मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट-(1) कोई दस्तावेज, जिसका किसी व्यक्ति या सम्पत्ति के संबंध में किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट की स्वहस्ताक्षरित शिनाख्त रिपोर्ट होना तात्पर्यित है, इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाया जा सकेगा, यद्यपि ऐसे मजिस्ट्रेट को साक्षी के तौर पर नहीं बुलाया गया है :
परन्तु जहां ऐसी रिपोर्ट में ऐसे किसी संदिग्ध व्यक्ति या साक्षी का विवरण है, जिसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की, यथास्थिति, धारा 21, धारा 32, धारा 33, धारा 155 या धारा 157 के उपबंध लागू होते हैं, वहां, ऐसा विवरण इस उपधारा के अधीन, उन धाराओं के उपबंधों के अनुसार के सिवाय, प्रयोग में नहीं लाया जाएगा ।
(2) न्यायालय, यदि वह ठीक समझता है और अभियोजन या अभियुक्त के आवेदन पर ऐसे मजिस्ट्रेट को समन कर सकेगा और उक्त रिपोर्ट की विषय-वस्तु के बारे में उसकी परीक्षा कर सकेगा और करेगा ।

