वे अनियमितताएँ जो कार्यवाही को दूषित करती हैं-यदि कोई मजिस्ट्रेट, जो निम्नलिखित बातों में से कोई बात विधि द्वारा इस निमित्त सशक्त न होते हुए, करता है तो उसकी कार्यवाही शून्य होगी, अर्थात्--
(क) संपत्ति को धारा 83 के अधीन कुर्क करना और उसका विक्रय;
(ख) किसी डाक या तार प्राधिकारी की अभिरक्षा में की किसी दस्तावेज, पार्सल या अन्य चीज के लिए तलाशी वारण्ट जारी करना; परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति की मांग करनाः
(घ) सदाचार के लिए प्रतिभूति की मांग करना;
(ड.) सदाचारी बने रहने के लिए विधिपूर्वक आबद्ध व्यक्ति को उन्मोचित करना;
(च) परिशांति कायम रखने के बंधपत्र को रद्द करना;
(छ) भरणपोषण के लिए आदेश देना;
(ज) स्थानीय न्यूसेन्स के बारे में धारा 133 के अधीन आदेश देना;
(झ) लोक न्यूसेन्स की पुनरावृत्ति या उसे चालू रखने का धारा 143 के अधीन प्रतिषेध करना;
(ब) अध्याय 10 के भाग ग या भाग घ के अधीन आदेश देना;
(ट) किसी अपराध की धारा 190 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) के अधीन संज्ञान करना;
(ठ) किसी अपराधी का विचारण करना;
(ड) किसी अपराधी का संक्षेपतः विचारण करना;
(ढ) किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित कार्यवाही पर धारा 325 के अधीन दण्डादेश पारित करना;
(ण) अपील का विनिश्चय करना;
(त) कार्यवाही को धारा 397 के अधीन मंगाना; अथवा
(थ) धारा 446 के अधीन पारित आदेश का पुनरीक्षण करना।

