कुछ मामलों में राज्य सरकार का केन्द्रीय सरकार से परामर्श करने के पश्चात् कार्य करना-(1) किसी दण्डादेश का परिहार करने या उसके लघुकरण के बारे में धारा 432 और 433 द्वारा राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियों का राज्य सरकार द्वारा प्रयोग उस दशा में केन्द्रीय सरकार से परामर्श किए बिना नहीं किया जाएगा जब दण्डादेश किसी ऐसे अपराध के लिए है--
(क) जिसका अन्वेषण दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 (1946 का 25) के अधीन गठित दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन द्वारा या इस संहिता से भिन्न किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अपराध का अन्वेषण करने के लिए सशक्त किसी अन्य अभिकरण द्वारा किया गया है, अथवा
(ख) जिसमें केन्द्रीय सरकार की किसी संपत्ति का दुर्विनियोग या नाश या नुकसान अन्तर्ग्रस्त है, अथवा
(ग) जो केन्द्रीय सरकार की सेवा में किसी व्यक्ति द्वारा तब किया गया है जब वह अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन, में कार्य कर रहा था या उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यत था।
(2) जिस व्यक्ति को ऐसे अपराधों के लिए दोषसिद्ध किया गया है जिनमें से कुछ उन विषयों से संबंधित हैं, जिन पर संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है और जिसे पृथक्-पृथक अवधि के कारावास का, जो साथसाथ भोगी जानी है, दण्डादेश दिया गया है, उसके संबंध में दण्डादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण का राज्य सरकार द्वारा पारित कोई आदेश प्रभावी तभी होगा जब ऐसे विषयों के बारे में जिन पर संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, उस व्यक्ति द्वारा किए गए अपराधों के संबंध में ऐसे दण्डादेशों के, यथास्थिति, परिहार, निलंबन या लघुकरण का आदेश केन्द्रीय सरकार द्वारा भी कर दिया गया है।

