(1) क्रमशः 6[अनुच्छेद 268 और अनुच्छेद 269] में निर्दिष्ट शुल्कों और करों के सिवाय, संघ सूची में निर्दिष्ट सभी कर और शुल्क; अनुच्छेद 271 में निर्दिष्ट करों और शुल्कों पर अधिभार और संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए उद्गृहीत कोई उपकर भारत सरकार द्वारा उद्गृहीत और संगृहीत किए जाएँगे तथा खंड (2) में उपबंधित रीति से संघ और राज्यों के बीच वितरित किए जाएँगे।
1 संविधान (अठासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 द्वारा (प्रवर्तन की तारीख से) अंतःस्थापित।
2 संविधान (अस्सीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2000 की धारा 2 द्वारा खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित।
3 संविधान (छठा संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 3 द्वारा अंतःस्थापित।
4 संविधान (छियालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1982 की धारा 2 द्वारा ''माल का क्रय या विक्रय'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
5 संविधान (अस्सीवाँ संशोधन) की धारा 3 द्वारा (1-4-1996 से) अनुच्छेद 270 के स्थान पर प्रतिस्थापित।
6 संविधान (अठासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 की धारा 3 के प्रवर्तित होने पर ''अनुच्छेद 268 और अनुच्छेद 269'' शब्दों के स्थान पर ''अनुच्छेद 268, अनुच्छेद 268क और अनुच्छेद 269'' प्रतिस्थापित किए जाएँगे।
(2) किसी वित्तीय वर्ष में किसी ऐसे कर या शुल्क के शुद्ध आगमों का ऐसा प्रतिशत, जो विहित किया जाए, भारत की संचित निधि का भाग नहीं होगा, किन्तु उन राज्यों को सौंप दिया जाएगा जिनके भीतर वह कर या शुल्क उस वर्ष में उद्ग्रहणीय है और ऐसी रीति से और ऐसे समय से, जो खंड (3) में उपबंधित रीति से विहित किया जाए, उन राज्यों के बीच वितरित किया जाएगा।
(3) इस अनुच्छेद में, ''विहित'' से अभिप्रेत है--
(i) जब तक वित्त आयोग का गठन नहीं किया जाता है तब तक राष्ट्रपति द्वारा आदेश द्वारा विहित; और
(ii) वित्त आयोग का गठन किए जाने के पश्चात् वित्त आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के पश्चात् राष्ट्रपति द्वारा आदेश द्वारा विहित।

