस प्रकार किया जा सकेगा कि उसका ऐसी तारीख से जो इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से पूर्वतर न हो, भूतलक्षी प्रभाव हो ।
(3) उपधारा (1) के अधीन किसी आदेश के जारी किए जाने के पूर्व, परिषद् के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, और इतने समय के भीतर जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, यह विकल्प दिया जाएगा कि वे यह बताएं कि वे प्राधिकरण के कर्मचारी बनने के लिए रजामन्द हैं या नहीं और एक बार विकल्प का प्रयोग करने पर वह अंतिम होगा :
परन्तु उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश, परिषद् के ऐसे किसी अधिकारी या कर्मचारी के सम्बन्ध में जारी नहीं किया जाएगा जिसने इस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्राधिकरण का कर्मचारी न बनने के अपने आशय की सूचना दे दी है :
परन्तु यह और कि परिषद् के ऐसे अधिकारियों और कर्मचारीयों के साथ, जो इस निमित्त विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्राधिकरण के कर्मचारी बनने का अपना आशय प्रकट नहीं करते हैं, उसी रीति से और उन्हीं विधियों और स्थायी आदेशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी जो परिषद् के अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या में कमी की जाने की दशा में परिषद् के कर्मचारियों को इस अधिनियम के प्रारंभ के ठीक पूर्व लागू हुए होते ।
(4) उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश द्वारा अंतरित कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी, अंतरण की तारीख से ही परिषद् का कर्मचारी नहीं रहेगा और ऐसे पदाभिधान से प्राधिकरण का अधिकारी या कर्मचारी बन जाएगा जो प्राधिकरण अवधारित करे और उपधारा (1) के परन्तुक के उपबंधों के अधीन रहते हुए, पारिश्रमिक और सेवा की अन्य शर्तों के (जिनके अन्तर्गत पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा प्रसुविधाएं भी हैं) संबंध में इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा शासित होगा और तब तक प्राधिकरण का अधिकारी या अन्य कर्मचारी बना रहेगा जब तक उसका नियोजन प्राधिकरण द्वारा सम्यक् रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता है :
परन्तु जब तक प्राधिकरण के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तों को शासित करने वाले ऊपर निर्दिष्ट विनियम प्राधिकरण द्वारा नहीं बनाए जाते हैं तब तक परिषद् के अधिकारियों और कर्मचारियों को लागू होने वाली सुसंगत विधियां और स्थायी आदेश उनको लागू बने रहेंगे ।
(5) यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या किसी विषय के बारे में, जिसके अंतर्गत पारिश्रमिक, पेंशन, छुट्टी, भविष्य निधि और चिकित्सा प्रसुविधाएं भी हैं, प्राधिकरण द्वारा बनाए गए विनियमों में विहित सेवा के निबन्धन और शर्तें, किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के प्राधिकरण में उसके अंतरण के ठीक पूर्व उसके द्वारा धारित पद से संलग्न निबन्धनों और शर्तों से कम अनुकूल हैं तो इस विषय में केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।
9. प्राधिकरण की समितियां-(1) प्राधिकरण ऐसी समितियां नियुक्त कर सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के दक्ष निर्वहन और कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों ।
(2) प्राधिकरण को यह शक्ति होगी कि वह ऐसे अन्य व्यक्तियों को, जो प्राधिकरण के सदस्य नहीं हैं, उतनी संख्या में, जितनी वह ठीक समझे, उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किसी समिति के सदस्यों के रूप में सहयोजित करें और इस प्रकार सहयोजित व्यक्तियों को समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने और उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने का अधिकार होगा किन्तु मत देने का अधिकार नहीं होगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन किसी समिति के सदस्यों के रूप में सहयोजित व्यक्ति, समिति के अधिवेशनों में उपस्थित होने के लिए ऐसे भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा नियत किए जाएं ।
10. प्राधिकरण के कृत्य-(1) प्राधिकरण का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसे उपायों द्वारा, जो वह ठीक समझे, केन्द्रीय सरकार के नियन्त्रण के अधीन, अनुसूचित उत्पादों के निर्यात के विकास और संवर्धन का जिम्मा ले ।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उसमें निर्दिष्ट उपायों द्वारा निम्नलिखित के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा, अर्थात्-
(क) सर्वेक्षण और साध्यता सम्बन्धी अध्ययन करने के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करके या अन्यथा, संयुक्त प्रोद्यमों के माध्यम से साधारण पूंजी में भाग लेकर और अन्य अनुतोषों और सहायकी स्कीमों के रूप में निर्यात के लिए अनुसूचित उत्पादों से सम्बन्धित उद्योगों का विकास ;
(ख) व्यक्तियों का अनुसूचित उत्पादों के निर्यातकर्ताओं के रूप में ऐसी फीस का जो विहित की जाए, संदाय किए जाने पर रजिस्ट्रीकरण ;
(ग) निर्यात के प्रयोजनों के लिए अनुसूचित उत्पादों के मानक और विनिर्देश स्थिर करना ;
(घ) मांस और मांस उत्पादों का किसी वधशाला प्रसंस्करण संयंत्र, भण्डारकरण परिसर, प्रवहण या ऐसे अन्य स्थानों में जहां ऐसे उत्पाद रखे जाते हैं या उनकी देखभाल की जाती है, ऐसे उत्पादों की क्वालिटी सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए निरीक्षण करना ;
(ङ) अनुसूचित उत्पादों के पैकेजिंग में सुधार करना ;
(च) अनुसूचित उत्पादों के भारत से बाहर विपणन में सुधार करना ;
(छ) अनुसूचित उत्पादों के निर्यातोन्मुखी उत्पादन का संवर्धन और उसका विकास ;
(ज) अनुसूचित उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन या निर्यात में लगे हुए कारखानों या स्थापनों के स्वामियों या ऐसे अन्य व्यक्तियों से, जो विहित किए जाएं, अनुसूचित उत्पादों से सम्बन्धित किसी विषय पर आंकड़ों का संग्रहण और इस प्रकार संगृहीत आंकड़ों या उनके किन्हीं भागों का या उनसे उद्धरणों का प्रकाशन ;
(झ) अनुसूचित उत्पादों से सम्बन्धित उद्योगों के विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण ;
(ञ) ऐसे अन्य विषय जो विहित किए जाएं ।
[10क. विशेष उत्पादों, आदि के संबंध में कृत्य-तत्समय प्रवृत्त किसी विधि पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्राधिकरण का यह कर्तव्य होगा कि वह भारत में या भारत के बाहर विशेष उत्पादों की बाबत बौद्धिक संपदा अधिकारों के रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण के लिए ऐसे उपाय करे जो केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित किए जाएं ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजन के लिए बौद्धिक संपदा" से अमूर्त संपत्ति अर्थात् तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन व्यापार चिह्नों, डिजाइनों, पेटेंटों, भौगोलिक उपदर्शनों या किसी ऐसी ही अन्य अमूर्त संपत्ति पर कोई अधिकार अभिप्रेत है ।]
11. प्राधिकरण का अधिक्रमण करने की शक्ति-(1) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय हो कि प्राधिकरण उस कर्तव्य का, जो उस पर इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अधिरोपित किया गया है, पालन करने में असमर्थ है या उसके पालन में उसने लगातार व्यतिक्रम किया है अथवा अपनी शक्तियों का अतिक्रमण या दुरुपयोग किया है अथवा वह जानबूझकर या पर्याप्त कारण के बिना, धारा 20 के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए किसी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहा है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, प्राधिकरण का ऐसी अवधि के लिए जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अधिक्रमण कर सकेगी :
परन्तु इस उपधारा के अधीन अधिसूचना जारी करने के पहले, केन्द्रीय सरकार प्राधिकरण को इस बात का हेतुक दर्शित करने के लिए कि उसका अधिक्रमण क्यों न किया जाए, युक्तियुक्त समय देगी तथा प्राधिकरण के स्पष्टीकरण और आक्षेपों पर, यदि कोई हों, विचार करेगी ।
(2) प्राधिकरण का अधिक्रमण करने वाली उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना के प्रकाशन पर,-
(क) प्राधिकरण के सभी सदस्य, इस बात के होते हुए भी कि उनकी पदावधि समाप्त नहीं हुई है, अधिक्रमण की तारीख से, ऐसे सदस्यों के रूप में अपने पद रिक्त कर देंगे ;
(ख) ऐसी सभी शक्तियों और कर्तव्यों का, जिनका इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन, प्राधिकरण द्वारा या उसकी ओर से प्रयोग या पालन किया जा सकता है, अधिक्रमण की अवधि के दौरान ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा प्रयोग और पालन किया जा सकेगा, जिसे या जिन्हें केन्द्रीय सरकार निदेश दे ;
(ग) प्राधिकरण में निहित सब सम्पत्ति, अधिक्रमण की अवधि के दौरान, केन्द्रीय सरकार में निहित होगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अधिक्रमण की अवधि के अवसान पर, केन्द्रीय सरकार-
(क) अधिक्रमण की अवधि का ऐसी अतिरिक्त अवधि के लिए, जिसे वह आवश्यक समझे, विस्तार कर सकेगी ; या
(ख) प्राधिकरण का, धारा 4 में उपबंधित रीति से पुनर्गठन कर सकेगी ।
अध्याय 3
रजिस्ट्रीकरण
12. निर्यातकर्ताओं का रजिस्ट्रीकरण-(1) अनुसूचित उत्पादों में से किसी एक या अधिक उत्पादों का निर्यात करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, उस तारीख से, जिसको वह ऐसा निर्यात करता है, एक मास के अवसान के पूर्व या इस धारा के प्रवृत्त होने की तारीख से तीन मास की समाप्ति के पूर्व, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, अनुसूचित उत्पाद या अनुसूचित उत्पादों के निर्यातकर्ता के रूप में अपने रजिस्ट्रीकरण के लिए प्राधिकरण को आवेदन करेगा :
परन्तु प्राधिकरण, रजिस्ट्रीकरण के लिए समय-सीमा को पर्याप्त कारण से उतनी अवधि के लिए बढ़ा सकेगा जितनी वह ठीक समझे ।
(2) एक बार किया गया रजिस्ट्रीकरण तब तक प्रवृत्त बना रहेगा जब तक वह प्राधिकरण द्वारा रद्द नहीं कर दिया जाता है ।
13. रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन, उसका रद्दकरण, उसके लिए संदेय फीस और उससे संबंधित अन्य विषय-धारा 12 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए और ऐसे रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के लिए आवेदन का प्ररूप, ऐसे आवेदनों पर संदेय फीस, ऐसे आवेदनों में सम्मिलित की जाने वाली विशिष्टियां, रजिस्ट्रीकरण करने और उसे रद्द करने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और प्राधिकरण द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टर ऐसे होंगे जो विहित किए जाएं ।
14. निर्यातकर्ताओं द्वारा विवरणियों का दिया जाना-(1) धारा 12 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक निर्यातकर्ता विहित समय पर और विहित रीति से प्राधिकरण को ऐसी विवरणियां देगा जो विहित की जाएं ।
(2) प्राधिकरण, इस धारा के अधीन दी गई किसी विवरणी की शुद्धता को सत्यापित करने के लिए किसी प्रसंस्करण संयंत्र या निर्यातकर्ता के किसी अन्य स्थापन का किसी भी समय निरीक्षण करने के लिए किसी सदस्य या अपने अधिकारियों में से किसी को प्राधिकृत कर सकेगा ।
अध्याय 4
वित्त, लेखा और लेखा परीक्षा
15. केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुदान या उधार-केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात्, प्राधिकरण को ऐसी धनराशियों का अनुदानों या उधारों के रूप में संदाय कर सकेगी जो केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने के लिए, ठीक समझे ।
16. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास निधि का गठन-कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास निधि के नाम से एक निधि बनाई जाएगी और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे :-
(क) ऐसी धनराशियां जो केन्द्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा सम्यक् विनियोग किए जाने के पश्चात्, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात उपकर अधिनियम, 1985 (1986 का 3) की धारा 4 के अधीन जमा किए गए उपकर के संग्रहण के व्यय और वापस की गई रकम की, यदि कोई हो, कटौती करने के पश्चात् उसमें दे ;
(ख) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रजिस्ट्रीकरण और अन्य विषयों की बाबत उद्गृहीत और संगृहीत सभी फीसें ;
(ग) धारा 15 के अधीन इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा दिए गए कोई अनुदान या उधार ; और
(घ) कोई अनुदान या उधार जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी राज्य सरकार, स्वयंसेवी संगठन या अन्य संस्था द्वारा दिए जाएं :
परन्तु निधि में ऐसा कोई अनुदान, उधार या संदान केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से ही जमा किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
(2) निधि का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाएगा, अर्थात् :-
(क) धारा 10 में निर्दिष्ट उपायों की लागत को चुकाना ;
(ख) प्राधिकरण के, यथास्थिति, सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक को चुकाना ;
(ग) प्राधिकरण के अन्य प्रशासनिक खर्चों और इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन प्राधिकृत अन्य खर्चों को चुकाना ; और
(घ) किसी उधार का प्रतिसंदाय करना ।
17. उधार लेने की प्राधिकरण की शक्तियां-ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाए जाएं, प्राधिकरण को, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास निधि या किसी अन्य आस्ति की प्रतिभूति पर उधार लेने की शक्ति होगी ।
18. लेखा और लेखा परीक्षा-(1) प्राधिकरण उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और लेखाओं का एक वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा जो केन्द्रीय सरकार भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से परामर्श करके विहित करे ।
(2) प्राधिकरण के लेखाओं की लेखा परीक्षा, भारत के नियन्त्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर की जाएगी जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं और ऐसी लेखा परीक्षा के सम्बन्ध में उपगत कोई व्यय प्राधिकरण द्वारा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संदेय होगा ।
(3) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को और प्राधिकरण के लेखाओं की लेखापरीक्षा के सम्बन्ध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी लेखा परीक्षा के सम्बन्ध में वे अधिकार और विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को सरकारी लेखाओं की लेखा परीक्षा के सम्बन्ध में साधारणतया होते हैं और विशिष्टतया उसे बहियों, लेखाओं, सम्बद्ध वाउचरों तथा अन्य दस्तावेज और कागज-पत्रों के पेश किए जाने की मांग करने और प्राधिकरण के कार्यालयों में से किसी भी कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा ।
(4) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित प्राधिकरण के लेखा और उनकी लेखा परीक्षा की रिपोर्ट, केन्द्रीय सरकार को प्रतिवर्ष भेजी जाएगी और वह सरकार उन्हें संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगी ।
अध्याय 5
केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रण
19. अनुसूचित उत्पादों के आयात और निर्यात को प्रतिषिद्ध या नियंत्रित करने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, अनुसूचित उत्पादों के आयात या निर्यात को या तो साधारणतया या विनिर्दिष्ट वर्गों के मामलों में प्रतिषिद्ध, या अन्यथा नियंत्रित करने का उपबन्ध कर सकेगी ।
(2) ऐसे सभी अनुसूचित उत्पाद, जिनको उपधारा (1) के अधीन किया गया कोई आदेश लागू होता है, ऐसे माल समझे जाएंगे जिनका निर्यात सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 के अधीन प्रतिषिद्ध किया गया है और उस अधिनियम के सभी उपबन्ध तदनुसार प्रभावी होंगे ।
(3) यदि कोई व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करेगा तो वह, ऐसे किसी अधिहरण या शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जिसके लिए वह उपधारा (2) द्वारा यथा लागू सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) के उपबंधों के अधीन दायी हो, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
20. केन्द्रीय सरकार द्वारा निदेश-प्राधिकरण ऐसे निदेशों का पालन करेगा जो उसे इस अधिनियम के दक्ष प्रशासन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर दिए जाएं ।
21. विवरणियां और रिपोर्टें-(1) प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार को ऐसे समय पर और ऐसे प्ररूप में, तथा ऐसी रीति से, जो विहित की जाए या जो केन्द्रीय सरकार निर्दिष्ट करे, ऐसी विवरणियां और कथन तथा अनुसूचित उत्पादों के निर्यात के संवर्धन और विकास के लिए किसी प्रस्थापित या विद्यमान कार्यक्रम की बाबत ऐसी विशिष्टियां देगा, जिनकी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर अपेक्षा करे ।
(2) उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्राधिकरण प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् यथाशीघ्र, केन्द्रीय सरकार को ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख के पूर्व, जो विहित की जाए, रिपोर्ट देगा जिसमें पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों, नीति और कार्यक्रमों का सही और पूरा विवरण दिया जाएगा ।
(3) उपधारा (2) के अधीन प्राप्त रिपोर्ट की प्रति, उसके प्राप्त होने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।
अध्याय 6
प्रकीर्ण
22. मिथ्या विवरणियां देने के लिए शास्ति-कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन किसी विवरणी के दिए जाने की अपेक्षा किए जाने पर ऐसी विवरणी देने में असफल रहेगा या ऐसी विवरणी देगा जिसमें ऐसी कोई विशिष्टि है जो मिथ्या है और जिसके बारे में वह जानता है कि वह मिथ्या है या विश्वास नहीं करता है कि वह सत्य है, जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
23. प्राधिकरण के किसी सदस्य या अधिकारी को अपने कर्तव्य के निर्वहन में बाधा पहुंचाने तथा बहियों और अभिलेख पेश करने में असफल रहने के लिए शास्तियां-कोई व्यक्ति-
(क) जो अध्यक्ष द्वारा लिखित रूप में प्राधिकृत किसी सदस्य को अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा या प्राधिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत प्राधिकरण के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी को इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन उसको प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में या उस पर अधिरोपित किसी कर्तव्य के निर्वहन में बाधा पहुंचाएगा ; या
(ख) जो किसी लेखा-बही या अन्य अभिलेख को जो उसके नियंत्रण या अभिरक्षा में है, इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन ऐसी बही या अभिलेख को पेश करने की अपेक्षा किए जाने पर पेश करने में असफल रहेगा,
वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा ।
24. अन्य शास्तियां-जो कोई इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का, उन उपबन्धों को छोड़कर जिनके उल्लंघन के लिए दंड का उपबंध धारा 19, धारा 22 और धारा 23 में किया गया है, उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयत्न करेगा या उल्लंघन का दुष्प्रेरण करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा और चालू रहने वाले उल्लंघन की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम उल्लंघन के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए, जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन चालू रहता है, पचास रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
25. कंपनियों द्वारा अपराध-(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है वहां प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए उस कंपनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था, और साथ ही वह कंपनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दंडित किए जाने के भागी होंगे :
परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दंड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां उस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही की जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(क) कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम है ; और
(ख) फर्म के संबंध में, निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है ।
26. न्यायालय की अधिकारिता-महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट से अवर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
27. केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी-इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से ही संस्थित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।
28. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण-इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार या प्राधिकरण अथवा उसके द्वारा नियुक्त किसी समिति अथवा प्राधिकरण या ऐसी समिति के किसी सदस्य अथवा केन्द्रीय सरकार या प्राधिकरण के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी अथवा केन्द्रीय सरकार या प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
29. प्रत्यायोजन करने की शक्ति-केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य कोई शक्ति (जो धारा 32 के अधीन नियम बनाने की शक्ति नहीं है), ऐसे मामलों में और ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अधीन रहते हुए, जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, ऐसे अधिकारी या प्राधिकरण द्वारा भी, जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए प्रयुक्त की जा सकेगी ।
30. इस अधिनियम के प्रवर्तन का निलंबन-(1) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं, जिनके कारण यह आवश्यक हो गया है कि इस अधिनियम द्वारा अधिरोपित कुछ निर्बंधन, अधिरोपित नहीं किए जाने चाहिएं या वह ऐसा करना लोकहित में आवश्यक या समीचीन समझती है तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के सभी या किन्हीं उपबंधों का प्रवर्तन उस सीमा तक और अनिश्चित काल के लिए या ऐसी अवधि के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, निलंबित या शिथिल कर सकेगी ।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन इस अधिनियम के किसी उपबंध का प्रवर्तन अनिश्चित काल के लिए निलंबित या शिथिल कर दिया गया है वहां ऐसा निलंबन या शिथिलीकरण किसी भी समय, जब वह अधिनियम प्रवृत्त रहता है, केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, हटाया जा सकेगा ।
31. अन्य विधियों का लागू किया जाना वर्जित न होना-इस अधिनियम के उपबन्ध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबन्धों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके अल्पीकरण में ।
32. नियम बनाने की शक्ति-(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) धारा 4 की उपधारा (5) के अधीन सदस्यों की (जो धारा 4 की उपधारा (4) के खंड (ख) में निर्दिष्ट सदस्य से भिन्न है) पदावधि और सदस्यों में होने वाली रिक्तियों को भरने की रीति और ऐसे सदस्यों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ;
(ख) वे शक्तियां जिनका प्रयोग और वे कर्तव्य जिनका पालन धारा 6 के अधीन प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक के रूप में अध्यक्ष द्वारा किया जा सकेगा ;
(ग) वे शक्तियां जिनका प्रयोग धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण के सचिव द्वारा किया जा सकेगा और वे कर्तव्य जिनका पालन धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण के सचिव द्वारा किया जा सकेगा ;
(घ) वह नियंत्रण और वे निर्बन्धन जिनके अधीन रहते हुए धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन प्राधिकरण द्वारा अन्य अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त किए जा सकेंगे ;
(ङ) वह प्ररूप जिसमें और वह समय जिसके भीतर धारा 8 की उपधारा (3) के अधीन प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात संवर्धन परिषद् के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा विकल्प दिया जा सकेगा ;
(च) धारा 10 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन अनुसूचित उत्पादों के निर्यातकर्ताओं के रजिस्ट्रीकरण के लिए फीस का संदाय ;
(छ) स्वामियों से भिन्न वे व्यक्ति जिनसे अनुसूचित उत्पादों से संबंधित किसी विषय की बाबत आकड़ों का संग्रहण, धारा 10 की उपधारा (2) के खंड (ज) के अधीन किया जा सकेगा ;
(ज) वे अतिरिक्त विषय जिनकी बाबत प्राधिकरण धारा 10 की उपधारा (2) के खंड (ञ) के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में उपाय कर सकेगा ;
[(जक) धारा 10क के अधीन बौद्धिक संपदा अधिकारों के रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण के लिए उपाय ;]
(झ) धारा 13 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए और रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के लिए आवेदन का प्ररूप और रीति, ऐसे आवेदन के संबंध में संदेय फीस तथा रजिस्ट्रीकरण करने और उसे रद्द करने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया तथा ऐसे रजिस्ट्रीकरण को शासित करने वाली शर्तें ;
(ञ) वह समय जिस पर और वह रीति जिससे निर्यातकर्ता, धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण को विवरणियां देगा ;
(ट) वह प्ररूप जिसमें धारा 18 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण के लेखे रखे जाएंगे ;
(ठ) वह प्ररूप जिसमें और वह रीति जिससे और वह समय जिस पर प्राधिकरण धारा 21 की उपधारा (1) के अधीन केन्द्रीय सरकार को विवरणियां और कथन देगा ;
(ड) वह प्ररूप जिसमें और वह तारीख जिसके पूर्व प्राधिकरण धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन अपने क्रियाकलापों और कार्यक्रम की रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को देगा ;
(ढ) कोई अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या किया जाए ।
33. विनियम बनाने की शक्ति-(1) प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे सभी विषयों के लिए, जिनके लिए इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावशील करने के प्रयोजनों के लिए उपबंध करना आवश्यक या समीचीन है, ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) वे समय और स्थान जिन पर धारा 4 की उपधारा (8) के अधीन प्राधिकरण या उसकी किसी समिति के अधिवेशन किए जाएंगे और उनमें अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया तथा उन सदस्यों की संख्या जिनसे किसी अधिवेशन में गणपूर्ति होगी ;
(ख) धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति का ढंग, सेवा की शर्तें तथा वेतनमान और भत्ते ;
(ग) साधारणतया प्राधिकरण के कार्यकलापों का दक्ष संचालन ।
(3) केन्द्रीय सरकार अपने द्वारा मंजूर किए गए किसी विनियम को, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उपांतरित या विखंडित कर सकेगी और इस प्रकार उपांतरित या विखंडित विनियम, यथास्थिति, ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा किंतु ऐसे किसी उपांतरण या विखंडन का उस विनियम के अधीन उसके उपांतरण या विखंडन से पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
34. नियमों और विनियमों का संसद् के समक्ष रखा जाना-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम या विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
[35. विधिमान्यकरण-13 अक्तूबर, 2008 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाली और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2009 के प्रारंभ की तारीख से ठीक पूर्व समाप्त होने वाली अवधि के दौरान की गई या करने से लोप की गई सभी बातों और की गई या नहीं की गई सभी कार्रवाइयां अथवा किए या नहीं किए गए सभी उपाय, जहां तक वे कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2009 के अनुरूप हैं, कृषि और प्रसंस्कृत उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2009 द्वारा यथासंशोधित इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन इस प्रकार की गई या करने से लोप की गई या नहीं की गई या किए गए अथवा नहीं किए गए समझे जाएंगे, मानो ऐसे उपबंध उस समय प्रवृत्त रहे हों, जब उक्त अवधि के दौरान ऐसी बातें की गई थीं या करने से लोप की गई थीं और कार्रवाइयां की गई या नहीं की गई थीं या उपाय किए या नहीं किए गए थे ।]
[पहली अनुसूची]
[धारा 2 (झ) देखिए]
1. फल, वनस्पति और उनके उत्पाद ।
2. मांस और मांस उत्पाद ।
3. कुक्कुट और कुक्कुट उत्पाद ।
4. डेरी उत्पाद ।
5. मिष्ठानशाला, बिस्कुट और बेकरी उत्पाद ।
6. शहद, गुड़ और चीनी उत्पाद ।
7. कोको और उसके उत्पाद, सभी प्रकार के चाकलेट ।
8. एल्कोहाली और गैर-एल्कोहाली पेय ।
9. अनाज उत्पाद ।
10. । । ।, मूंगफली, पीनट और अखरोट ।
11. अचार, चटनी और पापड़ ।
12. ग्वार गोंद ।
13. पुष्प-कृषि और पुष्प-कृषि उत्पाद ।
14. जड़ी बूटी के और औषधीय पौधे ।
[15. चावल ।]
[16. लवण जल में हरी मिर्च ।]
[दूसरी अनुसूची
धारा 2(ञ) देखिए
बासमती चावल ।]
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