जहां निरुद्ध पागल छोड़े जाने के योग्य घोषित कर दिया जाता है वहां प्रक्रिया-(1) यदि ऐसा व्यक्ति धारा 330 की उपधारा (2) या धारा 335 के उपबंधों के अधीन निरुद्ध है और ऐसा महानिरीक्षक या ऐसे परिदर्शक प्रमाणित करते हैं कि उसके या उनके विचार में वह अपने को या किसी अन्य व्यक्ति को क्षति पहुंचाने के खतरे के बिना छोड़ा जा सकता है तो राज्य सरकार तब उसके छोड़े जाने का या अभिरक्षा में निरुद्ध रखे जाने का या, यदि वह पहले ही लोक पागलखाने नहीं भेज दिया गया है तो ऐसे पागलखाने को अन्तरित किए जाने का आदेश दे सकती है और यदि वह उसे पागलखाने को अन्तरित करने का आदेश देती है तो वह एक न्यायिक और दो चिकित्सक अधिकारियों का एक आयोग नियुक्त कर सकती है ।
(2) ऐसा आयोग ऐसा साक्ष्य लेकर, जो आवश्यक हो, ऐसे व्यक्ति के चित्त की दशा की यथारीति जांच करेगा और राज्य सरकार को रिपोर्ट देगा, जो उसके छोड़े जाने या निरुद्ध रखे जाने का जैसा वह ठीक समझे, आदेश दे सकती है ।

