भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के अनुसार,
जो भी व्यक्ति (धारा 334 में दिए गए मामलों के सिवा) जानबूझ कर किसी को स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या एक हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।
लागू अपराध
जानबूझ कर स्वेच्छा से किसी को चोट पहुँचाना
सजा - 1 वर्ष कारावास या एक हजार रुपए जुर्माना या दोनों
यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायाधीश द्वारा विचारणीय है।
| अपराध | सजा | संज्ञेय | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| स्वेच्छा से चोट के कारण | 1 वर्ष या जुर्माना या दोनों | गैर - संज्ञेय | गैर जमानतीय | कोई भी मजिस्ट्रेट |

