Wednesday, 29, Apr, 2026
 
 
 
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धारा 195 आईपीसी - आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि प्राप्त करने के आशय से झूठा साक्ष्य देना या गढ़ना , IPC Section 195 ( IPC Section 195. Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of offence punishable with imprisonment for life or imprisonment )


 

भारतीय दंड संहिता की धारा 195 के अनुसार, जो भी कोई इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि एतद्द्वारा किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए, जो भारत में तत्समय प्रवॄत्त विधि द्वारा मॄत्यु से दण्डनीय न हो किन्तु आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय हो, दोषसिद्ध कराने के लिए, मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा, वह वैसे ही दण्डित किया जाएगा जैसे वह व्यक्ति दण्डनीय होता जो उस अपराध के लिए दोषसिद्ध होता।
 
लागू अपराध
ऐसे अपराध जो आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय हो, का दोषसिद्ध कराने के लिए, झूठा साक्ष्य देना या गढ़ना।
सजा - अपराध अनुसार।
यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।       

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

अपराध सजा संज्ञेय जमानत विचारणीय
आजीवन कारावास के साथ या 7 साल या उससे ऊपर के कारावास के साथ दंडनीय अपराध की सजा पाने के इरादे से झूठे सबूत देना या गढ़ना किये गए अपराध के समान असंज्ञेय जमानती सत्र न्यायालय

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