Wednesday, 22, Apr, 2026
 
 
 
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निरसन और व्यावृत्तियाँ, CrPC, Section 484 ( CrPC Section 484. Repeal and savings )


 

निरसन और व्यावृत्तियाँ-(1) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) इसके द्वारा निरसित की जाती है।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी यह है कि--

(क) यदि उस तारीख के जिसको यह संहिता प्रवृत्त हो, ठीक पूर्व कोई अपील, आवेदन, विचारण, जांच या अन्वेषण लंबित हो तो ऐसी अपील, आवेदन, विचारण, जांच या अन्वेषण को ऐसे प्रारंभ के ठीक पूर्व यथाप्रवृत्त दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 (1898 का 5) के (जिसे इसमें इसके पश्चात् पुरानी संहिता कहा गया है) उपबंधों के अनुसार, यथास्थिति, ऐसे निपटाया जाएगा, चालू रखा जाएगा या किया जाएगा  मानो यह संहिता प्रवृत्त न हुई हो : 

परन्तु यह कि पुरानी संहिता के अध्याय 18 के अधीन की गई प्रत्येक जांच, जो इस संहिता के प्रारंभ पर लंबित है, इस संहिता के उपबंधों के अनुसार की और निपटायी जाएगी;

(ख)  पुरानी संहिता के अधीन प्रकाशित सभी अधिसूचनाएँ, जारी की गई सभी उद्घोषणाएँ, प्रदत्त सभी शक्तियाँ, विहित सभी प्ररूप, परिनिश्चित सभी स्थानीय अधिकारिताएँ, दिए गए सभी दण्डादेश, किए गए सभी आदेश, नियम और ऐसी नियुक्तियाँ जो विशेष मजिस्ट्रेटों के रूप में नियुक्तियाँ नहीं हैं और जो इस संहिता के प्रारंभ के तुरन्त पूर्व प्रवर्तन में हैं, क्रमशः इस संहिता के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन प्रकाशित अधिसूचनाएँ, जारी की गई उद्घोषणाएँ, प्रदत्त शक्तियाँ, विहित प्ररूप, परिनिश्चित स्थानीय अधिकारिताएँ, दिए गए दण्डादेश और किए गए आदेश, नियम और नियुक्तियाँ समझी जाएंगी;

(ग) पुरानी संहिता के अधीन दी गई किसी ऐसी मंजूरी या सम्मति के बारे में, जिसके अनुसरण में उस संहिता के अधीन कोई कार्यवाही प्रारंभ न की गई हो, यह समझा जाएगा कि वह इस संहिता के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन दी गई है और ऐसी मंजूरी या सम्मति के अनुसरण में इस संहिता के अधीन कार्यवाहियाँ की जा सकेंगी ;

(घ) पुरानी संहिता के उपबंधों का संविधान के अनुच्छेद 363 के अर्थ के अन्तर्गत किसी शासक के विरुद्ध प्रत्येक अभियोजन की बाबत लागू होना चालू रहेगा।

(3) जहाँ पुरानी संहिता के अधीन किसी आवेदन या अन्य कार्यवाही के लिए विहित अवधि इस संहिता के प्रारंभ पर या उसके पूर्व समाप्त हो गई हो, वहाँ इस संहिता की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह इस संहिता के अधीन ऐसे आवेदन के किए जाने या कार्यवाही के प्रारंभ किए जाने के लिए केवल इस कारण समर्थ करती है कि उसके लिए इस संहिता द्वारा दीर्घतर अवधि विहित की गई है या इस संहिता में समय बढ़ाने के लिए उपबंध किया गया है।

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