भारतीय दंड संहिता की धारा 475 के अनुसार, जो कोई किसी पदार्थ के ऊपर, या उसके उपादान में, किसी ऐसी अभिलक्षणा या चिह्न की, जिसे इस संहिता की धारा 467 में वर्णित किसी दस्तावेज के अधिप्रमाणीकरण के प्रयोजन के लिए, उपयोग में लाया जाता हो, कूटकॄति यह आशय रखते हुए बनाएगा कि ऐसी अभिलक्षणा या ऐसे चिह्न की, ऐसे पदार्थ पर उस समय कूटरचित की जा रही या उसके पश्चात् कूटरचित की जाने वाली किसी दस्तावेज को अधिप्रमाणीकॄत का आभास प्रदान करने के प्रयोजन से उपयोग में लाया जाएगा या जो ऐसे आशय से कोई ऐसा पदार्थ अपने कब्जे में रखेगा, जिस पर या जिसके उपादान में ऐसी अभिलक्षणा को या ऐसे चिह्न की कूटकॄति बनाई गई हो, वह 2[आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
| अपराध | सजा | संज्ञेय | जमानत | विचारणीय |
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| भारतीय दंड संहिता की धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों को प्रमाणित करने या नकली चिह्नित सामग्री रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण या निशान की जालसाजी करना | आजीवन कारावास या 7 साल + जुर्माना | गैर - संज्ञेय | जमानतीय | प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट |

