अपराधों का प्रसंज्ञान, NI Act, Section 142 ( NI Act, Section 142. Cognizance of offences )
अपराधों का प्रसंज्ञान -- दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी -
(क) धारा 138 के अधीन किसी अपराध के लिए, कोई भी न्यायालय चेक के अधीन राशि प्राप्त करने वाले अथवा सामान्य अनुक्रम में चेक के धारक के लिखित परिवाद के सिवाय, प्रसंज्ञान नहीं लेगा; ।
(ख) ऐसा परिवाद धारा 138 के परन्तुक के खण्ड (ग) के अधीन वाद हेतुक उत्पन्न होने की तिथि से एक माह के अंदर पेश कर दिया जाना चाहिए:
परन्तु न्यायालय के द्वारा वर्णित अवधि के पश्चात् परिवाद का प्रसंज्ञान लिया जा सकता है, यदि परिवादी न्यायालय को सन्तुष्ट करता है, कि ऐसे अवधि के दौरान उसके पास परिवाद पेश नहीं करने के लिए पर्याप्त कारण था ।
(ग) महानगर मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट से निम्न पंक्ति के न्यायालय द्वारा धारा 138 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं किया जायेगा ।
(2) धारा 138 के अधीन दंडनीय अपराध की जांच और उसका विचारण, केवल ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा, जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर
(क) यदि चेक किसी खाते के माध्यम से संग्रहण के लिए परिदत्त किया जाता है तो, बैंक की शाखा जहां पर, यथास्थिति, सम्यक् अनुक्रम में, पाने वाला या धारक खाता बनाए रखता है, स्थित है; या
(ख) चदि चेक, सम्यक् अनुक्रम में, पाने वाले या धारक द्वारा, संदाय के लिए खाते के माध्यम से अन्यथा प्रस्तुत किया जाता है, उपरवाल की बैंक की शाखा, जहां पर लेखीवाल खाता बनाए रखता है, स्थित है ।